शनिवार, 30 जनवरी 2016

भारत में 21 प्रतिशत मुस्लिम अपराधी

अपने 60  साल   के शासन  ने  कांग्रेस ने  भारतीयों   को सेकुलरज्म   का ऐसा रोग  लगा दिया कि  उनकी  बुद्धि   में लकवा मार गया  , वह  मान बैठे हैं कि अपराधियों   का  कोई  धर्म  नहीं होता , और  मुसलमान  कभी  अपराधी या  आतंकी  नहीं   हो  सकते , फिर भी जब  मुस्लिम अपराधी  पकड़े  जाते हैं   तो भी  अखबार  और टी  वि  वाले उनको मुस्लिम   की  जगह एक  समुदाय   कहते हैं  , ऐसे बहुत कम   लोग हैं जो  निडर होकर आतंकियों   को  मुसलमान    कह देते हैं  ,

भारत सरकार,गृह मंत्रालय के संलग्‍नक कार्यालय नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो(National Crime Records Bureau )द्वारा    भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण हेतु भारतीय पुलिस को सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करने का अधिदेश राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो को दिया गया है ।

रा.अ.रि.ब्‍यू.(N.C.R.B.)देश भर में "अपराध अपराधी सूचना प्रणाली (अ.अ.सू.प्र.)के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो एवं जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो में 762सर्वर-आधारित कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम स्‍थापित कर चुका है,ताकि अपराध,अपराधियों से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर डाटा बेस को व्‍यवस्थित किया जा सके .

ब्यूरो के अनुसार देश की जेलों में सजा काट रहे कुल कैदियों (3.85 लाख) में से केवल मुस्लिम अपराधियों की संख्या 53 हजार 836 (21 प्रतिशत) हैं | इसमें भी उत्तर प्रदेश के जेलों में ही मुस्लिम कैदियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है, उसके बाद बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

सिख अपराधियों की संख्या (सजायाफ्ता और विचाराधीन) 4 प्रतिशत है।
और देश की जनसंख्या में दो प्रतिशत की भागीदारी करने वाले क्रिश्चियन का (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों आंकड़ा भी   4 प्रतिशत है।
जबकि भारत की कुल जनसंख्या का 84 प्रतिशत हिन्दू हैं ,फिर भी अपराधों में संलिप्तता का औसत प्रतिशत 7% के आसपास हैं ,क्योंकि भारत के जेलों में बंद (सजायाफ्ता और विचाराधीन) कैदियों में से 7.4 फीसदी हिन्दू हैं .

यानी कहने का मतलब यह कि देश का हरेक 16वां व्यक्ति मुस्लिम है, लेकिन देश में होने वाले 100 अपराधों में 21 अपराध मुस्लिमों द्वारा  ही   किये  जाते हैं   .
अपराधों   के  इन आंकड़ों   को देख कर  देशभक्त  हिन्दुओं   को  सचेत  होने की  जरुरत है  , क्योंकि  जिस  देश की कुल आबादी  का  लगभग  पांचवां   भाग अपराधी ( मुसलमान ) हो ,उसकी  सुरक्षा और अखंडता हमेशा ही  खतरे में  बनी  रहेगी  , और यह खतरा और भी  गंभीर   हो  जायेगा  जब इस बात को मान  लिया जाये  कि अपराधियों और आतंकियों   का  कोई  धर्म  नहीं   होता। जबकि यह एक अकाट्य  सत्य है कि अपराध और मुसलमान पर्यायवाची  शब्द हैं  . ब्यूरो   में  दिए  गए  मुसलमानों  द्वारा  किये गए अपराधों   का वर्गीकृत  विश्लेषण  करने से पता  चलता है कि मुसलमान  , चोरी  , डकैती   ,लूट ,हत्या  , बलात्कार जैसे सामाजिक  अपराधों   के  आलावा  पाकिस्तान   के लिए  जासूसी  , देश में तोड़फोड़  ,सम्प्रदायवादी  दंगे , बम विस्फोट  जैसे  अपराधों  में संलग्न  पाये  गए  हैं  ,जो   स्पष्ट  रूप   में देश   द्रोह   है , लेकिन  जीतनी  भी राजनीतिक  पार्टियां हैं   वह मुस्लिम  वोटों  के लिए  सेकुलरिज्म  की आड़  में इस सत्य  को  स्वीकार   नहीं  करती  , क्योंकि  जो भी  यह बात  कहता , या लिखता है ,उस पर सम्प्रदायवादी , होने का लेबल  लगा दिया जाता है  .
ऊपर से  मुस्लिम  विद्वान  और  नेता सेकुलरिज्म का  ऐसा  पाखण्ड   करते  है  ,कि  जैसे यही लोग  सेकुलरज्म के ठेकेदार है. जबकि  वास्तव में  मुसलमान  सेकुलरिज्म   के दुश्मन  है  , इस  बात की  सत्यता   की  जाँच  करने के लिए किसी भी  मुस्लिम  से पूछिये  कि वह किसी भी  ऐसे मुस्लिम  देश का  नाम  बताये  जहां सेकुलर  सरकार हो , और   गैर  मुस्लिमों  को  वही  अधिकार  प्राप्त हों  , जो वहां के मुस्लिमों    को  हों ,
क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ  हिन्दुओं   ने  ले  रखा है? यह  अनादि काल हमारा  देश  है  , हम  सेकुलरिज्म के बहाने मुस्लिम  तुष्टिकरण और उनकी  राष्ट्र विरोधी चालों   को  सफल  नहीं  देंगे

 जय हिन्दू  राष्ट्र !

 नोट - यह  महत्वपूर्ण  जानकारी   हमारे   जागरूक पाठक  और मित्र  श्री जितेंद्र  प्रताप  सिंह  जी  ने  भेजी    थी , इसके लिए उनका  आभार  . (212)

http://ncrb.gov.in/

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