शनिवार, 8 दिसंबर 2018

मुसलमान भी हिन्दू नामों पर गर्व करते हैं ?

अरब   देश  इस्लाम   की  जन्मभूमि   है  ,  और  वहीँ  से इस्लाम पहले अरबी  भाषी  देशों  से  सारे देश  में  फ़ैल  गया  , इसलाम  की  दृष्टि  में  अन्य  सभी  धर्म निकृष्ट  और  अमान्य   हैं   ,  सिर्फ इस्लाम  ही  सच्चा  धर्म  है  ,  इस्लाम  गैर मुस्लिमों  को  काफिर   मानता है  ,  इस्लाम  का उद्देश्य गैर   मुस्लिमों  को  मुसलमान   बनाना  है  ,  और  जहाँ  भी  मुसलमानों  की हुकूमत  होती   है  , मुसलमान  उस जगह  से गैर मुस्लिमों  की हरेक  निशानी  नष्ट  कर  देते  हैं  , यहाँ  तक जब   वह  किसी   को  मुसलमान  बनते  हैं  ,  तो  सबसे  पहले  उसका  इसलामी   नाम  रख  देते   हैं   , आज भारत में  जितने   भी मुसलमान  है  , उनके  पूर्वज  कभी  हिन्दू  ही  थे  ,लेकिन  इन  मुसलमानों  के  नामों   में हिन्दू  बोधक  कोई  शब्द   नहीं  है    , 
 परन्तु   बहुत  कम  लोग जानते  होंगे  की   इस्लाम  से  काफी  पहले  अरब  लोगों  में बच्चों  के ऐसे   नाम  रखना  इज्जत  की  बात  मानी   जाती  थी   जो भारत "  अल  हिन्द -  " हिन्दू  जाति " अल  हिन्दू  -  "  के  द्योतक  हों  , सुखद  आश्चर्य  तो  यह   है  कि   अरबी  मुसलमानों  में  तब से  लेकर  आजतक  हिन्दू   बोधक  नामों  की  परंपरा  अक्षुण्ण   है .


1-अरबी  इतिहास में  हिन्दू   नाम 

अरबी  इतिहास में  सबसे   मुख्य  हिन्दू  नाम  " शैव्यः - شيبة  "  यह  मुहम्मद   साहब  के  दादा (Grand Father)  के  पिता  थे   , और  काबा  के पुजारी  थे  ,

दूसरा  नाम "हिन्द - هند "  है  , इसका  अर्थ  भारती  होता   है  ,  इसे "हिन्दुल   हिनूद -  هند الهنود  " भी   कहा   जाता   है  ,  यह  उतबा  की बेटी  और रिस्ते में  मुहम्मद  साहब  की  सास (mother in llaw )   थी  , क्योंकि  इसी  की  बेटी  " रमला -رملة  "  रसूल   की  पत्नी   थी   ,  " हिन्द  "  कवि  होने के साथ    योद्धा भी   थी   , और  जब  सन  636 ई ०  में  ईसाइयों  और  अरबों  में "यरमूक -اليرموك  " नामकी  जगह  युद्ध  हुआ  था   ,  तो  हिन्द ने अपने  लोगों  का  हौसला   बढ़ने  के  लिए जो  कविता  सुनाई   थी   ,  उसके  वह  अंश  दिए   जा  रहे   हैं   जिनमे  स्पष्ट  रूप  में  हिन्दू  शब्द   आया है  , कविता   यह  है   , 

"أتاك سهيل وابن حرب وفيهما رضاً لك يا هند الهنود ومقنع
وما منهما إلا يعاش بفضله وما منهما إلا يضر وينفع

"हे  भारत   के  बेटे  हिन्दुओ आगे आकर हमला   करो  , तुमने नाक में  दम  करने वाले  जिन  दो विरोधियों को ठिकाने  लगा  दिया   उस  से  मुझे   संतोष   हुआ  , "
2-वर्त्तमान   में  हिन्दू बोधक  नाम 

आज   भी अरब  और अरबी  भाषी  क्षेत्रों  के  लोग  लड़कों  के  नाम मोहन्नद (مهند, Mohannad) या मुहन्नद या मोहनद रख   कर   गर्व  महसूस  करते   हैं ,'मोहन्नद' नाम वास्तव में 'अल-हेन्द' यानि भारत (हिन्द) के नाम पर पड़ा है,इसे  अरबी   में "مهند‎) "लिखा जाता है   ,  परन्तु  अरबी  में  मात्राएँ  नहीं  होने  से इसे "Mhannad, Mohand, Mohanad, Mohanned, Mohaned, Muhannad, or Muhanned" भी  बोला जा  सकता  है  . याद  रखिये  इस शब्द  का  " मुहम्मद -محمّد   " शब्द  से कोई   सम्बन्ध  नहीं   , इसका सम्बन्ध  केवल   हिन्द ( भारत ) और  हिन्दुओं   से  है उदहारण  के लिए  कुछ  प्रसिद्द  वयक्तियों   के  नाम  और परिचय दिए   जा  रहे हैं 

अ- मुहिन्निद

 
1-मुहिन्निद महदी अल नदवी- Mohannad Mahdi Al-Nadawi  -(  مهند مهدی الندوی  )      (born 1975), Iraqi footballer

2- मुहिन्निद  नासिर- Mohannad Nassir- (   مهند ناصر   ) (born 1983), Iraqi footballer

3- मुहिन्निद इब्राहीम - Mohannad Ibrahim-   (   مهند إبراهيم علي إبراهيم‎  )born 1986), Syrian footballer

4-मुहिन्निद  महारमा -Mohannad Maharmeh ( مهند المحارمة  ) born 1986), Jordanian footballer

5-मुहिन्निद अब्दुल रहीम -   Mohannad Abdul-Raheem- ( مهند عبد الرحيم كرار  )     (born 1993), Iraqi footballer

इसी  से   मिलता  जुलता  नाम "मुहिन्नद"(Muhinnad) है , जो अरबी में एक जैसे  लिखें जाते हैं  ,लेकिन उच्चारण में  थोड़ा अंतर है ,जैसे ,

 ब -  मुहिन्नद     

 1-मुहिन्नद सैफुद्दीन -   Muhannad Saif El-Din-(مهند سيف الدين  )       (born 1980), Egyptian fencer
   
2-  मुहिन्नद   अल  ताहिर -  Muhannad El Tahir-  (مهند الطاهر   )  (born 1984), Sudanese footballer 

3-मुहिन्नद   नईम   - Muhannad Naim - ( مهند نعيم  )    (born 1993), Qatari footballer


 इसके अतिरिक्त  चौंकाने वाली   बात  यह   है कि अरबी भाषी  देशों में मुसलमानों  के हिंदू    द्योतक  उपनाम ( Surname) भी  पाये  जाते  हैं  ,जैसे,

स-उपनाम 
   
1-मुस्तफा अब्दुस्सलाम मुहिन्निद-Mustafل Abdelsalem Mohand -( مُصطفي عبدالسلام مُهِنَّد )    (born 1975), Spanish footballer

यह  सभी   नाम और  उपनाम जिन  से  हिन्दू  , जाति , हिन्दू धर्म  और   भारत का स्पष्ट  बोध  होता   है  , अरबी भाषी विभिन्न  देश इराक , मिस्र ,सीरिया  , लेबनान , जॉर्डन  और ,क़तर   से  लिए  गए   हैं . और यह  सभी  अपने इन  हिन्दू   बोधक  नामों   पर   गर्व  करते   हैं   , जबकि  भारत के मुसलमान   हिंदुत्व  बोधक   नाम  रखने को गुनाह  मानते  हैं   ,

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3 टिप्‍पणियां:

  1. जब हिन्दुओं ने पक्ष मे युद्ध किया और दादा हिन्दू था तो नफरत का कारण समझ नही आ रहा कभी पोस्ट करें

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  2. अरबाबी प्रतिनिधि मंडल तक्षशिला (पाकिस्तान) आ ही पहुंचा, ढोल पीटते हुये- सुनो सुनो सुनो. जरुरत है जरुरत है सक्त जरुरत है. ऐसे लोगों की जो अरबाबो के नियंत्रण में रहे. जो अरबाबो के पुच्छले बने, अरबाबो को अपना आका माने, अरबाबो को अपना मालिक माने, अरबाबो का झंडा लेकर नाचे, अरबाबो का गुणगान करे, अरबाबो के लिए जिए, अरबाबो के लिए मरे, अरबाबी साम्रज्य विस्तार के लिए अपना तन मन धन लगा दे, अरबाबो की हवस के भूक मिटाने के लिए सौतनों के झुण्ड में अपनी बेटी छोड़े दे, अरबाबो के खूंटे से बंधे रहे, अरबाबो की दाड़ी के नकल करे, अरबाबो की लुंगी की नकल करे, अरबाबो की टोपी की नकल करे, अरबाबो के नाम रख ले. अरबाबो का काम करे. अरबाबो के चौखट में रहे. सुबह उठते ही अरबाबो की दिशा में माथा टेके, रात को सोने से पहले एक बार फिर अरबाबो की दिशा में माथा टेक कर सो जाये. अरबाबो के वफादर बन कर रहे. लकीर का फकीर बने, प्यारे पाकियों, हम अरबाब आपको नकली अरबाब बनने की दावत देते है. आओ, अपनी मातृसंस्कृति के गद्दार बन जाओ, मातृसंस्कृति का सौदा करने वाले भड़वे बन जावो, घर के भेदी बन जावो, अपनी मातृसंस्कृति की निर्मम हत्या कर डालो. मातृसंस्कृति को संग्रहालय तक पहुंच दो. नष्ट कर दो. अपना नाम छोड़ दो, अपनी दाड़ी छोड़ दो, अपने धर्म ग्रंथो को जला दो, अपने पूजा स्थलों को तोड़ दो, हमारी नकल करो, अपनी पहचान छोड़ दो, अपना अस्तित्व मिटा दो, अपना गौरवशाली इतिहास भुला दो, दुय्यम दर्जे के लोग बन जओ, हमारे इशारो पर नाचने वाले कटपुतली बन जाओ, अपने महापुरुषो को भुला दो, हमारा गुणगान करो, हम जैसा करतें हैं वैसा ही करो, हमारे बुडों की हवस की भूख मिटाने के लिए अपनी प्यारी बच्ची दो, हमारे साम्रज्य के विस्तार के लिए जिओ और मरो, जो नकली अरबाब नहीं बनेगा उसे कष्ट पहुंचाओ, समाप्त कर डालो, मार डालो, उसकी बच्ची को लौड़ी समझो, बलात्कार करो, जजिया लगा दो, दिन रात अरबाबी साम्राज्य के विस्तार की सोचो. अपने पूर्वजों का अपमान करो. अपनी आस्था को मिटा दो. अपने रति रिवाजों की निंदा करो, उसे भुला दो, अपने तीर्थों को नष्ट कर दो हमारे देश के चक्कर लगाओ .
    http://virodhgodantran.com/2018/12/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE/

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  3. http://virodhgodantran.com/2018/12/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE/
    अरबाब सपना देख रहे थे. “पूरी दुनिया को अलअऱब” बनाने का सपना. पूरी दुनिया पर अरबाबी कानून लगाने का सपना, पूरी दुनिया पर अरबाबी हुकूमत का सपना, अरबाब बहुत महत्वकांक्षी थे, उनकी हालत ऐसी थी की सपने उन्हें सोने नहीं देते थे. सपने पूरा करने तक दम भी नहीं लेते थे. हर अरबाब यही सोचता मैं क्या करूँ. कैसे अरबाबी सपना पूरा होगा. अरबाबो के ३६० देवी देवताओं में से एक देवता, सपनो का देवता “जूल कर नैन”. वे सपनो के देवता के सामने नमाज पड़ते, काबा की ७ परिक्रमा करते. रोज़ा रखते. मुंडन करते. अरबाबी साम्रज्य के सपने की पूर्ति के लिए दुवा मांगते. “जूल कर नैन”, माने सिकन्दर, सिकन्दर ने बहुत बड़े साम्राज्य की स्थापना की थी. बहुत बड़े भूभाग पर हुकूमत की थी विश्व की 2 महान संस्कृतियों पर, इजिप्टियन संस्कृति और पर्शियन संस्कृति पर अपना अधिपत्य स्थापित किया था. भारतीय संस्कृति के द्वार पर जबरदस्त दस्तक दी थी. अरबाब भी चाहते थे इन तीनो संस्कृतियों पर पूर्ण अधिपत्य स्थापित हो जाये. सिकन्दर का सम्राज्य उनकी मृत्यु की पश्चात समाप्त हो गया था. लेकिन अरबाब चाहते थे उनका साम्राज्य ऐसा हो जो कभी समाप्त न हो. लोग उनके साम्राज्य की लिए जिये उनके साम्राज्य के लिए मरे, अपना तन मन धन लगाए, जो इस साम्राज्य का विरोध करे उसे मिटी में मिला दे.

    लेकिन कैसे ?, कोई ऐसा सूत्र, कोई ऐसा मंत्र, कोई ऐसा तरीका, जिससे उनका सपना पूरा हो. पूरी दुनिया उनके वश में आ जाये. उनके इशारों पर चले, उनका अनुसरण करे, उनके साम्राज्य के विस्तार के लिए दिन रात एक कर दे. दिन महीने साल गुजरते जा रहे थे, कोई सूत्र, कोई मंत्र, कोई तरीका मिल नहीं रहा था, जो उनका सपना पूरा कर सके. बैचैनी बढ़ती जा रही थी, हज़ का पवित्र महीना चल रहा था, लोग दूर दूर से अपने इष्ट देवी देवता की पूजा के लिए आ रहे थी. मुखिया अरबाब ने अपनी मनोव्यथा व्यक्त कर ही दी. क्या अरबाबी “साम्राज्य का सपना” कही सपना ही न रह जाये. उपाय बताओ, क्या किया जाये, मंत्रणा होने लगी, अरबाबों ने खूब विचार विमर्श के बाद निर्णय लिया. क्यूं न एक एक प्रतिनिधि मंडल तीनो संस्कृतियों के पास भेजा जाये, और उन्हें अरबाबी साम्राज्य को स्वीकारने की दावत दी जाये, तय हुआ, सभी की सहमति प्राप्त हुई,

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