मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

इस्लामी वयस्क परीक्षण !

जिस समय टी .वी . के सभी चैनलों पर बजट सम्बन्धी चर्चा खबरें आ रही थीं , उसी समय बीच में 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में चलती बस में एक 23 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में छठवें आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड ने गुरुवार आरोप तय करने का आदेश दे दिया .चूँकि यह घटना इतनी ह्रदय विदारक थी कि सारा भारत उन सभी नरराक्षसों को मौत की सजा देने की मांग कर रहा था .यद्यपि इस अपराध के लिए सभी अभियुक्त सामान रूप से दोषी हैं , लेकिन सरकार ने उनके नाम छुपा रखे थे , इन सभी पापियों ने जो दुष्कृत्य किया था , उसे देख कर हमने पहले ही लिख दिया था कि इतना नीच काम कोई मुसलमान ही कर सकता है , और बाद में यह बात सही निकली .क्योंकि अदालत ने छटवें आरोपी पर जितने भी अभियोग लगाये हैं , सभी काम मुहम्मद की सुन्नत है ,जिसे मुसलमान अपराध नहीं मानते ,
अब मुसलमान उस उस दुष्ट को नाबालिग साबित करने के लिए तरकीबें निकाल रहे हैं , ताकि उसे मौत की सजा से बचाया जा सके .यद्यपि इस बात में कोई शंका नहीं है कि सभी अपराधों की प्रेरणा इस्लामी तालीम से मिलती है , लेकिन आप किसी भी मुल्ले मौलवी से यह बात कहेंगे तो वह यही उत्तर देगा कि इस्लाम तो सदाचार , संयम , और परहेजगारी की तालीम देता है . इस्लाम में बलात्कार को गुनाह माना जाता है , इत्यादी ,
चूंकि मुख्य मुद्दा बलात्कार और छठवें मुस्लिम आरोपी के नाबालिग होने का है ,इसलिए इस्लामी सदाचार का पाखंड और असलियत के साथ इस्लाम के अनुसार बालिग (Adult )होने की जाँच कैसे होती है , इसका तरीका इस लेख में दिया जा रहा है ,
1-इस्लाम का ढोंगी सदाचार 
इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म का प्रभाव था . और कई ईसाई साधू ऐसे भी होते थे ,जो संयम का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते थे . मुहम्मद का गुरु और खदीजा का चचेरा भाई वरका बिन नौफल भी एक ब्रह्मचारी था . शायद उसी से प्रेरित कर मुहम्मद ने यह आयत कुरान में जोड़ी होगी , जिसमे मुसलमानों को यह उपदेश दिया गया है ,
"और जिन्हें विवाह करने का अवसर प्राप्त न हो ,उन्हें चाहिए कि वे तब तक संयम का पालन करें ,जब तक अल्लाह उन्हें अनुग्रह से संपन्न कर दे " सूरा -अन नूर 24:33

(let those who cannot find a match keep chaste till Allah give them independence by His grace. 24:33)

( इस आयत में संयमी के लिए अरबी में "अफीफ عفيف    " शब्द दिया गया है ,जिसका अंगरेजी में अर्थ "Chaste " होता है .दुसरे शब्दों को ऐसे लोगों को ब्रह्मचारी , अरबी में " ताहिरطاهر  "और अंगरेजी में पवित्र और संतpure-saintly"भी कह सकते हैं )लेकिन इस आयात को पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि कुरान कुंवारे लोगों को संयम और कामवासना से बचने की शिक्षा देता है .बल्कि कुरान मुस्लिम युवकों को लडाकियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करने की प्रेरणा देता है , जैसा कि इन आयतों के कहा गया है ,
 2-औरतें पकड़ो बलात्कार करो 
औरतें और अय्याशी इस्लाम के असली आधार है , इतिहास साक्षी है . कि मुहम्मद के साथी जिहादी सबसे पहले औरतें ही लूटते थे . यही नहीं हर मुसलमान मरने के बाद जन्नत में औरतें ही चाहता है .चूँकि भारत में जिहाद नहीं हो सकती ,इसलिए मुसलमान किसी अकेली लड़की को पकड़ लेते हैं . और बलात्कार कर देते हैं ,क्योंकि कुरान पकड़ी गयी औरत से सहवास करने की आज्ञा देता है , कुरान में कहा है ,
"अपनी पत्नियों के उन लौंडियों के साथ सम्भोग करना कुछ भी निंदनीय नहीं है ,जो तुम्हारे हाथों पकड़ी जाएँ "सूरा -अल -मआरिज 70:30
(Captives    your right hand  posess)
"अपनी पत्नियों के अलावा उन लौंडियों के साथ ,जो उनके कब्जे में हों ,सहवास करना निंदनीय नहीं है "सूरा -अल मोमिनून 23:6
"हमने तुम्हारी लौंडियाँ हलाल कर दी हैं ,जो अल्लाह ने तुम्हें माले गनीमत में दी हैं " सूरा -अहजाब 33:50
"पत्नियों के सिवाय तुम्हारे लिए तुम्हारी लौंडियाँ भी हलाल हैं ,अल्लाह सब चीज की खबर रखने वाला है " सूरा -अह्जाब 33:52
इस्लामी परिभाषा में हर प्रकार से हथियाई गयी , पकड़ी गयी , अगवा की गयी हो या खरीदी हुई सभी के लिए अरबी में एक ही शब्द "السرية " है .और ऐसी औरत की इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करना इस्लाम में अपराध नहीं माना जाता है .(Islam allows a man to have intercourse with  capt  woman, whether he has a wife or wives or he is not married. A Captiive woman with whom a man has intercourse is known as a sariyyah )

लेकिन मुहम्मद ने ऐसे सहवास को बलात्कार नहीं कहते हुए अरबी में "मलिकत ईमानुकुम ملكت ايمانكم" और " मलिकत यमीनुकुम ملكت يمينكم" शब्द का प्रयोग किया है .और पकड़ी गयी औरत को रखैली माना है .जिनके साथ बलपूर्वक सहवास करना मुसलमानों का अधिकार है .देखिये विडिओ

Sex allowed with Slave Women in Islam_ Dr Zakir Naik.flv


http://www.youtube.com/watch?v=Bj74kfA5UQY

यही बात हदीस में भी कही है , सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3432
3-वयस्क की परिभाषा 
इस्लाम के अनुसार 15 साल की आयु होने पर लडके और लड़की को वयस्क माना जाता है .इस आयु को " बुलूग بُلوغ‎)" और ,आयु पूरा करने वाले को " बालिग  بالغ " कहा जाता है .इतनी आयु के लोग वयस्क ( Adult ) इसलिए माने जाते हैं , क्योंकि वह जिहाद के लिए उपयोगी होते हैं .
लड़का बालिग तब माना जाता है जब उसके श्रोणी के बाल निकलने लगें(grows pubic hair) , या शिश्न से वीर्य निकलने लगे .(has a nocturnal emission) और लड़की तब बालिग मानी जाती है जब उसका मासिक स्राव निकलने लगे .(when she  menstruates)यही बात फतवे में दी गयी है ,
Once you get semen you are baaaligh

"تحصل مرة واحدة السائل المنوي كنت الكبار  "

http://en.allexperts.com/q/Islam-947/2010/4/Adult-age.htm

4-वयस्कता का परीक्षण 
आज अदालत दिल्ली बलात्कार काण्ड छठवें (मुस्लिम)आरोपी के वयस्क होने का पता करने के लिए हाथ पैर मार रही है , कभी उसका जन्म प्रमाणपत्र खोज रही है कभी किशोर न्यालालय के आदेशानुसार धारा 3 के अधीन अभियुक्त की bone-ossification testकरवा रही है , लेकिन मार्च सन 627 में ही मुहम्मद ने एक ऐसी विधि खोज ली थी , जिस से मूर्ख व्यक्ति भी पता कर लेगा कि अभियुक्त बालिग है , अथवा नहीं .यह विधि हदीस में आज भी मौजूद है .इस हदीस के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है .घटना इस प्रकार है , कि मदीना के पास "बनी कुरैजा " नामका एक यहूदी कबीला रहता था .मार्च सन 627 को मुहम्मद ने अपने जिहादियों के साथ उस कबीले पर अचानक धावा बोल दिया था जिसमे करीब 900 लोगों के सर काट कर हत्या कर दी गयी थी .मुहम्मद का आदेश था कि सभी बालिग पुरुषों को मार दिया जाये . और औरतों से बलात्कार करके उनको लौंडी बना लिया जाये .हदीस कहती है ,
1."कसीर इब्न अस्सायब ने कहा कि रसूल ने हम लोगों से कहा जाओ सभी बालिग़ मर्दों को मार डालो .पता करो जिन के नीचे के बाल दिखायी दें वह बालिग़ हैं , उन्हें क़त्ल कर दो . और जिनके नीचे के बाल नहीं निकले वह नाबालिग है , उनको जिन्दा छोड़ दो "

أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَسَدُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ الْخَطْمِيِّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ خُزَيْمَةَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبْنَاءُ، قُرَيْظَةَ أَنَّهُمْ عُرِضُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ قُرَيْظَةَ فَمَنْ كَانَ مُحْتَلِمًا أَوْ نَبَتَتْ عَانَتُهُ قُتِلَ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مُحْتَلِمًا أَوْ لَمْ تَنْبُتْ عَانَتُهُ تُرِكَ ‏.‏

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3459

2-"अतिय्या ने कहा कि बनू कुरैजा के जनसंहार के समय मैं मौजूद थे . लेकिन उस समय मेरे नीचे के बाल नहीं निकले थे . इसलिए मुझे नाबालिग मान कर जिन्दा छोड़ दिया गया था "

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ، قَالَ كُنْتُ يَوْمَ حُكْمِ سَعْدٍ فِي بَنِي قُرَيْظَةَ غُلاَمًا فَشَكُّوا فِيَّ فَلَمْ يَجِدُونِي أَنْبَتُّ فَاسْتُبْقِيتُ فَهَا أَنَا ذَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ ‏.‏  "

Sunan an-Nasa'i-Vol. 4, Book 27, Hadith 3460

5-छठवें अभियुक्त के अपराध 

भले सेकुलर और मुसलमान उस छठवें अपराधी मुसलमान को बालिग नहीं मानें . लेकिन उसने जो जघन्य काम किये हैं उसके आगे मुहम्मद भी नाबालिग लगेगा .क्योंकि .. प्रमुख मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने उस पर , गैंग रेप ,हत्या ,अपहरण , आप्रक्रतिक यौनाचार ,हत्या का प्रयास ,डकैती , सबूतों को नष्ट करने का प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं .यही नहीं एक सब्जी विक्रेता को लूटने के मामले में उस पर लूटपाट का मामला भी चल रहा है .
हमें पूरा विश्वास है , यदि अदालत मुहम्मद की हदीस का पालन कर के छठवे आरोपी को बालिग़ मान लेती है , तो मुल्लों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो जाएगी .

http://www.thereligionofpeace.com/muhammad/myths-mu-rape.htm

(200/92)

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

इस्लाम में नफ़रत की राक्षसी शिक्षा !

इस्लाम  की  बुनियाद नफ़रत पर टिकी   है ,और  ऐसा कहना   गलत  बिलकुल  नहीं   लगता   .  क्योंकि यदि  हम  इस्लाम  का इतिहास   देखें  तो यह बात शतप्रतिशत   सही  सिद्ध  होती  है  ,  यही नहीं    कुरान   में  ऐसी कई  आयतें  मौजूद हैं  जिनमे   मुस्लिमों  के  प्रति नफ़रत  की  शिक्षा   दी  गयी  है  . सब  जानते हैं कि  भारत   का विभाजन  नफरत   के कारण  हुआ  था  , और  कश्मीर  की  समस्या के पीछे    भी  मुसलमानों   की  हिन्दुओं   से नफ़रत ही  है  .
वास्तव  में  इस्लाम  ने  जन्म  लेते ही पूरे  विश्व को दो भागों  में  बाँट   दिया  है  . एक तरफ मुसलमान   और  दूसरी  तरफ  काफ़िर .
  . चूँकि   कुरान   में सभी  गैर  मुस्लिमों   को  इस्लाम  का  दुश्मन माना   गया है  ,इसलिए मुसलमान सभी  गैर  मुस्लिमों  से  नफ़रत  करने  लगे  . और जब  मुसलमानों  में भी  अनेकों  फिरके बन  गए  , और  हरेक  फिरका खुद  को सही  और दूसरे को गलत साबित   करने लगा तो सभी  फिरके के लोग  एक दूसरे से नफ़रत   करने लगे  , और  धीमे  धीमे   इस्लाम की  इस राक्षसी नफ़रत   की आग  ने सारे  इस्लामी  जगत   को अपनी  लपेट में ले लिया है  .
 फिरभी मक्कार  मुस्लिम  नेता बेशर्मी  से यही  कहते  रहते  हैं  , कि अल्लाह और इस्लाम  की नजर में  सभी  मनुष्य   समान   हैं  . और  इस्लाम  आपसी   भाईचारे  की  शिक्षा  देता  है .दुनिया  में इस से बड़ा झूठ  और कोई  नहीं   हो  सकता  , और मुसलमानों से बड़ा राक्षस और कोई नहीं  हो सकता  ,यही बात इस लेख  में प्रमाण सहित   दी  जा रही  है  ,


1-मस्जिदों  में नफ़रत  की शिक्षा 
चूँकि  मुसलमानों   के  लिए मस्जिदों   में जाकर  नमाज  पढ़ना  अनिवार्य   है  , और  नमाज के बाद  मुल्ले जो खुतबे  ( प्रवचन )   देते हैं ,उनमें  नफ़रत की  तालीम   दी  जाती   है , और हरेक फिरके  की  अलग अलग  मस्जिद  होती  है  , और  वहीँ  से नफ़रत के बीज  बोये   जाते है  ,अक्सर  मुल्ले  कहते  रहते हैं  कि  इस्लाम में भेदभाव नही होता है .लेकिन    यूपी के बरेलवी जमात के मस्जिदों में ये नोटिस दिखना अब आम बात हो गयी है ,इसका  एक   नमूना  देखिये  कि  इस  मस्जिद   में  क्या लिखा  है  ?
" मस्जिद  कमिटी  का खास  जरूरी  ऐलान ,
 वे मस्जिद सुन्नी  हनफ़ी  सहीहुल अक़ीदा लोगों  की  है  ,हुजूर  के फरमान  सहाबा  के तरीके ,गोसो  ख्वाजा मखदूम  पाक  ख़ुसूसन  मसले आला  हजरत  इमाम अहमद राजा  खान बरेलवी  के  पैरोकार  हैं  , यहाँ  पर  देवबंदी  , बहाबी  , तबलीगी  व्  दीगर अक़ीदा  के लोग इस मस्जिद  में  नहीं  आएं  , और अगर आते हैं  तो नतीजे के खुद  जिम्मेदार   होंगे  "
नोट- इसके ऊपर या  मस्जिद  की  किसी  दीवार   पर  इस्तेहार  लगाना या  स्टिकर लगाना  मना  है  
गौरतलब है की इस बरेलवी जमात के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा है जिनके कदमो में अरविन्द केजरीवाल कदमबोशी करते है
नोट - इसकी  तस्वीर  देखिये

https://fbcdn-sphotos-e-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn2/1459209_513879902042340_1728005059_n.jpg

 . अब पाठक  गण  बताये  की  लोगों  में नफ़रत  कौन  फैलाता है  ? और  जो  मुस्लिम  नेता  भाईचारे  की  वकालत  करते  रहते हैं   वह  झूठे हैं  कि  नहीं  ? और जब   खुद  मुसलमानों   के फिरकों   में नफरत बढ़ जाती  है  तो  सीरिया जैसा  हाल  हो   जाता   है  .
http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_11.html


2-शियाओं   का  मांस  खाने  वाले  सुन्नी 
सीरिया  में  होने वाले  जन  संहार   के  पीछे  कोई  राजनीतिक    कारण  या  सीमा विवाद   नहीं  है  ,  बल्कि सुन्नियों   द्वारा गैर  सुन्नियों    से  नफ़रत   है  .सुन्नी  शियाओं   को गैर  मुस्लिम  और इस्लाम  और  रसूल  का  दुश्मन   मानते हैं   , जिनके बारे में  कुरान  में  लिखा है   " जो लोग अल्लाह के  रसूल  से लड़ते   हैं  , उनकी  सजा यही  है कि बुरी  तरह  क़त्ल   किये जाएँ  , या उनके  हाथ  पैर  विपरीत दिशाओं   में काट  दिए  जाएँ  " सूरा -अल  माइदा  5 :33 

इन   दिनों  सीरिया में सुन्नी मुसलमान  यज्दियों  और  शियाओं   का क़त्ल   करके उनका  सफाया   करने में लगे हुए है  , जिसके लिए सुन्नियों   के  अनेकों   आतंकी गिरोह   बन   गए हैं  ,  उन्हीं   से एक  का नाम  "अल कतायब  अल फारूक -  كتائب الفاروق‎ " है .जिसका  अर्थ  "The Farouq Brigades  "  होता   है  . इस  दल  के स्थापक  का  नाम  "अबू  सक्कार -  ابو سكٌار " है  , इस  दल   का उद्देश्य  पूरे  मध्य  एशिया  में  सुन्नी  इस्लामी  खिलाफत   करना  और  सभी  गैर सुन्नियों   का  सफाया   करना  है   , यह शियाओं  से इतनी  नफ़रत  करते हैं  क़ि मारे गए   शिया व्यक्ति  की  लाश  से  दिल  और कलेजा  निकाल  कर  खा जाते  है  , और इसकी  विडिओ   बना कर सब जगह मिडिया में अपलोड कर देते हैं    , कुछ  दिनों   पहले ही  यह  खबर   लोगों  को   पता  चली   है . कुछ   समय  पहले अबू सक्कार   ने शियाओं से   कहा  था  " कुत्तो   मैं  कसम  खाता  हूँ  कि मैं  तुम्हारे  दिल  और   कलेजे  को  खा  जाऊँगा  "

Sakkar rants: 'I swear we'll eat from your hearts and livers, you dogs'He then raises one of the organs to his mouth and takes a bite


"يا كلاب، أقسم أنني سوف يأكل قلوب وأكباد الخاصة بك  "

 यह कह कर अबू  सक्कार  ने  एक  मरे हुए  शिया    के  शरीर  के हिस्से  ऊपर  उठा कर  दिखाए और  उस   लाश  के  दिल और  कलेजे  चबा   लिए

लो देखो इन नरपिशाचों को । सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता :-Photo-

https://fbcdn-sphotos-a-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn1/558946_578514115531314_477650372_n.jpg

यही  घटना विडिओ   में  भी दी   गयी  है (  कृपया दिल मजबूत  करके  इस विडिओ  के  देखें  )Video
(WARNING GRAPHIC Syria Rebel Cuts out Soldier's Heart and Eats It)

https://www.youtube.com/watch?v=xEQFmZrQAx8

3-नर मांस खाना इस्लामी  परंपरा 
अरब के लोग  इतने  क्रूर    निर्दयी  और राक्षसी  स्वभाव  के  थे  ,कि उनमे  युद्ध  में  मारे गए  शत्रुओं   के  शरीरों  को फाड़  कर  उनके  दिल   और  कलेजा   खा  जाने  की  परंपरा    थी  , ऐसा वह   दुश्मनों  से  बदला  लेने के लिए  करते  थे  . और ऐसा  करने  में अपनी  शान   समझते   थे  . उनकी  यह  पिशाची  परंपरा   मुहम्मद  साहब   के समय  भी  थी  . ऐसी  ही  एक घटना  का विवरण  इस्लामी  इतिहासकार " इब्ने  इशाक "   ने अपनी  किताब  " सीरते  रसूलल्लाह -  سيرة رسول الله‎ "  में    दिया  है  . यह  घटना  शनिवार 19  मार्च सन 625 ( इस्लामी कैलेंडर  के अनुसार  3 शव्वाल 3  हिजरी "उहुद के युद्ध  की है  , जिसे " गजवए उहुद - غزوة أحد‎  "  भी  कहा  जाता है , मुसलमानों   की  तरफ  से इस  युद्ध   का नेतृत्व मुहम्मद साहब   के चचेरे  भाई " हमजा  बिन अब्दुल मुत्तलब - حمزة بن عبد المطلب  " कर रहे थे  ,और  दूसरी  तरफ  मुहम्मद  के  विरोधी  थे  . लेकिन इस  युद्ध   में  मुसलमान  पराजित   हो  गए , और "  हमजा  "  मारे  गए , और हमजा की लाश  युद्ध भूमि  में छोड़ कर  मुसलमान   भाग  गए.तभी  अबू  सुफ़यान की पत्नी    'हिन्दा , (मुआविया  की  माता और यजीद की दादी )  युद्ध भूमि    पर  उस  जगह गयी  जहाँ  हमजा की  लाश  पड़ी   थी  . हिन्दा  ने  हमजा   की  लाश    का  सीना फाड़ा  और सीने से दिल  और  कलेजा   बाहर निकाल  कर  चबा  लिया  ,  लेकिन  जब  वह उनको  नहीं  निगल  पायी  तो हमजा  के  दिल और कलेजे   को  थूक  दिया .
"According to Ibn Ishaq, after the battle, Hind cut open the body of Muhammad's uncle Hamza, whom she believed responsible for the death of her relatives, cut out his heart, and gnawed on it. According to Ibn Ishaq, she couldn't swallow it and spat it out.

लेकिन  प्रसिद्ध सुन्नी   इतिहासकार " अब्दुल बर्र -ابن عبدالبر‎   "( मृत्यु 2  दिसंबर  सन 1071 में हुई )    ने अपनी किताब  "इस्तियाब  फी  मअरकतुल  असहाब -الاستعياب في معرفة الاصحاب    "  में लिखा   है  कि हिन्दा  हमजा   का  दिल  और  कलेजा पका  कर  खा  गयी  . और  लोगों  से बोली  कि मैंने  मुसलमानों   से  अपने लोगों   की हत्या का   बदला   ले लिया

"Ibn ‘Abdu l-Barr states in his book "al-Istî‘âb" that she cooked Hamza's heart before eating it."

शायद इसी   लिए  कुरान  की  इस  आयत  में  मुसलमानों  से  पूछा   गया है   कि  क्या वह  अपने ही  भाई    (  मुसलमान )   का   मांस  खाना  पसंद  करेंगे  ," क्या  कोई इस  बात  को पसंद   करेगा  कि अपने ही किसी  मरे हुए  भाई  का  मांस   खाए  " 
 सूरा  - अल हुजुरात  49:12 

 याद रखिये  इस  आयत में मनुष्य   का  मांस   खाने   के बारे में   सवाल  किया गया   है , मनुष्य   का  मांस  खाने  की  मनाही  नहीं   की गयी है
 यही   कारण  है  कि  मुसलमान   यहाँ भी गुप्त  रूप  से अपने दुश्मनों   का  मांस  खाते  हैं   , सीरिया    में  तो यह राक्षसी  कर्म  खुले  आम  हो  रहे हैं  ,

देखिये  विडिओ -डरावना  इस्लाम

ttps://www.youtube.com/watch?v=fZGGaDfeLTw


http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_7.html

(209)

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

मुसलमान किसके वफादार ?

इस समत विश्व में लगभग 200 देश हैं ,जिनमे अपना अपना संविधान और अपने नियम कानून लागू है .और अलग शासन प्रणाली है .और कुछ इस्लामी देश हैं ,लेकिन कुछ ऐसे गैर मुस्लिम देश भी हैं जहाँ मुसलमानों की अच्छी खासी जनसंख्या मौजूद है .हरेक देश चाहता है कि उस देश के निवासी संविधान और देश के कानून के प्रति निष्ठावान وفي  (Loyal )और  वफादार बनें ,ताकि सबको न्याय मिल सके .और देश में शांति व्यवस्था बनी रहे .
लेकिन देखा गया है कि ,मुसलमान जिस भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं ,उसके संविधान और कानून कि अनदेखी करते रहते है .और किसी न किसी बहाने उस देश की सरकारों ने लिए समस्याएं पैदा करते रहते है .चाहे उनको कितनी भी सुविधाएँ क्यों न दी जाएँ .
इसका कारण यह है कि मुसलमान मानव निर्मित किसी भी कानून या नियम को अपूर्ण और अनुपयुक्त मानते है .मुसलमानों के अनुसार केवल इस्लाम ही एकमात्र पूर्ण कानून या दीन الدِّين  (Law )है .जो अल्लाह ने बनाया है .देखिये कुरान क्या कहता है -
1 -इस्लाम सम्पूर्ण कानून है 
"आज के दिन हमने उम्हारे लिए दीन ( Law ) को परिपूर्ण कर दिया है और केवल इस्लाम को ही तुम्हारे लिए धर्म नियुक्त कर दिया है "
सूरा -मायादा -5 :3
2 -किसी को अपना हितैषी नहीं मानों 
"हे लोगो अल्लाह के अलावा किसी को अपना मित्र या संरक्षक नहीं मानों "सूरा-अल कहफ़ 18 :26
"जो अल्लाह के अलावा किसी को भी अपना मित्र या संरक्षक बनाएगा उसे कोई सहायता नहीं करो "सूरा -अन निसा 4 :123
3 -दुनिया के स्वामी मुसलमान है 
"हे मुहम्मद तुम्हारे आगे और पीछे और उसके बीच में जितनी भी भूमि है ,वह तुम्हारी है .केवल तुम्हीं उसके एकमात्र स्वामी हो "
सूरा -मरियम 19 :64
4 -सिर्फ शरियत का कानून मानों 
"हे ईमान वालो ,तुम केवल रसूल के बताये आदेशों (शरियत ) को मानों ,और यदि किसी भी प्रकार का विवाद हो तो ,रसूल के बताये गए आदेशों के अनुसार ही फैसला करो "सूरा -अन निसा 4 :59
"तुम्हारे बीच में किसी बात का फैसला केवल अल्लाह के नियमों के अनुसार ही हो सकता है .याद रखो इस तरह से इमान वालों के मुकाबले में काफिरों को कोई रास्ता नहीं मिल सकेगा "सूरा -अन निसा 4 :141
5 -ताकत के बल पर दूसरों को निकालो 
"और जो सबसे अधिक बलशाली हो ,वह अपने से कमजोरों को अपने क्षेत्र से निकाल दे ,क्योंकि आसमानों और जमीन के सभी संसाधन और उन पर प्रभुत्व अल्लाह ने अपने रसूल और मुसलमानों के लिए दिए है "सूरा -मुनाफिकून 63 :7 और 8
6 -जनमत की परवाह नहीं करो 
"चाहे लोगों का कुछ भी मत (इच्छा ) हो उम उसका पालन नहीं करो .जो उसका पालन करे तो जानलो कि इस गुनाह (इच्छा पालन )के अल्लाह उसको किसी संकट में डालना चाहता है ."सूरा मायदा 5 :49
7 -भाईचारा नहीं रखो 
" ईमान वालो ,को चाहिए कि ,वह किसी गैर ईमान वाले को अपना मित्र नहीं बनायें ,और उनसे दूरी बना कर बचते रहें .जैसा कि तुमको उन से बचने का हक़ दिया गया है ,फिर भी जो उनसे भाईचारा बनाएगा तो ,समझ लो उसे अल्लाह से कोई नाता नहीं है "सूरा -आले इमरान 3 :28
8 -झगडा करो .अशांति फैलाओ 
"जो लोग सच्चे धर्म (इस्लाम ) को अपना दीन (धर्म )नहीं मानते है ,और अपने ही धर्म को मानते है ,तुम उन से लड़ते रहो .और इतना लड़ो कि वह अप्रतिष्ठित हो कर जजिया देने पर विवश हो जाएँ "सूरा अत तौबा 9 :29
9 -मुहमद की हड़प नीति 
"अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,जब तुम किसी काफ़िर ,मुशरिक या ईसाई से व्यवहार करो तो उन से इन तीन प्रकार से बर्ताव करो ,यदि वह ख़ुशी से कुछ दे दें तो स्वीकार कर लो ,फिर उनको इस्लाम काबुल करने की शर्त रखो ,यदि वह यह शर्त नहीं मानें तो उनसे जजिया की मांग करो .फिर यदि वह जजिया नहीं देते ,तो उनकी लोगों को बंधक बना लो ,और फिरौती ले लो .यदि फिर भी इस्लाम नहीं करते तो उनसे युद्ध करो "सही मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4294
10 -सम्पूर्ण पृथ्वी मुसलमानों की बपौती है 
"अबू हुरैरा ने कहा कि एक बार हम रसूल के साथ मस्जिद में बैठे थे ,तभी रसूल न कहा चलो हम यहूदियों के गाँव "बैतूल मिदरास"चलें ,वहां जाकर रसूल ने यहूदियों से कहा कि यदि तुम लोग इसी वक्त इस्लाम कबूल कर लोगे तो तो तुम सुरक्षित बच जाओगे .क्या तुम्हें यह पता नहीं है कि ,पृथ्वी पर जितनी भी भूमि है ,वह रसूल और मुसलमानों की है .इसलिए तुम्हारे पास जितनी भी सम्पति और जमीं है सब रसूल के हवाले कर दो .और हम तुम्हें केवल इतनी अनुमति है कि हैं कि तुम अपनी सम्पति बेचकर जा सकते हो "बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 392 .
यह बात तो साबित हो चुकी है कि मुसलमान किसी भी देश के कानून और संविधान पर निष्ठां नहीं रखते .और भी गैर मुस्लिम देश में रहते हैं उस देश को खोखला करते रहते है .और नयी नयी मांगे करते रहते है .फिर भी उनकी मांगें सपाप्त नहीं होंगी .जैसे अगर पूरा कश्मीर भी मुसलमानों को मिल जाये तब भी वह भारत का और हिस्सा मांगेंगे .
असल में मुसलमान देशों की भौगोलिक ,और राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते है इस्लामी कूटनीतिज्ञों और चालाक मुल्लों ने विश्व को कुरान और हदीसों के अधार इन भागों में बाँट रखा है .जिन्हेंدار  दार या House कहा जाता है .इन्हीं  6 वर्गों ध्यान में रख कर ही मुस्लिम देश अन्य देशो के साथ कोई सम्बन्ध या समझौता
 (Treaty )करते हैं .इस्लाम के अनुसार विश्व को इन वर्गों में विभाजित किया गया है -
1 -दारुल इस्लाम : دارالاسلام  House of Peace इसको दारुल तौहीद دارُالتوحيد  भी कहा जाता है .यस उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँपर इस्लामी हुकूमत होती हो .और जहाँपर मुसलमान निडर होकर अपनी गतिविधियाँ चला सकें .दारुल इस्लाम मुसलमानों गढ़ होता है .अबू हनीफा ने यह नाम कुरान की इन आयतों से लिया था ."अल्लाह तुम्हें सलामती के घर (दारुल इस्लाम ) की ओर बुलाता रहता है ,ताकि तुम सीधे रास्ते पर चलो "
सूरा -यूसुफ 10 :25
(इसी आयत की तफ़सीर में लिखा है "जहाँ पर मुसलमानों की हर प्रकार की सुरक्षा हो ,और जहाँ से वह जिहाद करें तो उनपर कोई आपत्ति नहीं आये "इसी तरह लिखा है "और अल्लाह मुसलमानों के लिए ऐसा सलामती का घर (दारुल इस्लाम ) चाहता है जहाँ पर उनके मित्र और संरक्षक मौजूद हों "सूरा-अल अनआम 6 :128 .इसी दारुल इस्लाम का सपना दिखा कर जिन्ना ने मुसलमानों को पाकिस्तान बनवाने के लिए प्रेरित किया था .
क्योंकि जिन्ना की नजर में भारत ناپاك  नापाक (अपवित्र ) देश था ,और जिन्ना पाक پاك  (पवित्र )देश پاكِستان   बनाना चाहता था .
2 -दारुल हरब : دارالحرب House of War .युद्ध का घर ,यह उस भूभाग को कहा जाता है जहाँ गैर मुस्लिमों की संख्या अधित हो .या गैर मुस्लिम सरकारे हों ,या जहाँ पर प्रजातंत्र (Democracy ) चलती हो .या जिनका मुस्लिम देशों से विवाद हो .और यदि दारुल हरब के लोग दारुल इस्लाम में जाएँ तो उनको निम्न दर्जे का व्यक्ति या जिम्मी Zimmi मानकार जजिया लिया जाये .या कोई अधिकार नहीं दिया जाये
3 -दारुल अमन : دارالامن House of Safty .बचाव का घर यह उस भूभाग को कहा जाता है ,जहाँ अधिकांश गैर मुस्लिम रहते हों ,लेकिन मुसलमानों को भी कोई न कोई अधिकार दिया गया हो .या जहाँपर इस्लाम को खतरा होने का भय नहीं लगे .इस्लाम इस वर्गीकरण के अनुसार भारत भी एक "दारुल अमन "है .क्योंकि यहाँ मुसलमानों को हिन्दुओं से अधिक अधिकार प्राप्त हैं .
4 -दारुल हुंदा :دارالهنُنده  House of Calm .विराम का घर ,यह उस क्षेत्र को या उस देश को कहा जाता है ,जिसका किसी मुस्लिम देश से युद्ध या झगडा होता रहता हो .लेकिन किसी कारण से लड़ाई बंद हो गयी हो .और भविष्य में या तो समझौते की गुंजायश हो ,या फिर युद्ध की संभावना हो .और यह एक प्रकार की waite and watch की स्तिथि होती है
5 -दारुल अहद :دارُالعهد  House of Truce .युद्ध विराम का घर ,इसे दारुल सुलहدارالسُلح   या House of Treaty भी कहा जाता है ,यह उन देशो को कहा जाता है ,जिन्होंने मुस्लिम देशो से किसी प्रकार की कोई संधि या समझौता कर लिया हो .औए जिसे दोनो देशों के आलावा दुसरे मुस्लिम देशो ने स्वीकार कर लिया हो .
6 -दारुल दावा : دارُالدعوة House of Invitation .आह्वान का घर ,यह उन देशों या उन क्षेत्रों या उन इलाकों को कहा जाता है जहाँ गई मुस्लिम हों और जिनको मुसलमान बनाने के लिए कोशिश करना जरुरी हो .यहाँ के लोग इस्लाम के बारे में अधिक नहीं जानते हो .(ऐसे भूभाग को दारुल जहलियाدارالجاهلِية  या House of ingorant खा जाता है )और फिर किसी भी उपाय से उस भूभाग को दारुल इस्लाम में लेन की योजनायें बने जाती है या फिर उस क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ के मुसलमान कट्टर नहीं होते हैं और उनको कट्टर बनाने की जरूरत हो ,ताकि उनको जिहादी कामों में लगाया जा सके .और इस काम के लिए उस क्षेत्रों में जमातें भेजी जाती है

इस लेख से हमें यह समझ लेना चाहिए कि मुसलमानों ने विश्व के देशो या किसी देश के भूभाग या किसी क्षेत्र को जो अलग अलग दार या Houses में बाँट कर विभाजित किया है .वह राजनीतिक ,या भौगोलिक सीमाओं के आधार पर नहीं है .इस्लामी परिभाषा में "दार "कोई देश ,प्रान्त ,जिला या उसका कोई हिस्सा भी हो सकता है .और इन्हीं दार के house के हालात देख कर मुसलमान अपनी रणनीतियाँ तय करते है जैसे कहीं शांत हो जाते हैं और कही आतंकवाद को तेज कर देते हैं .मुसलमानों का एकमात्र उद्देश्य और लक्ष्य इन सब "दार "को दारुल इस्लाम के दायरे में लाने का है .ताकि दुनिया में " विश्व में इस्लाम राज्य Pan Islamic State "की स्थापना हो सके .
मुसलमानों की तरह Catholic Church ने भी देशों को बाँट रखा है .
आज इस बात की अत्यंत जरुरत है कि हम मुसलमानों कि कुटिल नीतियों और नापाक मंसूबों विफल करने का यत्न करते रहें ,और देश को
दारुल इस्लाम बनाने से रकने के लिए पूरी ताकत लगा दें .और इस पवित्र कार्य में लोगों को उत्साहित करें और हरेक साधनों का उपयोग करें .तभी देश और धर्म बच सकेगा .
(87/27)

www.TheReligionofPeace - Islam Loyalty to Non-Muslim Governments.htm