बुधवार, 11 सितंबर 2019

रसूल की वसीयत में फजीहत !

यदि  हम  कहें  कि भ्रष्टाचार   (  लूट  ) से  कमाए  गए काले  धन  के जन्मदाता  मुहम्मद  थे तो गलत नहीं  होगा  , कैसे   ?आप यह लेख ध्यान  से पूरा  पढ़िए ,और फिर बताइये ,

इस्लाम शांति और प्रेम का सन्देश देता है .और मुहम्मद साहब एक सच्चे , ईमानदार निर्लोभी व्यक्ति थे .इसलिए उनके इन्ही सद्गुणों से प्रभावित होकर रिश्तेदार परचित लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया था .मुहम्मद साहब ने अपनी पूरी जिंदगी सादगी और गरीबी में गुजार दी .और उनके रिश्तेदार भी सत्यवादी और कपटरहित आदर्श व्यक्ति थे .ऐसा मुसलमानों का दावा है .लेकिन यह सभी दावे सरासर झूठ .बल्कि महा झूठ है .क्योंकि खुद कुरान , हदीस और इतिहास इन दावों का खंडन करते हैं .वास्तव में मुहम्मद साहब लुटेरों के सरदार , सम्पति के लोभी थे . और पूरे विश्व पर राज करना चाहते .और गरीब नहीं कंजूस थे .और लूट के माल का अपना हिस्सा घर में छुपा लेते थे .कहावत है जहाँ लोभी होता है , वहां ठग और डाकू जरुर पहुँच जाते है .अबू बकर ऐसा ही व्यक्ति था .पहले उसने अपनी छहः साल की बच्ची की मुहम्मद से शादी करा दी .ताकि आयशा से मुहम्मद के काले धन का पता कर सके ,और फिर जालसाजी करके धन को हथिया सके .इस बात को स्पष्ट करने के लिए एक एक करके सभी प्रमाण दिए जा रहे हैं ,
1-मुहम्मद का लोभ
इस हदीस और आयत से पता चलता है कि मुहम्मद बल पूर्वक दुनिया की सारी सम्पति पर कब्ज़ा करना चाहते थे ,हदीस   में  है -
अबू हुरैरा ने कहा कि एक बार रसूल ने कहा , मैंने हमेशा आतंक से ही जीत हासिल कि है . और जब में सो रहा था अल्लाह ने मुझे दुनिया के सभी खजानों कि चाभी दे कर कहा था , अपने लोगों से कहो वह दुनिया की सम्पूर्ण दौलत लूट कर तुम्हारे सामने रख दें , और दूसरों के लिए कुछ भी नहीं छोड़ें .

बुखारी – जिल्द 4 किताब 52 हदीस 220

और कुरान  में  है -

-"और कुछ ऐसे भी लोग हैं ,जिनके पास धन दौलत का ढेर है ,और अगर तुम उनसे मांग करोगे तो वह दे देंगे ,लेकिन जब तक तुम उनके सरों पर सवार नहीं हो जाओ "
सूरा -आले इमरान 3 :75 

2-काली कमाई का स्रोत 
मुहम्मद साहब जिहाद के नाम से अपने लोगों से आसपास के शहरों में लूट करवाया करते थे .और उसमे से अपना हिस्सा निकाल लेते थे .कुरान में इसे दो नामों से बताया है ,

1 . ख़ुम्स (-خُمُسَهُ )लूट का पांचवां भाग .कुरान में कहा है

"وَاعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُمْ مِنْ شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ "

और तुम जो कुछ भी लूटो उसमे पांचवां हिस्सा रसूल और उसके परिवार का होगा "

 सूरा अनफ़ाल 8 :41 
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 60 

2 .-फैअ(فاءِِ)यह ऐसा धन है जो , युद्ध किये बिना ही ,चोरी से , फिरौती से , या धमका कर लिया जाता है .कुरान में है ,
"अल्लाह ने रसूल को बस्ती वालों से " फै " प्राप्त किये .और वह रसूल और उसके घर वालों का हक़ है " 
सूरा-अल हश्र 59 :7 

अर्थात चोरी का सारा धन रसूल रख लेते थे .जो घर में छुपा दिया जाता था .,

3-मुहम्मद ने वसीयत की इच्छा की 
शिया मानते हैं कि आयशा ने ही मुहम्मद को जहर दिया था ,और जब मुहम्मद को अपना अंतिम समय दिखने लगा तो उसने अपनी बरसों में जमा की गयी काली कमाई  (Black Money)की वसीयत लिखने की इच्छा प्रकट की थी . जो इन हदीसों में दी गयी हैं ,
"सईद बिन जुबैर ने कहा कि उस दिन गुरुवार था , जब रसूल की तबीयत बिगड़ने लगी थी .लेकिन वह पूरी तरह होश में थे .उन्होंने अब्बास से कहा जाओ किसी जानवर की कंधे की चौड़ी हड्डी लाओ ,जिस पर मैं अपनी वसीयत लिख कर दे दूँ . ताकि बाद में झगडा न हो ,और सबको याद रहे "

Bukhari-Volume 4Book 53:Hadith 393

 "इब्न अब्बास ने कहा कि रसूल ने मुझ से कहा था , जाओ मुझे लिखने का सामान लाकर दो ,ताकि मैं सबके सामने वसीयत लिख दूँ . जिस से प्रमाण रहे और किसी तरह का विवाद नहीं हो .रसूल ने यह भी कहा था " अरब से काफिरों को निकाल देना .और विदेशी व्यापारियों को दोस्त समझना .तीसरी बात मैं सुन नहीं पाया "

Bukhari-Volume 5 Bk  59 Hadith 716

सईद बिन जुबैर ने बताया कि रसूल ने अपनी वसीयत लिखने के लिए एक चौड़ी हड्डी(Scapula) और कलम दवात लाने को कहा था ,ताकि वसीयत सबूत रहे और उनके वारिस आपस में झगडा नहीं करें "

Sahih Muslim Book 013, Number 4015

4-अबू बकर की साजिश 

 इब्न अब्बास ने कहा कि जब मैं रसूल के कहने से लिखने के लिए हड्डी और कलम दवात लेकर आ रहा था , तभी अबू बकर ने मुझे रोक लिया .और लोगों से बहस करने लगे , जिसकी आवाज रसूल को सुनाई दे रही थी . जिसके कारण रसूल वसीयत नहीं लिख सके "

Sahih Muslim Book 013, Number 4016

" अबू बकर चिल्ला रहे थे कि रसूल की संपत्ति का केवल मैं ही वास्तविक उत्तराधिकारी हूँ .और उनकी संपत्ति अपनी इच्छा के मुताबिक खर्च करूँगा ."

"فقال أبو بكر أنا ولي رسول الله صلى الله عليه وسلم فقبضها أبو بكر فعمل فيها بما عمل رسول الله صلى الله عليه وسلم والله يعلم إنه فيها لصادق بار راشد تابع للحق ثم توفي الله أبا بكر فكنت أنا ولي أبي بكر فقبضتها

Sahih al-Bukhari, Volume 4, Book 53, Number 326

5-अबू बकर ने संपत्ति हड़पी 
"अब्बास ने कहा कि रसूल के मरते ही अबू बकर ने उनकी सारी संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया .और जब अली अपनी पत्नी फातिमा के साथ अबू बकर के पास अपना हिस्सा मांगने को गए , तो अबू बकर ने मना कर दिया . और कहा कि रसूल ने सिर्फ मुझे ही अपना वारिस बनाया था .और तुम्हारा उनकी संपत्ति में कोई हक़ नहीं है , तब अब्बास , अली और फातिमा ने नाराज होकर अबू बकर से कहा "तू पापी , धोखेबाज ,और बेईमान है . तुझे अल्लाह कभी माफ़ नहीं करेगा .तब अबू बकर ने उनको घर ने भगा दिया "

فلما توفي رسول الله صلى الله عليه وسلم قال أبو بكر أنا ولي رسول الله صلى الله عليه وسلم فجتئما تطلب ميراثك من ابن أخيك ويطلب هذا ميراث امرأته من أبيها فقال أبو بكر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ( ما نورث ما تركنا صدقة ) فرأيتماه كاذبا آثما غادرا خائنا والله يعلم إنه لصادق بار راشد تابع للحق ثم توفي أبو بكر وأنا ولي رسول الله صلى الله عليه وسلم وولي أبا بكر فرأيتماني كاذبا آثما غادرا خائنا والله يعلم إني بار راشد تابع للحق فوليتها ثم جئتني

Sahih Muslim, Book 19, Number 4349

"आयशा ने कहा कि फातिमा " फै " यानि लूट के माल पांचवां हिस्सा मांगने के लिए मेरे पिता के पास गयी थी .लेकिन मेरे पिता ने कहा यह रूपया खैरात के लिए है ,और यह कह कर फातिमा को भगा दिया .इसके बाद फातिमा मरते समय तक अबू बकर से नहीं बोली "

Sahih al-Bukhari, Volume 4, Book 53, Number 325

6-फदक लूट का धन
मुहम्मद साहब ने अपनी जिंदगी में करीब 30 बड़ी बड़ी लूटें की थी .जिनका पांचवां हिस्सा वह रख लेते थे .फातिमा अबू बकर से जिस " फदक " के धन की मांग कर रही थी .वह " फदक-- فدك‎" नाम की जगह मक्का से 93 मील दूर थी . वहां पानी के सोते , और कुए होने के कारण खजूरों के बगीचे भी थे और उस जगह कई पीढ़ियों से यहूदी धनवान व्यापारी आबाद थे.मुहम्मद ने 7 मई सन 629 (हि० 7 ) को वहां के लोगों पर उस समय हमला किया जब लोग सो रहे थे इस

लूट में मुहम्मद को चालीस हजार सोने की दीनार और नौ लाख चांदी के दिरहम और जेवर बर्तन भी मिले थे ,लेकिन इस लूट की सारी संपत्ति मुहम्मद ने चमड़े के थैलों में भर कर अपने घर में आयशा के पास रख दिया था .जिस पर मुहम्मद की मौत के बाद अबू बकर ने कब्ज़ा कर लिया था .फातिमा और अबू बकर के विवाद का यही लूट का पैसा था .जिसे फातिमा फदकفدك‎ कह रही थी .वह  खजूरों   का बड़ा  बाग़  था , जिस से  काफी  आमदानी    होती  थी  , अबू बकर  ने उस पर भी  कब्ज़ा कर  लिया  
7-अबू बकर का कपट 
"आयशा ने कहा की जब फातिमा अबू बकर के पास गयी तो उसने कहा यदि तुम ख़ुम्स रूपया नहीं दे सकते तो " फदक" के लूट का धन मुझे दे दो , इस बात पर सभी सहबा , अंसार और मुहाजिर फातिमा का पक्ष लेने लगे .लेकिन अबू बकर ने मना कर दिया और कहा तुम रसूल की वारिस नहीं हो 

. because he did not allow Fatima to inherit the legacy of the Prophet..

"لأنه لا يسمح فاطمة أن ترث تركة النبي .. "
1. Sahih al Bukhari Volume 4, Book 53, Number 325, Book /of Khums

2. Sahih Muslim Volume 3 page 72, Hukm al Fay

Sharh Mishkat al MasabihVolume 3 page 453:


"आयशा ने कहा की जब फातिमा अबू बकर से फदक का पैसा मांगने लगी तो , अबू बकर ने कहा " मैं उस अल्लाह की कसम खता हूँ जिसके हाथों में मेरी जान है , मैं सच बताता हूँ कि न तो तुम्हारा रसूल से कोई रिश्ता है और न तुम नबी की संतान हो "

"كنت جيدة لا لعائلته لم تكن جيدة للنبي "

Volume 5, Book 59, Number 368:

8-फातिमा के घर पर हमला

 " इब्न तैय्यामा ने अपनी किताब " मिन्हाजुल सुन्नत " में लिखा है उस दिन के कुछ दिन बाद अबू बकर ने अपने गुर्गों को फातिमा के घर में सेंध लगाने को कहा और कहा कि फातिमा के घर से सभी संपत्ति " निचोड़ " लो
.(The word he has used كبس means to forcefully break into something )

क्योंकि अबू बकर को शक था कि फातिमा ने रसूल का धन घर में छुपा लिया होगा .या उसके पास हराम की दौलत दबी हुई है "

وغاية ما يقال إنه كبس البيت لينظر هل فيه شيء من مال الله الذي يقسمه وأن يعطيه لمستحق "

Minhaj al-Sunnah 8/291

9-फातिमा की मौत और दफ़न

"अनस ने कहा इस घटना के बाद फातिमा छः महीने तक जिन्दा रही ,और अबू बकर को कोसती रही .और जब उसकी मौत हुई तो अली ने अबू बकर को बताये बिना उसकी लाश किसी अज्ञात जगह दफना दी थी "


Sahih al-Bukhari, Volume 5, Book 59, Number 546

आयशा ने कहा लोग अली का बहुत सम्मान करते थे . लेकिन जब अबू बकर ने उनसे अपनी वफ़ादारी की शपथ खाने को कहा , तो अली ने कहा रसूल का रिश्तेदार होने पर भी आपने मेरा अधिकार नहीं दिया ,और कसम खाने से इनकर कर दिया . इसलिए जब फातिमा मरी तो उसके जनाजे की नमाज अकेले अली ने पढ़ी था . क्योंकि लोग अबू बकर से डरते थे ."
Sahih Bukhari, Volume  5, Book  59, Hadith # 546


फातिमा जीवन भर अबू बकर को उसकी बेईमानी के लिए धिक्कारती रही . देखिये विडियो

Hazrat Fatimah was angry with Hazrat Abu Baker till her Death


http://www.youtube.com/watch?v=7xabGdIBr18&feature=related

10-अबू बकर की जालसाजी 
" अनस ने कहा कि रसूल की एक अंगूठी में मुहर बनी थी , जिसमे यह तीन शब्द " मुहम्मद , रसूल , अल्लाह " खुदे हुए थे . तब अबू बकर ने वैसी ही नकली अंगूठी बना कर जालसाजी से फर्जी दस्तावेज बना कर उन पर मुहर लगायी और सम्पति हड़प कर ली .क्योंकि रसूल की असली मुहर एक कुंएं में गिर गयी थी , इसे खलीफा उस्मान ने कुआ सुखा कर खोजा था , लेकिन अंगूठी नहीं मिली थी ."
Sahih Muslim -Book 024, Number 5149:


11-मुहम्मद की हत्या हुई थी .
ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार से पता चलता है कि अबू बकर के इशारे पर आयशा और हफ्शा ने मिलकर मुहम्मद को जहर दिया था , जिस से उसकी मौत हुई थी .क्योंकि अबू बकर मुहम्मद द्वारा लूटे गए धन को हथियाना चाहता था .हम इसके बारे में लेख दे चुके है .यहाँ पर सबूत के लिए एक विडियो दे रहे हैं
.Aisha - the mother of murders

http://www.youtube.com/watch?v=hcanMfPgGWE

इन सभी प्रमाणों से यह बातें सिद्ध होती है कि, मुहम्मद साहब पढ़े लिखे व्यक्ति थे , और अपनी लूट की संपत्ति की वसीयत लिखना चाहते थे ,और उनके साथी धन के लालच में मुसलमान बने थे .इसी लिए मुहम्मद साहब जे मरते ही अबू बकर ने जालसाजी करके लूट की दौलत पर कब्ज़ा कर लिया था .और यह भी सिद्ध होता है , जब मुस्लिम खलीफा मुहम्मद की बेटी फातिमा के साथ धोखा कर सकता है , तो मुसलमानों पर विश्वास कैसे किया जा सकता है .क्योंकि लालच के कारण ही अबू बकर ने आयशा से मुहम्मद को जहर दिलाया था .
इस लेख से यह बात भी सिद्ध होती है कि ईश्वर का कानून सब पर लागु है , मुहम्मद जिस तरह लोगों को लूट कर अपना घर भरा था वैसी ही उसकी दर्दनाक मौत हुई थी .और अल्लाह भी उसे नहीं बचा सका .शिया सुन्नी विवाद  का यह भी  एक  कारन  है 
कहावत  है कि .
"लुटेरे  का माल डाकू   ले  जाते  हैं ,,और लुटेरे दुखदायी मौत मरते हैं .


(200/53)

मंगलवार, 10 सितंबर 2019

डराने वाला रसूल डरपोक था !!

जो लोग अन्धविश्वासी , लालची और बिना परिश्रम के लाभ प्राप्त करने के इच्छुक होते हैं , वह किसी न किसी ऐसे ढोंगी पाखंडी के जाल में जरुर फंस जाते है .जो उनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करता है..अक्सर ढोंगी लोग साधारण लोगों को या तो किसी बात का डर दिखाते हैं , या किसी चीज का लालच दिखाकर अपना अनुयायी बना लेते .मुहम्मद साहब ने यही डराने और लालच देने की नीति अपनाकर अरब के मुर्ख बद्दुओं को मुसलमान बना दिया था . फिर उनके द्वारा जिहाद और लूटमार करके अरब में इस्लामी राज्य स्थापित कर दिया था .आज यह बात साबित हो चुकी है कि जैसे दुनिया भर को डराने वाला ओसामा बिन लादेन खुद सबसे बड़ा डरपोक था , वैसे ही मुहम्मद साहब भी अन्धविश्वासी और सबसे बड़े डरपोक व्यक्ति थे .इसका प्रमाण कुरान और बुखारी कि हदीस से मिलता है इसका एक उदहारण यहाँ पर दिया जा रहा है . .
1-डराने वाला रसूल 
जैसे आजकल कुछ लोगों ने यह अफवाह फैला रखी है कि 22 दिसंबर 2012 को दुनिया समाप्त हो जाएगी . उसी तरह मुहम्मद भी लोगों को कयामत के जल्द ही आने का डर दिखाते रहते थे . और कहते थे मुझे अल्लाह ने लोगों को डराने के लिए ही भेजा है , कुरान में लिखा है ,
"यह रसूल तो सभी डराने वालों में सबसे आगे डराने वाले हैं "
सूरा -अन नज्म 53 :56 
 हे नबी हमने तो तुम्हें सभी मनुष्यों के लिए सूचना देने वाला और उनको डराने वाला बना कर भेजा है . लेकिन अधिकाश लोग इसकी असलियत नहीं जानते हैं "
 सूरा -अस सबा 34 :28 

2-डरपोक रसूल 
सब जानते हैं कि अरब में बहुत कम बरसात होती है . और अगर कभी थोड़ी बहुत बरसात भी होती है , तो उसके पहले धूल भरी आंधी और तूफान जरुर आते है , अपने अंधविश्वास के कारण मुहम्मद ऐसी किसी भी घटना को क़यामत के आसार समझ लेते थे . और भागादौड़ी करने लगते थे . और पडौसियों को भी बुला लेते थे . यह हदीस देखिये ,
मक्की बिन इब्राहीम बिन जरीज अता ने रवायत की है , कि आयशा ने कहा है मैं रसूल की इस आदत को अच्छी तरह से जानती हूँ , कि जब भी कभी कोई बादल की घटा आसमान से उतर कर मैदान की ओर आने लगती थी ,तो डर के मारे रसूल का चेहरा पीला पड़ जाता था .और वह बेचैन होकर घर से अन्दर बहार दौड़ते फिरते रहते थे . और बरसात हो जाने पर ही उनको तसल्ल्ली मिलती थी . आयशा ने कहा लेकिन मुझे कोई डर नहीं लगता था . ऐसी ही एक घटना है , जब आसमान पर घटा छा गयी , डर के मारे रसूल लोगों को इकठ्ठा करने कहने लगे कि यह वही क़यामत की घटा है , जिसकी तुम लोग जल्दी मचाते हो .
फिर रसूल ने यह आयत सुनाई जिस से लोग डर जाएँ .

 حَدَّثَنَا مَكِّىُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ عَائِشَةَ – رضى الله عنها - قَالَتْ كَانَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا رَأَى مَخِيلَةً فِى السَّمَاءِ أَقْبَلَ وَأَدْبَرَ وَدَخَلَ وَخَرَجَ وَتَغَيَّرَ وَجْهُهُ ، فَإِذَا أَمْطَرَتِ السَّمَاءُ سُرِّىَ عَنْهُ ، فَعَرَّفَتْهُ عَائِشَةُ ذَلِكَ ، فَقَالَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم « مَا أَدْرِى لَعَلَّهُ كَمَا قَالَ قَوْمٌ ( فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضاً مُسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ ) » . الآيَةَ . طرفه 4829 تحفة 17386 – 133/4

 “Sahih” Al-Bukhari Volume 4. Hadith #428  

 Bukhari Hadith (Arabic) Serial No. 3206-

बुखारी की यह हदीस साबित करती है कि आयशा मुहम्मद से कहीं अधिक हिम्मतवाली थी , जबकि मुहम्मद साहब डरपोक ,वहमी और अन्धविश्वासी थे .

3-डर के मारे आयत बना दी 
जैसे ही बादल छाये और आंधी चलने लगी तो मुहम्मद साहब ने पडौसियों से कहा कि अल्लाह ने मुझे इस क़यामत के आने की सूचना पहले ही दे दी थी , कुरान के लिखा हैं .
सही ज्ञान तो अल्लाह के पास है , मैं तो तुम्हें इसकी ( आंधी ) की खबर दे रहा हूँ , लेकिन तुम लोग नहीं समझ रहे हो "
सूरा - अल अहकाफ 46 :23

"قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِنْدَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُمْ مَا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ " 

 Quran-Sura.al ahkaf  46:23

मुहम्मद साहब ने उस समय लोगों को कयामत का डर दिखने के लिए जो आयत सुनाई थी , वह इस प्रकार है,

और जब हम लोगों ने घटा के रूप में किसी चीज को अपने मैदानों के ऊपर आते हुए देखा तो ऐसा लगा कि यह छायी हुयी घटा हमारे ऊपर वर्षा करेगी , लेकिन नहीं , वह तो कोई ऐसी चीज थी , जिसके बारे में लोगों ने जल्दी मचा रखी है . वास्तव में वह एक आंधी थी , जो एक दुखदायी कष्ट ले कर आई थी "
 सूरा-अल अहकाफ़ 46 :24 

فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُمْطِرُنَا بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُمْ بِهِ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ   "

Quran-Sura.al ahkaf  46:24

4-मुहम्मद ने धमकाया 
जैसा कि देखा गया है कि क़यामत की ऐसी भविष्य वाणियाँ हमेशा झूठ निकलती हैं , उसी तरह उस दिन भी तूफान के बाद सब कुछ ठीक हो गया था .और मुहम्मद साहब की पोल खुल गयी लेकिन अपने आप को रसूल साबित करने के लिए मुहम्मद साहब ने लोगों को डराना और धमकाना शुरू कर दिया .और यह आयतें सुना डालीं ,
" जिन लोगों ने रसूल की बात नहीं मानी ,वह एक दिन पछता कर ऎसी इच्छा करेंगे , कि काश उनके साथ ही यह जमीन बराबर कर दी जाये "
सूरा -अन निसा 4 :42 

"जो लोग अल्लाह के इस रसूल की बात नहीं मानेंगे , उनके लिए जहन्नम में दहकती हुई आग तैयार कर राखी गयी है "
सूरा -अल फतह 48 :13 

5-आखिर में लालच दिया 
इस्लाम का असली आधार डर और लालच पर ही टिका हुआ है , जब तूफान सकुशल निकल गया और लोगों का डर निकल गया , तो मुहमद साहब ने लोगों पर लालच का हथियार अपनाया . क्योंकि उनको पता था कि अरब के लोग लोभी और लालची हैं . और लालच देने से वह उनकी हरेक झूठ को सही मान लेंगे . इसलिए मुहमद साहब ने यह आयत सुना डाली ,
" अगर तुम रसूल के कहने पर चलोगे तो . अल्लाह तुम्हारी इच्छाएं पूरी करने में कोई कमी नहीं रखेगा "

 सूरा -अल हुजुरात 49 :14 
इस लेख का उद्देश्य लोगों को यही समझाना है कि , वह कैसी ऐरे गैरे स्वयंभू भगवान , अवतार , या रसूल के डराने या लालच दिलाने पर देखादेखी उसके अनुयायी नहीं बन जाएँ .और मुसलमान तो कदापि नहीं बनें . क्योंकि जैसे निर्मल बाबा का भंडा फूट गया है , एक दिन मुहमद साहब का भंडा भी जरुर फूट जायेगा
.गुरु गोविन्द सिंह ने कहा है 
,"न काहू को देत भय ,न भय मानत आप " 



(200/37)

सोमवार, 9 सितंबर 2019

फ़रिश्ते नहीं परियां कहिये !!

इस्लाम में फरिश्तों का इतना बड़ा ऊँचा दर्जा है कि अल्लाह और रसूल के साथ उन पर भी विश्वास करने के लिए कहा गया है .लेकिन लोग बिना किसी तर्क के इस बात को स्वीकार कर लेते है . और इस विश्वास को ईमान(Faith ) कहा जाता है .और अल्लाह के साथ फरिश्तों ,किताबों ,और रसूलों पर इमान रखने को इमाने मुफस्सिल कहा जाता है ,अरबी में इस प्रकार है -

"آمَنْتُ بِاللهِ وَمَلاَئِكَتِه وَكُتُبِه وَرُسُلِه وَالْيَوْمِ الآخِرِ وَالْقَدْرِ خَيْرِه وَشَرِّه مِنَ اللهِ تَعَالى وَالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَ "

I have faith in Allah and His Angels, His Books and His Messengers, and the Day of Judgement and that all good and evil and fate is from Almighty Allah and it is sure that there will be resurrection after death.
इस ईमाने मुफस्सिल में अल्लाह के बाद दुसरे नंबर पर फरिश्तों पर ईमान रखने को कहा है ,और फरिश्तों को अरबी में "मलायकतु" कहा काया है .जिसे लोग अंगरेजी में Angels या Fairy भी कहते हैं .फरिश्तों का काम,उनके बारे में कुरान और हदीसों में यह लिखा है ,

1-फरिश्तों की संख्या और काम 
वैसे तो फरिश्तों का मुख्य काम अल्लाह की रात दिन बंदगी करना है ,लेकिन वह उन से और भी काम करवाता है ,जैसे कि,
"और वह फ़रिश्ते अल्लाह की बंदगी करने और उसके हुक्म का पालन करने में लगे रहते है
 सूरा -अस साफ्फात 37 :165 
"यह तुम्हारे ऊपर जासूसी भी करते हैं ,और तुम जोभी करते हो वह बारीकी से लिखते रहते हैं "
सूरा-अल इन्फितार 82 :10 से 12

"और आदमी के मुंह से जोभी बात निकलती है ,उसे सुनने के लिए ताक में रहते हैं "
सूरा -काफ 50 :18 
"अल्लाह लोगों के आगे पीछे फ़रिश्ते लगा देता और जब अल्लाह का आदेश होता है वह उस व्यक्ति की रक्षा करते हैं "सूरा -रअद 13 :11
"मौत से समय तुम्हारे ऊपर मौत का फ़रिश्ता लगा दिया जाएगा जो ,तुम्हें ग्रस्त कर लेगा ,और तुम अल्लाह के पास वापस भेज दिए जाओगे "
सूरा -अस सजदा 32 :11 
"जो नेक लोग जन्नत में जायेंगे तो उनको बधाई देने के लिए हर दरवाजे पर फ़रिश्ते खड़े मिलेंगे "
सूरा-रअद 13 :23 
"अल्लाह का सिंहासन उठाने के लिए आठ फ़रिश्ते उसे किनारों से पकड़ कर रखेंगे "
सूरा -हाक्का -69 :17 
"कठोर लोगों को काबू करने के लिए बलवान फ़रिश्ते लगाये जाते हैं ,जो अल्लाह के आदेशों का पालन करवाते हैं "सूरा -अत तहरीम 66 :6 
"और निश्चय ही यह सन्देश (कुरान ) एक फ़रिश्ते द्वारा ही पहुंचाई हुयी बात है "
सूरा -अत तकवीर 81 :19 
"नरक वासियों के ऊपर उन्नीस फ़रिश्ते नियुक्त किये गए हैं "सूरा -अल मुदस्सिर 74 :30 
इन सभी विवरणों से पता चलता है कि अल्लाह कि हुकूमत में फ़रिश्ते ,मजदूरी ,जासूसी ,और चुगली के साथ जेलर का काम भी करते हैं .और जरुरत होने पर पोस्टमेन का काम भी करते हैं .

2-फरिश्तों के कितने पंख
कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा कि फरिस्तों कन्धों पर दायें और बाएं एक एक पंख होगा ,जैसे पक्षियों के होते हैं .ईसाई भी दो ही पंख मानते है .लेकिन इस्लाम की बात और ही है .इसमे फरिश्तों के पंखों की संख्या दी जा रही है ,
"कुछ ऐसे भी फ़रिश्ते हैं ,जिनके ,दो -दो ,तीन-तीन , चार -चार पंख होते हैं "सूरा -फातिर 35 :1
हदीस ने तो एक फ़रिश्ते के 600 पंख बताये है ,हदीस इस प्रकार है
"अबू इशाक शैवानी ने कहा कि जब वह जिब्रील से मिलने गए तो उनके बीच में दो कमान की दूरी (two bow length ) थी .और उन्होंने जरीर बिन मसूद से कहा था कि जिब्रील के 600 पंख हैं 
"बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 455 

3-फरिश्तों को स्त्रियाँ बताने का विरोध 
अभी तक फरिश्तों के बारे में जोभी दिया गया वह विश्वास यानि ईमान पर आधारित है .चूँकि लगभग 97 % मुसलमान कुरान की व्याकरण नहीं समझते ,और उनको जो अर्थ बताया जाता है ,उसी को सही मानते है .यद्यपि कुरान में भी फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहा गया है ,जिसका मुसलमान विरोध करते हैं ,क्योंकि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसमे स्त्रियों को हीन समझा जाता है .और जब लोगों ने फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां या स्त्रियाँ कहा तो ,अल्लाह इस बात का खंडन करने के लिए दलीलें देने लगा ,और कहने लगा ,
"यह लोग अल्लाह की बेटियां होने को बुरा मान रहे हैं ,क्योंकि जब इनके यहाँ जब जीसी को बेटी होने की सूचना मिलाती है ,तो इनके मुंह काले पड़ जाते हैं ,और वह कुढ़ जाते हैं
सूरा -अन नहल 16 :57 और 58 
"क्या तुम इसे बड़ी भारी बात मान रहे हो कि अल्लाह ने फरिश्तों को बेटियां बना लिया है
 सूरा बनी इस्रायेल 17 :40 

"क्या अल्लाह ने लड़कों की जगह लड़कियों को पसंद कर लिया है ? सूरा -अस साफ्फात 37 :153 
"क्या तुम्हारे दिलों में यह बात खटकती है ,कि अल्लाह के घर में बेटियां हों ,और तुम्हारे घर बेटे पैदा हों "
सूरा -अस साफ्फात 37 :149 
"क्या अल्लाह ने खुद के लिए बेटियां पसंद कर लीं ,जो आभूषणों और श्रृंगार में पलती हैं ,और वादविवाद में ठीक से जवाब नहीं दे सकती हैं "
सूरा-जुखुरुफ़ 43 :16 और 18 
"तुम्हारे घर बेटे हों ,और अगर अल्लाह के घर बेटियाँ हों तो तुम्हें बहुत गलत लग रहा है "
सूरा -अन नज्म 53 :21 और 22 

4-फरिश्तों का स्त्रियाँ होने का प्रमाण 

सब जानते हैं कि ,झूठे बहाने बनाकर सच को नहीं छुपाया जा सकता .और जैसे अदालत में जिरह के दौरान सच बाहर निकल ही आता है ,वैसे अल्लाह के इस झूठ की पोल खुद कुरान ने खोल दी है कि फ़रिश्ते स्त्रियाँ नहीं है .यह बात तब खुली जब अल्लाह ने यह कहा था ,(इस आयत को गौर से पढ़ने की जरुरत है .) देखिये
"क्या हमने फरिश्तों को स्त्रियाँ बनाया ,तब यह साक्षी थे "सूरा -अस साफ्फात 37 :150

Did We create the angels as females the while they witnessed?” 37:150

."اَمۡ خَلَقۡنَا الۡمَلٰٓٮِٕكَةَ اِنَاثًا وَّهُمۡ شٰهِدُوۡنَ‏"37:150(अम खलक ना मलायकतु निसा अन व् हुम शाहिदून)
इसी आयत की तफ़सीर में भी फरिश्तों को स्त्री बताने का खंडन किया है
.
"وجعلوا الملائكة الذين هم عباد الله والإناث "
And they make the angels who are servants of the  Allah  are females.


5-अरबी व्याकरण से प्रमाण 
लेकिन अल्लाह की इस आयत में खुद विरोधाभास है ,क्योंकि वह अरबी में जिन फरिश्तों के लिए "मलायकतुملائكة "
 "शब्द का प्रयोग कर रहा है वह व्याकरण के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन  Feminine GendarPlular शब्द है .जिसे अरबी में "मुअन्निस जमा " कहते हैं .जो इस प्रकार है मुअन्निसالمؤنث सीगा जमाصيغة الجمع .अर्थात फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही हैं .क्योंकि अरबी व्याकरण के अनुसार किसी भी संज्ञा (Noun ) या सर्वनाम (Pronoun ) का स्त्रीलिंग (Feminine ) बनाने के लिए उसके आगे गोल ते के साथ ऊपर दो पेश(ةٌ ) लगा दिए जाते हैं ,जिसे ते मरबूता कहते हैं ..
उदाहरण- हामिद ( حامِدُ) एक वचन पुर्लिंग इसका स्त्रीलिंग होगा (حامِدةٌ ) हामिदः जिसे हामिदतुन लिखते हैं और हामिदा बोलते हैं .ऐसे ही नासिर ( ناصِرُ) का स्त्रीलिंग नासिरा (ناصِرةٌ ) होगा .इस व्याकरण के नियमानुसार ("मलायकतुملائكة "  शब्द स्त्रीलिंग ही है .भले मुसलमान फरिश्तों (परियों ) को अल्लाह की बेटियां मानने से इनकार करें ,लेकिन इस बात से कोई मुल्ला इंकार नहीं कर सकता की अरबी व्याकरण के अनुसार फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही है .और अल्लाह ने औरतों की सेना बना रखी है .शायद अल्लाह से ही प्रेरणा लेकर गद्दाफी ने औरतों की सेना बना डाली थी .
मुझे पूरा यकीन है कि जब इस लेख को पढ़ने के बाद मुस्लिम बहिनों को यह पता चलेगा कि फ़रिश्ते वास्तव में पुरुष नहीं ,बल्कि स्त्रियाँ हैं ,तो वह जरुर खुश होंगी ,और उनको स्त्री होने पर गर्व होगा .लेकिन आगे से उनको जहाँ भी फ़रिश्ता लिखा हुआ दिखे ,उसकी जगह "फरिश्तिनी " या "परियां " शब्द प्रयोग करना होगा ,

आपने   ऐसे कई विडिओ देखे होंगे जिसमे मुस्लिम विद्वान् मुस्लिमों   से कहते हैं कि जन्नत में निकाह के बिना ही  हूरों  के साथ सहवास करने की आजादी   होगी  , अर्थात अल्लाह लोगों को व्यभिचार करने की छूट  देता है   ,सोचिये  अगर फ़रिश्ते मर्द   होते हैं ,और हूरें  स्त्रियां  होती हैं  ,तो फ़रिश्ते हूरों  के  साथ सहवास   या व्यभिचार  क्यों  नहीं  करते  ?
और अल्लाह  इसलिए हूरों  और   फ़रिशतिनि   के साथ  इसलिए कुछ नहीं  कर सकता क्योंकि खुद उसकी योनि   है   !

बताइए क्या अब भी आप फरिश्तों को परियां कहने से इंकार करेंगे ?

(200/16)

रविवार, 8 सितंबर 2019

कुरान ने सूरा फातिहा की पोल खोली !

हमने  अक्सर  देखा  है कि मुस्लिम  हमारे  ऊपर  यही आरोप लगाते रहते हैं  कि आप  कुरान  को झूठा बताते   है  ,हम  ऐसे लोगों   से बड़े अदब   से कहना  चाहते    हैं  ,कि जब  आपका अल्लाह  ही  अपनी भेजी कुरान  को झूठा  साबित करने पर  आमादा  है  तो  हम  क्या करें   ?

आप  इस लेख को गौर  से  पढ़िए और फैसला करिये कि आप  जिस सूरा  फातिहा को रोज पढ़ते  हो  . अल्लाह  ने उसकी   आयतों  को झूठ  साबित  कर  दिया


मुसलमानों का  दावा है कि कुरान अल्लाह की  किताब   है  ,  और उसका एक एक  शब्द  अल्लाह का  वचन   है  . मौजूदा   कुरान  में   छोटे बड़े कुल 114 अध्याय (Chapters)  हैं  ,जिनको  अरबी   में  सूरा   कहा   जाता   है  , और  हरेक  सूरा में जो  वाक्य   होते   हैं  ,उनको  आयत (Verses )  कहा   जाता है   . कुरान  की   पहली  सूरा    का  नाम सूरा "अल फातिहा "   है 

 . इसमे कुल  7  आयतें   है   . जिनमे  अल्लाह के गुणों , शक्तियों और  महानता  का  वर्णन   करते  हुए अल्लाह की   तारीफ़  की   गयी   है  . और  उस  से दुआ  की  गयी   है  . सूरा  फातिहा  को   हर  नमाज   में पढ़ना  अनिवार्य   है   .
 इसकी   पहली   5  आयतें  इस प्रकार  हैं ,जो अरबी  से उर्दू  में अनुवादित  की  हैं ,

2.सब तारीफें  अल्लाह  के लिए  जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है 
3.बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल .
4.जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक .
5.हम तेरी  ही  इबादत  करते  हैं  , और तुझी  से  मदद  माँगते  हैं .
6.हमें  सीधा  रास्ता  दिखा .
7.उन  लोगों   का  रास्ता  जिन  पर तूने इनाम   किया ,न  कि जिन पर तेरा  गजब  नाजिल  हुआ और न  वह जो  गुमराह  हुए .

सूरा  फातिहा  की  इन  पहली 5   आयतों  को पढ़  कर यही  सवाल  पैदा  होता  है ,कि अगर  यह  आयतें   सचमुच  अल्लाह  के वचन  हैं , और किसी  और की  रचना   नहीं  तो , अल्लाह  को अपने मुंह  से अपनी  तारीफ़ करने  की  क्या  जरूरत पड़   गयी?
इसका  असली  कारण  यह  है कि  सूरा  फातिहा  कुरान  की  पहली  सूरा   नहीं  है , इसे बाद  में उस   समय  पहला  कर दिया  गया   जब  कुरान   की  ऐसी  आयतें   बन  चुकी   थीं   जिनमे अल्लाह के बारे में सूरा  फातिहा  के  विपरीत  बातें दी  गयी थीं  . उदाहरण के लिए पहले सूरा  फातिहा की  एक एक  आयत  लेते हैं  ,  और  कुरान  से  उसके  विपरीत  आयत  की  तुलना  देखते   हैं -

  .
1-जगत का  मालिक नहीं है 
सूरा  फातिहा  की आयत 2 में   कहा है   "जो जहानों (Worlds)   का  मालिक   है . "
यह बात  भी  सरासर  झूठ  है  क्योंकि  अल्लाह  ने मुसलमानों   के  प्राण  खरीद   लिए  है   ,जैसा कि  की इस आयत में  कहा  है   ,

" बेशक  अल्लाह   ने  मुसलमानों   के प्राण  और  माल  इसलिए  खरीद  लिए  हैं  ,कि  वह जन्नत के लिए  अल्लाह के  रास्ते पर लड़ते हैं  ,  और मारे  जाते हैं  और  मारते  हैं   " सूरा -तौबा  9:111 

और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  . और न यह बिकाऊ  हैं .और  सामान्य  नियम   के अनुसार किसी वस्तु  को  खरीदने  वाला   ही  उसका  मालिक  मना  जाता   है ,इसलिए  अल्लाह सिर्फ   मुसलमानों   का  मालिक  है ,अल्लाह  हिन्दुओं  और  अन्य  धर्म   के लोगों   का  मालिक   नहीं  हो सकता , क्योंकि  अल्लाह   न तो इनको  खरीद सकता है  .  और न यह बिकाऊ  हैं (Allah  is  Lord of  muslims only)


2- अल्लाह  दयालु और कृपालु  नहीं है 

सूरा  फातिहा  की  आयत  में   कहा   है  "बड़ा  मेहरबान  और निहायत  रहमदिल "

लेकिन   जो अल्लाह सभी  गैर  मुस्लिमों  को  दुश्मन  मानता  हो  . उनसे नफ़रत करता   हो  , और  उन  पर धिक्कार   करता  हो , और  उनकी जिंदगी दुखदायी  बनाने  का  इरादा रखता  हो  ,  वह  कभी  भी दयालु  नहीं  हो  सकता  है जैसा कि  कुरान की यह  आयतें  बताती   हैं  ,
"अल्लाह  काफिरों   का   दुश्मन  है  " सूरा - बकरा 2:98 

(Allah is an enemy to the disbelievers. 2:98)

"अल्लाह  काफिरों   को धिक्कार करता   है "सूरा  -बकरा 2:89

(The curse of Allah is on disbelievers. 2:89)

"अल्लाह गैर मुस्लिमों   की जिंदगी दुखदायी ( miserable )  बना   देगा " 
सूरा -बकरा 2:114 

(Allah will make disbelievers' lives miserable in this world . 2:114

और  अगर  सचमुच   अल्लाह  दयालु  और  रहमदिल होता  तो  , उसके अनुयायी  जिहादी   इतने क्रूर  और  बेरहम  नहीं  होते  ,  जो बच्चो  और महिलाओं को  क़त्ल करने को  अल्लाह  का हुक्म  मानते   हैं 

3-न्याय  दिवस का स्वामी नहीं है 

सूरा  फातिहा  की  आयत  4  में  कहा है  "जजा  के  दिन ( न्याय दिवस ) का  मालिक ".

लेकिन कुरान  की इन  आयतों  और  हदीस  के अनुसार अल्लाह  न्याय  दिवस   का  स्वामी   नहीं   है  , उसकी  जगह  मुहम्मद  न्याय करेंगे

" हे मुहम्मद  ,करीब   है   कि तुम्हारा रब  तुम्हें उच्च पद  पर  नियुक्त   कर दे  " सूरा - बनी इस्राइल 17:79

"your Lord will raise you to a praiseworthy station.” [Isra’a 17: 79]


कुरान  की  इस आयत  की  व्याख्या  में मुस्लिम  विद्वान "अबुल  सना शिहाबुद्दिन सय्यद   महमूद इब्न अल  हुसैनी अल अलूसी अल  बगदादी  -أبو الثناء شهاب الدين سيد محمود بن عبد الله بن محمود الحسيني الآلوسي البغدادي‎‎ "अपनी किताब "रूहुल  मायनी  -روح المعاني " में  कहते हैं ,
कि न्याय   के  दिन  अल्लाह अपना पूरा  अधिकार  अपने  हबीब   मुहम्मद  को  सौंप  देंगे  , और वही  अपनी इच्छा  के अनुसार  लोगों   के कर्मों   का  फैसला  करेंगे  . 
और  लगभग   यही  बात  इस आयत में भी  कही  गयी   है

" उस  दिन   किसी   का  हस्तक्षेप स्वीकार  नहीं  होगा ,सिवाय  उसके  जिसे  अल्लाह  ने  अनुज्ञा   दी   हो ,और उसकी सिफारिश मानी  जायेगी "सूरा -ता  हां 20:109

On that Day shall no intercession avail except for those for whom permission has been granted by (Allah)20:109

अल्लाह  न्याय   दिवस   का स्वामी  नहीं  है  , बल्कि  मुहम्मद भी अल्लाह का सहभागी   है  , यह बात इस  हदीस   से सिद्ध    हो जाती  है  ,
"अब्दुल्लाह  बिन उमर  ने कहा  , जब अल्लाह क़यामत   के  दिन   लोगों के  कर्मों  का  फैसला  करेगा  तो  , मुहम्मद  मध्यस्थता  करेंगे  . अल्लाह उनको  मध्यस्थता करने  की सुविधा  प्रदान   कर  देगा   "

Narrated 'Abdullah bin 'Umar:"Muhammad will intercede with Allah to judge amongst the people, and then Allah will exalt him to Maqam Mahmud (the privilege of intercession,

सही बुखारी - जिल्द 2  किताब 24  हदीस 553

इन  तथ्यों   से  यही सिद्ध  होता  है  कि यातो  अल्लाह में  खुद  सही  न्याय करने की क्षमता  नहीं  है  , या मुहम्मद ही  अल्लाह बन कर लोगों  को को भ्रमित   करते रहते थे 
4-रास्ता  भटकाने  वाला

सूरा फातिहा   की  आयत  में दुआ मांगी  गयी   है  कि "हमें  सीधा  रास्ता  दिखा "
लेकिन  अल्लाह  लोगों  को सीधा  रास्ता दिखने की  जगह  रास्ते से  भटका   देता  है  ,जैसा की कुरान की इस  आयत में  कहा है   ,

"फिर अल्लाह   जिसको  चाहे  भटका   देता  है  " सूरा -इबराहीम  14:4 

(Then Allah misleads WHOM HE WILLS )14:4


और  यदि  अल्लाह   सचमुच मुसलमानों   को  सीधा  रास्ता  दिखाने  वाला होता  तो  , तो   अधिकांश  मुसलमान  आतंकवादी नहीं  बन  गए होते  . जबकि अन्य  धर्म   के  लोग अल्लाह  की मेहरबानी   के बिना   ही  सीधे   रास्ते  पर   चल रहे   हैं 

इस  प्रकार  सूरा  फातिहा  में  अल्लाह  की  तारीफ़  में  जो  7  आयतें   दी   गयी   हैं  , उसके विरुद्ध  खुद  अल्लाह की  किताब   ने  ऎसी  चार  आयतें  पेश   कर दी   हैं जो  अल्लाह   की  महानता   का  भंडा  फोड़ने के   लिए  पर्याप्त   हैं   . इसी   लिए सूरा  फातिहा  को पहले  कर दिया  गया था. ताकि    भोले भले लोग  अल्लाह   की  ऐसी  तारीफ़  से पहले तो  प्रभावित  होकर  इस्लाम के चंगुल   में  फंस   जाएँ  .  फिर उनको   बाकि  कुरआन  पढ़ा कर  आसानी से जिहादी  बनाया   जा  सके   
.
(225)


शनिवार, 7 सितंबर 2019

रसूल की मर्दानगी की हकीकत ?

इस  समय  विश्व  में  अनेकों   , पंथ  .  संप्रदाय  ,  और मत  प्रचलित   हैं    और  सभी  के  अनुयायी अपने  अपने  तरीके से  शांतिपूर्वक  अपना  प्रचार  करते हैं ,लेकिन  इस्लाम  को   भी  एक धर्म समझ लेना  बुद्धि  के  साथ  बलात्कार  करने   जैसा है   , क्यों  इस्लाम    वास्तव  के एक  प्रकार का  जूनून  या  उन्माद   है   ,  जिसका एक   मात्र  उद्देश्य   दुनिया के  सभी   धर्मों  और संस्कृतियों   का नाश  करके  दुनिया भर के लोगों को  मुसलमान   बना कर अरबी   साम्राज्य  स्थापित  करना  है  ,  इस्लाम  की   बुनियाद   रखते ही   मुहम्मद और  उनके  साथी  इसी  लक्ष्य  की  प्र्राप्ति के लिए  पहले तो  जिहाद  को इस्लाम  फ़ैलाने का सबसे  प्रभावी तरीका अपनाते आये है  ,   लेकिन  जब   उनको  प्रतीत   हुआ  कि इस तरीके को  हर जगह  इस्तेमाल  करने से इस्लाम  का असली राक्षसी  रूप प्रकट  हो   जायेगा  ,  और परिणाम  स्वरूप लोग  इस्लाम  और  मुसलमानों   से नफ़रत  करने  लगेंगे ,
तब  धूर्त सहाबियों  ने   दूसरा  उपाय  निकाला  , कि मुहम्मद साहब को  ऐसी ऐसी  अलौकिक , असीमित और  चमत्कारी शक्तियों  से युक्त बता दिया  जाए , जिस से मुहम्मद साहब  के  सामने  सभी  धर्मों  के  अवतार  ,संत  ,   महापुरष  , और नबी   फीके और  शक्तिहीन  लगाने लगें  ,
और   गैर  मुस्लिमों   की श्रद्धा अपने अवतारों   पर  कम  मुहम्मद  पर  अधिक  हो  जाए   , इसलिए    हदीसकारों  और  इस्लामी  इतिहासकारों  ने  मुहम्मद  साहब   की  जिन    अलौकिक दैवी  शक्तियों   का  वर्णन  किया  है  ,  उनमे  मुहमद   साहब  की  सम्भोग  करने की  असीमित  और अनोखी  शक्ति भी है   ,

 1-महासंभोगी रसूल 

महम्मद के बारे में  अल्लाह   ने कुरान में  कहा     ,  की" हमने  मुहम्मद  को   दुनिया पर  रहमत  के लिए भेजा  है   ,

"وَمَآ أَرْسَلْنَـكَ إِلاَّ رَحْمَةً لِّلْعَـلَمِينَ  "
इन्ना अरसलनाक  इल्ला  रहमतुलिल  आलमीन " 21 :107 


And We have not sent you, [O Muhammad], except as a mercy to the worlds.

21:107

 लेकिन  इस हदीस  को पढने  के बाद  तो  यही   कहना  पड़ता  है  कि " मुहम्मद को दुनिया   का  महासंभोगी  बना कर  भेजा  गया   था ,

" व् मा   अरसलनाक इल्ला मुसीरुल अज़ीम लिल आलमीन "

"وما ارسلناك الًا  مثير عظيم  لِّلْعَـلَمِينَ    "

  यह  प्रामाणिक  हदीस  इस प्रकार   है  ,

" अनस बिन मलिक  ने बताया कि रसूल   और  रात में अपनी   पत्नियों  के बारी  बारी  से   सहवास  किया करते  थे  उस समय उनकी  पत्नियों   की संख्या  ग्यारह थी  . और इसी लिए  हम   लोग  कहा  करते   थे  कि  रसूल  में  तीस    मर्दों   के बराबर  सम्भोग  शक्ति   है   , वास्तव  में रसूल की पत्नियों  की संख्या   नौ नहीं    ग्यारह   थी   "


Anas bin Malik said, "The Prophet used to visit all his wives in a round, during the day and night and they were eleven in number." I asked Anas, "Had the Prophet the strength for it?" Anas replied, "We used to say that the Prophet was given the strength of thirty (men)." And Sa'id said on the authority of Qatada that Anas had told him about nine wives only (not eleven)

" حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَدُورُ عَلَى نِسَائِهِ فِي السَّاعَةِ الْوَاحِدَةِ مِنَ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ، وَهُنَّ إِحْدَى عَشْرَةَ‏.‏ قَالَ قُلْتُ لأَنَسٍ أَوَكَانَ يُطِيقُهُ قَالَ كُنَّا نَتَحَدَّثُ أَنَّهُ أُعْطِيَ قُوَّةَ ثَلاَثِينَ‏.‏ 
وَقَالَ سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ إِنَّ أَنَسًا حَدَّثَهُمْ تِسْعُ نِسْوَةٍ‏.‏  "


 (Sahih al-Bukhari, Volume 1, Book 5, Number 268)


नोट -बुखारी  की इस हदीस 268 में मुहम्मद की  11 पत्नियां  बताई गयी  है  ,लेकिन  यह उस समय की बात है  जब यह हदीस  कही गयी  थी  , वास्तव में मुहम्मद  की पत्नियों   और  रखैलों की  कुल संख्या   19 है ,यही  नहीं  पूरे जीवन  में मुहम्मद  ने 11 औरतों  से शारीरिक सम्बन्ध बनाये   थे .इसके बारे में पूरी जानकारी  अलग  से  दी  जाएगी  .

 
2--मुहम्मद  की सम्भोग शक्ति 

इस हदीस  से प्रेरित  होकर मुहम्मद  साहब की  मौत  के  बाद   मुहमद   साहब की  जीवनी  लिखने वाले  कई  मुस्लिम  लेखकों  और इतिहासकारों   में मुहम्मद की  असीमित  यौन  शक्ति  और कामलिप्सा  के बारे में लिखने की  होड़  सी   लग  गयी  , सभी ने मुहम्मद  को सुपर  सेक्सी रसूल ( sexual superman) साबित करने के लिए  ऐसी  बातें  लिख  डालीं  ,  जिन  को  पढ़ कर लोग  मुहम्मद  को रसूल   तो क्या  मनुष्य भी   नहीं मानेंगे  ,  मुहमद साहब  की  जीवनी लिखने वाले प्रसिद्ध  इस्लामी  विद्वान  और  इतिहासकार   "काजी   इयाज  इब्न  मूसा  -القاضي عياض بن موسى‎  "  (d. 544H / 1149CE   )   ने मुहम्मद  साहब  की   जीवनी   लिखी  है  ,

,जिसका नाम  "किताब  अशशिफा बि  तारीफ़ हुकूक  अल  मुस्तफा   -كتاب الشفاء بتعريف حقوق المصطفى‎     "    है

 . इस किताब  में  मुहम्मद  साहब   की      सम्भोग शक्ति   के  बारे में जो भी लिखा  है  , उसे अधिकांश  मुसलमान   भी   नहीं  जानते होंगे  ,  लेकिन  काजी  का दावा  है  कि किताब में लिखी हरेक बात  पूर्णतः  सत्य   है  . मुहम्मद  साहब की  कामेच्छा  और  सम्भोग  शक्ति  कितनी  प्रचंड  थी   , यह  बताने के लिये    यहां किताब   के  कुछ  उद्धरण दिए  जा रहे हैं   

1-मुहम्मद  साहब  में जन्नती  400  मर्दों (heavenly men ) के  बराबर  सम्भोग करने   की   शक्ति  अल्लाह ने  दे  रखी  थी   ,  जो  4000  मर्त्य  मर्दों ( mortal men.- ) के बराबर  होती है , p.56 
 अर्थात  एक  जन्नती  मर्द  की  सम्भोग  शक्ति   दस  मर्त्य  मर्द  की   सम्भोग   शक्ति के  बराबर होती    है

2-मुहम्मद  एक बार   के सम्भोग  में  दस  मर्दों  के बराबर  वीर्य   निकाल  देते थे ( मुहम्मद  एक बार   के सम्भोग  में  100 मर्दों  के बराबर  वीर्य   निकाल  देते थे ( that Mohammad  could deliver as much semen as 100 men p.56 

अब  प्रबुद्ध  पाठक   खुद  हिसाब  करें   कि  प्रति  दिन     ग्यारह। ग्यारह  औरतों   से  सम्भोग  करने   पर    पूरी  जिंदगी में  मुहम्मद  ने जितना वीर्य निकाला  होगा  उस  वीर्य  से  मक्का  मदीना  में  वीर्य की  ऐसी  बाढ़      आगयी होती  जिस में वहां के लोग बाह  जाते ?

3-मुहम्मद साहब  हर  औरत   से  सम्भोग  करने के बाद   ग़ुस्ल  ( स्नान  ) जरूर  करते  थे . p.57

यह  बात  गौर  करने के  योग्य है  कि लेखक  ने  यह  नहीं  लिखा  कि  सम्भोग   करने के  बाद    मुहम्मद की  हर  औरत   ग़ुस्ल  करती  थी  ,ऐसे   योनि से वीर्य  टपकाते  हुए घूमती  रहती   थी ?


3-क्या  मुहम्मद   सचमुच मर्द थे ?

 यह  तो   मुहम्मद साहब  की   मर्दानगी  (Sexual prowers)   की  वह   अतशयोक्ति   भरी  बातें जो   मुसलमानों    ने  फैला  रखी   हैं   , इतने  बड़ी  मर्द   होने   पर और ग्यारह  पत्नियां   होने पर    और  नित्य  सम्भोग   करने  पर भी   मुहम्मद   साहब बड़ी मेहनत  करने के   बावजूद   मुश्किल  से केवल  सात ही बच्चे  पैदा   कर पाये .मुहम्मद साहब  की  औलाद को  अरबी में  "शरीफ  -   कहां  जाता   है   ,  जिसका   बहुबचन "  अशराफ  -    है  . लोग  उनको सय्यद  भी कहते है ,  मुहम्मद के  सात  बच्चों   में   छह    पहली   पत्नी  खदीजा   से  हुए  थे , दो   पुत्र  अब्दुल्लाह इब्न  मुहम्मद  और कासिम इब्न मुहम्मद   ,  और चार  पुत्रियां    रुकैया   बिन्त मुहम्मद , ऊम्म  कुलसुम  बिन्त  मुहम्मद ,जैनब  बिन्त  मुहमद और फातिमा जहरा  बिन्त    मुहम्मद  ,  
 

मुहम्मद  को  एक  पुत्र   एक  दासी मारिया  क़िब्तिया  से हुआ जिसका नाम  इब्राहिम   बिन  मुहम्मद  था  ,  लेकिन  वह  अल्पायु  में  मर  गया  , अल्लाह  उसे    बचाने  जमीन  पर नहीं  उतरा ,


इसके   बाद   मुहम्मद  साहब की  फिर   कोई   संतान  नहीं   हो सकी   ,  इसके   केवल  यही   कारण  हो सकते    हैं   , मुहम्मद की  सम्भोग शक्ति की बातें  झूठी   है  , या  मुहम्मद  साहब    ने  सात  संतान  के बाद  नसबंदी   करा  ली  होगी  , खदीजा और  मारिया क़िब्तिया के आलावा   मुहम्मद की  सभी  औरतें   बाँझ   हो गयी  होंगी  , और  इतनी सम्भोग शक्ति  होते हुए  और  30 औरतों  से मशीन  की तरह लगातार   सहवास करने पर भी मुहम्मद निपुत्र होकर मरे  यानी  खदीजा के आलावा मुहम्मद किसी भी औरत से पुत्र नहीं  पैदा  कर पाए ,


हम तो बस यही कहेंगे कि उनको दूसरों  के बच्चों को अनाथ  करने का  फल मिल गया 

यदि  किसी  भी   पाठक   को  इसका  सही  कारण  पता   हो  तो   सूचित   करें  , 

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(260)

बुधवार, 4 सितंबर 2019

अल्लाह मुस्लिमों के गुनाह अपनी योनि में ढांक लेगा !

यह  हमारा निजी  अनुभव है  कि जब मुस्लिम   हमारे प्रमाणों   का  खंडन  नहीं  कर पाते   हैं   तो खिसया  कर   यातो  हमें   गालियां    देने  लगते हैं    या  हमारे   धर्म   ग्रंथों    का अपमान  करने के लिए उनके  अश्लील    अर्थ   करने लगते  हैं  ,  क्योंकि जैसे जैसे  लोगों  को  इस्लाम  की असलियत   पता   होने  लगी   तो  कई मुस्लिम     फेसबुक  या  विडिओ  के माधयम  से   हिन्दुओं   को भ्रमित  करने  में  लग  गए   हैं  , अभी  तक  यो  यह  लोग   शिव  लिंग  के बारे  में अश्लील  बातें   फैलाते   आये  हैं  लेकिन   अब  इनमे  इतनी  दुष्टता     बढ़  गयी  कि किसी   ने  गायत्री   मन्त्र  का  भी  अश्लील   अर्थ   कर  दिया  ,  परसों  ही  हमारे मित्र  श्री  अशोक  शर्मा   जी  ने मुझे इसकी  सूचना  देकर  कहा  की  आप  इन  मुल्ला  जरजिस  के चमचों  को  ऐसा  उत्तर   दीजिये की  यह  वेदों पर   उंगली  भी उठाने  का सपना  भी  नहीं   देखें  .


1-लेख  का मुख्य  विषय 
 इस लेख का मुख्य विषय   अल्लाह  की   " फुर्ज -  فرج "  हैं   ,  अरबी  शब्द  फुर्ज  का हिंदी  में  अर्थ  "योनि , भग , और  स्त्री   जननांग     है , जिसे  अंगरेजी   में cunt, vulva, pussy, vagina " है ,आज  तक   किसी  को भी पता नहीं     था  कि अल्लाह की  योनि  भी   है  ,  पंडित महेंद्र  पाल  जैसे  विद्वानों    को भी इस हदीस  पर  ध्यान  नहीं   पड़ा  ,  जब  अशोक  शर्मा जी  ने  मुझे  प्रेरित किया  तो   तीन  दिन  तक   खोज  कर मुझे तीन  प्रामाणिक   हदीसें   मिल  गयी 

2-हदीस का परिचय
सुन्नी मुसलिमों   की हदीस की  किताब  का पूरा नाम  "रियाजुस्सालि हीन -  رياض الصالحين   "   है  , और इन  हदीसों  के संकलन  कर्ता का  नाम "अबू जकारिया बिन  शरफ़ अन् ववी - أبو زكريا يحيى بن شرف النووي‎ "  है  , इनका जन्म  दमिश्क में  सन 1233 ईस्वी  में  हुआ था औरर मृत्यु सन 1277 ईस्वी में हुई  थी ,इनको इमाम नबवी  भी  कहा  जाता   है , चूँकि अल्लाह   की   ऐसी  विशेषताएं    है  ,जिनके बारे में कुरान  में खुल  कर नहीं   दिया गया है  ,  लेकिन  हदीसों  में  उन  गुप्त बातों   का उल्लेख मिलता है   . इसलिए इमाम   नबवी ने  ऐसी सभी हदीसों  को  एक  जगह  इकठ्ठा  कर  दिया  ,जो    सही बुखारी   , और सही मुस्लिम  से चुनी     हुई  हैं  .

3-अल्लाह  की योनि  का  सबूत 
रियाजुस्सआलिहीन  के पहले  अध्याय  का नाम  "किताब  अल मुकदमात - كتاب المقدمات "   है  ,जिसका मतलब       " The Book of Miscellany   "  है  ,  इसकी  233 नंबर हदीस    अरबी  हिंदी  और  अंगरेजी   में  दी  जा  रही   है 
मूल अरबी
وعن ابن عمر رضي الله عنهما أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال‏:‏ ‏ "‏المسلم أخو المسلم، لا يظلمه، ولايسلمه، من كان في حاجة أخيه كان الله في حاجته، ومن فرج عن مسلم كربة فرج الله عنه بها كربة من كرب يوم القيامة، ومن ستر مسلمًا ستره الله يوم القيامة‏"‏ ‏(‏‏(‏متفق عليه‏)‏‏)‏ ‏.‏

अरबी -व अन इब्न उम्र रजी अल्लाहुमा अन  रसूलल्लाह अलैहि वसल्लम काल :असलम अखू  असलम ,ला  यजलमहु व  ला यसलमहु ,व् मन कान फी हाजत अखीही ,कान अल्लाह फी हाजीतिहि व् मन फरज अ न मुस्लिम करतब फुर्जललाह अन्हु बिहा करतब मन  करब यौमि कियामा ,व्  मन सतर मुस्लिमा सत्तर अल्लाह  यौमि कियामा ,
अर्थ- इब्न   उमर (रजि ० )  कहते हैं  कि रसूल  ने  कहा   है  ,कि एक  मुस्लिम  दूसरे मुस्लिम   का भाई    है  ,इसलिए मुस्लिम  को चाहिए कि किसी  दूसरे  मुस्लिम   को  नहीं  सताए  ,और न  उस पर  हाथ उठाये  , और जो   दूसर मुस्लिम  की  जरूरतें  पूरी  करेगा  ,  अल्लाह  भी उनकी  जरूरतें   पूरी  करेगा , और जोभी   अपने मुस्लिम  भाई  के गुनाहों  को  ढाँकेगा   अल्लाह भी  क़यामत  के दिन   उनके गुनाहों  को  अपनी  ( योनि  - फुर्ज -  فرج " में   ढांक  लेगा . 
Eng-

Ibn 'Umar (May Allah bepleased with them) reported:
Messenger of Allah (ﷺ) said, "A Muslim is a brother of another Muslim. So he should not oppress him nor should he hand him over to (). Whoever fulfills the needs of his brother, Allah will fulfill his needs; whoever removes the troubles of his brother, Allah will remove one of his troubles on the Day of Resurrection; and whoever covers up the fault of a Muslim, Allah will cover up  his fault in  vulva on the Day of Resurrection"
.
[Al-Bukhari and Muslim]..
Arabic/English book reference : Book 1, Hadith 233
And-Arabic/English book reference : Book 1, Hadith 244

यह दौनों  हदीसें  लगभग  एक  जैसी  हैं  ,  क्योंकि  दौनों  में  अरबी शब्द  " फुर्ज  अल्लाह  -  فرج الله  " शब्द  आया  है ,
कुछ दिन  पहले एक मित्र ने प्रश्न  किया कि जब मुसलमान इतने    औरतबाज  हैं  ,तो जन्नत के फ़रिश्ते  कितने अय्याश  होंगे     और जन्नत में हूरें  भी हैं   , ऊपर  से जन्नत में   किसी से भी  सहवास करने  की छूट है   , तो जन्नत में   किसी के बच्चे क्यों   नहीं    होते  ?
 इसका  जवाब  है कि फ़रिश्ते    स्त्रियां   हैं  ,   और  अल्लाह  की खुद योनि  है   ,तो बच्चे   कैसे  होंगे  ?

मौलाना  जरजिस  और उसके बिकाऊ  चेलों में हिम्मत हो  तो इस हदीस  को गलत  साबित करें  , नहीं  तो सब   के सब  अपने अल्लाह की फुर्ज में छुप जाएँ 

(404 )

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

अल्लाह गणित में जीरो है !

अक्सर आपने देखा होगा कि मुल्ले मौलवी और मुस्लिम ब्लोगर कुरान को अल्लाह की किताब साबित करने में लगे रहते हैं .और अल्लाह को सर्व गुण संम्पन्न और ज्ञानी बताते है ,लेकिन इनकी दलीलें अन्योन्याश्रित होती है .अर्थात एक दूसरे तर्क पर आधारित है .जैसे कुरान को मानों,क्योंकि अल्लाह की किताब है ,अल्लाह को मानो क्योंकि कुरान का आदेश है .अल्लाह मुहम्मद की तरह अनपढ़ नहीं है ऐसा मुझे लगता था .अल्लाह की बुद्धि का स्तर उसकी किताब से पता चलती है .मुसलमान दावा करते हैं अल्लाह करेक व्यक्ति के कर्मों का हिसाब रखता है .हम आपको कुरान के हवाले से अल्लाह के हिसाब करने के दो नमूने दे रहे हैं जिसमे अल्लाह ने कुरआन में मृतक व्यक्ति की संपत्ति का बटवारा करने का नियम दिया है .सन्दर्भ के लिए कुरान की आयातों का हवाला दिया जा रहा है .फिर उस नियमके अधर पर दो कल्पित व्यक्तियों की संपत्ति का बटवारा उनके आश्रितों में बाँट कर दिखाते है ,देखिये –
कुरान में जगह जगह बढ़ चढ़ कर अल्लाह की विशेषताओं का वर्णन किया गया है .और उसे सर्वविद्या संपन्न बताया गया है .और उसकी अतिश्योक्ति पूर्ण तारीफ की गयी है .इसी तरह कुछ जगह पर उसे “जल्दी हिसाब करने वाला “या Swift Reckoner “भी कहा गया है .इसे अरबी भाषा में ” سريعُ الحساب -सरीउल हिसाब कहा गया है .
कुरान में लिखा है-
“अल्लाह तेज हिसाब करने वाला है “सूरा अनआम 6 :62
“अल्लाह बहुत तेज हिसाब लेनेवाला है “सूरा -रअद 13 :41
“अल्लाह जल्दी हिसाब करता है “सूरा -इब्राहीम 14 :51

अपने इन्हीं अद्भुत गुणों के कारण अल्लाह ने कुरान में किसी मुस्लिम मृतक व्यक्ति की वसीयत (सम्पति ) को उसके वसीयतदारों के बीच में बांटने के के लिए कुछ नियम निर्धारित किये हैं .की सम्पति में किसको कितना हिस्सा मिलना चाहिए .इसे कुरान का वसीयत का नियम या अंगरेजी में Quranic Inheritance Rule कहा जाता है .सुविधा के लिए अंक दिए गए हैं यह कुरान की सूरा निसा में इस तरह दिए गए हैं –
1 -कुरान के वसीयत का नियम
“अल्लाह तुम्हारी औलाद के बारे में तुम्हें वसीयत करता है कि,एक पुरुष का हिस्सा दो औरतों के बराबर हो (1 )यदि दो लड़कियाँ हों तो उनका हिस्सा माल का दो तिहाई है (2 )और यदि अकेली हो ,तो उसके लिए आधा है (3 )और यदि उसके औलाद हो तो ,उसके माता पिता में से हरेक के लिए छोड़े गए माल छठवां हिस्सा है (4 )और यदि औलाद नहीं हो ,और उसके माता पिता वारिस हों तो उसकी माता का हिस्सा तिहाई होगा (5 )और यदि उसके बाई बहिन भी हों ,तो माता का हिस्सा छठवां होगा (6 )यह हिसे अलह ने निश्चित किये हैं .और अल्लाह जानने वाला और तत्वदर्शी है “.
सूरा -निसा 4 :11

“और तुम्हारी पत्नियों ने जो छोड़ा हो ,और औलाद नहीं हो तो ,उसमे तम्हारा हिस्सा आधा है (7 )और यदि औलाद हो ,तो तुम्हारा हिस्सा चौथाई होगा (8 )और यदि औलाद हो ,उनका हिस्सा आठवां होगा (9 )और यदि किसी पुरुष स्त्री के औलाद नहीं हो ,और न माता पिता जीवित हों ,और एक भाई बहिन हों दौनों में प्रत्येक को छठवां हिस्सा होगा (10 )यदि वे भाई बहिन अधिक हों ,तो एक तिहाई में सब शामिल होंगे (11 )और अल्लाह बड़ा जानने वाला और सहनशील है “.
सूर -निसा 4 :12
2 -कुरान के अनुसार वसीयत की गणना
अब दिए गये नियमों के अनुसार मृतक द्वारा सम्पति को उसके पीछे छोड़े गए वारिसों में बांटने की गणना की जाती है .इसके लिए दो कल्पित व्यक्तियों के उदहारण लिए है .और फिर देखते हैं नियमों का पालन करते हुए मृतक की सम्पति का उचित बटवारा हो सकता है या नहीं .आसानी के लिए सम्पति एक लाख ( 100000 /-) मान ली गयी है एक व्यक्ति का नाम जैद और दुसरे का नाम गफूर लिया गया है .

पहिली वसीयत -जैद ने अपनी मौत के बाद एक लाख रूपया ,और तीन पुत्रियाँ ,माता -पिता और एक पत्नी को छोड़ गया था .उसकी सम्पति का कुरान के नियमों के अनुसार बटवारा करना है .
1 -तीन पुत्रियों को -यदि दो से अधिक लड़कियाँ हों ,तो उनका सम्पति में दो तिहाई हिस्सा होगा
.सूरा -निसा 4 :11
एक लाख का दो तिहाई =2 /3 =66 .66 %=66 666 /-रूपया
2 -माता पिता के लिए -माता पिता का हिस्सा एक तिहाई होगा .सूर निसा 4 :11
एक लाख का एक तिहाई =1 /3 =33 .33 %=33333 /- रूपया
3 – पत्नी का हिस्सा -तुम जो छोड़ जाओ ,और तुम्हारे औलाद हो ,आठवां हिस्सा पत्नी का होगा होगा
.सूरा निसा 4 :12
एक लाख का आठवां हिस्सा =1 /8 =12 .8 %=12499 /-रूपया
कुल बटवारा -112499 /-(एक लाख बारह हजार चार सौ निनानवे रुपये ,जबकि कुल सम्पति है मात्र 100000 /- एक लाख रूपया
अर्थात 12499 /(बारह हजार चार सौ निन्नानवे )रूपया अल्लाह क्या जन्नत के बैंक से मंगवायेगा ?

दूसरी वसीयत -गफूर ने अपनी मृत्यु के बाद एक लाख रूपया ,और केवल एक माता ,दो बहिनें और एक पत्नी को छोड़ा था .कुरान के नियमों के अनुसार उसकी सम्पति का उसके वारिसों में बटवारा करिए .
1 -माता का हिस्सा -उसकी माता का हिस्सा तिहाई होगा .सूरा निसा 4 :11
एक लाख का एक तिहाई =1 /3 =33 .33 %=33333 /- रूपया
2 -दो बहिनों का हिस्सा -यदि दो बहिनें हों तो ,उनका हिस्सा माल का दो तिहाई होगा .सूरा निसा 4 :11 और 12
एक लाख का दो तिहाई =66 .66 %=66666 /-
3 -पत्नी का हिस्सा -यदि उसके औलाद हो तो पत्नी का हिस्सा चौथाई होगा.
सूरा निसा 4 :12

एक लाख का चौथाई =1 /4 =25 %=25000 /-रूपया
कुल रूपया व्यय 124999 /-( एक लाख चौबीस हजार नौ सौ निन्नानवे रूपया ) जबकि कुल सम्पति केवल एक लाख ही थी
अर्थात 24999 /-( चैबीस हजार चार सौ निन्नानवे ) रुपये कहाँ से आयेंगे ?
क्या अल्लाह नए नोट छापेगा ?

इस से साफ पता चल जाता है की ,अल्लाह को एक हाई स्कूल के विद्यार्थी से भी गणित का ज्ञान है .जबकि मुसलमान दावे करते हैं किअल्लाह सबके कर्मों का हिसाब करता है ,और लिखता रहता है .जब अल्लाह की गणित का यह हाल है तो उसकी बुद्धि पर विश्वास बेकार है .
” इस लेख के बारे में आपको एक सच्ची घटना बता रहा हूँ ,मेरे एक मित्र रिजवी हैं ,जो मैथ की कोचिंग क्लास चलते है ,हैं उनके पास यह हिसाब कराने को गया ,लेकिन उनको यह नहीं बताया कि हिसाब कुरान से लिया है .रिजवी इस हिसाब को देखा और बोले यह किसी बेवकूफ ने बताया है ,ऐसा बटवारा हो ही नहीं सकत ,जब मैंने उनको कुरान क़ी आयातों का हवाला देकर बताया तो उन शक्ल देखने काबिल थी .
काश दूसरे मुसलमान भी इस सच्चाई को कबूल करें कि अल्लाह हिसाब में जीरो है .वह उनके कर्मों के हिसाबों में भी घोटाले कर देगा .”
मुसलमानों  को समझना  चाहिए कि जो  हिसाब में जीरो है  , उस पर ईमान रखने  से क्या फायदा ? वह उनके कर्मों  के हिसाब भी गलत कर  देगा  , जन्नत की जगह  जहन्नम में फेक  देगा .
अल्लाह की तारीफ में जो भी कहा जाता है सब सिर्फ कपोल कल्पना है .अल्लाह ईश्वर नहीं एक व्यक्ति होगा .

नोट -जोभी महानुभाव गणित   जानते हैं  ,कृपया ठीक से हिसाब   करके बताएं  और टिपण्णी अवश्य करें 
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