मंगलवार, 21 नवंबर 2017

मुल्लों का सफ़ेद झूठ - कुरान में कोई शक नहीं !!

 मुल्ले मौलवी  वैसे तो दावा  करते रहते हैं  कि हम संविधान और न्यायपालिका पर विश्वास रखते हैं  , और कानून का सम्मान करते हैं  ,लेकिन  अक्सर देखा  गया  है कि जब  भी  अदालत कोई ऐसा निर्णय देती है  , या सरकार कोई ऐसा कानून बनाती है  जो  कुरान के विपरीत होता है  ,तो यही मुल्ले मौलवी तुरंत उसका विरोध  करने  लगते  हैं ,और  कहते हैं  की हम  अदालत और संविधान  में से अल्लाह की किताब  को  ही मानेंगे ,यह बात शाहबानो  केस  और सुप्रीम कोर्ट  के तीन  तलाक  वाले फैसले  से सिद्ध  होता है  ,
 हम  यह लेख इसलिए  दे रहे  हैं  कि दिनांक  17 नवम्बर  2017 शुक्रवार  को  सुदर्शन  चैनल  पर बिंदास  बोल  कार्यक्रम  पर  एक बहस  हुई  थी  , जिसमे  प्रसिद्ध  विद्वान्  श्री धर्मपाल  जी आर्य  और  गरीब  नवाज  फाउंडेशन  के अध्यक्ष  मौलाना  अंसार  रजा  में  बहस  हुई  , मौलाना  ने बड़े  गर्व  से कहा  कि दुनियां   में सिर्फ  कुरान  एक  ऐसी  किताब  है  ,जिसमे  कोई  शंका  नहीं  है ,और  सबूत के  लिए कुरान  की सूरा बकरा  की पहली  आयात   सुना  दी .  क्योंकि महेंद्रपाल  जी पहले मौलवी थे और  अरबी  जानते  हैं  ,इसलिए उन्होंने  अंसार रज़ा  के दावे का खंडन   कर  दिया  , लेकिन  अधिकांश  श्रोता  ऐसे थे  इस  बात  को ठीक  से नहीं  समझ  सके  , इसलिए  इस लेख  के माध्यम  से हम  अंसार रजा से  पूछते हैं  कि वह  कुरान   के बारे  इन शंकाओं  का उत्तर   दें ?ताकि   सभी लोग  जान  सकें  ,  मौलाना ने  दावा किया  की कुरान में कोई शंका नहीं  , और  यह  आयत  पेश  की ,


ذَٰلِكَ الْكِتَابُ لَا رَيْبَ فِيهِ هُدًى لِلْمُتَّقِينَ-सूरा  बकरा  -2:1

अरबी में  है  " जालिकल किताब   ला रैब  फ़ीहि  हुदन लिल मुत्तक़ीन "2:1

कुरान  के अधिकांश अनुवादों   में  इस आयत  का   लगभग  यही  अर्थ  दिया  जाता   है
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है (2:1)

लेकिन  कुरान   की  यह  आयत  ही  शंकाएं  पैदा  करने वाली  है  ,
पहली शंका यह है  कि आयत में इस कुरान को "जालिक अल किताब  " कहा  गया है  , अरबी  शब्द   "जालिक - ذَٰلِكَ   " का अर्थ "वह ( that ) होता  है  व्याकरण  के अनुसार masculine singular demonstrative pronoun  है  और अरबी में اسم اشارة  कहते हैं .

इसलिए यदि  इस आयत में मौजूदा कुरान  अभिप्रेत  होती  तो अरबी में "हाजा هذه-" शब्द दिया गया होता ,इसका अर्थ   यह (this ) होता  है  , इस से सिद्ध  होता  है कि यह वर्त्तमान कुरान नकली है  , और वह  असली कुरान कहीं   और होगी .

दूसरी शंका  इस आयत में दिए गए अरबी  शब्द  "मुत्तकीन - مْتّقين  "   से  होती  है  , मुल्ले  इसका अर्थ  परहेजगार  यानि संयमी  करते  हैं  ,  वास्तव  में  यह  शब्द  अरबी शब्द "मुत्तक़ी -مُتّقي "  का बहुवचन   (Plural )   है  , जो अरबी शब्द की मूल धातु (Root Verb )"इ त्क -اتق "  से  बना है  , इसका अर्थ  "डर  ,भय (fear  ) होना  है , चाहे किसी का भी डर  हो  , उदाहरण के लिए कुरान  में नर्क की आग से डरने  को  कहा गया है


وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ-सूरा आले इमरान 3:131
 
अरबी  में " फत्तकू नारु ल्लती उइद्दत लिल  काफ़रीन "3:131


अर्थ  -उस आग से डरो  जो  को काफिरों  के लिए तैयार  है

(Quran-3: 131)-Fear the Fire, which is prepared for:.non believers

इसी  तरह  इस आयत में "ई त्क -اتَّقِ "  शब्द  का प्रयोग जहन्नम  के डर    के बारे में  किया गया  है  , देखिये

(2:206:4) ittaq Fear وَإِذَا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ

इस प्रकार से  जिन  मौलवी ने श्री महेंद्र पाल  आर्य के सामने  कुरान  की जिस  सूरा बकरा  2: 1 आयत  पेश करके यह साबित करने का प्रयास  किया की कुरान में किसी प्रकार की शक और शंका  नहीं  है  , उस आयात का व्याकरण  सम्मत यह  अर्थ  है 

"इसमें शक  नहीं , वह किताब  है  ,  डरपोक लोगों  को राह पर लाने  वाली  "

अतः  किसी  को भी शक नहीं होगा   क्योंक  सब  जानते हैं कि  मुसलमानों  ने हमेशा गैर मुस्लिमों  को डरा डरा कर  ही इस्लाम  कबूल कराया   था ,


इन  प्रमाणों  से स्पष्ट होता है  कि मुसम्मानों  के पास जो कुरान है वह  डुप्लीकेट  है  यानि मुहम्मद  ने   किसी मूल((original  कुरान  से कुछ  अंश  उतार  लिए  थे  ,
शायद  इसीलिए मुल्ले कहते हैं कि कुरान ऊपर से उतरी है

  इसी लिए शिया  कहते  हैं  कि मौजूदा कुरान  अधूरी  और  फर्जी  है 

1-असली  कुरान  कहाँ  है  ?
इस प्रश्न  को उत्तर  मौजूदा कुरान  की सूरा  राद 13:39  में दिया  गया  है  ,

وَعِنْدَهُ أُمُّ الْكِتَابِ  "13:39

अरबी में -इन्दहु  उम्मुल  किताब  
चूँकि मौजूदा कुरान की सूरा बकरा  -2:1  में कुरान  को" वह  किताब "  बताया गया है  ,इसलिए मुस्लिम विद्वानों   ने बड़ी चालाकी से इस आयत का यह  अर्थ कर दिया

 और उसके पास असल किताब (लौहे महफूज़) मौजूद है (13:39)

 लेकिन  ऐसा अर्थ करके मुल्ले खुद फंस गए और शंका होने लगी कि जब असली किताब उसके पास है ,तो "वह" कौन  है  , और असली किताब  किसके पास है ?

वास्तव  में सूरा राद 13: 39  का सही अर्थ यह  है ,

"और उसके पास किताब की माता  है "
Eng-with Him is the Mother of the Book 


and with Him-  3rd person masculine singular possessive pronoun


इन तथ्यों  से शंका  होती है  की सचमुच असली कुरान यानी किताब की माता किसके पास है  "
 1 - यदि खुद अल्लाह के पास होती तो इस आयत में लिखा होता " इंदी  उम्मुल  किताब  -عِندي  أُمُّ الْكِتَابِ  "

2 -अगर रसूल  के पास होती  तो लिखा होता "इन्दर्रसूल उम्मुल किताब

عِند الرّسول أُمُّ الْكِتَابِ 

3-और अगर   दौनों  के पास होती तो लिखा होता -इंदिना   उम्मुल  किताब -عِندنا   أُمُّ الْكِتَابِ  

लेकिन मौजूदा कुरान  की सूरा राद  में यह  तीनों  बातें नहीं  है  , इस से साफ पता चलता है की कुरान की माता  यानी असली कुरान यानी (Hard Disc  )   न तो अल्लाह के पास  है , और न रसूल के पास थी  , बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के पास रही होगी  , जो खो गयी होगी  ,
 इसलिए  हम  मौलाना अंसार रजा  से  गुजारिश  करते  हैं  कि वह  बराये मेहरबानी  हमारा शक  दूर करें  कि  कुरान  की अम्मा  कहाँ  गयी ?और आप मुसलमानों  को नकली कुरान  पढ़ा पढ़ा  कर गुमराह  क्यों  करते  रहते  हो  , ? या  आप  लोग  यह  दावा  करना छोड़  दो कि मौजूदा कुरान  में कोई  शक  नहीं  है

नोट -हमारी  सभी मुल्ले  मौलवियों को चुनौती हैं  इस  लेख  के सबूतों को गलत सबित कर के दिखाएँ 

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