सोमवार, 6 जून 2016

मक्का में शैतान की मूर्ति !!

कुछ समय  पहले एक    मुस्लिम  युवा   ने सवाल   किया  था  ,कि आप  लोग धातु  , मिटटी  और पत्थरों  की  मूर्तियों   की  पूजा  क्यों  करते हो ? क्या  आपके  भगवान  इनके  भीतर  घुसे हुए हैं ? भला   यह  बेजान    मूर्तियां  भी कुछ  महसूस  कर  सकती   हैं  ?    जो  आपकी  दुआएं  सुन  लेंगी ?

हम इस  लेख   के  माध्यम   से  उन हजरत   से  पूछना  चाहते  हैं   कि  मुसलमान  हज  के  दौरान शैतान  को मारने  के  लिए "जमरात " नामक खम्भे  पर  पत्थर  क्यों  मारते हैं ? क्या  शैतान  उनमे  घुसा हुआ  है  , ?और  अगर शैतान  उनमे  हैं  ,तो  इतने  बरसों  तक  पत्थर  मारने  पर  भी  शैतान  अब तक  क्यों   नहीं  मरा ? जबकि पत्थर   मरने   वाले  हजारों  हाजी  मर  गए , क्या अल्लाह   की  तरह  शैतान   भी अमर है ?

1- शैतान  का  परिचय 

इस्लाम से  काफी  समय  पहले  से ही अरब  के  लोग शैतान   को  अल्लाह  का प्रतिद्वंदी  शक्तिशाली   मानते   थे  , इस्लामी   मान्यता  के  अनुसार  शैतान    भी  अल्लाह   की   तरह  अमर  है   , लेकिन शैतान   का  जन्म  लगभग   साठ  हजार   पहले   हुआ   था   , शैतान    को  कुरान   में "इबलीस -  ابليس "  भी   कहा  गया   है  , परन्तु   उसका  असली   नाम  "अजाजील -   عزازيل  "   है   , जो तौरेत यानि  बाइबिल के शब्द "अजाज एल - עֲזָאזֵל "से  लिया  गया   है . हिन्दी    में  इसका  अर्थ   ईश्वर  की  फटकार   है (Damnation of God )

वास्तव    में   इब्लीस  एक  जिन्न  है  ,जिसे अल्लाह   ने "मुअल्लिमुल मलकूत - معلم الملكوت "   यानी फ़रिश्तों का  सरदार  बना  दिया  था .इब्लीस  के  पिता  का नाम खबीस है ,जिसका  चेहरा सिंह  की  तरह   है  , और  वैसा   ही  स्वभाव   है .इब्लीस  की   माँ  का  नाम " निलबीस  " है  , जिसका  चेहरा शेरनी  की  तरह   है   , यह  उग्र     स्वभाव  की  है .  इब्लीस  की  पत्नी   का   नाम "तरतबा "  है,इब्लीस  के  पांच   लडके  हैं    ,  उनके   नाम  और  काम   इस  प्रकार   हैं  ,                  

1.ताबर-लोगों के मन में विकार, भ्रम, जटिलता और मन की व्याकुलता उत्पन्न  करता   है

2.आवर- दुष्कर्मों  की  प्रेरणा   देता   है

3.मसौत-झूठ    बोलने  और  धोखा  देने   की  प्रेरणा   देता   है

4.वासिम -परिवार  और  रिश्तेदारों  में झगडे  और  समाज   में  दंगे करवाता   है

5. जकनबार -बाजारों   में  विवाद और अफवाहें  फैला   कर लोगों  में लड़ाई   करवाता  है

2-शैतान  का सिंहासन  समुद्र  में  है 

जो   मुर्ख   लोग  शैतान   को  पत्थर   मारने के  लिए  मक्का   जाते  हैं   ,  उन्हें  पता  होना  चाहिए  कि शैतान समुद्र में  रहता  है   , जैसा  कि इस हदीस  में  कहा  गया   है  ,

"जबीर  बिन  अब्दुल्लाह  ने  कहा   कि रसूल   ने बताया   है कि "शैतान   का  सिंहासन समुद्र  में  है ( The throne of Iblis is upon the ocean  ). अरबी   में "इन्न अर्शुल इबलीस अला बहर- إِنَّ عَرْشَ إِبْلِيسَ عَلَى الْبَحْرِ  "


सही  मुस्लिम - किताब 39  हदीस 6754

3-शैतान  को पत्थर मारने का रिवाज 
नौवीं  शताब्दी   में पैदा हुए   इतिहासकार     "अल   अजरकी   -  الأزرقي "ने  अपनी  किताब    "अखबार मक्का -  اخبار مكة "   में  मक्का  का  इतिहास लिखा  है .   इसमे  मक्का में  इस्लाम  से  पहले  के रिवाज , दन्तकथाएं   और   मान्यताओं   का   विस्तृत विवरण  दिया गया  है ,    इसके  साथ  मुहम्मद  साहब   की  मृत्यु  तक  यानी  सन 603  ई ० तक  मक्का  में  होने वाली  घटनाओं   का  विवरण  भी दिया  है .  अजरकी  ने  मक्का में  हाजियों  द्वारा ईंट  पत्थर   से निर्मित स्तम्भ(Pillar)  को  पत्थर  मारने की  परम्परा  का  भी  उल्लेख   किया  है  , लोग उसे  शैतान  मानते  हैं , यह  रिवाज   हजारों  साल  पुराना  है  , पीढ़ी  दर पीढ़ी   लोग इसी रिवाज  को मानते आये  हैं , यद्यपि  कुरान   में  शैतान   को  पत्थर  मारने  का  आदेश  कहीं  नहीं     दिया  है  , कारण पूछने  पर  लोग  कहते  हैं  ,
"और जब  यह  कोई  अनैतिक   काम  करते  हैं   ,तो  कहते   हैं की हमने  यह अपने  पूर्वजों  को  ऐसा  करते  हुए पाया  है  , हमें तो  अल्लाह  ने  यही  हुक्म   दिया  है "
सूरा -अल  आराफ 7:28 

   शैतान   को  पत्थर मारने  की  परंपरा  के  पीछे   मक्का  के  लोगों  में  एक  कहानी   प्रचलित   है  ,जिसे अजरकी  ने  लिखा है   , इसके अनुसार
 जब  इब्राहिम  मीना  नामकी  जगह  छोड़  कर अकबा गए  तो  उनको गंदे  पत्थरों  के ढेर के पीछे  छुपा   हुआ  शैतान   दिखा  , तभी  जिब्राइल  ने  उन से कहा  इस शैतान  को  पत्थर   मार  कर  भगा  दो  .इस  से शैतान  भाग   गया  लेकिन  फिर  वहीँ  छुप   गया  , इब्राहिम   ने  फिर  पत्थर  मारे  , ऐसा दो   बार  हुआ  . तब  जिब्राईल   ने  इब्राहिम  से कहा  शैतान   को  सात  पत्थर   मारो  , तभी  यह  भागेगा  , इब्राहिम   ने ऐसा  ही  किया  , और शैतान   दूर  कहीं चला  गया . तभी   से  यह   रिवाज    शुरू   हो गया

4-शैतान   का  कद  बढ़  गया 
यदि   हम  कहें कि जैसे  जैसे  मुसलमानों   में  शैतानी प्रवृत्ति    बढ़ने  लगी   वैसे ही   शैतान  के   स्तम्भ    का  कद  भी   बढ़   गया   है ,तो  इस  बात  में कोई  झूठ   नहीं    है   , क्योंकि   सऊदी  सरकार  ने  सन 2004  में शैतान   के  छोटे  स्तम्भ    को  तोड़   कर  नया  और  बड़ा  स्तम्भ  बनवा  दिया  है .यह  26  मीटर  यानी  85  फुट   लंबा  है   ,  इसके  आगे  एक  पुल  भी    बनवा  दिया  गया  है  ,  ताकि   लोग  इस  पर  चढ़   कर  शैतान  के  स्तम्भ   पर  पत्थर   मार  सकें , इस  स्तम्भ  को  अरबी  में "अल   जमरात  الجمرات‎ - "  कहा  जाता   है 

1.पुराने  स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.cuttingthroughthematrix.com/images/StoningofSatan.jpe

2.नये स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.islamicinvitationturkey.com/wp-content/uploads/2012/10/esmaeeli20121026173802210.jpg

5-शैतान  को  पत्थर   मारने  की विधि 

शैतान  को  पत्थर   मारने   को  अरबी   में "रमी  अल  जमरात  -  رمي الجمرات‎   " कहा  जाता   है   , इसके  लिए  नियम इस  प्रकार   हैं ,1.जिल  हज  की  10 तारीख को  हाजी  मुजदलीफा    से  निकलें  और  मीना  के  रास्ते  से  पत्थर  जमा  करें  ,2 .पत्थर   न  तो  बहुत  बड़े  हों  और न छोटे  हों .3.सुन्नत  के अनुसार  सात (7 ) पत्थर   जमा   कर के  रख  लें .4.मीना  आने  पर सूर्योदय   से  पहले पत्थर  नहीं  मारें .5.हाजी जमरात   पर  सात  पत्थर  मारें  ,  लोग  शैतान  पर धिक्कार  करने के लिये अपने  जूते  , सैंडिल   और अन्य  गंदी  चीजें     भी    फेक   कर  मार  देते  हैं

6-शैतान  को  पत्थर कब  मारें ?

इसके बारे   में  यह  हदीस बताती   है   ,

वाबरा  ने  इब्न  उमर से पूछ  कि  हम शैतान  पर  पत्थर   कब  मार  सकते  हैं ? उमर  ने   कहा जब  तुम्हारे  दल  का   मुखिया (इमाम )  आदेश  करे यानी  पत्थर  मारे  तभी   शैतान  पर  पत्थर  मारना .

Narrated Wabrah,I asked Ibn 'Umar: When should I throw pebbles at the jamrah? He replied: When your imam (leader at Hajj) throws pebbles

"، عَنْ وَبَرَةَ، قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ مَتَى أَرْمِي الْجِمَارَ قَالَ إِذَا رَمَى إِمَامُكَ فَارْمِ ‏.‏ فَأَعَدْتُ عَلَيْهِ الْمَسْأَلَةَ فَقَالَ كُنَّا نَتَحَيَّنُ زَوَالَ الشَّمْسِ فَإِذَا زَالَتِ الشَّمْسُ رَمَيْنَا ‏.‏ "

Sunan Abi Dawud - Book 10, Hadith 1967

7-पत्थर  मारने वालों  की  मौत 
शैतान  के स्तम्भ   पर  पत्थर   मारने  के लिए   हाजियों   में  धक्कामुक्की   और   भगदड़    हो   जाती  है   ,  और शैतान   पर   पत्थर  मारने   वाले  खुद   मर   जाते   है  ,  जैसा   इसी  साल   में  हुआ  है   ,  मुहम्मद  साहब  के  सामने   भी  ऐसा  हुआ  था  ,  जिसका  विवरण   इस  हदीस   में   है  ,

अब्दुल्लाह   इब्न  बुरैदा   ने  अपने  पिता  से  सुना  कि  एक  औरत  शैतान   को पत्थर   मारते   समय  दूसरी   औरत  से गुथ  गयी   ,  जिस   से  उसके  पेट  का  गर्भ  गिर  गया.  तब रसूल   ने  उस  बच्चे   के लिए  दिय्या (   ) मुआवजे  के  रूप में  पचास  भेड़ें   उस  औरत   को  दीं ,और   लोगों  को  पत्थर  मारना   बंद  करने  को   कहा

a woman threw some pebbles and stuck another woman, and she miscarried. The Messenger of Allah stipulated (a Diyah of ) fifty sheep for her child. And on that day, he forbade throwing pebbles.

، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ امْرَأَةً، خَذَفَتِ امْرَأَةً فَأَسْقَطَتْ فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي وَلَدِهَا خَمْسِينَ شَاةً وَنَهَى يَوْمَئِذٍ عَنِ الْخَذْفِ ‏.‏ أَرْسَلَهُ أَبُو نُعَيْمٍ ‏.‏ "
"

 Sunan an-Nasa'i - Vol. 5, Book 45, Hadith 4817

8-कोसने  से शैतान शक्तिशाली  हो जाता है 
 
इस्लाम  से  पहले  से भी अरब   लोगों  में रिवाज  था  कि जब  कोई  काम  बिगड़ जाता  था , या  किसी  तरह   की  अड़चन  पैदा हो   जाती  थी  , तो  वह शैतान  को  कोसने  लगते   थे  , और कह  देते  थे  कि शैतान    मर  जाये , या शैतान  पर   लानत   हो  . अरबों   की  यह  परंपरा  मुहम्मद साहब  के  समय  से भी  थी ,  और आज   भी  जारी   है   , लोग ज़रा सी  बात  पर  भी  शैतान  को  जिम्मेदार   बता   कर  उसकी  मौत की  बद दुआ  देने  लगते  थे  ,  जैसा  इस  हदीस  में  कहा  गया  है   ,

अबु  तमीमा  अल  हुज़ैमा  ने  कहा  की  एक   बार  मैं रसूल के पीछे उनके  गधे   पर  बैठ   कर जा रहा   था  , तभी   वह  गधा  रास्ते   में  अड़  गया  , यह देख  कर  मैं  बोल  पड़ा  कि "शैतान  का नाश  हो  ( Let Satan perish) ,अरबी  में "युहलिक अश्शैतान -  يهلك الشيطان"यह  सुन कर  रसूल   ने  कहा ऐसा  नहीं  कहो   इस  से शैतान  और बड़ा   हो   जायेगा  ,  बल्कि   कहो   बिस्मिल्लाह   इस  से  शैतान  एक   मच्छर  से भी  छोटा    हो  जायेगा

मुसनद  इमाम  अहमद ( مسند أحمد )  Vol. 5 p. 59 
 

यही   बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार   कही   गयी   है  , तुम  यह  नहीं  कहो  कि शैतान  का नाश  हो,और   न  यह  कहो  लि इन्नल इबलीस लईन -  لأنَّ إبْليسَ اللّعِينَ " यानी   शैतान  के  लिए  लानत  हो  , ऐसा  कहने  से शैतान  की  शक्ति  बढ़  जाती  है .  इसलिए  तुम  कहो   अल्लाह  के  नाम  से  ‘( In the name of Allah ) .    इस  से   वह  अपमानित  महसूस करेगा  
 
सुन्नन   अबी  दाऊद  - किताब  अल  अदब  42  हदीस 4982

 इन हदीसों  से  सिद्ध   होता  है कि मुसलमान  शैतान लानत   भेज  भेज  कर  उसकी  शक्तियों  में वृद्धि कर रहे   है  ,यही  कारण  है  कि  इस्लामी देशों  में शैतान   का  राज  है  , कहीं  शान्ति  नहीं  है .इन  सभी  प्रमाणों  से  सिद्ध   होता   है कि इस्लाम  की   मान्यताएं   , रिवाज   और  परंपरा     तर्कहीन   और  अंधविश्वास   पर  आधारित    हैं   . जब   मुसलमान  एक  स्तम्भ   में  शैतान  का निवास  मानते   हैं   . जो  एक  प्रकार   की   मूर्ति  पूजा  ही  है   , तो  उनको  हिन्दुओं   की  मूर्ति  पूजा   पर कटाक्ष  करने    का  कोई  अधिकार  नहीं  . मुस्लमान   ऐसा  इसलिए करते हैं   , क्योंकि उनके  सभी   नबी  और  रसूल  शैतान   के प्रभाव   से  ग्रस्त   थे   ,जैसा  कि खुद   कुरान   में  लिखा  है ,

"हे  मुहम्मद  तुम से  पहले जो   भी   नबी  और  रसूल   हमने  भेजे शैतान    ने उनकी   कामना   में असत्य  मिला  दिया  था  , "सूरा  अल हज 22:52 


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15 टिप्‍पणियां:

  1. तथ्य पूर्ण प्रस्तुति....

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  2. किसी के पास यदि मेरे एक प्रश्न का उत्तर हो तो कृपया मेरी सहायता करे:
    मेरे एक मुसलमान मित्र जब इस्लाम और कुरआन की तारीफो के पुल बांधने लगे तो मेरे मन मे उत्सुकता जगी कि आखिर ये कुरआन में है क्या?
    क्या सचमुच ये ईश्वर की जुबानी या उन्ही के द्वारा लिखित ग्रंथ है तो मैं कुरआन की ढेर सारी आयते पढी तो मेरे मन में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई जैसे:

    सुरा 9 आयत 2: तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा

    सुरा 4 आयत 93: और जो शख्स किसी मोमिन को जानबूझ के मार डाले (ग़ुलाम की आज़ादी वगैरह उसका कुफ्फ़ारा नहीं बल्कि) उसकी सज़ा दोज़क है और वह उसमें हमेशा रहेगा उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है और उसपर लानत की है और उसके लिए बड़ा सख्त अज़ाब तैयार कर रखा है।

    इन दोनो आयतो को जरा गौर से पढे:

    "ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते"

    "ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा"

    "उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है "

    ध्यान देने वाला तथ्य यह है कि यदि ये सचमुच अल्लाह या खुदा के बोल है तो इन पंक्तियों में अल्लाह को अपने ही नाम का उल्लेख क्यों करना पडा ।

    ऐसा तो लेखक तब करता है जब वह किसी अन्य तिसरे व्यक्ति के संदर्भ में लिख रहा हो।

    यदि ये वास्तव मे अल्लाह के ही वचन होते तो कुछ यूं होते:

    "मुझे आजिज़ नहीं कर सकते"

    "मैं काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहुंगा"

    "उसपर मैनें (अपना) ग़ज़ब ढाया है "

    अब सवाल ये उठता है कि ऐसी छोटी छोटी व्याकरणीय त्रुटी तो इस दुनिया को चलाने वाले ईश्वर कर नहीं सकते

    और अगर किए है तो वह ईश्वर हो नही सकते।

    इसके अलावा लगभग हर आयत के अंत में "अल्लाह बडा दयालु है" "अल्लाह सर्वशक्तिमान है" "अल्लाह सब जानता है" जैसी पंक्तियां हैं यदि अल्लाह मे वाकई ये सारे गुण हैं तो उन्हे ये बार बार क्यूं कहना पड रहा है या फिर उनमें आत्मविश्वास(confidence) की भारी कमी है।

    एक और प्रश्न:

    ये सब जानते है कि कुरआन की मुल पुस्तक सिर्फ अरबी भाषा में हैं
    बाकि सब इसके अनुवाद मात्र हैं

    प्रश्न ये है कि क्या पूरी दुनिया को चलाने वाले अल्लाह को क्या सिर्फ एक भाषा की ही जानकारी थी अगर हां तो किस मदरसा में पढे थे।

    अगर उन्हे सभी भाषाओं का ज्ञान था तो सभी भाषाओं में कुरआन लिखकर संबंधित देशों में वितरित करना चाहिए था।

    और यदि समस्त भाषाओं का ज्ञान रहते हुए भी उन्होने सिर्फ अरब और अरबी को चुना इसका अर्थ ये होता है कि वे सिर्फ अरबवासियों को ही अपना अनुयायी बनाना चाहते थे तो उनकी इच्छा के खिलाफ जिहाद एवम् अन्य सही गलत तरीकों से इस्लाम का प्रचार प्रसार करके ये लोग भारी गुनाह किए है और कर रहें है अतः इनका जहन्नुम में जाना तय हैं और हम(तथाकथित काफिर लोग यानि गैर-इस्लाम एवम् गैर-अरबी) अपने अपने देशों में अपने मूल धर्म के साथ जी रहें है जैसा कि ईश्वर (अल्लाह) चाहते थे तो हमारा तो जन्नत का टिकट कन्फर्म समझे।

    आप सब पाठको विशेषकर Blogger एवम् मुस्लिम भाईयो से मेरा आग्रह है कि मेरी इस टिपण्णी पर अपनी राय देकर मेरा संशय दूर करें।
    धन्यवाद
    जय हिंद जय भारत जय हिंदुत्व
    भारत माता की जय।

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  3. सत्यवादी जी,
    नमस्कार !
    आपके लेख http://bhaandafodu.blogspot.in/ पर देखे। खास बात ये है की आपके लेख बहुत ही अच्छे एवं तार्किक होते हैं।

    इन्टरनेट पर अभी भी राजनीति से संबन्धित कई बेहतरीन रचनाएं अंग्रेज़ी भाषा में ही हैं, जिसके कारण आम हिंदीभाषी लोग इन महत्वपूर्ण आलेखों से जुड़े संदेशों या बातों जिनसे उनके जीवन मे बदलाव हो सकता है, से वंचित रह जाते हैं| ऐसे हिन्दीभाषी यूजर्स के लिए ही हम आपके अमूल्य सहयोग की अपेक्षा रखते हैं ।

    साथ ही आपसे निवेदन है की आप अपने लेखों को शब्दनगरी पर भी अपने नाम से साथ प्रकाशित करें।

    साथ ही हमारा यह भी प्रयास होगा कि शब्दनगरी द्वारा सभी यूज़र्स को भेजी जानी वाली साप्ताहिक ईमेल में हम आपके लेख जोड़ कर,और शब्दनगरी पर प्रकाशित होने वाली विशिष्ट रचनाओं मे आपकी रचनाओं को सम्मिलित कर अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाएँ ।
    उम्मीद है हमारी इस छोटी सी कोशिश में आप हमारा साथ अवश्य देंगे ।
    आपके उत्तर की प्रतीक्षा है ...
    धन्यवाद,
    प्रियंका शर्मा
    (शब्दनगरी संगठन)
    www.shabd.in

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  9. Love your intellectual writings and objective analysis. Keep sharing the good work and enlightning the misled innocent. Best wishes.

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  10. Hi www.bhandafodu.blospot.com

    Me ek baat Janana Chahata Hu ki agar Quran me itni gandi beaten likhi he to
    DUBAI me itni Shanti kyu he vaha bhi to Islam ko mante he vo log ye sare gande kaam kyu nahi karate
    Ab tak aapne sari baten logic and sabuton ke Aadhar par bataya he please is ka bhi answer using Tarah Dena
    I'll wait for your reply

    उत्तर देंहटाएं
  11. जेहाद की आय का साधन

    Mene aapka ye blog padha is me aapne sabhi Bure kaamo (nashili vastu, khun, aurton par atyachar) ko gair-islami bataya he
    Kabhi aap Kehate ho ki ye sab Inke Quran me likha he
    Kabhi Kehate ho ki ye sab gair islami he
    I am confused clarify me

    उत्तर देंहटाएं
  12. Murkh secular logon ko Na to Sanatan ka gyan Hota hai, na Islam ka . Aap ko bahot bahot dhanyavad aap dono vichardharaon pe achcha prakash daal rahe ho .

    उत्तर देंहटाएं