गुरुवार, 6 जुलाई 2017

जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो !

हमें  यह  लेख  तब  लिखना  पड़ा   जब   12 अगस्त  2014  को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने लद्दाख   के लेह में  लोगों   के सामने यह   बात कहीं  कि " पाकिस्तान  में  सीधी  लड़ाई  लड़ने की  हिम्मत   नहीं  है  ,इसलिये  वह  आतंकवादियों   के  सहारे  परोक्ष युद्ध  छेड़े   हुए   है  "  मोदी   के भक्त  उनके इस  बयान   से भले खुद  को  निडर  और  पाकिस्तान   को डरपोक समझने का  सपना  देखने लगें  ,लेकिन वास्तव में वह  सभी लोग  डरपोक   हैं  .  जो भारत की सीमा में घुस कर  आतंक  फ़ैलाने  वालों  को  मुस्लिम  आतकवादी  या   मुस्लिम  जिहादी   न  कह  कर सिर्फ   आतंकवादी   कहते  हैं  . इसी  तरह वह सभी लोग  डरपोक   हैं  जो  इस  सत्य   को  नहीं  कहते कि  पाकिस्तानी   द्वारा  चलाया   जा  रहा क्षद्म   युद्ध  आतंकवाद  नहीं   मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  के विरुद्ध   जिहाद  है  , जिसका  कारण सीमा  विवाद  नहीं  काफिरों (  हिन्दू )   का  नाश   और और  पूरे  भारत  खंड  पर  इस्लामी  झंडा  फहराना है  .
और  जब  तक भारत  के  हिन्दू ऐसे  आतंकवादियों   को  मुस्लिम  जिहादी  नहीं    मानते   और  उनके   साथ  वैसा ही  व्यवहार  नहीं  करते  जैसा  इजराइल करता है  , तब  तक  देश की  सीमा पर  और अंदर   आतंकवाद  बंद नहीं   हो  सकता   , यह  हमारा दावा  है  ,
इस  बात   को  ठीक  से हमें  इजराइल फिलस्तीन  क्षद्म   युद्ध का कारण और भारत  इजराइल  सम्बन्ध के  बारे में  जानना  जरुरी   है  , क्योंकि  दोनो  ही  इस्लामी  आतंक   से त्रस्त  हैं  ,

1-बाइबिल  में  भारत   का  विवरण 
भारत और  इजराइल का सम्बन्ध   हजारों  साल  पुराना है   . भारत की तरह इस्राएल   का इतिहास भी गौरवशाली है  ज़िस समय अरब के लोग  काफिले  लूटा  करते थे  , इजराइल  में  सोलोमन(solomon)   जैसा प्रतापी  राजा राज करता  था  ,  उसके समय (970-931BC  )  में   भारतीय   सामान  समुद्री  मार्ग इस्राएल  भेजा जाता था  . भारत का  उल्लेख  बाइबिल  में  अनेकों  जगह   मिलता  है  , कुछ  उदाहरण देखिये,

,",फिर हाराम के जहाज जो  "ओफीर Ophir  " ( भारत  का एक  बंदरगाह  सोपारा  जो  मुंबई के पास है )  से  सोना लाते थे वह राजा के लिए चन्दन की लकड़ी  और रत्न    ले  आये  .  राजा   ने  सोना  यहोवा  ( ईश्वर )  के  मंदिर में  लगवाया  और चन्दन  की  लकड़ी से  भजन गाने  वालों  के लिए वीणा और  सारंगियां  बनवा दी "
1  राजा 10 :11 -12 

"समुद्री    मार्ग  से  तर्शीश  के लोग जहाज भर कर सोना ,चांदी  , हाथीदांत , बन्दर  , और  मोर   ले  आते थे  , इस  से राजा  सोलोमन  सभी  राजाओं  में बड़ा राजा  बन  गया  " 1 राजा 10 :22 -24
नोट - इस आयत में हिब्रू  में  बन्दर  के लिए " कॉप "   शब्द  आया है ,जो  संस्कृत  शब्द "कपि "  से लिया गया है   . उल्लेखनीय  बात यह है  कि  उस समय इस आयत में वर्णित  सभी  चीजें  सिर्फ  भारत में ही  मिलती  थी  .

इसके अतिरिक्त  बाइबिल में दो बार स्पष्ट  रूप  से भारत  का  नाम  दिया गया   है  , हिब्रू  भाषा में भारत को "होदुव -הֹדּוּ  "कहा  गया है  , जो  सिंधव( होंदुव )     शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे  "india" कहा  गया है  , जो  सिंधव  शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे "हिंदुस्तान   "लिखा  गया  है  . यह दो आयतें  इस प्रकार हैं ,

"दादानी लोग व्यापारी  थे वे कई  द्वीपों   हाट  लगाते थे  , और  इस्राएल के लिए हाथी  दांत  और  आबनूस की  लकड़ी   लाते थे " यहेजकेल 27:15 -17

 यह क्षयर्ष  नामके राजा के  समय की  बात है  ,जो 127  प्रांतों  और हिंदुस्तान से  कूश  देश तक राज  करत था " एस्तेर 1:1 

फिर राजा  ने  लेखक  बुलवाये  और उनसे यहूदी  और   हिंदुस्तान  से कुश  देश तक सभी  राजाओं  को    पत्र लिख कर भेजने को कहा " एस्तेर 8:9 -10 

2-अरब  जंगली  गधे की  तरह  हैं 
इस्लाम  से पहले अरब   में धार्मिक ग्रन्थ  के  नाम पर  तौरेत  ( Bible ) पढ़ी  जाती   थी  , उसने  अरबों  को इस्माइल  का वंशज    माना  गया है  , मुहम्मद के पूर्वज भी उसी के वंशज  थे  , लेकिन  तौरेत में  इस्माइल  के  बारे में  जो लिखा  है  उसे  जानकर  मुहम्मद साहब  यहूदियिं से जलते थे ,तौरेत में लिखा  है  ,
 ईश्वर ने  इब्राहिम  की रखैल सारा  से  कहा  ,  तू  एक  पुत्र  जनेगी  उसका नाम  इस्माइल  रखना  , उसका  स्वभाव  एक  जंगली  गधे की  तरह होगा    और  उसका हाथ   सभी  निर्दोष  लोगों  पर  उठेगा , वह  अपने ही  लोगों   से लड़ता  रहेगा   "

 बाइबिल उत्पत्ति-अध्याय  16 आयत 11 -12 

चूँकि अरब   के लोग  हमेशा  लड़ते रहते थे  , इसलिए   यहूदी  उनको इब्राहिम  के  नाजायज  बेटे की  संताने  कहते थे   .
और  इसीलिए   मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  यहूदियों   से जलते थे  और  नफ़रत  करते थे   .
( नोट- हराम   की  औलादों   के  बारे में  गीता   में  यही  लिखा है   "   गीता  1 :40 -41 )

3-अरब  इजराइल युद्ध  का कारण 

मुसलमान  यहूदियों  को  क्यों  मारते रहते हैं  , इसका  कारण कोई  राजनीतिक  या  किसी प्रकार का सीमा विवाद   नहीं  है ,बल्कि असली  कारण यहूदी विरोधी  हदीसें   हैं  , उदहारण  के लिए  यह  हदीसें  देखिये ,

1."अबू  हुरैरा  ने कहा कि रसूल  ने  बताया  है  कि अंतिम  न्याय  का  दिन तब  तक  नहीं  आएगा  जब तक  मुसलमान  युद्ध  में सभी यहूदियों  को क़त्ल नहीं  देते  . और  यदि  कोई यहूदी  किसी चट्टान  या  पेड़  के पीछे  भी  छुप   जाएगा  , तो वह  चट्टान  और पेड़  यहूदी   का  पता  बता देंगे  . लेकिन ग़रक़द  का पेड़ चुप  रहेगा   ,क्योंकि  वह  एक  यहूदी  पेड़  है .
 .
 सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 6985 

2 .रसूल  ने कहा कि अन्तिंम  दिन  अल्लाह  का  न्याय  तब तक  पूरा  नहीं  होगा  , जब तक मुसलमान  यहूदियों   से युद्ध  करके  उनको  कत्ल   नहीं  कर देते  . और  यदि  कोई यहूदी  जान  बचने  के लिए  किसी चट्टान  के पीछे भी छुप  जायेगा  ,तो  वह चट्टान  बोलेगी  मुसलमानों  देखो  मेरे पीछे  एक यहूदी छुपा है  , उसे  मार  डालो "

सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 52 हदीस 177

4-अरब   में  यहूदी  विरोधी   शिक्षा 

वैसे  तो  सभी  मुस्लिम  माता पिता  बचपन से ही  अपने  बच्चों  को   गैर मुस्लिमों   के प्रति   नफरॅत की  घुट्टी   पिला देते हैं   ,लेकिन  सऊदी  अरब   की सरकार ने तो  बारहवीं क्लास के  विद्यार्थियों  के  पाठ्यक्रम  बाकायदा     यहूदियों    से नफ़रत  की  तालीम  शामिल  कर रखी  है   "जिसके  एक  अध्याय का   नाम   है   "दरसाते मिनल आलम अल इस्लामी -   دراسات من العالم الاسلامي "इसका  अर्थ  है "इस्लामी दुनिया का अध्ययन"(studies from muslim world   ).इसके  एक  अध्याय में   इजराइल  ,  फिलस्तीन  युद्ध   के एक  जिहाद  बता कर   कहा गया है कियह युद्ध   मुहम्मद साहब के  समय से ही चल रहा है  .इस किताब  के तीसरे   पाठ   में लिखा  है कि  इजराइल  और  फिलस्तीन   के बीच   जो जिहाद   है  ,उसका उद्देश्य   इस  पूरे  भूभाग में फिर से वैसी ही  व्यवस्था   लागु   करना है   ,जो  रसूल   के  समय में थी  , इसलिए   यहूदियों  और  मुसलमानों के बीच  कभी  शांति   नहीं   हो सकती।   क्योंकि यहूदी  झूठे ,  धोखेबाज  और  अल्लाह का  हुक्म  तोड़ने   वाले  हैं   , उनके इन्हीं  दुर्गुणों   के बारे में   कुरान   में  लिखा   है  . इसके बाद किताब  में कुरान की कुछ  आयतें   भी  दी  गयी   हैं   .

http://www.memri.org/image/9455.jpg

5-इस्राएल और  उसके शत्रुओं  की  तुलना 

विश्व में इजराइल  एक  ऐसा देश  है जो  कई तरफ  से  मुस्लिम  देशों  से घिरा हुआ  है  , जो  सभी इजराइल को  बर्बाद  करने पर तुले हुए   हैं
इस्राएल  की  राष्ट्रभाषा   और   धर्मभाषा में   इजराइल  का  हिब्रू  में नाम  " मदीनथ  इस्रायेल - מְדִינַת יִשְׂרָאֵל  "   है   . इस्राएल  के अधिकांश   लोग  यहूदी   है  , आकर और जनसंख्या   के अनुसार  इजराइल  काफी  छोटा  देश   है  , इसकी लम्बाई 470  कि  मी (290  मील ) और  चौड़ाई 135कि  मी (85 मील  है  , और कुल  क्षेत्रफल  10840 वर्ग  कि  मी है  . और   जनसँख्या  सिर्फ 81  लाख (8,134,10 )   है  , जनसंख्या के हिसाब से  विश्व में इजराइल  का  नंबर  97  वां  है  .दूसरी  तरफ  पांच  बड़े मुस्लिम  देश   हैं  जिनकी आबादी  इस   प्रकार   है   ,
1.मिस्र (Egypt)-82,196,587
2.सीरिया -21,960,358
3.जॉर्डन -7,329,643
4.ईरान -77352373
 5.तुर्की -75,087,121

यदि   इजराइल के इन  सभी  मुस्लिम  शत्रु  देशों की  कुल  जनसंख्या जोड़ ली  जाये  तो 263926082 (छब्बीस  करोड़ ,उनचालीस  लाख ,छब्बीस  हजार  और ब्यासी  )   है   .  इनके सामने इजराइल  की  जनसंख्या  केवल 2. 4  प्रतिशत   है  .

6-जिहाद पर  इस्राएल  की  नीति 

यदि   हम  इजराइल  का  नक्शा देखें   तो  पता चलता है कि यह छोटा सा देश  चारों तरफ से शत्रु  मुस्लिम  देशों  से घिरा   हुआ  है  ,और यदि  मुसलिम देशों  का  बस  चलता तो  वे  इजराइल  को कच्चा   चबा  जाते  , लेकिन यदि  आज  इजराइल इन  मुस्लिम  देशों   से टक्कर  ले रहा है तो  उसके पीछे  दो कारण  हैं  , एक  तो  इजराइल  में  सेकुलर  जैसे गद्दार   नहीं  हैं जो जिहादियों   की  मदद  करते  ,  दूसरा  कारण यह है कि इजराइल की नीति हरेक आतंकी  घटना  के बदले  वैसी  ही  और  उसी  अनुपात    में कार्यवाही  करने की  है  , इस  नीति    के बारे में  दिनांक  7 अगस्त  2014  को  इस्राएल  के रक्षा  मंत्रालय   (  Israel Ministry of Foreign Affairs )   द्वारा जो  अधिसूचना  जारी  की  है  , उसका  शीर्षक  "  Fighting Hamas terrorism within the law  "   है  ." सभी  रक्षात्मक  उपाय  करने  के बाद इस्राएल   ने स्वीकार  कर लिया  है कि अब  सैनिक  कार्यवाही  करना  अनिवार्य हो  गया है  ,क्योंकि  पिछले महीने  हमास और  जिहादियों  द्वारा  छोड़े  गए रॉकेटों   की जद  में इजराइल  के  बड़ेशहर  जैसे तेलअबीब  ,हैफा  और  राजधानी  यरूशलेम   भी  आ गए हैं  . इसलिए हम कानूनी  तौर  पर  लोगों  जान  माल  की रक्षा   के लिए  सैन्य  अभियान  चलने पर बाध्य है  . हमारा उदेश्य  हमास के जिहादियों  को समाप्त  करना  है   , जिसके लिए  हमरी  नीति हमास और जिहादियों  के साथ  वैसा  और  उसी   अनुपात में  जवाब  देने  की  है  , जैसा वह   करते हैं  "जिहादियों  के प्रति  इजराइल  की इस  नीति   का  नाम "Operation Protective Edge " है  .

"Israel acknowledges that despite the precautions taken, military operations inevitably lead to a loss of civilian life and property.
During the past month, Hamas' and other Jihadi groups' rockets have reached Israel's largest cities including Tel-Aviv, Haifa and Israel's capital, Jerusalem,Israel is bound by these laws and, thus, committed to limiting itself to a lawful response. This means that, while Hamas uses .International humanitarian law also requires that any military attack be "proportionate" ,
its military attacks against Hamas and other Jihadi groups, Israel is doing everything in its power to adhere to these principles and thus minimize harm to the civilian population: Israeli troop"

8-इस्राएल अरब पर  भारी   क्यों ?

यदि  ईश्वर  की  कृपा  हो  , धर्म  पर  निष्ठां  हो  और  देश  पर  अटूट प्रेम हो तो  थोड़े से लॉग भी   बहुत से लोगों  का मुकाबला  करने  में  सक्षम  हो सकते हैं  , इजराइल के बारे में  बाइबिल   में  लिखा है

"यहोवा ने पृथ्वी  के  सभी देशों  के लोगों  में से तुझे चुन लिया  ,कि तू  उसकी प्रिय  और निज प्रजा ठहरे  , यहोवा ने तुझे   स्नेह कर  के चुन  लिया इसका कारन यह नही कि तुम  गिनती  में अधिक  हो  , परन्तु तुम  तो सभी देशों  के लोगों  से गिनती में  कम   हो "
व्यवस्था विवरण 7 :7 -8 

इन्हीं    विशेष  गुणों  के कारण  छोटा होने पर भी  इजराइल बड़े  मुस्लिम  देशों  का निडर होकर  मुकाबला  करता रहता है  , सबसे बडी बात   यह है कि इजराइल में सेकुल्लर  नामके  गद्दार  नहीं  हैं जो जिहादियों   का सफाया  करने में  रूकावट  पैदा कर सकें और कहें की  मुसलमान  आतंकी नहीं  होते।  चूँकि   मुसलिम  जिहादी  आतंकवादी  इजराइल  की तरह  भारत  को भी अपना  शत्रु  मानते हैं  , और भारत  के अंदर और  बाहर आतंकी वारदातें  करके  भारत  को बर्बाद   करने का  मंसूबा  रखते  हैं  ,इसलिए  आज हमें  इस्लामी  आतंक को निर्मूल  करने के लिए  इजराइल  की  नीति अपनाने की जरुरत है  . केवल  बड़ी जनसंख्या होने से   कुछ  नहीं  होगा  , जब  तक  देश में मौजूद  सेकुल्लर  गद्दारों का सफाया नहीं  होगा  भारत सुरक्षित  नहीं  रहेगा  .
पाठकों  से अनुरोध है  कि फेसबुक  के माध्यम   से इजराइल  के युवा  लोगों  से  मित्रता स्थापित  करें   ,और एक  ग्रुप बनायें

 (201)


मंगलवार, 30 मई 2017

भगवा वस्त्रधारी रसूल !

दिग्विजय सिंह   जैसे हिन्दू द्वेषी कांग्रेसी नेताओं   ने  मुसलमामानों की  आतंकी हरकतों   पर  पर्दा डालने के लिए ,और हिन्दुओं  को फ़साने के लिए  " भगवा आतंक " शब्द का अविष्कार किया   था ,  जबकि  सब   जानते हैं  कि

भारतीय   परंपरा में भगवा  रंग को  तयाग , शौर्य  , बलिदान और  साहस  का प्रतिक  माना जाता है  , भगवा रंग को केसरिया  रंग भी  कहा जाता है यह रंग  केसर के पराग से प्राप्त होता है    जिसका  वैज्ञानिक   नाम  Crocus sativus है ,भगवा रंग    हिन्दू धर्म का द्योतक है ,इसलिए  मंदिरों पर  भगवा झंडा लगाया  जाता है   जिसे " धर्मध्वज  . या  धर्मपताका   भी  कहते हैं  ,अधिकांश हिन्दू संत ,सन्यासी भगवा रंग के वस्त्र धारण करते है ,इसके अतिरिक्त  बौद्ध    सन्यासी  भी  गेरुआ   या  भगवा वस्त्र ही   पहिनते है ,  यही कारन है कि  हमारे  तिरंगे में  पहला  रंग भगवा  ही   है,भगवा या केसरिया रंग  ऐसा होता है
http://soithappens.files.wordpress.com/2009/04/saffron-light.jpg

 ,लेकिन  बहुत  कम लोग जानते होंगे कि  मुसलमानों  के  रसूल मुहम्मद साहब और उनके साथी भी केसरिया   यानि  भगवा  रंग के कपडे पहिना करते थे  ,  इसके  बारे में  तीन प्रामाणिक  हदीसें   दी   जा  रही   हैं


1-पहली हदीस 
"कायलाह बिन  मुकरामह ने  कहा कि मैंने देखा कि रसूल दो  लुंगियां ( कमर में बांधने  वाला ) कपडा लपेटे हुए थे  ,जो  केसरिया  रंग से  रंगा हुआ था"


Qaylah bin Makhramah (R.A) says:
"I saw Rasulullah (S.A.W) in such a state that he was wearing two old lungis (sarong, waist wrap) that had been dyed a saffron colour


، عَنْ قَيْلَةَ بِنْتِ مَخْرَمَةَ، قَالَتْ‏:‏ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَعَلَيْهِ أَسْمَالُ مُلَيَّتَيْنِ، كَانَتَا بِزَعْفَرَانٍ


 Shama'il Muhammadiyah-الشمائل المحمدية

English reference : Book 8, Hadith 64
Arabic reference : Book 8, Hadith 66

2-दूसरी  हदीस 
अब्दुलाह बिन  जैद  ने अपने पिता की  बात बयान  की है  कि इब्ने उमर अपने कपडे भगवा रंग में रंगवाया करते थे ,कारण पूछने से उन्होंने बताया की अल्लाह  के  रसूल भी केसरिया रंग  से कपडे रंगवाया करते  थे "


'Abdullah bin Zaid narrated from his father that:
Ibn 'Umar used to dye his garments with saffron. He was asked about that and he said: "The Messenger of Allah [SAW] used to dye his clothes (with it)."


"، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ يَصْبُغُ ثِيَابَهُ بِالزَّعْفَرَانِ فَقِيلَ لَهُ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصْبُغُ ‏.‏

Reference : Sunan an-Nasa'i 5115
In-book reference : Book 48, Hadith 76
English translation : Vol. 6, Book 48, Hadith 5118


3-तीसरी हदीस 
मलिक बिन नाफय कहते हैं  की इब्न  उमर  गेरुआ  ( गेरू  मिट्टी रंग जैसे  )  केसरिया कपडे  पहिना करते   थे "


from Malik from Nafi that Abdullah ibn Umar wore garments dyed with red earth and dyed with saffron.

"وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ يَلْبَسُ الثَّوْبَ الْمَصْبُوغَ بِالْمِشْقِ وَالْمَصْبُوغَ بِالزَّعْفَرَانِ ‏.‏  "

Muwatta Malik-USC-MSA web (English) reference : Book 48, Hadith 4

Arabic reference : Book 48, Hadith 1657


अब  हम  दिग्विजय    , चिदंबरम  जैसे उन  सभी  कांग्रेसियों    से पूछना चाहते जिन्होंने भगवा कपडे धारण करने वाले संतों  खासकर  साध्वी  प्रज्ञा ठाकुर  को भगवा  आतंकवादी  घोषित करके  निर्दोष होने पर इतना प्रताड़ित किया था  , अगर इन   कान्ग्रेसिओं में  हिम्मत हो  तो मुहम्मद   को भगवा  आतंकी बताने   की  हिम्मत   कर  के दिखाएँ  , क्योंकि वह  और उनके साथी भी भगवे केसरिया कपडे पहिनते थे , नहीं   तो लोग कान्ग्रेसिओं को दोगला  और नामर्द   कहेंगे !

और अगर मुल्लों में हिम्मत हो  तो इन हदीसों को गलत साबित कर के दिखाएँ  , नहीं  तो  भविष्य  में कभी  हिन्दुओं को भगवा  आतंकवादी  कहने की भूल   नहीं  करें   , नहीं  तो हम   भी मुहम्मद साहब  को भी  भगवा आतंकवादी  कहने  लगेंगे

(368)

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

क्रूरता और संहार के इस्लामी अविष्कार


इस्लाम के अनुसार   के  वह सभी लोग  काफ़िर   हैं  ,जो  अल्लाह  और उसके रसूल  पर ईमान नहीं  रखते  , और  जब तक  यह लोग ईमान  नहीं  लाएंगे  तब  तक  उनके विरुद्ध   जिहाद    होता  रहेगा  , इसके  लिए  सभी  गैर मुस्लिमों   को  यह   मानना होगा  की अल्लाह एक है  ,  और   वह  बड़ा मेहरबान  और  रहमदिल    है  , साथ में  यह बात भी  मानना  पड़ेगा  की  मुहम्मद  अल्लाह  के रसूल  हैं  , और उनको  दुनिया   पर  रहम  करने के लिए  भेजा   गया है  ,  लेकिन  लोगों   को  यह   ज़रा सी  बात मनवाने के लिए  मुहम्मद ने  जो  जो तरीके   खोज   निकाले  थे  वह  कुरान और  हदीसों में  मौजूद हैं  , इन  तरीकों  को  देख  कर  सामान्य  व्यक्ति  की  दृष्टि  में  मुहम्मद की तुलना  में नर  पिशाच  भी  देवता  दिखाई  देगा असल में मुहम्मद  साहब मुसलमानों को इतना क्रूर और निर्दयी   बनाना  चाहते थे  , की वे  गैर मुस्लिमों  की  ह्त्या   करने में करते  समय   मारने वालों पर  कोई  दया  नहीं  करे, लेकिन  वह   अपने द्वारा  ईजाद नए नए तरीके  पहले  जानवरों पर  आजमाते  थे  , ऐसे कुछ  तरीके  हदीसों में  दिए  गए हैं
1 - पशुओं  को  मारने के  हदीसी  तरीके
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3
ब-पत्थर मार कर
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7
ब -मादा के गर्भ का बच्चा
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ " मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9
स -दूध पीता बच्चा
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एक
ही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो "
 मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4
ऐसे   निर्दयता  के  काम  करके  जब मुहम्मद  को पूरा भरोसा हो  गया  कि उनके  साथी पूरी  तरह  से  नरराक्षस बन  गए  तो  उन्होंने  और  नए तरीके  ईजाद   कर   किये  जो  कुरान में  मौजूद  है  .
2 -मनुष्यों  को  मारने के कुरानी  तरीके
कुरान में  गैर मुस्लिमों  को  सता  सता  कर जो   यह  तरीके कुरान में  बताये हैं  , वह   जहन्नम  वालों के लिए हैं  ,लेकिन  बगदादी   के लोग   इसी  दुनियां में  ऐसे  ही गैर मुस्लिमों   पर   प्रयोग   करते  रहते हैं ,  निश्चय ही  उनको   इतनी  क्रूरता की  प्रेरणा  कुरान से  ही   मिली   है
"उनकी  खालें  जला  दी   जाएँगी ताकि यातना का मजा चखें "सूरा -निसा  4:56
"चारों  तरफ से घेर  कर खौलता  पानी   डालेंगे  "सूरा -कहफ़  18:29
"उनके सिरों पर लोहे के  हथौड़े मारे  जायेंगे  " सूरा -हज   22:21
" जो बच  कर भागना  चाहेगा तो उसे  वहीँ   धकेल दिया जायेगा  " सूरा -अस सजदा 32:20
" गले में जंजीर   डाल  कर भड़कती  आग में झौंक    देंगे  "सूरा -दहर  76:4
"
हमारे पहरेदार  उग्र  स्वभाव के और निर्दयी   हैं "सूरा -तहरीम   66:6

अगर   कुरान  में दीगयी जहन्नम के बारे में इन  बातों  पर   शंका हो  तो  ,ISIS के द्वारा  जारी किये गए वीडियो  देखिये ,कुरान की  ऐसी  आयतों   से प्रभावित   मुसलमानों   ने   जहन्नम  को    धरती  पर ही  उतार  दिया  ,यहाँ  तो मुसलमान कानून  के भय  से ऐसे काम नहीं  कर पाते , लेकिन  अगर वह  बहुसंख्यक  हो  गए  तो हदीसों  और   कुरआन के   यह तरीके  इस्तेमाल  जरूर   करेंगे   ,क्योंकि  इनके  अविष्कार  कर्ता  रसूल  के सिवा और कोई   नहीं  है

नोट -यह  हमारा  लेख संख्या  206  का अंश है  जो दिनांक 28  फरवरी 2012  को  बनाया गया था


मंगलवार, 10 जनवरी 2017

जिहादियों का मुकाबला इस्राएल से सीखो !

हमें  यह  लेख  तब  लिखना  पड़ा   जब   12 अगस्त  2014  को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी ने लद्दाख   के लेह में  लोगों   के सामने यह   बात कहीं  कि " पाकिस्तान  में  सीधी  लड़ाई  लड़ने की  हिम्मत   नहीं  है  ,इसलिये  वह  आतंकवादियों   के  सहारे  परोक्ष युद्ध  छेड़े   हुए   है  "  मोदी   के भक्त  उनके इस  बयान   से भले खुद  को  निडर  और  पाकिस्तान   को डरपोक समझने का  सपना  देखने लगें  ,लेकिन वास्तव में वह  सभी लोग  डरपोक   हैं  .  जो भारत की सीमा में घुस कर  आतंक  फ़ैलाने  वालों  को  मुस्लिम  आतकवादी  या   मुस्लिम  जिहादी   न  कह  कर सिर्फ   आतंकवादी   कहते  हैं  . इसी  तरह वह सभी लोग  डरपोक   हैं  जो  इस  सत्य   को  नहीं  कहते कि  पाकिस्तानी   द्वारा  चलाया   जा  रहा क्षद्म   युद्ध  आतंकवाद  नहीं   मुसलमानों  द्वारा हिन्दुओं  के विरुद्ध   जिहाद  है  , जिसका  कारण सीमा  विवाद  नहीं  काफिरों (  हिन्दू )   का  नाश   और और  पूरे  भारत  खंड  पर  इस्लामी  झंडा  फहराना है  .
और  जब  तक भारत  के  हिन्दू ऐसे  आतंकवादियों   को  मुस्लिम  जिहादी  नहीं    मानते   और  उनके   साथ  वैसा ही  व्यवहार  नहीं  करते  जैसा  इजराइल करता है  , तब  तक  देश की  सीमा पर  और अंदर   आतंकवाद  बंद नहीं   हो  सकता   , यह  हमारा दावा  है  ,
इस  बात   को  ठीक  से हमें  इजराइल फिलस्तीन  क्षद्म   युद्ध का कारण और भारत  इजराइल  सम्बन्ध के  बारे में  जानना  जरुरी   है  , क्योंकि  दोनो  ही  इस्लामी  आतंक   से त्रस्त  हैं  ,

1-बाइबिल  में  भारत   का  विवरण
भारत और  इजराइल का सम्बन्ध   हजारों  साल  पुराना है   . भारत की तरह इस्राएल   का इतिहास भी गौरवशाली है  ज़िस समय अरब के लोग  काफिले  लूटा  करते थे  , इजराइल  में  सोलोमन(solomon)   जैसा प्रतापी  राजा राज करता  था  ,  उसके समय (970-931BC  )  में   भारतीय   सामान  समुद्री  मार्ग इस्राएल  भेजा जाता था  . भारत का  उल्लेख  बाइबिल  में  अनेकों  जगह   मिलता  है  , कुछ  उदाहरण देखिये ,"फिर हाराम के जहाज जो  "ओफीर Ophir  " ( भारत  का एक  बंदरगाह  सोपारा  जो  मुंबई के पास है )  से  सोना लाते थे वह राजा के लिए चन्दन की लकड़ी  और रत्न    ले  आये  .  राजा   ने  सोना  यहोवा  ( ईश्वर )  के  मंदिर में  लगवाया  और चन्दन  की  लकड़ी से  भजन गाने  वालों  के लिए वीणा और  सारंगियां  बनवा दी "
1  राजा 10 :11 -12

"समुद्री    मार्ग  से  तर्शीश  के लोग जहाज भर कर सोना ,चांदी  , हाथीदांत , बन्दर  , और  मोर   ले  आते थे  , इस  से राजा  सोलोमन  सभी  राजाओं  में बड़ा राजा  बन  गया  " 1 राजा 10 :22 -24
नोट - इस आयत में हिब्रू  में  बन्दर  के लिए " कॉप "   शब्द  आया है ,जो  संस्कृत  शब्द "कपि "  से लिया गया है   . उल्लेखनीय  बात यह है  कि  उस समय इस आयत में वर्णित  सभी  चीजें  सिर्फ  भारत में ही  मिलती  थी  .

इसके अतिरिक्त  बाइबिल में दो बार स्पष्ट  रूप  से भारत  का  नाम  दिया गया   है  , हिब्रू  भाषा में भारत को "होदुव -הֹדּוּ  "कहा  गया है  , जो  सिंधव( होंदुव )     शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे  "india" कहा  गया है  , जो  सिंधव  शब्द  का  अपभृंश  है  , और  इसी से  हिन्दू  शब्द बना  है  बाइबिल  के अंगरेजी अनुवाद में इसे "हिंदुस्तान   "लिखा  गया  है  . यह दो आयतें  इस प्रकार हैं ,

"दादानी लोग व्यापारी  थे वे कई  द्वीपों   हाट  लगाते थे  , और  इस्राएल के लिए हाथी  दांत  और  आबनूस की  लकड़ी   लाते थे " यहेजकेल 27:15 -17

 यह क्षयर्ष  नामके राजा के  समय की  बात है  ,जो 127  प्रांतों  और हिंदुस्तान से  कूश  देश तक राज  करत था " एस्तेर 1:1

फिर राजा  ने  लेखक  बुलवाये  और उनसे यहूदी  और   हिंदुस्तान  से कुश  देश तक सभी  राजाओं  को    पत्र लिख कर भेजने को कहा " एस्तेर 8:9 -10

2-अरब  जंगली  गधे की  तरह  हैं
इस्लाम  से पहले अरब   में धार्मिक ग्रन्थ  के  नाम पर  तौरेत  ( Bible ) पढ़ी  जाती   थी  , उसने  अरबों  को इस्माइल  का वंशज    माना  गया है  , मुहम्मद के पूर्वज भी उसी के वंशज  थे  , लेकिन  तौरेत में  इस्माइल  के  बारे में  जो लिखा  है  उसे  जानकर  मुहम्मद साहब  यहूदियिं से जलते थे ,तौरेत में लिखा  है  ,
 ईश्वर ने  इब्राहिम  की रखैल सारा  से  कहा  ,  तू  एक  पुत्र  जनेगी  उसका नाम  इस्माइल  रखना  , उसका  स्वभाव  एक  जंगली  गधे की  तरह होगा    और  उसका हाथ   सभी  निर्दोष  लोगों  पर  उठेगा , वह  अपने ही  लोगों   से लड़ता  रहेगा   "

 बाइबिल उत्पत्ति-अध्याय  16 आयत 11 -12

चूँकि अरब   के लोग  हमेशा  लड़ते रहते थे  , इसलिए   यहूदी  उनको इब्राहिम  के  नाजायज  बेटे की  संताने  कहते थे   .
और  इसीलिए   मुहम्मद   साहब  और  उनके  साथी  यहूदियों   से जलते थे  और  नफ़रत  करते थे   .
( नोट- हराम   की  औलादों   के  बारे में  गीता   में  यही  लिखा है   "   गीता  1 :40 -41 )

3-अरब  इजराइल युद्ध  का कारण

मुसलमान  यहूदियों  को  क्यों  मारते रहते हैं  , इसका  कारण कोई  राजनीतिक  या  किसी प्रकार का सीमा विवाद   नहीं  है ,बल्कि असली  कारण यहूदी विरोधी  हदीसें   हैं  , उदहारण  के लिए  यह  हदीसें  देखिये ,

1."अबू  हुरैरा  ने कहा कि रसूल  ने  बताया  है  कि अंतिम  न्याय  का  दिन तब  तक  नहीं  आएगा  जब तक  मुसलमान  युद्ध  में सभी यहूदियों  को क़त्ल नहीं  देते  . और  यदि  कोई यहूदी  किसी चट्टान  या  पेड़  के पीछे  भी  छुप   जाएगा  , तो वह  चट्टान  और पेड़  यहूदी   का  पता  बता देंगे  . लेकिन ग़रक़द  का पेड़ चुप  रहेगा   ,क्योंकि  वह  एक  यहूदी  पेड़  है .
 .
 सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 6985

2 .रसूल  ने कहा कि अन्तिंम  दिन  अल्लाह  का  न्याय  तब तक  पूरा  नहीं  होगा  , जब तक मुसलमान  यहूदियों   से युद्ध  करके  उनको  कत्ल   नहीं  कर देते  . और  यदि  कोई यहूदी  जान  बचने  के लिए  किसी चट्टान  के पीछे भी छुप  जायेगा  ,तो  वह चट्टान  बोलेगी  मुसलमानों  देखो  मेरे पीछे  एक यहूदी छुपा है  , उसे  मार  डालो "

सही बुखारी - जिल्द 4 किताब 52 हदीस 177

4-अरब   में  यहूदी  विरोधी   शिक्षा

वैसे  तो  सभी  मुस्लिम  माता पिता  बचपन से ही  अपने  बच्चों  को   गैर मुस्लिमों   के प्रति   नफरॅत की  घुट्टी   पिला देते हैं   ,लेकिन  सऊदी  अरब   की सरकार ने तो  बारहवीं क्लास के  विद्यार्थियों  के  पाठ्यक्रम  बाकायदा     यहूदियों    से नफ़रत  की  तालीम  शामिल  कर रखी  है   "जिसके  एक  अध्याय का   नाम   है   "दरसाते मिनल आलम अल इस्लामी -   دراسات من العالم الاسلامي "इसका  अर्थ  है "इस्लामी दुनिया का अध्ययन"(studies from muslim world   ).इसके  एक  अध्याय में   इजराइल  ,  फिलस्तीन  युद्ध   के एक  जिहाद  बता कर   कहा गया है कियह युद्ध   मुहम्मद साहब के  समय से ही चल रहा है  .इस किताब  के तीसरे   पाठ   में लिखा  है कि  इजराइल  और  फिलस्तीन   के बीच   जो जिहाद   है  ,उसका उद्देश्य   इस  पूरे  भूभाग में फिर से वैसी ही  व्यवस्था   लागु   करना है   ,जो  रसूल   के  समय में थी  , इसलिए   यहूदियों  और  मुसलमानों के बीच  कभी  शांति   नहीं   हो सकती।   क्योंकि यहूदी  झूठे ,  धोखेबाज  और  अल्लाह का  हुक्म  तोड़ने   वाले  हैं   , उनके इन्हीं  दुर्गुणों   के बारे में   कुरान   में  लिखा   है  . इसके बाद किताब  में कुरान की कुछ  आयतें   भी  दी  गयी   हैं   .

http://www.memri.org/image/9455.jpg

5-इस्राएल और  उसके शत्रुओं  की  तुलना

विश्व में इजराइल  एक  ऐसा देश  है जो  कई तरफ  से  मुस्लिम  देशों  से घिरा हुआ  है  , जो  सभी इजराइल को  बर्बाद  करने पर तुले हुए   हैं
इस्राएल  की  राष्ट्रभाषा   और   धर्मभाषा में   इजराइल  का  हिब्रू  में नाम  " मदीनथ  इस्रायेल - מְדִינַת יִשְׂרָאֵל  "   है   . इस्राएल  के अधिकांश   लोग  यहूदी   है  , आकर और जनसंख्या   के अनुसार  इजराइल  काफी  छोटा  देश   है  , इसकी लम्बाई 470  कि  मी (290  मील ) और  चौड़ाई 135कि  मी (85 मील  है  , और कुल  क्षेत्रफल  10840 वर्ग  कि  मी है  . और   जनसँख्या  सिर्फ 81  लाख (8,134,10 )   है  , जनसंख्या के हिसाब से  विश्व में इजराइल  का  नंबर  97  वां  है  .दूसरी  तरफ  पांच  बड़े मुस्लिम  देश   हैं  जिनकी आबादी  इस   प्रकार   है   ,
1.मिस्र (Egypt)-82,196,587
2.सीरिया -21,960,358
3.जॉर्डन -7,329,643
4.ईरान -77352373
 5.तुर्की -75,087,121

यदि   इजराइल के इन  सभी  मुस्लिम  शत्रु  देशों की  कुल  जनसंख्या जोड़ ली  जाये  तो 263926082 (छब्बीस  करोड़ ,उनचालीस  लाख ,छब्बीस  हजार  और ब्यासी  )   है   .  इनके सामने इजराइल  की  जनसंख्या  केवल 2. 4  प्रतिशत   है  .

6-जिहाद पर  इस्राएल  की  नीति

यदि   हम  इजराइल  का  नक्शा देखें   तो  पता चललता है कि यह छोटा सा देश  चारों तरफ से शत्रु  मुस्लिम  देशों  से घिरा   हुआ  है  ,और यदि  मुसलिम देशों  का  बस  चलता तो  वे  इजराइल  को कच्चा   चबा  जाते  , लेकिन यदि  आज  इजराइल इन  मुस्लिम  देशों   से टक्कर  ले रहा है तो  उसके पीछे  दो कारण  हैं  , एक  तो  इजराइल  में  सेकुलर  जैसे गद्दार   नहीं  हैं जो जिहादियों   की  मदद  करते  ,  दूसरा  कारण यह है कि इजराइल की नीति हरेक आतंकी  घटना  के बदले  वैसी  ही  और  उसी  अनुपात    में कार्यवाही  करने की  है  , इस  नीति    के बारे में  दिनांक  7 अगस्त  2014  को  इस्राएल  के रक्षा  मंत्रालय   (  Israel Ministry of Foreign Affairs )   द्वारा जो  अधिसूचना  जारी  की  है  , उसका  शीर्षक  "  Fighting Hamas terrorism within the law  "   है  ." सभी  रक्षात्मक  उपाय  करने  के बाद इस्राएल   ने स्वीकार  कर लिया  है कि अब  सैनिक  कार्यवाही  करना  अनिवार्य हो  गया है  ,क्योंकि  पिछले महीने  हमास और  जिहादियों  द्वारा  छोड़े  गए रॉकेटों   की जद  में इजराइल  के  बड़ेशहर  जैसे तेलअबीब  ,हैफा  और  राजधानी  यरूशलेम   भी  आ गए हैं  . इसलिए हम कानूनी  तौर  पर  लोगों  जान  माल  की रक्षा   के लिए  सैन्य  अभियान  चलने पर बाध्य है  . हमारा उदेश्य  हमास के जिहादियों  को समाप्त  करना  है   , जिसके लिए  हमरी  नीति हमास और जिहादियों  के साथ  वैसा  और  उसी   अनुपात में  जवाब  देने  की  है  , जैसा वह   करते हैं  "जिहादियों  के प्रति  इजराइल  की इस  नीति   का  नाम "Operation Protective Edge " है  .

"Israel acknowledges that despite the precautions taken, military operations inevitably lead to a loss of civilian life and property.
During the past month, Hamas' and other Jihadi groups' rockets have reached Israel's largest cities including Tel-Aviv, Haifa and Israel's capital, Jerusalem,Israel is bound by these laws and, thus, committed to limiting itself to a lawful response. This means that, while Hamas uses .International humanitarian law also requires that any military attack be "proportionate" ,
its military attacks against Hamas and other Jihadi groups, Israel is doing everything in its power to adhere to these principles and thus minimize harm to the civilian population: Israeli troop"

8-इस्राएल अरब पर  भारी   क्यों

यदि  ईश्वर  की  कृपा  हो  , धर्म  पर  निष्ठां  हो  और  देश  पर  अटूट प्रेम हो तो  थोड़े से लॉग भी   बहुत से लोगों  का मुकाबला  करने  में  सक्षम  हो सकते हैं  , इजराइल के बारे में  बाइबिल   में  लिखा है

"यहोवा ने पृथ्वी  के  सभी देशों  के लोगों  में से तुझे चुन लिया  ,कि तू  उसकी प्रिय  और निज प्रजा ठहरे  , यहोवा ने तुझे   स्नेह कर  के चुन  लिया इसका कारन यह नही कि तुम  गिनती  में अधिक  हो  , परन्तु तुम  तो सभी देशों  के लोगों  से गिनती में  कम   हो "
व्यवस्था विवरण 7 :7 -8

इन्हीं    विशेष  गुणों  के कारण  छोटा होने पर भी  इजराइल बड़े  मुस्लिम  देशों  का निडर होकर  मुकाबला  करता रहता है  , सबसे बडी बात   यह है कि इजराइल में सेकुल्लर  नामके  गद्दार  नहीं  हैं जो जिहादियों   का सफाया  करने में  रूकावट  पैदा कर सकें और कहें की  मुसलमान  आतंकी नहीं  होते।  चूँकि   मुसलिम  जिहादी  आतंकवादी  इजराइल  की तरह  भारत  को भी अपना  शत्रु  मानते हैं  , और भारत  के अंदर और  बाहर आतंकी वारदातें  करके  भारत  को बर्बाद   करने का  मंसूबा  रखते  हैं  ,इसलिए  आज हमें  इस्लामी  आतंक को निर्मूल  करने के लिए  इजराइल  की  नीति अपनाने की जरुरत है  . केवल  बड़ी जनसंख्या होने से   कुछ  नहीं  होगा  , जब  तक  देश में मौजूद  सेकुल्लर  गद्दारों का सफाया नहीं  होगा  भारत सुरक्षित  नहीं  रहेगा  .
पाठकों  से अनुरोध है  कि फेसबुक  के माध्यम   से इजराइल  के युवा  लोगों  से  मित्रता स्थापित  करें   ,और एक  ग्रुप बनायें

 (201)