गुरुवार, 26 नवंबर 2015

बलात्कार :जिहाद का हथियार

जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

"जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे "सूरा -अल फतह 48 :23 

"यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62 
"तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62 

यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है -

1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है 

"उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282 

"रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं"

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220 


2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है 

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .

बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139 

3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है 

"इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70 

"रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220 

"रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 

4 -माल के बदले बलात्कार 

"रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 . 

(नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

5 -बलात्कार का आदेश ' 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432 

6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार 

"आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288 

7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो 

"अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ "

बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 . 

अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये

.अधिक जानकारी के लिए यह अंगेजी ब्लॉग देखें

http://nakedmuhammad.blogspot.com/

(181/161)

शनिवार, 21 नवंबर 2015

जेहाद की आय का साधन

इस्लाम के कई देश इस समय आतंकवाद से प्रभावित हैं। यह भी सच है कि इनमें अधिकांशत: इस्लामी जेहाद के नाम पर फैलाया जाने वाला आतंकवाद है। यदि हम एक सच्चे मुसलमान की परिभाषा को समझना चाहें तो हम देखेंगे कि इस्लाम में जहां हत्या, बलात्कार, चोरी, झूठ, निंदा-चुगली आदि को इस्लाम में प्रतिबंधित या इन्हें ग़ैर इस्लामी बताया गया है वहीं शराब नोशी से लेकर शराब के उत्पादन अथवा कारोबार में शामिल होने तथा ऐसी किसी भी नशीली वस्तु के प्रयोग अथवा उसके उत्पादन या कारोबार में संलिप्त होने को भी गैर इस्लामी कृत्य करार दिया गया है। इस्लाम में इस प्रकार की वस्तुओं के सेवन तथा इस धंधे में शामिल होने को गुनाह भी करार दिया गया है। प्रश्न यह है कि क्या जेहाद के नाम पर दुनिया में आतंकवाद फैलाने वाले मुस्लिम परिवारों के आतंकी सदस्य इस वास्तविकता से परिचित हैं या नहीं?और यदि हैं तो वे उसपर कितना अमल करते हैं। वास्तव में इन स्वयंभू इस्लामी लड़ाकों के जेहन में किस कद्र सच्चा इस्लाम बसता है और यह आतंकी इस्लामी शिक्षाओं पर कितना अमल करते हैं तथा कितना समर्पण रखते हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले दिनों एक प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप के एक खोजी पत्रकार द्वारा जेहाद के नाम पर अपना सब कुछ कुर्बान कर देने का जबा रखने वाले एक आतंकवादी से गुप्त रूप से मुलांकात कर उसका साक्षात्कार किया गया। अमजद बट्ट नामक इस तीस वर्षीय पंजाबी युवक के कंधे पर जहां ए के 47 लटकी हुई थी वहीं उसकी कमर में एक रिवाल्वर भी लगी नार आ रही थी। उसने अपना परिचय देते हुए यह बताया कि पहले तो वह स्वयं अफीम, स्मैक, हेरोइन जैसे तमाम नशे का आदी था और बाद में इसी कारोबार में शामिल हो गया। उसने बताया कि नशीले कारोबार में शामिल होने के बाद आम लोग उसे गुंडा कहने लगे। बट्ट ने यह भी स्वीकार किया उसे न तो नमाज अदा करनी आती है न ही कुरान शरींफ पढ़ना। और इसके अतिरिक्त भी किसी अन्य इस्लामी शिक्षा का उसे कोई ज्ञान नहीं है। परंतु इसके बावजूद अमजद बट्ट का हौसला इतना बुलंद है कि वह इस्लाम के नाम पर किसी की जान लेने या अपनी जान देने में कोई परेशानी महसूस नहीं करता। पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, पाक अधिकृत कश्मीर तथा पाक-अंफंगान सीमांत क्षेत्र एवं फाटा का इलाक़ा ऐसे लड़ाकुओं से भरा पड़ा है जो इस्लामी शिक्षाओं को जानें या न जानें, और उनपर अमल करें या न क रें परंतु इस्लाम के नाम पर मरना और मारना उन्हें बख़ूबी आता है। आतंकी अमजद बट्ट के अनुसार जब उसने नशीले कारोबार के रास्ते पर चलते हुए अपने आप को जुर्म की काली दुनिया में धकेल दिया उसके बाद उसके संबंध जेहाद के नाम पर आतंक फैलाने वाले आतंकी संगठनों से भी बन गए।
यहां एक बार फिर यह काबिले जिक्र है कि जेहादी आतंकवाद की जड़ें वहीं हैं जिनका जिक्र बार-बार होता आ रहा है और इतिहास में यह घटना एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। अर्थात् सोवियत संघ की घुसपैठ के विरुध्द जब अफगानी लड़ाकुओं ने स्वयं को तैयार किया उस समय इन लड़ाकुओं ने जिन्हें तालिबानी लड़ाकों के नाम से जाना गया,सोवियत संघ के विरुद्ध खुदा की राह मे जेहाद घोषित किया। इस कथित जेहादी युद्ध में जहां अशिक्षित अंफंगानी मुसलमान सोवियत संघ के विरुद्ध एकजुट हुए वहीं इसी दौरान अमेरिका ने भी सोवियत संघ के विरुद्ध तालिबानों को न केवल सशस्त्र सहायता दी तथा अफगानिस्तान में इन लड़ाकुओं के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में भी उनकी पूरी मदद की बल्कि उन्हें नैतिक समर्थन देकर उनकी हौसला अफजाई भी की। इनमें से कई ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त तो ारूर हो चुके हैं परंतु इनमें प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके तमाम आतंकी अभी भी मानवता के लिए सिरदर्द बने घूम रहे हैं। अमजद बट्ट ने भी एक ऐसे ही प्रशिक्षण केंद्र से जेहादी पाठ पढ़ा तथा हथियार चलाने की ट्रेनिंगा ली। उसके अनुसार जब वह प्रशिक्षण प्राप्त कर हथियार लेकर अपने गांव लौटा तो कल तक अपराधी व गुंडा नजर आने वाला व्यक्ति अब उसके परिवार, ख़ानदान तथा गांव वालों को ख़ुदा की राह में मर मिटने का हौसला रखने वाला एक समर्पित जेहादी मुसलमान नार आने लगा। उसे देखकर तथा उससे प्रेरित होकर उसी के अपने ख़ानदान के 50 से अधिक युवक एक ही बार में जेहादी मिशन में इसलिए शरीक हो गए कि कहीं अमजद बट्ट अल्लाह की राह में जेहाद करने वालों में आगे न निकल जाए।
आगे चलकर यही लड़ाके किसी न किसी आतंकी संगठन जैसे लश्करे तैयबा,जैशे मोहम्मद, हरकत-उल-अंसार अथवा लश्करे झांगवी जैसे आतंकी संगठनों से रिश्ता स्थापित कर उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों पर काम करने लग जाते हैं। इन सभी संगठनों का गठन भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर किया गया रहा हो। परंतु यह सभी सामूहिक रूप से मानवता को नुंकसान पहुंचाने वाले ग़ैर इस्लामी काम अंजाम देने में लगे रहते हैं। उदाहरण के तौर पर लश्करे झांगवी का गठन पाकिस्तान में सर्वप्रथम शिया विरोधी आतंकवादी कार्रवाईयां अंजाम देने हेतु किया गया था। इस संगठन पर शिया समुदाय को निशाना बनाकर सैकड़ों आतंकी हमले किए गए। उसमें दर्जनों हमले ऐसे भी शामिल हैं जो इन के द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए मुसलमानों पर या इमामबाड़ों व मोहर्रम के जुलूस आदि का निशाना बनाकर किए गए। अब यही संगठन अपने आपको इतना सुदृढ़ आतंकी संगठन समझने लगा है कि इसने पाकिस्तान में अपने हितों को नुंकसान पहुंचाने वालों को भी निशाना बनाना शुरु कर दिया है। इसके सदस्य पाकिस्तान में सेना विरोधी आतंकी कार्रवाईयों में भी पकड़े जा चुके हैं।
इसी प्रकार लश्करे तैयबा जिसका गठन कश्मीर को स्वतंत्रता दिलाने के उद्देश्य से किया गया था इसने भी अपने निर्धारित लक्ष्य से अलग काम करने शुरु कर दिए। इस संगठन पर भी जहां भारत में तमाम निहत्थे बेगुनाहों की हत्याएं करवाने का आरोप है वहीं इस संगठन पर पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत जनरल की हत्या का भी आरोप है। मानवता के विरुध्द संगठित रूप से अपराधों को अंजाम देने वाले ऐसे संगठन यादातर अपने साथ गरीब व निचले तबंके के अशिक्षित युवाओं को यह कहकर जोड़ पाने में सफल हो जाते हैं कि यहां उन्हें दुनिया की सारी चीजें तो मिलेंगी ही साथ ही उनके लिए अल्लाह जन्नत के रास्ते भी खोल देगा। और इसी लालच में एक अनपढ़, बेराजगार और मोटी अक्ल रखने वाला मुसलमान नवयुवक अपने आपको जेहादी आतंक फैलाने वाले संगठनों से जोड़ देता है। इस समय पाकिस्तान में अधिकांश आतंकी संगठन जो भले ही अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर गठित किए गए थे परंतु अब लगभग यह सभी आतंकी ग्रुप अमेरिका, भारत तथा इनके हितों को निशाना बनाने के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।
पाकिस्तान की ही तरह अंफंगानिस्तान में भी इस्लामी जेहाद का परचम जिन तथाकथित इस्लामी जेहादियों के हाथों में है उन की भी वास्तविक इस्लामी हंकींकत इस्लामी शिक्षाओं से कोसों दूर है। तालिबानी मुहिम के नाम से प्रसिद्ध इस विचारधारा में संलिप्त लड़ाकुओं की आय का साधन अंफगानिस्तान में होने वाली अंफीम की खेती है। यह भी दुनिया का सबसे ख़तरनाक नशीला व्यापार है। एक अनुमान के अनुसार विश्व के कुल अंफीम उत्पादन का 93 प्रतिशत अफीम उत्पादन केवल अंफंगानिस्तान में होता है। यहां लगभग डेढ़ हाार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इसकी घनी पैदावार होती है। सन्2007 के आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष वहां 64 बिलियन डॉलर की आय अफीम के धंधे से हुई थी। इस बड़ी रक़म को जहां लगभग 2 लाख अंफीम उत्पादक परिवारों में बांटा गया वहीं इसे तालिबानों के जिला प्रमुखों, घुसपैठिए लड़ाकों, जेहादी युद्ध सेनापतियों तथा नशाले धंधे के कारोबार में जुटे सरगनाओं के बीच भी बांटा गया। उस समय अंफीम का उत्पादन लगभग 8200 मीट्रिक टन हुआ था। यह उत्पादन पूरे विश्व की अफीम की अनुमानित खपत का 2 गुणा था।
ड्रग कारोबार का यह उद्योग केवल अफ़ीम तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसी अफ़ीम से विशेष प्रक्रिया के पश्चात 12 प्रतिशत मारंफिन प्राप्त होती है तथा हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ का भी स्त्रोत यही अफ़ीम है। तालिबानी लड़ाकों की रोजी-रोटी, हथियारों की ख़रीद-फरोख्त तथा उनके परिवारों के पालन पोषण का मुख्य साधन ही अफ़ीम उत्पादन है। एक ओर जहां ईरान जैसे देश में ऐसे कारोबार से जुड़े लोगों को मौत की साज तक दे दी जाती है वहीं अपने को मुसलमान, इस्लामी, जेहादी आदि कहने वाले यह तालिबानी लडाके इसी गैर इस्लामी धंधे की कमाई को ही अपनी आय का मुख्य साधन समझते हैं। यही तालिबानी हैं जोकि औरतों को सार्वजनिक रूप से मारने पीटने तथा अपमानित करने जैसा गैर इस्लामी काम प्राय:अंजाम देते रहते हैं। स्कूल तथा शिक्षा के भी यह प्रबल विरोधी हैं। निहत्थों की जान लेना तो गोया इनकी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो चुका है। ऐसे में क्या यह सवाल उठाना जाया नहीं है कि उपरोक्त सभी गैर इस्लामी कामों को अंजाम देने वालों को यह अधिकार किसने और कैसे दिया कि वे धर्म, इस्लाम और जेहाद जैसे शब्दों को अपने जैसे अधार्मिक प्रवृति वालों के साथ जोड़ सकें। क्या यह इस बात का पुख्ता सुबूत नहीं है कि इस्लाम आज गैर मुस्लिमों के द्वारा नहीं बल्कि स्वयं को जेहादी व तालिबानी कहने वाले ऐसे ही आतंकी मुसलमानों के हाथों बदनाम हो रहा है जिन्हें वास्तव में स्वयं को मुसलमान कहलाने का हंक ही नहीं है परंतु इस्लाम धर्म के दुर्भाग्यवश यही स्वयंभू रूप से इस्लामी जेहादी लड़ाके बन बैठे हैं।

यही है जेहाद की असली हकीकत.

(294)


गुरुवार, 19 नवंबर 2015

कुत्ता भी पूज्यनीय प्राणी है !!

लोग  इस  लेख  का  शीर्षक  पढ़  कर मजाक  समझेंगे   ,  क्योंकि अक्सर  जब लोग  किसी  को   गाली  देना   चाहते  हैं  ,अपमानित  करना   चाहते  हैं  ,तो उसे  तिरस्कार  से  " कुत्ता "  या  "  कुत्ते  की औलाद "    कह देते हैं . लेकिन  ऐसे  अज्ञानी  नहीं   जानते कि   हरेक  प्राणी  में  ईश्वर  का  अंश   है   , सभी आदर  के  योग्य   हैं  , सभी  पवित्र   हैं  ,इसी  लिए  गीता   में  स्पष्ट  रूप    में  बताया   गया  है  ,
"विद्या  विनय  सम्पन्ने  ब्राह्मणे  गवि हस्तिनि ,शनि  चैव श्वपाके  च पण्डिताः  समदर्शिनि :-अध्य्याय 5 श्लोक  18 

अर्थ -जो   लोग विद्यावान   और विनयशील   लोग होते  हैं   वह  ब्राह्मण  , गाय  , हाथी  , कुत्ता ,चांडाल  और  पंडित को   सामान  दृष्टि  से  देखते  हैं  .

कुत्ता  शब्द   को  गाली  समझने  वालों   को  यह  जानकर  आश्चर्य  होगा  की  भारत   में  कुत्ते  का ऐसा  मंदिर  भी  है  जिसमे   कुत्ते  के  साथ  राम  लक्ष्मण  , भरत  और  शत्रुघ्न  की  पूजा   होती  है  . इस  प्राचीन   मंदिर   का  नाम  है ,

 1-कुकुरदेव मंदिर

छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव में एक विशेष तरह का मंदिर है, यह मंदिर किसी देवी-देवता का नहीं बल्कि कुत्ते का है। मंदिर में एक कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है.मंदिर' राजनंदगांव के बालोद से छह किलोमीटर दूर मालीघोरी खपरी गांव में है।मुख्य  द्वार  पर  लिखा   है

ऐतिहासिक पुरातत्व श्री  कुकुर देउर मंदिर  सपरी 

चित्र  देखिये

http://4.bp.blogspot.com/-AiFVSvIzCaA/VUx3zY3G5vI/AAAAAAAAHwM/RVKSXLIb3QA/s1600/images%2B(1).jpg

2-मंदिर  का इतिहास 
इस मंदिर का निर्माण हालांकि फणी नागवंशी शासकों द्वारा 14वीं-15 वीं शताब्दी में कराया गया था। इस मंदिर के प्रांगण में स्पष्ट लिपियुक्त शिलालेख भी है, जिस पर बंजारों की बस्ती, चांद-सूरज और तारों की आकृति बनी हुई है। राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी रखी गई है। मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है। यह मंदिर भैरव स्मारक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के शिखर के चारों ओर दीवार पर नागों का अंकन किया गया है.मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है।
 कुत्ते की प्रतिमा (चित्र )

http://www.shreeayodhyajisss.com/wp-content/uploads/2015/06/kukur-dev-temple-5560622db831f_l.jpg

3- कुत्ते की वफादारी   की  कथा 

कुत्ते  का  उल्लेख   हमारे  धर्म  ग्रंथों   में भी मिलता    है  जैसे  वाल्मीकि  रामायण   के उत्तर   कांड प्रक्षिप्त सर्ग  2 श्लोक 2 से  40 तक  एक   कुत्ते  की  कथा   है  ,जिसे  भगवान   राम   ने  आशीर्वाद  दिया   था  , इसी  तरह   महाभारत  के  स्वर्गारोहण  पर्व    में  कुत्ते   को  धर्म  का  प्रतिक  बताया   गया   है   ,  जैसे  कुत्ता  अपने  स्वामी  के  पीछे  चलता  है  ,उसी  तरह मनुष्य   का धर्म  भी  उसके  साथ  चलता   है   , कुत्ते  की  स्वामीभक्ति  प्रसिद्ध   है  , इस  मंदिर  में  जिस  कुत्ते  की प्रतीमा  है  ,उसकी  भी  कथा   है


जनश्रुति के अनुसार, कभी यहां बंजारों की बस्ती थी। मालीघोरी नाम के बंजारे के पास एक पालतू कुत्ता था। अकाल पड़ने के कारण बंजारे को अपने प्रिय कुत्ते को मालगुजार के पास गिरवी रखना पड़ा। इसी बीच, मालगुजार के घर चोरी हो गई। कुत्ते ने चोरों को मालगुजार के घर से चोरी का माल समीप के तालाब में छुपाते देख लिया था। सुबह कुत्ता मालगुजार को चोरी का सामान छुपाए स्थान पर ले गया और मालगुजार को चोरी का सामान भी मिल गया।

कुत्ते की वफादारी से अवगत होते ही उसने सारा विवरण एक कागज में लिखकर उसके गले में बांध दिया और असली मालिक के पास जाने के लिए उसे मुक्त कर दिया। अपने कुत्ते को मालगुजार के घर से लौटकर आया देखकर बंजारे ने डंडे से पीट-पीटकर कुत्ते को मार डाला।

4-मंदिर में कुत्तों  की  पूजा 

कुत्ते के मरने के बाद उसके गले में बंधे पत्र को देखकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और बंजारे ने अपने प्रिय स्वामी भक्त कुत्ते की याद में मंदिर प्रांगण में ही कुकुर समाधि बनवा दी। बाद में किसी ने कुत्ते की मूर्ति भी स्थापित कर दी। आज भी यह स्थान कुकुरदेव मंदिर के नाम से विख्यात है। 'कुकुरदेव मंदिर' का बोर्ड देखकर कौतूहलवश भी लोग यहां आते हैं। उचित रखरखाव के अभाव में यह मंदिर हालांकि जर्जर हो गया है.फिर   भी  श्रद्धालु    कुत्ते   के  मंदिर  में  आते  हैं , और कुत्ते  कुतियों    की प्रतिमाओं   की  पूजा   करते  हैं .
कुत्तों की  पूजा(चित्र )



  http://4.bp.blogspot.com/-vEzO4oMhE0k/VUx5PzC61UI/AAAAAAAAHwo/tzCucbz2BTk/s400/images%2B(3).jpg

5-कुकुर महोत्सव

वैष्णव  संप्रदाय  के  लोग  भी  इस  मंदिर  में  कुत्तों   के लिए  कुकुरभोज   आयोजित  कराते  हैं   ,  कुछ  समय   पहले संत   वैष्णवपद  दास बालाजी  महाराज  ने एक    विशाल   कुकुर  भोज  कराया    था  ,  और संस्कृत  में  कुत्तों   की  स्तुति बनायी   थी ,
 कुकुरभोज (चित्र )


http://www.nitaisundar.com/site/DadaMosai%20-Kukur-Mahatsava.jpg

शनिवार, 14 नवंबर 2015

जन्नत का क्षेत्रफल और जनसंख्या !

विश्व   के  सभी  धर्म  आत्मा   को  अमर    मानते   हैं   , और   यह  भी   मानते हैं  कि  जीवन  भर   मनुष्य  जो भी  भले   बुरे  कर्म   करता  है   ,मृत्यु   के बाद  उसकी  आत्मा  को उन  कर्मों   के  फल  भोगना  पड़ते   है   ,  बुरे  लोग  नर्क   जाते हैं  , और  भले  लोग   स्वर्ग  में   जाते  हैं   , हिन्दू  जिसे  स्वर्ग   कहते हैं   उसे  ईसाई  पैरा  डाइस ,  ईरानी फ़िरदौस  और  इसलाम   में   जन्नत   कहा  गया   है  ,
कुरान  और  हदीसों   में मुसलमानों   को  जन्नत  में  मिलने  वाली  अय्याशी पूर्ण  सुविधाओं  का  ऐसा   अतिरंजित  वर्णन    दिया  गया   है   ,जिसके  प्रलोभन  में  आकर   शुभ   कर्म  करने  की  जगह  जिहादी   बन   जाते  हैं   ,  क्योंकि  हदीसों   में  जिहादियों  के  लिए  जन्नत  में  विशेष  और अतिरिक्त  सुविधाओं   का  प्रावधान     है  ,  इसी  जन्नत   के  लालच  में  आज  जिहादी  आतंकवादी   रोज   सैकड़ों   निर्दोष  लोगों  की  हत्याएं  कर  रहे   आत्मघाती  बम  बन  कर  कई  खुद  भी  मर  रहे  हैं  ,

 जन्नत   जैसी   किसी   जगह   के  अस्तित्व   के  बारे में  लोगों  के  वभिन्न    मत   हो  सकते   हैं  , हमें  इस  विवाद  में  नहीं  पड़ना  है  ,  हमें इस   बात  का    पता  करना  था   कि मुस्लमान   जिस  जन्नत   में  जाने   के   लिए  पूरी  दुनिया  को जहन्नम    बनाने  पर  आमादा   हैं  , आखिर   वह  जन्नत  कितनी   बड़ी  है  ?  उसका  आकार  कैसा   है ?  अर्थात   , आयताकार (Rectangle) ,  वर्गाकार(Square)   या  फिर   वृत्ताकार (Circular) .इत्यादि .  और   इसके  अलावा  उसकी  आबादी   कितनी  है ?


1-जन्नत  की जानकारी  कैसे मिली ? 

करीब    दो  सप्ताह  पूर्व  अमेरिका  स्थित     मेरी   पाठिका   बहिन रेणु  शर्मा    ने   फोन   से  बात के  दौरान  जन्नत  के बारे में    प्रश्न   किया   था   , उनको   संतोषजनक   ,    सप्रमाण   और  सटीक  उत्तर  देना   मेरा     दायित्व    था   ,  लेकिन हजाारों  हदीसों  में  ऐसी    हदीस   खोजना  जिसमे  जन्नत  के  आकार  क्षेत्र    का   उल्लेख   हो   ,  घास  के  ढेर  में  सुई  खोजने  जैसा  कठिन   था  ,  दो   सप्ताह   की छानबीन  के   बाद  आखिर      सफलता   मिल  गयी    ,   ईश्वर  के  अनुग्रह  से परिश्रम   सार्थक    हुआ   ,

क्योंकि   मुल्ले  मौलवी  ऐसी बातें   मुसलमानों   को  भी  नहीं  बताते   ,  वह  तो    जन्नत  में  मिलने   वाली   कुंवारी   हूरों    का  लालच    देकर   मुसलिम  युवकों  को  जिहादी   बनाने  में   लगे  रहते  हैं   , उन्हें  डर  है   कि सही   बात  खुल  जाने  से  कोई  भी  बुद्धिमान   जिहादी  नहीं   बनेगा !

3- हदीस की प्रमाणिकता 

अधिकांश    मौलवियों   की  आदत   है कि जब    हदीस   में  कोई  ऐसी  बात   निकाली  जाती   है   जिसके  खुल  जाने   इस्लाम   का  भंडा  फूट  जाने का  डर  होता हो  तो   मौलवी   झट  से  कह देते हैं   कि  यह   हदीस   झूठी   है   , लेकिन    हम   जिस  हदीस   का  प्रमाण   दे रहे हैं  , वह  सही  है   , हदीस  की  जिन   किताबों   को प्रमाण   माना   जाता  है  उन्को " अल क़ुतुब अल  सित्ता - الكتب الستة‎  "   कहा  जाता   है  ,  इसका अर्थ  6  प्रामाणिक   किताबें  ( Six Books )   है .इनमे  चौथे  नंबर    की  हदीस  की किताब   का  नाम   "  जामए  तिरमिजी  -  جامع الترمذي  "    है  . इस   किताब में  कुल  3956    हदीसे हैं .इनको  सन 982  इ ०  यानी 279  हिजरी में "अबू  ईसा मुहम्मद  बिन  ईसा अस्सलमी अल  जरीर अल  बूगी  अत्तिरमिजी -أبو عيسى محمد بن عيسى السلمي الضرير البوغي الترمذي‎  " ने  जमा   किया  था 'इसी  किताब  में  एक  हदीस  में  अरबी   में  जन्नत   के  बारे   में  जो भी  बताया  गया  है , उसके  अंगरेजी  में  दो  अर्थ  मिलते   है   ,  जिनमे  कुछ  शब्दों  के  अंतरहै   , लेकिन  दौनों  को  मिलाने से  अर्थ    बिलकुल  स्पष्ट    हो   जाता  है   , यहाँ  अंगरेजी  के  दौनों  अनुवाद    मूल  अरबी  और  हिंदी  अनुवाद   दे रहे  हैं

4-जन्नत   का   वर्णन 

A-मूल  अरबी

وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ مِنْ لُؤْلُؤٍ وَزَبَرْجَدٍ وَيَاقُوتٍ كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ ‏"‏ ‏ .‏  "

B-अंगरेजी  अर्थ .1"it shall have a tent of pearl, peridot, and corundum set up for him,(the size of which is) like that which is between Al-Jabiyyah and Sana'a

C-अंगरेजी  अर्थ  2 "which stands a dome decorated with pearls, aquamarine, and ruby, as wide as the distance from  to Al-Jabiyah [a Damascus suburb  to Sana'a [Yemen]"


"सईदुल  खुदरी  ने  कहा  की  रसूल   ने बताया   है  कि जन्नत   के  ऊपर  एक गुम्बद   है  , जो  मोतियों  , अकीक  और  नील मणि से  सुशोभित   है  , और  उसका  विस्तार अल  जाबिया    से सनआ    तक   है "

Al-Tirmidhi,-Book 38, Hadith 2760


English reference : Vol. 4, Book 12, Hadith 2562

5-हदीस का  विश्लेषण 

   इस  हदीस   में दिए  अरबी  शब्दों  और  वाक्यों   का  अर्थ  निकालने  पर  दो  बातें   पता  चलती   हैं

1.अरबी   में  कहा   है "तुसैब  लहु  कब्बः -  وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ  "यानी  उसके  ऊपर  एक  कब्बः  है . कब्बः  अर्थ    गोल  गुम्बद (Dome )   ,  या  गोल  तम्बू (Tent) होता  है   ,  अर्थात  जन्नत  गोलाकार   Circular  है  .  शायद  अल्लाह  चौकोर  काबा में  रह  कर  ऊब   गया  हो   इसलिए  गोलाकार  जन्नत    बनवा   ली  हो .
2.फिर  हदीस   में  अरबी में  आगे   कहा   है  "कमा  बैन अल जाबिया  इला   सनआ - كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ "जैसी  अल  जबिया से सनआ  के  बीच दूरी   है .

हदीस में   दिए  पहले  स्थान  नाम " अल  जाबिया - الْجَابِيَةِ " है  ,  जो  सीरिया की   राजधानी  "दमिश्क - دمشق‎ "   का एक उपनगर ( Town )  है .इसी  हदीस    में  दूसरे  स्थान    का  नाम   " सनआ  -  صَنْعَاءَ  "   बताया  गया   है   , यह  यमन   -    "    का  एक   प्रसिद्ध  शहर  है


6-जन्नत  का  क्षेत्रफल   कैसे  निकाला ?

चूँकि  इस  हदीस  के  अनुसार  जन्नत वृत्ताकार   है  ,   जिसका   फैलाव   अल जांबिया  से  लेकर सनआ  तक  है   , आज  के  हिसाब  से  इन  दौनों  के बीच  की  दूरी  2171 .19 Km   है  . गणित की  भाषा  में   इस  दुरी   को वृत्त का  व्यास (Diameter )   अरबी में " क़तर -   قطر       " कहेंगे .  किसी भी    वृत्ताकार   जगह    का  क्षेत्रफल  निकालने   के  लिए   उसकी  "   त्रिज्या ( Radius )    निकलना पड़ती   है   ,  त्रिज्या  को  अरबी   में "निस्फ़  क़तर -  نصف القطر "   कहते  हैं  यह  व्यास  की  आधी  होती  है . हिसाब  के  अनुसार    जन्नत   की त्रिज्या(Radius-1085.59  Km है   , इन तथ्यों  के  आधार  पर  गणना    करने  पर मुसलमानों   की  जन्नत    का

कुल क्षेत्रफल -Total Area-3700541.82 SQ Km अर्थात सैंतीस लाख  पांच  सौ इकतालीस . दशमलव आठ   दो वर्ग किलोमीटरहै .

7-दूसरा   उत्तर  
हो   सकता  है  कि   हर   बात   का  विरोध करने की  आदत   से  मजबूर  मुस्लिम  विद्वान  हमारी  गणना    और  जन्नत   को  वृत्ताकार    मानने   पर  आपत्ति  करें   और  दावा   करें   कि "अल  जबिया   से  सनाअ  "  की  दूरी  का तात्पर्य  जन्नत  की  लम्बाई (Length    और  चौड़ाई  (Width)   है      , अर्थात   जन्नत  वृत्ताकार    नहीं वर्गाकार ( Square)     है  , इसके  अनुसार  जन्नत   का  क्षेत्रफल -2171.19 X 2171.19 =471400 .01वर्ग किलो  मीटर    है .अर्थात सैंतालिस  लाख  चौदह   हजार  छियासठ  दशमलव   एक है  . 


जब   हमने    मित्रों   से   कहा   की  हम   जन्नत   का   आकार  क्षेत्रफल   पता   करने वाले   हैं    तो   कुछ   लोगों   ने कहा कि  जन्नत    की   कुल  जनसंख्या   भी   पता   करके   बताइये   ,  हमें  दो  ऐसी   हदीसें   मिलीं    जिनमे      जन्नत  आबादी   के    बारे   में  बताया   गया   है   ,  यह    भी  प्रामाणिक  हदीसें   है    ,

8-जन्नत   की  जनसंख्या 

1.पहली   हदीस

"रसूल   ने  कहा है  कि   अल्लाह    ने  मुझ   से  वादा   किया  है  ,  कि मेरी   उम्मत के  सत्तर   हजार  लोग (मुसलमान  )   जन्नत में  जाएंगे  ,  और उन  से (उनके  कर्मों का ) कोई  हिसाब   नहीं  लिया   जाएगा   "


"وَعَدَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ أَنْ يُدْخِلَ الْجَنَّةَ مِنْ أُمَّتِي سَبْعِينَ أَلْفًا بِغَيْرِ حِسَابٍ "

"my Lord has promised me that seventy thousand of my nation will enter Paradise without being brought to account. "


 Sunan Ibn Majah-Book 37, Hadith 4426


इस  हदीस   से  साफ़    पता चलता  है कि  जन्नत   की   क्षमता    केवल  सत्तर  हजार    लोगों  की   है   , अर्थात  जनसंख्या    स्थिर   है  ,  क्योंकि  जन्नत    में  जब  शादी    ही   नहीं  होगी    , तो  बच्चे     कहाँ   से  होंगे   ? और   जब  अल्लाह   ने सत्तर  हजार   की  सीमा   निर्धारित  कर  दी  है , तो  उस से अधिक   किसी  का  जन्नत  जाने   का   सवाल   ही   नहीं  उठता ?
 दूसरी   हदीस 

 इस  हदीस   में  जन्नत  के  सेवकों  और जिहादियों  को  इनाम   के  रूप   में  मिलने  वाली   औरतों    की  संख्या  दी  गयी   है   , हदीस   कहती   है

रसूल    ने बताया  कि  जन्नत   वासियों  को  छोटे  इनाम    में  अस्सी हजार  सेवक   और  हरेक   को  बहत्तर    औरतें  मिलेंगीं .


"أصغر مكافأة لأهل الجنة هي دار حيث هناك ثمانون ألف الخدم واثنين وسبعين زوجات"


The Prophet Muhammad saying: “The smallest reward for the people of Paradise is an abode where there are Eighty thousand servants and  seventy two wives "


Al-Tirmidhi, Vol. 4, Ch. 21, No. 2562

 नोट-   इस  हदीस   में  जिहादियों  को  सौगात   के  रूप   में  मिलने    वाली औरतों   को  पत्नियां   कहा  गया   है   ,  लेकिन  उन्हें  वेश्याएं   कहना  उचित  होगा  , क्योंकि   जिहादी  शादी   किये  बिना  उन   सहवास   करेंगे .                    


9- जनसंख्या का वर्गीकरण  और योग 

इन  दोनो  हदीसों  में  दिए  गए  तथ्यों   के  आधार पर  जन्नत   की वर्गीकृत   जनसंख्या   इस  प्रकार   है   ,

1. जिहादी - ( पुरष )-70000   (सत्तर   हजार )


2.सेवक -  (गिलमा ) -80000   (अस्सी  हजार)  (गिलमा  अवयस्क  लडके होते  हैं  जिनसे  जिहादी  अप्रक्रतिक कुकर्म   करेंगे )


3.हूरें -  (वेश्याएं)- 70000x  72=   5040000(  पचास  लाख  चालीस  हजार )

4-कुल जनसंख्या -5190000  (इक्यावन लाख नब्बे  हजार )



हमने  तो     मुसलमानों   की   जन्नत    का   क्षेत्रफल   और  जनसंख्या  सबके   सामने   प्रकट   कर  दी   है   ,  और  जो   लोग   इस     बात   को   झूठा    या   गलत    साबित   करने कोशिश    करेंगे    वह  पहले   इन  हदीसों   को  झूठा  साबित   करके  दिखाएँ   ,  जन्नत   नाम की  जैसी   कोई   जगह    है   या नहीं   हम   इस  विवाद   में  नहीं   पड़ते   ,  सभी   तथ्य   हदीसों   से   लिए   गए   हैं  ,


 बाक़ी  हमारे   प्रबुद्ध  पाठक  खुद  समझ   जायेंगे  , ऐसी   जन्नत   मुसलमानों   को   मुबारक   ,  हमारा  देश  जन्नत  से   बेहतर  है


करोड़ों मुसलमानों के निकाह अवैध हैं !

पाठकों   से  निवेदन  है   कि  इस  लेख  को  ध्यान   से  पढ़ें   , क्योंकि   यह  लेख सभी पाठकों  खासकर कानून   जानने  वालों   के  लिए अत्यंत उपयोगी   है  ,और  इस  लेख  का  विषय मुस्लिमों   में  प्रचलित अपनी  रिश्ते   की  बहिनों   के साथ  निकाह  करना ,  और इसके      बारे  कुरान आदेश    है  , यह   लेख  इसलिए   प्रासंगिक    है क्योंकि  इसी  सप्ताह  गुजरात   है हाई  कोर्ट   ने फैसला   दिया   है  कि   मुस्लिमों द्वारा  कुरान  की  गलत  व्याख्या   की   जाती  है .वास्तव    में  कुरान   में ऎसी  कई   आयतें मौजूद  है  ,जिनका  जाकिर   नायक   जैसे धूर्त  ऐसी व्याख्या  कर  देते  हैं ,जो  उस  आयत   के आशय   के विपरीत और भ्रामक   होती   है  ,जिस  से अरबी  से  अनभिज्ञ मुसलमान ऐसे   काम  कर  बैठते  हैं   , जो कुरान  के आदेश  के उलट  और रसूल  के  अधिकारों में  अतिक्रम  होता है .

अधिकांश मुस्लिम नहीं    जानते  हैं   कि कुरान   में एक  ऐसी  आयात  मौजूद   है   , मुल्ले   मौलवी  लोगों  को  उसका   जानबूझ  कर   सही  अर्थ   नहीं  बताते   , क्योंकि   सही   अर्थ  प्रकट  करने  से  लाखों  मुसलामानों  के  निकाह अवैध  हो    जायेंगे    , और  ऐसी   शादियों    से  पैदा  हुए बच्चे  नाजायज   संतान  माने   जायेंगे.

मुख्य   विषय पर  आने से  पहले  हमें अन्य   लोगों   में  रसूल  का  स्थान ( Status)   है   , यह   जानना     जरुरी      है ,    इसके  बारे   में यह  हदीस  बताती है।

1-रसूल का स्थान सर्वोपरि है !

"जाबिर बिन  अब्दुल्लाह   ने   कहा  कि रसूल  ने   कहा है   मैं   नबियों  का  " कायद  (  leader )यह शेखी   की   बात    नहीं   ,  मैं सभी  नबियों  पर  मुहर (seal ) यह शेखी  की   बात   नहीं    ,मैं   पहला  ऐसा सिफारिश  करने  वाला  हूँ   , जिसकी  सिफारिश  मंजूर   हो  जाएगी ,यह भी  शेखी  की   बात   नहीं  है ,"


رواه جابر بن عبد الله قال النبي (ص):أنا  قائد  من المرسلين، وهذا ليس التباهي، وأنا خاتم النبيين، وهذا ليس التباهي، وسأكون أول من يشفع ويتم قبول الشفاعة الأولى التي، وهذا ليس التباهي ".

 Narrated by Jabir ibn Abdullah
The Prophet (saws) said, "I am the leader (Qa'id) of the Messengers, and this is no boast; I am the Seal of the Prophets, and this is no boast; and I shall be the first to make intercession and the first whose intercession is accepted, and this is no boast.
."

Al-Tirmidhi Hadith 5764


2-औरतों के बारे में विशेषाधिकार 


"हे  नबी  हमने  तुम्हारे  लिए ( वह ) पत्नियां  हलाल  कर  दी  हैं   ,जिनके  मह्र  तुमने  दे  दिए  हैं  , और   वह  दासियाँ  जो  अल्लाह   ने " फ़ाय " के  रूपमे    नियानुसार  दी  हैं  , और   चाचा  की  बेटियां  , तुम्हारी  फुफियों  की  बेटियां  ,तुम्हारे  मामूँ  की  बेटियां   ,और  तुम्हारी   खालाओं  की  बेटियां  ,  जिन्होंने   तुम्हारे  साथ  हिजरत  की  है  , और  वह ईमान  वाली  स्त्री जो  अपने  आपको  नबी  के लिए " हिबा "   कर  दे  . और यदि  नबी  उस  से  विवाह  करना  चाहे, हे नबी  यह अधिकार  केवल  तुम्हारे  लिए   है   ,  दूसरे  ईमान  वालों    के  लिए  नहीं  है "  सूरा -अहजाब 33:50



يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالَاتِكَ اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ أَنْ يَسْتَنْكِحَهَا خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ 


O PROPHET! Behold, We have made lawful to thee thy wives unto whom thou hast paid their wages, as well as those whom thy right hand has come to possess from among the captives of war whom God has bestowed upon thee. And [We have made lawful to thee] the daughters of thy paternal uncles and aunts, and the daughters of thy maternal uncles and aunts, who have migrated with thee [to Yathrib]; and any believing woman who offers herself freely to the Prophet and whom the Prophet might be willing to wed: this  is  a privilege for thee, and not for other believers -  sura-ahzab 33:50

(this verse has   43 words)

3-आयत  का  विश्लेषण 

इस  आयात में अरबी  के कुल 43  शब्दों  का  प्रयोग  किया  गया  है   , सुविधा  के  लिए  उनके  नंबर  दिए   जा  रहे  हैं , ताकि   सही अर्थ समझने  में  आसानी  हो  ,
1.इस  आयात  के  शब्द  संख्या  3 ,4  और 5  में अरबी  में कहा  है "इन्ना अहललना  लक (أَحْلَلْنَا لَكَ ) अर्थात  हमने  तुझ पर वैध किया (We have made lawful to thee ) . इस  से स्पष्ट  होता  है  ,कि कुरान  का यह  आदेश  केवल  नबी   के  लिए है  , मुसलमानों  के लिए नहीं ,

2.इसके  बाद  शब्द  संख्या 6 ,7 ,8  और  9  में  अरबी  कहा   है  , "अजवाजक  अल्लती अतयत उजूरहुन्न (أَزْوَاجَكَ اللَّاتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ)  अर्थात  वह पत्नियां  जिनका  मूल्य ( मेहर )  चूका  दिया  हो  ( whom thou hast paid their  wage ).अरबी   में "उजूर -  أُجُورَ  " का  अर्थ   मजदूरी का  वेतन(wage ) होता  है 'दूसरे  शब्दों   में  पत्नियों  को  शादी  के समय  दिए  जाने  वाला  मेहर उनकी योनि  की  कीमत  मानी   जाती  है   , और यदि पत्नी  को  मेहर  नहीं  दिया  गया  हो तो शादी अवैध  हो  जाती  है. इस लिए इस आयत में  नबी  की उन्हीं  पत्नियों  को  हलाल   माना  है   मुहम्मद  ने   जिनकी   मजदूरी  यानि  मेहर  चूका दिया   हो.
इसके  बाद  वैध  पत्नियों  के अतिरिक्त    नबी  को  जिन  स्त्रियों  से शादी  करने को हलाल यानि  वैध किया  गया  वह बताया गया है ,


3.इसके  बाद नबी   को  अपनी   वैध पत्नियों  के आलावा  जिन  स्त्रियों से शादी  को  हलाल किया  गया उन्हें शब्द संख्या 11 और 12  में  अरबी में "मलकत यमीनुक ( مَلَكَتْ يَمِينُكَ  ) कहा गया  है  ,चालाक  मुल्ले  अंगरेजी  में  इसका  अर्थ  (possess from among the captives of war)  यानी  युद्ध  में  पकड़ी गयी रखैलें   जिन्हे  कुरान  के  हिंदी  अनुवाद  में "लौंडियाँ "   कहा   गया है , ज़ाकिर  नायक  इसका  अर्थ "right hand posesed "  करता है  और ऐसी  औरतों  को  माले " गनीमत  - غنيمة"यानी   युद्ध  में लूटा  हुआ माल  बताता   है  , यही   कारण  है  कि  मुस्लिम शासक  युद्ध  में धन  के  साथ  औरतें  भी  लूट  लेते  थे , लेकिन ऐसे  मुल्ले  इस  आयत  के 14  वें  शब्द "अफाअ ( أَفَاءَ)     को दबा  देते  है   , यह शब्द  अरबी  के " फाअ (فاء )  से  बना  है  , फाअ   युद्ध  किये बिना ही  अल्लाह की कृपा  से  मिलने  वाली वास्तु   को  कहा  जाता  है  , यह शब्द गनीमत  के  बिल्कुल  विपरीत  है  ,

  4.  इसके बाद  शब्द  संख्या 17  से  लेकर 38  तक  नबी   को  रिश्ते  की  बहिनों  और हिजरत  करने  वाली  स्त्रिओं   से शादी हलाल  कर  दी , इनका हिंदी  अनुवाद  सरल  शब्दों  में  दिया गया  है  ,

5.इसके  बाद आयत   के  शब्द  संख्या  39 से  43  तक अत्यंत  महत्वपूर्ण   बात  कही  गयी  है  , जिसे  मुसलमान  जानबूझ   कर  अनदेखी   कर देते  हैं  ,इस आयत अंतिम  शब्दों में अरबी   में  " कहा  गया है  "खालिसतन  लक मिन दूनिल  मोमिनीन (خَالِصَةً لَكَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِنِينَ )अर्थात खासकर  तेरे  लिए , ईमान  वालों  को छोड़  कर .(Purely for thee  excluding  other  believers)

इस आयत  से साफ़ साफ़ चलता   है कि अल्लाह  ने  केवल   नबी को ही रक्तसंबधी  बहिनों  से  विवाह करने  का विशेष अधिकार  दिया   था , मुसलमानों को नहीं   , इसी  लिए  कुरान  की सूरा -निसा 4:23  में रक्तसंबधी  बहिनों  से  निकाह  करने   की  साफ  मनाही  की  गयी   है  ,


4-मुसलमानों में बहिनों  से विवाह 
निकट  सम्बन्ध  की  बहिनों  से  शादी   को अंग्रजी   में "consanguinity" कहा  जाता   है   ,

कुरान   की  इस आयत  दिए   गए  स्पष्ट  आदेश  होने पर भी  दुनिया  के  सभी  देशों   के  मुस्लिम  रसूल   के  विशेषाधिकार  को  छीन   कर धड़ल्ले  से अपनी रिश्ते  की  बहिनों   को  ही  अपनी पत्नी बना  लेते   हैं   ,  ऐसे लोगों  की   बहुत  बड़ी  संख्या   है  ,  विकी  इस्लाम   के अनुसार यह  जानकारी  ली  गयी   है   .

1-Pakistan, 70 percent 2-Turkey  25-30 percent 3- Arabic countries  34 percent  4- Algiers 46 percent  5--Bahrain, 33 percent 6-- Egypt, 80 percent 7--Nubia (southern area in Egypt), 60 percent 8- Iraq, 64 percent  9-Jordan, 64 percent  10-- Kuwait, 42 percent 11-- Lebanon, 48 percent 12--Libya, 47 percent  13-Mauritania, 54 perce nt  14-Qatar, 67 percent 1 5-Saudi Arabia, 63 percent
16-  Sudan, 40 percent  17-Syria, 39 percent   18-Tunisia, 54 percent  19-United Arabic Emirates and 45 percent 20-Yeman 47percent


Average-39.8percent

5-मुसलमान ही  कुरान के विरोधी है 

मुसलमानों    का  स्वभाव   है  कि जब  कोई   गैर मुस्लिम  , रसूल  , या  कुरान  के  बारे  में  कोई प्रश्न  उठाता  है   , या  टिप्पणी  कर  देता  है  ,तो  मुस्लमान  जमीन  आसमान एक  कर  दते  हैं   , और लडने  पर  आमादा   हो  जाते हैं   ,  लेकिन  जब  निजी स्वार्थ  का  मामला  होता है   , उसी  कुरान के  आदेशों  की  धज्जियाँ  उड़ा  देने  में कोई  कसर  नहीं  छोड़ते   . यह कुरान   का गलत  अर्थ , या व्याख्या  करने  का  मामला नहीं  है  , जैसे  गुजरात हाईकोर्ट  ने अपने  फैसले  में  कहा  है  ,  यह तो  खुले  आम कुरान ( अल्लाह ) के आदेशों का उललंघन और रसूल   के अधिकारों में अतिक्रमण  है  . जो गुनाहे  अजीम  है  ,

6-हम  क्या  करें ?

इसलिए  इस  लेख के  माध्यम  से  हमारी  मांग  है  कि अदालत  मुसलमानों  के  ऐसे रक्तसंबधी   सभी  निकाहों  को अवैध घोषित  करके अमान्य  कर दे  , और ऐसे  अवैध निकाहों से पैदा हुए बच्चो  को  हरामी होने  से पिता  की संपत्ति का  वारिस  नहीं  माना   जाये   , और बच्चों  के  माँ  बाप   की जायदाद सरकार के  खजाने  में  जमा  करा  दी  जाये  , कानून   के  जानकर  इस  मुद्दे पर   जनहित  याचिका  जरूर  लगाएं    , हमने  तो सन्दर्भ सहित पुरे  सबूत  उपलब्ध  कर  दिए   , इनका कोई  भी  खंडन   नहीं  कर  सकेगा  , चाहे  जाकिर  नायक   की पूरी गैंग  क्यों न आ  जाए

(bhn 570)


 http://wikiislam.net/wiki/Cousin_Marriage_in_Islam

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

मुसलमान काफिर की स्तुति करते हैं !!

इस्लाम   ने सम्पूर्ण   मानव  जाति को  मोमिन और काफिर ऐसे  दो वर्गों   में  बाँट रखा  है  , मोमिन  को  मुस्लमान या ईमान  वाले  भी  कहा  गया है, और  खुद   को  मोमिन साबित  करने  के  लिए कलमा  पढ़ना अनिवार्य   है  , इसलिए  जो  भी व्यक्ति  कलमा  नहीं  पढता  वह इस्लाम  की  दृष्टि  में  काफ़िर   माना  जाता   है  , इस्लाम  में  काफिरों  को  कलमा  पढ़ा  कर  मुस्लिम   बनाना धार्मिक   कर्तव्य समझा  जाता   है  , कुरान  के अनुसार  काफिर अल्लाह  की  कृपा  से  वंचित रहेंगे  , और क़यामत   के  दिन उनको  जहन्नम   की  आग में  झोंक  दिया    जायेगा  . इसलिए  कुरान में  काफिरों   के लिए  दुआ   करने  की  मनाही  है .लेकिन  आपको   यह  बात  जानकर  घोर  आश्चर्य होगा  कि मुसलमान एक  ऐसे  व्यक्ति के  लिए  दुआ     करते  हैं , जिसने   रसूल   के  सामने ही  कलमा  पढ़ने  से  इंकार  कर  दिया   था  , और कह  दिया  के  मैं अपने  पूर्वज  के धर्म  पर  कायम  हूँ  ,यह पता  होने  पर  भी मुस्लमान उस  काफिर के लिए वैसे ही शब्दों में सलाम  भेजते  हैं   , जैसे रसूल   को  भेजते हैं . यह व्यक्ति   और  कोई   नहीं  बल्कि    रसूल  के  सगे  चाचा (Uncle )  अबू  तालिब   थे .

1-अबू  तालिब   का  परिचय 

अबु  तालिब  रसूल  के  चाचा थे , रसूल   के पिता  अब्दुल्लाह  सगे  भाई  थे   , इनके  पिता   यानि  रसूल  के  दादा ( )   का नाम "अब्दुल मुत्तलिब - عبد المطلب  " था , अबु तालिब   का  जन्म  सन 549  ई ०  में  और  देहांत सन  619  में  हुआ  था , इनके  पिता अब्दुल  मुत्तलिब  कुरैश  के  सरदार  थे  , इन्हीं  ने मक्का के जमजम  नामके जल कुण्ड  की खुदाई  की  थी  , इसलिए  रसूल  के  कबीले  कुरैश   के  लोग  उनका  बहुत  सम्मान  करते  थे  , इनके  देहांत   के  बाद कुरैश   की सरदारी  और  काबा की  देखभाल  अबु  तालिब  को मिली थी  , क्योंकि  जब छोटे   थे  तभी उनके पिता अब्दुलाह  गुजर  गए  थे , इसलिए बालक  मुहम्मद  पालन  पोषण अबू  तालिब  ने  ही  किया  था  , अबू  तालिब  ने ही  काबा   की  मरम्मत  और  विस्तार   कराया  था  , अबु  तालिब  काबा  के संरक्षक   भी  थे , अबु  तालिब अपने  भतीजे  मुहम्मद  को   बहुत   चाहतेथे  , यहाँ तब    मुहमद  साहब  ने काबा   की  सभी मूर्तियां तुड़वा डालीं तब भी  अबु तालिब खामोश  रहे , और  जब  मुहमद  साहब   ने  इस्लाम  के  नाम  पर  नया धर्म चलाया  तो अरब  के लोग  मुसलमान  बन  गए  , लेकिन अबूतालिब  पर इसलाम   का  कोई  असर  नहीं  पड़ा , वह  मरते  समय  तक  अपने  पिता  अब्दुल  मुत्तलिब  के  धर्म  पर  ही  डटे रहे  अर्थात  काफिर  ही बनेरहे ,
मुहम्मद  साहब ने   बहुत   प्रयास  किया  कि दूसरों   की  तरह  उनके  चाचा  अबू  तालिब   भी  मुसलमान   बन  जाएँ लेकिन वह अपने  प्रयास में  असफल  हो  गए   , आखिर  कह  दिया  कि ,

2-मुस्लिम बनाना अल्लाह का  काम है 


"हे  नबी  तुम जिसे  चाहो मार्ग ( इस्लाम )  पर  नहीं   ला  सकते  ,परन्तु अल्लाह  जिसे  चाहता  है  मार्ग   पर  ले आता   है  "
सुरा -अल  कसस 28:56 

"(O Prophet!) Verily, you guide not whom you like, but Allah guides whom He will."(28.56) 

हदीस  के  अनुसार यह आयात  कुरान में विशेष  रूप  से  अबू तालिब  के बारे में   कही  गयी    है   ,


And then Allah revealed especially about Abu Talib:--'Verily! You (O, Muhammad) guide not whom you like, but Allah guides whom He will.' (28.56)
"

 وَأَنْزَلَ اللَّهُ فِي أَبِي طَالِبٍ، فَقَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏{‏إِنَّكَ لاَ تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ‏}‏   "

सही बुखारी  - जिल्द 6 किताब 60 हदीस 295

काश   वह जिहादी  कुरान  की  इस आयात  और  हदीस   को  ध्यान  से  पढ़ें  जो  आतंक  से  लोगों  को  मुस्लमान बनाने  में  लगे   है  , वास्तव में ऐसे  लोग दूसरों  को  मुस्लमान  बनाने की  बजाय  अल्लाह के  काम   में हस्तक्षेप करने  से  खुद  काफिर  बन रहे  हैं

3-अबू तालिब  का कलमा से इंकार 


जब  अबू तालिब मृत्यु   शय्या  पर पड़े  थे ,रसूल  उनके  पास  गए , पास  में  ही अबू जहल  भी  था  , रसूल  ने  कहा " हे चाचा बोलिए "ला इलाह इल्ल्लल्लाह "  ( "अय उम कुल ला इलाह  इल्ल्लल्लाह -   أَىْ عَمِّ، قُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏   "  ) रसूल दिखाना   चाहते  थे  कि अल्लाह  के  सामने उनकी  सिफारिश   करूँगा, तभी  अबू  जहल  और उमर बिन  उमय्या  ने  पूछा "हे  अबू  तालिब  क्या  तुम अब्दुल  मुत्तलिब ( अपने पिता )   का  धर्म   छोड़ रहे  हो ? उन्होंने    कई   बार ऐसा  पूछा  , आखिर  अबू  तालिब  ने कहा  मैं अब्दुल  मुत्तलिब  के  धर्म पर  कायम  हूँ .("अला मिल्लते अब्दुल   मुत्तलिब - عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ‏ ")



[When Abu Talib was on his deathbed, the Holy Prophet   went to him while Abu Jahl was sitting beside him. The Holy Prophet (saww) said to him:

“O Uncle! Say LAA ILAAHA ILLALLAH – an expression with which I will defend your case before Allah ”. Abu Jahl and Abdullah bin Umayyah said, “O Abu Talib! Will you leave the religion of Abdul-Muttalib?” They kept saying this till Abu Talib’s last statement was, “I am on the religion of Abdul-Muttalib”



"‏"‏ أَىْ عَمِّ، قُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏.‏


".‏ فَقَالَ أَبُو جَهْلٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أُمَيَّةَ يَا أَبَا طَالِبٍ، تَرْغَبُ عَنْ مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَلَمْ يَزَالاَ يُكَلِّمَانِهِ حَتَّى قَالَ آخِرَ شَىْءٍ كَلَّمَهُمْ بِهِ عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ‏ "

सही बुखारी  -जिल्द  5  किताब58 हदीस 223


इस हदीस  से सिद्ध  होता है  कि रसूल     चाचा  अबु तालिब  ने रसूल  के सामने  ही  कलमा बोलने यानी  मुस्लिम  होने  से  साफ़  इंकार कर  दिया  था ,और मरते दम  तक काफिर बने  रहे .

4-काफिर  जहन्नम आग  में नीचे होंगे 

जब रसूल   के  कहने  पर भी  अबूतालिब   ने  न  तो  कलमा  पढ़ा  और न  अपना  धर्म छोड़ा   तो इसके   बारे में  हदीस   बताती  है  ,

"अब्बास  बिन अब्दुल   मुत्तलिब  ने रसूल  से  कहा  तुम  अपने चाचा के  लिए  कुछ   नहीं   कर  रहे  ,जबकि  उन्होंने तुम्हें   बचाया   है   ,लेकिन तुम  उलटे उन से नाराज     हो  गए  ,तब   रसूल   ने   कहा  वह  जहन्नम आग में    निचले   भाग  में  हैं "

 Narrated Al-Abbas bin 'Abdul Muttalib:
That he said to the Prophet "You have not been of any avail to your uncle (Abu Talib) (though) by Allah, he used to protect you and used to become angry on your behalf." The Prophet said, "He is in a shallow fire, and had It not been for me, he would have been in the bottom of the (Hell) Fire." (

‏ هُوَ فِي ضَحْضَاحٍ مِنْ نَارٍ، وَلَوْلاَ أَنَا لَكَانَ فِي الدَّرَكِ الأَسْفَلِ مِنَ النَّارِ ‏"‏‏.‏  "


सही बुखारी  - जिल्द 5 किताब 58  हदीस 222

5-काफिरों  के  लिए  दुआ   नहीं  करो 

मुहम्मद  साहब  अपने  चाचा   के कलमा   न  पढने  से इतने  रुष्ट   हो  गए  कि  कुरान  में  सभी  काफिरों और मुश्रिकों  के  बारे  यह  आयत  उतार डाली  .

"रसूल और  मुसलमानों  के लिए यह उचित नहीं  कि वे  मुश्रिकों  के लिए  क्षमा  के  लिए   दुआ  करें  , चाहे  वह  उनके  रिश्तेदार  ही  क्यों  न हों  "

"مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَىٰ  "


"It is not fitting for the Prophet and the believers to ask Allah's Forgiveness for the pagans, even if they were their near relatives,"9:113
 सूरा -अत तौबा 9:113 

कुरान  और  हदीस के इन आदेशों  के वावजूद  मुसलमान  अबू  तालिब को  सलाम  भेज  कर  उनकी स्तुति  करते  हैं  , जिस  तरह  रसूल को सलाम  भेजते  हैं  , अबू  तालिब   को सलाम  भेजने  के  लिए अरबी  में  काफी बड़ी स्तुति  है जिसके पहले कुछ अंश  दिए जा रहे हैं ,


6-अबू  तालिब  की स्तुति 

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ الْبَطْحَآءِ وَابْنَ رَئِيْسِهَا
अस्सलामु  अलैक या  सय्यदुल  बतहाअ व्  इब्ने  रईसुहा 
अर्थ -सलाम  हो आप  पर  हे  ,मक्का के  नेता  और उसके मुखिया  के पुत्र

 اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ الْكَعْبَةِ بَعْدَ تَاْسِيْسِهَا
अस्सलामु  अलैक या  वारिसुल  काबा बअद तासीसुहा 
अर्थ -सलाम  हो आप  पर  हे  ,काबा के  वारिस और  उसकी  बुनियाद रखने  वाले

 اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا كَافِلَ رَسُوْلِ اللهِ
अस्सलामु  अलैक या काफ़िल  रसूल्लल्लाह 
अर्थ-  सलाम  हो आप  पर  हे  ,रसूल   की  रक्षा  करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حَافِظَ دِيْنِ اللهِ

अस्सलामु  अलैक या  हाफ़िज़  दीनुल्लाह
अर्थ - सलाम  हो आप  पर  हे  ,अल्लाह   के धर्म  की  रक्षा करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عَمَّ الْمُصْطَفٰى
अस्सलामु  अलैक या अम्मुल  मुस्तफा
अर्थ-  सलाम  हो आप  पर  हे  ,मुस्तफा ( मुहम्मद )  के  चाचा


हो  सकता  है कि मुसलमानों   का  एक वर्ग  अबू  तालिब   को  काफ़िर    बताये  और  दूसरा   वर्ग  उनको  पक्का  मुस्लमान   बताये  ,  लेकिन   हमे इस  विवाद  में  नहीं  पड़ना   है  ,हमारी  दृष्टि  में तो अबू  तालिब  एक सत्यप्रिय    और  साहसी  महान   व्यक्ति  थे  , जिन्होंने    मुहम्मद  साहब  के  सामने ही   कलमा  पढ़ने  से  इंकार  कर  दिया  , और  साबित   कर  दिया  कि  इस्लाम   कोई धर्म   नहीं   है   , और  जन्नत  ,जहन्नम  कोरी  कल्पना  हैं ,हम  तो   बस  यही   कह  सकते  हैं   कि
 

''अबू तालिब  नमस्तुभ्यं इस्लाम प्रपंच  विनाशकः , साहसी सत्यवक्ता  च रसूल मुख चपेटकः "


हे अबू  तालिब  आपको  नमस्कार  ,  आपने  इस्लाम  के  पाखण्ड    का   नाश  कर  दिया ,  और  निडरता  से (कलमा  से इंकार करके ) सत्यवक्ता होकर  रसूल  के   मुंह चपेट  सी   लगा  दी.

(301)

http://www.duas.org/abutalibas.htm