गुरुवार, 26 जुलाई 2018

गौ वंश की रक्षा का असान उपाय !

देखा गया है कि  जब जब भी    सरकार  गौ   हत्या  पर  प्रतिबन्ध  लगाती   है या  लगाने  का  प्रयास  करती  है   ,  तो सबसे  पहले  मुसलमान  इसका विरोध  करने के लिए देशव्यापी आंदोलन  करने  लगते   हैं    , जिस  से  जगह  दंगे  फसाद    भी  होजाते    हैं   , चालाक  मुल्ले   लोगों के समक्ष  अक्सर  यही  तर्क  देते   हैं  ,कि यदि   गौ  हत्या  पर  प्रतिबन्ध   लग जाएगा  तो  हजारों  कुरैश  यानी  कसाई   बेरोजगार  हो  जायेंगे  , इस कुतर्क  से  प्रभावित होकर  वोटों  के  लालची सेकुलर    भी मुसलमानों  सुर में सुर  मिलाने   लगते  है   ,  लोग   नहीं  जानते कि  यह  आर्थिक  समस्या  नहीं  बल्कि इसका उद्देश्य हिन्दुओं  की आस्था को  आहत  करना  है  , चूँकि  हिन्दू  गाय  को पशु  नहीं  बल्कि  पवित्र  समझ कर  माता   की तरह  पूज्यनीय   मानते  हैं ,

जबकि  मुसलमान गाय  को  हलाल   यानी  खाने योग्य पशु  मानते   हैं , इसलिये मेरा विश्वास   है  कि सरकारें  या  हिन्दू  संगठन  मिल  कर  के भी  गौ ह्त्या    को  पूरी  तरह  से  प्रतिबंधित  करने  में  सफल   नहीं  हो  सकेंगे ,मुस्लमान  छुप  कर  गायें  मार  कर   खाते   रहेंगे  , और इस बात से  सभी सहमत  होंगे  कि अधिकांश  मुसलमान ही  गायों  को  जबह  करके  उनका मांस  खाते   है  , और  चूँकि  मुसलमान  गौ मांस  खाने पक्ष में  कुरान  के  हवाले  देते हैं ,और  गायों  को मुसलामानों  की  खुराक होने से बचने   के लिए हमें  यह  जानना  अति आवश्यक लगा  कि कुरान के अनुसार  मुसलमान  क्या  खा सकते हैं  ,और कौन सी  चीज  उनके   लिए  वर्जित  यानी हराम  है ,

1- मुसलमान क्या नहीं खा  सकते ?

कुरान   की  यह  आयत अत्यंत   महत्वपूर्ण  और ध्यान आकर्षित करने   वाली   है  ,  इसलिए पाठकों  की आसानी  के लिए   मूल अरबी , अर्थ ,अंगरेजी  लिप्यंतरण ( Transliteration)    और  देवनागरी  लिप्यंतरण    भी  दिया  गया है ,

1 - मूल  अरबी 

"حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنْزِيرِ وَمَا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ "


अर्थ - तुम्हारे  लिए हराम  किये  गए मृतक ,खून   ,और  सूअर  का मांस  और  जो अल्लाह  के अलावा किसी और को समर्पित  किये हों "

2-Eng Translation


"He has forbidden,to you,the dead animal,nd the blood,,and the flesh,(of) the swine,and what,has been dedicated,to other (than)Allah." Sura- nahl- 16:115  


3-Transliteration in Roman

harrama,alaykumu,l-maytata,wal-dama,walah ma,l-khinzīri,wamā,uhilla,lighayri,l-lahi-16:115


4-देवनागरी लिप्यांतरण 

"हर्रम अलैकुम अल मैय्यता  वल दम व् लहमल  खिंजीर व् मा उहिल्ल  बि गैरल्लाह "
सरा-अन नह्ल -16:115  

 नोट -इस  आयत  का विश्लेषण   करने से  स्पष्ट  होता है कि दो ऎसी  चीजें   है  , जिन्हें   मुसलमान    नहीं   खा सकते   हैं   , एक , जिस   जानवर  पर  अल्लाह   के  अलावा  किसी  और  नाम  लिया  गया    हो  ,  दूसरा  सूअर  ,
 इसीलिए  इस आयत  अनुसार  अगर    गाय  या   किसी   भी    पशु   पर   अल्लाह   के  शत्रु   शैतान  का   नाम पढ़   कर  विधिवत   शैतान   को  अर्पित  कर  दिया  जाए  ,तो   वह  पशु  मुसलमानों   के  लिए  हराम   यानी खाने  के  अयोग्य       हो  जायेंगे  , इस  अनुष्ठान   के  लिए  हमने  यह  कलमा यानी  मन्त्र  तैयार   किये   हैं  ,

यह मन्त्र या  कलमा  अरबी   भाषा  में  इसलिए  बनाया  गया  है   , क्योंकि   मुसलमान  ही  गायों  को  मार  कर उनका  मांस  खाते  हैं   , और  मुसलमानों  का अल्लाह  ,  रसूल  फ़रिश्ते और  शैतान सब   अरबी   के आलावा  दूसरी  कोई  भाषा  नहीं  समझते  , इसलिए उन  पर  संस्कृत  या  हिंदी   का  कोई  असर  नहीं   होगा , सामान्य  हिन्दुओं  के  लिए   यह  मन्त्र अरबी  के साथ  देवनागरी  लिपि   में  अर्थ सहित   दिया  जा रहा  है

1-गौ रक्षा मन्त्र

1 -अरबी में मन्त्र  का नाम

"كلمةُ التحفيظُ الابقار و الانعام  "

"कलमतुल तहफीजतुल अबकार  वल  अनआम "

2-अरबी में पूरा मन्त्र 


بِسمِ الشيطان الاِليس العظيم انّهُ مُنكِرُ الله وعدوكُلِ مُسلمين،اشهدونا بِهاذاليوم ،   "

اهِللُناهاذه الابقار والانام لِخالصتِك  الي الابدً

من الذين يضحون هذه الأبقار ولحم كما أكل اللحم من جميع الأنبياء مع محمد رسول

3-देवनागरी लिपि में 

बिस्मिश्शैतान  अल  इब्लीसुल अजीम  इन्नहु मुंकिरुल्लाह व्  उदू  कुल्लि  मुस्लिमीन -1
,अश्हदूना  बि  बिहाजिल  यौम , उहल्लिना हाजिहिल  अबकार वल  अनआम  खालिसितिल्लक इला  अबदन ,-2
मन  अल्लज़ीन युजहून हाजिहिल अबकार व्  लहम कमा अकुल  लहम मन  जमीअ अल  अम्बियाअ मअ मुहम्मद  रसूल .-3

अर्थ -शैतान , इब्लीस  महान   के   नाम  से  ,जो अल्लाह  को नकारने  वाला और  मुसलमानों  का शत्रु   है -1
  ,आज  के  दिन  हम सभी  गवाही  देते  हैं  कि ,हमने   यह  सभी  गायें  और  चौपाये हमेशा   के  लिए केवल  तुझ   ही  को  समर्पित  कर   दिए   है -2
 , और जो भी  इनको  मार कर इनका   मांस  खायेंगे गोया  वह  सभी नबियों  मय  मुहम्मद  रसूल का  मांस  खाएंगे "-3

 विधि -   सभी  गायों , बैलों  ,  बछड़ों   और  भैंसों   को  इकट्ठा   करके समारोह   पूर्वक  यह   मन्त्र  पढ़ें   और  अपने  पशु शैतान   को  अर्पित   कर  दें  , और इस  आयोजन  की  सूचना    अखबारों  और  टी  वि    पर   भेजें  , मुसलमान  आपकी  गायों  को मार  कर    नहीं   खा  सकेंगे

 इसी   तरह   मुसलमानों    के अल्लाह   ने  सूअर   को   नापाक  ,अपवित्र  और  हराम    बता   कर   मुसलमानों  के  खाने  के  अयोग्य  बताया    है   , और अगर   गायों  और  अन्य  पशुओं   को   नापाक  बना  दिया   जाए  तो  मुसलमान  उनको   मार  कर   नहीं   खा  सकेंगे   ,  इसलिए   गायों    को    मुसलमानों   से सुरक्षित रखने  हेतु    गौ संजीवनी का  अविष्कार  किया  गया  है

2-गौ संजीवनी 
 यह एक   ऐसी  चमत्कारी  औषधि   है   जो  बिना   खर्चे  के  भारत  के  किसी   भी स्थान  पर  आसानी   से  जीतनी चाहे   बनायी   जा  सकती   है   , हमने  अरबी  में इसका   नाम " अर्रहीक अल  अबकार -الرّحيق الابقار"    रखा  है   , इसे  गाय  बैल  ,  बछड़े    यहाँ   तक   भैसों  को सात  दिनों  तक  पिलाने  पर उन  पर   कोई  दुष्प्रभाव   नहीं  होगा , बल्कि मुसलमानों  पर  ऐसा असर    होगा  की   वह   गाय  का   मांस  खाना  बंद  कर   देंगे  ,   इस  औषधि  का  जितना अधिक   और  जहाँ   भी  प्रचार  किया  जायेगा  वहां   के  उतने   ही  मुस्लमान  गाय  का  मांस  खाना  छोड़  देंगे  ,
सीधी  सी  बात है  जब  मुसलमान  गाय  मांस  खाना  छोड़  देंगे  तो  गौ  हत्या  खुद  बंद  हो    जाएगी

संजीवनी  बनाने   की   विधि   - सौ  लीटर  पानी   में   सौ  ग्राम  वराह  मूत्र ( सूअर  का  मूत्र )   मिला  कर   सात  दिन तक अपनी  गायों  , बैल  . बछड़ों और पशुओं  को  पिलाये , जिस से यह   औषधि   पानी  के  माध्यम  उनके   शरीरों   में  प्रविष्ट   हो  जाए   , या  इंजेक्शन  से  भी  दे सकते  हैं  ,  इस   से गायें  और  अन्य पशु   मुसलमानों  के  खाने  केलिए हराम     हो  जायेंगे  . विधि   पूरी  होने   के   बाद  यह  घोषणा  सार्वजनिक    कर  दीजिये 
1-अरबी    में 

"فانظرو وتشاهون يا ايٌُهالمسلِمون اختطنا البول الخنازيربِالّحم مع الابقار والانعام بِهاذاليوم تحرٌموعليكُم عبداً  "

2-देवनागरी में -

  " फन्जुरू  व्  तुशाहीदू  या अय्युहल  मुस्लिमून ,-1

 अखततनल बूलूल  खनाजीर मअल लहम अल  अबकार वल अनआम  बि हाजिल यौम ,-2

तुहर्रिमू  अलैकुम  अबदन -3

अर्थ - देखलो   और  गवाह रहो  हे  मुसलमानों -1

हमने  मिला दी  है सूअर   की  पेशाब गायों  और मवेशियों  के मांस (शरीर ) में  आज  के  दिन-2 

और  हराम  कर  दिया  तुम्हारे   पर  हमेशा  के लिए "-3

हमने  काफी   परिश्रम   से  मुसलमानों  से   गायों   की   रक्षा हेतु   यह  तरकीबें  खोजी   है  ,   हमारा   दावा  है  कि अगर   सामूहिक  रूप से  आयोजन    करा के   इन  दौनों   विधियों    का   पालन    किया   जायेगा   तो  मुसलमान  ऐसी  सभी  अभिमंत्रित    गायों   और     पशुओं    को  नहीं     खाएंगे   , और ऐसे   आयोजनों   और   कार्यक्रमों    का  जितना भी  प्रचार   होगा  उतनी अधिक   गायें    बचती  जायेगीं ,
  हो सकता है  कुछ   लोगों   को   वराह   मूत्र   से  आपत्ति   हो   ,  उनको   पता   होना   चाहिए  की  धर्म   की  रक्षा  के   लिए   भगवान  विष्णु   ने भी वराह  का अवतार  लिया  था ,  गौ   रक्षा   के  लिए  ऐसा  करने में  पाप   नहीं    बल्कि   गायों   का आशीर्वाद  मिलेगा  . इतनी  सरल  विधि   होने   पर   भी  यदि  हिन्दू   गौ   माता   की  रखा के लिए  सक्रीय   नहीं  हुए   तो  माना  जाएगा   की   उनमें गौ  भक्ति   नहीं है   !     
 अधिक जानकारी  के लिए   मेल करिये  -

sharma.b304@gmail.com

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7 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut hi uttam vichar pr shak ye h ki ajkl k momin Eman wale nhi rahe h.

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  2. सुझाव तो बेहतरीन है, मगर मुसलमान भी अपने धर्म की पाबन्दियाँ उतनी ही मानते हैं जितनी उन्हें मौलवी बताते हैं, और मौलवी वही बताते हैं जो उन्हे सूट करता है, दिखावा ज्यादा करते हैं।

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  3. बहुत अच्छा सुजाव है भैया

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  4. अच्छा विचार है भैया हमे गाय माता को बचाने का।

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  5. अच्छा विचार है भैया हमे गाय माता को बचाने का।

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  6. सर नमस्कार मेरे विचार सेजब तक मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार नहीं किया जाएगा तब तक कुछ नहीं होने वाला है

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