शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

इस्लाम में नफ़रत की राक्षसी शिक्षा !

इस्लाम  की  बुनियाद नफ़रत पर टिकी   है ,और  ऐसा कहना   गलत  बिलकुल  नहीं   लगता   .  क्योंकि यदि  हम  इस्लाम  का इतिहास   देखें  तो यह बात शतप्रतिशत   सही  सिद्ध  होती  है  ,  यही नहीं    कुरान   में  ऐसी कई  आयतें  मौजूद हैं  जिनमे   मुस्लिमों  के  प्रति नफ़रत  की  शिक्षा   दी  गयी  है  . सब  जानते हैं कि  भारत   का विभाजन  नफरत   के कारण  हुआ  था  , और  कश्मीर  की  समस्या के पीछे    भी  मुसलमानों   की  हिन्दुओं   से नफ़रत ही  है  .
वास्तव  में  इस्लाम  ने  जन्म  लेते ही पूरे  विश्व को दो भागों  में  बाँट   दिया  है  . एक तरफ मुसलमान   और  दूसरी  तरफ  काफ़िर .
  . चूँकि   कुरान   में सभी  गैर  मुस्लिमों   को  इस्लाम  का  दुश्मन माना   गया है  ,इसलिए मुसलमान सभी  गैर  मुस्लिमों  से  नफ़रत  करने  लगे  . और जब  मुसलमानों  में भी  अनेकों  फिरके बन  गए  , और  हरेक  फिरका खुद  को सही  और दूसरे को गलत साबित   करने लगा तो सभी  फिरके के लोग  एक दूसरे से नफ़रत   करने लगे  , और  धीमे  धीमे   इस्लाम की  इस राक्षसी नफ़रत   की आग  ने सारे  इस्लामी  जगत   को अपनी  लपेट में ले लिया है  .
 फिरभी मक्कार  मुस्लिम  नेता बेशर्मी  से यही  कहते  रहते  हैं  , कि अल्लाह और इस्लाम  की नजर में  सभी  मनुष्य   समान   हैं  . और  इस्लाम  आपसी   भाईचारे  की  शिक्षा  देता  है .दुनिया  में इस से बड़ा झूठ  और कोई  नहीं   हो  सकता  , और मुसलमानों से बड़ा राक्षस और कोई नहीं  हो सकता  ,यही बात इस लेख  में प्रमाण सहित   दी  जा रही  है  ,


1-मस्जिदों  में नफ़रत  की शिक्षा 
चूँकि  मुसलमानों   के  लिए मस्जिदों   में जाकर  नमाज  पढ़ना  अनिवार्य   है  , और  नमाज के बाद  मुल्ले जो खुतबे  ( प्रवचन )   देते हैं ,उनमें  नफ़रत की  तालीम   दी  जाती   है , और हरेक फिरके  की  अलग अलग  मस्जिद  होती  है  , और  वहीँ  से नफ़रत के बीज  बोये   जाते है  ,अक्सर  मुल्ले  कहते  रहते हैं  कि  इस्लाम में भेदभाव नही होता है .लेकिन    यूपी के बरेलवी जमात के मस्जिदों में ये नोटिस दिखना अब आम बात हो गयी है ,इसका  एक   नमूना  देखिये  कि  इस  मस्जिद   में  क्या लिखा  है  ?
" मस्जिद  कमिटी  का खास  जरूरी  ऐलान ,
 वे मस्जिद सुन्नी  हनफ़ी  सहीहुल अक़ीदा लोगों  की  है  ,हुजूर  के फरमान  सहाबा  के तरीके ,गोसो  ख्वाजा मखदूम  पाक  ख़ुसूसन  मसले आला  हजरत  इमाम अहमद राजा  खान बरेलवी  के  पैरोकार  हैं  , यहाँ  पर  देवबंदी  , बहाबी  , तबलीगी  व्  दीगर अक़ीदा  के लोग इस मस्जिद  में  नहीं  आएं  , और अगर आते हैं  तो नतीजे के खुद  जिम्मेदार   होंगे  "
नोट- इसके ऊपर या  मस्जिद  की  किसी  दीवार   पर  इस्तेहार  लगाना या  स्टिकर लगाना  मना  है  
गौरतलब है की इस बरेलवी जमात के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा है जिनके कदमो में अरविन्द केजरीवाल कदमबोशी करते है
नोट - इसकी  तस्वीर  देखिये

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 . अब पाठक  गण  बताये  की  लोगों  में नफ़रत  कौन  फैलाता है  ? और  जो  मुस्लिम  नेता  भाईचारे  की  वकालत  करते  रहते हैं   वह  झूठे हैं  कि  नहीं  ? और जब   खुद  मुसलमानों   के फिरकों   में नफरत बढ़ जाती  है  तो  सीरिया जैसा  हाल  हो   जाता   है  .
http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_11.html


2-शियाओं   का  मांस  खाने  वाले  सुन्नी 
सीरिया  में  होने वाले  जन  संहार   के  पीछे  कोई  राजनीतिक    कारण  या  सीमा विवाद   नहीं  है  ,  बल्कि सुन्नियों   द्वारा गैर  सुन्नियों    से  नफ़रत   है  .सुन्नी  शियाओं   को गैर  मुस्लिम  और इस्लाम  और  रसूल  का  दुश्मन   मानते हैं   , जिनके बारे में  कुरान  में  लिखा है   " जो लोग अल्लाह के  रसूल  से लड़ते   हैं  , उनकी  सजा यही  है कि बुरी  तरह  क़त्ल   किये जाएँ  , या उनके  हाथ  पैर  विपरीत दिशाओं   में काट  दिए  जाएँ  " सूरा -अल  माइदा  5 :33 

इन   दिनों  सीरिया में सुन्नी मुसलमान  यज्दियों  और  शियाओं   का क़त्ल   करके उनका  सफाया   करने में लगे हुए है  , जिसके लिए सुन्नियों   के  अनेकों   आतंकी गिरोह   बन   गए हैं  ,  उन्हीं   से एक  का नाम  "अल कतायब  अल फारूक -  كتائب الفاروق‎ " है .जिसका  अर्थ  "The Farouq Brigades  "  होता   है  . इस  दल  के स्थापक  का  नाम  "अबू  सक्कार -  ابو سكٌار " है  , इस  दल   का उद्देश्य  पूरे  मध्य  एशिया  में  सुन्नी  इस्लामी  खिलाफत   करना  और  सभी  गैर सुन्नियों   का  सफाया   करना  है   , यह शियाओं  से इतनी  नफ़रत  करते हैं  क़ि मारे गए   शिया व्यक्ति  की  लाश  से  दिल  और कलेजा  निकाल  कर  खा जाते  है  , और इसकी  विडिओ   बना कर सब जगह मिडिया में अपलोड कर देते हैं    , कुछ  दिनों   पहले ही  यह  खबर   लोगों  को   पता  चली   है . कुछ   समय  पहले अबू सक्कार   ने शियाओं से   कहा  था  " कुत्तो   मैं  कसम  खाता  हूँ  कि मैं  तुम्हारे  दिल  और   कलेजे  को  खा  जाऊँगा  "

Sakkar rants: 'I swear we'll eat from your hearts and livers, you dogs'He then raises one of the organs to his mouth and takes a bite


"يا كلاب، أقسم أنني سوف يأكل قلوب وأكباد الخاصة بك  "

 यह कह कर अबू  सक्कार  ने  एक  मरे हुए  शिया    के  शरीर  के हिस्से  ऊपर  उठा कर  दिखाए और  उस   लाश  के  दिल और  कलेजे  चबा   लिए

लो देखो इन नरपिशाचों को । सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता :-Photo-

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यही  घटना विडिओ   में  भी दी   गयी  है (  कृपया दिल मजबूत  करके  इस विडिओ  के  देखें  )Video
(WARNING GRAPHIC Syria Rebel Cuts out Soldier's Heart and Eats It)

https://www.youtube.com/watch?v=xEQFmZrQAx8

3-नर मांस खाना इस्लामी  परंपरा 
अरब के लोग  इतने  क्रूर    निर्दयी  और राक्षसी  स्वभाव  के  थे  ,कि उनमे  युद्ध  में  मारे गए  शत्रुओं   के  शरीरों  को फाड़  कर  उनके  दिल   और  कलेजा   खा  जाने  की  परंपरा    थी  , ऐसा वह   दुश्मनों  से  बदला  लेने के लिए  करते  थे  . और ऐसा  करने  में अपनी  शान   समझते   थे  . उनकी  यह  पिशाची  परंपरा   मुहम्मद  साहब   के समय  भी  थी  . ऐसी  ही  एक घटना  का विवरण  इस्लामी  इतिहासकार " इब्ने  इशाक "   ने अपनी  किताब  " सीरते  रसूलल्लाह -  سيرة رسول الله‎ "  में    दिया  है  . यह  घटना  शनिवार 19  मार्च सन 625 ( इस्लामी कैलेंडर  के अनुसार  3 शव्वाल 3  हिजरी "उहुद के युद्ध  की है  , जिसे " गजवए उहुद - غزوة أحد‎  "  भी  कहा  जाता है , मुसलमानों   की  तरफ  से इस  युद्ध   का नेतृत्व मुहम्मद साहब   के चचेरे  भाई " हमजा  बिन अब्दुल मुत्तलब - حمزة بن عبد المطلب  " कर रहे थे  ,और  दूसरी  तरफ  मुहम्मद  के  विरोधी  थे  . लेकिन इस  युद्ध   में  मुसलमान  पराजित   हो  गए , और "  हमजा  "  मारे  गए , और हमजा की लाश  युद्ध भूमि  में छोड़ कर  मुसलमान   भाग  गए.तभी  अबू  सुफ़यान की पत्नी    'हिन्दा , (मुआविया  की  माता और यजीद की दादी )  युद्ध भूमि    पर  उस  जगह गयी  जहाँ  हमजा की  लाश  पड़ी   थी  . हिन्दा  ने  हमजा   की  लाश    का  सीना फाड़ा  और सीने से दिल  और  कलेजा   बाहर निकाल  कर  चबा  लिया  ,  लेकिन  जब  वह उनको  नहीं  निगल  पायी  तो हमजा  के  दिल और कलेजे   को  थूक  दिया .
"According to Ibn Ishaq, after the battle, Hind cut open the body of Muhammad's uncle Hamza, whom she believed responsible for the death of her relatives, cut out his heart, and gnawed on it. According to Ibn Ishaq, she couldn't swallow it and spat it out.

लेकिन  प्रसिद्ध सुन्नी   इतिहासकार " अब्दुल बर्र -ابن عبدالبر‎   "( मृत्यु 2  दिसंबर  सन 1071 में हुई )    ने अपनी किताब  "इस्तियाब  फी  मअरकतुल  असहाब -الاستعياب في معرفة الاصحاب    "  में लिखा   है  कि हिन्दा  हमजा   का  दिल  और  कलेजा पका  कर  खा  गयी  . और  लोगों  से बोली  कि मैंने  मुसलमानों   से  अपने लोगों   की हत्या का   बदला   ले लिया

"Ibn ‘Abdu l-Barr states in his book "al-Istî‘âb" that she cooked Hamza's heart before eating it."

शायद इसी   लिए  कुरान  की  इस  आयत  में  मुसलमानों  से  पूछा   गया है   कि  क्या वह  अपने ही  भाई    (  मुसलमान )   का   मांस  खाना  पसंद  करेंगे  ," क्या  कोई इस  बात  को पसंद   करेगा  कि अपने ही किसी  मरे हुए  भाई  का  मांस   खाए  " 
 सूरा  - अल हुजुरात  49:12 

 याद रखिये  इस  आयत में मनुष्य   का  मांस   खाने   के बारे में   सवाल  किया गया   है , मनुष्य   का  मांस  खाने  की  मनाही  नहीं   की गयी है
 यही   कारण  है  कि  मुसलमान   यहाँ भी गुप्त  रूप  से अपने दुश्मनों   का  मांस  खाते  हैं   , सीरिया    में  तो यह राक्षसी  कर्म  खुले  आम  हो  रहे हैं  ,

देखिये  विडिओ -डरावना  इस्लाम

ttps://www.youtube.com/watch?v=fZGGaDfeLTw


http://realityofsecularism.blogspot.in/2013/11/blog-post_7.html

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