शुक्रवार, 28 जून 2019

अल्लाह मर चुका है !

विश्व में अनेकों धर्म और संप्रदाय प्रचलित हैं .लेकिन इस्लाम केवल अपनी मान्यताओं और विश्वास को ही प्रमाण मानता है .और दूसरों को मनवाने का प्रयास करता रहता है .इस्लामी परिभाषा में इस विश्वास को ही ईमान कहा जाता है .भले ही ऐसा विश्वास या मान्यता तर्क सम्मत नहीं हो .मुसलमान उसे सही मानते हैं .साधारण लोग इस्लाम के सुन्नी और शिया समुदाय के बारे में जानते हैं .और उनकी अधिक संख्या होने के कारण उन्हीं को इस्लाम का सही रूप समझ लेते हैं .क्योंकि इन दौनों फिरकों का मुख्य आधार अल्लाह और कुरान ही हैं .और बाकी मान्यताएं जैसे , रसूल , जन्नत -जहन्नम , कियामत , कलमा और नमाज आदि इन दौनों से सम्बंधित हैं .मुसलमान अल्लाह को साबित करने के लिए तर्क देते हैं कि ऐसा कुरान में लिखा है , और जब कुरान की प्रमाणिकता की बात आती है तो , कहते हैं यह अल्लाह की किताब है .जबकि यह दौनों बाते एक दूसरे पर आधारित है .
लेकिन बहुत लोगों को नहीं पता होगा कि मुसलमानों का एक ऐसा काफी बड़ा फिरका भी है जो , अल्लाह और कुरान के अलावा अन्य बातों के बारे में बिलकुल विपरीत विचार रखता है .इस इस्लामी समुदाय को " अलवी-علوية" मुसलमान कहा जाता है .इनके बारे में इसलिए बताना जरुरी है , क्योंकि इन्हीं के साथ अल्लाह की मौत का रहस्य भी जुड़ा हुआ है .इस लिए इस लेख को ध्यान से पढ़िए .
1-अलवी लोगों का परिचय 
मुहम्मद साहब के समय में ही मुसलमानों में गुटबंदी और मतभेद होने लगे थे . क्योंकि इस्लाम तर्क हीन मान्यताओं पर आधारित था.और मुहम्मद साहब के ससुर हुकूमत चाहते थे.मुहम्मद साहब अपने चचरे भाई और दामाद अली को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे . क्योंकि उसी के योगदान से इस्लाम फैला था .लेकिन मुहम्मद साहब के ससुर अबू बकर ने छल करके खुद को खलीफा बना लिया . इस से अली के समर्थक अलग हो गए , जिन्हें अज शिया कहा जाता है .ऐसा ही एक फिरका " अलवी" है जिसे " नुसैरिया - نصيريون‎" भी कहा जाता है .यह नाम शियाओं के 11 वें इमाम हसन अल अस्करी इब्ने नुसैर के नाम से लिया गया , जिसका जन्म सन 873 में हुआ था .अलवी अधिकांश सीरिया , लेबनान , इराक और कुछ पाकिस्तान में भी हैं . इनकी कुल संख्या एक करोड़ पैंतीस लाख है .सीरिया का राष्ट्रपति " हाफिज अल असद" भी अलवी है . जो सन 1970 में राष्ट्रपति बना था.
कुछ लोग अलवियों को शिया कहते हैं , लेकिन यह सुन्नी और शिया से बिलकुल अलग और विपरीत विचार रखते हैं .जो इस प्रकार हैं ,
2-अलवी मान्यताएं 
सभी अलवी खुद को " अब्दुन्नूर " यानि प्रकाश का दास कहते हैं और मानते हैं कि जड़ चेतन सभी प्रकाश से उत्पन हुए है .और प्रकृति खुद ही चल रही है .और उसको बनाने वाला अल्लाह नहीं है. समस्त जगत सदा से है और हमेशा रहेगा .और आत्मा भी अजर और अमर है .
अलवियों के पांच विभाग हैं ,1 .शम्शिया ( सूर्य के उपासक ) 2 . कमरिया ( चन्द्र के उपासक 3 . मुर्शिद ( सलमान फारसी के भक्त 4 .हैदरिया ( हैदर के भक्त ) 5 . गैबिया ( रहस्यवादी ) लेकिन यह सभी अली इब्न अबूतालिब को ही अल्लाह मानते हैं , जिसने इस पृथ्वी पर अवतार लिया था.इसके अतिरिक्त अलवी आत्मा के पुनर्जन्म को भी मानते है और मानते हैं कि पापी लोग मर कर अन्य प्राणियों कि योनी में जन्म लते हैं . और जन्नत और जगह कोई चीज नहीं है .कर्मों का फल यहीं या अगले जन्म में मिल जाता है 

3-कुरान कलमा से इंकार 
अलवियों का दावा है कि कुरान अली ने बनायी थी और मुहम्मद को सिखाई थी .और मुहम्मद की मौत के बाद सुन्नी खलीफाओं ने कुरान को बदल दिया था .वर्त्तमान कुरान नकली है . इसलिए अलवी "किताबुल मजमूअ - كتاب المجموع‎ " नामकी किताब पढ़ते हैं जिसमे सिर्फ 16 सूरा (Chapters ) हैं . जिसे सिर्फ फ्रेंच भाषा में अनुवादित किया गया है .इसमे कुरान की वह आयतें हैं जिसमे अली को अल्लाह बाताया गया है , लेकिन कुरान से निकाल दिया गया .इसके अतिरिक्त अलवी " किताबुल मशायख "यानि Manual of Shaikhs  और " किताब तालीम दीनिया अल नुसैरिया "भी पढ़ते हैं जिसमे उनके नियम दिए गए हैं अलवी कुरान के साथ नमाज भी नहीं पढ़ते ,यहाँ तक इस्लाम का मुख्य आधार कलमा भी नही पढ़ते , लेकिन कलमा की जगह यह प्रार्थना बोलते है '
"
أشهد أن لا إله إلا == حيدرة الأنزع البطين
"अशहदु अन्ना ला इलाह हैदर अंज अल मतीन "
و لا حجاب عليه إلا == محمد الصادق الأمين
"व् ला हिजाब अलैहि मुहम्मद अस्सादिक अल अमीन "
و لا طريق إليه إلا == سلمان ذو القوة المتين
" व तरीक इलैह इल्ला सलमान जुल कुव्वत अल मतीन "

अर्थ-मैं गवाही देता हूँ कोई अल्लाह नहीं है , सिवा अली इब्न अबू तालिब के , वही इबादत के योग्य है , इसमें पर्दा नहीं कि मुहम्मद सच्चा था और सलमान के अलावा कोई द्वार नहीं है .
"I testify that there is no God but 'Ali ibn-Talib the one to be worshipped, no Veil but the Lord Muhammad worthy to be praised, and no Gate but the Lord Salman al-Farisi the object of love".
अलवी मुसलमानों के वर्त्तमान कलमा को बेकार बता कर उस से इंकार करते हैं , देखिये विडियो 
Islamic Kalma rejected by Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri) as he says Ali Mabood

http://www.youtube.com/watch?v=j_c6r58UbsA

अलवी क़ुरबानी की ईद भी नहीं मनाते और न लड़कों की खतना करते हैं .और न किसी को अपने धर्म में शामिल करते हैं 

4-कुरान अली की बनायीं है 
यद्यपि मुसलमान दावा करते हैं कि कुरान अल्लाह के द्वारा भेजी गयी किताब है किसे उसने अपने रसूल मुहम्मद पर नाजिल किया था .लेकिन अलवियों का दावा है लोग जिसे अल्लाह बता रहे हैं वह अली ही था .जो छुप छुप कर मुहम्मद को कुरान सिखाता था .सुन्नी खलीफाओं ने कुरान में हेराफेरी करके इस बात को दबा दिया था .लेकिन इस आयात से अलवियों कि बात सत्य साबित होती है .
"वह परदे के पीछे रहकर किसी को भी " वही " (कुरान की आयतें ) भेज सकता है , बेशक अली महान तत्वदर्शी है " सूरा-अश शूरा 42 :51 

" وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ  " 42:51

 from behind a veil,  reveal, by His leave, whatever He wills to revealfor, verily, He is exalted, wise. (42:51

कुरान की यह एक ही आयत यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि अली ही गुप्त रूप से कुरान बनाया करता था.और मुसलमान भी कुरान बनाने वाले को अल्लाह बताते हैं.
5-अलवी त्रैतवाद 
हिन्दू और ईसाईयों की तरह अलवी भी तीन शक्तियों पर विश्वास करते है .पहिला अली है जिसे " मायनी " अर्थात Meaning कहा जाता है .दूसरी शक्ति मुहम्मद है जिसे "इस्म" कहा जाता है इस्म अर्थ नाम (Name ) होता है .जिसे अली बनाया है .जैसे नाम मायने के बिना बेकार होता है उसी तरह अली के बिना मुहम्मद बेकार होता है .तीसरी शक्ति सलमान फारसी है जिसे " बाब " अर्थात द्वार (Gate ) कहते हैं.बाब इस्म को मायनी से मिलाने का साधन है .अलवी प्रार्थना में कहते हैं कि मैं बाब के रस्ते से निकल कर इस्म ( मुहम्मद ) को सलाम करता हूँ और आगे बढ़कर मायनी (अली ) की इबादत करता हूँ .अलवी मानते हैं कि अली ही वह शक्ति है जो हरेक युग में अवतार लेता है .और किसी न किसी व्यक्ति के द्वारा किसी को दर्शन और ज्ञान देता है जैसे अली ने सलमान फारसी के द्वारा मुहम्मद को कुरान बना कर दी थी .
अलवी अपनी आत्मशुद्धि के लिए रोज अली , फातिमा , हसन , हुसैन और मुहसिन को याद करते हैं यही उनकी इबादत है .
6-अली ही अल्लाह था 
जैसे कोई अपराधी समझता है कि मैंने अपने किये सभी अपराधों के सभी सबूत मिटा दिए हैं .लेकिन उसके कुछ न कुछ सबूत बचे रहते हैं . और उन्हीं सबूतों के अधर पर वह पकड़ा जाता है इसी तरह कुरान में कुछ ऐसे सबूत अभी भी बाकी हैं जिन से आसानी से सिद्ध किया हो जाता है कि अली ही अल्लाह था .कुरान कि इन आयतों को गौर से पढ़िए ,
."और उसी ने इंसान को पैदा किया ,और फिर ससुराली रिश्ता कायम किया "
 सूरा- फुरकान 25 :54 
"وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرً"25:54
"उसने दयालुता से अपना हिस्सा दे दिया और, उसे सचमुच उच्च ख्याति मिली "
 सूरा -मरियम 19 :50 
"وَوَهَبْنَا لَهُمْ مِنْ رَحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا  "19:50

तफसीरुल मीजान में इन आयतों की व्याख्या ने कहा है उसने अली यानि अल्लाह ने जगत बनाया और फिर इन्सान के अवतार में मुहम्मद से ससुराली सम्बन्ध किया . ( अली ने मुहम्मद की बेटी फातिमा से शादी की थी .इसलिए वह मुहम्मद का ससुर बन गया ) दूसरी आयत बताया है में
बताया है कि अली ने कुरान बनाने का सारा श्रेय अपने ससुर को दे दिया . जिस से मुहम्मद का नाम हो गया .और लोग मुहम्मद को ही रसूल कहने लगे .इस आयत में " अलिय्या " शब्द आया है . जो अली का नाम सूचित करती है इसके अतिरिक्त कुरान कि इन आयतों में भी अली का उल्लेख है जो उसे अल्लाह साबित करती हैं , देखिये ,विडियो 
Mola Ali is Superior than Allah. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri)

http://www.youtube.com/watch?v=T8RWj3iyQYA&feature=relmfu

इसके अलावा इन आयतों से भी अली की अल्लाह से तुलना की गयी है

1-वह अली उच्च और सबसे महान है" सूरा -बकरा  وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ " 2:255

2-वह अली उच्च और महान है " كَانَ عَلِيًّا كَبِيرً"सूरा - निसा 4:34

3- वह अली उच्च और सबसे महान है "هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ "सूरा - लुकमान 31:30

4-वह अली सबसे बड़ा और महिमाशाली है " وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ "सूरा- अश शूरा 42:4
सुन्नी चालाकी से अली शब्द को संज्ञा (Noun ) की जगह विशेषण ( Adjective ) बताते हैं . जबकि इन चारों आयातों में अली को सबसे बड़ा और सबसे महान कहा गया है , जो सिर्फ अल्लाह के लिए ही कहा जाता है .इस से भी साबित होता है की अली ही अल्लाह बना हुआ था .और सबूत के लिए देखिये विडियो
Prooving Mola Ali as Allah from Quran. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri)

http://www.youtube.com/watch?v=4stTblXIknA

7-अल्लाह की मौत 
इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट सिद्ध हो गया है कि अल्लाह नाम की कोई शक्ति या वास्तु नहीं थी . यह मुसलमानों का पाखंड था ताकि लोगों को डराकर मुसलमान बनाया जा सके . और कुरान कोई आसमानी किताब नहीं है . वह अली ने बनायीं थी जो अल्लाह बना हुआ था और एक मनुष्य .था
और जैसे सभी मनुष्य एक दिन मर जाते हैं वैसे ही 27 जनवरी सन 661 को (तदनुसार 21 रमजान हि० 40 ) में 63 की आयु में इराक के कूफा शहर में मर गए उनकी हत्या कर दी गयी थी और उसका मजार कुफा में मौजूद है .इस तरह असली अल्लाह उर्फ़ अली तो मर गया है .और मर कर तारा बन गया .उस से डरना और उसकी इबादत बेकार है .
सभी लोग अल्लाह की मौत की तारीख याद रखें और सबको बता दें 

( 200/51)

सोमवार, 24 जून 2019

अल्लाह सठिया गए !

इस लेख    का शीर्षक  पढ़ते ही   मुस्लिम     पाठक  फ़ौरन  कह   देंगे   कि   किसी  इस्लाम  के  विरोधी    ने इस्लाम  की निंदा करने के लिए  यह लेख  लिखा है  , क्योंकि  उनके  दिमागों   में   बचपन से   यह  बात   ठूँस ठूँस  के   भर दी   जाती   है कि " अल्लाह अजन्मा    है    ,और अमर है  ,  इसलिए अल्लाह को  "सठिया "  बताना     मूर्खता  की   बात   है   , क्योंकि जब  किसी  की  आयु   साठ  साल   हो  जाती है      , तो लोग कहते हैंकि  यह व्यक्ति  सठिया  गया   है   , और    सठिया   गए  लोग  अपना  दिमागी   संतुलन  खो   जाने से  .  उलटे  काम   करते हैं    ,  और   चालाक   लोग   उनकी  इस कमजोरी   का फायदा  उठाते   रहते हैं      . स विषय    को  और  स्पष्ट   करने के लिए  हमें  आयु   ( Age ) के बारे में  सही जानकारी  समझ लेना  चाहिए  .किसी भी  व्यक्ति  या  वस्तु  की आयु समय के  पैमाने   से  गिनी  जाती  है  ,जिसे   घंटे  , दिन  , महीने और  वर्षों  में  व्यक्त  किया  जाता  है  ,समय का  चक्र  अनवरत  चलता रहता  है   , गीता  में  समय  को काल   कहा  गया  है  , काल के प्रभाव   से  प्राणी   ,   मनुष्य  बूढ़े  होते   जाते हैं  , भवन  जर्जर  और   वस्तुएं  जीर्ण   हो  जाते    है  ,  काल  के  प्रभाव  से मनुष्य  शारीरिक  और  मानसिक  रोगों    से ग्रस्त  हो जाते  है  ,  काल के असर से कोई  नहीं  बच सका  ,गीता   में  स्पष्ट   कहा   है  ,

"कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धोलोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः ।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः ॥ (11:32

श्री भगवान ने कहा - मैं इस सम्पूर्ण संसार का नष्ट करने वाला महाकाल हूँ, इस समय इन समस्त प्राणीयों का नाश करने के लिए लगा हुआ हूँ, यहाँ स्थित सभी विपक्षी पक्ष के योद्धा तेरे युद्ध न करने पर भी भविष्य में नही रहेंगे। ( गीता 11:32)

 यहाँ  तक की  मुसलमानों  के  अल्लाह पर भी  काल   का  प्रभाव   होने लगा  यह  बात  इन हदीसों  से  पता चलती  हैं

1- अल्लाह  बूढ़ा होने लगा  था 
यह   उस  समय   की  बात है  जब  मुहमद अपने  लोगों को   यह  हदीसे बयान  कर रहे थे
मुसलमानों को एक और भ्रम है कि अल्लाह का जन्म नहीं हुआ , लेकिन हदीसों से पता चलता है कि उसका समय , जीवनकाल यानि आयु होती है और आयु उसी कि होती है जिसका जन्म होता है .चूँकि उस समय सन , महीने और तारीख नहीं थे इस लिए आरबी में केवल "दहर دهر" शब्द आया है जिस अर्थ " आयु Age , काल Period या समय Time शब्द से काम लिया गया है . हदीसें देखिये ,
"अबू हुरैरा ने कहा , रसूल ने कहा है ,अल्लाह ने कहा है , आदम की संतान मेरा काल पूछ कर मुझे दुखी कर देते हैं , उन से कहो मैं भी दिन और रात के चक्र में फसा हुआ हूँ .और समय की तरह समाप्त होने वाला हूँ "

Sahih al-Bukhari, Volume 8, Book 73, Number 200

"अबू हुरैरा ने कहा , रसूल ने कहा है ,अल्लाह ने कहा है , जो लोग मेरी अवधि पूछ कर मुझे तंग करते हैं , उन से कह दो मेरी आयु समय की तरह है जो दिन और रात समाप्त होती जाती है "

Sahih al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 583

इन हदीसों से साबित होता है कि अल्लाह समय धीमे धीमे समाप्त हो रहा था .

2-सठिया जाना  क्या   है ?
साठ  साल  से  अधिक  आयु  के  व्यक्ति  को   हिंदी  में " सठिया "  कहते  हैं   ,  और ऐसे  लोग सनकी  ( Cranky )   हो जाते  हैं  ,ऐसे लोग  एक  ऐसी  मानसिक  बीमारी  से  ग्रस्त  हो  जाते  है   , जिसे बोलचाल  में  सठिया जाना   कहते  है  ,  यह  एक  गंभीर  रोग  है  , मनो  वैज्ञानिक  इस  रोग  को द्विध्रुवी विकार(  "Bipolar disorder  )   कहते  हैं ,यह भी उन्मत्त अवसाद के रूप में जाना जाता है .सठिया  गया  व्यक्ति  बार  बार अपने  विचार  बदलता  रहता  है  , अच्छे  को  बुरा और  बुरे को  अच्छा  बताने  लगता  है ,  उसके दिमाग में   परस्पर विरोधी  विचारों  का चक्र  चलता रहता  है  ,  जो    कुछ  महीने  सालों   या  हमेशा बना   रहता   है    ,

(Bipolar disorder (also known as manic depression) ,causes serious shifts in mood,thinking, More than just a fleeting good or bad mood, the cycles of bipolar disorder last for days, weeks, or months, or forever)
3-अल्लाह   के  सठियाने   के सबूत 
हम  इस लेख  में अल्लाह  की  आयु  साठ   साल से अधिक  इसलिए मान  रहे हैं  क्योंकि अल्लाह  रसूल  को  वैसी  ही   बातें     सीखा रहा है जो  कुरान के  विरुद्ध  है   ,  सबूत के लिए  यह हदीसें  देखिये
"मुसलमान लोगों को धोखा दने के लिए कहते हैं , कि हमारा अल्लाह तो बड़ा न्यायकारी है . लेकिन हदीसों से साबित है कि अल्लाह के राज में बिलकुल अंधेर होता था .नीचे से ऊपर तक सभी बेईमान और भ्रष्टाचारी है .कोई मूर्ख भी ऐसे अल्लाह को नहीं मानेगा .

"अबू जर ने कहा कि एक बार रसूल के पास अल्लाह का फ़रिश्ता जिब्रील आया और बोला . मैं एक खुशखबरी लाया हूँ .कि अल्लाह बिना इबादत किये ही लोगों को जन्नत में दाखिल कर देगा .रसूल ने पूछा कि उसने चोरी , और बलात्कार भी किया हो तो भी .जिब्रील ने कहा हाँ , चाहे चोरी , डाका लूट , और बलात्कार या अप्राकृतिक सेक्स क्यों न किया हो , जन्नत जायेगा "

Sahih al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 579

"अबू मूसा ने कहा तब रसूल ने बताया कि जब कियामत के दिन हिसाब होगा तो अल्लाह हरेक पापी मुसलमान की जगह एक एक निष्पाप यहूदी या ईसाई को जहन्नम में घुसेड देगा .और उनके बदले मुसलमान को छोड़ देगा ."
Sahih Muslim, Book 037, Number 6665

4-अल्लाह को धोखा 
सोचिये  जब  मुसलमानों   का अल्लाह   खुद     सनकी   , और  मानसिक   रोगी   हो   . तो  उसकी    कमजोरी का फायदा   चालाक  मुसलमान क्यों   नहीं  उठाएंगे , जैसे अक्षम  प्रधान  मंत्री   (मनमोहन  सिंह )के समय  कांग्रेसियों  ने  बड़े बड़े  घोटाले  कर दिए  , मुसलमान भी यही  करेंगे  ,  यह  हदीस देखिये ,
.इस हदीस से पता होता है कि या तो अल्लाह लापरवाह है , या उसके फ़रिश्ते रिश्वतखोर हैं , वर्ना सबको उल्लू बनाकर नरक के लोग जन्नत में कैसे घुस गए .और उनको वहीँ क्यों रहने दिया गया .
" अनस बिन मलिक ने कहा की , रसूल ने बताया तब कुछ ऐसे भी लोग होंगे जो अपना हुलिया और रंग बदल लेंगे .फिर नजर बचा कर जहन्नम से भाग कर जन्नत में घुस जायेंगे और जन्नत के लोग उनको " अल जहन्नमयीन Al-Jahannamiyin'الجهنّميين " कहकर स्वागत करेंगे "

Sahih al-Bukhari, Volume 8, Book 76, Number 56

5-अल्लाह पर ईमान  रखना खतरनाक  है 
इस लेख का उद्देश्य  उन  लोगों  को सचेत  करना है   ,जो  अल्लाह पर  ईमान  रखते  यानी  उस पर विश्वास  रखते  है    , और  दूसरों  को भी यही करने पर  दवाब  डालते   है  , ऐसे लोगों  को पता होना  चाहिए कि ऐसे  सठिया  गए  सनकी  , अल्लाह  पर ईमान  रखने  से कभी न कभी  पछताना  पड़ेगा  , क्योंकि क्या जाने   कब अल्लाह  पर  सनक  सवार  हो जाये    , और   वह  सभी ईमान  वालों  को  जहन्नम  में  भेज  दे  ,  और काफिरों  को  जन्नत में   भेज  दे !मानसिक  रोगी   पर  भरोसा करना  बेकार     है  , भले  ,बुरे  कर्मों   का  फल  खुद  मिल   जाता  है  ,
अल्लाह  पर ईमान रखने  की  बजाय  उस  से  दूर  रहने  में ही भलाई  है 

(258)

रविवार, 23 जून 2019

सेकुलरवाद अर्थात कांग्रेसी जिहाद

आजकल चुनाव माहौल  है , और कांग्रेसी अपने निकम्मेपन से लोगों  का ध्यान  हटाने के लिए सेकुलरिज्म   को  ही  देश  की सबसे बड़ी  जरुरत  साबित करने में   लगे  हुए  है   . और उनके  साथ  कुछ  हिन्दू  विरोधी  मानसिकता   वाले   लोग भी  सुर में सुर  मिलाने  लगते  हैं  .  लेकिन गौर  करने की  बात  है कि जब भी यह कांग्रेसी   सेकुलरिज्म   की   वकालत   करते  हैं    तो उनकी  बातों से ऐसा  प्रतीत  होता  है  कि हिन्दू  स्वाभाविक रूप  से  संप्रदायवादी    और  मुसलमान   सेकुलर  होते   हैं  . जबकि   सच्चाई  तो  यह  है  कि  जिहाद  और सेकुलरवाद  एक  ही  सिक्के  के  दो पहलु   हैं  , क्योंकि  जैसे   जिहाद   का  असली  मकसद  हिंदुओं  को मिटाना  है , उसी  तरह  कांग्रेसी सेकुलरवाद   का असली उद्देश्य  हिंदुओं   में  धर्म  के निष्ठां  कम  करके ,देश भक्ति  की भावना   को  समाप्त  करना  है , जिस देश भक्ति  के जोश  से  यह  देश  आज  तक इस्लामी  देश  होने  से  बचा  हुआ  है   .
आज  यह  बात इसलिए  और भी  प्रासंगिक   हो  गयी  है    कि  बहुत  कम  लोग  जानते  होंगे कि  नेहरु -गांधी परिवार  के सभी  लोग   एक  मुस्लिम  जिहादी   गयासुद्दीन  गाजी   के  वंशज  हैं  ,  यहाँ तक   इंदिरा  गांधी भी  मुसलमान   थी  ,   और राहुल का  दादा फिरोज  खान  भी  मुसलमान  था  ,    इसी  लिए   इंदिरा  ने  सेकुलरिज्म  के  नाम  से  वही  हिन्दू  विरोधी नीति अपनाई  थी ,जो पांच सौ  साल पहले  अकबर  ने  अपनायी  थी  . जिसका फल  हिन्दू  औरंगजेब के समय  तक भोगते  रहे  .  जैसे  इंदिरा  के  सेकुलरिज्म   का  विषफल   आज  के हिन्दू  भोग रहे  हैं    . 
इसलिए  इस  बात   को स्पष्ट करने  के  लिए  पहले  हमें अकबरी  सेकुलरिज्म   के  बारे में  जानना   जरुरी   है , और  अकबर की हिन्दू  विरोधी  कपटनीति   के  बारे में  प्रमाणिक  जानकारी  हमें प्रसिद्ध इतिहासकार " किशोरी शरण  लाल (K.S.Lal) की  किताब " (Indian Muslims  who are they?)  " से  मिलती  है  . और  जिस  नीति  पर  वर्त्तमान   कांग्रेस  सरकार  चल  रही  है  . के एस  लाल  की  किताब के अनुसार अकबर का शासन इस्लामी उन्माद से प्रारंभ हुआ। किन्तु धीरे-धीरे उसकी समझ में यह बात आ गई कि भारत में चैन से राज्य करना है तो मुसलमान अमीरों का भरोसा छोड़कर हिन्दुओं का, विशेष रूप से राजपूतों का, सहयोग और मित्रता प्राप्त करनी होगी। जहाँ मुसलमान अमीर अपने स्वार्थवश होकर शासन के विरुद्ध मंत्रणा करते रहते थे, राजपूतों के शौर्य और स्वामिभक्ति पर अकबर मुग्ध हो गया था .लेकिन   वह  जानता  था  कि  उसके  पहले  भारत में  जितने  भी मुस्लिम  शासक  हुए  हैं  , सभी  दिलों  में  हिंदुओं  के प्रति   नफ़रत  और  हीनता  की  भावना  कूट कूट  कर  भरी  है  ,  जैसी  कांग्रेसिओं   में   है
1-मुसलमानों  की दृष्टि  में  हिन्दू 
यद्यपि  कुरान और हदीसों  में  हिंदुओं   का उल्लेख  नहीं   है   ,  लेकिन  भारत  में आने  वाले  हमलावर    मुसलमान   हिंदुओं   के बारे में  जो  विचार  रखते थे  वह फ़ारसी   कवि " अबुल हसन  यमीनुद्दीन खुसरू  - ابوالحسن یمین‌الدین خسرو‎ "   ( 1253–1325 CE ) ने  अपनी  मसनवी   में   इन  शब्दों  में  बयान  की  है  .मुस्लिम इतिहासकारों द्वारा दी गई उपरोक्त घटनाओं के विवरण को पढ़कर जिनके अनेक बार वे प्रत्यक्षदर्शी थे, किसी भी मनुष्य का मन अपने अभागे हिन्दू पूर्वजों के प्रति द्रवित होकर करुणा से भर जाना स्वाभाविक है .  हमारे धर्मनिरपेक्ष शासकों द्वारा बहुधा  प्रशंसित  धर्मनिरपेक्ष अमीर खुसरो अपनी मसनवी में लिखता है-

जहां रा  कि दीदम  आमदे रस्म  पेश ,
कि हिन्दू बुवद सैदे तुर्का हमेश .

अरज  बेहमदे निस्बते  तुर्को  हिन्दू 
कि तुर्क अस्त चूं शेर  हिन्दू  चूं आहू  , 

जे रस्मे कि रफतस्त चर्खे र वां रा 
बुजूद अज पये तुर्क शुदं हिन्दुऑरा.
कि तुर्कस्त गालिब बरेशां चूँ कोशद 
 कि हम  गीरद औ हम खरद औ फरोशद .

अर्थात्‌- 'संसार का यह नियम अनादिकाल से चला आ रहा है कि हिन्दू पर सदा तुर्कों अधिकार  रहा है,
तुर्क और हिन्दू का संबंध इससे बेहतर नहीं कहा जा सकता है कि तुर्क सिंह के समान है और हिन्दू हिरन के समान ,
आकाश की गर्दिश से यह परम्परा बनी हुई है कि हिन्दुओं का अस्तित्व तुर्कों के लिये ही है ,
क्योंकि तुर्क हमेशा गालिब होता है और यदि वह जरा भी प्रयत्न करें तो हिन्दू को जब चाहे पकड़े, खरीदे या बेचे . "

2-अकबर का  पाखंडी  भाईचारा 

इंदिरा  और  सोनिया  कि  तरह  अकबर  भी  चाहता था  कि उसके  वंशज  पीढ़ियों  तक  भारत  पर राज  करते  रहें  ,.इसलिए   सबसे  पहले तो  अकबर  ने राजपूतों से विवाह संबंध बनाने के प्रयत्न किये क्योंकि इस रिश्ते से ही वह उन्हें स्थायी रूप से अपनी ओर मिला सकता था। किन्तु राजपूत तो आपस में छोटे बड़े वर्गों में बंटे थे। उच्च वंश के राजपूत नीचे वंश के राजपूत को अपनी बेटी नहीं देते थे, फिर तुर्क को कैसे दें?फिर अकबर ने राजपूतों से कहा भी वह बादशाह है, और अपने देश से बहुत दूर है। इसलिये न तो वहाँ से शहजादियों को विवाह कर ला सकता है और न अपनी शहजादियों को वहाँ ब्याह सकता है। इसलिये आप लोग, जो यहाँ राजा हैं, हमारी शहजादियाँ लें और हमें अपनी शहजादियाँ दें। किन्तु राजपूत, मुगल शहजादियाँ लेने को, अपने धर्म खो देने के भय से,. क्योंकि  अधिकांश  हिन्दू राजा चित्तौड़  के  महाराणा प्रताप  को अपना आदर्श  और  हिन्दू धर्म  का   प्रतिक   मानते  थे  . और अकबर के  पाखंडी  भाईचारे के जाल में  नहीं  फसे  . तब अकबर  ने एक ऎसी  नीति  अपनायी  जिसे आजकल  सेकुलरिज्म कहते  हैं  . इसका  एक  मात्र  हिन्दू  राजाओं   में  हिन्दू धर्म  के प्रति  निष्ठां  कम  करना और इस्लाम  के प्रति  लगाव  पैदा  करना  था  ,
3-अकबरी  सेकुलरिज्म 
वास्तव  में  कांगरसियों   की  तरह  अकबर   को  सिर्फ अपनी  सत्ता   प्यारी   थी  . फिर  भी उसने   हिन्दू  राजाओं   में अपने प्रति  आक्रोश  कम   करने  के लिए  सभी  धर्मो   को सामान बताने   का  एक   नया  सिद्धांत  निकाल  लिया  और उसका  नाम  " दीने इलाही  -دین الهی‎  "  रख   दिया  . जिसका  अर्थ  "Religion of God"     होता   है . यही  नहीं  अकबर ने  सन  1575 में सीकरी  में एक  इबादत  खाना   भी  बनवा  दिया  . जिसमे  सभी  धर्मो  के  ग्रन्थ  पढ़े  जाते  थे  .  उस  समय  भारत की  राजधानी  दिल्ली  नहीं  आगरा  थी  .
इस प्रकार   सत्ता  बचाने  के लिए    सेकुलरिज्म का   अविष्कार सबसे  पहले  इंदिरा  गांधी  ने  नहीं   बल्कि अकबर  ने  किया  था  .और  अपने असली जिहादी     रूप पर पर्दा  डालने  के लिए अकबर ने  इस निति का नाम  "गंगा जमनी  तहजीब " रख  दिया 
लेकिन  जब  लोग अकबर  के  इस  सेकुलरिज्म  के झांसे में  नहीं   आये  तो  अकबर  ने  अपना  असली   हिन्दू विरोधी  राक्षसी   रूप   प्रकट  कर   दिया और 1578 ई. में, अकबर ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। अबुल फजल अपने 'अकबरनामे' में इस घटना का वर्णन करते हुए लिखते हैं-'दुर्ग में राजपूत योद्धा थे किन्तु लगभग 40,000(चालीस हज़ार) ग्रामीण थे जो केवल युद्ध देखने और वहाँ पर दूसरे काम के लिए एकत्रित थे। विजय के पश्चात्‌ प्रातःकाल से दोपहर तक महायोद्धा अकबर की तेजस्विता में ये अभागे लोग भस्म होते रहे। लगभग सभी आदमी कत्ल कर दिये गये। (71

यह   क्रूरता   और सभ्य लोगों के युद्ध नियमों का उल्लंघन, अकबर के माथे पर कलंक है जो कभी नहीं छूटा। छूटेगा भी नहीं.जिस  तरह   इंदिरा  द्वारा  इमरजेंसी  में  किये  गए  पाप  सात पीढ़ी  तक  नहीं  धुलेंगे  .

4-वाल्मीकी  समाज  द्वारा  धर्म   की रक्षा


जितने  भी  हिन्दू विरोधी  इतिहासकार  हैं  , और सभी  कांग्रेसी  अकबर  को सेकुलर और  एक आदर्श   बादशाह   बताते  हैं  , लेकिन  वास्तव  में सेकुलर  ऐसे लोग  होते  हैं   जिनका  कोई  धर्म  ईमान  नहीं  होता  . उनका धर्म सिर्फ  मौज  मस्ती  और  अय्याशी  करना  होता , अकबर  ऐसा ही एक निधर्मी  व्यक्ति था  .  उसे  पता  था  कि उसके  दादा  बाबर  ने जब   अयोध्या  के राम  मंदिर  को ध्वस्त  किया  था  , तो  हिंदुओं  में विद्रोह  भड़क  गया  था  ,  क्योंकि हिन्दू  भगावन  राम  के  लिए कुछ  भी  कर  सकते  थे   . और  जब  अकबर   ने  अपनी  राजधानी  आगरा  बनाई  तो  उसे पता  चला कि  भगवान  राम का  प्रमाणिक  इतिहास  महर्षि  वाल्मीकि  ने  लिखा  था  ,  जिनके वंशज  और  समुदाय  के  लोग  यमुना  के  आसपास  के  गावों   में  रहते  हैं  ,

इसलिए  अकबर  ने वाल्मीकि  समुदाय  को निशाना  बना  कर  हिंदुओं  को  अपमानित  करके उनमे फूट  डालने की एक तरकीब  निकाली , इसका  प्रमाण  हमें  एक यूरोपियन  यात्री   "फ्रेंकोइस  बर्नियर ( Francois Bernier  )   द्वारा  अकबर  के  बारे  में  लिखे  गयी  डायरी  से  मिलता  है  . यह  यात्री  अकबर  के  समय  आगरा  में  दो साल  रहा  था   और इतने  समय  में उसने  अकबर  के  बारे  में  जो  जानकारी  जमा  की थी  उनका  अनुवाद  एक  बेल्जियन लेखक "ड्रिक  कोलियर  (  Dirk Collier  )   ने  किया  है  .

बर्निअर  लिखता  है  कि  अकबर  सिर्फ   नाम  का  मुसलमान था  , उसने  कुरान  में  बताये चार पत्नियों  के  कानून  पर  लात  मार  कर अपने  हरम  में करीब   300  पत्नियां  और  5000 रखैलें भर रखी  थी  . इसके अलावा   उन  औरतों  पर  नजर  रखने  के  लिए  सैकड़ों  हिजड़े भी    महल  में  रहते  थे  , चूँकि उनको  बहार  जाने  की अनुमति  नहीं  थी  ,   इसलिए  सभी  महल  के  आँगन  में ही   पेशाब  और  टट्टी   किया   करते   थे  . जिसका वजन  आज  के  हिसाब  से  सैकड़ों  क्विंटल    होता  है  . इसलिए  अकबर  ने  आसपास  के गावों  से  सभी   वाल्मीकि   लोगों  को पकड़  कर  अगरा   बुलवाया  , और  उन  पर शर्त   कि  यातो   वह  इस्लाम  स्वीकार  करें  , अथवा  हरम   की औरतों  का मलमूत्र  मटकों   में  भर  कर  यमुना के  पानी  में  बहाया  करें  . 
यह  बात "तारीखे  बदायूनी  ",  "अकबर  नामा  "और  "आईने अकबरी "   में     मौजूद  है  . बर्नियर   आगे  लिखता  है  कि  वाल्मीकि  समुदाय  ने  अपना धर्म  छोड़ने   से  साफ  इंकार  कर  दिया था  , और  मजबूरी  में  ऐसा  घृणित  और  अपमान  भरा    काम  करना   कबुल  किया  था  ,  जो  अकबर  के  बाद  भी उसकी  औलादों  ने    चालू    रखा  ,

आज   जो  हिन्दू   खुद  को  राम  भक्त   कहते   हैं और  राम  कथा   के प्रथम  रचयिता  वाल्मीकि  ऋषि  की  लिखित  रामायण  को  प्रमाणिक     मानते हैं  उन्हें    वाल्मीकि  समुदाय     का  आभार  प्रकट  करना  चाहिए  ,  और उनके  इस  अप्रतिम   धर्म  प्रेम  और अद्वितीय  बलदान   को   याद  करना  चाहिए  , क्योंकि  धर्म  की  रक्षा  करने  वाले  लोग ही   पूज्यनीय    होते  हैं  ,

5--विश्नोई  समाज  और  अकबर 

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में  विश्नोई  संप्रदाय के अनेक परिवार रहते हैं। इस सम्प्रदाय के लोगों की धार्मिक प्रतिबद्धता है कि हरे वृक्ष न काटे जाये और किसी भी जीवधारी का वध न किया जाये .विश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत जाम्भी जी की समाधि पर बनी छतरी पर मुस्लिम काल में लोधी मुस्लिम सुल्तानों द्वारा अधिकार कर लिया गया था। अकबर जैसे उदार बादशाह से जब फरियाद की गई तो उसने भी इन पाँच शर्तों पर यह छतर विश्नोई  सम्प्रदाय को वापिस की- 

1. मुर्दा गाड़ो, 2. चोटी न रखो, 3. जनेऊ धारण न करो, 4- दाढ़ी रखो, 5-. विष्णु  के नाम लेते समय विस्मिल्लाह बोलो। 

विश्नोइयों ने मजबूरी की दशा में यह सब स्वीकार कर लिया। धीरे-धीरे जैसा कि अकबर को अभीष्ट  था, विश्नोई दो तीन सौ वर्ष में मुसलमान अधिक, हिन्दू कम दिखाई देने लगे। हिन्दुओं के लिये वह अछूत हो गये। परन्तु उन्होंने अपनी मजबूरी को भुलाया नहीं। आर्य समाज के जन्म के तुरंत बाद ही उन्होंने उसे अपना लिया। बिजनौर जनपद के मौहम्मदपुर देवमल ग्राम के द्गोख परिवार और नगीना के विश्नोई सराय के  विश्नोई इसके उदाहरणहैं.

. हमें  यह  बात  नहीं  भूलना  चाहिए  कि हिन्दू धर्म ऐसे  लोगों  के  कारण  बचा  हुआ  है .  यह संसार का अद्‌भुतही  आश्चर्य है  कि  इस्लाम के जिस आतंक से पूरा मध्य पूर्व और मध्य एशिया  कुछ दशाब्दियों में ही मुसलमान हो गया वह 1000 वर्षों तक पूरा बल लगाकर भारत की आबादी के केवल 1/5 भाग ही धर्म परिवर्तन कर सका।

इन बलात्‌ धर्म परिवर्तित लोगों में कुछ ऐसे भी थे जो अपनी संतानों के नाम एक लिखित अथवा अलिखित पैगाम छोड़ गये-'

हमने स्वेच्छा से अपने धर्म का त्याग नहीं किया है। यदि कभी ऐसा समय आवे जब तुम फिर अपने धर्म में वापिस जा सको तो देर मत लगाना। हमारे ऊपर किये गये अत्याचारों को भी भुलाना मत।' 

बताया जाता है कि जम्मू में तो एक ऐसा परिवार है जिसके पास ताम्र पत्र पर खुदा यह पैगाम आज भी सुरक्षित है। किन्तु हिन्दू समाज उन लाखों उत्पीड़ित लोगों की आत्माओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में असमर्थ रहा है। कश्मीर   के ब्रहाम्णों जैसे अनेक  दृष्टांत है जहाँ हिन्दूओं ने उन पूर्वकाल के बलात्‌ धर्मान्तरित बंधुओं के वंशजों को लेने के  प्रश्न  पर आत्म हत्या करने की भी धमकी दे डाली और उनकी वापसी असंभव बना दी और हमारे इस धर्मनिरपेक्ष शासन को तो देखो जो मुस्लिम प्रशासकों  के इन कुकृत्यों को छिपाना और झुठलाना एक राष्ट्रीय कर्तव्य समझता है।

 . इन  तथ्यों  से स्पष्ट  होता  है कि  हिन्दू धर्म  में   जाती के  आधार  पर कोई  ऊँच नीच   नहीं  है  ,  बल्कि  कर्मों  के  अधर पर  देखा   जाये तो   सेकुलर  लोग   ही नीच  और  अछूत  हैं  ,  और  उनका  नाम  लेना या  मुंह  देखना   भी  महापाप  है  .  क्योंकि   अकबर की तरह  इन  लोगों   ने  हिंदुओं  को  जातियों   में  बाँट  कर  फुट  डाली  है  , ताकि  हिन्दू  कमजोर  हो  जाएँ और  यह  लोग निर्भय  होकर   देश  को  लुटते रहें  और  इन्हीं   का   खानदान   पीढ़ी दर् पीढ़ी  राज  करता  रहे  ,
नोट- इस  लेख का पूर्वार्ध "भंडाफोडू " ब्लॉग  में बुधवार, 24 अप्रैल 2013 को प्रकाशित  हुआ था , जिसका शीर्षक "इस्लामी सेकुलर आतंकवाद !था

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शनिवार, 22 जून 2019

सम्भोग जिहाद !

इस्लाम  और  जिहाद  एक दूसरे के बिना नहीं   रह  सकते . यदि  इस्लाम शरीर  है ,तो जिहाद  इसकी आत्मा है . और जिस दिन इस्लाम  से जिहाद  निकल  जायेगा  उसी दिन  इस्लाम  मर  जायेगा . इसीलिए  इस्लाम को जीवित रखने के लिए मुसलमान  किसी न किसी बहाने और   किसी  न किसी  देश में  जिहाद करते  रहते हैं . इमका एकमात्र उद्देश्य  विश्व  के सभी  धर्मों  , संसकृतियों   को नष्ट करके  इस्लामी हुकूमत  कायम  करना  है . अभी तक  तो मुसलमान  आतंकवाद  का सहरा  लेकर  जिहाद  करते  आये थे ,लेकिन  इसी  साल  के अगस्त  महीने में जिहाद  का एक नया  और अविश्वसनीय  स्वरूप   प्रकट  हुआ है ,जो कुरान से  प्रेरित  होकर  बनाया गया है . लोगों  ने इसे "सेक्स  जिहाद ( Sex  Jihad )  का नाम  दिया  है .चूंकि  जिहादियों  की मदद करना भी  जिहाद  माना  जाता है ,इसलिए सीरिया में  चल रहे युद्ध ( जिहाद )  में  जिहादियों  की वासना शांत करने के लिए    औरतों  की  जरुरत  थी . जिसके लिए  अगस्त में  बाकायदा  एक फ़तवा   जारी  किया   गया था .  और उसे पढ़  कर  ट्यूनीसिया   की   औरतें  सीरिया  पहुँच  गयी  थी .और  जिहादियों   के साथ सम्भोग  करने के लिए  तैयार  हो गयीं ,और  मुल्लों ने  कुरान  का हवाला  देकर इस निंदनीय   कुकर्म  को जायज  कैसे  ठहरा  दिया  इस लेख में इसी   बात को स्पष्ट   किया  जा रहा है . ताकि लोग  इस्लाम् के इस घिनावने असली  रूप को देख सकें ,
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है 
अल्लाह चाहता है कि  मुसलमान   जिहाद के लिए अपने बाप ,भाई और पत्नियों को भी छोड़ दें ,तभी अल्लाह खुश होगा  , जैसा की कुरान में  कहा है
"अल्लाह   तो उन्हीं  लोगों  को अधिक पसंद  करता  है ,जो अल्लाह की ख़ुशी के लिए पंक्ति  बना कर जिहाद  करते हैं  " सूरा -अस सफ 61 :4
" हे नबी  कहदो ,तुम्हें  अपने बाप ,भाई  , पत्नियाँ  और  जो माल तुमने कमाया है ,जिन से तुम  जितना  प्रेम  करते हो  , और उनके छूट जाने का  डर  लगा  रहता है .लेकिन  उसकी तुलना में अल्लाह के रसूल को  जिहाद  अधिक प्रिय  है "
 सूरा -तौबा 9 :24 
2-जिहाद में औरतों से सम्भोग  
मुसलमान  जितने भी अपराध  और  कुकर्म  करते हैं , सब  कुरान से प्रेरित  होते  हैं , क्योंकि  कुरान  हरेक कुकर्म को जायज ठहरता है .जिस से  अपराधियों  की  हिम्मत  बढ़  जाती है , और "सेक्स जिहाद "  कुरान की इस आयत के आधार  पर किया जा रहा है ,

" اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ  "
" हे नबी  हमने तुम्हारे लिए वह  सभी ईमान  वाली ( मुस्लिम )  औरतें  हलाल  कर दी हैं  ,जो रसूल के  उपयोग  के लिए  खुद को  " हिबा- هِبة  " ( समर्पित ) कर दें "
सूरा -अहजाब 33: 50
" and  believing woman who offers herself freely  use to the Prophet -Sura-ahzab33:50
नोट -अरबी  शब्द  हिबा  का अर्थ  अपनी किसी  चीज  दूसरों  को उपयोग के  लिए सौंप   देना  , हिबा कुछ  समय के लिए और  हमेशा के लिए भी हो सकता  है . हिबा में  मिली गयी चीज का   जैसे चाहें   उपयोग किया जा सकता है . चाहे  वह  औरत हो  या कोई वस्तू
3-जिहाद्के लिए औरतों का समर्पण 
सामान्यतः  एक  चरित्रवान  ,और शादीशुदा औरत   किसी भी दशा में  खुद को  दूसरे मर्द   के हवाले नहीं  करेगी  , जबकि उस  को यह भी पता हो  कि  उसके साथ  सहवास  किया  जायेगा .लेकिन  मुहम्मद  साहब ने   कुरान में ऐसे  नीच  काम को भी   धार्मिक   कार्य   बना दिया .  जिसका पालन  आज भी  पालन  कर रहे है , इसके पीछे  यह  कारण  है  ,  कि  इस्लाम  औरत को  भोगने की व चीज  है .मुहम्मद  साहब  जब भी जिहाद के लिए  जाते थे ,तो अपनी औरतों को घर में  बंद कर देते थे , और जिहादियों  के साथ नयी औरतें  पड़ते  रहते  थे . और  जिहादी  नयी  औरतों  के लालच में अपनी औरतें रसूल  के हवाले कर देते थे .खुद को रसूल  के हिबा करने के पीछे  यह ऐतिहासिक  घटना  है , हिजरी सन  5  के  शव्वाल महीने में  मुहम्मद साहब को जब यह पता चला कि  मदीना के सभी कबीले  के लोग उनके विरुद्ध   युद्ध   की  तयारी   कर रहे हैं .और उन्होंने  खुद के बचाव के लिये  खन्दक  भी  खोद  रखी  है . तब  मुहम्मद साहब ने  खुद आगे बढ़ कर  उन पर हमला    करने  के कूच   का हुक्म  दे दिया . इसके लिए 1500 तलवारें 300  कवच , 2000 भाले  1500 ढालें जमा कर लीं  थी .इस  जिहादी   लस्कर में  जिहादियों   की औरतें  भी  थी .  जिहादी  तो युद्ध में  नयी औरतों  के  लालच  में  गए थे .  और अपनी औरतें  रसूल  को  हिबा  कर  गए  थे .   और  रसूल ने   उन औरतों  के साथ  सम्भोग को  जायज बना दिया ,  तभी कुरान की यह आयत   नाजिल  हुई थी .जिस के अनुसार खुद को  जिहाद के लिए  अर्पित करने वाली  औरतों  से  सम्भोग करना जायज है .
4-जिहाद अल निकाह 
अंगरेजी  अखबार   डेली  न्यूज (DailyNews )  दिनांक  20 सितम्बर  2013  में प्रकाशित   खबर  के अनुसार  सीरिया  में होने वाले  युद्ध  ( जिहाद )   में  जिहादियों   लिए  ऐसी  औरतों  की  जरुरत    थी  , जो जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करके उनकी वासना  शांत कर सकें  , ताकि वह बिना थके  जिहाद करते रहे,  इसके लिए  अगस्त   के अंत में  एक सुन्नी  मुफ़्ती  ने फतवा  भी जारी कर दिया  था . जो " फारस  न्यूज  ( FarsNews  )  छपा  था .इस  फतवे की खबर पढ़ते ही " ट्यूनीसिया  ( Tunisia )  की  हजारों  विवाहित और कुंवारी  औरतें   सीरिया  रवाना  हो गईं .और जिहाद के नाम  पर   जिहादियों  के साथ  सम्भोग  करने के लिए राजी  हो गयीं .  ट्यूनिसिया  के " आतंरिक   मामले के  के मंत्री (  Interior Minister  )"लत्फी बिन  जद्दू - لطفي بن جدو " ने ट्यूनिसिया  की National Constituent Assembly में  बड़े  गर्व   से  बताया   कि   जो औरतें  सीरिया  गयी  है ,उनमे अक्सर ऐसी औरतें  हैं  ,जो  एक दिन  में   20 -30  और यहांतक  100  जिहादियों  के साथ  सम्भोग  कर सकती  हैं .और  जो औरतें  गर्भवती  हो जाती  हैं  , उन्हें    वापिस भेज  दिया  जाता  है ,  जिस मुफ़्ती  ने   इस  प्रकार   के जिहाद  कफतावा दिया  था ,उसने  इस का नाम  "  जिहाद  अल  निकाह  - الجهاد النِّكاح  " का नाम  दिया  है .सुन्नी  उल्रमा के अनुसार  यह  एक ऐसा   पवित्र और    वैध  काम  है  ,जिसमे  एक औरत  कई कई जिहादियों  के साथ  सम्भोग करके  उनकी  वासना  शांत  कराती है .लत्फी  बिन जददू  ने यह भी  बताया कि मार्च से  लेकर अब तक   छह  हजार ( 6000 )औरतें  सीरिया  जा चुकी हैं ,और कुछ  की आयु  तो केवल  14  साल  ही है .
 http://www.hurriyetdailynews.com/tunisian-women-waging-sex-jihad-in-syria-minister.aspx?pageID=238&nID=54822&NewsCatID=352

5-सेक्स का फ़तवा 
किसी भी विषय  या समस्या  के बारे में कुरान के आधार पर  जोभी धार्मिक निर्णय  किया जाता है ,उसे फतवा  कहा  जाता है  , और मुसलामनों के लिए   ऐसे फतवा  का पालन  करना  अनिवार्य   हो जाता  है . चूँकि  इन  दिनों  सीरिया में  जिहाद  हो रहा है , जिसमें  हजारों  जिहादी  लगे हुए  हैं  .और  उनकी वासना शांत  करने के लिए औरतों की जरुरत  थी , इस लिए एक सुन्नी मुफ़्ती " शेख  मुहम्मद   अल आरिफी -  شيخ محمّد العارفي  "  ने इसी साल अगस्त में एक फतवा  जारी  कर दिया  था ,इस फतवा में कहा है कि सीरिया  के जिहादियों  की कामेच्छा (  sexual desires  )  पूरी  करने  के लिए और    शत्रु को मारने उनके निश्चय  में  मजबूती (  sexual desires and boost their determiation in killing Syrians.
  प्रदान  करने के लिए " सम्भोग  विवाह"  यानी "अजवाज  अल जमाअ -الزواج الجماع  "  जरूरी  (intercourse marriages )है .फतवा में कहा है   ,जो भी औरत  इस  प्रकार  के  सेक्स  से जिहादियों  की मदद  करेगी उसे  जन्नत  का वादा   किया जाता है ( He also promised “paradise” for those who marry the militants  )

  ووعد أيضا "الجنة" بالنسبة لأولئك الذين يتزوجون من المسلحين "
    यह फतवा  कुरान  की इस आयत के आधार पर  जारी  किया  गया  है ,
" जिन लोगों ने अपने मन  और  शरीर से जिहाद किया तो ऐसे   लोगों  का  दर्जा सबसे  ऊंचा   माना  जाएगा " सूरा -तौबा 9 :29
6-जिहाद के लिए योनि संकोचन 
मुसलमान   जानते हैं कि भारत में अभी प्रजातंत्र  है ,  और इसमे  जनसंख्या   का  महत्त्व  होता है .इसलिए वह लगातार  बच्चे  पैदा करने  में लगे रहते हैं .और  लगतार  बच्चे पैदा  करने से  उनकी औरतों  योनि इतनी ढीली  हो  जाती  है ,कि  उसमे उनका पति  अपना  सिर  घुसा  कर अन्दर  देख  सकता   है .और अपनी औरतों  की योनि  को संकोचित ( Vaginal Shrink   )  करवाने के लिए धनवान  मुसलमान " हिम्नोप्लास्टी -hymenoplasty   "   नामक ओपरेशन  करवा  लेते थे .चूंकि  सीरिया में सेक्स जिहाद में  एक एक  औरत दिन  में सौ सौ  जिहादियों  के साथ  सम्भोग करा  रही है , जिस से उनकी योनि ढीली    हो जाती  है . और युद्ध के समय ओपरेशन करवाना संभव    नहीं था .इसलिए पाकिस्तान की  एक दवा कंपनी(  Pakistan's pharmacies ) ने एक क्रीम  तैयार  की है .जो  कराची  से सीरिया  भेजी   जा रही  है .पाकिस्तान  के अखबार "एक्सप्रेस ट्रिब्यून ( Express Tribune  )    में  दिनांक20    अगस्त 2013 की खबर के अनुसार  कराची में  इन दिनों " योनि संकोचन  (   Vaginal Shrink Cream," )  ले लिए एक क्रीम   बिक रही  है . जिसे लोग वर्जिन  क्रीम ( Virgin Cream" )   भी  कह रहे हैं .इसमे उत्पादक ने  दावा किया है कि   कितनी भी ढीली योनि हो , इस क्रीम  के प्रयोग से  18  साल  की कुंवारी  लड़की की योनि जैसी  सिकुड़ी  और सकरी  बन   जाएगी .इसी  अखबार की सह संपादक "हलीमाँ  मंसूर  "खुद इस क्रीम  को  देखा  , जिसके डिब्बे पर एक हंसती  हुई लड़की की तस्वीर  है .यह क्रीम  दो नामों  से बिक रही  है 1. B-Virgin’, (the package displaying a youthful girl smiling at white flowers).2 . और दूसरी का नाम 18 Again (Vaginal Shrink Cream,)   है  . जो  शीशी  में मिल रही है .इस पर लिखा है "  promise to restore a woman's virginity. "यह  क्रीम   बड़ी   मात्रा में  पाकिस्तान से  सीरिया भेजी  जा रही है  , ताकि संकुचित योनि   पाकर  जिहादी  दिल से जिहाद   करते रहें .
‘Re-virginising’ in a tube: ‘Purity’ for sale at Pakistani pharmacies
http://blogs.tribune.com.pk/story/18175/re-virginising-in-a-tube-purity-for-sale-at-pakistani-pharmacies/
7-सेक्स जिहाद विडिओ 
शेख  मुहम्मद अल आरिफी  ने टी वी   पर  जो सेक्स  जिहाद का फतवा  दिया  था , वह  यू ट्यूब   पर  मौजूद है ,इस विडिओ का नाम   है  , जिहाद  अल निकाह -jihad al nikah- جهاد النكاح ... فتوى حقيقة او بدعة "

http://www.youtube.com/watch?v=2ftO8Zkvl18

यह लेख पढनेके  बावजूद जो लोग इस्लाम  को धर्म मानते हैं  और मुसलमानों  से सदाचारी  होने की उम्मीद  रखते हैं  ,उन्हें अपने  दिमाग  का इलाज करवा . वास्तव में देश में  जितने भी  बलात्कार  हो रहे हैं  , सबके पीछे इसलाम की तालीम  है .जिसका भंडाफ़ोड़  करना  हरेक  व्यक्ति  का  कर्तव्य  है .समझ  लीजिये इस्लाम  का अर्थ शांति नहीं समर्पण ( surrendar )  है . जिहाद का अर्थ परिश्रम  करना नहीं  आतंक ( terror )  है , कुरबानी का   अर्थ त्याग नहीं जीव हत्या ( slaughter ) है .और  रहमान  का अर्थ दयालु नहीं हत्यारा ( killer )  है .यदि इतना भी  समझ लोगे तो  इस्लाम    को समझ लोगे .
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शुक्रवार, 21 जून 2019

अल्लाह की गवाही - धरती भी माता होती है !!

हजारों  साल  से  भारत   के  हिन्दू  भारत भूमि  को  अपनी  माता  मान  कर  ,  उस पर सम्मान प्रकट  करने के  लिए " भारत माता  की जय "  का  नारा  लगाते  आए  हैं   ,  लेकिन  मुसलमानों  की  आदत है  ,कि वह  किसी  न  किसी  कुतर्क   का  सहारा  लेकर  हिन्दुओं  की  मान्यताओं  और  आस्थाओं   का  विरोध  जरूर   करते  है  ,  सब  जानते  हैं  कि  कुछ  ही  समय  पहले  जे एन  यू  के  मुस्लिम  लडके  के   इशारे से   हिन्दू लड़कों   ने भी   देश  विरोधी   नारे  लगाए  थे  ,  और  उनका  परोक्ष  समर्थन  राहुल  गन्दी  ने  कर  दिया  ,  इस  से पूरे  देश में  भारत  विरोधी  माहौल  पैदा  होने लगा  ,  इसलिए   सर  संघ  चालक  श्री  मोहन  भागवत  ने कहा  था कि  भारत  के सभी    लोगों  के  लिए  " भारत  माता  की  जय " बोलना  अनिवार्य  कर  दिया जाना  चाहिए  ,लेकिन  जिस  दिन  भागवत  जी  ने  यह  बात   कही  ,उसके  कुछ   समय बाद ही   , दिनांक  1  अप्रेल   2016  को   दारुल उलूम   देवबंद    के  मुल्लों   के    एक  फतवा   जारी  कर  दिया  जिसमे  मुसलामानों    को  निर्देश  दिया  गया  है   ,कि  वह  न तो " वन्दे  मातरम  "गायें  और  न  " भारत  माता  की जय ' बोलें  ,.और मुल्लों ने यह तर्क देकर फतवा जारी करते हुए दारुल उलूम ने कहा-
'इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

दुर्भाग्य  से  भारत   में  आर्यसमाज   , विश्व  हिन्दू  परिषद   , हिन्दू  महा  सभा   जैसे   संगठन  मौजूद  हैं   , जिनमे हजारों     विद्वान्  हैं  ,  लेकिन  किसी   ने  भी   मुल्लों   के  इस कुतर्क  का  मुंह तोड़  जवाब   नहीं  दिया  ,   यहाँ  तक  महेंद्र  पाल आर्य   जैसे    पूर्व   इमाम   ने भी   मुल्लों    का खंडन  नहीं    कर  सके   , उलटे  कई  हिन्दू नेताओं   ने  यहाँ  तक कह दिया  कि हम  लोगों  पर  भारत  माता  की  जय  बोलने दवाब   नहीं   डालेंगे  ,  ऐसा कहने के पीछे  इन  धर्म  के ठेकेदारों  की घोर  अज्ञानता   है  ,  जैसे  मुल्लों  ने मुसलमानों  को  कट्टर  और लकीर  का  फ़क़ीर  बना दिया  ,  इन  हिन्दू  नेताओं  ने हिन्दुओं की  तर्क बुद्धि  पर  ताला   मार  दिया  , हिन्दुओं  के  दिमागों   में यह  बात  ठूंस ठूंस  कर  भर दी  गयी कि हिन्दू  धर्म  सर्वश्रेष्ठ सबसे  बड़ा   है  ,  इस गलत  फहमी   से  हिन्दू    न  तो  अन्य  धर्म की  जानकारी  प्राप्त  करते  है  और  न    उनका  तुलनात्मक   अध्यन   ही करते  हैं  , मुल्लों  को  जवाब देने की  बात  तो   दूर  है, और  जब  मुल्लों   के  फतवा   का जवाब देने के लिए  कोई आगे  नहीं  निकला  तो  , हमने  मुल्लों    को    जवाब देने  का  निश्चय   किया  ,  क्योंकि  कल  रात 03\04\2016 को  9 बजे  अमेरिका के  सेंट  लुइस  निवासी  मेरी  बहिन रेणु  शर्मा  से मैंने वादा   कर दिया था .अतः  हम  अपना  वादा पूरा करने के लिए फ़तवा  के झूठ  का  भंडा  फोड़  रहे   हैं , 

 1-मुल्लों   का  कुतर्क

 मुल्लों    ने  फतवा में   यह  कुतर्क  दिया "इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? 

देखिये उर्दू   फतवा की फोटो

http://images.jansatta.com/2016/04/bharat-mata-ki-jai-620x400.jpg?w=850

इस फ़तवा को  पढ़  कर   हम  दावा  करते   हैं   कि  या  देवबद  में  मुल्लों   को  कुरान का  इल्म   नहीं   , या  वह   जानबूझ   कर  लोगों   को  गुमराह   कर   रहे   हैं   , और   कुरान   उस आयत  को  झूठा  साबित  करने की   हिमाकत  कर  रहे  हैं  जिसमे अल्लाह  ने  एक  शहर   ( जमीन )   को  शहरों  की   माता  कहा  है   ,    और  जब खुद अल्लाह  पूरी  जमीन   के  एक  हिस्से  एक   शहर   को शहरों  की   माता ( Mother of Cities )   कहता  है   , तो  हमें स्वीकार   करना  होगा  कि  निर्जीव  जमीन   के  बच्चे  भी  हो सकते है   ,

2-शहरों  की माता  मक्का  है 
मुसलमान   जिस मक्का  शहर को  परम  पवित्र   मानते  हैं   ,  उस  शहर  " मक्का -   مكة‎  "   नाम  पुरी  कुरान   में नहीं  मिलता  ,  बल्कि  इसकी  जगह  "बक्कह -   بكة‎    " शब्द  मिलता  है  , जो कुरान की  सूरा  -आले  इमरान   3 :96     में   है   ,  अरबी   व्याकरण  के  अनुसार  बक्कह - بكة‎ "  शब्द    स्त्रीलिंग ( feminine Gender )    अर्थात   बक्कह   वर्त्तमान  मक्का     एक   स्त्री   है   ,इसीलिये  स्त्री  होने के  कारण  अल्लाह ने बक़्का ( मक्का )  को शहरों  की  माता    कह   दिया  , "  Umm al-Qurā (أم القرى, "Mother of All Cities  " यह  अति  महत्त्व  पूर्ण  बात  अल्लाह  ने  सिर्फ  एक  बार  कुरान    की
 सूरा  -आले इमरान  6:92  में  दी   है   ,  पूरी  आयत   अरबी में  , हिंदी  लिपि   में  और  हिंदी  अंगरेजी   अर्थ   दिए  जा  रहे   हैं   

1. मूल  अरबी  आयत 

 وَهَـٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ  

2 -हिंदी लिप्यांतरण 
"व् हाजा   किताबुं  अंजलनाहु ,मुबारकुन  मुसद्दिकु  अल्लजी  बैन यदीहि  व् लि तुंजिर  उम्मुल कुरा  व्  मन  हौलहा  वल्लजीना  यूमिनून बिल  अखिरती यूमिनूंन  बिही व् हुम् अला  सलातिहिम युहाफिजून  "

3-हिंदी  अनुवाद 

"यह किताब  जिसे हमने उतारा   है  ,बरकत वाली  है  , और उसकी  पुष्टि  करने  वाली  हैं  ,जो  इस से पहले उतारी  गयी   , ताकि  तुम  नगरों  की  माता  (मक्का ) और आसपास वालों को सचेत  करो  ,और जो लोग आखिरत  पर ईमान  लाते  हैं  वे  अपनी  नमाज  की  रक्षा  करते  हैं  "

4-Eng  Translation

"this  book We have revealed it,blessed,confirming which (came) before its hands,so that you may warn (the) mother(of) the cities
   and who(are) around it.And those who believe  in the Hereafter,they believe  in it,and they, over  their prayers  (are) guarding.  "

नॉट  - इस आयत  में  अरबी  के कुल 22  शब्द  हैं  ,10  वां  शब्द  " उम्म -  أُمَّ "  है  , इसका अर्थ  माता(Mother)है  , और  11 वां शब्द  " कुरा -  الْقُرَىٰ   "  है जो  बहुवचन   (Plural )     इसका अर्थ  नगरों  ( Cities )   , और " उम्मुल  कुरा -أم القرى "का अर्थ नगरों  की  माता  है  , (the Mother of Cities)

(سورة الأنعام, Al-An'aam, Chapter #6, Verse #92

दारूल उलूम देवबंद ने 'भारत माता की जय' के खिलाफ फतवा देते हुए कहा कि इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है, तो धरती मां कैसे हो सकती है।अब  देवबंद  के  मुल्ले बताएं   कि जब  तुम्हारा  अल्ल्लाह  बेजान  भूमि   यानि   मक्का  को    शहरों की  माता  कह  रहा  है  ,  यानि मक्का  को  ऐसी माता   मान  रहा  है  कई  शहर  रूपी   बच्चे  हों   ,  क्योंकि  बिना   बच्चे की   स्त्री  को  माता   नहीं   कहा   जा  सकता  , 
  और  जब  एक शहर  मक्का  कई  शहरों  की  माता   हो  सकती    है  ,  तो  कई  प्रांतो   , सैकड़ों    शहरों  पैदा करने  वाली   भारत  माता   ,   सबकी  माता  क्यों    नहीं       मानी   जा  सकती   ? 
मेरी  सभी  मुल्ले मौलवियों   ,  मुफ्तियों    ,  और   मुसलमानों  को  खुली  चुनौती   है  ,कि  वह  कुरान की  इस  आयत   को  गलत  साबित  कर के  दिखाए   ,   फिर   कहें की जमीन   कभी  माता  नहीं     हो  सकती 
मेरा उन  सभी    हिन्दू   नेताओं    और हिन्दू  संगठनों   के प्रमुखों    से  अनुरोध  है  , जो  खुद को  भारत  माता  के भक्त होने  का  दावा   करते   हैं   , इस  लेख   को  अखबारों  और  टी  वालों   को  भेज   दें  ,    ताकि   देवबंदियों  का फतवा  फट  जाये  ,  सभी मुल्ले  मौलवियों   को खुली चुनौती  है कि इन  प्रमाणों को गलत साबित कर के दिखाएँ  ,  

भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , भारत  माता  की   जय  , 

(317)

गुरुवार, 20 जून 2019

इस्लाम भूमि को माता मानता है !!



अपने देश की रक्षा करना और उसका सम्मान करना हरेक देशवासी का कर्तव्य है .क्योंकि ऐसा करना देश की एकता और अखंडता बनाये रखने के लिए अति आवश्यक है .भारत के हिन्दू देश को माता की तरह सम्मान करते हैं .लेकिन कुछ ऐसे भी मुस्लिम नेता हैं , जो भारत को माता की तरह सम्मान करने को शिर्क यानी अल्लाह के साथ किसी को शामिल करना बता कर गुनाह बताते हैं . और मुसलमानों को भड़काते रहते हैं .ऐसे लोगों ने जैसे यही नीति अपना रखी है ,कि हिन्दू जो भी कहेंगे या करेंगे हम उसके विपरीत काम करेंगे .फिर भी कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं , जिन में हिन्दू और इस्लामी विचारों में आश्चर्यजनक रूप से समानता पायी जाती है .जिसका सम्बन्ध देश को माता कहने से है .केवल एक दो शब्दों में अंतर है .परन्तु आशय एक ही है .
जैसे हिन्दू और मुसलमान इस बात को स्वीकार करते हैं , सिर्फ रक्त सम्बन्ध से जन्म देने वाली को ही माता नही माना जा सकता है . पालन पोषण करने वाली महिला को भी माता के रूप में आदर और सम्मान दिया जाता है . उदहारण के लिए यशोदा भगवान कृष्ण की शारीरिक माता नहीं थी . बल्कि उन्होंने भगवान का पालन किया था , और भगवान कृष्ण उनको जीवन भर अपनी माता मानते रहे .
इसी तरह इस्लाम में भी पालन करने वाली को , और सम्मानित महिला को भी माता के रूप में सम्मान दिया जाता है .विषय को स्पष्ट करने के लिए यह उदहारण दिए जा रहे हैं ,
1-रसूल की पालकमाता हलीमा
मुहम्मद साहब के पिता का नाम "अब्दुल्लाह " था . और माता का नाम " आमना बिन्त वहब -امنة بنت وهب "था .मुहम्मद साहब जब अपनी माता के गर्भ में ही थे ,तो उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था .यह सन 577 ईसवी की बात है .और जब मुहम्मद साहब की आयु केवल 6 साल ही थी . तो उनकी माता का भी देहांत हो गया . लेकिन अपनी म्रत्यु से पहले आमना ने अपने छोटे से बेटे को " हलीमा सादिया -حليمة السعدية"नामकी एक बद्दू महिला दाई के हवाले कर दिया था . ताकि वह अपना दूध पिला कर मुहम्मद साहब का पालनपोषण करती रहे . और उसने ऐसा ही किया था .हलीमा दाई जब तक जीवित रही ,मुहम्मद साहब उसको माता की तरह आदर और सम्मान देकर माँ पुकार कर संबोधित करते रहे . और आखिर जब हिजरी 8 में हलीमा का देहांत हो गया , तो मुहम्मद साहब ने उसे अपने निजी कबरिस्तान "जन्नतुल बाकी " में दफना दिया था .हलीमा की कब्र आज भी मदीना में मौजूद है .इस घटना से सिद्ध होता है कि पालन करने वाली स्त्री को भी माता माना जा सकता है . और माता के सामान आदर भी दिया जा सकता है .दूसरा उदहारण इस प्रकार है
2-रसूल की पत्नियां माता समान हैं 
वैसे तो भारतीय परम्परा के अनुसार हरेक स्त्री को पूज्यनीय माना गया है . फिर भी लोग हरेक बुजुर्ग महिला को आदर से माता जी पुकारते है , चाहे उन से कोई रिश्ता हो या नहीं . इसी तरह अक्सर लोग किसी भी साध्वी , सन्यासिनी महिला को सम्मान देने के लिए " माता जी "कहते हैं , चाहे उनकी आयु कितनी भी कम हो .
इसी तरह कुरान में भी मुसलमानों से मुहम्मद साहब की पत्नियों को अपनी माता समझने का आदेश दिया गया है ,कुरान में कहा है -
"और रसूल की पत्नियां ईमान वालों की माताएं है " सूरा -अहजाब 33:6 
 (and his wives are mothers of believers)

" وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ "33:6

इस से स्पष्ट होता है कि यदि हम किसी को माता की तरह आदर देते हैं , तो यह समझना बिलकुल गलत होगा कि हम उस महिला की उपासना करते है . या उसकी तुलना अल्लाह से कर रहे हैं .और जो लोग ऐसा करने वालों पर "शिर्क " करने का आरोप लगाते है ,वह लोगों को गुमराह करते है .
3-अथर्ववेद में भूमि को माता कहा है .
हिन्दू और मुसलमान दौनों इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि हम पृथ्वी पर जिस भूमि पर रहते आये है , उसी भूमि ने हमें और हमारे पूर्वजों का माता की तरह पालनपोषण किया है . हमारे शरीर में जो मांस रक्त वह इसी भूमि से पैदा हुए अनाज से बना हुआ है . जैसे एक माता अपने पुत्र की परवरिश करती है , वैसे ही यह भूमि हमारा पालन करती है .इसी लिए विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ वेद में भूमि को माता बताया गया है ,अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में भूमि और प्रथ्वी की महिमा बताते हुए यह एक मन्त्र दिया गया है ,
"माता भूमिः पुत्रोऽहम पृथिव्याः  "
प्रथ्वी मेरी माता है , और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ .
(Earth is my mother,I am son of Earth )
अथर्ववेद -काण्ड 12 पृथ्वी सूक्त -63
विश्व का प्राचीन इतिहास पढ़ने से पता चलता है कि इस्लाम के आगमन से काफी समय पहले से ही अरब और भारत के व्यापारिक सम्बन्ध थे .और कालांतर में वेद की यह मान्यता इस्लाम में भी स्वीकृत हो गयी ,कि भूमि हमारी माता है .इसकी पुष्टि इन हदीसों से होती है
4-हदीस में भूमि को माता कहा है 
हदीसों का साहित्य काफी बड़ा और गंभीर है , वैसे सुन्नी मुस्लिम मुख्य 6 हदीस की किताबों के बारेमे जानते हैं . लेकिन इनके अलावा हदीसोंकी ऐसी प्रमाणिक किताबें मौजूद है , जिनके बारे में बहुत कम मुस्लिम जानते है .क्योंकि इन हदीसों का संकलन और प्रमाणीकरण देर से हो सका था .परन्तु अधिकांश मुस्लिम विद्वान् इन किताबों में दर्ज हदीसों को सत्य मानते हैं .हम इस विषय से संबधित हदीस देने से पहले , इस हदीस के संकलनकर्ता और पस्तक के बारे में जानकारी देना उचित समझते है .
1.इमाम तबरानी
इनका पूरा नाम "अबुल कासिम सुलेमान इब्ने अहमद इब्ने तबरानी - ابو القاسم سليمان ابن احمد ابن التبراني  " था .इनका जन्म 260 हिजरी यानि सन 870 ईसवी में हुआ था .और मृत्यु हिजरी360 यानी सन ईसवी 970 में हुयी थी .तबरानी ने हदीसों का जो संकलन किया था उसका नाम "अल मुअजम अल कबीर -المعجم الكبير    " है .इस किताब में 5 भाग हैं . और इस हदीस की किताब को प्रमाणिक माना जाता है .दूसरे हदीस संकलनकर्ता का नाम है
2.इमाम ज़हबी 
इनका पूरा नाम "मुहम्मद इब्ने अहमद बिन उस्मान कय्यूम अबू अब्दुल्लाह शमशुद्दीन अल ज़हबी -محمد بن احمد بن عثمان بن قيوم ، أبو عبد الله شمس الدين الذهبي‎ " है . इनका जन्म सन1274 ईस्वी में और देहांत सन1348  ईसवी में हुआ था .इन्होने अपने जीवन में कई हदीसें जमा की है .
और इमाम तबरानी ने जो हदीसें जमा की हैं उनको सत्यापित किया है .तबरानी ने एक ऐसी हदीस दी है जो वेद में दिए गए मन्त्र से मिलती जुलती है . वह महत्त्वपूर्ण हदीस यह है ,

"وتحفظوا على الأرض فإنها أمكم   "

"तुहफिजु अलल अर्ज इन्नहा उम्मेकुम "
"भूमि की रक्षा करो , निश्चय ही वह तुम्हारी माता है ."
“And take care of the earth for verily she is your mother.”

al-Mu’jam al-Kabir 5/65, Tabarani

इस हदीस के रावी यानी रसूल के द्वारा कही गयी बात को लोगों तक पंहुचाने वाले ( narrator ) का नाम "अब्दुल्लाह इब्ने लहियह -ابن لهيعة)” " है .
कुरान और हदीस में दिए गये इन पुख्ता सबूतों के आधार पर हम उन लोगों से यही प्रश्न करना चाहते , भारत की रक्षा करने और उसके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत को अपनी माता मानकर " वन्दे मातरम "का घोष करते हैं .तो उनको मुशरिक कैसे कहा जा सकता है .?बताइये जब मुहम्मद साहब की पत्नियों को माता मानना उनकी रसूल से समानता करना नहीं माना जा सकता है . तो देश को माता समझ कर सम्मान करने को देशकी अल्लाह के साथ समानता करना कैसे मानी जा सकती है .और ऐसा करने को शिर्क कैसे माना जा सकता है ?और जो खुराफाती दिमाग वाले मुल्ले मुस्लिम युवकों गुमराह करने के लिए यह कहते हैं ,कि भारत माता की जय , या वन्दे मातरम बोलने से इस्लाम खतरे में पड़ जायेगा ,हम उनसे पूछना चाहते हैं .कि बलात्कार , आतंकवाद जैसे अपराधों से इस्लाम को खतरा क्यों नहीं होता ? क्या सिर्फ वन्देमातरम कहने से ही इस्लाम मिट जायेगा ?वास्तव में इस्लाम को असली खतरा स्वार्थी कट्टर मुल्लों और मुसलमानों के घोर अज्ञान से है .देश को माता कहने से कोई क़यामत नहीं आने वाली है .जैसे हरेक व्यक्ति अपनी माता की रक्षा और सम्मान करता है , वैसे ही हमारा कर्तव्य है कि अपनी देश रूपी माता की रक्षा और सम्मान करें .
(105)

इस्लाम में माता को सजदा करना जायज है

भारत माता विरोधी मुस्लिमों   को  मुंहतोड़    जवाव   !

यह  एक  कटु  सत्य   है  कि मुस्लिम  नेताओं  का  स्वभाव  बरसों  से  देश  में  स्वीकृत  मान्यताओं  का  किसी न किसी   बहाने   से  विरोध  करने   का  स्वभाव  सा  बन   गया  है   , उदहारण  के  लिए  जब राष्ट्रगीत " वन्दे  मातरम " गाने  या नारा  लगाने  की   बात  आई  तो   कठमुल्लों    ने  इसका  विरोध  करना  शरू  कर  दिया  , और  तर्क  दिया  कि  देश  की   वन्दना करना  एक  प्रकार  की   मूर्तिपूजा   है   , और  इस्लाम   में मूर्तिपूजा  हराम   है  , और  मुस्लिम  वोटों  के  लालच   में  कांगरेसी  सरकार   ने मुसलमानों  की  बात   को  मान  लिया ,  वास्तव   में  यह  विचार  काफी  पहले अल्लामा इकबाल  के  खुराफाती  दिमाग  में   पैदा  हुआ  था  , इसी  ने  देशभक्ति   की तुलना बुतपरस्ती ( मूर्तिपूजा )  से  कर  दी  थी  , इकबाल  ने  कहा  था  ,

 " नौ  जादा खुदाओं  में सबसे  बड़ा   वतन  है  , इसका  जो  पैरहन है  ,मजहब  का  वह  कफ़न  है "
अर्थात  - नए  उत्पन्न  देवताओं  में  देश  सबसे बड़ा देवता  है   , और उसका  परिधान  मजहब ( इस्लाम ) के  कफ़न  की  तरह  है 

, चूँकि इस्लाम  से  पहले  अरब  में  कई  देवी   दवताओं   के  बुत  थे  ,जिन्हे  मुहम्मद  ने  तुड़वा  दिया  था मुल्लों ,ने मुसलमानों को   भड़काया  की  भारत  माता  भी  एक  नया बुत  है  ,उसकी तारीफ़ ( वंदना ) करके  तुम  मूर्तिपूजक  यानि  काफिर हो  जाओगे .और   वन्दे  मातरम  कहना  इस्लाम  पर  कफ़न  डालने  जैसा  है
 , यही   कारण  है  की  मुस्लमान  वन्दे  मातरम    नहीं  बोलते  ,
और  जब  तक  कांगरेसी सरकार  थी मुसलमान   चुप  रहे 
 लेकिन जैसे ही मोदी  प्रधान मंत्री  बने ओवैसी  ने  फिर से एक  नया विवाद  पैदा  कर  दिया  कि हम ( मुसलमान ) भारत  माता की  जय  " नहीं बोल  सकते   , क्योंकि  देश  एक निर्जीव  भूमि   का  हिस्सा  होता  है  , और  उसकी   जय   बोलना मूर्ति को   सम्मान  करने  जैसा  ,  और  कुफ्र    है   , मुसलमान   सिर्फ  अल्लाह  की  उपासना   करते  हैं  ,
        इसी  लिए  हमने  अपने  लेख संख्या   105       " इस्लाम  भूमि  को माता   मानता है " में  साबित  कर  दिया  की  भारत  को  माता   कहना  या  मानना    इस्लाम   के  विरुद्ध  नहीं  है , प्रख्यात  हदीस  संकलनकार   इमाम तबरानी   ने  अपनी  पुस्तक  "अल मुअजम अल कबीर -المعجم الكبير    " में   साफ   कहा  है "अल  अर्ज  फइन्नहा उम्मेकुम -  الأرض فإنها أمكم   "अर्थात  भूमि  तुम्हारी  माता   है ( Earth is your mother)

al-Mu’jam al-Kabir 5/65, Tabarani

जन्म  देने वाली   माता और  जन्मभूमि कितनी सम्मान  की  योग्य  है  ,यह  वाल्मीकि  रामायण  में बताया  गया  है  "
 जननी जन्मभूमिश्च   स्वर्गादपि  गरीयसी " यानि  माता और  जन्मभूमि स्वर्ग   से  भी महान  हैं   , इसी बात   को कुछ  शब्दों  के अंतर   में  हदीसों   में कहा  गया  है ,
     
1-जन्नत  माता  के पैरों के नीचे है !
(Paradise is under the feet of the Mother)


"मुआविया इब्न जहमिया   रसूल  के  पास  गया और उनसे पूछा  कि  हे अल्लाह  के रसूल  मैं  जिहाद  में  शामिल  होना  चाहता हूँ , आप अपनी  राय  दीजिये  , रसूल  ने पूछा  कि  क्या  तुम्हारी  माँ  जीवित  है ? उसने कहा  हाँ , तब  रसूल ने उस  से  कहा  तब  तुम  अपनी माता  के पास  ही  रहो ,क्योंकि  जन्नत  तो  माता  के  कदमों  के नीचे  है "


عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ جَاهِمَةَ السَّلَمِيِّ أَنَّ جَاهِمَةَ جَاءَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَدْتُ أَنْ أَغْزُوَ وَقَدْ جِئْتُ أَسْتَشِيرُكَ فَقَالَ هَلْ لَكَ مِنْ أُمٍّ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَالْزَمْهَا فَإِنَّ الْجَنَّةَ تَحْتَ رِجْلَيْهَا

الجنّة تحت القدم الاُمٌ - "अल जन्नत तहतल  कदमल  उम्म "

3104 سنن النسائي كِتَاب الْجِهَادِ

المحدث الألباني خلاصة حكم المحدث حسن صحيح


"Mu’awiyah ibn Jahima reported: Jahima came to the Prophet, said, “O Messenger of Allah, I intend to join the expedition and I seek your advice.” The Prophet said, “Do you have a mother?” He said yes. The Prophet said, “Stay with her, for Paradise is beneath her feet.”

सुन्नन  नसाई  - जिल्द 1 किताब 25  हदीस 3106

(Hadith graded it Hassan as As-Suyutti in his book Aj-Jaami'a As-Saghir: 3642,

: جلال الدين السيوطي        صحیح الجامع الصغیر و ذیادتہ'.)
 

विडिओ -Maa Ke Khadmo Tale Jannat Hai By Adv. Faiz Syed

https://www.youtube.com/watch?v=hJF4FSQ_SS4


2-बड़ों  के  हाथ    और  पैर  चूमना  जायज है 

मुसलमान  कहते हैं  कि हम  अल्लाह  के आलावा   किसी  के सामने  नहीं  झुक सकते  और न  किसी  के सामने  सर नवा  सकते  हैं  , लेकिन   खुद रसूल  के समय  मुसलमान  झुक  कर  रसूल  के  हाथ  चूमते  थे  और  सर झुका कर उनके पैर  चूमते  थे  , इस हदीस  से यह   बात  साबित होती  है


"अल  वजी इब्न  अमीर ने  कहा कि  जब  हमसे  कहा गया कि  यह अल्लाह  के रसूल  हैं तो हमने उनके  हाथ  और  पैर   चूम  लिए
"
، عَنْ جَدِّهَا، أَنَّ جَدَّهَا الْزَّارِعَ بْنَ عَامِرٍ قَالَ‏:‏ قَدِمْنَا فَقِيلَ‏:‏ ذَاكَ رَسُولُ اللهِ، فَأَخَذْنَا بِيَدَيْهِ وَرِجْلَيْهِ نُقَبِّلُهَا‏.


Al-Wazi' ibn 'Amir said'That is the Messenger of Allah.' We took his hands and feet and kissed them."


 Al-Adab Al-Mufrad(الأدب المفرد)  -Book 42, Hadith 975

यह  परंपरा आज भी  इस्लाम  के गढ़  सऊदी  अरब और पास  के मुस्लिम देशों  में  मौजूद  है ,और  जब कोई  किसी के हाथ  और  पैर   चूमने   के लिए  झुकता है  तो झुकने  वाले की  स्थिति  , नमाज "सलात -  صلاة‎  " की" रुकू"  और  "सजदा"   जैसी हो  जाती  है ,इसे    इन चित्रों  से समझा  जा सकता  है  ,
अ - रुकू  - رُكوع  "Bowing down.कमर  के ऊपरी  हिस्से को 90  अंश  के  कोण  में  झुका  लेना .देखिये चित्र

http://momin.net/wp-content/uploads/Ruku.jpg

-सजदा -  سجدة "prostation.शारीर   को  इतना  मोड़ना कि पिछला  हिस्सा  उठ  जाए और माथा जमीन  पर टिक जाए. देखिये चित्र


http://islamicvoice.com/January2008/Fiqh/SajdahSahu.php_Sajdah.jpg


3-मुसलमानों  का  झूठ 

मुसलमान  झूठा दावा करते हैं कि  हम अल्लाह  के  सिवा  किसी वस्तु या व्यक्ति  के  सामने अपना  सर  नहीं  झुकाते ,लेकिन अरब  के बच्चे  माता  के  आगे   सजदा की  तरह  झुक  कर  पैर  चूमते   हैं  , चित्र  देखिये (kissing feet of mother)

 https://angelicscalliwags.files.wordpress.com/2014/02/dsc_0197king.jpg


यही नहीं  सऊदी  अरब के मुस्लिम  सजदा  की  तरह झुक   कर  वहां के  बादशाह के पैर  चूमते   है  , चित्र 1 देखिये
     
http://www.cifiaonline.com/Saudi%20Sajda%201.png

इसी तरह अरब   के   युवा भी अपने  से बड़ों के  सामने  सजदा  की  तरह  उनके  पैर   चूमते   हैं  , चित्र 2 देखिये

http://www.cifiaonline.com/Wahhabi%203.png


इस लेख  के माध्यम  से  हम  ओवैसी   जैसे   जड़बुद्धि  मुसलमानों  से  पूछना   चाहते हैं   , जो " वंदे  मातरम्   "या " भारत  माता की  जय" कहने  का विरोध  करते  हैं  . और  कुतर्क  करते  हैं कि  ऐसा  करना कुफ्र  है  , और  यदि  कोई  मुस्लिम  ऐसा  करेगा  तो   वह  काफिर  हो   जायेगा ,

वंदेमातरम  और  भारत  माता की विरोध  करने वाले बताएं   कि जब  रसूल  के  देश  के  मुस्लिम सजदे  की तरह माता  और   बादशाह   के  पैर   चूमते  हैं  तो   वह  काफिर  क्यों  नहीं  माने जाते ?

इसका  यही  अर्थ  है कि मुसलमानों   का  विरोध   सिर्फ  नाटक  बाजी  है  , जिसका  उद्देश्य   दंगे   कराना  है .

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कृपया इस लेख को अधिक  से अधिक  शेयर  करें   , ताकि  विरोधयों  का मुंह बंद  हो  जाये


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मंगलवार, 18 जून 2019

अल्लाह भी नमाज पढ़ता है ?

लेख  का  यह शीर्षक   देखते   ही मुस्लिम   पाठक  बुरी  तरह  से  बौखला  जायेंगे  और  हमें  पागल  समझने लगेंगे  , क्योंकि  मौलवियों  ने अब तक उनके  दिमागों  में  यह  बात ठूँस ठूँस   कर  भर  दी  है  ,कि अल्लाह  सबसे बड़ा  है  , और उसके जैसा कोई  और नहीं  है ,इसलिए  सिर्फ  अल्लाह की ही  उपासना करना  चाहिए ,इस्लामी मान्यता में  ऐसे विचार  को तौहीद  यानी  एक अल्लाह  को मानना  है  , और अल्लाह की इबादत  करने का  जो सही तरीका  है  उसका सामान्य  नाम नमाज है .लेकिन   जब  अल्लाह भी नमाज  पढ़ने  लगे  तो  ,इसका यही मतलब होता है कि जरूर कोई  ऐसी शक्ति  या  कोई ऐसा व्यक्ति जरूर  है जो अल्लाह  से भी बड़ा  है , इस बात को और स्पष्ट करने के पहले यह  समझना  होगा  कि ,
1 -नमाज  क्या  होती   है  ?
वास्तव  में "नमाज -  نَماز‎" शब्द  अरबी   का नहीं फारसी शब्द  का है  , इसका अर्थ  स्तुति , नमस्कार    और प्रार्थना   है  (("prayer, worship).अरबी  में नमाज  के लिए  "सलात -   ‏صلاة‎ "  शब्द   आया  है  , इसका बहुवचन ( Plural   )  "सलवात - ‏صلوات‎   "  है , अरबी  शब्दकोष   में इसका  अर्थ   " दुआ  -   دُعَاء  "  दिया गया है . इस्लाम  के मुख्य  पाँच स्तम्भों  में सलात    दूसरी   है   ,  सलात का हिंदी  में अर्थ वंदन   करना  है  ,  इसलिए मुस्लमान  नमाज में अल्लाह की वन्दना  करके उस  से दुआ  मांगते हैं  ,
2-सलात का   आदेश 
कुरान  में जगह  जगह   सलात यानी नमाज  अदा  करने का हुक्म  मिलता है  ,  नमाज में खड़े होना ,झुकना  और  सजदा करना  भी  शामिल   है   ,देखिये

وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّڪَوٰةَ وَٱرْڪَعُوا۟ مَعَ ٱلرَّٰڪِعِينَ- Qur'an 2:43
(अकीमुसस्सलात व आ तुज्ज़कात वर्र राकिउ मअर्राकि ऊन )
अर्थ -नमाज पर कायम रहो  , जकात दो  और झुकने वालों  के  साथ झुको  ,  नमाज में झुकाने को रुकू  कहा  जाता है   यह एक प्रकार का आधा  सिजदा होता  है  , सिजदे  में   माथा   जमीन पर   रख  दिया  जाता  ,  यह भी  अनिवार्य  होता है  ,  तभी नमाज पूरी  मानी  जाती  है

"and be constant in prayer, and spend in charity, and bow down in prayer with all who thus bow down

3-नमाज  के  अनिवार्य  नियम 
नमाज   जब  भी  पढ़ी  जाती है  उसके कुछ  नियम  ऐसे  हैं  ,जो  सबके लिए अनिवार्य  है  , पहला  ,नमाज पढ़ते समय नमाजी  का मुंह काबा  की तरफ होना  चाहिए  ,दूसरा हर नमाज में पहले कुरान  की सूरा  फातिहा  पढ़ना  जरुरी   है  , क्योंकि इसमें अल्लाह की तारीफ़  करते  हुए उस  से सीधा  रास्ता दिखाने  के लिए दुआ मांगी  जाती   है   (आप कहीं   से भी सूरा  फातिहा  देख  सकते  हैं  )   और  अंतिम  शर्त  यह  है  कि हर  सिजदे  पर " अल्लाहु  अकबर " बोलना  भी जरूरी    है ,
लेकिन   आप  सबको  यह  जान  कर  बड़ा आश्चर्य होगा कि जिस अल्लाह को मुसलमान  सबसे  बड़ा  बताते  हैं  , जिसके लिए  रोज नमाज पढ़ते हैं  , और अल्लाह के नाम  पर जिहाद करके  करोड़ों की हत्या कर चुके ,और  आज  भी कर रहे हैं   , वही  अल्लाह  खुद भी  नमाज  पढ़ता  है   , बड़ी खोज  के  बाद  हमें  यह   हदीस  मिली  है  , जो प्रामाणिक   है   ,इस  हदीस को जमा  करने  वाले  का नाम "अब्दुलाह  बिन  अहमद   है
4-इमाम  अहमद  का परिचय 

इनका पूरा  नाम "अहमद  इब्न मुहम्मद इब्न  हम्बल अबू  अब्दुल्लाह अश्शेबानी - احمد بن محمد بن حنبل ابو عبد الله الشيباني‎  "  है  ,  इनका  काल ईस्वी 780–855 CE/164–241 AH,यह सुन्नियों  के हम्बली  फिरके के विद्वान्  , और  हदीसों  के ज्ञाता   थे यही नहीं  इन्हों    कई हदीसें   भी   जमा   की  थीं  ,हदीसों के इनके संकलन की किताब  का  नाम  "किताब  अल सुन्नाह   -كتاب السنة   " है  इसी किताब  में एक ऐसी बात दी गयी है  ,  जो अल्लाह के बड़े होने की पोल खोलने के लिए  काफी   है  ,देखिये  हदीस ,

5-मुहम्मद ने अल्लाह को नमाज पढ़ते देखा 

इमाम  अहमद   की "in Kitab Al Sunna by Abdullah bin Ahmad, vol.1, p.27

में लिखा   है  "जब मुहमद   मेराज (जन्नत यात्रा  ) सातवें  आसमान पर  गए तो उनका सामना  जिब्राईल  से  हुआ  ,तो उसने इशारे  से   रोका और कहा  ठहरो  अभी  अल्लाह  नमाज  पढ़  रहे   हैं  ,रसूल  ने पूछा  क्या  अल्लाह भी नमाज  पढ़ता  है   ?जिब्राइल बोलै हाँ  , अल्लाह भी नमाज पढ़ता  है . फिर  रसूल  ने पूछा  ?अल्लाह   नमाज में क्या पढ़ता  है  ?तब जिब्राइल ने  कहा  अल्लाह  कहता है ' स्वामी  की  जय   हो   !या   स्वामी  की बड़ाई  हो 

when Muhammad reached the 7th heaven during the Isra and Mi'raj, he encountered Gabriel, who immediately said “Shh! Wait, for Allah is praying (Sala).” Muhammad asked: “Does Allah pray?” to which Gabriel said, “Yes, he prays.” Muhammad then asked, “What does he pray?” and Gabriel said “Praise! Praise the Lord!"

عندما وصل محمد إلى الجنة السابعة في الإسراء والمعراج ، قابل جبرائيل ، الذي قال على الفور: "ص! انتظر ، لأن الله يصلّي (سالا). سأل محمد: "هل يصلي الله؟" الذي قال جبريل: "نعم ، يصلي." سبح الرب

كتاب السنة ـ الإمام عبد الله بن الإمام احمد-
vol.1, p.27

6-हदीस  का   वाक्य  विश्लेषण 
इस हदीस के मुख्य  वाक्यों को  हम  अलग  अलग  करके    देखते  है जिस से बात   स्पष्ट हो जाये   ,
1-मुहमद   से जिब्राइल ने कहा  " श श  प्रतीक्षा करो  , अल्लाह नमाज  पढ़   रहा  है  -""ص! انتظر ، لأن الله يصلّي-श इंतजर लि इन्नल्लाह यूसल्ली .
2-मुहम्मद  ने पूछा  क्या अल्लाह भी नमाज पढ़ता  है  ?-हल  युसल्ली  अल्लाह   "هل يصلي الله؟" 
3-जिब्राइल ने कहा  हाँ  नमाज पढ़ता  है  .नअम युसल्ली -نعم ، يصلي
4-इस बात को स्पष्ट  करते  हुए  जिब्राइल  बोला "अपने  स्वामी  की  स्तुति   करता   है  - सब्बिह अर्रब -سبح الرب

7-अल्लाह के ईमान वालों  से सवाल 

हमें  पूरा  यकीन है  कि इस  हदीस  के मुताबिक  कोई भी इमान वाला  जिब्राइल  और मुहम्मद को झूठा   कहने  की हिमाकत   नहीं  करेगा   ,  इसलिए   जो भी  मुस्लिम  इसे  पढ़े      बराये मेहरबानी  इन   सवालों  का  जवाब   दे  ,
 1.अल्लाह को नमाज पढ़ने की  जरुरत क्यों  पद  गयी  ?
2.जब  काबा  मक्का  में है ,तो अल्लाह किसकी तरफ नमाज पढ़ रहा  था  ?
3-नमाज में सूरा फातिहा  पढ़ना  जरुरी  है , जिसमे अल्लाह की तारीफ  है  , तो क्या अल्लाह  जन्नत में नमाज के अंदर अपनी  ही तारीफ  कर  रहा  था ?
4-जब  खुद  जिब्राइल ने मुहम्मद को बताया कि अल्लाह  नमाज में  'रब यानि  स्वामी की वंदना करता है  , तो अल्लाह का"  रब - الرب  " कौन  है  ?
5-और अंतिम  सवाल  है  , अगर  इस अल्लाह     या  जन्नत के अल्लाह  का भी कोई  स्वामी   या रब है  तो  अल्लाह  की इबादत करना  और उसकी  तारीफ  करना मूर्खता  नहीं   तो और क्या  है  ?
आप लोगों  की  क्या  राय है कमेंट जरूर करिये  और इस जानकारी को  सब तक भेजिए  .

http://read.kitabklasik.net/2009/04/al-sunnah-abdullah-bin-ahmad-bin-hanbal.html

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