रविवार, 3 दिसंबर 2017

कुरान की सम्पूर्णता संदिग्ध है !

आज  हमें इस बात को  स्वीकार  करना  होगा कि  इस्लाम   सम्पूर्ण   मानव  जाति के अस्तित्व  के लिए खतरा   बन  गया  है  ,क्योंकि   इस्लामी  आतंकवादी जो  क्रूर ,  नृशंश  और  अमानुषिक   कार्य   कर   रहे  हैं उन्हें  देख कर  लोगों  में इस्लाम   से नफ़रत    होने  लगी  है  , जैसे  लोगों   को  जिन्दा  जला  देना   ,  पानी में  डूबा  देना   , बम  से उड़ा  देना  इत्यादि , चूँकि  आतंकी यह काम इस्लाम  के नाम  पर और कुरान की  शिक्षा  से  प्रेरित  होकर  करते   है   ,इसलिये  बाक़ी  मुस्लिम  इसका  विरोध  नहीं  करते  , उलटे कहते  हैं  कि  , तालिबान मुसलमान नहीं है, आइसिस वाले मुसलमान नहीं हैं, बोको हरम मुसलमान नहीं हैं. ये सब भटके हुए हैं इनको देख कर इस्लाम धर्म को परिभाषित नहीं किया जा सकता है,   फिर बताओ पैगम्बर के बाद से जो लोग चले आ रहे हैं उनको क्या बोला जाएगा? जिन लोगों ने खलीफाओं को मारा मुसलमान थे.. जिन लोगों ने पैगम्बर के पूरे खानदान का खात्मा कर दिया  क्या   वह  हिन्दू  ,यहूदी   या  ईसाई  थे ?
जो  मुसलमान  कहते  हैं   कि ओसामा और आइसिस अब आये हैं दुनिया में तो  उनको चाहिए  इस्लाम   का  इतिहास  ठीक  से  पढ़ें क्योंकि  आतंकी  जिस  कुरान के आदेश पर  रोज  हजारों  निर्दोष  लोगों  को   मार  रहे  हैं ,सबसे पहले  उसी  कुरान  के  कारण ही  मुसलमानों  में  खूनी   युद्ध  हुआ   था जो   आज इस्लामी आतंक  के  रूप में  पूरे  विश्व  में  फ़ैल  गया  है  , क्योंकि   मुसलमान 
हमेशा  सत्ता प्राप्ति  के  लिए कुरान  का  अनर्थ (  Mis interpretation). करते   आये  हैं  .इसका  पहला  उदहारण  "सिफ़्फ़ीन  " का  युद्ध (Battle of Siffin )   है

1-कुरान का  भ्रष्टीकरण और सिफ़्फ़ीन  का युद्ध 

इस्लामी इतिहासकार  " सिफ़्फ़ीन  - صفين‎" के  युद्ध (Battle )   को इस्लाम   का  पहला " फ़ित्न - فتن  " कहते  हैं इसका  मतलब राजद्रोह, नागरिक संघर्ष होता है .यह  युद्ध  सन  657  ईस्वी   में मुहम्मद  साहब   के  दामाद   और  चचेरे  भाई  अली  इब्न  अबी   तालिब  और   मुआविया   बिन  अबी  सुफ़यान  की  सेना  के बीच   हुआ  था  , क्योंकि उन   दिनों  अरब  के  कबीलों   के  सरदार  सत्ता  में   हिस्सा  पाने के लिए  मुसलमान  बन  गए  थे   , उन  दिनों  पूरी  कुरआन   जमा नहीं   हो  सकी   थी   ,  लोग  अपने  लाभ के  लिए   कुरान का  मनमाना   अर्थ    कर  रहे थे   ,मुआविया   भी  यही  कर रहा  था   , और  अली  इसका  विरोध  कर  रहे  थे  ,इसी   कारण  से  ईराक    की " अल रिक्का  - الرقة‎  "  नामकी    जगह  पर  अली   और  मुआविया  की सेना में  युद्ध   हुआ   ज़िस्मे मुआविया   के 45,000  और  अली   के 25,000 सैनिक    मारे   गए।  यद्यपि    युद्ध   से   पहले  अली   ने  मुआविया  को   पत्र  द्वारा सचेत  कर दिया  था। पत्र  इस   प्रकार   है

2-अली   का   पत्र न - 55

"तुमने  पवित्र  कुरान   का  अनर्थ  करना  शुरू   कर  दिया    है  ,और कुरान के गलत  अर्थ  के  आधार  पर  तुम सत्ता  और   दौलत पर  कब्जा   लिया है ,तुम लोगों  को  सता  कर  आतंकित   कर रहे   हो  , तुम्हारा सबसे बड़ा   पाप   यह है कि तुमने  मुझे  खलीफा  उस्मान  की  हत्या   का जिम्मेदार  बता दिया  है    ,जबकि मेरी  जुबान   और   हाथ  दौनों   इस  काम  में   निर्दोष   हैं    ,  इसलिए  अल्लाह  से डरो , कहीं  ऐसा न हो कि  शैतान  तुम्हें  जहाँ  चाहे   वहां  खदेड़  दे "

ومن كتاب له عليه السلام

إلى معاوية

أَمَّا بَعْدُ، فَإِنَّ اللهَ سُبْحَانَهُ [قَدْ] جَعَلَ الدُّنْيَا لِمَا بَعْدَهَا، وَابْتَلَى فِيهَا أَهْلَهَا، لِيَعْلَمَ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلاً، وَلَسْنَا لِلدُّنْيَا خُلِقْنَا، وَلاَ بِالسَّعْيِ فِيهَا أُمِرْنَا، وَإِنَّمَا وُضِعْنَا فِيها لِنُبْتَلَى بِهَا، وَقَدِ ابْتَلاَنِي [اللهُ] بِكَ وَابْتَلاَكَ بِي: فَجَعَلَ أَحَدَنَا حُجَّةً عَلَى الاَْخَرِ، فَعَدَوْتَعَلَى طَلَبِ الدُّنْيَا بَتَأْوِيلِ الْقُرْآنِ، فَطَلَبْتَنِي بِمَا لَمْ تَجْنِ يَدِي وَلاَ لِسَانِي، وَعَصَيْتَهُ أَنْتَ وأَهْلُ الشَّامِ بِي، وَأَلَّبَعَالِمُكُمْ جَاهِلَكُمْ، وَقَائِمُكُمْقَاعِدَكُمْ.

فَاتَّقِ اللهَ فِي نَفْسِكَ، وَنَازِعِ الشَّيْطَانَ قِيَادَكَ وَاصْرِفْ إِلَى الاَْخِرَةِ وَجْهَكَ، فَهِيَ طَرِيقُنَا وَطَرِيقُكَ. وَاحْذَرْ أَنْ يُصِيبَكَ اللهُ مِنْهُ بِعَاجِلِ قَارِعَةٍتَمَسُّ الاََْصْلَ وَتَقْطَعُ الدَّابِرَذص، فَإِنِّي أُولِي لَكَ بِاللهِ أَلِيَّةًغَيْرَ فَاجِرَةٍ، لَئِنْ جَمَعَت الاََْقْدَارِ لاَ أَزَالُ بِبَاحَتِكَ.

You began by misinterpreting the Holy Qur'an and on the basis of these misinterpretations you started grasping power and wealth and began oppressing and tyrannizing the people. Your next unholy action was to call me responsible for an action (murder of Caliph Uthman) of which my tongue and hands were both innocent.Fear Allah and do let Satan drive you wherever it wants, "

अली की  हत्या  के बाद ही   मुस्लिम   शासकों   ने कुरान  में   काटछांट    , हेराफेरी   करके  अपने अनुकूल   बनाना  शुरू   कर दिया  था  ,किसी ने कुरान   की पूरी की सूरा (Chapters )   गायब  कर  दी   ,  तो  किसी   ने  कुरान  की  आयतें   कम   कर दीं , और किसी  ने  अपने मर्जी से  कुछ  आयतें  जोड़   डालीं


3-कुरान  की अप्रामाणिकता 
अल्लाह ने   कुरान  के बारे में  दावा किया  है  ,

"बेशक यह  कुरान   हम   ने ही  उतारी  है  ,और   हम ही  इसकी  हिफाजत करने  वाले   हैं  "
 सूरा  -अल हिज्र 15:9 


"إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ  "15:9

"Indeed, it is We who sent down the Qur'an and indeed, We will be its guardian."15:9

मुसलमान   दावा  करते   हैं कि  कुरान  अल्लाह  द्वारा  भेजी   हुई   आसमानी  किताब  है  जिसमे रत्ती  भर भी    बदलाव    होना  असंभव   है ,गुजरानवाला    निवासी  इस्लाम   के विद्वान  "मुंशी   महबूब  आलम  -  مُنشی محبوب آلم  " ( 1863-1933   )  ने " इस्लामी इनसाइक्लोपीडिया -اَسلامی انسایکلوپیڈیا " के पेज न 559 पर  जानकारी  दी  है  कि  इस  समय दुनिया में 6 प्रकार की कुरान है सभी कुरान एक दूसरे से अलग अलग है और उनकी आयतो की संख्या भी अलग अलग है और सभी कुरान को मानने वाले एक दूसरे की कुरान को ग़लत कहते है.
इनका  विवरण  इस  प्रकार   है ,

1. कूफी कुरान...आयत 6236 
2. बशरी कुरान...आयात 6216 
3. शयामि कुरान...आयत 6250 (Shami or Damascus Quran )
4. मक्की कुरान...आयत 6212 
5. ईराकी कुरान...आयत 6214 
6. साधारण कुरान (आम कुरान)...आयत 6666  (most common these days )

Video-Watch: Corrupt Quran (URDU) Challenge to Zakir Naik by Rev. Dr. Samie Samson - Apnieyesp
Published: 1 year ago By: TheEICM

http://apnieyesp.com/watch/q5gfLpb6vio

इन  सबूतों    हजरत   अली  की   बात सही   साबित होती है कि अली के बाद भी  मुस्लिम    शासकों   ने   अपनी  सत्ता फैलाने   या  बचाये  रखने के लिए इच्छानुसार   कुरान   की  आयतें   कम  या अधिक   कर  दी  थीं   . जो  आयतें  उनके  फायदे की  होती  थीं  उन्हें रहने  देते  या  जोड़   देते  और जो उनके  फायदे  की   नहीं  होती  उन्हें  निकाल  देते   थे  ,    कुरान  की  शिक्षा   से  मुसलमानों ने  दुनिया दो हिस्सों में बाँट रखी है. एक मुस्लिम समाज और दूसरा गैर मुस्लिम समाज.  अब सब लोग समझ चुके हैं. काफिर, मुशरिक, मुनकिर. अब लोगों को समझ आ गया है. अब बच्चा बच्चा जानता है कि काफिर किसको कहते हैं  ,   अल्लाह को एक मानने से नहीं. अल्लाह को एक मनवाने के लिए नहीं  यह  आतंकवाद  सत्ता    प्राप्ति के लिए  हो रहा   है .

जब  वर्त्तमान   कुरान  की  प्राचीन  प्रतियों   में  आयतों   की  संख्या  अलग   दी  गयी   है  तो ऐसी  संदिग्ध  कुरान  के  आधार पर  जिहाद  करना  या  आतंक  फैलाना मूर्खता   नहीं  तो  और  क्या   है ?

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