गुरुवार, 19 नवंबर 2015

कुत्ता भी पूज्यनीय प्राणी है !!

लोग  इस  लेख  का  शीर्षक  पढ़  कर मजाक  समझेंगे   ,  क्योंकि अक्सर  जब लोग  किसी  को   गाली  देना   चाहते  हैं  ,अपमानित  करना   चाहते  हैं  ,तो उसे  तिरस्कार  से  " कुत्ता "  या  "  कुत्ते  की औलाद "    कह देते हैं . लेकिन  ऐसे  अज्ञानी  नहीं   जानते कि   हरेक  प्राणी  में  ईश्वर  का  अंश   है   , सभी आदर  के  योग्य   हैं  , सभी  पवित्र   हैं  ,इसी  लिए  गीता   में  स्पष्ट  रूप    में  बताया   गया  है  ,
"विद्या  विनय  सम्पन्ने  ब्राह्मणे  गवि हस्तिनि ,शनि  चैव श्वपाके  च पण्डिताः  समदर्शिनि :-अध्य्याय 5 श्लोक  18 

अर्थ -जो   लोग विद्यावान   और विनयशील   लोग होते  हैं   वह  ब्राह्मण  , गाय  , हाथी  , कुत्ता ,चांडाल  और  पंडित को   सामान  दृष्टि  से  देखते  हैं  .

कुत्ता  शब्द   को  गाली  समझने  वालों   को  यह  जानकर  आश्चर्य  होगा  की  भारत   में  कुत्ते  का ऐसा  मंदिर  भी  है  जिसमे   कुत्ते  के  साथ  राम  लक्ष्मण  , भरत  और  शत्रुघ्न  की  पूजा   होती  है  . इस  प्राचीन   मंदिर   का  नाम  है ,

 1-कुकुरदेव मंदिर

छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव में एक विशेष तरह का मंदिर है, यह मंदिर किसी देवी-देवता का नहीं बल्कि कुत्ते का है। मंदिर में एक कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है.मंदिर' राजनंदगांव के बालोद से छह किलोमीटर दूर मालीघोरी खपरी गांव में है।मुख्य  द्वार  पर  लिखा   है

ऐतिहासिक पुरातत्व श्री  कुकुर देउर मंदिर  सपरी 

चित्र  देखिये

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2-मंदिर  का इतिहास 
इस मंदिर का निर्माण हालांकि फणी नागवंशी शासकों द्वारा 14वीं-15 वीं शताब्दी में कराया गया था। इस मंदिर के प्रांगण में स्पष्ट लिपियुक्त शिलालेख भी है, जिस पर बंजारों की बस्ती, चांद-सूरज और तारों की आकृति बनी हुई है। राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी रखी गई है। मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है। यह मंदिर भैरव स्मारक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के शिखर के चारों ओर दीवार पर नागों का अंकन किया गया है.मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है।
 कुत्ते की प्रतिमा (चित्र )

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3- कुत्ते की वफादारी   की  कथा 

कुत्ते  का  उल्लेख   हमारे  धर्म  ग्रंथों   में भी मिलता    है  जैसे  वाल्मीकि  रामायण   के उत्तर   कांड प्रक्षिप्त सर्ग  2 श्लोक 2 से  40 तक  एक   कुत्ते  की  कथा   है  ,जिसे  भगवान   राम   ने  आशीर्वाद  दिया   था  , इसी  तरह   महाभारत  के  स्वर्गारोहण  पर्व    में  कुत्ते   को  धर्म  का  प्रतिक  बताया   गया   है   ,  जैसे  कुत्ता  अपने  स्वामी  के  पीछे  चलता  है  ,उसी  तरह मनुष्य   का धर्म  भी  उसके  साथ  चलता   है   , कुत्ते  की  स्वामीभक्ति  प्रसिद्ध   है  , इस  मंदिर  में  जिस  कुत्ते  की प्रतीमा  है  ,उसकी  भी  कथा   है


जनश्रुति के अनुसार, कभी यहां बंजारों की बस्ती थी। मालीघोरी नाम के बंजारे के पास एक पालतू कुत्ता था। अकाल पड़ने के कारण बंजारे को अपने प्रिय कुत्ते को मालगुजार के पास गिरवी रखना पड़ा। इसी बीच, मालगुजार के घर चोरी हो गई। कुत्ते ने चोरों को मालगुजार के घर से चोरी का माल समीप के तालाब में छुपाते देख लिया था। सुबह कुत्ता मालगुजार को चोरी का सामान छुपाए स्थान पर ले गया और मालगुजार को चोरी का सामान भी मिल गया।

कुत्ते की वफादारी से अवगत होते ही उसने सारा विवरण एक कागज में लिखकर उसके गले में बांध दिया और असली मालिक के पास जाने के लिए उसे मुक्त कर दिया। अपने कुत्ते को मालगुजार के घर से लौटकर आया देखकर बंजारे ने डंडे से पीट-पीटकर कुत्ते को मार डाला।

4-मंदिर में कुत्तों  की  पूजा 

कुत्ते के मरने के बाद उसके गले में बंधे पत्र को देखकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और बंजारे ने अपने प्रिय स्वामी भक्त कुत्ते की याद में मंदिर प्रांगण में ही कुकुर समाधि बनवा दी। बाद में किसी ने कुत्ते की मूर्ति भी स्थापित कर दी। आज भी यह स्थान कुकुरदेव मंदिर के नाम से विख्यात है। 'कुकुरदेव मंदिर' का बोर्ड देखकर कौतूहलवश भी लोग यहां आते हैं। उचित रखरखाव के अभाव में यह मंदिर हालांकि जर्जर हो गया है.फिर   भी  श्रद्धालु    कुत्ते   के  मंदिर  में  आते  हैं , और कुत्ते  कुतियों    की प्रतिमाओं   की  पूजा   करते  हैं .
कुत्तों की  पूजा(चित्र )



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5-कुकुर महोत्सव

वैष्णव  संप्रदाय  के  लोग  भी  इस  मंदिर  में  कुत्तों   के लिए  कुकुरभोज   आयोजित  कराते  हैं   ,  कुछ  समय   पहले संत   वैष्णवपद  दास बालाजी  महाराज  ने एक    विशाल   कुकुर  भोज  कराया    था  ,  और संस्कृत  में  कुत्तों   की  स्तुति बनायी   थी ,
 कुकुरभोज (चित्र )


http://www.nitaisundar.com/site/DadaMosai%20-Kukur-Mahatsava.jpg

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