शनिवार, 28 मई 2016

अल्लाह ईश्वर नहीं मक्का का देवता है



कुछ   दिन  पहले एक  मुस्लिम  पाठक   ने  मुझ  से कहा  था  कि आप   लोग  तो   कई   देवताओं   की  पूजा   करते हो   ,  जिनका  जन्म भी  होता  है  और  बच्चे  भी  होते हैं   , लेकिन   हम  मुस्लिम  केवल  एक  ही  अल्लाह  की  इबादत   करते  हैं   , जो हमेशा  से मौजूद  है  , न  उसका जन्म  है  और  न  उसने किसी   को   जन्म  दिया   है   ,


लेकिन  उन  पाठक  महोदय   का  कथन  तथ्यों  और  प्रमाणों  के विपरीत   है , क्योंक   वास्तव  में  अल्लाह  मुहम्मद  के  कबीले   का देवता   ही  है   , इसके  सबूत  इस  प्रकार   हैं  

1 -तौरेत  में  अल्लाह  शब्द नहीं  है 
मुसलमानों   की  मान्यता  है  कि  मुहम्मद  अल्लाह  के अंतिम  रसूल और कुरान  अल्लाह  की  अंतिम  किताब   है   ,  इस से पहले अल्लाह  ने  कई  रसूल  भेजे  थे  और  कई  किताबें   नाजिल  की  थीं   ,  उनमे  पहली  किताब   तौरेत     है  ,  जिसे    बाइबिल   का  पुराना  नियम  (Old Testament) कहा  जाता   है   ,  जो  कुरान  से  करीब    तीन  हजार  साल  पहले  का  है  , और यदि   तौरेत    और   कुरान  का  अल्लाह  एक  ही  है  तो तौरेत  में अल्लाह  शब्द  क्यों  नहीं मिलता ?  और   जहां    6  जगह  अल्लाह  शब्द   मिलता   है  ,  उनका  अर्थ    ईश्वर  ( God)    नहीं   है     , जैसे  ,

1.Judges 17:2-"अलाह - אָלָה " अभिशाप  ( Curse 

 2. Hosea 10:4 --"अलाह - אָלָה " झूठा   (false )

3.1 Kings 8:31 

4.2 Chronicles 6:22 

इसी  तरह  तौरेत में  जहाँ  भी अल्लाह या उसी   जैसा  शब्द आया  है  ,वह ईश्वर के लिए नहीं  बल्कि  बुरे अर्थों को प्रकट करने वाला  है  ,

2-तौरेत  में  ईश्वर का असली   नाम 
विश्व   में  जितने  ही  धर्म   है  ,  सभी धर्मों  के लोग  अपनी अपनी  भाषा में ईश्वर को  पुकारते हैं  , लेकिन   तौरेत  एकमात्र ऐसा  ग्रन्थ   है   ,जिसमे ईश्वर   ने अपने  ही  मुंह  से अपना  असली  नाम बता  दिया  है  ,  जिसे अधिकांश  ईसाई और यहूदी  भी  नहीं  जानते  ,
बाइबिल  के अनुसार  जब  मूसा  ने ईश्वर  से उसका नाम  पूछा  तो   '

ईश्वर ने  मूसा से कहा  " मैं  जो  हूँ   सो हूँ "  निर्गमन 3:14 


, אֶהְיֶה אֲשֶׁר אֶהְיֶה

हिब्रू  में  - अहीह  ऐशेर अहीह
यही   बात उपनिषद  में  दी  गयी  है
'सो  अहस्मि "

3-अरब में बहुदेववाद 

मुहम्मद  साहब   की  जवानी  तक   अरब  के लोग  कई  देवताओं   की  पूजा करते   थे  ,  हर  जाती  का अपना अपना देवता   था  ,  हरेक कौम अपने देवता को बड़ा  बताता   था  ,  उस समय  मक्का में  कुछ   यहूदी  और  इसे  भी  थे  ,  अरब के  लोग अक्सर  इनसे  लड़ते रहते थे  , और  जब   मुहमद ने  खुद को  अल्लाह  का  रसूल घोषित  कर  दिया  तो  पूरे अरब  पर राज  करने के लिए  पहले तो वही  नीति  अपनाई  जो आज  के मुस्लिम  अपनाते हैं  , वह  कपट   निति  है

4-मुहम्मदी  सेकुलरिज्म 

जिस  तरह  आज  के मुस्लमान  दिखावे के लिए  सभी  धर्मों  की  समानता  की   बातें करते हैं   , और दिलों में दूसरे  धर्म के प्रति  नफरत  रखते   वाही   काम  मुहम्मद  ने  किया   था ,अरबी  में  देवता  (god) के लिए " इलाह -  إله    " शब्द है  ,कुरान  में " इलाह -   إله  " शब्द     269   बार     आया   है  , और  हर जगह   इसका  अर्थ   " देवता  -god "       ही   है ,मुहम्मद ने  पहले  तो मक्का   के मूर्ति पूजकों  से  कहा


"قَالُوا نَعْبُدُ إِلَـٰهَكَ وَإِلَـٰهَ آبَائِكَ  "2:133

कालू  नअबुदू इलाहक  व् इलाह आबाअक


"कह  दो कि  हम तुम्हारे  देवता  और अपने  बाप  दादाओं  के देवता  की पूजा  करते  हैं  "सूरा  - बकरा  2:133 

  फिर  मक्का  के  यहूदी  , ईसाइयों   से  कहा .

" कह दो हम ईमान  लाये  उस  चीज  पर जो  हम  पर उतारी  गयी  ,और  जो तुम  पर  भी  उतारी  गयी   और  हमारा  इलाह  ( देवता  ) और   तुम्हारा इलाह ( देवता ) एक  ही  है  ,और   हम  उसी  के आज्ञाकारी  हैं "

وَقُولُوا آمَنَّا بِالَّذِي أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَأُنْزِلَ إِلَيْكُمْ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ

सूरा  अनकबूत 29:46 

नोट -इस  आयत   में  अरबी में कहा  है" इलाहुना  व् इलाहुक़ुम   वाहिद -  وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَاحِدٌ    " अर्थात  मेरा देवता और तुम्हारा  देवता  एक   हैं  (.my  god andyour  god is one  )

मुहम्मद   ने ऐसी सेकुलर बातें  लोगों  को  अपने  जाल   में  फ़साने  के  लिए कही थी   ,  लेकिन जब लोग  मुहम्मद के  खतरनाक इरादे भांप   गए  तो अपने अपने   धर्म  पर और  मजबूती   से डट   गए ,

5-मुहम्मद  का  जिहादी स्वरूप 

इस  से  रुष्ट  होकर  मुहम्मद  ने  अपना  जिहादी  रूप  प्रकट कर  दिया  और  लोगों से  कहा

  "न  सूर्य  को  सिजदा  करो   और  न चन्द्रमा  को  , सिर्फ  अल्लाह  को  सिजदा  करो "सूरा  हा  मीम सजदा 41:37

Do not bow down (prostrate) to the sun nor to the moon, but only bow down (prostrate) to "Allah"Noble Quran 41:37]


इसके  बाद   से  मुहम्मद  और उनके  जिहादी  साथी  लोगों  को जबरन  मुसलमान बनाने   लगे  ,  और जो  भी व्यक्ति उनके  चंगुल  में   फस जाता   था  उस  से यह  कलमा  जरूर  पढ़वा लेते  थे ,और  यह  काम आज  भी  जारी  है

6-कलमा  का  सही  अर्थ 

कलमा  इस्लामी  आतंकवादियों  का मूल  मन्त्र और आदर्श  वाक्य   है  ,   जो   आई  एस  आई एस  के  काले झंडे  पर  लिखा  है   ,  कलमा  दो  वाक्यों  से मिल  कर  बनाया  गया  है   ,

" ला इलाह  इल्लल्लाह - मुहम्मदर्रसूलुल्लाह "
धूर्त   मुल्ले  इसका  अर्थ  करते हैं " अल्लाह  के सिवा  कोई  उपास्य   नहीं  है    और  मुहम्मद  अल्लाह  के  रसूल   है  

कलमा  के प्रथम   भाग   का  सही  अर्थ  ,  इसमें  अरबी  के कुल पांच   शब्द  हैं   . ला = नहीं  , इलाह = देवता ,  इल्ला = सिवाय  , अल्लाह = अल्लाह
अर्थात - अल्लाह  के अलावा  कोई  देवता  नहीं है   ,  इसका  तात्पर्य  है  की   सिर्फ  अल्लाह  ही  देवता  है  ,  या  इसे  इस  प्रकार  भी कह  सकते  हैं  क़ि  दवताओं  में  सिर्फ  अल्लाह  ही   देवता  है   ,   बाकी  देवता  बेकार  हैं    ,  कलमा  से यह कहीं  सिद्ध  नहीं  होता  कि  अल्लाह ईश्वर  है   ,
अल्लाह  पहले  तो  अरब  लुटेरों  का  देवता  बना  रहा , और  अब  जिहादी  आतंकियों का  देवता  बन  गया है  ,  इस  कल्पित  चरित्र   की  रचना मुहम्मद  ने  की  थी   ,  इस   कल्पित  चरित्र  के  कारन रोज़  हजारों  असली  निर्दोष  लोग  मारे   जा  रहे   हैं   ,
इस  से   सिद्ध   होता  है  की मुहम्मद  ने  अपने कबीले  के  देवता " इलाह " नाम  में  अल  जोड़  कर  बड़ी  मक्कारी  से अल्लाह   नामके कल्पित ईश्वर लोगों   को  डराया   और जबरन   मुस्लमान  बनाया  ,  अगर मुहम्मद का  अल्लाह सचमुच  में सबका  ईश्वर  ( God )  होता   , तो   कुरान  में लिखा   होता  
"अल्लाहुना   व् अल्लाहुकुम वाहिद    " हमारा  ईश्वर  और  तुम्हारा  ईश्वर   एक  ही  है  ( my God and your God is one ) 


वास्तव   में अल्लाह   जैसी  कोई शक्ति या  वास्तु   नहीं   है   और  न  कभी  थी  

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5 टिप्‍पणियां:

  1. Hakhikhat khud ko manva leti hai maani nahi jati.
    Aur jaati hi hai jo jati nahin jati.
    Iski lekhak ki jati aisi halkat nillat thu jati hai
    Ke sala jati nahi jati.
    Isko jhoot bolne ko sharm nahi aati .
    Khair is kutte ne peshab to kiya hai . Is ka kiya us malik ne record karliya .
    Yaad rahe wahaan der hai andher nahi .
    Aatagfirul Allah

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  2. Tu Jo bhi hai, harami hai.
    Tune kuch Jane bager Nabi Muhammad k barey m itna jhut likha.
    Agar tu apne baap ki aulad h or tera khuda ya Ishwar par vishwas hai to lokmat, times of India jaise news papers mei lekh de k tu sabke same ye proof karega or news TV jaise ajtak pe akar khulasa kar or proof kar. Warna tu haram ki aulad.
    Apne bap ki aulad h to proof kar.

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  3. Excellent analysis. Loved it. Thanks for sharing Bhaandafodu.

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  4. Jo naraz how gaali de rahein hai, please do yoga, quit meat and islam. Maine Aur merė paribar ne ghar wapasi kar apni arabi, mongol, kabile walon ki ghulami mujahir badnami chhod di. So peaceful, free and truly happy now. Ki kochhe - roshogulla anyone?:))

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  5. Dekho beta tumhe sachaai sehan nhi hoti h
    Tere baap dada bhi hindu the ye baat tu jaan le

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