सोमवार, 6 जून 2016

मक्का में शैतान की मूर्ति !!

कुछ समय  पहले एक    मुस्लिम  युवा   ने सवाल   किया  था  ,कि आप  लोग धातु  , मिटटी  और पत्थरों  की  मूर्तियों   की  पूजा  क्यों  करते हो ? क्या  आपके  भगवान  इनके  भीतर  घुसे हुए हैं ? भला   यह  बेजान    मूर्तियां  भी कुछ  महसूस  कर  सकती   हैं  ?    जो  आपकी  दुआएं  सुन  लेंगी ?

हम इस  लेख   के  माध्यम   से  उन हजरत   से  पूछना  चाहते  हैं   कि  मुसलमान  हज  के  दौरान शैतान  को मारने  के  लिए "जमरात " नामक खम्भे  पर  पत्थर  क्यों  मारते हैं ? क्या  शैतान  उनमे  घुसा हुआ  है  , ?और  अगर शैतान  उनमे  हैं  ,तो  इतने  बरसों  तक  पत्थर  मारने  पर  भी  शैतान  अब तक  क्यों   नहीं  मरा ? जबकि पत्थर   मरने   वाले  हजारों  हाजी  मर  गए , क्या अल्लाह   की  तरह  शैतान   भी अमर है ?

1- शैतान  का  परिचय 

इस्लाम से  काफी  समय  पहले  से ही अरब  के  लोग शैतान   को  अल्लाह  का प्रतिद्वंदी  शक्तिशाली   मानते   थे  , इस्लामी   मान्यता  के  अनुसार  शैतान    भी  अल्लाह   की   तरह  अमर  है   , लेकिन शैतान   का  जन्म  लगभग   साठ  हजार   पहले   हुआ   था   , शैतान    को  कुरान   में "इबलीस -  ابليس "  भी   कहा  गया   है  , परन्तु   उसका  असली   नाम  "अजाजील -   عزازيل  "   है   , जो तौरेत यानि  बाइबिल के शब्द "अजाज एल - עֲזָאזֵל "से  लिया  गया   है . हिन्दी    में  इसका  अर्थ   ईश्वर  की  फटकार   है (Damnation of God )

वास्तव    में   इब्लीस  एक  जिन्न  है  ,जिसे अल्लाह   ने "मुअल्लिमुल मलकूत - معلم الملكوت "   यानी फ़रिश्तों का  सरदार  बना  दिया  था .इब्लीस  के  पिता  का नाम खबीस है ,जिसका  चेहरा सिंह  की  तरह   है  , और  वैसा   ही  स्वभाव   है .इब्लीस  की   माँ  का  नाम " निलबीस  " है  , जिसका  चेहरा शेरनी  की  तरह   है   , यह  उग्र     स्वभाव  की  है .  इब्लीस  की  पत्नी   का   नाम "तरतबा "  है,इब्लीस  के  पांच   लडके  हैं    ,  उनके   नाम  और  काम   इस  प्रकार   हैं  ,                  

1.ताबर-लोगों के मन में विकार, भ्रम, जटिलता और मन की व्याकुलता उत्पन्न  करता   है

2.आवर- दुष्कर्मों  की  प्रेरणा   देता   है

3.मसौत-झूठ    बोलने  और  धोखा  देने   की  प्रेरणा   देता   है

4.वासिम -परिवार  और  रिश्तेदारों  में झगडे  और  समाज   में  दंगे करवाता   है

5. जकनबार -बाजारों   में  विवाद और अफवाहें  फैला   कर लोगों  में लड़ाई   करवाता  है

2-शैतान  का सिंहासन  समुद्र  में  है 

जो   मुर्ख   लोग  शैतान   को  पत्थर   मारने के  लिए  मक्का   जाते  हैं   ,  उन्हें  पता  होना  चाहिए  कि शैतान समुद्र में  रहता  है   , जैसा  कि इस हदीस  में  कहा  गया   है  ,

"जबीर  बिन  अब्दुल्लाह  ने  कहा   कि रसूल   ने बताया   है कि "शैतान   का  सिंहासन समुद्र  में  है ( The throne of Iblis is upon the ocean  ). अरबी   में "इन्न अर्शुल इबलीस अला बहर- إِنَّ عَرْشَ إِبْلِيسَ عَلَى الْبَحْرِ  "


सही  मुस्लिम - किताब 39  हदीस 6754

3-शैतान  को पत्थर मारने का रिवाज 
नौवीं  शताब्दी   में पैदा हुए   इतिहासकार     "अल   अजरकी   -  الأزرقي "ने  अपनी  किताब    "अखबार मक्का -  اخبار مكة "   में  मक्का  का  इतिहास लिखा  है .   इसमे  मक्का में  इस्लाम  से  पहले  के रिवाज , दन्तकथाएं   और   मान्यताओं   का   विस्तृत विवरण  दिया गया  है ,    इसके  साथ  मुहम्मद  साहब   की  मृत्यु  तक  यानी  सन 603  ई ० तक  मक्का  में  होने वाली  घटनाओं   का  विवरण  भी दिया  है .  अजरकी  ने  मक्का में  हाजियों  द्वारा ईंट  पत्थर   से निर्मित स्तम्भ(Pillar)  को  पत्थर  मारने की  परम्परा  का  भी  उल्लेख   किया  है  , लोग उसे  शैतान  मानते  हैं , यह  रिवाज   हजारों  साल  पुराना  है  , पीढ़ी  दर पीढ़ी   लोग इसी रिवाज  को मानते आये  हैं , यद्यपि  कुरान   में  शैतान   को  पत्थर  मारने  का  आदेश  कहीं  नहीं     दिया  है  , कारण पूछने  पर  लोग  कहते  हैं  ,
"और जब  यह  कोई  अनैतिक   काम  करते  हैं   ,तो  कहते   हैं की हमने  यह अपने  पूर्वजों  को  ऐसा  करते  हुए पाया  है  , हमें तो  अल्लाह  ने  यही  हुक्म   दिया  है "
सूरा -अल  आराफ 7:28 

   शैतान   को  पत्थर मारने  की  परंपरा  के  पीछे   मक्का  के  लोगों  में  एक  कहानी   प्रचलित   है  ,जिसे अजरकी  ने  लिखा है   , इसके अनुसार
 जब  इब्राहिम  मीना  नामकी  जगह  छोड़  कर अकबा गए  तो  उनको गंदे  पत्थरों  के ढेर के पीछे  छुपा   हुआ  शैतान   दिखा  , तभी  जिब्राइल  ने  उन से कहा  इस शैतान  को  पत्थर   मार  कर  भगा  दो  .इस  से शैतान  भाग   गया  लेकिन  फिर  वहीँ  छुप   गया  , इब्राहिम   ने  फिर  पत्थर  मारे  , ऐसा दो   बार  हुआ  . तब  जिब्राईल   ने  इब्राहिम  से कहा  शैतान   को  सात  पत्थर   मारो  , तभी  यह  भागेगा  , इब्राहिम   ने ऐसा  ही  किया  , और शैतान   दूर  कहीं चला  गया . तभी   से  यह   रिवाज    शुरू   हो गया

4-शैतान   का  कद  बढ़  गया 
यदि   हम  कहें कि जैसे  जैसे  मुसलमानों   में  शैतानी प्रवृत्ति    बढ़ने  लगी   वैसे ही   शैतान  के   स्तम्भ    का  कद  भी   बढ़   गया   है ,तो  इस  बात  में कोई  झूठ   नहीं    है   , क्योंकि   सऊदी  सरकार  ने  सन 2004  में शैतान   के  छोटे  स्तम्भ    को  तोड़   कर  नया  और  बड़ा  स्तम्भ  बनवा  दिया  है .यह  26  मीटर  यानी  85  फुट   लंबा  है   ,  इसके  आगे  एक  पुल  भी    बनवा  दिया  गया  है  ,  ताकि   लोग  इस  पर  चढ़   कर  शैतान  के  स्तम्भ   पर  पत्थर   मार  सकें , इस  स्तम्भ  को  अरबी  में "अल   जमरात  الجمرات‎ - "  कहा  जाता   है 

1.पुराने  स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.cuttingthroughthematrix.com/images/StoningofSatan.jpe

2.नये स्तम्भ   की  फोटो 

http://www.islamicinvitationturkey.com/wp-content/uploads/2012/10/esmaeeli20121026173802210.jpg

5-शैतान  को  पत्थर   मारने  की विधि 

शैतान  को  पत्थर   मारने   को  अरबी   में "रमी  अल  जमरात  -  رمي الجمرات‎   " कहा  जाता   है   , इसके  लिए  नियम इस  प्रकार   हैं ,1.जिल  हज  की  10 तारीख को  हाजी  मुजदलीफा    से  निकलें  और  मीना  के  रास्ते  से  पत्थर  जमा  करें  ,2 .पत्थर   न  तो  बहुत  बड़े  हों  और न छोटे  हों .3.सुन्नत  के अनुसार  सात (7 ) पत्थर   जमा   कर के  रख  लें .4.मीना  आने  पर सूर्योदय   से  पहले पत्थर  नहीं  मारें .5.हाजी जमरात   पर  सात  पत्थर  मारें  ,  लोग  शैतान  पर धिक्कार  करने के लिये अपने  जूते  , सैंडिल   और अन्य  गंदी  चीजें     भी    फेक   कर  मार  देते  हैं

6-शैतान  को  पत्थर कब  मारें ?

इसके बारे   में  यह  हदीस बताती   है   ,

वाबरा  ने  इब्न  उमर से पूछ  कि  हम शैतान  पर  पत्थर   कब  मार  सकते  हैं ? उमर  ने   कहा जब  तुम्हारे  दल  का   मुखिया (इमाम )  आदेश  करे यानी  पत्थर  मारे  तभी   शैतान  पर  पत्थर  मारना .

Narrated Wabrah,I asked Ibn 'Umar: When should I throw pebbles at the jamrah? He replied: When your imam (leader at Hajj) throws pebbles

"، عَنْ وَبَرَةَ، قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ مَتَى أَرْمِي الْجِمَارَ قَالَ إِذَا رَمَى إِمَامُكَ فَارْمِ ‏.‏ فَأَعَدْتُ عَلَيْهِ الْمَسْأَلَةَ فَقَالَ كُنَّا نَتَحَيَّنُ زَوَالَ الشَّمْسِ فَإِذَا زَالَتِ الشَّمْسُ رَمَيْنَا ‏.‏ "

Sunan Abi Dawud - Book 10, Hadith 1967

7-पत्थर  मारने वालों  की  मौत 
शैतान  के स्तम्भ   पर  पत्थर   मारने  के लिए   हाजियों   में  धक्कामुक्की   और   भगदड़    हो   जाती  है   ,  और शैतान   पर   पत्थर  मारने   वाले  खुद   मर   जाते   है  ,  जैसा   इसी  साल   में  हुआ  है   ,  मुहम्मद  साहब  के  सामने   भी  ऐसा  हुआ  था  ,  जिसका  विवरण   इस  हदीस   में   है  ,

अब्दुल्लाह   इब्न  बुरैदा   ने  अपने  पिता  से  सुना  कि  एक  औरत  शैतान   को पत्थर   मारते   समय  दूसरी   औरत  से गुथ  गयी   ,  जिस   से  उसके  पेट  का  गर्भ  गिर  गया.  तब रसूल   ने  उस  बच्चे   के लिए  दिय्या (   ) मुआवजे  के  रूप में  पचास  भेड़ें   उस  औरत   को  दीं ,और   लोगों  को  पत्थर  मारना   बंद  करने  को   कहा

a woman threw some pebbles and stuck another woman, and she miscarried. The Messenger of Allah stipulated (a Diyah of ) fifty sheep for her child. And on that day, he forbade throwing pebbles.

، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ امْرَأَةً، خَذَفَتِ امْرَأَةً فَأَسْقَطَتْ فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي وَلَدِهَا خَمْسِينَ شَاةً وَنَهَى يَوْمَئِذٍ عَنِ الْخَذْفِ ‏.‏ أَرْسَلَهُ أَبُو نُعَيْمٍ ‏.‏ "
"

 Sunan an-Nasa'i - Vol. 5, Book 45, Hadith 4817

8-कोसने  से शैतान शक्तिशाली  हो जाता है 
 
इस्लाम  से  पहले  से भी अरब   लोगों  में रिवाज  था  कि जब  कोई  काम  बिगड़ जाता  था , या  किसी  तरह   की  अड़चन  पैदा हो   जाती  थी  , तो  वह शैतान  को  कोसने  लगते   थे  , और कह  देते  थे  कि शैतान    मर  जाये , या शैतान  पर   लानत   हो  . अरबों   की  यह  परंपरा  मुहम्मद साहब  के  समय  से भी  थी ,  और आज   भी  जारी   है   , लोग ज़रा सी  बात  पर  भी  शैतान  को  जिम्मेदार   बता   कर  उसकी  मौत की  बद दुआ  देने  लगते  थे  ,  जैसा  इस  हदीस  में  कहा  गया  है   ,

अबु  तमीमा  अल  हुज़ैमा  ने  कहा  की  एक   बार  मैं रसूल के पीछे उनके  गधे   पर  बैठ   कर जा रहा   था  , तभी   वह  गधा  रास्ते   में  अड़  गया  , यह देख  कर  मैं  बोल  पड़ा  कि "शैतान  का नाश  हो  ( Let Satan perish) ,अरबी  में "युहलिक अश्शैतान -  يهلك الشيطان"यह  सुन कर  रसूल   ने  कहा ऐसा  नहीं  कहो   इस  से शैतान  और बड़ा   हो   जायेगा  ,  बल्कि   कहो   बिस्मिल्लाह   इस  से  शैतान  एक   मच्छर  से भी  छोटा    हो  जायेगा

मुसनद  इमाम  अहमद ( مسند أحمد )  Vol. 5 p. 59 
 

यही   बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार   कही   गयी   है  , तुम  यह  नहीं  कहो  कि शैतान  का नाश  हो,और   न  यह  कहो  लि इन्नल इबलीस लईन -  لأنَّ إبْليسَ اللّعِينَ " यानी   शैतान  के  लिए  लानत  हो  , ऐसा  कहने  से शैतान  की  शक्ति  बढ़  जाती  है .  इसलिए  तुम  कहो   अल्लाह  के  नाम  से  ‘( In the name of Allah ) .    इस  से   वह  अपमानित  महसूस करेगा  
 
सुन्नन   अबी  दाऊद  - किताब  अल  अदब  42  हदीस 4982

 इन हदीसों  से  सिद्ध   होता  है कि मुसलमान  शैतान लानत   भेज  भेज  कर  उसकी  शक्तियों  में वृद्धि कर रहे   है  ,यही  कारण  है  कि  इस्लामी देशों  में शैतान   का  राज  है  , कहीं  शान्ति  नहीं  है .इन  सभी  प्रमाणों  से  सिद्ध   होता   है कि इस्लाम  की   मान्यताएं   , रिवाज   और  परंपरा     तर्कहीन   और  अंधविश्वास   पर  आधारित    हैं   . जब   मुसलमान  एक  स्तम्भ   में  शैतान  का निवास  मानते   हैं   . जो  एक  प्रकार   की   मूर्ति  पूजा  ही  है   , तो  उनको  हिन्दुओं   की  मूर्ति  पूजा   पर कटाक्ष  करने    का  कोई  अधिकार  नहीं  . मुस्लमान   ऐसा  इसलिए करते हैं   , क्योंकि उनके  सभी   नबी  और  रसूल  शैतान   के प्रभाव   से  ग्रस्त   थे   ,जैसा  कि खुद   कुरान   में  लिखा  है ,

"हे  मुहम्मद  तुम से  पहले जो   भी   नबी  और  रसूल   हमने  भेजे शैतान    ने उनकी   कामना   में असत्य  मिला  दिया  था  , "सूरा  अल हज 22:52 


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43 टिप्‍पणियां:

  1. तथ्य पूर्ण प्रस्तुति....

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  2. किसी के पास यदि मेरे एक प्रश्न का उत्तर हो तो कृपया मेरी सहायता करे:
    मेरे एक मुसलमान मित्र जब इस्लाम और कुरआन की तारीफो के पुल बांधने लगे तो मेरे मन मे उत्सुकता जगी कि आखिर ये कुरआन में है क्या?
    क्या सचमुच ये ईश्वर की जुबानी या उन्ही के द्वारा लिखित ग्रंथ है तो मैं कुरआन की ढेर सारी आयते पढी तो मेरे मन में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई जैसे:

    सुरा 9 आयत 2: तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा

    सुरा 4 आयत 93: और जो शख्स किसी मोमिन को जानबूझ के मार डाले (ग़ुलाम की आज़ादी वगैरह उसका कुफ्फ़ारा नहीं बल्कि) उसकी सज़ा दोज़क है और वह उसमें हमेशा रहेगा उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है और उसपर लानत की है और उसके लिए बड़ा सख्त अज़ाब तैयार कर रखा है।

    इन दोनो आयतो को जरा गौर से पढे:

    "ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते"

    "ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा"

    "उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है "

    ध्यान देने वाला तथ्य यह है कि यदि ये सचमुच अल्लाह या खुदा के बोल है तो इन पंक्तियों में अल्लाह को अपने ही नाम का उल्लेख क्यों करना पडा ।

    ऐसा तो लेखक तब करता है जब वह किसी अन्य तिसरे व्यक्ति के संदर्भ में लिख रहा हो।

    यदि ये वास्तव मे अल्लाह के ही वचन होते तो कुछ यूं होते:

    "मुझे आजिज़ नहीं कर सकते"

    "मैं काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहुंगा"

    "उसपर मैनें (अपना) ग़ज़ब ढाया है "

    अब सवाल ये उठता है कि ऐसी छोटी छोटी व्याकरणीय त्रुटी तो इस दुनिया को चलाने वाले ईश्वर कर नहीं सकते

    और अगर किए है तो वह ईश्वर हो नही सकते।

    इसके अलावा लगभग हर आयत के अंत में "अल्लाह बडा दयालु है" "अल्लाह सर्वशक्तिमान है" "अल्लाह सब जानता है" जैसी पंक्तियां हैं यदि अल्लाह मे वाकई ये सारे गुण हैं तो उन्हे ये बार बार क्यूं कहना पड रहा है या फिर उनमें आत्मविश्वास(confidence) की भारी कमी है।

    एक और प्रश्न:

    ये सब जानते है कि कुरआन की मुल पुस्तक सिर्फ अरबी भाषा में हैं
    बाकि सब इसके अनुवाद मात्र हैं

    प्रश्न ये है कि क्या पूरी दुनिया को चलाने वाले अल्लाह को क्या सिर्फ एक भाषा की ही जानकारी थी अगर हां तो किस मदरसा में पढे थे।

    अगर उन्हे सभी भाषाओं का ज्ञान था तो सभी भाषाओं में कुरआन लिखकर संबंधित देशों में वितरित करना चाहिए था।

    और यदि समस्त भाषाओं का ज्ञान रहते हुए भी उन्होने सिर्फ अरब और अरबी को चुना इसका अर्थ ये होता है कि वे सिर्फ अरबवासियों को ही अपना अनुयायी बनाना चाहते थे तो उनकी इच्छा के खिलाफ जिहाद एवम् अन्य सही गलत तरीकों से इस्लाम का प्रचार प्रसार करके ये लोग भारी गुनाह किए है और कर रहें है अतः इनका जहन्नुम में जाना तय हैं और हम(तथाकथित काफिर लोग यानि गैर-इस्लाम एवम् गैर-अरबी) अपने अपने देशों में अपने मूल धर्म के साथ जी रहें है जैसा कि ईश्वर (अल्लाह) चाहते थे तो हमारा तो जन्नत का टिकट कन्फर्म समझे।

    आप सब पाठको विशेषकर Blogger एवम् मुस्लिम भाईयो से मेरा आग्रह है कि मेरी इस टिपण्णी पर अपनी राय देकर मेरा संशय दूर करें।
    धन्यवाद
    जय हिंद जय भारत जय हिंदुत्व
    भारत माता की जय।

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    1. whatever you are...kya aap apne dharm ke bare me kuch batayenge...kya geeta aapne bagaur padhi hai....ya vishnupuran ya garud puran ka adhyan kiya hai...agar aapne in dharamgranth ko padha hota to shayad aaj aap kisi aur dharma ko is tarah jhoota sabit karne ki koshish nahi karte...aur haa ye sabhi dharam granth bhi sanskrit me hi hai...to kya me ye samjhu aapke gods ko bhi apni kitabe sabhi bhasao me translate karke likhni chaiye thi...aur iska answer plz zarur de...mr expert

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    2. Bahn chodo
      Mc
      Kutto
      Abi jante hi kha ho islam k bare me


      Hadise uta k deko gaand fat jaegi

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  3. सत्यवादी जी,
    नमस्कार !
    आपके लेख http://bhaandafodu.blogspot.in/ पर देखे। खास बात ये है की आपके लेख बहुत ही अच्छे एवं तार्किक होते हैं।

    इन्टरनेट पर अभी भी राजनीति से संबन्धित कई बेहतरीन रचनाएं अंग्रेज़ी भाषा में ही हैं, जिसके कारण आम हिंदीभाषी लोग इन महत्वपूर्ण आलेखों से जुड़े संदेशों या बातों जिनसे उनके जीवन मे बदलाव हो सकता है, से वंचित रह जाते हैं| ऐसे हिन्दीभाषी यूजर्स के लिए ही हम आपके अमूल्य सहयोग की अपेक्षा रखते हैं ।

    साथ ही आपसे निवेदन है की आप अपने लेखों को शब्दनगरी पर भी अपने नाम से साथ प्रकाशित करें।

    साथ ही हमारा यह भी प्रयास होगा कि शब्दनगरी द्वारा सभी यूज़र्स को भेजी जानी वाली साप्ताहिक ईमेल में हम आपके लेख जोड़ कर,और शब्दनगरी पर प्रकाशित होने वाली विशिष्ट रचनाओं मे आपकी रचनाओं को सम्मिलित कर अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाएँ ।
    उम्मीद है हमारी इस छोटी सी कोशिश में आप हमारा साथ अवश्य देंगे ।
    आपके उत्तर की प्रतीक्षा है ...
    धन्यवाद,
    प्रियंका शर्मा
    (शब्दनगरी संगठन)
    www.shabd.in

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  9. Love your intellectual writings and objective analysis. Keep sharing the good work and enlightning the misled innocent. Best wishes.

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  10. Hi www.bhandafodu.blospot.com

    Me ek baat Janana Chahata Hu ki agar Quran me itni gandi beaten likhi he to
    DUBAI me itni Shanti kyu he vaha bhi to Islam ko mante he vo log ye sare gande kaam kyu nahi karate
    Ab tak aapne sari baten logic and sabuton ke Aadhar par bataya he please is ka bhi answer using Tarah Dena
    I'll wait for your reply

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  11. जेहाद की आय का साधन

    Mene aapka ye blog padha is me aapne sabhi Bure kaamo (nashili vastu, khun, aurton par atyachar) ko gair-islami bataya he
    Kabhi aap Kehate ho ki ye sab Inke Quran me likha he
    Kabhi Kehate ho ki ye sab gair islami he
    I am confused clarify me

    उत्तर देंहटाएं
  12. Murkh secular logon ko Na to Sanatan ka gyan Hota hai, na Islam ka . Aap ko bahot bahot dhanyavad aap dono vichardharaon pe achcha prakash daal rahe ho .

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  13. हर धर्म की किताब मे लिखा हुआ है झूठ बोलना पाप है फिर भी तुम हिन्दु अपनी तरफ से हदीसे कुरआन की आयते सब झूठ क्यो लिखते है। आयत नम्बर हदीस नम्बर सब अपनी तरफ से झूठ लिख देते हो। शर्म नही आती तुम्हे। कयामत के दिन जब इंसाफ होगा तब तुम्हे झूठा इल्जाम लगाने का पता चल जायेगा । हद होती है हर चीज की। आपने काबे पर भी इल्जाम लगा दिया। वो अल्लाह का घर है। वहा पर नमाज पडी जाती है लिंग की पूजा नही होती। और क्या कहते हो तुम हमे काबे की सच्चाई सामने क्यो नही लाते हो। यूटयूब पर हजारो विडियो पडी हुयी है देख लो कोई लिंग विंग नही है वहा। बस जन्नत का एक गोल पत्थर है और हर पत्थर का मतलब लिंग नही होता। बाईचान्स मान लो वहा शिव लिंग है।तो क्या आपके शिव लिंग मे इतनी भी ताकत नही है जो वहा से आजाद हो सके। तुम्हारी गंदी नजरो मे सभी मुस्लिम अच्छे नही है इसलिए सारे मुस्लिमो को शिव मार सके। आप तो कहते हो शिव ने पूरी दुनिया बनाई तो क्या एक छोटा सा काम नही कर सकते।
    इसलिए तो इन लिंग विंग पत्थरो के बूतो मे कोई ताकत नही होती। बकवास है हिन्दु धर्म।

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    1. Jara waha ki pic dikhana

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    2. Yar ye log kutte kch b likh rahe h
      Apni taraf se jhoot bol rahe hai


      Jhooti hadees num de k kahaniya bta re hain
      Mc
      Bc


      Zara hmare bich aake ye sab bole ghus jaenge

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    3. Mc jab kisi ki sewa nhi kroge to mewa kya apni mayya choda k khaoge



      Accha kroge to accha fal milega nhi kroge nhi milega

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    4. Allah ki ibadat kroge to hi jannt milegi
      Ibadat k sath jhoot
      Makkari haramina
      Har chaiz se parhez krna pdega
      .
      Aur ibadat nhi kroge
      To in sab se parhez b muskil h

      Ibadat k lie hi duniya me aaye ho
      Ibadat nhi kroge to
      Allah naeaz honge
      To saza b denge
      Islie sudhar ja Benaami kuyte

      हटाएं
    5. Right bafees
      Koi siv ling nhi h

      Sad gya h bhosdi wale Siv ka ling


      Faltu ki bakwas kr re h hindu


      Waha koi hindu ja hi nhi ska h
      Jo gya h vo gark ho gya h


      Hamare nabiyo k zamane se hi vo pak raha h
      Pak rahegaa


      In kutto ki hmare har pak jgho pe nazar h



      Kutte log babri ii jgh lena chahte h


      Kam pad rha h to makka tak pahunch gye


      Ye nhi jante ki

      Khan k gaad diye jaenge suwaro ki fouj

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    6. भाइयो मैन ये सुना है मोहम्मद ने अपनी बेटी से शादी की थी और जब तक वो सुहागरात के लिए राजी नही हुई उसको भूँखा रखा गया इस कि खुसी में रमज़ान मानते है और भूंखे रहते है ये सही बात है क्या इसका जवाब सही से मुझे किसी मुस्लिम ने नही दिया कोई सही जवाब बताएगा जिस से मुझे सच का पता लगे कि क्या सही क्या गलत है
      दूसरी बात ये जब मोहहमद ने अल्लाह की खुसी के लिए अपने बेटे की कुर्वानी दी थी तो अल्लाह ने बेटे को जिंदा कर दिया था तो अब लोग अपने बेटे की कुर्वानी क्यों नही देते अल्लाह में इतनी ताकत नाजी बची की उनका बेटा जीवित कर सके चलो ठीक है पुरानी बात अब कोई नही देगा बेटे की कुर्वानी पर तुम लोग बेजान जिसने कुछ नही बिगाड़ा किसी का उस बकरे की कुर्वानी क्यों देते को बेटे की जगह उसका क्या कसूर अपना पेट भरने के लिए किसी बेजान की जान क्यों लेते हो

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  14. हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर हर चीज मे मौजूद है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर हर चीज मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो दुनिया की हर चीज मे कहा से हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है।कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो कुरान पर ईमान लाओ।

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    1. Tu aaja edhar sawaratoli me teri khtiya khadi kar dege tumhari masjid me pig phek de ge

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    2. Kya allah ki ibadat na karne se allah tumhe jahannum me dal dega, agar haan to kyo? Kya allah ki ibadat kiye bina tum logo ko jannat nhi mil sakta, agr nhi to kyo nhi?

      Agr hai jawab iska to do jawab jaldi se warna maan lo ki islam jhootha h, rasool jhootha tha, aur allah farji h.

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    3. Bahn chod benaami kutte
      Hm teri gaand me guss k fad denge teri gaand tu idhar aa sadar chowk

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    4. Benaami chode
      Pahle naam le k aa apna fir lad

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  15. शशांक सिंघ जाट8 जनवरी 2017 को 2:26 am

    नफीस मालिक पहले तो आप ये जानिए शिवलिंग का अर्थ तब तर्क करे
    जाने शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका गलत अर्थ निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया गया


    कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते है..
    छोटे छोटे बच्चो को बताते है कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते है..मूर्खों को संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है..और छोटे छोटे बच्चो को हिन्दुओ के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते है…इसका अर्थ जाने

    लिंग=
    लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है…
    जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत मे शिशिन कहा जाता है..

    शिवलिंग=
    >शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक….
    >पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ ....नपुंसक का प्रतीक —
    अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य के जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है..तो वे बताये ”स्त्री लिंग ”’के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग होना चाहिए… और वो खुद अपनी औरतो के लिंग को बताये फिर आलोचना करे—

    ”शिवलिंग”’क्या है ?
    शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है।शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
    शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है नाही शुरुवात।

    शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता ..दरअसल ये गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मलेच्छों द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने तथा अंग्रेजों द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है।

    खैर…..
    जैसा कि हम सभी जानते है कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं|
    उदाहरण के लिए………
    यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो…….
    सूत्र मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।
    उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और मतलब (मीनिंग) भी ।

    ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है।धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है तथा कई अन्य नामो से भी संबोधित किया गया है जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग (cosmic pillar/lingam)

    ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे है : ऊर्जा और प्रदार्थ। हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है।
    इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते है।
    ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में निहित है. वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है. (The universe is a sign of Shiva Lingam.)

    शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान है
    अब बात करते है योनि शब्द पर —
    मनुष्ययोनि ”पशुयोनी”पेड़-पौधों की योनि”’पत्थरयोनि”’

    योनि का संस्कृत में प्रादुर्भाव ,प्रकटीकरण अर्थ होता है....जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है....कुछ धर्म में पुर्जन्म की मान्यता नहीं है....इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत अर्थ को नहीं जानते है जबकी हिंदू धर्म मे 84 लाख योनी यानी 84 लाख प्रकार के जन्म है अब तो वैज्ञानिको ने भी मान लिया है कि धरती मे 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़, कीट,जानवर,मनुष्य आदि) है….

    मनुष्य योनी =पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है..अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है…

    तो कुल मिलकर अर्थ ये है:-

    लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है, शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक | दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई, बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं | हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लग सके | लेकिन कुछ विकृत मुग़ल काल से कुछ दिमागों ने इस में जननागों की कल्पना कर ली और झूठी कुत्सित कहानियां बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले हिन्दुओं को भ्रमित किया गया |

    NOTE : सभी शिव-भक्तो से प्रार्थना है अगर जानकारी अच्छी लगे तो भरपूर मात्रा में इस पोस्ट को शेयर करे ताकि सभी शिव् -भक्तो को यह जानकारी मिल सके

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    1. इतनी झूठी सफाई मत दे लिंग तो लिंग ही होता हे बोलो तो penis stupid khi ke

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    2. Bhai konse vaiganik ne man liya he naam to batao. ....hindu dhram me sabse jyada he iaslam me murti puja to nhi hoti me ye nhi khe rha Ki iaslam dhram thik he dhram to insaan ne banyae he Kisi god ne nhi ok he

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    3. Tu kya batayega siv ling ka arth
      Abe land ka mtlb kya btayegaa bhosdi k


      Land ki b puja krte ho bhosdi k

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    4. अबे गांडू पढ़े लिखे होते तभी तो जानते लिंग का मतलब कुरान अभी तक पढ़ा नही है तुम्हे तुम्हारी माँ की कसम अगर कुरान पढ़ा हो तब जवाब देना
      किसी पढ़े लिखे मुस्लिम से पूंछना की शिव लिंग का मतलब क्या होता है
      तुम्हे तो सब जगह लन्ड दिखाई देता है तुम अपनी सगी बहन में लन्ड डाल देते हो और एक बहन पर 11 लोग चाचा फूफा मामा पापा भाई सब चोद देते हो अनपढ़ लोग क्या जाने शिव लिंग का मतलब कुरान ढंग से पढ़े तब बोलना तुम्हारे मुहम्मद भी अनपढ़ थे उन्हें ये तक नही पता कि में अपनी 9 साल की बेटी से शादी कर रहा हु उसको चोद रहा हु बेटी को तो बख्श देते बुढ़ापे में ओर तुम लोग उनके नियमो पे चल रहे हो लड़की बाज साला

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  16. Murkho ko kia Samjhana Jo dhoti ko udta hai bolta hai gandu Lungi Dhoti ka copy paste hai aur dhoti ek adab se pehni jaati hai hawa kiya toofan se bhi nahi khul sakta aadhunik shoot bhi isi ka rupantar hai , aapki lungi agar hawa andar ghusa to pura land saaf dhik jayaga. thaks f reading

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  17. sasank singh jat thank you for your post shiv ling ke bare main.
    murti pooja jab nahi karte musalman to ek akaar means box matlab ek Murti jo makka main rakha hai usike saamne kyun dua karte hai koi bhi akar chaye oh lakri se bana ho o tho hindu parampara hai jo aap log vi maante hain aur dua karte hai . yeh mera khud ka ray nai hai pure sachai hai 100% sach hai ki aap vo murti se hi consentrate karte hai dhyaan lagate hai tab jo box dikhta hai oh murti hi maana jana chhiye . hum to sab kuch pujte hai is sansar ke har chiz bhagwan se joora hai

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    1. Ham log patthar ki puja nhi krte use dek k khuda se dua krte h
      Tm.log to patthar se hi sab mante unko pujte ho

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  18. Murkho ko kia Samjhana Jo dhoti ko udta hai bolta hai gandu Lungi Dhoti ka copy paste hai aur dhoti ek adab se pehni jaati hai hawa kiya toofan se bhi nahi khul sakta aadhunik shoot bhi isi ka rupantar hai , aapki lungi agar hawa andar ghusa to pura land saaf dhik jayaga. thaks f reading

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  19. Murkho ko kia Samjhana Jo dhoti ko udta hai bolta hai gandu Lungi Dhoti ka copy paste hai aur dhoti ek adab se pehni jaati hai hawa kiya toofan se bhi nahi khul sakta aadhunik shoot bhi isi ka rupantar hai , aapki lungi agar hawa andar ghusa to pura land saaf dhik jayaga. thaks f reading

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  20. Abe chutye phaiku hum waha koi seitan ko patthar nahi marne jate hai hum us kagah jate hai jaha ebrahim nabi ko saitan dikha tha or unhone waha use dekha tha chutye or woh stumbh koi seitan ki murti nahi hai woh us jagha ki nisni hai jaha seitan khada tha gelchode hum koi tumhare jese nahi hai jo gai,kuttr,suwar,patthar sabhi ko bhagwan man le jhothi bakwas bandh kar ye saare to chutye upar ese comment kar rahe hai jeise tu or woh sabhi mahan gyani ho bhosrika jhota chutyo ko ullu bana raha hai

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  21. Bhai english me bhi likho please, taki foreigners ke sath bhi share kr saku...

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  22. एक्चुअली न भगवान होता है न अल्लाह मियाँ होते हैं। हाँ शैतान ज़रूर होता है और ये आप सब बेवकूफ़ों की बातों से बख़ूबी ज़ाहिर हो रहा है। ये सब पंडित, मुल्ला पादरी की दुकानदारी है बे। पैदा हो ही गए हो तो रोज़ी रोटी कमाओ, कर्तव्य करो ऐश करो और एक दिन शान के साथ मर जाओ। ज़िन्दगी में सिर्फ़ यही करने वाला समझदार है और बाक़ी सब मूर्ख।

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  23. शंकर पार्वती हिमालय से आगे न बढे और मोहम्मद यीशू अरब इटली से। ये धार्मिक किताबें लिखने वाले सब अधकचरे ‍ज्ञान वाले थे। इधर वालों को उधर का और उधर वालों को इधर् का कोई ज्ञान था नहीं सो जैसा समझ में आया लिख मारे और ये आजकल के डेढ़ सयाने उसी को सच मान कर फ़ालतू बातों पर लड़ झगड़ कर् अपना समय खराब् करते रहते हैं। गधऊ कहीं के। मुझसे जस्ट् ऊपर वाले बेनामी तुमने सही कहा।

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