शनिवार, 30 जनवरी 2016

भारत में 21 प्रतिशत मुस्लिम अपराधी

अपने 60  साल   के शासन  ने  कांग्रेस ने  भारतीयों   को सेकुलरज्म   का ऐसा रोग  लगा दिया कि  उनकी  बुद्धि   में लकवा मार गया  , वह  मान बैठे हैं कि अपराधियों   का  कोई  धर्म  नहीं होता , और  मुसलमान  कभी  अपराधी या  आतंकी  नहीं   हो  सकते , फिर भी जब  मुस्लिम अपराधी  पकड़े  जाते हैं   तो भी  अखबार  और टी  वि  वाले उनको मुस्लिम   की  जगह एक  समुदाय   कहते हैं  , ऐसे बहुत कम   लोग हैं जो  निडर होकर आतंकियों   को  मुसलमान    कह देते हैं  ,

भारत सरकार,गृह मंत्रालय के संलग्‍नक कार्यालय नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो(National Crime Records Bureau )द्वारा    भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण हेतु भारतीय पुलिस को सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करने का अधिदेश राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो को दिया गया है ।

रा.अ.रि.ब्‍यू.(N.C.R.B.)देश भर में "अपराध अपराधी सूचना प्रणाली (अ.अ.सू.प्र.)के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो एवं जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो में 762सर्वर-आधारित कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम स्‍थापित कर चुका है,ताकि अपराध,अपराधियों से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर डाटा बेस को व्‍यवस्थित किया जा सके .

ब्यूरो के अनुसार देश की जेलों में सजा काट रहे कुल कैदियों (3.85 लाख) में से केवल मुस्लिम अपराधियों की संख्या 53 हजार 836 (21 प्रतिशत) हैं | इसमें भी उत्तर प्रदेश के जेलों में ही मुस्लिम कैदियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है, उसके बाद बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

सिख अपराधियों की संख्या (सजायाफ्ता और विचाराधीन) 4 प्रतिशत है।
और देश की जनसंख्या में दो प्रतिशत की भागीदारी करने वाले क्रिश्चियन का (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों आंकड़ा भी   4 प्रतिशत है।
जबकि भारत की कुल जनसंख्या का 84 प्रतिशत हिन्दू हैं ,फिर भी अपराधों में संलिप्तता का औसत प्रतिशत 7% के आसपास हैं ,क्योंकि भारत के जेलों में बंद (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों में से 7.4 फीसदी हिन्दू हैं .

यानी कहने का मतलब यह कि देश का हरेक 16वां व्यक्ति मुस्लिम है, लेकिन देश में होने वाले 100 अपराधों में 21 अपराध मुस्लिमों द्वारा  ही   किये  जाते हैं   .
अपराधों   के  इन आंकड़ों   को देख कर  देशभक्त  हिन्दुओं   को  सचेत  होने की  जरुरत है  , क्योंकि  जिस  देश की कुल आबादी  का  लगभग  पांचवां   भाग अपराधी ( मुसलमान ) हो ,उसकी  सुरक्षा और अखंडता हमेशा ही  खतरे में  बनी  रहेगी  , और यह खतरा और भी  गंभीर   हो  जायेगा  जब इस बात को मान  लिया जाये  कि अपराधियों और आतंकियों   का  कोई  धर्म  नहीं   होता। जबकि यह एक अकाट्य  सत्य है कि अपराध और मुसलमान पर्यायवाची  शब्द हैं  . ब्यूरो   में  दिए  गए  मुसलमानों  द्वारा  किये गए अपराधों   का वर्गीकृत  विश्लेषण  करने से पता  चलता है कि मुसलमान  , चोरी  , डकैती   ,लूट ,हत्या  , बलात्कार जैसे सामाजिक  अपराधों   के  आलावा  पाकिस्तान   के लिए  जासूसी  , देश में तोड़फोड़  ,सम्प्रदायवादी  दंगे , बम विस्फोट  जैसे  अपराधों  में संलग्न  पाये  गए  हैं  ,जो   स्पष्ट  रूप   में देश   द्रोह   है , लेकिन  जीतनी  भी राजनीतिक  पार्टियां हैं   वह मुस्लिम  वोटों  के लिए  सेकुलरिज्म  की आड़  में इस सत्य  को  स्वीकार   नहीं  करती  , क्योंकि  जो भी  यह बात  कहता , या लिखता है ,उस पर सम्प्रदायवादी , होने का लेबल  लगा दिया जाता है  .
ऊपर से  मुस्लिम  विद्वान  और  नेता सेकुलरिज्म का  ऐसा  पाखण्ड   करते  है  ,कि  जैसे यही लोग  सेकुलरज्म के ठेकेदार है. जबकि  वास्तव में  मुसलमान  सेकुलरिज्म   के दुश्मन  है  , इस  बात की  सत्यता   की  जाँच  करने के लिए किसी भी  मुस्लिम  से पूछिये  कि वह किसी भी  ऐसे मुस्लिम  देश का  नाम  बताये  जहां सेकुलर  सरकार हो , और   गैर  मुस्लिमों  को  वही  अधिकार  प्राप्त हों  , जो वहां के मुस्लिमों    को  हों ,
क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ  हिन्दुओं   ने  ले  रखा है? यह  अनादि काल हमारा  देश  है  , हम  सेकुलरिज्म के बहाने मुस्लिम  तुष्टिकरण और उनकी  राष्ट्र विरोधी चालों   को  सफल  नहीं  देंगे

 जय हिन्दू  राष्ट्र !

 नोट - यह  महत्वपूर्ण  जानकारी   हमारे   जागरूक पाठक  और मित्र  श्री जितेंद्र  प्रताप  सिंह  जी  ने  भेजी    थी , इसके लिए उनका  आभार  . (212)

http://ncrb.gov.in/

शनिवार, 23 जनवरी 2016

इस्लाम की असहिष्णुता

वेद  में बड़ी  ही शिक्षाप्रद   बात  कही  है  , जो उन  लोगों  पर  लागू  होती  है  , जो  किसी न किसी  कारण से मुसलमान बन  गए हैं , वेद  मन्त्र  है ,
"अन्धं  तमः प्रविशन्ति ये अविद्यामुपासते "यजुर्वेद -40:9 अर्थात  ,जो लोग अविद्या (अज्ञान )  की उपासना  करते  हैं  , वह अज्ञान के  ऐसे अँधेरे  कुएं  में   गिर  जाते  हैं  ,जिस  से निकलना  कठिन है .
यह  बात  इस्लाम  की धर्म परिवर्तन   की  नीति  और  तरीके  पर बिलकुल  लागु  होती  है  , जिसे   जानने  के  बाद  हमें स्वीकार  करना पड़ेगा कि सचमुच  इस्लाम  धर्म  नहीं  बल्कि अज्ञान  का एक ऐसा  अँधेरा  कुंआ  है   , जिस में  गिर  जाने  पर  बाहर निकलने के लिए  निडरता  और इस्लाम  की  असलियत को समझना  बहुत  जरुरी  है .क्योंकि  आज  भारत  में  जितने  भी मुसलमान हैं  , उनके पूर्वज इस्लाम के गुणों से प्रभावित  होकर  नहीं बल्कि  मजबूरी  में  मुसलमान   बने   थे  . या  आजकल वह  भोली भाली हिन्दू  लड़कियां  मुस्लमान   बन  जाती  हैं  , मक्कार  मुस्लिम  लड़कों   के फरेबी  प्रेम जाल  में फस  जाती  है  .
यही  नहीं  यह  भी  पता  चला है  कि सेकुलरिज्म  और  भाईचारा   की आड़  में  कुछ  ब्लॉगर  , लेखक ,और धूर्त  इस्लाम के प्रचारक हिंदुओं  गुमराह  करने में  लगे  हुए  हैं  , और वह धर्म परिवर्तन  के  लिए ऐसे   लोग  चुनते  हैं  जिन्हें  न तो  हिदू गर्न्थों  का ज्ञान  है  और  न इस्लाम  की दोगली निति   का  पता है , ऐसे ही लोगों  की  आँखें खोलने के  लिए  ही यह  लेख   दिया   जा रहा  है
2-कुरान का पाखण्ड 
जिस तरह  से ढोंगी , पाखंडी  , धोखेबाज  और  मक्कार  लोगों  के अज्ञान  का  फायदा उठाकर अपनी लुभावनी  बातों  के  जाल में फसा  कर ठग  लेते  हैं  , उसी तरह कुरान में  कुछ  ऎसी आयतें  भी  देदी  गयीं  हैं  ,  जिन से इस्लाम  का असली खूंखार रूप ढक  जाये और  अज्ञानी  लोग  इस्लाम  के प्रति   आकर्षित  हो जाएँ  , जिस से उन लोगों  का  धर्म परिवर्तन  करने  में आसानी  हो  जाये  , अक्सर चालाक  मुल्ले  इस्लाम की तारीफ  करने के लिए  इन्ही  आयतों  का सहारा  लेते   हैं  ,

"तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म  और हमारे  लिए  हमारा  धर्म " सूरा -काफिरून 109 :6

" कह दो यह ( इस्लाम ) अल्लाह  की तरफ  से एक सत्य  है , अब  जो चाहे  इसे कबूल  कर  ले , और  जो चाहे इस  से इंकार  कर दे "
 सूरा - अल कहफ़ 18 :29

 "धर्म  के  बारे  में   किसी  पर  जबरदस्ती   नहीं  है " सूरा - बकरा  2 :256

कुरान  ऎसी  आयतें  पढ़  कर  जो  लोग  इस्लाम को भी धर्म समझ  लेते  हैं  , वह नहीं जानते  कि हाथी  की तरह इस्लाम के खाने  के और दिखने के दांत  अलग   है  ,और  कोई  इस्लाम के अंध कूप में  में गिर  जाये  तो  बाहर  निकलना  सरल  नहीं  है ,क्योंकि इस्लाम ने  धर्म परिवर्तन  के बारे में  दोगली  नीति   अपना  रखी  है  ,

3-इस्लाम परित्याग या  इरतिदाद 

शरीयत के कानून  में  इस्लाम  का परित्याग  करने  के  लिए अरबी  का पारिभाषिक " इरतिदाद - ارتداد "   इस्तेमाल  किया  जाता  है. जिसका अर्थ अंगरेजी में "Apostasy "  होता  है  . यह शब्द अरबी की  मूल शब्द  "रिद्दाह - ردة‎  "  से बना  है  , जिनके अर्थ " पलट  जाना (relapse )  और  वापसी  (regress)   भी  होते हैं  . और  जो  भी  मुसलमान  इस्लाम  छोड़ता  है ,और  वापस अपने  पुराने धर्म  में या किसी और धर्म  में  जाता  है , उसे " मुरतिद -مرتد   "  कहा  जाता है। और  जिस  देश में इस्लामी  हुकूमत  होती  है  वहाँ  मूरतिद  को  मौत की सजा  दी  जाती  है  ,  और जहाँ इस्लामी  कानून  नहीं   चलता   है  वहाँ  के मुल्ले उस मूर्तिद  की  हत्या करावा  देते  है  .क्योंकि मुहम्मद  ने  हदीसों  में  मुरतिद  की  हत्या  करने  का आदेश  दिया  गया  है  , जिसका पालन  करना  हर मुस्लिम   का  फर्ज  माना   गया  है  .

http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm

4-इरतिदाद के चार प्रकार 

इस्लाम  को त्यागने यानी 'इर्तिदाद'  के चार प्रकार बताये  गए  हैं , जिनके  लिए शरीयत में  मौत  की सजा  का  विधान  है ,

1.ईमान  में इरतिदाद -"रिदाह फिल अक़ायद -الردة في الاعتقاد  "( Apostasy in beliefs)
 जैसे किसी  को अल्लाह का  पुत्र या अवतार मानना  और अल्लाह  के समान  उसकी इबादत  करना  ,

.2.शब्दों  में इरतिदाद "रिदाह फ़िल कलिमात -  الردة في الكلمات  " (Apostasy in words )
अल्लाह  के  रसूल   की बुराई करना या मजाक उड़ाना  .

3.कामों से इरतिदाद "रिदाह फिल अमल - الردة في العمل  " (Apostasy in action )

जैसे  कुरान  को नीचे पटक देना , जलाना  या  फाड़ना ,रसूल  की तस्वीर  बनाना   मूर्ति पूजा करना ,किसी देवी देवता  को प्रणाम  करना इत्यादि

4.विधि में चूक से इर्तिदाद "रिदाह अन तरीक अल सहू -  الردة عن طريق السهو   " (Apostasy by omission)

इसमे चूक से स्वधर्म त्याग करना  भी शामिल  है  , जैसे  नमाज छोड़  देना इस्लाम  में  बताये गए कानून और  नियमों  का पूरी तरह से पालन  नहीं करना  . इन सभी बातों  के आधार पर मुल्ले मौलवी  तय  करते  हैं  कि किसी  मुस्लिम  ने  इर्तिदाद  किया  है अथवा नहीं ,और उसे " मुर्तिद " घोषित   करके मौत की  सजा  देना  चाहिए  या  नहीं  . मुस्लिम  देशों  में वहाँ  की अदालतें खुद मूर्तिद  को मौत   की सजा  दे  देती  हैं  .  लेकिन  भारत में  यहाँ  के मुफ़्ती और मुल्ले  " मूर्तिद "  की  हत्या  करने    वाले   को इनाम देने  की  घोषणा कर  देते  हैं ,जिस से इस्लाम  के विरुद्ध  लिखने और  बोलने   वाले  विदेशों में  जाकर  बस  गए है  . जैसे "सलमान रश्दी "और " तस्लीमा नसरीन "आदि  .

5-इस्लाम  की असहिष्णुता 

" जो लोग चाहते  है कि  जैसे  वह काफिर  हैं  , तुम भी  काफिर  हो जाओ , तो तुम ऐसे  लोगों  को अपना मित्र नहीं  बनाना  ,  बल्कि उनको  जहाँ  पाओ  पकड़ो  और उनको  क़त्ल  कर  दो " सूरा -निसा 4 :89

"और  जो लोग तुम्हारे  धर्म में  बुराई  निकालें  तो उन से  लड़ाई  करते  रहो ,इस  से  वह ऐसा  करने  से बाज  आयेंगे "सूरा -तौबा 9 :12
"और  तुम में से  जो  भी अपना  धर्म (इस्लाम )  छोड़  कर फिर  से काफिर  हो  जाये तो समझो  उसका  किया  गया  सब   कुछ  बेकार   हो  गया  , और  वह  सदा  के  लिए  जहन्नम   में रहेगा  "सूरा -बकरा 2 :217
"जिन लोगों  ने इस्लाम  के  बाद फिर  से  कुफ्र  अपनाया  तो  उनको  कुछ नहीं  मिलेगा  , और अगर वह तौबा कर  लें  तो  उनके लिए अच्छा  होगा  , फिर भी यदि  वह तौबा  से  मोड़ लें  ,तो उनकी  कोई  मदद  नहीं होना  चाहिए " सूरा-तौबा  9 :74

" तुम इस्लाम के विरोधी  इन गुटों से पूछो ,कि क्या तुम अल्लाह की आयतों और उसके रसूल  का  मजाक उड़ा रहे हो ? यानि तुमने  इस्लाम अपनाने  के बाद कुफ्र  किया  है  . इसलिए  हैम  एक  गिरोह  को  माफ़ भी  कर देंगे ,तो दूसरे  को यातना  देकर ही   रहेंगे  . क्योंकि ऐसा  करना  अपराध   है " सूरा -तौबा 9 :66

6- इस्लाम  का अंधा कानून 

इस्लामी  देशों  में  इस्लाम  छोड़ कर  कोई  अन्य  धर्म   स्वीकार  करने  पर  हमेशा  मौत    की सजा  दी  जाती  है  , या  हत्या  कर  दी  जाती है , क्योंकि ,
शरीयत  के  कानून  के अनुसार  यदि  कोई  स्वस्थ चित्त  वाला  वयस्क   पुरुष या स्त्री  अपनी  इच्छा  से  इस्लाम  छोड़  कर  कोई अन्य धर्म  अपना   लेता  है  , तो  इस अपराध  के लिए उसका  खून  बहा  देना  चाहिए, और  यदि वहाँ  इस्लामी   हुकूमत  हो तो जज  या काजी ,और  काबिले  का  मुखिया  उसकी  सजा  को  पूरा  करे  . क्योंकि  रसूल  का  हुक्म  है इस्लाम  त्यागने  और  मुसलमानों  की  जमात  छोड़ने वालों  को मौत  की  सजा    देना  चाहिए  , जैसा  इन हादिसों  में   कहा  गया  है ,

(See al-Mawsooâah al-Fiqhiyyah, 22/180. )

1."अनस  ने  कहा कि इब्ने अब्बास  ने  बताया ,रसूल  ने  कहा  है जो  भी  व्यक्ति अपना  धर्म ( इस्लाम )  बदलेगा  उसे  मार  डालो "
‏ "‏ مَنْ بَدَّلَ دِينَهُ فَاقْتُلُوهُ ‏"

'Whoever changes his religion, kill him.'"

 सुन्नन नसाई - जिल्द 5 किताब 37 हदीस 4069 

2.अब्दुल्लाह  बिन  मसूद  ने  कहा  कि रसूल  का आदेश  है  ,जो  भी  इस्लाम  और  जमात   को छोड़  दे  तो उसको  क़त्ल  कर  दो "

 وَالتَّارِكُ لِدِينِهِ الْمُفَارِقُ لِلْجَمَاعَةِ ‏"‏ ‏.‏  "

"one who leaves his religion and splits from the Jama`ah.should be killed”

इब्ने  माजा -  जिल्द 3  किताब  20  हदीस 2534 

7-इस्लाम छोङने  की सजा 

सही  बुखारी  को हदीस   की सबसे प्रमाणिक  हदीस   की  किताब  माना  जाता  है  , क्योंकि इस्लामी  देशों  में  उसी  के आधार  पर शरीयत  के  कानून   बनाये  गए  हैं  , इसी  किताब  में  इस्लाम  छोड़ कर  अन्य धर्म अपनाने     वाले  को क़त्ल  करने  का   आदेश   दिया  गया  है , नमूने  के लिए  चार  हदीसें  दी  जा रही  हैं   ,

1-इकिरिमा ने   बताया  कि रसूल का  हुक्म  है ,यदि  कोई मुस्लिम  इस्लाम  छोड़  देता  है  ,तो बिना  किसी  शक  के   उसको  क़त्ल  कर  दो  , और  यदिकोई इस्लाम  अपनाता   है  तो उस से  कोई सवाल  नहीं  करो "
 सही बुखारी - जिल्द 4  किताब 52 हदीस 260 

2-इकिरिमा  ने  कहा  कि रसूल  ने कहा  है  ,जोभी इस्लाम   का त्याग  करता है  ,  उसे  क़त्ल  कर  दिया  करो "

 सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 57

3-अबू  मूसा  ने मुआज   को  बताया  कि एक  मुस्लिम  ने   यहूदी  धर्म अपना  लिया  है  . यह सुनते  ही  मुआज बोला  , मैं तब तक  शांत   नहीं  बैठूँगा  जब तक उसको  क़त्ल   नहीं  कर देता  , क्योंकि रसूल  का यही  आदेश  है  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 89 हदीस 271

4-रसूल  ने  कहा  कि कुछ ऐसे  मुर्ख  है  , कि इस्लाम  उनके  गले  नीचे  नहीं  उतरता , और ऐसे  ही  लोग इस्लाम   छोड़  देते है  , इसलिए तुम्हें  जहाँ  भी ऐसे लोग  मिलें  उनको  खोज खोज  कर  क़त्ल  कर  दिया  करो  , क़ियामत   के दिन तुम्हे  इसका उत्तम इनाम  मिलेगा  "

सही बुखारी - जिल्द 9 किताब 84 हदीस 64

8-इस्लाम त्यागने पर फतवा 

इस्लाम की पक्षपाती नीति और दादागीरी इस  बात  से  पता  चलती  है  ,कि यदि  कोई अपना  धर्म त्याग कर इस्लाम  काबुल  करता  है  तो कोई आपत्ति   नहीं  करता  ,लेकिन अगर  कोई मुस्लिम इस्लाम  को त्याग कर अन्य धर्म अपना  लेता  है  ,तो मुल्ले उसे " मुरतिद " घोषित   करके क़त्ल  के योग्य ठहरा  देते  है  . इसके  प्रमाण  के  लिए मिस्र  के  काहिरा  की इस्लामी यूनिवर्सिटी "जामअ तुल अज़हर शरीफ - جامعة الأزهر (الشريف) "के  मुफ्ती "अब्दुल्लाह  मिशदाद - عبد الله المشد‎ "  ने 23  नवम्बर सन  1978  में  उस  समय  जारी किया था ,जब एक  मुस्लिम  ने इस्लाम  को छोड़  कर ईसाई धर्म अपना  लिया  था  .  और  कुछ  लोगों  ने  मुफ़्ती  से इस्लाम  त्यागने की सजा  के  बारेमे  प्रश्न  किया  था , उसी  फतवे  के मुख्य अंशों   का  हिन्दी अनुवाद  दिया   जा  रहा  है  ,

सवाल  - इस व्यक्ति  के  बारे  में  शरीयत  का  कानून  क्या  कहता  है ? और क्या उसके बच्चे  मुसलमान  माने  जायेगे ? या  ईसाई ?

जवाब -शरीयत  के अनुसार  इस व्यक्ति  ने "इरतिदाद " किया  है  . और अगर  वह  तौबा ( repent )  नहीं करता  तो शरई  कानून  के मुताबिक उसको क़त्ल  कर देना  चाहिए  .  जहां  तक बच्चों  का सवाल  है ,तो  अभी वह  नाबालिग  हैं   . और यदि  बालिग  हो जाने  पर  वह  भी तौबा नहीं  करते  और  मुसलमान  नहीं  बनते  तो उनको  भी  क़त्ल  कर  देना चाहिए  . यही कानून  है  .
प्रमाण  के  लिए  उस फतवा  की लिंक और  इमेज   दी  जा रही  है    .

http://www.councilofexmuslims.com/index.php?topic=24511.0

http://en.wikipedia.org/wiki/File:Rechtsgutachten_betr_Apostasie_im_Islam.jpg

9-इस्लाम छोङने   वाले 

चूँकि इस्लाम  तर्कहीन  , निराधार और कपोल  कल्पित  मान्यताओं  पर  ही टिका  हुआ  है  ,  जिसे  ईमान  के  नाम  पर  मुस्लिम  बच्चों   पर थोप  दिया   जाता  है  , जिस से  उनकी सोचने समझने की  बुद्धि  कुंद  हो  जाती  है और  बड़े  होकर  वह  कट्टर जिहादी  बन  जाते  हैं  , लेकिन जब  भी  किसी बुद्धिमान  को इस्लाम   के भयानक और  मानव  विरोधी  असली रूप  का  पता  चल  जाता  है  ,वह  तुरंत इस्लाम  के अंधे  कुएं  से  बाहर  निकल   जाता  है  . आयुसे ही  कुछ सौभाग्य शाली  प्रसिद्ध  लेखकों  ,मानवता  वादी   का  संक्षिप्त  परिचय   दिया   जा  रहा  है  ,
1-इब्ने वर्राक (ابن وراق‎  )-इनका  जन्म  पाकिस्तान  में  हुआ  था  . यह  उनका  असली  नाम  नहीं   है  , इनके  नाम  का अर्थ  है " कागज  बनाने  वाले  का बेटा "  क्योंकि उनके पिता  कागज  बनाते  थे  . इन्होने  इस्लाम  की पोल  खोलने  के  लिए  कई किताबें और  लेख  प्रकाशित  किये हैं  ,इनको  दूसरा  सलमान रश्दी   भी  कहा  जाता  है  .  इनकी साईट  है SecularIslam.org

2-तस्लीमा नसरीन(  তসলিমা নাসরিন  ) -इनका जन्म बंगला देश  में 25 अगस्त सन 1962  में  हुआ  था  . यह इस्लाम  छोड़कर  नास्तिक ( Atheist)  बन  गयी , इनकी  किताब "लज्जा "पर मुल्लों  ने   इनकी हत्या   करवाने  का  फतवा  दिया  था ,इनकी  साईट  का  पता  है ,

TaslimaNasrin.com

3-अली सीना ( علي سينا )-इनका  जन्म  ईरान  में हुआ था  , यह  भी इस्लाम से आजाद  होकर  नास्तिक (Atheist) बन  गए और इस्लाम  के महान आलोचक  और  लेखक  हैं ,इनकी  किताबों और लेखों  के  कारन  इनको  कई  बार  गिरफ्तार  भी  किया  गया  था  . लेकिन इनके तर्कों और  प्रमाणों के सामने  मुल्ले   निरुत्तर  हो  गए  ,इन की  साईट  का नाम  है , FaithFreedom.org

4-डॉ ,परवीन दारबी (پروین دارابی  )-इनका  जन्म  ईरान  की राजधानी तेहरान  में सन 1941  में  हुआ था  , यह  भी इस्लाम  को ठुकरा  कर   नास्तिक  बन  गई  और  अमेरिका  में बस  वहाँगयी महिलाओं  के अधिकारों की रक्षा  के  लिए  प्रयास  रत  हैं   . इन्होने  भी  कई किताबें  और  लेख  प्रकाशित  किये जिन में  इस्लाम  को बेनकाब  किया   गया  है   इनकी  साईट  है .Homa.org

I5-नौनी दरवेश ( نوني درويش‎  )-इनका   जन्म  सन  1949  में मध्य एशिया  में  हुआ  था  . इन्होने  मिस्र में अमेरिका  और  मिस्र की तरफ से एक  मानव अधिकार रक्षक  की तरह  काम  किया  था  , इन्होने  भी  इस्लाम  छोड़  कर ईसाई धर्म  अपना  लिया   है  . इनकी प्रसिद्ध  किताब  "  Now They Call Me Infidel  " पर भी फतवा   जारी   हुआ है ,)-NonieDarwish.com

6-अनवर शेख -इनका  जन्म एक  कश्मीरी  पंडित  के घर  हुआ था  , जिसे  बल पूर्वक  मुसलमान  बना  दिया   था इन्होने अरबी  फ़ारसी  के साथ इस्लाम  का  अध्यन  किया था  . लेकिन  इस्लाम    की  हकीकत   पता  होजाने  पर  यह  हिन्दू  बन  गए  और अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रख  लिया  . इनकी  साईट  का  नाम   है
www.islam-watch.org

इसके आलावा   इनके  लेख  इस  साईट http://islamreview.org/anwarshaikh/author.html   में  और यू ट्यूब  में  भी   हैं  जिनका  शीर्षक  है ,Islam can't co-exist with other religions" Anwar Shaikh. Part 1/3 ..

 www.youtube.com/watch?v=_HNNgKiGyWE

10-इस्लाम सवालों से डरता  है 
जिस तरह  से  हरेक  बड़े से बड़ा अपराधी और भ्रष्ट   नेता  भी  खुद  को निर्दोष  और साफ सुथरे चरित्र   वाला   व्यक्ति  होने  का दावा   किया  करता है , लेकिन जब   निष्पक्ष  जाँच   की  जाती  है तो पूछे  गए सवालों   से घबरा  जाता  है  , क्योंकि सवालों  से  उसके  निर्दोष  होने  के दावे  का भंडा  फुट   जाने  का  डर   लगता  है  , इसी  तरह  इस्लाम  भी  लोगों  से  सिर्फ  ईमान  लाने   पर जोर  देता  है  , क्योंकि  इस्लाम में अल्लाह ,रसूल  और  कुरान  की सत्यता  के बारे में  सवाल करना  और वाद विवाद करने  को  गुनाह  माना  जाता  है  . इसी   लिए  मुल्ले  मुस्लिम  बच्चों   को  कुरान  का व्याकरण सम्मत अर्थ  सिखाने  की जगह कुरान  को तोते  की  तरह रटने पर बल  देते  हैं ,क्योंकि मुल्लों  को डर  लगता है कि कुरान के सही अर्थ जानकर  लोग  सवाल  करेंगे ,और इस्लाम की  असलियत पता  होने  पर  इस्लाम  छोड़  देंगे  ,  जैसा  कि खुद  कुरान  में  लिखा  है

"तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए ,तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए "

सूरा -मायदा 5 :102 

और यही  कारण  है  कि जब  भी कोई  इस्लाम   की बेतुकी ,तर्कहीन , अमानवीय ,और अवैज्ञानिक बातों  के  बारे  में  सवाल  करता है ,या  उंगली उठाता  है  ,तो  मुसलमान  उत्तर देने या खंडन  करने की  बजाय लड़ने और दंगे करने  पर उतारू  हो   जाते हैं  ,इसलिए सवाल करने  वालों  से निपटने  के लिए  कुरान में पहले  से ही  यह आदेश  दे  दिया गया  है  ,कि ,
"और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये ,तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना ,और इस तरह उनको कुचल देना "
सूरा -मुहम्मद 47 :4 

इसीलिए दुनिया भर  के सभी मुस्लिम नेता  , गुंडे , दादा ,स्मगलर ,डॉन  और आतंकवादी कुरान की  इसी नीति का  पालन  करते  हैं,जिसे  रसूल की सुन्नत माना  जाता  है  . जो देश और  हिन्दू धर्म  के लिए खतरा  है  ,हम सिर्फ तर्क  से ही  इनका  मुकाबला  करें  तो बहुत होगा  .जैसे महर्षि दयानंद  ने  अपनी विश्व  प्रसिद्द  पुस्तक  " सत्यार्थ प्रकाश " में  इस्लाम  का  तर्क पूर्ण  खंडन  करके  मुल्ले  मौलवियों   को निरुत्तर  करके  सिद्ध  कर दिया  है  कि दुनिया  को डराने वाला  इस्लाम खुद सबसे  बड़ा  डरपोक  है ,  जिसमे सत्य  का सामना  करने   की  हिम्मत  नहीं  है  . इसलिए यदि  सभी  हिन्दू  सेकुलरिज्म  का  चक्कर  छोड़  कर  निडरता  से  इसलाम  की विस्तारवादी और अमानवीय  नीतियों  का भंडाफोड़  करते रहें  तो कोई शंका नहीं कि इस देश  से  इस्लामी  आतंक   का  सफाया   नहीं  हो  जाये  ,  केवल  साहस  की  जरुरत  है ,लोगों  को इस्लाम की असलियत   के बारेमें  सप्रमाण   जानकारी  देते  रहिये यही समय की  मांग  है  ,सिर्फ  पाकिस्तान  को कोसने से  कुछ नहीं  होगा  , जैसे रात  दिन  शक्कर -शक्कर  जपने  से  मुंह  मीठा  नहीं  हो सकता  .

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