शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

कश्मीर स्वर्ग से नर्क कैसे बना ?

कश्मीर को   भारत  का स्वर्ग   कहा जाता है . लेकिन इसको  नर्क  बनाने  में  नेहरू  की  मुस्लिम परस्ती   जिम्मेदार है . जो आज  तक चली  आ रही है . चूँकि देश  का विभाजन धर्म  के आधार  पर हुआ था .और जिन्ना जैसे  कट्टर नेताओं का तर्क था कि  मुस्लिम  बहुल  कश्मीर  के बिना  पाकिस्तान  अपूर्ण  है . इसलिए पाकिस्तान  प्रेरित उग्रवादी  और पाक सेना मिल   कर कश्मीर  में ऐसी  हालत  पैदा  करना चाहते हैं ,जिस से  कश्मीर के हिन्दू  भाग   कर किसी  अन्य  प्रान्त में  चले  जाएँ .कांगरेस  की अलगाववादी  नीति  के  कारण  हालत इतनी गंभीर हो गयी कि   हिन्दू श्रीनगर के  लाल चौक   में खुले आम  तिरंगा  भी नहीं  फहरा  सकते हैं .जबकि हिन्दू  हजारों  साल से कश्मीर में  रहते  आये हैं ,और  महाभारत  के समय  से ही कश्मीर पर हिन्दू  राजा राज्य  करते  आये हैं .  इसके लिए हमें  इतिहास के पन्नों  में   झांकना होगा  ,कि  कश्मीर  को विशेष  दर्जा  देने का  क्या औचित्य  है ,?
1-कश्मीर का प्राचीन  इतिहास 
कश्मीर  के प्राचीन इतिहास    का   प्रमाणिक  इतिहास   महाकवि  " कल्हण "  ने  सन  1148 -49  में  अपनी  प्रसिद्ध  पुस्तक " राजतरंगिणी "  में  लिखा  था . इस पुस्तक में   8 तरंग   यानि  अध्याय   और संस्कृत  में कुल    7826  श्लोक  हैं . इस   पुस्तक के  अनुसार  कश्मीर  का  नाम  " कश्यपमेरु  "   था  .  जो  ब्रह्मा  के  पुत्र  ऋषि  मरीचि  के पुत्र  थे .चूँकि  उस समय में  कश्मीर  में  दुर्गम  और ऊंचे पर्वत थे ,  इसलिए ऋषि कश्यप ने लोगों   को आने जाने के लिए   रास्ते  बनाये थे .  इसीलिए  भारत के इस   भाग  का नाम " कश्यपमेरू " रख  दिया गया  , जो बिगड़  कर  कश्मीर    हो गया  .राजतरंगिणी  के  प्रथम  तरंग में  बताया गया है  कि सबसे पहले  कश्मीर  विधिवत     पांडवों   के  सबसे  छोटे  भाई  सहदेव   ने राज्य    की  स्थापना  की थी , और  उस समय   कश्मीर में   केवल  वैदिक   धर्म   ही  प्रचलित  था .फिर  सन  273  ईसा  पूर्व   कश्मीर में  बौद्ध  धर्म   का  आगमन  हुआ  . फिर भी कश्मीर में  सहदेव  के वंशज  पीढ़ी  दर पीढ़ी   कश्मीर  पर 23  पीढ़ी  तक  राज्य  करते  रहे ,यद्यपि  पांचवीं सदी में " मिहिरकुल "   नामके  " हूण " ने  कश्मीर  पर  कब्ज़ा  कर लिया  था . लेकिन  उसने शैव  धर्म  अपना  लिया  था .
2-कश्मीर  में इस्लाम 
इस्लाम  के  नापाक  कदम  कश्मीर में सन 1015  में   उस समय  पड़े  जब  महमूद  गजनवी ने  कश्मीर  पर हमला  किया था  .लेकिन  उसका उद्देश्य  कश्मीर में इस्लाम   का प्रचार करना नहीं   लूटना था , और लूट मार कर वह वापिस गजनी  चला गया . उसके बाद ही कश्मीर पर दुलोचा  मंगोल  ने  भी हमला  किया . लेकिन  उसे तत्कालीन  कश्मीर के राजा  सहदेव   के मंत्री ने  पराजित करके  भगा  दिया . और सन  1320  में  कश्मीर में  "रनचिन " नामका  तिब्बती  शरणार्थी सेनिक  राज के पास   नौकरी के लिए  आया  . उसकी वीरता  को देख कर राजा ने  उसे सेनापति  बना  दिया . रनचिन  ने  राज से  अनुरोध  किया कि  मैं  हिन्दू  धर्म  अपनाना  चाहता  हूँ .लेकिन  पंडितों  ने  उसके अनुरोध का  विरोध  किया  और कहा कि दूसरी जाती का होने के कारण  तुम्हें  हिन्दू  नहीं  बनाया   जा सकता  .कुछ  समय के  बाद  राजा  सहदेव   का  देहांत  हो  गया  और उसकी पत्नी " कोटा  रानी  "  राज्य  चलाने लगी   और  उसने  " रामचन्द्र " को अपना  मंत्री  बना   दिया .   उस समय  कश्मीर में कुछ  मुसलमान   मुल्ले सूफी बन कर कश्मीर में   घुस  चुके  थे . ऐसा एक  सूफी  " बुलबुल  शाह  " था .उसने  रनचिन   से कहा  यदि  हिन्दू पंडित तुम्हें  हिन्दू नहीं   बनाते  तो  तुम  इस्लाम  कबुल   कर लो .इसा तरह  बुलबुल शाह ने  रनचिन  कलमाँ   पढ़ा कर  मुसलमान   बना दिया . जिस जगह  रनचिन  मुसलमान  बना था उसे  बुलबुल  शाह का  लंगर  कहा  जाता है  .जो  श्रीनगर के पांचवें  पुल के पास है . रन चिन   ने  अपना  नाम   " सदरुद्दीन  "   रखवा   लिया  था .बुलबुल शाह   की संगत  में  रनचिन  हिन्दुओं   का घोर शत्रु  बन गया . और 6 अक्टूबर  1320  को   रन चिन   ने धोखे से  मंत्री   रामचन्द्र   की  हत्या  कर दी .मंत्री   को  मरने के बाद   रनचिन   अपना  नाम " सुलतान  सदरुद्दीन  ' रख  लिया .फिर   अफगानिस्तान  से   मुसलमानों को   कश्मीर में  बुला कर बसाने लगा . और  करीब  सत्तर  हजार  मुसलमान की  सेना  बना ली  .  और कुछ  समय बाद  सन  1339 में  कोटा रानी   को  को कैद  कर लिया और  उस से  बलपूर्वक  शादी   कर  ली .सदरुद्दीन   के सैनिक  प्रति दिन  सैकड़ों  हिन्दुओं   का  क़त्ल  करते थे .इसलिए कुछ लोग  यातो  दर के कारण  मुसलमान  बन गए या भाग कर   जम्मू  चले   गए  . और  कश्मीर  घाटी  हिन्दुओं  से खाली  हो  गयी .

लेकिन   वर्त्तमान  कांगरेस   की  सरकार    जम्मू को भी  हिन्दू विहीन   बनाने में   लगी  हुई है .  काश  उस समय  महर्षि  दयानंद होते   जो  रनचिन  को  मुसलमान   नहीं    होने देते  .
 इसलिए    हिन्दुओं   को चाहिए कि सभी   हिन्दुओं   को अपना  भाई  समझे  , और जो भी  हिन्दू धर्म  स्वीकार करना चाहे उसे   हिन्दू बना कर अपने  समाज में शामिल  कर लें  .  और  हिन्दू विरोधी  कांगरेस का  हर प्रकार   से विरोध   करें  .

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मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

अल्लाह की गवाही - धरती भी माता होती है

हजारों  साल  से  भारत   के  हिन्दू  भारत भूमि  को  अपनी  माता  मान  कर  ,  उस पर सम्मान प्रकट  करने के  लिए " भारत माता  की जय "  का  नारा  लगाते  आए  हैं   ,  लेकिन  मुसलमानों  की  आदत है  ,कि वह  किसी  न  किसी  कुतर्क   का  सहारा  लेकर  हिन्दुओं  की  मान्यताओं  और  आस्थाओं   का  विरोध  जरूर   करते  है  ,  सब  जानते  हैं  कि  कुछ  ही  समय  पहले  जे एन  यू  के  मुस्लिम  लडके  के   इशारे से   हिन्दू लड़कों   ने भी   देश  विरोधी   नारे  लगाए  थे  ,  और  उनका  परोक्ष  समर्थन  राहुल  गन्दी  ने  कर  दिया  ,  इस  से पूरे  देश में  भारत  विरोधी  माहौल  पैदा  होने लगा  ,  इसलिए   सर  संघ  चालक  श्री  मोहन  भागवत  ने कहा  था कि  भारत  के सभी    लोगों  के  लिए  " भारत  माता  की  जय " बोलना  अनिवार्य  कर  दिया जाना  चाहिए  ,लेकिन  जिस  दिन  भागवत  जी  ने  यह  बात   कही  ,उसके  कुछ   समय बाद ही   , दिनांक  1  अप्रेल   2016  को   दारुल उलूम   देवबंद    के  मुल्लों   के    एक  फतवा   जारी  कर  दिया  जिसमे  मुसलामानों    को  निर्देश  दिया  गया  है   ,कि  वह  न तो " वन्दे  मातरम  "गायें  और  न  " भारत  माता  की जय ' बोलें  ,.और मुल्लों ने यह तर्क देकर फतवा जारी करते हुए दारुल उलूम ने कहा- 'इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

दुर्भाग्य  से  भारत   में  आर्यसमाज   , विश्व  हिन्दू  परिषद   , हिन्दू  महा  सभा   जैसे   संगठन  मौजूद  हैं   , जिनमे हजारों     विद्वान्  हैं  ,  लेकिन  किसी   ने  भी   मुल्लों   के  इस कुतर्क  का  मुंह तोड़  जवाब   नहीं  दिया  ,   यहाँ  तक  महेंद्र  पाल आर्य   जैसे    पूर्व   इमाम   ने भी   मुल्लों    का खंडन  नहीं    कर  सके   , उलटे  कई  हिन्दू नेताओं   ने  यहाँ  तक कह दिया  कि हम  लोगों  पर  भारत  माता  की  जय  बोलने दवाब   नहीं   डालेंगे  ,  ऐसा कहने के पीछे  इन  धर्म  के ठेकेदारों  की घोर  अज्ञानता   है  ,  जैसे  मुल्लों  ने मुसलमानों  को  कट्टर  और लकीर  का  फ़क़ीर  बना दिया  ,  इन  हिन्दू  नेताओं  ने हिन्दुओं की  तर्क बुद्धि  पर  ताला   मार  दिया  , हिन्दुओं  के  दिमागों   में यह  बात  ठूंस ठूंस  कर  भर दी  गयी कि हिन्दू  धर्म  सर्वश्रेष्ठ सबसे  बड़ा   है  ,  इस गलत  फहमी   से  हिन्दू    न  तो  अन्य  धर्म की  जानकारी  प्राप्त  करते  है  और  न    उनका  तुलनात्मक   अध्यन   ही करते  हैं  , मुल्लों  को  जवाब देने की  बात  तो   दूर  है, और  जब  मुल्लों   के  फतवा   का जवाब देने के लिए  कोई आगे  नहीं  निकला  तो  , हमने  मुल्लों    को    जवाब देने  का  निश्चय   किया  ,  क्योंकि  कल  रात  को  9 बजे  अमेरिका के  सेंट  लुइस  निवासी  मेरी  बहिन रेणु  शर्मा  से मैंने वादा   कर दिया था .अतः  हम  अपना  वादा पूरा करने के लिए फ़तवा  के झूठ  का  भंडा  फोड़  रहे   हैं ,  
 1-मुल्लों   का  कुतर्क 

 मुल्लों    ने  फतवा में   यह  कुतर्क  दिया "इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

देखिये उर्दू   फतवा की फोटो 
http://images.jansatta.com/2016/04/bharat-mata-ki-jai-620x400.jpg?w=850

इस फ़तवा को  पढ़  कर   हम  दावा  करते   हैं   कि  या  देवबद  में  मुल्लों   को  कुरान का  इल्म   नहीं   , या  वह   जानबूझ   कर  लोगों   को  गुमराह   कर   रहे   हैं   , और   कुरान   उस आयत  को  झूठा  साबित  करने की   हिमाकत  कर  रहे  हैं  जिसमे अल्लाह  ने  एक  शहर   ( जमीन )   को  शहरों  की   माता  कहा  है   ,    और  जब खुद अल्लाह  पूरी  जमीन   के  एक  हिस्से  एक   शहर   को शहरों  की   माता ( Mother of Cities )   कहता  है   , तो  हमें स्वीकार   करना  होगा  कि  निर्जीव  जमीन   के  बच्चे  भी  हो सकते है   , 

2-शहरों  की माता  मक्का  है 
मुसलमान   जिस मक्का  शहर को  परम  पवित्र   मानते  हैं   ,  उस  शहर  " मक्का -   مكة‎  "   नाम  पुरी  कुरान   में नहीं  मिलता  ,  बल्कि  इसकी  जगह  "बक्कह -   بكة‎    " शब्द  मिलता  है  , जो कुरान की  सूरा  -आले  इमरान   3 :96     में   है   ,  अरबी   व्याकरण  के  अनुसार  बक्कह - بكة‎ "  शब्द    स्त्रीलिंग ( feminine Gender )    अर्थात   बक्कह   वर्त्तमान  मक्का     एक   स्त्री   है   ,इसीलिये  स्त्री  होने के  कारण  अल्लाह ने बक़्का ( मक्का )  को शहरों  की  माता    कह   दिया  , "  Umm al-Qurā (أم القرى, "Mother of All Cities  " यह  अति  महत्त्व  पूर्ण  बात  अल्लाह  ने  सिर्फ  एक  बार  कुरान    की सूरा  -आले इमरान  6:92  में  दी   है   ,  पूरी  आयत   अरबी में  , हिंदी  लिपि   में  और  हिंदी  अंगरेजी   अर्थ   दिए  जा  रहे   हैं  

1. मूल  अरबी  आयत 

 وَهَـٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ  

2 -हिंदी लिप्यांतरण 

"व् हाजा   किताबुं  अंजलनाहु ,मुबारकुन  मुसद्दिकु  अल्लजी  बैन यदीहि  व् लि तुंजिर  उम्मुल कुरा  व्  मन  हौलहा  वल्लजीना  यूमिनून बिल  अखिरती यूमिनूंन  बिही व् हुम् अला  सलातिहिम युहाफिजून  "

3-हिंदी  अनुवाद 

"यह किताब  जिसे हमने उतारा   है  ,बरकत वाली  है  , और उसकी  पुष्टि  करने  वाली  हैं  ,जो  इस से पहले उतारी  गयी   , ताकि  तुम  नगरों  की  माता  (मक्का ) और आसपास वालों को सचेत  करो  ,और जो लोग आखिरत  पर ईमान  लाते  हैं  वे  अपनी  नमाज  की  रक्षा  करते  हैं  "

4-Eng  Translation


"this  book We have revealed it,blessed,confirming which (came) before its hands,so that you may warn (the) mother(of) the cities
   and who(are) around it.And those who   believe  in the Hereafter,they believe  in it,and they, over  their prayers  (are) guarding.  "

,
नॉट  - इस आयत  में  अरबी  के कुल 22  शब्द  हैं  ,10  वां  शब्द  " उम्म -  أُمَّ "  है  , इसका अर्थ  माता(Mother)है  , और  11 वां शब्द  " कुरा -  الْقُرَىٰ   "  है जो  बहुवचन   (Plural )     इसका अर्थ  नगरों  ( Cities )   , और " उम्मुल  कुरा -أم القرى "का अर्थ नगरों  की  माता  है  ,  \

(سورة الأنعام, Al-An'aam, Chapter #6, Verse #92


दारूल उलूम देवबंद ने 'भारत माता की जय' के खिलाफ फतवा देते हुए कहा कि इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है, तो धरती मां कैसे हो सकती है।अब  देवबंद  के  मुल्ले बताएं   कि जब  तुम्हारा  अल्ल्लाह  बेजान  भूमि   यानि   मक्का  को  शेरोन  की  माता  कह  रहा  है  ,  यानि मक्का  को  ऐसी माता   मान  रहा  है  कई  शहर  रूपी   बच्चे  हों   ,  क्योंकि  बिना   बच्चे की   स्त्री  को  माता   नहीं   कहा   जा  सकता  ,  
  और  जब  एक शहर  मक्का  कई  शहरों  की  माता   हो  सकती    है  ,  तो  कई  प्रांतो   , सैकड़ों    शहरों  पैदा करने  वाली   भारत  माता   ,   सबकी  माता  क्यों    नहीं       मानी   जा  सकती   ? 

मेरी  सभी  मुल्ले मौलवियों   ,  मुफ्तियों    ,  और   मुसलमानों  को  खुली  चुनौती   है  ,कि  वह  कुरान की  इस  आयत   को  गलत  साबित  कर के  दिखाए   ,   फिर   कहें की जमीन   कभी  माता  नहीं     हो  सकती  ,

मेरा उन  सभी    हिन्दू   नेताओं    और हिन्दू  संगठनों   के प्रमुखों    से  अनुरोध  है  , जो  खुद को  भारत  माता  के भक्त होने  का  दावा   करते   हैं   , इस  लेख   को  अखबारों  और  टी  वालों   को  भेज   दें  ,    ताकि   देवबंदियों  का फतवा  फट  जाये  ,

भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , 

حيّا اُمٌُ الهِند

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