बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

बाइबिल में रसूल के बारे में भविष्यवाणी !!

नोट -यह  हमारा  146 वां लेख  है जो सन 2010 को तैयार किया था  , जो पोस्ट नहीं  हो सका था ,
इस लेख  से आपको  पता चल  जायेगा कि मुहम्मद वास्तव  में कौन  था ?

जब मुहम्मद 40 साल का था ,तो उसने सन 610 में खुद को अल्लाह का रसूल होने का दावा कर दिया था .लेकिन उसके इस दावे पर लोगों को शक बना रहा .उसी समय से मुसलमान इसी जुगाड़ में लगे रहते है कि यहूदी और ईसाई धर्मों के सहारे मुहम्मद को किसी न किसी तरह अल्लाह का रसूल साबित कर दें और ईसाइयों को गुमराह करें कि उनकी बाइबिल में मुहम्मद रसूल के बारे में भविष्यवाणी की गयी है .ताकि ईसाई मुसलमान बन जाएँ .

अक्सर ऎसी जितनी भविष्यवाणियाँ होती हैं ,उनमे किसी व्यक्ति ,घटना या स्थान के बारे में संकेतात्मक भाषा का प्रयोग किया जाता है .और पाहिले कुछ तथ्य दिए जाते हैं ,फिर उस व्यक्ति ,घटना या स्थान के बारे ने एक कोड वर्ड दिया जाता है .जिसके द्वारा उस कोड का सही तात्पर्य समझा जाता है .अर्थात ज्ञात तथ्यों के द्वारा अज्ञात तथ्य को पहिचाना जाता है .जैसे पहेलियों में होता है .

मुहम्मद के बारे में यह ज्ञात है कि वह अरब था ,मक्का में 569 में पैदा हुआ था .और खुद को रसूल कहता था .

बाइबिल में दो भाग है ,पुराना नियम और नया नियम .इसाई दोनों को मानते है .इसी नए नियम की किताबों और आखिरी पुस्तक "प्रकाशित वाक्य "में कुछ भविष्यवाणियाँ दी गयी है .नया नियम लेटिन भाषा में है .जो चर्च की धार्मिक भाषा है लेटिन में सभी नबियों के नाम दूसरी तरह से बोले जाते है .जैसे सुलेमान को Solomon ईसा को Jesus ,हव्वा को Eve आदि इसी तरह रोमन इतिहासकारों ने मुहम्मद को MAOMETIS कहा है .और लेटिन भाषा में भी A से लेकर Z तक हरेक अक्षर के लिए एक अंक माना जाता है .

1 -मुहम्मद के बारे में ईसा की भविष्यवाणी -

ईसा मसीह ने भविष्य में आनेवाले एक व्यक्ति के बारे में यह कहा था .

"यीशु ने कहा ,सावधान रहो ,कोई तुम्हें न भरमाने पाए ,जो तुम से कहेगा कि मैं नबी (रसूल )हूँ .तुम उसकी लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे ,वह तुम्हें मारेगा ,पकड़वायेगा ,उसकी बातों में कई लोग ठोकर खायेंगे ,जब वह झूठा नबी खड़ा होगा ,तो तो लोगों को गुमराह करेगा .परन्तु जो लोग धीरज से डटे रहेंगे उनका ही उद्धार होगा 
.नया नियम -मत्ती 24 :3 -13 

2 -फर्जी रसूल का खुलासा 

अब उस फर्जी रसूल का विवरण दिया जा रहा है

"उस नरपशु (Beast )शैतान के हाथों में तलवार होगी ,वह कहेगा किसी मूरत की पूजा मत करो ,जो ऐसा नहीं करेगा वह नरपशु उसे मरवा देगा .वह छोटे बड़े ,धनी निर्धन ,स्वतन्त्र दास सबको अपने हाथों में करेगा .उसके मानने वालों के माथे पर काला निशान होगा .

"जिस में बुद्धि हो वह उस नरपशु के अंक जोड़ ले उसका अंक "666 "है

नया नियम -प्रकाशित वाक्य 13 :11 से 18 

इस तरह पूरा सुराग मिल गया .अब हम मुहम्मद के लेटिन नाम "MAOMETIS "के अंक जोड़ते हैं

M =40 +A =1 +O =70 +M =40 +E =5 +T =300 +I =10 +S =200 =666 

यानी मुहम्मद वही आदमी है जिसका बाइबिल में विवरण दिया गया है .यह एक फर्जी रसूल है .

3 -अब अरबी गणित के अनुसार देखिये 

मुहम्मद को अरबी में رسول العربي بمكه यह कहते हैं .इसका अर्थ है अरब का रसूल मक्का वाला इसमे 13 अक्षर हैं जो इस तरह है .चूंकि अरबी उलटी तरफ से लिखते हैं हम वैसे ही लिख रहे है .

रे ر सीन س वाव و लाम ل अलिफ़ ا लाम ل एन ع रे رबे بबे ب मीम م काफ ك हे ه .


अब हम इन अक्षरों के अंक जोड़ते है

200 +60 +6 +30 +1 +30 +70 +200 +2 +2 +40 +20 +5 =666 

इस प्रकार से दोनों तरह से वही संख्या आती है ,जो बाइबिल में भविष्य में आने वाले फर्जी रसूल के बारे में कही है .यही कारण है की ईसाई कभी मुहम्मद को स्वीकार नहीं करते .उन्हें पता है 666 शैतान का अंक है .और मुहम्मद वही है जिसके बारे में बाइबिल में भविष्यवाणी की है .


जिसे शक हो वह  किसी ईसाई से पूछ ले .

 इसी भविष्यवाणी में यह भी कहा गया है कि उस पशु के मानने वालों के माथे पर  काला निशान होगा .मुसलमान जितने अधिक गुनाह करते हैं .उतना अधिक नमाजें पढ़ते हैं .जिस से बार बार सजदा मरने से उनके माथे पर रगड़ से काला निशान बन जाता है .आप किसी भी इमाम ,मौलवी या मुल्ले के माथे पर यह निशान देख सकते है . बाइबिल के अनुसार यह शैतान के अनुयाइयों की निशानी है .,

इस शोधपूर्ण  लेख पर  जिन मुस्लिम पाठकों को आपत्ति    हो वह समझ लें  यह लेख इंजील  पर आधारित  है ,जिसे मुस्लिम कुरान की तरह अल्लाह की किताब मानते  है , हम इसे सच मानते हैं  ,

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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

मुहम्मद का लिंग चमत्कार !

यह एक अटल सत्य है कि "जैसी मति वैसी गति "अर्थात व्यक्ति जीवन जैसे विचार और आचार रखता है ,उसकी मौत भी वैसी ही होती है .मुसलमान भले मुहम्मद को रसूल और महापुरुष कहते रहें ,लेकिन वास्तव में वह एक अत्याचारी ,कामी और बलात्कारी व्यक्ति था .वह औरत के लिए ह्त्या भी करवाता था .मुहम्मद का यही दुर्गुण उसकी दर्दनाक मौत का कारण बन गया .मुहमद कुदरती मौत नहीं मरा ,उसकी जहर देकर ह्त्या की गयी थी .मुसलमान इस बात को छुपाते हैं .और टाल जाते हैं .लेकिन इसके पुख्ता सबूत मौजूद है .
1 -मुहमद की हत्या के निमित्त 

हमने  पिछले  लेख में बताया था कि सन 628 में मुहम्मद ने अपने साथियों के सात बनू कुरेजा के कबीले पर धन के लिए हमला किया था .इस हमले उसने कबीले के यहूदी पुरुषों ,बच्चों और काबिले के सरदार "किनाना बिन अल रबी "की ह्त्या करा दी थी .और उसकी पत्नी साफिया के साथ जबरन शादी कर ली थी .और उसी दिन सफियाने मुहम्मद के खाने में जहर मिला दिया था .जो मुहम्मद के शरीर में धीमे धीमे असर करता रहा .और आखिर वह उसी जहर के कारण ऎसी मौत मरा कि मुसलमान दुनिया में यह बात बताने से कतराते हैं .

2 -साफिया ने मुहम्मद को जहर दिया 
"अब्दुर रहमान बिन अबूबकर ने कहा कि रसूल ने एक भेड़का बच्चा जिबह किया ,और उसे पकाने के लिए साफिया के पास भिजवा दिया .साफिया ने उसे पकाया .
बुखारी -जिल्द 3 किताब 47 हदीस 787

"अनस बिन मालिक ने कहा कि .रसूल की एक यहूदी पत्नी ने भेड़ का बच्चा पकाया था ,जिसमे जहर था .रसूल प्लेट से लेकर वह गोश्तखा गए

बुखारी -जिल्द 3 किताब 47 हदीस 786 

3 -जहर से मुहम्मद बीमार रहता था 

"आयशा ने कहा कि रसूल कहते थे कि मैं सीने में दर्द महसूस करता हूँ ,लगता है यह उसी खाने के कारण है ,जो मैंने खैबर के हमले के समय खाया था.मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरे गर्दन की धमनी कट गयी हो .
बुखारी- जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713 

4 -मुहम्मद मौत से डरता था -

"आयशा ने कहा कि उस दिन (मौत के दिन )रसूल के साथ सोने की मेरी बारी थी ,रसूल ने कहा मुझे पता नहीं है ,कि मैं कहाँ जाऊँगा ,कहाँ सोऊंगा और मेरे साथ कौन होगा .मैंने कहा यद्यपि मेरी बारी है ,फिर बी अप किसी के साथ सो सकते है .मुझे पता नहीं था कि रसूल अगली दुनिया की बात कर रहे थे ..
बुखारी -जिल्द 7 कित्ताब 62 हदीस 144 

5 -मुहम्मद की नफरत भरी इच्छा 

"इब्ने अब्बास ने कहा जिस दिन रसूल मरे .वे मुझ से कह रहे थे ,सारे अरब से काफिरों ,यहूदियों और ईसाइयों को निकाल दो ,उनके उपासना स्थलों को गिरा दो .और उनको कबरिस्तान में बदल दो .
बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 660 

6 -मुहम्मद की मौत का हाल 
मुहमद कि मौत 8 जून सन 632 को हुयी थी आयशा उसके साथ थी ,

आयशा कहा कि रसूल की तबीयत खराब थी ,मैं पानी लेकर आई और रसूल को पानी पिला कर उनके चहरे पर पानी मला .रसूल आपने हाथ ऊपर करके कुछ कहना चाहते थे ,लेकिन उनके हाथ नीचे लटक गए .
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 730 

"आयशा ने कहा कि उस दिन रसूल के साथ सोने की मेरी बारी थी ,रसूल मेरे पास थे ,लेकिन अल्लाह ने उन्हें उठा लिया.मरते समय  उनका   सर मेरे  दोनों स्तनों के बीच था उनकी  . लार मेरे थूक से मिल कर मेरी गर्दन से बह रही थी .बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 144 -145 

"रसूल की लाश को अली बिन अबू तालिब और अल अब्बास ने  पैर  पकड़ कर जमीन पर रख दिया .
बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 634 

7 -मुहम्मद का लिंग आकाश (अल्लाह )की तरफ था 

'  मौत  की खबर   सुनते ही अली इब्ने अबू तालिब जो रसूल के दामाद और चचेरे भी थे आगये .उनहोंने देखा कि रसूल का बेजान जिस्म जमीन पर पडा है लेकिन उनका लिंग आसमान की तरफ खड़ा है .यह देखकर उमर खत्ताब ने रसूल के मरने से इंकार कर दिया .क्योंकि अली ने कहा था
"يا القضيب خاصتك هو منتصب حتى السماء! "أيها النبي  अंगरेजी में "O prophet thy penis erect unto sky "
अबू दौउद -किताब 20 हदीस 3135 

7 -विकी इस्लाम से इसके प्रमाण 


In English, Ali ibn Abi Ṭalib, the fourth rightly guided Caliph of Islam (and also Muhammad's son-in-law and cousin) had exclaimed upon seeing Muhammad's lifeless corpse: "O prophet, thy penis is erect unto the sky!" 


Unsurprisingly, this is one "miracle of Islam" that you will not find proudly displayed or posted in the many Islamic da‘wah (preaching) websites or forums.


Umar ibn al-Khattab, the second rightly guided Caliph of Islam, initially refused to believe Muhammad had died, and who could blame him when the prophet displayed such strong signs of life?


8- मुहम्मद अपराधी था 

मरने बाद इस तरह लिंग के खड़े रहने को "Death erection "या "angel lust "कहते है .यह उन्हीं के साथ होता है जो जघन्य अपराधी होते है ..इसके बारे में हिन्दी विकी पीडिया ने यह लिखा है-

मरणोत्तर स्तंभन (अंग्रेजी: Death Erection डेथ इरेक्शन), एक शैश्निक स्तंभन है और जिसे तकनीकी भाषा में प्रायापिज़्म(priapism)कहते हैं, अक्सर उन पुरुषों के शव में देखने में आता है, जिनकी मृत्यु प्राणदंड, विशेष रूप से फांसी के कारण हुई हो।

9 -मुहम्मद का दफ़न 

अब्दुलाह बिन अब्बास ने कहा कि रसूल को इसी दशा में नजरान के तीन कपड़ों में दफ़न कर दिया गया था .दो कपडे ऊपर के थे और एक नीचे तहमद थी .
अबू दौउद -किताब 20 हदीस 3147

अब हम कैसे मने कि मुहमद एक महा पुरुष या रसूल था .उसने अपने कुकर्मों का फल मरने बाद पा लिया .वह क़यामत तक इसी तरह अपना लिंग अल्लाह कि तरफ दिखाता रहेगा .

यदी किसी को शक हो तो वह गूगल में "muhammad and his eternal erection "सर्च 

करके देख लें 

Video

Mohammad ka ling Chamatkar

https://www.youtube.com/watch?v=ht2IH1-1vJc&t=484s

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रविवार, 23 फ़रवरी 2020

मुहम्मदगीरी:इस्लामी दादागीरी !!

मुसलमानों की आदत है कि वे दूसरों के धर्मग्रंथों और महा पुरुषों को अपमानित करते रहते हैं .कभी उनके ग्रंथों में कमियाँ निकल कर उनको नीचा दिखाते हैं .और कभी उनके अश्लील चित्र बना कर उनकी निंदा करते है .फिर बाक़ी मुसलमान इसे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताके अपना संवैधानिक अधिकार बता कर दादागीरी करते है .लेकिन जब कोई मुहम्मद का कार्टून बनाता है ,या इस्लाम के बारे में कुछ कहता ,या लिखता है ,तो मुसलमान दंगा फसाद पर उतारू हो जाते हैं .वैसे लोगों को धोखा देने के लिए खुद को शांतिप्रिय और सहिष्णु बताते हैं .
मुहम्मद भी इसी तरह की दोहरी नीति अपनाता था .वह लोगों को गुमराह करने ,और अपने जल में फांसने के लिए शांत और सहिष्णु होने का ढोंग करता था .लेकिन वह वास्तव में अय्तंत उग्र ,क्रूर ,हिंसक ,और बात बात पर भड़कने वाला व्यक्ति था .वह खुद को अल्लाह से भी बड़ा मानता था .और अपने विरुद्ध बोलने वालों को क़त्ल करा देता था यही बात एक फारसी कविने कही है,
 " باخدا دیوانه بشد با محمّد هوشیار "
"बा खुदा दीवाना बाशद,बा मुहम्मद होशियार "
यानी अल्लाह के बारे में कुछ भी बको ,लेकिन मुहम्मद के बारे में सावधान रहो .
इसी को मुहम्मदगीरी कहा जाता है .इसके कुछ नमूने कुरान और हदीसों से दिए जा रहे हैं -
1 -शराफत का ढोंग 
मुहम्मद  दिखावे के लिए कहता था ,
"रहमान के सच्चे बन्दे तो वही हैं जो ,जमीन पर नम्रतापूर्वक चलते हैं ,और यदि कोई अज्ञानी असका अपमान करता है ,तो वे उस से कहते हैं कि तुम पर सलाम हो
.सूरा -अल फुरकान 25 :63 . 
"हम तो अल्लाह के सभी रसूलों में कोई अंतर नहीं मानते .सूरा बकरा 2 :285 .

2 -लोग मुहम्मद का मजाक उड़ाते थे 
"लोग नबी का मजाक उड़ाते हैं ,और कहते हैं कि यह तो निरा "कान (-उज्न)है .(कान का कच्चा )है .और रसूल को दुःख देते हैं .
सूरा -तौबा 9 :61 
"लोग यह भी मजाक करते हैं कि ,यह कुरआन दौनों शहरों में से किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति के ऊपर क्यों नहीं उतरा
.सूरा जुखुरुफ़ 43 :31
"यह लोग कहते हैं कि ,कोई दूसरा कुरान बनाओ ,या इसकी आयतें बदल दो .
सूरा -यूनुस 10 :15 

3 -मुहम्मद इज्जत का भूखा 
"हे ईमान वालो रसूल को राईना नहीं कहो बल्कि ,उनको उन्ज़ुरना कहो .सूरा -बकरा 2 :104
(नोट- अरबी में انظرنا उन्ज़ुरना का अर्थ है मुझे देखिये .और راعنا राईना का רָעיִנָहिब्रू में अर्थ है मेरा चरवाहा.)

4 -मुहम्मद भेद खुलने से डरता था 
"तुम छानबीन करते रहो ,और देखते रहो कि कोई रसूल की चुगली तो नहीं कर रहा है .कहीं ऐसा न हो कि पछताना पड़े सूरा -हुजुरात 49 :6 

5 -मुहम्मद का पक्षपाती स्वभाव 
"मुहम्मद अल्लाह के ऐसे रसूल हैं ,जो काफिरों के प्रति कठोर ,और अपने लोगों के प्रति दयालु हैं "
.सूरा -अल फतह 48 :29 
"यह तो अल्लाह का एहसान है कि ,उसने अपने लोगों में से एक को रसूल उठा दिया
"सूरा -आले इमरान 3 :164 

6 -मुहम्मद दुनिया में क्यों आया 
"मैं अभी काफिरों के दिलों में भय पैदा करता हूँ ,तुम उनकी गर्दने काटते रहो "
सूरा -अनफाल 8 :12 
"लोग डर के मारे दल के दल बनाकर इस्लाम में दाखिल होने लगेंगे "
सूरा -नस्र 110 :2 

7 -मुहम्मद अल्लाह पर आरोप लगाता था 
जब मुहम्मद    किसी की हत्या करता था तो ,कहता था   कि यह हत्या मैंने नहीं अल्लाह ने की  है ,
"हे मुहम्मद तुमने अबतक किसी को क़त्ल नहीं किया ,बल्कि उन लोगों को अलह ने क़त्ल किया है ,ताकि वह काफिरों को उनके किये की सजा का मजा चखा सके ,तुम तो निर्दोष हो
"सूरा -अनफाल 8: 17 
8 -मुहम्मद अपनी चुगली से भड़कता था 
"जो हमारा मजाक उडाएगा या हमारी चुगली करेगा ,हम उसकी नाक को गर्म लोहे से दाग देंगे "
सूरा -अल कलम 68 :16 
"जो रसूल को किसी भी तरह का दुःख देते हैं ,उनके लिए इस दुनिया में सजा ,और आखिरत में लानत है "
सूर -अहजाब 33 :57 

9 -रसूल की तारीफ़ करो 
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,तुम लोग मेरी कृपा से जीवित हो ,और मजे कर रहे हो ,इसलिए तुम हरदम मेरी तारीफ़ किया करो "
बुखारी -जिल्द 9 किताब 4 हदीस 541 .और मुस्लिम-4 किताब 4 हदीस 30 
10 -मुहम्मद से मजाक करने की सजा 
"एक गुलाम औरत का लड़का अंधा था ,उसने रसूल का मजाक उड़ाया ,रसूल ने उस लडके को मौत ककी सजा सुनाकर उसकी माँ के सामने क़त्ल करावा दिया "
अबू दाऊद-किताब 38 हदीस 4348 है . 
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,मेरा मजाक उड़ाना कुफ्र है ,और शरीयत के कानूनों के खिलाफ है ,जिसके अनुसार मेरा मजाक उड़ाने वाले को ,या तो सूली पर चढ़ा देना चाहिए ,या उसकी गर्दन काट देना चाहिए "बुखारी -जिल्द 9 किताब 98 हदीस 57 

11 -मुहम्मद कि नक़ल करने कीसजा 
"आयशा ने कहा कि,रसूल ने कहा कि ,अगर कोई मेरी नक़ल करेगा ,या मेरी तरह बोलेगा तो कठोरतम सजा दी जायेगी .क्योंकि रसूल की आवाज भर्राती थी "
बुखारी -जिल्द 6 किताब 93 हदीस 646 . 
12 -रसूल का अपमान करने कि सजा 
"जो रसूल का अपमान करे ,उसके टुकड़े टुकड़े कर के फेक दो "
बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 282 .मुस्लिम -किताब 32 हदीस 4091 
"काब इब्ने अशरफ ने एक बार रसूल को सलाम नहीं किया था ,रसूल ने उसको उसी वक्त क़त्ल करा दिया "
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 369 
"इब्ने उमर ने कहा कि एक बार एक गाँव की औरत ने ,रसूल के लिए अरे शब्द कहा ,रसूल ने उसे क़त्ल करा दिया "
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 362 
इकारिमा ने कहा कि रसूल का हुक्म था कि ,यदि कोई मेरा अपमान करे तो ,उसे ज़िंदा जला दिया जाए."
बुखारी -जिल्द 1 किताब 84 हदीस 57 
"जो रसूल का अपमान करे ,उसे सता सता कर मार डालो .और कष्टदायी मौत दो "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 9 हदीस 251 

13 -रसूल की निंदा करने कि सजा 
"अनस ने कहा कि,रसूल ने कहा कि ,मेरी निंदा करने वाले कि सजा मौत है ."
बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 270 -271 
"अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने हमें आदेश दिया था कि,जोभी मेरी निंदा करता हुआ पाए ,उसे क़त्ल करदो ."
बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 311 

14 -कुरआन का अपमान करना 
"इब्ने उमर ने कहा कि ,एक औरत ने रसूल के कुरआन पढ़ने के तरीके,और उनकी आवाज का मजाक किया .रसूल ने उस औरत को अपने हथों से वहीं क़त्ल कर दिया "
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 362 

15 -ईश निंदा का इस्लामी कानून 
इस कानून के अधीन वह सभी काम या विचार अपराध माने जाते है जो इस्लामी मान्यताओं के विपरीत हों .जैसे मुसलमान मानते है कि ,मुहम्मद जब चलता था ,तो उसकी छाया नहीं पड़ती थी ,मुहमद के मल मूत्र से सुगंध आती थी ,मुहमद रोज अल्लाह से मिलने जन्नत जाता था ,उसके थूक से सभी रोगों इलाज होता था आदि ,यदि कोई इस बात से इंकार करे तो उसे क़त्ल कर दिया जाये .
पाकिस्तान में इसी कानून कि धारा 295 c के अधीन सन 1986 से 2007 तक 647 लोगों को मौत कीसजा दी गयी थी .नवम्बर 2010 आयशा बीबी नामकी औरत को मौत की सजा दी गयी 12 दिसंबर 2010 को पंजाब के गवर्नर "सलमान तासीर की हत्या कर दी गयी .1996 एक महिला "जैबुन्निसा "को मौत की सजा दे दी गयी .30 जुलाई 2009 पंजाब के जिले गोजरा में "सिपाहे सहबा "के लोगों ने 270 ईसाइयों को माराऔर उनके घर जला दिए . 
इसी तरह सलमान रश्दी और तसलीमा नसरीन की मौत का फतवा दे दिया ' 
यह मुहम्मद गीरी या दादागीरी नहीं तो क्या है .?
आज भी मुसलमान मुहम्मदगीरी  करके भारत  में इस्लामी हुकूमत कायम करने का षडयंत्र कर रहे हैं 

(87/13)(18/12/2010)

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

मुस्लिम विद्वानों ने इस्लाम को नंगा कर दिया !

 नोट -हम सबसे पहले सभी पाठकों  से क्षमा  चाहते  है क्योंकि  इस लेख में कुछ  ऐसे वाक्य  और शब्द हैं  ,जो  अशिष्ट  और अश्लील है  , चूँकि  यह लेख  एक उर्दू इस्लामी  साईट  से  देवनानारी   में  किया गया है  ज्यों  का त्यों  दे  दिया गया  है  ,ताकि सभी पाठक खासतौर  से मुस्लिम भी जान  सकें  कि हदीसों  और उन पर आधारित  इस्लामी किताबों  में कितनी गन्दगी भरी  पड़ी  है  , जिसे मुस्लमान  धर्म  मानते  है  "
सुन्नी  मुस्लिम  में कई  फिरके  हैं  ,उनमे  एक का नाम   "  अहले  हदीस  "  है  , दूसरे फिरके के लोग इनको "गैर मुकल्लिद- غير مقلد " कहते  हैं  .अर्थात  ऐसे मुस्लिम जो  सीधे कुरान  और  हदीसों  के  अनुसार  ही हराम   और हलाल का निर्णय करते  हैं .
(scholars (Aalim) take the ruling directly from Quran and sunnah. In matters of fiqh)
सभी पाठक ध्यान से पढ़ें    अब आगे उर्दू इसके आगे उर्दू  में है ,

"अर्ज़ मुरत्तिब,

यह एक तारीखी हकीक़त) ऐतिहासिक तथ्य( है कि गैर मुक़ल्लिदीन (जो खुद को अहले हदीस कहते हैं) का वजूद (स्थापित) अंग्रेज़ दौर से पहले न था | अंग्रेज़ के दौर से पहले भारत में न उनकी कोई मस्जिद थी ना मदरसा और ना कोई पुशतक | अंग्रेज़ ने भारत में क़दम जमाया तो अपना अव्वलीन हलीफ (सबसे पहली सहयोगी)  उलमाए देवबंद को पाया | यही वोह उलमा अहले सुन्नत थे जिन्होंने अंग्रेज़ के खिलाफ जिहाद का फतवा दिया और हजारों मुसलमानों को अंग्रेज़ के खिलाफ (विरोध) मैदाने जिहाद में ला खड़ा किया और जिस ने अंग्रेज़ के विरोध जिहाद को हराम करार दिया और मुसलमानों में तफरका और इन्तिशार (विभाजन एवं अराजकता) फैलाया और आज तक गैर मुक़ल्लिदीन अपनी रविश (विधि) पर क़ायम हैं |

फ़िक़ह हनफ़ी जो लगभग बारह लाख (12०००००) मासाइल का मजमुआ (संग्रह) है इस अजीमुश्शान फ़िक़ह के चंद एक मसाइल पर ऐतराज़ करते हुवे गैर मुक़ल्लिदीन अवाम को यह बावर (विश्वास)   कराने की कोशिश करते हैं कि फ़िक़ह क़ुरान व हदीस के विरोध है और गैर मुक़ल्लिद अवाम कि जुबान पर तो यह एक चलता हुवा जुमला कि “फ़िक़ह हनफ़ी में फुलां फुलां और ह्या सोज़ मसअला है” इस लिए ज़ुरूरत महसूस हुवी कि अवाम को अगाह किया जाये कि गैर मुक़ल्लिदीन की मुस्तनद किताबों में क्या क्या गंदे और हया सोज़ मसाइल (बातें) भरे पड़े हैं | अफ़सोस गैर मुक़ल्लिद उलमा ने यह मसाइल क़ुरान व हदीस का नाम लेकर बयान किये हैं | आप यकीन करें जितने हयासोज़ मसाइल (बातें) गैर मुक़ल्लिदीन ने अल्लाह और उसके रसूल सल्लाहू अलैहि व सल्लम से मनसूब (संबंधित) किये हैं किसी हिन्दू, सिख, इसाई या यहूदी ने भी अपने मज़हबी पेशवा (धार्मिक गुरु) से मनसूब  (संबंधित) नहीं किये होंगे | गैर मुक़ल्लिदीन तक़ैय्या (जान बोझ) कर के इन मसाइल को छुपाते रहे हैं | इनकी कोशिश रही है कि हनफ़ी पर खाह मखाह के इतराज़ किये जायें ताकि उनके अपने मसाइल अवाम से पोशीदा (छुपी) रहें |
आप यह मसाइल पढेंगे तो हो सकता है कि कानों को हाथ लगायें और तौबा तौबा करें | शायद यह भी कहे कि ऐसी बातें लिखने की क्या जरूरत थी लेकिन यह हकीक़त है कि जिस तेज़ी से इखलाक को बालाए ताक रखते हुवे गैर मुक़ल्लिदीन अपना बुकलेट (Literature) फैला रहे हैं हकीक़त को आशकार (उजागर) करना हमारी मजबूरी है | दिए गये हवाले में कोई गलती हो तो मुत्तला फरमायें ताकि जल्द से जल्द इस्लाह कर दी जाये | दुआ करें कि अल्लाह तआला गैर मुक़ल्लिदीन को हिदायत फरमाएं और उम्मत को इस खाब्बिस फितने से बचायें आमीन ……
1- मनी (वीर्य) पाक है और खाना भी जाएज़ है
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
“मनी हर चंद पाक है” (अर्फुल्जादी पेज 10 )
और मारुफ़ गैर मुक़ल्लिद आलिम अल्लामा वहिदुज्ज़मा खान लिखते हैं:
“मनी (वीर्य) खाह गाढ़ी हो या पतली, खुश्क (सुखा) हो या तर (भीगा) हर हाल में पाक है”
(नुज़ुलुल अबरार भाग 1  पेज 49)
और नामवर गैर मुक़ल्लिद आलिम मोलाना अबुल हसन मुहीउद्दीन लिखते हैं:
“मनी (Sperm) पाक है और एक कौल में खाने के भी इजाज़त है”
(फ़िक़ह मुहम्मदिया भाग 1पेज 46)

टिप्पणी: कुल्फियां बनायें, कस्टर्ड जमायें या आइस क्रीम बनायें गैर मुक़ल्लिद मज़े उड़ायें |

2-महिला की शर्म गाह (योनि) की रतुबत (पानी/रस) पाक है
मशहूर व मारुफ़ गैर मुक़ल्लिद आलिम वहीदुज्जामा खान लिखते हैं:
“महिला की शर्म गाह (योनि) की रतुबत पाक है”
(कन्जुल हकायक पेज 16)

3-नंगी नमाज जायज है 
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
“नमाज़ में जिसकी शर्म गाह (योनि) सब के सामने नुमाया (प्रकट) रही उसकी नमाज़ सही है”
 (अर्फुल जादी पेज 22)
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब सिद्दीक हसन खान लिखते हैं:
“महिला तनहा (अकेली) बिलकुल नंगी नमाज़ पढ़ सकती है | महिला दोसरी महिलाओं के साथ सब नंगी नमाज़ पढ़ें तो नमाज़ सही है | मियां बीवी दोनों अकट्ठे मादर जाद नंगे (Connatural Naked) नमाज़ पढ़ें तो नमाज़ सही है | महिला अपने बाप, बेटे, भाई, चाचा, मामा सब के साथ मादरजाद नंगी नमाज़ पढ़े तो नमाज़ सही है”   
(बदूरुल अहलह पेज 39)
यह ना समझें कि यह मजबूरी के मसाइल होंगे |
अल्लामा वहीदुज्जामा वज़ाहत फरमाते हैं ”
कपड़े पास होते हुवे भी नंगे नमाज़ पढ़ें तो नमाज़ सही है”

(नुज़ुलुल अबरार भाग 1  पेज 65)
4-बहिन बेटियों  से लिंग पकड़वाना  जायज है 
गैर मुक़ल्लिदीन का बहन और बेटी से आला ए तानासुल (लिंग) को हाथ लगवाना
गैर मुक़ल्लिदीन के शैखुल कुल फिल कुल मियां नज़ीर हुसैन देहलवी लिखते हैं:
“हर शख्स अपनी बहन, बेटी, बहु, से अपनी रानों की मालिश करवा सकता है और बवक्ते ज़रूरत अपने आलाए तानासुल (लिंग) को भी हाथ लगवा सकते हैं”
(फतवा नज़ीरिया भाग 3  पेज 176)

5-पीछे से सम्भोग  जायज  है 
पीछे के रास्ते सुहबत (संभोग) करना गैर मुक़ल्लिदीन के लिए जायज़ है और गुस्ल भी वाजिब नहीं
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम सिद्दीक हसन खान लिखते हैं:
“शर्म गाह (योनि) के अंदर झांकने के मकरूह होने पर कोई दलील नहीं”
 (बदूरुल अहला पेज 175)
आगे लिखते हैं:
“रानुं में सुहबत (संभोग) करना और दुबुर (चूतड़)  Anusमें सुहबत करना जायज़ है कोई शक नहीं बल्कि यह सुन्नत से साबित है”  मुआज़ल्लाह – अस्ताग्फिरुल्लाह
( बदुरुल अहला पेज 157 )
और मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम वहीदुज्जामा लिखते हैं:
“बीवीयुं और लोंडीयूं के गैर फ़ितरी मुकाम (पीछे के मुकाम) के इस्तिमाल पर इनकार जाएज़ नहीं”
(हदियुल मेहदी भाग 1  पेज 118)
आगे लिखते हैं:
“दुबुर (पीछे के मुकाम/ चूतड़) में सुहबत (संभोग) करने से गुसल भी वाजिब नहीं होता”
(नुज़ुलुल अबरार भाग 1 पेज 24)
अल्लामा वहीदुज्जामा ने एक अजीब व ग़रीब मसअला गैर मुक़ल्लिदीन के लिए यह भी बयान किया कि:
“खुद अपना आला ए तनासुल (लिंग) अपनी ही दुबुर (चूतड़) में दाखिल किया तो गुस्ल वाजिब नही”
(नुज़ुलुल अबरार भाग 1पेज 24)
 टिप्पणी: यह कैसे मुमकिन है गैर मुक़ल्लिदीन तजर्बा (अनुभाव) कर के दिखायें |
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक मुतआ(अस्थायी विवाह)जाएज़ है
अल्लामा वहीदुज्जामा लिखते हैं:
“मुतआ की अबाहत ( जाएज़ होना कुरान की कतई आयात से साबित है”
(नुज़ुलुल अबरार भाग 2  पेज  33)

6-व्यभिचार  अपराध नहीं   जायज  है
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक ज़िना (व्यभिचार)जायज़ है कोई हद नहीं
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
“जिनको ज़िना पर मजबूर किया जाये उसको ज़िना करना जायज़ है और कोई हद वाजिब नहीं | महिला की मजबूरी तो ज़ाहिर है | पुरूष भी अगर कहे कि मेरा इरादा ना था मुझे कुवते शहवत (शक्ति सेक्सी) ने मजबूर किया तो मान लिया जाएगा अगरचे इरादा ज़िना का न हो”
 (अर्फुल जादी पेज 206)
टिप्पणी: गैर मुक़ल्लिद की हुकूमत आ गयी तो यही कुछ होगा |
गैर मुकल्लीदीन का माँ, बहन, बेटी का जिस्म (शरीर) देखना
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
” माँ, बहन, बेटी वगैरह कि क़बलो दुबुर (योनि एवं चूतड़) के सिवा पूरा बदन देखना जायज़ है” 
(अर्फुल जादी पेज 52 )
टिप्पणी: यह मसाइल पढ़कर हमें शर्म आती है ना जाने गैर मुक़ल्लिदीन इन पर कैसे अमल करते होंगे |

7-औरत दाढ़ी वाले मर्दों को दूध पिलाये 
(गैर मुक़ल्लिद महिला का दाढ़ी वाले पुरूष को दूध पिलाना)
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम अल्लामा वहीदुल्ज्ज़मा लिखते हैं:
“जायज़ है कि महिला गैर पुरूष को अपना दूध छातीयुं से पिलाये अगरचे वह पुरूष दाढ़ी वाला होता कि एक दोसरे को देखना जायज़ हो जाये” 
( नुज़ुलुल अबरार भाग 2 पेज 77)
टिप्पणी: याद रहे कि यह मसाइल क़ुरान व हदीस के नाम पर बयान किया जा रहा है |
गैर मुक़ल्लिद पुरूष चार से ज़ाइद (अधीक) बीवीयाँ रख सकते हैं
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब सिद्दीक हसन खान लिखते हैं:
“चार की कोई हद नहीं (गैर मुक्ल्लिद मर्द) जितनी औरतें चाहे निकाह में रख सकता है”
(ज़फरुल अमानी पेज 141
8-अपनी सगी बेटी से निकाह 
(गैर मुक़ल्लिदीन का अपनी बेटी से निकाह (शादी)
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
“अगर किसी महिला से ज़ैद ने ज़िना किया और उसी से लड़की पैदा हुवी तो ज़ैद को अपनी बेटी से निकाह कर सकता है | (अर्फुल जादी पेज 109)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक मुश्तजनी (हस्तमैथुन) जायज़ है
मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब नूरुल हसन खान लिखते हैं:
अगर गुनाह से बचना हो तो मुश्तज़नी (हस्तमैथुन) वजिब है |
(अर्फुल जादी पेज 207)
टिप्पणी: और आगे जो लिखा है वोह बात क़ारिऐन ज़रा दिल थम के पढ़िये:
“और बअज़ (कुछ) सहाबा (अलैहिमुर्रिज्वान) भी किया करते थे” | (मुआज़ल्ला)
(अर्फुल जादी पेज 207)
9-औरत पुत्र और पिता से शादी  कर सकती  है 
(एक महिला पिता एवं पुत्र के दोनों के लिए हलाल)
अल्लामा वहिदुज्ज़मा लिखते हैं:
“अगर बेटे ने एक महिला से ज़िना किया तो यह महिला बाप के लिए हलाल है इसी तरह इसके बरअक्स (विपरीत) भी” | (नुज़ुलुल अबरार भाग 1 पेज 28)
बाप और बेटे की मुश्तरक (साझा) बीवी
अल्लामा वहिदुज्ज़मा लिखते हैं:
अगर किसी ने अपनी माँ से ज़िना किया, खाह ज़िना कर ने वाला बालिग हो या ना बालिग या क़रीबुल बुलूग, तो वह अपने खाविंद (पति) पर हराम नहीं हूई |
(नुज़ुलुल अबरार भाग 2 पेज 28 )
टिप्पणी : बहुत खूब ! निकाह और ज़िना दोनों की गाड़ी चलती रहे |
10-व्यभिचार से जन्मे संतान की वसीयत 
ज़िना की औलाद बांटने का तरीका)
अल्लामा वहिदुज्ज़मा लिखते हैं:
एक महिला (गैर मुक़ल्लिदह) से तीन (गैर मुक़ल्लिद) बारी बारी सुहबत (सेक्स) करते रहे और इन तीनों की सुहबत से लड़का पैदा हुवा तो लड़के पर कुरआ अंदाजी (आकर्षित कार्य) होगी | जिसके नाम क़ुरआ (आकर्षित) निकल आया उसको बेटा मिल जायेगा और बाक़ी दो को यह बेटा लेने वाला तिहाई दियत (देयधन) देगा | (नुज़ुलुल अबरार भाग 2 पेज 75)

11-उत्तम महिला   की खासियत 
 (गैर मुक़ल्लिदीन के लिए बहतरीन महिला)
अल्लामा वहिदुज्ज़मा लिखते हैं:
गैर मुक़ल्लिदीन के लिए (बहतर महिला वोह है जिसकी फुर्ज (योनि) तंग हो और शहवत (सेक्सी) के मारे दांत रगड रही हो और जमाअ (संभोग) कराते समय करवट से लेती हो”
(लुगातुल हदीस भाग 6  पेज 428 )
शर्म गाह (योनि) का महल (जगह) काइम (बर क़रार) रखने का नुस्खा
गैर मुक़ल्लिदीन के शैखेकुल फिलकुल मियां नजीर हुसैन दहलवी लिखेते हैं:
“महिला को ज़ेरे नाफ बाल उसतुरे से साफ़ करना चाहिए उखाड़ ने से महल (योनि) ढीला हो जाता है” 
(फ़तवा नज़ीरिया भाग 4 पेज 526)

12-महिला हैज़ (माहवारी) से कैसे पाक हो
                                                               
रूफ गैर मुक़ल्लिद आलिम अल्लामा वहिदुज्ज़मा गैर मुक़ल्लिद औरतूं को हैज़ (माहवारी) से पाक का तरीका बाते हुवे लिखते हैं:
“महिला जब हैज़ से पाक हो तो दीवार के साथ पेट लगा कर खड़ी हो जाये और एक टांग इस तरह उठाए जैसे कुत्ता पिशाब करते वक़्त उठता है और कोई रोई के गले फुर्ज (योनि) के अन्दर भरे इस तरह वह पूरी पाक होगी” 
(लुगातुल हदीस)
टिप्पणी: गैर मुक़ल्लिद का अजीब व गरीब नुस्खा है गैर मुक़ल्लिद तजरबा कर के देखें |
हैज़ (माहवारी) से पाकी के लिए खुशबू का प्रयोग
मारूफ गैर मुक़ल्लिद आलिम मौलवी अबुलहसन मोहि उद्दीन लिखते हैं:
“हा ईज़ा हैज़ से पाक हो कर गुस्ल कर ले फिर रोई की धज्जी के साथ खुशबू लगाकर शर्म गाह (योनि) के अन्दर रख ले” |
(फ़िक़ह मुहम्मदिया भाग 4 पेज 22)

टिप्पणी: जो क़ब्र को खुशबू लगाये वह क़ब्रपरस्त जो शर्मगाह को खुशबू लगाये वह शर्मगाह परस्त |
13-सूअर की अज़मत (महीमा
अल्लामा वहिदुज्ज़मा लिखते हैं:
सूअर पाक है सूअर की हड्डी, पुट्ठे,खुर, सींग और थोथनी सब पाक है”
(कन्जुल हक़ा इक़ पेज 13)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक सूअर माँ (माता) की तरह पाक है
अल्लामा सिद्दीक हसन खान लिखते हैं
सूअर के हराम होने से इसका नापाक होना हरगिज़ साबित नहीं होता जैसे कि माँ (माता) हराम है मगर नापाक नहीं” | 
 (बदूरुल अहला पेज 16)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक सूअर का झूठा और कुत्ते का पिशाब पखाना पाक है
अल्लामा वहिदुज्ज़मा खान लिखते हैं:
“लोगों ने कुत्ते और सूअर और इनके झूठे के संबंध में विरोध किया ज्यादा राजिह (सबसे सही) यह है कि इनका झूठा पाक है ऐसे लोगों ने कुत्ते के पिशाब, पखाना के संबंध विरोध किया है हक़ बात यह है कि इनके नापाक होने पर कोई दलील नहीं”   
(नुज़ुलुल अबरार भाग 4 पेज 50 )
गधी, कुतिया और सोरनी का दूध गैर मुक़ल्लिदीन के लिए पाक है
मारुफ़ गैर मुक़ल्लिद आलिम नवाब सिद्दीक हसन खान लिखते हैं:
“गधी, कुतिया और सोरनी का दूध पाक है” |  (बदूरुल अहला पेज 16)
टिप्पणी: मनी भी पाक और यह दूध भी पाक गैर पुक़ल्लिदीन का मिल्क शैक तैयार है |
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक हलाल जानवरों का पेशाब एवं पखाना पाक है
मुफ़्ती अब्दुस सत्तार इमामे फिर्का गु र बाए अहले हदीस फरमाते हैं:
“हलाल जानवारूं का पेशाब एवं पखाना पाक है जिस कपड़े पर लगा हो उस से नमाज़ पढ़नी दुरुस्त है नीज बतौरे अद्वियात (दवाई) का पर्योग करना दुरुस्त है 
(फ़तवा सत्तारिया भाग 4 पेज 105)
टिप्पणी: यानी शर्बते ब नफ्शा ना मिला तो घोड़े का पेशाब पी लिया बिना डोल के बजाये लेद चबाली जवारिशे कमोनी के बजाये भैंसे का गोबर खा लिया |
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक घोड़ा हलाल है इसकी कुर्बानी (बलि) भी जरूरी है
नवाब नुरुल हसन खान लिखते हैं:
घोड़ा हलाल है | (अरफुल जादी पेज 236)
मुफ़्ती अब्दुस्सत्तार साहब लिखते हैं:
घोड़े की कुर्बानी (बलि) करना भी साबित बल्कि जरूरी है |
(फ़तवा सत्तारिया भाग 1 पेज 147-152)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक गोह हलाल है
नवाब नुरुल हसन खान लिखते हैं:
“गोह (छिपकली नुमा एक जानवर) हलाल है” | (अरफुल जादी पेज 236)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक खार पुश्त हलाल है
नवाब नुरुल हसन खान लिखते हैं:
खार पुश्त (काँटों वाला चूहा) खाना हलाल है” | (अरफुल जादी पेज 236)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक बहरी (समुन्द्री) मुर्दा हलाल है
नवाब नुरुल हसन खान लिखते हैं:“बहरी (समुन्द्री) मुर्दा हलाल है यानी मेंडक, सुअर कछवा, केकड़ा, साँप इसान आदि”
(अरफुल जादी पेज 236)
गैर मुक़ल्लिदीन के नज़दीक खुश्की (सूखे) के वह जानवर हलाल हैं जिन में खून नहीं
नवाब सिद्दीक हसन खान लिखते हैं:
“खुश्की के वह तमाम जानवर हलाल हैं जिन में खून नहीं”
 (बदूरुल अहला पेज 348 ) 
यानी कीड़े मकोड़े, मक्खी, मच्छर छिपकली आदि |
अब्दुल्लाह रोपड़ी के क़ुरानी मुआरिफ़
गैर मुक़ल्लिदीन के बद नसीब फ़िरके ने अपनी जिन्सी आग बुझाने के लिए कुरान पाक जैसी पवित्र पुश्तक को भी न बख्शा | मशहूर गैर मुक़ल्लिद आलिम और गैर मुक़ल्लिदीन के मुहद्दिस ज़ीशान हाफिज़ अब्दुल्लाह रोपड़ी ने कुरान के मुआरिफ (अनुवाद) बयान करते हुवे महिला और पुरुष के शर्मगाह की हीयत (रूपांतरण) और पुरूष व महिला के संभोग की कैफियत (स्थिति) जैसी खुराफात बयान करके अपने नामाए आमाल की सियाही में बढोतरी किया है आईये इनके पहचानने के तरीके के कुछ नामुमे देखें |
14-महिला के रहम (गर्भशय) की पहचान
र मुक़ल्लिदीन के मुहद्दिसे आज़म अब्दुल्लाह रोपड़ी फरमाते हैं:
“रहम (गर्भशय) की शक्ल लगभग सुराही की है रहम की गर्दन आम तौर पर छ: अंगुल से ग्यारह अंगुल उस महिला की होती है | संभोग करते वक़्त क़ज़ीब (लिंग) गर्दने रहम में दाखिल होती है और इस रास्ते मनी रहम में पहुँचती है अगर गर्दने रहम और क़ज़ीब लम्बाई में बराबर हूँ तो मनी वस्त (बीच) रहम में पहुँच जाती है वरना वरे रहती है”
(तंज़ीम यकुम मई 1932 पेज 6  कालम नम्बर 1)
टिप्पणी : क्या महिला को अपनी ग्यारह उन्गलियुं से शादी से पहले दुल्हा की आलत (लिंग) नाप लेना चाहिए कि मनी वस्त रहम (बीच) तक पहुंचा सके गा या नहीं ?
मनी रहम (गर्भशय) में पुहंचाने का दूसरा तरीका
हाफिज अब्दुल्लाह रोपड़ी लिखते हैं:
“और कई मर्तबा पुरुष की मनी ज्यादा दुफ्क़ (ज़ोर) के साथ निकले तो यह भी एक ज़रिया वस्त (बीच) में पहुँचने का है मगर यह ताक़त कुवते मर्दुमी (शक्ति पुरूष) पर मौकूफ (निर्भर) है”
(तंज़ीम यकुम मई 1932  पेज 6  कालम नम्बर 1)

15-गर्भशय का चित्र
हाफिज अब्दुल्लाह रोपड़ी लिखते हैं:
रहम मसाना (पिशाब की थैली / मुत्रशय) और रोदा मुस्तक़ीम (पखाना निकलने की अंतड़ी) के दरमियान पुट्ठे की तरह सादा रंग का गर्दन वाला एक अज़व (अंग) है जिस की शक्ल क़रीब क़रीब उलटी सुराही की बतलाया करते है मगर पूरा नक्शा उसका क़ुदरत ने खुद पुरूष के अन्दर रखा है | पुरूष अपनी आलत (लिंग) को उठाकर पैरूं के साथ लगा ले तो आलत मअ खुस्सितीने रहम का पूरा चित्र है
(तंज़ीम यकुम मई 1932 पेज 6  कालम नम्बर 1)
टिप्पणी : मौलाना सनाउल्लाह अम्र्तिसरी गैर मुक़ल्लिद इस पर टिप्पणी करते हैं “चित्र बना देते तो शायद लाभ होता” |
पुरूष और महिला की शर्म गाहों का मिलाप और करारे हमल (गर्भावस्था)
गैर मुक़ल्लिदीन के मुहद्दिस रोपड़ी साहब लिखते हैं:
“आलत (लिंग) ब मंजिला गर्दने रहम के है और खुस्सितीन बमंजिला पिछले रहम के हैं | पिछला हिस्सा रहम का नाफ (नाभी) के क़रीब से शुरू होता है और गर्दने की महिला की शर्मगाह में वाकअ (स्थित) होती है जैसे एक आस्तीन दोसरे आस्तीन में हो गर्दने रहम पर ज़ा इद (अधीक) गोश्त लगा होता है इसको रहम का मुंह कहते हैं और यह मुंह हमेशा बंद रहता है संभोग के वक़्त आलत (लिंग) के अन्दर जाने से खुलता है या जब शिशु का जन्म होता है | क़ुदरत ने रहम के मुंह में खुसूसियत के साथ लज्ज़त (आनंद) का इहसास रखा है अगर आलत इसको छूए तो दोनों मह्जूज़ (आनंदित) होते हैं ख़ासकर जब आलत और गर्दने रहम की लम्बाई यकसां (बराबर) होतो यह पुरुष एवं महिला की कमाले मुहब्बत (प्रेम) और ज्यादती लज्ज़त (आनंद की बढोतरी) और गर्भ ठहरने का जरिया है | रहम मनी का शाइक़ (शौकीन) है इसलिए संभोग के वक़्त रहम की जिस्मे गर्दन के तरफ माईल (इच्छुक) हो जाता है गर्दने रहम की तकरीबन छ: अंगुश्त (ऊँगली) महिला की होती है और ज्यादा से ज्यादह ग्यारह उन्गुश्त होती है” |
(तंज़ीम यकुम मई 1932  पेज 6  कालम नम्बर 1)
टिप्पणी: हाफिज रोपड़ी को वासी (वियापक अनुभाव) तजर्रबा है |
रहम का महले (स्थान) वकूअ
हाफिज अब्दुल्लाह रोपड़ी लिखते हैं:
मुंह रहम का महिला की शर्मगाह में पिशाब के सुराख़ से एक ऊँगली से कुछ कम पीछे होता है” (हवाला बाला)
टिप्पणी : हाफिज साहब ने खूब पैमाइश (माप) की है | {सनाउल्लाह}
अन्दर की कहानी
हाफिज अब्दुल्ला रोपड़ी गैर मुक़ल्लिद अन्दर की पूरी कहानी से वाकिफ हैं लिखते हैं:
“और गर्दन रहम की किसी महिला में दायें जानिब (ओर) और किसी में बाएं ओर मा इल होती है रहम के बहर की तरफ अगरचे ऐसी नर्म नहीं होती लेकिन बातिन इसका निहायत नर्म और, चिकन दार होता है ताकि आलत के दुखूल के समय दोनों मह्जूज़ (आनंदित)) हूँ नीज रबड़ की तरह खेंचने से खींच जाता है ताकि जितनी आलत दाखिल हो उतना ही बढ़ता जाये | कुंवारी औरतूं में रहम के मुंह पर कुछ रगें सी तनी होती हैं जो पहली सुहबत में फट जाती है इसको अज़ालाए बुकारत कहते हैं | (
तंजीम अहले हदीस रोपड़ी पर्थम जून 1932 पेज 3 कालम नंबर 3)
16-संभोग करने का बहतरीन सूरत
गैर मुक़ल्लिदीन के मुहद्दिसे आज़म हाफिज अब्दुल्ला रोपड़ी लिखते हैं:
और संभोग का बहतर सूरत यह है कि महिला चित लेटी हो और पुरूष ऊपर हो | महिला की रान उठाकर बहुत सी छेड़ छाड़ के बाद जब महिला की आँखों की रंगत बदल जाये और इसकी तबीअत में कमाले जोश आ जाये और पुरुष को अपनी ओर खींचे तो उस वक़्त दुखूल करे इससे पुरुष महिला का पानी एक्ठ्ठे निकल कर अमूमन गर्भ करार पाता है”
(अखबारे मुहम्मदी 15 जून 1939  पेज नंबर 13  कालम नंबर 3)
टिप्पणी: गैर मुक़ल्लिदीन इस तरीके को गौर से पढ़ें और आइन्दा इसी तरीके से हमबिस्तरी (संभोग) करें |
अब  प्रबुद्ध  पाठक खुद  निर्णय  करें ,क्या  ऐसी हदीसों   को धार्मिक ग्रन्थ माना जा   सकता है  जिनमे इतनी अश्लीलता और गन्दगी भरी हुई है , यही कारन है कि जैसे  सूअर गन्दगी नहीं  छोड़ सकता वैसे इतना जानने  के बाद भी इस्लाम नहीं   छोड़ते  , उनके लिए  ऐसा इस्लाम मुबारक 
बस  आप  लोग इस गन्दगी  से बचे  रहें  यही कामना  है 
इस लेख में कुछ  उर्दू किताबों के हवाले दिए गए है उनके अंगरेजी और उर्दू नाम दिए गए हैं जो गूगल में उर्दू में सर्च करने पर मिल जायेंगे हमने जाँच की  है  ,
1.Nuzul al Abrar - نُزول الابرار
2.Tanzim yakun-تنزيم يكم
3.Urf al jadi - عرف الجادی۔
4.फ़तवा सत्तारिया-فتاوي ستّاريه
5.फ़िक़ह मुहम्मदिया-فقه محمديه
6.Lughat al Hadis -لغت الحدیث
7.कन्जुल हक़ा इक़ -كنزالحقايق

(429 )

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

जब मुहम्मद ने कबूला कि मैं रसूलल्लाह नहीं !

हमने पिछले लेख में बताया  कि इस्लाम  के कलमा के दो हिस्से  है  ,  उसका दूसरा भाग " मुहम्मदुर्रसूलल्लाह  "  है  इसका अर्थ  है मुहम्मद  अल्लाह  का  रसूल "आज   सारी  दुनिया के  लोग जान चुके हैं  कि इस दो टुकड़ों  से बने कलमा के कारण जबसे इस्लाम बना मुस्लमान  तब  से   आज तक अत्याचार  ,आतंक , और उन  सभी लोगों   की हत्याएं  करते आये है  , जिन्होंने इस कलमा को पढ़ने  से इंकार  किया  था ,यह  कलमा  कितना महत्त्व हीन है   इसका  अनुमान लोग खुद कर सकते है  , कुरान में कुल  6666  आयतें  हैं  और जो 114  सूरा  यानि अध्याय में  विभक्त  है  ,  और कलमा  का दूसरा भाग   111 सूरा  में आधी   आयत में मौजूद  है  , फिर भी इस आधी  आयत को पढ़वाने के लिए  मुसलमान शाशक   फर्रुखसियर  ने गुरुगोविंद  सिंह  के दो छोटे पुत्रों  को दीवार  में जिन्दा चिनवा  दिया  था  ,  इसी  तरह  सूफी  सरमद  ने जब कलमा पढ़ने  से इंकार  किया  तो  औरगजेब  ने उसकी  खाल  उतरवा  दी  थी  ,सभी जानते हैं  की मुहम्मद का एक ही उद्देश्य विश्व  पर राज  करना  था  , और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह हथकंडे   अपनाया  करते थे  ,  और अगर  कोई आपको बताये कि लोगों   के दवाव   से डर एकबार खुद मुहमद  ने कबूला  था कि  वह  अल्लाह  का  रसूल  नहीं   है  ,  ,मुहम्मद  ने यह  भी स्वीकार किया की अल्लाह  " रहमान " और " रहीम  " भी नहीं   है  अर्थात  यह  सब  झूठ  है ,इसका प्रमाण इस्लामी इतिहास  में मौजूद है  , जो इस प्रकार  है

1-मुहम्मद का मक्का से पलायन 
मुहम्मद के कबीले का नाम  कुरैश   था  , यह लोग मूर्तिपूजक  थे  ,इन के मुख्य देवता का नाम इलाह  (चंद्रदेव ) था  ,लेकिन यह लोग  यहुदियों  और ईसाई धर्म  पर भी विश्वास  रखते थे , इसके कारण  काबा में  इस्माइल और मरियम  की भी मूर्तियां रखी  थी  ,  इसके आलावा कुरैश  के लोग यहूदी और ईसाई नबियों  पर आस्था  रखते , पूरे अरब  में नबियों   के चमत्कारों  की  कथाएं प्रचलित  थीं  ,
लेकिन  जब मुहम्मद  ने कुरैश  के देवताओं  की निंदा करना और खुद को नबी  बताना  शुरू  कर दिया तो कुरैश  के लोग मुहम्मद   की हत्या  करने पर उतारू  हो गए  , क्योंकि वह  जानते  थे कि यह व्यक्ति   कोई  नबी नहीं  झूठा , पाखंडी  और धोखेबाज   है  ,और अगर इसको नहीं  मारा गया तो यह धूर्त   हमारे धर्म  को नष्ट  कर  देगा ,और जब  मुहम्मद को यह  बात पता चली  तो वह सन 615  ईस्वी यानी  7 हिजरी पूर्व    रातों  रात  अपनी पत्नियों  और अपने कुछ खास  सहबियों  के साथ  "इथोपिया(   Abyssinia   )   भाग   गए   ,इथोपिया को अरबी  में " अल हबश - الحبشة‎   "  कहते  हैं   ,  और मुहम्मद यह पहली हिजरत   थी ,जिसे "हिजरतुल  इला  हबशह -  الهجرة إلى الحبشة‎    "  कहा जाता  है .उस समय इथोपिया में ईसाई  राजा  "अश्मा इब्न  अब्जार (Ashama ibn Abjar    )   का राज्य था  ,  अरब के लोग उसे " नज्जाशी - نجاشي‎   " भी  कहते  थे.उसने मुहम्मद  के साथियों    और परिवार के लोगों  को शरण  दे  दी लेकिन  इथोपिया  में रहकर भी मुहम्मद  का ध्यान  मक्का  में   लगा रहता था। वह  अक्सर  अपने किसी दूत को मक्का  भेज  कर   कुरैश  के साथ  कोई समझौता करने का सन्देश  भेजते  रहते  थे. और जब कुछ   समय बाद जब मुहम्मद  ने कुरैश के लोगों  से  हज  के लये मक्का आने  का अनुरोध किया तो  कुरैश  केलोगों  ने कुछ शर्तों  के साथ  मक्का  में रहने  की  अनुमति  दे  दी

2-हुदैबिया  की संधि 
(The Treaty of Hudaybiyyah )
इस संधि को "सुलह अल हुदैबियह -  صلح الحديبية "   कहा  जाता  है  मक्का  से कुछ  दूर हुदैबिया  नामका गाँव   था  ,  संधि मार्च  628 ईस्वी  ( Dhu al-Qi'dah, 6 AH  )को हुई  थी  ,एक पक्ष में मुहम्मद और मदीना निवासी उनके  सहाबा थे ,तो दूसरे पक्ष  में मक्का के कुरैश   लोग थे  ,  यह  समझौता दस साल के लिए था  ,
समझौते  का प्रारूप  तैयार  करते  समय  मुहम्मद  और   सुहैल इब्न   अम्र  के बीच  जो बहस हुई  थी  ,वह  अंग्रेजी  साईट में नहीं  मिलती  ,लेकिन  अरबी  में सर्च  करने   से मिल   जाती  है  , मुहम्मद  की तरफ से  अली इब्न  अबी  तालिब  थे   इनके बिच  जो बात हुई वह  हम  अरबी  मुख्य वाक्य  और उसका हिंदी लिपि   के साथ   अर्थ  भी  दे  रहे  हैं
 3-कुरैश की आपत्तियां मुहम्मद का जवाब  
आम तौर पर  देखा गया है कि जब   दो  गुटों  में  किसी मुद्दे पर सुलह  या समझौता  कराया  जाता  है तो हरेक पक्ष  अपनी अपनी बात को मनवाने  की कोशिश  करता  है  ,  फिर चर्चा में कोई बात मान  ली  जाती  है  , और कोई अस्वीकृत  की  जाती  है  ,  ऐसे ही हुदैबिया की सुलह के समय मुहम्मद  ने भरसक  कोशिश  की , की  कुरैश सुलह  का वैसा ही  मसौदा  मान  लें  जैसा मुहम्मद  चाहते थे  ,  लेकिन  कुरैश ने मुहम्मद  की एक भी बात नहीं  मानी , उलटे  खुद मुहम्मद  को कुरैश  की बात  माननी पड़ी .इस चर्चा में अरबी  के कुल  9  वाक्य  हैं  ,पहले  जिन्हें  देवनागरी लिपि में दिया गया  है  ,  फिर हिंदी और अंगरेजी अनुवाद   दिया गया  है  , ताकि किसी प्रकार की शंका की  कोई गुंजायश  नहीं  रहे  

فلما اتفق الطرفان على الصلح دعا رسول الله علي بن أبي طالب فقال له:-
(फ़लम्मा इत्तफक तऱफान अलल सुलह दआ रसूल अल्लाह अली इब्न  अबी  तालिब फ काल लहु )-1

अर्थ -जब दौनों पक्षों  के बीच मुद्दे तय हो गए तो लिखने के लिए रसूल ने अली बिन अबीतालिब  को बुलाया
Prophet said, “Now the matter has become easy,So, the Prophet called the  Ali and said to him

 " اكتب: بسم الله الرحمن الرحيم 
(इकतब : बिस्मिल्लाह रहमानिर्रहीम )-2
अर्थ -कहा लिखो बिस्मिल्लाह रहमानिर्रहीम
, “Write: By the Name of Allah, the most Beneficent, the most Merciful.

فقال سهيل: أما الرحمن، فما أدري ما هو؟
(फ काल सुहैल :मा रहमान  ?फ मा दरी मा हुव )-3
अर्थ -सुहैल बोला  रहमान  क्या  होता है  ?वह  कौन   है   ?
Suhail said, “, I do not know what it means.

 ولكن اكتب: باسمك اللهم كما كنت تكتب.
(व् लाकिन अक्तब :बिस्मिक  अल्लाहुम्म कमा कुन्त  कतब )-4
अर्थ -सुहैल बोला लिखो बिस्मिक अल्लाहुम ,जैसे पहले लिखा करते  थे
So write: By Your Name O Allah, as you used to write previously

فقال المسلمون: والله لا نكتبها إلا بسم الله الرحمن الرحيم
(फ काल मुस्लिमून :वल्लाह ला नकतब हा इल्ला बिस्मिल्लाह रहमानिर्रहीम )-5
अर्थ -तब मुसलमानों  ने विरोध  किया बोले  बिस्मिल्लाह रहमानिर्रहीम  क्यों  नहीं लिखा गया ?
The Muslims said, “By Allah, we will not write except: By the Name of Allah, the most Beneficent, the most Merciful.”

فقال: " اكتب: باسمك اللهم "
(फ काल :    इकतब  बिस्मिक अल्लाहुम्म )-6
अर्थ -रसूल बोले - बिस्मिक अल्लाहुम्म  ही लिखो
Write: By Your Name O Allah.”

ثم قال: " اكتب: هذا ما قاضى عليه محمد رسول الله "

(सुम्म काल :इकतब हाजा मा  काजी अलैह मुहम्मद  रसूलल्लाह )-7
अर्थ -फिर जब  लिखने लगे   की यह   मुहम्मद  रसूल्ललाह पर लागू होगा
This is the peace treaty which Muhammad, Allah’s Apostle

فقال سهيل: والله لو نعلم أنك رسول الله ما صددناك عن البيت، ولكن اكتب محمد بن عبد الله

(फ़ काल सुहैल :वल्लाह नअ लम इन्नक रसूलल्लाह मा सददनाक अनिल बैत ,व लकीन इकतब मुहम्मद बिन  अब्दुल्लाह )8
अर्थ -तब  सुहैल बोला हमें  मालूम  है कि तू अल्लाह  का रसूल नहीं  , यदि होता  तो हम तुझे काबा में  आने  से नहीं  रोकते ,इसलिए लिखो मुहम्मद बिन  अब्दुल्लाह 
 if we knew that you are Allah’s Apostle we would not prevent you from visiting the Kaba,

فقال: " إني رسول الله، وإن كذبتموني اكتب محمد بن عبد الله ".
(फ काल : इन्नी रसूलल्लाह व् इन कजबतमूनी  इकतब मुहम्मद बिन  अब्दुल्लाह )-9
अर्थ -मुहम्मद बोले  , मैं  तुम  लोगों  को झूठ  नहीं  बोल   सकता  इसलिए लिखो मुहम्मद बिन  अब्दुल्लाह 
 even if you people do not believe me. Write (uktub) : Muhammad bin Abdullah.”

4-निष्कर्ष 
हमारे विद्वान्  पाठक अगर यहाँ  दी गयी मुहम्मद और कुरैश  की बातों  को ध्यान से पढ़ें  तो साफ़ पता चल  जायेगा कि कुरैश के आगे मुहम्मद  ने दो बातें  कबूल  की  थीं  ,जो इस प्रकार  हैं ,
1 -अल्लाह  रहमान   रहीम  नहीं  है 
क्योंकि  जब  मुहम्मद  ने सुलहनामे में रहमान  रहीम  लिखवाना  चाहा तो कुरैश  ने आपत्ति  की , और मुहम्मद ने खुद अली को  बिस्मिल्लाह  रहमान अर्रहीम की जगह बिस्मिक  अल्लाहुम्म लिखने का आदेश  दिया  यानि मुहम्मद मुहम्मद  ने मान  लिया की अल्लाह रहमान रहीम  नहीं   है
2.मुहम्मद   अल्लाह का रसूल  नहीं  है 
इसी तरह  जब  मुहम्मद  ने अपने नाम   की जगह मुहम्मद रसूलल्लाह  लिखवाना चाहा तो भी कुरैश  आपत्ति की  ,और कहा की हम  लोग जानते हैं  कि तुम  झूठे  हो  ,  और अपनी पोल खुल  जाने के डर  से मुहम्मद तुरंत  अपना असली नाम लिखवाने  पर राजी  हो गए यानि परोक्ष  रूप  से स्वीकार  कर  लिया की वह  अल्लाह  का रसूल  नहीं  अब्दुल्लाह  का बेटा  है  

5-मुहम्मद  की रसूलियत का भंड़ाफोड़ 
कुरैश के लोगों  ने मुहम्मद को रसूल  मांनने  से इंकार इसलिए किया ,क्योंकि वह मुहम्मद को  और उसकी हरकतों  से अच्छी तरह  जानते  थे  , की इसका उद्देश्य  खुद को अल्लाह  के समकक्ष   साबित करके   अपना राज्य स्थापित  करना  है  ,  और इसके साथी लुटेरे  , और औरतबाज    है  ,  इसके अलावा कुरैश में  ऐसे  भी लोग थे  जिन्हें  तौरेत  और इंजील  का ज्ञान    था  ,  अल्लाह  की इन किताबों  में  रसूल  शब्द कहीं  नहीं  मिलता  ,  इनमे जगह  जगह   नबी  शब्द  आया है   , नबी उन  लोगों  को कहा  जाता  था जो  भविष्यवाणियां   (Prophecy    ) किया  करते  थे  ,  रसूल किस चिड़िया का नाम  होता  है  इस्लाम   से पहले  अरब  में कोई  नहीं  जनता  था ,वास्तव  में रसूल  शब्द  अरबी  नहीं  ,बल्कि इथोपियन  भाषा  से लिया गया  , जो इस्लाम के आने के कुछ साल  बाद  अरबी  शामिल  कर  लिया गया ,
क्योंकि  जब मुहम्मद इथओपिया  गए तो उन्होंने  वहां  के राजा नज्जाशी  की राज व्यवस्था का पता  किया  ,राजा  अपने अधीन  छोटे राज्यों   से संपर्क  करने हेतु अपने दूत भेजता रहता था ,  जो राजा  का आदेश  अधिकारीयों  को  बताता रहता  था  ,  इथोपिया की भाषा   " अहारामी ( Amharic   )   ऐसे लोगों  को रसूल  "प्रवक्ता  (spokeksman)कहा  जाता   था ,  जो अहारामी   शब्द " (ራስ रसु ड़ - *raʾڑ  "  से बना  है  , चूँकि  अरबी में " ड़ " ध्वनि  नहीं  है  ,इसलिए अरब  लोगों  ने इसे "रसुल "  कहना  शुरू  कर  दिया  जो रसूल  बन  गया  मुस्लमान  इसका अर्थ  सन्देश वाहक Messanger   करते  हैं   .जबकि  सारे मुस्लमान  मानते  हैं  कि अल्लाह का सन्देश  यानी कुरान  लाने  वाला जिब्राईल नामका फरिश्ता  था ,  और 24 साल तक  यही काम  करता  रहा,यही कारन  है कि जब कुरान की  114 सूरा  में 111   पूरी हो चुकीं  तो  आखरी  समय मुहम्मद ने  कुरान  में" मुहम्मद  रसूलल्लाह " शब्द  जोड़  दिया ,  इसके पहले कुरान  की किसी  सूरा  या आयत  में मुहम्मद  को अल्लाह  का रसूल नहीं  कहा  गया  , 
 और जब  अल्लाह का रसूल  झूठा है  , तो  इस्लाम  सच्चा  कैसे हो सकता है  ?  

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सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

अल्लाह बड़ा अपराधी है !

(नोट -इस लेख का उद्देश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं है , परन्तु कुरान के नियमों को सत्यापित करना  है   )
इस लेख के शीर्षक  को समझाने  के लिए हमें   काबा संबधी इस्लामी मान्यता  , कुरान में दी गयी फिरौन  और उस पर आयी  हुई आपदाओं और एक साल पहले की सत्य  घटना  को जानना     जरूरी  है
1-काबा क्या  है  ?
मक्का स्थित काबा को अल्लाह का घर माना  जाता है इसलिए उसे  बैतुल्लाह  कहा  जाता है  , मुस्लिम दावा  करते हैं की काबा धरती के केंद्र में है  , इसी लिए काबा में रहकर  एक राजा की तरह शासन चलाता  है  , अल्लाह का नाम "मलिक  " भी  है काबा के बारे में दवा किया  जाता है की अगर काबा के ऊपर कोई हवाई जहाज  गुजरता है तो गिर जाता है  ,और अगर कोई पक्षी उस बैठता  है तो जल  जाता  है क्योंकि काबा में अल्लाह रहता  है .
2-फिरौन  कौन  था  ?
फिरौन  मिस्र  (Egypt  ) का राजा था , इसका काल 1279–1213 BCमाना जाता  है इसका वर्णन  बाइबिल  और कुरान में भी ,अरबी में इसे  "फिर ऑन - فرعون
 " कहा गया  है  , इसका पूरा नाम "रमशीश  सानी -رمسيس الثاني
 " यानि   रमशिश द्वितीय    है ,कुरान  के मुताबिक फिरौन एक अत्याचारी ,निरंकुश  ,उद्दंड  और  पापी था  ,और कुरान के अनुसार  कोई  कितना भी बड़ा हो  अगर  वह घमंडी  ( सरकश ) होकर लोगों  के लिए अहित  के काम करता है तो उसे कई प्रकार की आपदाओं  का  सामना  करना पड़ता  है ,

3-फिरौन पर कौन कौन सी आपदाएं पड़ी 
चूँकि फ़िरौन एक पापी और अपराधी था इसलिए सजा की तौर पर  मिस्र का सम्राट  होने पर भी उसको एक के बाद एक ऐसी कई आपदाओं का सामना  पड़ा  था।  जो उसके घर के आलावा    पूरे शहर को भुगतना पड़ा  था  , यह बात कुरान की सूरा आराफ़ में   इस प्रकार  दी गयी  है ,

मूल अरबी -"أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الطُّوفَانَ وَالْجَرَادَ وَالْقُمَّلَ وَالضَّفَادِعَ وَالدَّمَ آيَاتٍ مُفَصَّلَاتٍ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُجْرِمِينَ "7:133

हिंदी अनुवाद -"उन पर टिड्डियों  का तूफान ,कृमियाँ मेंढक और रक्त की विपत्ति अलग अलग  आन पड़ी , क्योंकि  वह उद्दंड और अपराधी था

Eng-on them the plague pf locusts ,and the vermine and frogs ,a succession of clear signs ,he was arrogant  became sinner and guilty "Quran 7:133

4-काबा  पर कॉकरोच और टिड्डियों  का हमला 
यह  ज्यादा पुरानी घटना नहीं  है  , पिछले ही साल 11 जनवरी   2019 को  करोड़ों  कॉकरोच और  टिड्डियों के दल  में पूरे मक्का  शहर पर अचानक हमला  कर  दिया , जिस से मक्का  शहर ही नहीं बल्कि  काबा  के  चारोँ तरफ  कॉकरोच  और  टिड्डियों   से वह स्थान  भी भर  गया  जहाँ  हाजी तवाफ़  यानि  परिक्रमा  करते  है  ,  आश्चर्य  की बात  तो  यह  है कि जिस  काबा  को मुसलमान  अल्लाह  का घर मानते  है ,और उसे बंद  करके  काले  परदे से ढँक  कर  रखते  हैं ,उसके अंदर भी कॉकरोच   घुस  कर दीवार  पर चढ़ कर फिरने लगे ,इनकी संख्या लाखों  में थी .सऊदी अरब के अंगरेजी  अखबार  अल अरबी में जो खबर प्रकाशित हुई थी उसके अंश  दिए  जा रहे हैं ,
Jan 11, 2019 - A plague of locusts recently attacked the Great Mosque of Mecca, the holiest mosque in Islam
swarms of locust infesting the Great Mosque of Mecca, the holiest in all of Islam. It is the focus of the hajj, the pilgrimage, which draws millions of Muslims a year to Saudi Arabia.There were 138 people working in 22 teams with 111 pieces of equipment to eradicate the insects, according to the statement. 
According to Al-Araby, they said: 'We have harnessed all efforts available to speed up the eradication of the insects in the interest of the safety and comfort of guests to God's house.'  
  
5-पाठक   बंधू   निर्णय करें 

1-जिस अल्लाह के घर  यानि काबा के काफी ऊपर से  ही  उड़ने से  हवाई जहाज नष्ट हो जाता है , तो उसके अंदर दीवार पर चढ़े हुए कॉकरोच नष्ट  क्यों नहीं हुए ?
जब  कुरान  की आयत पढ़ने  से शैतान भाग  जाता  है तो
काबा   के मुख्य  इमाम ने कुरान की कोई आयात  पढ़  कर कॉकरोच  और टिड्डियों  को क्यों  नहीं भगा  दिया  ?
2-कुरान के अनुसार  फिरौन  काफिर  और अपराधी  था ,इसलिए   उसपर और उसकी प्रजा पर  टिड्डियों  और   कीटों   की विपदा  आयी  थी  , लेकिन मक्का  के अंदर सभी  कट्टर सुन्नी है  , कोई काफिर  या गैर मुस्लिम नहीं  है   , फिर काबा  के अंदर बाहर पूरे मक्का में  अचानक इतने  कॉकरोचों  और टीडियों की  भरमार  क्यों  हो गयी  , ?
इन  सभी तथ्यों  से यही निष्कर्ष निकलता  है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान  नहीं है  ,जो टीडियों और कॉकरोच   से अपना  घर  और मक्का को नहीं  बचा  पाया  वह मुसलमानों  को किसी विदेशी हमले से कैसे बचाएगा   ? 
 असल  बात  तो यह  है कि खुद  अल्लाह  ही बड़ा  अपराधी  है  ,क्योंकि  ऐसी आपदाएं  तो अपराधियों  पर ही पड़ती  है  !
या फिर मान लिया  जाए  कुरान  झूठी  और अल्लाह कल्पित  है  

Reality Behind Makkah Locust Attack or Cockroach Attack

https://www.youtube.com/watch?v=40SQrJY5Xa0

(428 )

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

सेकुलर और मुसलमान क्या चाहते हैं ?

सेकुलर शब्द विदेश से आयातित और सबसे अधिक भ्रामिक शब्द है .इसलिए भारत की किसी भी भाषा में "सेकुलर " के लिए कोई समानार्थी और पर्यायवाची अर्थ नहीं मिलता है .लेकिन कुछ चालाक लोगों ने हिंदी में " सेकुलर " का अर्थ " धर्मनिरपेक्ष " शब्द गढ़ दिया था .यदपि इस शब्द का उल्लेख न तो किसी भी धर्म के ग्रन्थ में मिलता है और न ही इसकी कोई परिभाषा कहीं मिलती है .और फिर जब " सेकुलर "शब्द का विपरीत शब्द " सम्प्रदायवादी "बना दिया गया तो यह शब्द एक ऐसा अमोघ अस्त्र बन गया कि अक्सर जिसका प्रयोग हिन्दुओं प्रताड़ित उनको अपराधी साबित करने ,उन पर पाबंदियां लगाने के लिए किया जाने लगा .
इसका परिणाम यह हुआ कि खुद को सेकुलर बताने वाला बड़े से बड़ा अपराधी , और भ्रष्टाचारी लोगों की दृष्टि में दूध का धुला बन गया .और मोदी जैसे हजारों देशभक्त अपराधी लगने लगे .बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि इमाम बुखारी जैसे अनेकों कट्टर मुस्लिम नेता भी " सेकुलरिज्म " की वकालत करने लगे .सेकुलरों और मुसलमानों के इस नापाक गठबंधन का रहस्य समझने के लिए कुरान का सहारा लेना जरुरी है ,

1-सेकुलरों के लक्षण 
यद्यपि न तो अरबी में सेकुलर के लिए कोई शब्द है , और न कुरान में सेकुलर लोगों का उल्लेख है , लेकिन कुरान में सेकुलरों के जो लक्षण बताये हैं वह वर्त्तमान सेकुलर नेताओं पर सटीक बैठते है ,
"जब यह लोग मुसलमानों के साथ मिलते हैं , तो उन से कहते है कि हम भी ईमान वाले हैं . और जब एकांत में अपने नेताओं से मिलते हैं ,तो उन से कहते हैं कि हम तो तुम्हारे साथ है .हम तो मुसलमानों से मजाक करते हैं " सूरा -बकरा 2 :14 
"हे नबी यह मुनाफिक ( सेकुलर ) जब तुम्हारे पास आते हैं ,तो कहते हैं कि हम मानते हैं कि आप अल्लह के रसूल हो . लेकिन यह लोग सभी के सभी झूठे हैं "
सूरा -अल मुनाफिकून 63 :1 
" यह लोग कसमें खाते हैं कि हम तो तुम्हीं में से हैं .जबकि वह किसी के साथ नहीं होते हैं "
 सूरा -तौबा 9 :56 
कुरान में बताये यह सभी लक्षण उन सेकुलरों में मिलते हैं , जिनको कुरान में " मुनाफिक مُنافق" यानि Hypocretes "और हम दोगला कह सकते हैं .ऐसे लोग किसी के मित्र नहीं होते .

2-मुसलमानों की नीति 
मुसलमान अपने स्वार्थ के लिए सेकुलरों का सहयोग करते है ,लेकिन कुरान के इन आदेशों का पालन करते हैं , जैसे ,'
" तुम अपने धर्म के अनुयाइयों के अलावा किसी किसी पर भी विश्वास नहीं करो "
सूरा - आले इमरान 3 :73 
" तुम अपने लोगों के आलावा किसी को भी अपनी गुप्त योजनाओं के बारे में सच नहीं बताओ "
 सूरा -आले इमरान 3 : 318 
" समझ लो कि यह सब काफ़िर एक दूसरे के संरक्षक और मित्र हैं "सूरा-अल अनफाल 8 :73 
( अर्थात सभी काफ़िर एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं )
" तुम इन काफिरों और मुनाफिकों का आदेश कभी नहीं मानना " सूरा अल अहजाब 33 :1
"तुम इन दोगली बातें बोलने वालों का कहना नहीं मानना .यह तो चाहते ही कि तुम किसी भी तरह से अपने इरादों में ढीले पड़ जाओ .और उनकी बातों में फंस जाओ " सूरा -अल कलम 68 : 8 -9 
" तुम कभी दोगले लोगों के बहकावे में नहीं आना " सूरा -अद दहर 76 :24 

3-मुसलमानों का ढोंग 
जो मुस्लिम नेता सेकुलर होने का पाखंड करते हैं ,और यह कहते हैं कि हम तो सभी लोगों को समान मानते हैं . और सबकी भलाई चाहते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि मस्जिदों में नमाज के बाद ऐसी दुआएं मांगी जाती है , जैसे ,
"ईमान वालों के लिए उचित नहीं है कि वे मुशरिकों ( मूर्ति पूजकों ) की भलाई के लिए क्षमा ,प्रार्थना करें , चाहे वह उनके मित्र या रिश्तेदार ही क्यों नहीं हों .क्योंकि यह भड़कती हुई आग वाली जहन्नम में जाने वाले हैं "
सूरा -तौबा 9 :113

"
 مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُوْلِي قُرْبَى مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ "

Sura Taubah -. (9:113)
"हमें काफ़िरों के मुक़ाबिले में नुसरत अता फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :250

" وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
अब काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :286 

"فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ"

"काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा। "आलि इमरान 3: 147

" وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ  "

यह और ऐसी कुरानी दुआएं नमाज के साथ और बाद में की जाती हैं ,इन से मुसलमानों के इरादों का पता चलता है .
4-मुसलमानों का लक्ष्य 

आज सेकुलर और मुसलमान इसलिए साथ है ,क्योंकि सेकुलर मुसलमानों के वोटों से अपनी सत्ता बचाए रखना चाहते हैं . और मुसलमान सेकुलरों के सहारे इस देश में इस्लामी राज्य की स्थापना करना चाहते है .जैसा कि कुरान में कहा है .
" तुम गैर मुस्लिमों से तब तक युद्ध करते रहो , जब तक उनका सफाया न हो जाये , और  अल्लाह का धर्म ही बाकी रह जाये "
 सूरा -बकरा 2 :193 
इन तथ्यों से सिद्ध होता है कि मुसलमान सेकुलरों का साथ तबतक देते रहेंगे जब तक उनकी संख्या इतनी हो  जाए    कि अधिकांश प्रान्तों में उनकी सरकारें बन जाएँ .और यदि ऐसा हो गया तो मुसलमान इन सेकुलरों को भी नहीं छोड़ेंगे .
याद रखिये जिन मुसलमान बादशाहों ने हुमूकत के लिए अपने बाप , और मुहम्मद के परिवार के लोगों जिन्दा नहीं छोड़ा वह मुनाफिक सेकुलर लोगों को कैसे जिन्दा रहने देंगे ?

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