शनिवार, 11 मई 2019

हिंदू शिरोमणि समीर कुलकर्णी देश भक्त है !

नोट -यह लेख आज  से  10 साल  पहले  उस समय लिखा गया   जब ऐसा लग रहा था कि समीर कुलकर्णी   जल्द ही छूट  जायेगा  ,  उन दिनों  हम  अभिनव भारत  की मध्यभारत  इकाई के अध्यक्ष  थे , समीर का काम  मुझे लाना  लेजाना   और लोगों  से संपर्क  करना था , जिस दिन  समीर को गिरफ्तार किया गया था   समीर मेरे  घर  था उसके लिए मेरी पत्नी खाना  तैयार  कर  रही  थी  ,तभी अचानक उसे फोन  पर किसी का मेसेज मिला  और वह  खाना  छोड़  कर कहीं  चला  गया  , दूसरे दिन  खबर  छपी  की उसे हबीब  गंज  स्टेशन  पर गिरफ्तार  करके किसी अज्ञात  जगह  भेज  दिया गया  है   , जिसकी  खबर किसी  को  नहीं है ,काफी  दिनों  बाद पता चला कि समीर  को मुंबई   ए टी एस ले   गयी , समीर को भी   ATS वालों ने काफी मारा  यहाँ तक उसके दन्त  भी तोड़  दिए  ,कांग्रेस  के राज  में हिन्दू होना सबसे बड़ा अपराध है 


सोना जितना तपाया जाता है, उसकी चमक उतनी ही निखरती है ,यह कहावत समीर पर ठीक चरितार्थ होती है .ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी माँ ,और परिवार को त्याग कर अपना सारा जीवन देश अर्पित कर दिया ,आज उसके जैसा दूसरा व्यक्ति मिलना असंभव है.समीर ने भूख प्यास की परवाह किए बिना ,हिंदू धर्म और देश की रक्षा के लिए हिन्दुओं को संगठित करने का बीडा उठाया .केवल एक साल के अन्दर उसने मध्य प्रदेश के सारे हिंदू संगठनों को एक सूत्र में पिरोने का भागीरथ कार्य कर दिखाया .उसी के प्रयासों का परिणाम है, की आज अभिनव भारत का नाम पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस संगठन को पाहिले कोई जानता तक नहीं था,आज वह एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन माना जा रहा है।
अभिनव भारत का उद्देश्य हिन्दुओं को जगाना और ,तुष्टिकरण की नीति के चलते ,हिन्दुओं पर किए गए अन्याय ,और उपेक्षा का प्रतिकार करना है.आज देश में आतंरिक और बाहरी दोनो तरह का खतरा मौजूद है। और कांग्रेस सरकार कोई कठोर कदम उठाने की वजाय पकिस्तान से नूरा कुश्ती लड़ कर देश को गुमराह कर रही है। जबकि आतंकवादी और देशद्रोही इन्हीं कान्ग्रेसिओं की छत्र छाया में पल रहे हैं .यही उनकी सहायता करते हैं
समीर का मानना था की प्रत्येक हिंदू को एकजुट होकर देश विरोधिओं का मुकाबला करना चाहिए। यह हिन्दुओं का परम धर्म है। जब देश में ऐसी वर्णसंकर और नामर्द सरकार हो तो केवल सेना और पुलिस के भरोसे देश को बचाना संभव नहीं है। समीर इसी महान कार्य में लगा हुआ था।
लेकिन जो लोग फ़िर से एक और विदेशी बहू को प्रधान मंत्री बनाने की योजना बना रहे थे उनको अभिनव भारत से ख़तरा पैदा हो गया.वैसे तो यह वर्णसंकर किसी भी हिंदू संगठन को फूटी आंखों से नहीं देख सकते, समीर शुरू से उनके निशाने पर था .बस वह मौका तलाश रहे थे। और अचानक 27 अक्टूबर 2008 को दिवाली से दो दिन पाहिले ,महाराष्ट्र की ऐ टी एस समीर को भोपाल से चुपचाप उठा ले गई.यहाँ तक की इसकी सूचना मध्य प्रदेश पुलिस को भी नहीं दी गई .बाद में एक वरिष्ठ पत्रकार श्री ललित श्रीवास्तव ने इसका विरोध किया था और सरकार का ध्यान खींचा था।
ऐ टी एस ने बिना किसी पूछताछ के समीर को जेल में दाल दिया,और उसे एक आतंकवादी बत्ताते हुए उस पर मकोका भी लगा दिया ताकि मामला और संगीन हो जाए और चुनाव से पाहिले जमानत न हो सके। यह सारा षडयंत्र मध्य प्रदेश के दो कांग्रेसी नेताओं का था जो राहुल गांधी को होनेवाला अगला प्रधान मंत्री मानते हैं।
सारा मध्य प्रदेश जानता है की ,समीर पर लगाए सभी आरोप झूठ हैं .हमारा विशवास है की अदालत जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। हमें न्यायपालिका पर विशवास है।
ऐ टी एस ने समीर को जितना प्रताडित किया,अगर उतना किसी आतंकवादी को किया होता तो आज देश से आतंकवाद कब का मिट गया होता। लेकिन हाय हिन्दुओं का दुर्भाग्य की सुप्रीम कोर्ट से अपराधी घोषित होने के वावजूद अफजल बिरयानी और कबाब की दावत उड़ा रह है। और बिना अपराध के एक देशभक्त हिंदू को चार चार दिन भूखे रख कर लगातार मारा जाता है .उस पर आरोप लगाया की उसने लाखों रूपये जमा कर के बम बनाए .जबकि समीर के पास मात्र दो जोडी कपड़े थे। उसके खाते सिर्फ़ 78 रूपये थे .उसके पास खाने को भी पैसे नहीं रहते थे। वह दो दो दिन भूके रह कर काम करता था.या किसी शुभचिंतक के घर खाना खा लेता था।
समीर कुलकर्णी से मध्य प्रदेश की भूमि धन्य हो गई है हमें उस पर गर्व होना चाहिए।
समीर ने भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा प्रकट की है। वह अक्सर कहता था की देश और धर्म की रक्षा के लिए राजनीतिक शक्ति भी जरूरी है ताकि वह संसद में जाकर इन दोगलों को मुह तोड़ जवाब दे सके। जो वोटों की खातिर तुष्टीकरण की नीति से हिदुओं की उपेक्षा कर रहे हैं .जब भी संसद में हिन्दुओं पर आरोप लगाए जाते थे तो समीर कहता था की आज अगर में संसद में होता तो इन लोगों को उचित जवाब देता।
हम सभी हिन्दुओं से अपील करते है की अपना वोट समीर को ही देन संसद ने सौ गीदरों को भेजने से अच्छा है की एक शेर को भेजा जाए। समीर की वाणी में ओज है ,जब वह बोलेगा तो सेकुलार्वादिओं और कान्ग्रेसिओं के होश उड़ जायेंगे।
हम श्री राजनाथ सिंह से निवेदन करते हैं की भोपाल की सीट समीर के लिए छोड़ दें .हम बी जे पी को हिंदुत्व समर्थक पार्टी मानते हैं .और आज तक आँख बंद कर बी जे पी को ही वोट देते आए हैं .एक सीट देना उनके लिए बड़ी बात नहीं है .बल्कि इस से बी जे पी को कई गुना बल मिलेगा।
हम सभी का एकमात्र लक्ष्य देश को परम वैभव के शिखर पर पहुंचाना है। हम इस देश के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं .किसी विदेशी या उसके वंशजों का यहाँ कोई स्थान नहीं .हम देश और धर्म की रक्षा के लिए संकल्पित हैं ।

(चित्र में बायीं तरफ मूछ बाला व्यक्ति  समीर है    साथ में चश्मा लगाया हुआ व्यक्ति  दयानन्द पाण्डे है )

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हिन्दुओ   भोपाल में  दिग्विजय को हरा कर   अपने शत्रु से बदला  लो , 

जय भारत
बी एन शर्मा 
भोपाल 1 मार्च 2009
(181/7 )

गुरुवार, 9 मई 2019

संघ को मिटाने की कुत्सित योजना !

नोट -यह लेख आज से दस साल पहले 18 अप्रेल  2010 को भांडाफोड़ू ब्लॉग में  पोस्ट हुआ था  , लेकिन  आज भी  यह लेख  हिन्दुओं    की आँखें  खोलने   वाला  ,और उपयोगी   है 


स्‍वयंसेवक संघ की हत्या का प्रयास किया जा रहा है। यह न तो पहली बार है और न अंतिम बार। संघ की स्थापना 1925 में हुई तब से लेकर अब तक संघ पर कई बार जानलेवा हमला किया गया है। संघ के इतिहास में सबसे पहला, ज्ञात और बड़ा हमला 1948 में हुआ था। तब देश अंग्रेजों के कब्जे से मुक्त हुआ ही था, लेकिन विभाजन और हिन्दू नरसंहार की विभीषिका भी झेल रहा था। कांग्रेस के सर्वेसर्वा नेहरू को गांधी हत्या के रूप में एक बड़ा हथियार मिल गया। नेहरू ने गांधी की हत्या को अपने राजनीतिक कैरियर के लिए एक सुअवसर के रूप में देखा। एक तरफ गांधी को सिरे से नकारने और दूसरी ओर अपने विरोधियों के खात्मे का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था। नेहरू ने अंग्रेजों से हाथ मिलाया और गांधी हत्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आरोपित कर दिया।
देश में गांधी के प्रति स्थापित असीम श्रद्धा और सम्मान का नेहरू ने दुरूपयोग करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ के खिलाफ इस्तेमाल किया। आजादी के बाद गलत नीतियां अपनाए जाने और गांधी को नकारने के कारण नेहरू के खिलाफ जो माहौल बन रहा था, उसे बड़ी चतुराई से संघ की आरे मोड़ दिया गया। एक तीर से कई-कई निशाने। यह नेहरू का राजनीति कौशल था जो उन्होंने गांधी और अंग्रेजों से सीखा था। नेहरू इस राजनीतिक कौशल का सीमित इस्तेमाल अंग्रेजों के खिलाफ कर पाये, लेकिन गांधी और संघ के खिलाफ उन्होंने इसका भरपूर इस्तेमाल किया। संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया। संघ को समाज से तिरस्कृत और बहिष्कृत कर उसपर कानूनी शिकंजा कसने की काशिश भी की गई। सबको पता है कि गांधी हत्या मामले से संघ को बाइज्जत बरी कर देने और संघ को निर्दोष बताने के बावजूद कांग्रेस के नेता आज भी गांधी हत्या में संघ का नाम घसीटने से बाज नहीं आते। यह अलग बात है कि संघ के लोगों ने कभी कांग्रेसियों को न्यायालय की अवमानना का नोटिस नहीं दिया।
संघ पर दूसरा जानलेवा हमला इंदिरा गांधी ने आपातकाल के समय किया। संघ को लोभ-लालच और भय से निष्क्रिय या कांग्रेस के पक्ष में सक्रिय करने का प्रयत्न किया गया। कांग्रेस की शर्त न मानने पर संघ को नेस्तनाबूत कर देने की कोशिश हुईं। इस बार भी संघ को प्रतिबंधित किया गया। संघ इस हमले न सिर्फ बाल-बाल बच गया बल्कि देश ने कांग्रेस को करारा जवाब भी दिया।
संघ पर तीसरा बड़ा हमला 1992 में किया गया जब अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचा टूटा। तब केन्द्र में कांग्रेस की ही सरकार थी और नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। प्रधानमंत्री राव ने नेहरू की ही तरह कुटिल राजनीतिक कौशल का परिचय दिया। उन्होंने भी एक तीर से कई-कई निशाने लगाए। एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत विवादित ढांचे को ढहने दिया गया। बाद में ढांचे के विध्वंस में संघ-भाजपा को आरोपित कर पहले तो भाजपा की चार राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया और बाद में संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर यह तीसरा कांग्रेसी प्रतिबंध था।
संघ की स्थापना और कार्य एक पवित्र उद्देश्य से है। संघ के स्वयंसेवक संघ कार्य को ईश्वरीय कार्य मानते हैं। संघ भारत राष्ट्र के परम वैभव के लिए प्रयत्नशील है। यही कारण है कि संघ पर बार-बार घातक और जानलेवा हमले होते रहे हैं, लेकिन संघ इस हमले से बार-बार सही सलामत बच निकला। कांग्रेस ने भले ही हमले किए हों, लेकिन समाज ने हमेशा संघ को स्वीकारा और सराहा। संघ हमेशा हिन्दू समाज की रक्षा करता आया है, इसीलिए कांग्रेसी हमलों से संघ को समाज बचाया है।
संघ और हिन्दू शक्तियों पर ऐसे हमले न जाने कितनी बार हुए। उपर की गिनती तो सिर्फ बड़े हमलों की है। संघ के दुश्मनों ने कई बार रणनीति बदल कर हमले किए। पिछले लोकसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस की हालत पतली थी। आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा के खतरे, मंहगाई, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण जैसे मुद्दों के कारण देश ने कांग्रेस को त्यागने का मन बना लिया था। भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दल कांग्रेस को घेरने की पूरी तैयारी कर चुके थे। आर्थिक मुद्दों पर वामपंथी पार्टियों ने कांग्रेस की घेरेबंदी कर रखी थी। बढ़ती आतंकवादी घटनाओं ने कांग्रेस को कटघरे में ला खड़ा किया था। मुस्लिम तुष्टीकरण कांग्रेस की गले की हड्डी बन गया था। लेकिन इसी बीच ‘हिन्दू आतंकवाद’ का एक नया नारा गढ़ा गया। आतंकवाद और तुष्टीकरण की धार को हिन्दुओं और हिन्दू संगठनों की ओर मोड़ दिया गया। कांग्रेस के रणनीतिकारों ने फिर से कुटिल राजनीतिक कौशल का परिचय दिया। मालेगांव विस्फोट में हिन्दू संगठनों को लपेटने का कुत्सित प्रयास किया गया। पूरी तैयारी के साथ हिन्दू संगठनों, खासकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आक्रमण किया गया। साध्वी प्रज्ञा समेत कुछ हिन्दू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर ‘पुलिसिया हथकंडे’ अपना कर जुर्म और आरोप कबूलवाने कीकोशिश की गई।
8 अप्रैल को महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार के गृहमंत्री ने एक खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मालेगांव के आरोपी संघ प्रमुख को मारना चाहते थे। 9 अप्रैल को समाचार पत्रों में महाराष्ट्र के गृहमंत्री के हवाले से इस आशय की खबर छपी कि मालेगांव विस्फोट के आरोपी हिन्दूवादी संगठनों की नजर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संगठन का नेतृत्व करने में सक्षम नहीं हैं। इन संगठनों ने भागवत की हत्या की साजिश भी रची थी। फोन पर भागवत के खिलाफ की गई टिप्पणी सहित कई अपशब्दों की रिकार्डिंग वाला टेप महाराष्ट्र पुलिस के पास है। यह सब रहस्योदघाटन महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने विधानसभा में किया। एनसीपी विधायक जितेन्द्र आव्हाड के एक सवाल कि क्या मालेगांव विस्फोट प्रकरण में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित और अभिनव भारत संगठन से संबंधित लोगों ने भागवत की हत्या की साजिश रची थी? इसके जवाब में गृहमंत्री पाटिल ने सदन में कहा कि उनकी बातों में सच्चाई है। हालांकि बाद में विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भागवत कीहत्या की साजिश रचे जाने के बारे में ठोस ढंग से कुछ भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना पक्का है कि गिरफ्तार हिन्दूवादी अभियुक्तों के मन में भागवत के प्रति कटुता है। इन लोगों ने फोन पर आपसी बातचीत के दौरान भागवत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। गौरतलब है कि 29 सितंबर, 2008 को रमजान के महीने में मालेगांव में हुए बम धमाके में 6 लोग मारे गए थे और 20 जख्मी हुए थे। महाराष्ट आतंक निरोधक दस्ते ने इस कांड के आरोपियों के संबंध दक्षिपंथी संगठन अभिनव भारत से होने की बात कही थी।
संघ पर जानलेवा हमला करने वाले हमेशा की तरह फिर सक्रिय हो गए हैं। फर्क बस इतना है कि उनकी रणनीति बदल गई है ताकि पकड़े जाने पर उनका नुकसान न होने पाए। कांग्रेस को संघ, संघ के स्वयंसेवक और संघ प्रमुख के जान की चिंता कब से होने लगी? हत्या के आरोपी और हमलावर ही अपने दुश्मन की परवाह करने लगें तो दाल में कुछ काला जरूर नजर आयेगा। क्या कांग्रेस और उनके हुक्मरानों को पता नहीं है कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए गत लोकसभा चुनाव के पहले हिन्दू संगठनों पर सुनियोजित हमले किए गए। ये हमले कांग्रेस ने किए ओर कराए। इस हमले में कांग्रेस ने सरकारी, गैर सरकारी और राजनीतिक संगठनों का भरपूर इस्तेमाल किया। देश के खुफिया संगठन आईबी और महाराष्ट्र पोलिस को मोहरा बनाकर न सिर्फ हिन्दू संगठनों को आरेापित और कलंकित किया गया बल्कि ‘हिन्दू आंतंक’ का जुमला भी विकसित किया गया।
महाराष्ट्र कांग्रेस के गृहमंत्री सदन को गुमराह कर सकते हैं, देश को नहीं। कांग्रेस और उनकी सुप्रीमों सोनिया गांधी के बारे में करोड़ों हिन्दू कटुता का भाव रखते हैं, उन्हें देश और कांग्रेस का नेतृत्व करने के लायक नहीं मानते कई बार अपने संस्कारों को भूल आक्रोशवश अपशब्दों का भी इस्तेमाल करते हैं। अनेक भारतीय कांग्रेस और सोनिया के बारे में आमने-सामने और कई बार फोन पर भला-बुरा कहते हैं, संभव है खिन्नता और अवसाद में वे कांग्रेस और सोनिया के अंत का विचार भी करते हों। तो क्या इसे कांग्रेस और सोनिया के खिलाफ हिन्दुओं की साजिश मान ली जाए और करोड़ों हिन्दुओं को साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाए? संघ पर हमला करने वाले बहुरूपिए फिर भेष बदल कर आए हैं। वे इस हिन्दू संगठनों की आड़ ले रहे हैं। हिन्दू संगठनों को बदनाम, कलंकित और तिरस्कृत करने की साजिश जारी है। हमलावरों को बेनकाब करने और समाज को सावधान रहने की जरूरत है।

बी एन शर्मा -भोपाल 18 अप्रेल 2010

(181/46)

बुधवार, 8 मई 2019

राहुल गांधी भारत को इस्लामी देश बना देगा!

राहुल गाँधी कांग्रेस के महासचिव हैं। लेकिन उनका यह परिचय अधूरा है। फिलहाल वे उस परिवार के एक मात्र पुरूष उत्तराधिकारी हैं जो इस देश की सत्ता के सूत्र संभाले हुए है। इसलिए उनकी प्रत्येक घोषणा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पिछले दिनों वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गए थे। इस विश्वविद्यालय की महत्ता इसलिए भी बढ़ गई है कि सरकार इस को मॉडल मान कर इसकी शाखाएं देश भर में स्थापित कर रही है। और इस काम के लिए करोड़ों रूपये के बजट का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। देश के विभाजन में, उसके सैधान्तिक पक्ष को पुष्ट करने में, इस विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राहुल गांधी इसी विश्वविद्यालय में मुसलमानों की नई पीढ़ी के साथ देश के भविष्य पर चिन्तन कर रहे थे। वहाँ उन्होंने यह घोषणा की कि इस देश का प्रधानमंत्री मुसलमान भी बन सकता है। उनकी यह घोषणा कांग्रेस के भविष्य की रणनीति का संकेत भी देती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इससे पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि इस देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है।
इससे पहले प्रधानमंत्री अफगानिस्तान में जाकर बाबर की कब्र पर सिजदा भी कर आये हैं। राहुल गांधी की यह घोषणा और मनमोहन सिंह का संसाधनों पर हक के बारे में बयान कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करने का संकेत देता है। अपनी इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने दो आयोगों की नियुक्ति भी की थी। इनमें से एक था राजेन्द्र सच्चर आयोग और दूसरा था न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग। सच्चर आयोग ने अपने दिये हुए काम को बखूबी अंजाम दिया। उसने सिफारिशें की कि मुसलमानों को मजहब के आधार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाना चाहिए। सच्चर तो अपनी सीमा से भी आगे निकल गये थे उन्होंने भारतीय सेना तक में मुसलमानों की गिनती प्रारम्भ कर दी थी और सेना से जवाब तलब करना शुरू कर दिया था, कि वहां कितने मुसलमान है? यह तो भला हो सेनाध्यक्षों का कि उन्होंने सच्चर को आगे बढ़ने से रोकते हुए कहा कि भारतीय सेना में भारतीय सैनिक हैं मुसलमान या किसी अन्य मजहब से उनकी पहचान नहीं होती। लेकिन सच्चर को तो सरकार ने भारतीय पहचान छोड़कर मुसलमान की मजहबी पहचान पुख्ता करने का काम दिया हुआ था।
उसके बाद इसी योजना को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने रंगनाथन मिश्रा आयोग की स्थापना की। कुछ लोगों को ऐसा लगता था कि अनुसूचित जाति के अधिकांश लोग मतांतरण के माध्यम से इसी लिए मुसलमान या इसाई नहीं बन पाते क्योंकि इस्लाम या चर्च की शरण में चले जाने के बाद उनको संविधान द्वारा मिला आरक्षण समाप्त हो जाता है। संविधान यह मान कर चलता है कि जाति प्रथा हिन्दू समाज का अंग है। इस्लाम अथवा इसाईयत में जाति विभाजन अथवा जाति प्रथा नहीं है। मतांतरण को प्रोत्साहित करने वाले मुल्ला अथवा पादरी भी अनुसूचित जाति के लोगों को यही कह कर आकर्षित करते हैं कि जब तक आप हिन्दू समाज में रहोगे तब तक जाति विभाजन से दबे रहोगे। इसलिए जाति से मुक्ति पाने के लिए इस्लाम अथवा चर्च की शरण में आ जाओ। अब मुल्लाओं और पादरियों को यह लगता है कि जब तक हिन्दू समाज में अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण मिलता रहेगा तब तक वे मुसलमान या इसाई नहीं बनेंगे। इसलिए उन्होंने सरकार से प्रार्थना की कि मुसलमान अथवा इसाई बने मतांतरित लोगों को भी जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। परन्तु उनके दुर्भाग्य से न्यायपालिका ने उसमें अड़ंगा लगा दिया। उस अड़ंगे को दूर करने के लिए भारत सरकार ने रंगनाथमिश्रा आयोग की स्थापना की। इस आयोग ने अपने दिये हुए कार्य को पूरा करते हुए यह सिफारिश कर दी है कि मतांतरित लोगों को भी, जो मुसलमान अथवा इसाई हो गये हैं, जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। सरकार इस आयोग की सिफारिशों को भी लागू करने की दिशा में तत्पर दिखाई दे रही है। लेकिन इस देश को मुस्लिम बनाना या उसे मुसलमानों के हाथों सौंप देने का अभियान अनेक पक्षिय है। एक तरफ कानूनी और संवैधानिक दावपेच हैं तो दूसरी तरफ धरातल पर तेजी से हो रहा कार्य है।
लव-जेहाद उनमे से एक पक्ष है। केरल उच्च न्यायलय ने संकेत दिया है कि केरल में पिछले कुछ वर्षों में तीन हजार से लेकर चार हजार हिन्दू लड़कियों को प्रेम-जाल में फांस कर इस्लाम में मतांतरित किया गया है। लेकिन इस बड़े अभियान में यदि एक पक्ष लव-जिहाद है तो दूसरा पक्ष आतंकवाद है। इस्लामी आतंकवाद ने इस देश के अनेक हिस्सों में अपनी जड़े जमा ली हैं इसी के बलबूते उसने कश्मीर प्रांत से हिन्दुओं का सफाया कर दिया है। असम और बंगाल के अनेक जिले बंग्लादेशियों को अवैध गुसपैठ से मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। न्यायपालिका की बार-बार की फटकार के बावजूद केन्द्र सरकार की रूची वोट बैंक को देखते हुए इन अवैध बंग्लादेशियों को भारत से निकालने की कम है उन्हें प्रश्रय देने की ज्यादा।
अब रही-सही कसर लिब्राहन आयोग ने पूरी कर दी है। श्री मनमोहन सिंह लिब्राहन ने अपनी रपट में मुस्लिम समाज को धिक्कारा है। कि जब विवादित ढांचे को गिराने की तैयारियां हो रही थी तो मुस्लिम समाज क्या कर रहा था? लिब्राहन का कहना है कि मुसलमानों के संगठनों ने अपने कर्तव्य को पूरा नहीं किया। लिब्राहन के इन निष्कर्शों का क्या छिपा हुआ अर्थ है? क्या वे मुस्लिम समाज को लड़ने के लिए ललकार रहे हैं? क्या यह एक नए गृह युद्व के संकेत हैं? विभाजन से पूर्व मुस्लिम लीग जो भूमिका निभा रही थी क्या उसी में फिर से उतर आने के लिए मुसलमानों को ललकारा जा रहा है? यह पश्न गहरी जांच-पड़ताल की आशा रखते हैं। राहुल गाँधी के मुस्लिम प्रधानमंत्री के बयान को इसी पृष्ठ भूमि में जांचना परखना होगा। 1947 से पूर्व मुहम्मद अली जिन्ना और ब्रिटिश सरकार एक स्वर में कह रही थी कि भारत वर्ष में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है। जिन्ना ने प्रतिकार रूप में उसका रास्ता अलग देश के रूप में चुना। दुर्भाग्य से 21 वीं शताब्दी में भी कांग्रेस सरकार और अलगाववादी मुस्लिम संगठन वही भाषा बोल रहे हैं। क्या यह एक नये विभाजन की तैयारी है या फिर इस देश को ही मुस्लिम देश बनाने की एक और साजिश?

बी एन शर्मा
भोपाल 17  अप्रेल 2010
(181/30)

सोमवार, 6 मई 2019

दिग्विजय की चड्डी ढीली क्यों ?

ऐसा हम इसलिए  कह रहे हैं  ,क्योंकि   जिस दिन  ही साध्वी  प्रज्ञा ठाकुर  को भोपाल  से टिकट  दिया गया   ,उसी दिन  से दिग्विजय सिंह उनके विरुद्ध  षडयंत्र   रचाने  लगा  है  , दिग्विजय  सिंह को डर सत्ता रहा है कि जीतने के बाद   अगर मोदी  साध्वी को गृहमंत्री बना देगा  तो दिग्विजय जीवन भर जेल में ही  रहेगा , क्योंकि ,

दिग्विजय सिंह अक्सर आर.एस.एस. ,बी.जे.पी और अन्य हिंदूवादी संगठनों को गलियां क्यों देता है ,बाबा रामदेव और अन्ना हजारे का विरोध क्यों करता है ?राहुल गंदी की तारीफें करके सोनिया की चापलूसी क्यों करता है ?यह ऐसे सवाल हैं ,जो लोगों के मन में उठते रहते हैं .परेक बात सब लोग जानते हैं कि सोनिया .मनमोहन ,दिग्विजय ,अहमद पटेल ,विलास राव ,शीलादीक्षित ,शहीद बलवा ,और हसन अली सब एक ही थैले कि चट्ते बट्टे है,इन सबका विदेशों में अरबों रूपया जमा है .
लोग यह भी जानते हैं कि दिग्विजय एक चालाक ,और मक्कार व्यक्ति है .और राजनीति का घाघ खिलाडी है .उसे एक तीर से कई शिकार करने का अभ्यास है .अंगरेजी क़ी कहावत है ,कि यदि किसी औरत को पटाना हो ,तो उसके कुत्ते तक की तारीफ़ करो .इसी लिए दिग्विजय हर तरह से सोनिया को खुश करता रहता है .क्योंकि असल सत्ता उसी के पास है .वर्ना एक विदेशी विधवा सिवाय भ्रष्टाचार और महगाई के आलावा क्या पैदा कर सकती है .आप सब ने देखा है कि जैसे जैसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन तेज होता जा रहा है यह सब एकजुट होने लगे हैं ,और सोनिया कि शरण में आ रहे है .जैसे कुत्तों के पिल्ले अपनी माँ के पास सिमट जाते हैं .
मुझे लगता है कि दिग्विजय की चमचागिरी के पीछे यही कारण होना चाहिए ,दिग्विजय ने अपने शासनकाल में मध्य प्रदेश को चौपट कर दिया था .इसके समय भ्रष्टाचार चरम सीमा पर था .वैसे तो इसने कई घोटाले किये थे .लेकिन ताजा कर्जा घोटाला (loan scam )सुप्रीम कोर्ट में पहुच गया है .दिग्विजय सन 1994 से 2000 तक मध्य प्रदेश का मुख्य मंत्री रहा .इसने "State Industrial Development Corporation "के माध्यम से कुछ औद्योगिक समूहों को सात सौ उन्नीस (719 )करोड़ रूपया बिना किसी जमानत ,या शर्त के कर्जा दे दिया था .और कर्जा लेने वालों से कोई जमानत (security )भी नहीं ली .यह सब दिग्विजय के मित्र थे .जब सन 2005 कर्जे की न तो किश्त जमा हुई ,और न ब्याज ही जमा हुआ तो बी. जे. पी की सरकार का माथा ठनका .उस समय कारपोरेशन का मेनेजिंग डायरेक्टर S .R .Mohanty था .जो एक I .A .S अधिकारी था .सरकार ने इस मामले की (EOW ) Economic Offences Wing) से जाँच की तो पता चला कि यह कर्जा दिग्विजय ने उद्योगपतिओं को ICD योजना अर्थात "Inter Corporate Deposit "के तहत दिया था .इस घोटाले में उस समय के कुछ कांग्रेसी नेता ,और मोहंती के आलावा 35 अफसरों के विरुद्ध ऍफ़ आई आर दर्ज हो गयी .

( इंडियन एक्सप्रेस 5 फरवरी 2011 ) 
बाद में मोहंती जबलपुर हाई कोर्ट गया .जहाँ उसको किसी तकनीकी कारण से थोड़ी सी राहत मिल गयी .लेकिन मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भेज दिया
 (एन ड़ी टी.वी 6 फरवरी 2011 )
मामले कि गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके दो सदस्यों की एक बेंच बना दी ,जिसमे एक Chief Judicial Magistrate और एक Additional Session Judge को रखा गया है .क्योंकि अब वह कर्जा जो 719 करोड़ का था ब्याज मिलाकर 2200 \-करोड़ का हो गया है .
बी.जे. पी .मध्य प्रदेश के प्रवक्ता श्री नरोत्तम मिश्र ने अदालत से इस केस को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटने की अपील की है .दूसरी तरफ मुख्य आरोपी मोहंती खुले आम दिग्विजय को जिम्मेदार बता रहा है .उस समय वह "Health Secratary "था .दिग्विजय ने जिन 29 उद्योग पतियोंको कर्जा दिया था उनके कुछ नाम इस प्रकार है -
ई एन बी -प्रफुल महेश्वरी -417 .55 करोड़
अल्पाइन -सतीश भंडारी -275 .56 करोड़
रुईया -टी बी रूइया -271 .91 करोड़
ईशर-गुरुचरण -155 .43 करोड़
सोम समूह -140 .57 करोड़

इसकी काफी बड़ी सूचीहै जो ,पत्रिका ,भोपाल 24 दिसंबर 2010 में प्रकाशित हुई थी इसका शीर्षक था ,
"कर्ज लेकर भूल गए :जनता का धन उद्योगपतियों की जेब में "
अब जैसे जैसे सुनवाई के दिन पास आते जा रहे हैं ,दिविजय की चड्डी ढीली होती जा रही है .वह बौखला कर सरे बी.जे.पी ओर संघ को गलियां देने लगा है .उसे भी यह भी डर है की कहीं बाबा रामदेव या अन्ना हजारे इस मूद्दे को देंगे तो सोनिया के साथ सभी अन्दर हो जायेंगे .क्योंकि चोर चोर मोसेरे भाई होते है .यद्यपि मिडिया ने इस घोटाले को अधिक महत्त्व नहीं दिया .फिर भी मैं अपने सभी ब्लोगर बंधुओं से अनुरोध करता हूँ कि,इस घोटाले की बात सबको पहुंचा दें .ताकि दिग्विजय की असलियत लोगों को पता चले .और कोई सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी कर सके .खबर की लिंक भी दी जा रही है -.


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