मंगलवार, 20 अगस्त 2019

ऐसा धर्म जिसमे ईश्वर का नाम लेना महापाप है !

इस समय विश्व में कई धर्म प्रचलित हैं.सब अपने धर्म को महान ,और अपने ईश्वर को सबसे बड़ा बताते हैं.आज तक कुछ धर्म के लोगों ने अपने ईश्वर के नाम पर जो जो अत्याचार ,खूनखराबा और अपराध किये हैं ,उस से सारी मानव जाति त्रस्तहै.इसमे इस्लाम का पहिला नंबर है.मुसलमान अल्लाह के नाम पर आज भी आतंकवाद ,सामूहिक हत्याए अल्लाह के नाम पर करते हैं.चाहे किसी निर्दोष का गला काटना हो ,या किसी औरत को कोड़े मारना हों.या किसी औरतको पत्थर मार कर मरना हो .मुसलमान अल्लाहो अकबर चिल्लाते हैं. ,चोरी ,जेबकतरी या किसी को लूटते समय बिस्मिल्ला जरूर बोलते हैं.अगर किसी मासूम गरीब लड़की को कोठे पर बिठाते हैं ,तो ग्राहक से कहते हैं ,नया माल है,बिस्मिल्ला करो
वैसे तो इस्लाम में शराब हराम बताते हैं ,लेकिन छुप कर शराब पीकर यह कहते है

 -"हाथ में जाम लिया और कहा बिस्मिल्ला ,यह न समझे कोई रिन्दों को खुदा याद नहीं."

लोग जब चाहे जहां चाहे ईश्वर का नाम चिल्लाते रहते हैं और ईश्वर का नाम लिख देते हैं .यहाँ तक वेश्याओं के घर में भी 786 लिखा होता है .

लेकिन यहूदी धर्म में उनके खुदा का नाम लेना या लिखना पाप है यदि कोई ईश्वर का नाम ले लेता है तो उसे प्रायश्चित के लिए उपवास करना होता है यदि कोई यहूदी धर्मगुरु ऐसा करे तो उसे चालीस दिनों का रोजा करना होता है इसका कारन यह है .
यहूदियों के धर्मग्रन्थ का नाम तौरेत और पैगम्बर का नाम मूसा है ,जिसे अंगरेजी में मोजेज(Moses) भी कहा जाता है कहा जाता है की खुदा ने मूसा को दस हुक्म दिए थे उसमे एक हुक्म यह भी था ,

"तू अपने खुदा का नाम व्यर्थ में नहीं लेना ,जो उसका नाम व्यर्थ लेगा खुदा उसे दोषी ठहराएगा "
हिब्रू में -"ला तिश्शा यथ शेम "

तौरेत -ख़ुरूज अध्याय 20 आयत 7

हिब्रू भाषा में ईश्वर के नाम में चार अक्षर हैं -योध -हे-वाव -हे ( יהוח ).इन अक्षरों को मिस्टिकल टेट्रा ग्रामmystical tetragramm) ,कहा हाता है .यहूदी इन चारों अक्षरों को मिल कर पढ़ने से डरते हैं .या लिखते हैं .जब भी तौरेत में यह अक्षर आते हैं तो यहूदी उसकी जगह अदोनाय या एलोहेनु बोलते हैं यानी मेरा स्वामी या मेरा प्रभु .सिर्फ साल में एकबार यहूदिओं  के  ईश्वर का नाम बोला जाता है .जिस समय यहूदिओं का त्यौहार शिमकत तोराह होता है.अर्थात तोराह दर्शन .वैसे  भी  अपने  से   बड़ों   का   नाम    लेना   , या  नाम  से  पुकारना  असभ्यता  और   पाप   है ,फिर  ईश्वर  तो  सबसे  बड़ा   है, बड़े  दुःख की बात है कि जो लोग खुद का आस्तिक और ईश्वर का भक्त बताते हैं वह भी अक्सर ज़रा ज़रा  सी बात पर ईश्वर   और भगवान की  झूठी कसमें   खाते रहते ,और जब खुद के द्वारा किये गए बुरे  कर्मों का  फल मिलता है  तो कहते हैं  यह ईश्वर की इच्छा  है ,

पाहिले भी लोगों ने ईश्वर के नाम पर अनाचार किये थे.और पाप किये थे .शायद इसीलिए जैन और बौद्ध धर्मों में ईश्वर का कोई स्थान नहीं है

यह ईश्वर के नाम पर किये जाने वाले इंसान विरोधी कृत्य बंद होना चाहिए

बी एन शर्मा -भोपाल 
(181/101)6 मई 2010

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