शनिवार, 30 नवंबर 2019

बलात्कार :जिहाद का हथियार




नोट -हम  सभी पाठकों   ,मित्रों    और हिन्दू  संगठनों  के सभी   सदस्यों  से कहना चाहते हैं कि क्या    अपने  इस बात पर गौर किया कि देश में बलात्कारों  की संख्या   क्यों  बढ़  रही  है ? और जितने बलात्कारी पकडे   जा रहे हैं   उनमे      90 प्रतिशत  मुस्लिम  क्यों   होते  है  ? 
 इसके  बारे में हमने आठ  साल  पहले  ही एक  लेख  पोस्ट  किया था  , लेकिन  न  तो  किसी  ने उस पर ध्यान  दिया  और न गंभीरता  से  लिया  , हम  चाहते  थे की हमारे ऐसे लेखों  की किताब  बन  जाती  तो   हिन्दू युवक ,युवतियां  कभी इस्लामी  जाल  में नहीं  फसते ,लेकिन  किसी  ने कोई सहयोग किया ,ऐसा लगाने  लगा  कि हमने  इस्लाम की जिहादी  नीति  ,  विचारों  और योजनाओं   का भंडाफोड़ करने में लगाए  11 साल बेकार  बर्बाद कर   दिए  ,  इसलिए  हम  यह   पुराना लेख पोस्ट  कर  रहे हैं   जो 6 जनवरी    2011 को बनाया  था  , और  आज  भी उपयोगी है   .

जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

"जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे "
सूरा -अल फतह 48 :23 

"यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62 

"तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62 

यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है - 

1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है 

"उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282 

"रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं" 

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220 


2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है 

सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139 

3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है 

"इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है
.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70 

"रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .
बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220 

"रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464 

4 -माल के बदले बलात्कार 

"रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 .

(नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

5 -बलात्कार का आदेश ' 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .
बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432 

6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार 

"आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे 
.बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67 

"सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया
.मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371

और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288 

7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो 

"अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ "

बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 . 

अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये ,अगर लोग   हमारे लेख पर गौर करते तो  ऐसी नौबत नहीं   आती लोग इस्लाम को पढ़ते  हैं  हमने  अनुभव किया  है 

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शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

बलात्कारी रसूल :इस्लामी बलात्कार विधि


( आजकल  पूरे भारत में अचानक बलात्कार की घटनाओं की संख्या   बढ़  रही है  , और जितने भी  बलात्कार  के अपराधी  पकड़े जाते  हैं    अधिकांश मुस्लिम    पाए  गए  है  ,  क्योंकि    देश में अस्थिरता  और   असुरक्षता    की भावना   पैदा करने के लिए  योजनाबद्ध   बलात्कार  किये  जा  रहे है  ,  मुस्लिम इसे  अपराध  नहीं  रसूल  की सुन्नत     मानते   है  ,  लोगों  को यह बताने के लिए  हम   यह  9 नवम्बर   2011 का पुराना लेख  पोस्ट  कर  रहे  हैं  )


सम्पूर्ण इस्लाम केवल इन पांच शब्दों में समाहित है .अय्याशी ,आतंक ,बलात्कार ,लूट और ह्त्या.केवल इन्हीं शब्दों से आप इस्लाम को आसानी से समझ सकते हैं मुसलमान सही कहते हैं कि मुहम्मद जैसा (xxx )कोई न तो हुआ है और न होगा .मुहम्मद इन शब्दों का साक्षात स्वरूप है .अपनी ग्यारह पत्निया और कई रखेलों के अलावा कई दासियों से भी उसकी वासना शांत नहीं होती थी .और मरते दम तक बनी रही ,इसके लिए वह अक्सर "गज़वा"यानी लूट पर निकल जाता है .और लोगों से कहता था कि मुझे अभी अभी अल्लाह का आदेश मिला है .लोग धन और औरतों के लालच में इस गज़वा में शामिल हो जाते थे .मुहम्मद ने ऐसे कई गज़वा यानी लूट अभियान किये थे .हम एक का विवरण दे रहे हैं -

1 -मुहम्मद को औरतें क्यों चाहिए थीं 

"अबू हुरैरा से रिवायत है ,रसूल ने कहा औरतें चार कारणों से पकड़ी जाती हैं ,उनका धन (कीमत )उनका खानदान (प्रतिष्ठा बढ़ने हेतू )उनकी सुन्दरता (अय्याशी के लिए )और उनका धर्म .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 27 

मुहम्मद जब भी लूट पर जाता था ,तो उसका लक्ष्य धन के साथ औरतें भी थीं इसके लिए वह निर्दोषों की ह्त्या तक करवा देता था .

2 -बनू कुरैज़ा हत्याकांड 

सन 628 में मुहम्मद अपने हजारों लोगों के साथ मदीना से 90 मील दूर बनू कुरेजा नामके एक यहूदी कबीले पर लूट के लिए गया .कबीले के सरदार "किनाना इब्न अल रबी इब्न अबू अल हयाक"की शादी एक दिन पाहिले ही हुई थी .उसकी 20 साल की सुन्दर पत्नी "जुबैरिया बिन्त हारिस इब्न अल मुस्तालिक "से हुई थी जो सन 608 में मदीना में पैदा हुई थी .कनाना धर्मगुरु और कबीले का सरदार था .

3 -मुहम्मद ने अचानक हमला करवाया .

"इब्ने ओन ने कहा कि ,रसूल ने बनू कुरेजा पर बिना कारण अचानक हमला करवाया .उस समय कबीले के लोग जानवरों को पानी पिला रहे थे .बच्चे खेल रहे थे ,औरते कम में लगी थी .नबी के हुक्म से हम लोग मर्दों ,बच्चों को क़त्ल करने लगे .और औरतों को पकड़ने लगे .बिलाल और इब्ने उमर जुबैरिया को नबी के हवाले कर दिया .नबी को वह पसंद आगयी .बुखारी -जिल्द 3 किताब 46 हदीस 417 

4 -लूट में मुहम्मद भी शामिल था 

"ओन ने कहा कि इस लूट में अधिकाँश लोग मारे गए जिनमे बड़े बच्चे भी थे औरते जब भाग रही थीं नबी ने जुबैरिया को पकड लिया ,और नबी ने अब्दुला बिन उमर को और औरतें पकड़ने को कहा .
मुस्लिम -किताब 19 हदीस 4292 

5 - किनाना पर अत्याचार .

"नबी ने जुबैर बिन अल अव्वाम को हुक्म दिया कि किनाना के सीने पर आग जला दो .जब किनाना अधमरा हो गया तो रसूल ने "महमूद बिन मुसलामाह "से किनाना का सर कटवा दिया 
(Life of muhammad -0xford -page 515 

6 -मुहम्मद की जुबैरिया से शर्त 

"जुबैरिया काफी सुन्दर थी .जब जुबैरिया ने अपना परिचय दिया तो मुहम्मद ने जुबैया से सौ लोगों की जान के बदले उसी समय सम्भोग करवाने की नीचतापूर्ण शर्त रख दी .विवश होकर जुबैरिया मान गयी .
अबू दौउद -किताब 29 हदीस 3290 

7 -जुबैरिया मुहम्मद को टालती रही .

मुहम्मद जुबैरिया से उसी समय सम्भोग करना चाहता ,लेकिन जुबैरिया बहाने करती रही कि उसका उपवास है .

"जुबैरिया ने मुहम्मद से बहाने के लिए उपवास शुरू कर दिया ,लेकिन नबी ने उसका उपवास जबरन तुड़वा दिया .और जुबैरिया को शादी के बहाने उसी समय सम्भोग के लिए विवश कर दिया .
बुखारी -जिल्द 3 किताब 31 हदीस 207 

8 -साफिया के साथ बलात्कार .

उसी लूट में "साफिया बिन्त हुहीय "नामकी एक और लड़की भी मुहम्मद के हाथ आयी .वह किनाना की Chief Mistress थी साफिया सन 610 में पैदा हुई थी .जब मुहम्मद लूट के बाद अपने लुटेरों और पकड़ी गयी औरतों को लेकर वापस मदीने जा रहा था .वह रास्ते में "सिद्द अश्शाबा "नामकी जगह पर ठहर गया .उसने अपने गुलाम "बिलाल "से कहा कि बनू कुरेजा की किसी सुन्दर औरत को लाओ .बिलाल ने साफिया को पेश कर दिया 
.बुखारी -जिल्द 2 किताब 14 हदीस 68 
और लाइफ ऑफ़ मुहम्मद ऑक्सफोर्ड .पेज 391 ,392 

9 -रास्ते में ही बलात्कार 

मुहम्मद ने मदीना पहुँचाने तक सब्र नहीं किया .और तुरंत बलात्कार कर डाला .इसकी कई हदीसें है ,कुछ दे रहे हैं .

"मुहम्मद ने बिलाल से एक चमड़े का गद्दा बिछाने को कहा ,जिसमे खजूर के पत्ते कूट कर भरे थे .रसूल ने साफिया को उसी पर गिरा कर सबके सामने सम्भोग किया .
मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3329 

बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 367 
बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 437 
बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 512 

10 -मुहम्मद की इस्लामी बलात्कार की विधि 

चूकी मुहम्मद पकड़ी गयी जादा औरतों से बलात्कार करके उन्हें या तो अपने लोगों में बाँट देता था या बेच देता था .वह औरतों को गर्भवती नहीं होने देता था .गर्भवती औरतों की कीमत कम हो जाती थी .इसके लिए मुहम्मद सम्भोग में "अज़ल "करता था .इसमे सम्भोग के बाद स्खलन से पूर्व अपना वीर्य जमीन पर गिरा दिया जाता है .
पुरी विधि यह है -

Al-'Azl, (العزل) also known as coitus interruptus, is the practice of having sexual intercourse with a woman but withdrawing the penis before ejaculation. Apparently al-'Azl with female captives and slaves was a pretty important topic for Muhammad and his companions as is evidenced by the abundance of Hadith material on the  subject

11- -अज़ल के समय कुरआन नाजिल होती थी 

"जबीर ने कहा कि ,जब भी रसूल अज़ल करते थे कुरआन की आयत नाजिल होती थी .
बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 136 


"रसूल दासियों के साथ अज़ल करते थे ..बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 135 


"अबू सईद ने कहा कि नबी ने कहा कि गुलाम औरतों से अज़ल जायज है .अल्लाह ने औरतों को इसी लिए बनाया है

अबू दौउद -जिल्द 11 किताब 21 हदीस 66 

12 -औरतें खेती है ,पानी डालो या सूखा छोड़ दो 

"जिद बिन साबित से रिवायत है ,रसूल ने कहा दासियाँ खेती है .तुम चाहो पानी डालो या नही ."
मुवात्ता -जिल्द 29 किताब 32 हदीस 99 

13 -बलात्कार जायज है 

"तुम्हें पकड़ी गई औरतों से पूछने की जरूरत नही है कि वह सम्भोग के लिए राजी हैं या नहीं .तुम जबरदस्ती सम्भोग कर सकते हो ..उनकी इच्छा का कोई महत्त्व नहीं है .
मुवात्ता -जिल्द 29 किताब 32 हदीस 100 

अन्य हदीसें भी देख लीजिये -

मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3394. ,3373 ,3374 

मुवात्ता -जिल्द 29 किताब 32 हदीस 96 ,97 मुवता -जिल्द 8 किताब 23 हदीस 25 

अब इतने प्रमाण होने पर भी लोग मुहम्मद को आदर्श पुरुष साबित करना चाहते हैं और दूसरों को नीचा साबित करना चाहते है .मुहम्मद पर तो "दरूद "तारीफ़ की जगह "मरदूद "करना चाहिए .

मेरा मुस्लिम महिला ब्लोगरों से निवेदन है कि यह लेख जरुर पढ़ें .और प्यारे रसूल के बारे में महिलाओं को बता कर सवाब कमायें .

(181/151) Dt-09/01/2010


बुधवार, 27 नवंबर 2019

अल्लाह की पत्नी भी है !

इस लेख  का  शीर्षक  पढ़ कर  पाठक  जरूर  चौंक  जायेगे   , और कुछ लोग  इसे  झूठ  , और कोरी गप्प    भी  मान लेंगे , लेकिन  यह बात  बिलकुल  सत्य  और  प्रामाणिक  है   , लेकिन   इस  सत्य   को समझने के लिए  हमें   पता  होना  चाहिए कि  कुरान   से पहले भी अल्लाह  की  तीन  और किताबें   थीं  ,  जिनके नाम  तौरेत  ,  जबूर  और  इंजील   हैं   , इस्लामी   मान्यता  के अनुसार  अल्लाह  ने  जैसे मुहम्मद  साहब  पर  कुरान   नाजिल  की थी  ,उसी तरह  मूसा को  तौरेत  , दाऊद  को  जबूर  और  ईसा को  इंजील नाजिल  की थी  . यहूदी  सिर्फ  तौरेत  और  जबूर  को  और ईसाई  इन तीनों  पर  ईमान  रखते हैं  ,क्योंकि   खुद  कुरान     ने  कहा है  ,

1-कुरान और तौरेत  का  अल्लाह  एक  है 

"कहो  हम  ईमान  लाये  उस  चीज  पर  जो ,जो हम पर भी  उतारी   गयी  है  , और तुम पर भी उतारी  गयी  है  , और हमारा  इलाह और तुम्हारा इलाह   एक ही है  . हम  उसी  के  मुस्लिम  हैं  " सूरा  -अल  अनकबूत 29:46 


""We believe in that which has been revealed to us and revealed to you. And our God and your God is one; and we are Muslims [in submission] to Him."Sura -al ankabut  29;46



    "وَإِلَـٰهُنَا وَإِلَـٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ  "

इलाहुना  व् इलाहकुम   वाहिद  , व्  नहनु  लहु  मुस्लिमून "

यही  नहीं  कुरान  के अलावा  अल्लाह  की  किताबों   में  तौरेत इसलिए  महत्वपूर्ण  है क्योंकि   कुरान  में तौरेत  शब्द  18  बार  और उसके  रसूल  मूसा का नाम  136  बार  आया   है   , यही नहीं  मुहम्मद  साहब  भी    तौरेत  और उसके  लाने वाले  मूसा  पर ईमान  रखते  थे  ,  जैसा की  इस हदीस में   कहा है  ,

"अब्दुल्लाह  इब्न  उमर  ने कहा   कि  एक बार  यहूदियों   ने  रसूल   को  अपने  मदरसे में   बुलाया  और ,अबुल  कासिम   नामक  व्यक्ति  का फैसला  करने को कहा  ,  जिसने  एक  औरत   के साथ  व्यभिचार   किया  था  . लोगों   ने  रसूल  को  बैठने के लिए  एक गद्दी  दी  , लेकिन  रसूल  ने उस  पर तौरेत  रख   दी  . और  कहा  मैं तुझ  पर और  उस पर  ईमान रखता हूँ   और  जिस पर तू  नाजिल   की गयी  है  , फिर रसूल ने कहा तुम लोग वाही करो  जो  तौरेत में लिखाहै  . यानी   व्यभिचारि  को  पत्थर  मार   कर मौत  की  सजा , 

(महम्मद  साहब   ने अरबी  में  कहा-

 "आमन्तु बिक  व् मन अंजलक -  ‏ آمَنْتُ بِكِ وَبِمَنْ أَنْزَلَكِ ‏"‏ ‏.‏     " I believed in thee and in Him Who revealed thee.

सुन्नन  अबी  दाऊद -किताब  39  हदीस  4434 

इन  कुरान  और  हदीस  के हवालों  से  सिद्ध  होता है  कि  यहूदियों  और मुसलमानों  का अल्लाह एक  ही  है और  तौरेत  भी कुरान की तरह  प्रामाणिक    है  . 
चूँकि  लेख  अल्लाह  और  उसकी  पत्नी  के बारे में है इसलिए हमें यहूदी  धर्म से  काफी पहले के धर्म  और  उनकी  संस्कृति  के बारे में  जानना    भी जरूरी  है  .

2-मीडियन  धर्म  क्या   था  ?
इतिहास के अनुसार  ईसा  पूर्व 2200 -1700  के  बीच पूर्वोत्तर  अरब  प्रायद्वीप  में  मीडियन धर्म  प्रचलित था  ,जिसे  अरबी में " मदयन -مدين‎    "   और  ग्रीक भाषा में  मीडियन - Μαδιάμ)"  कहा  जाता  था .इस  धर्म   का   प्रसार  अकाबा की  खाड़ी  से लाल  सागरकी   सीमा   तक  था  . मीडियन  लोग " बाअल  , और  बोएर   देवता  के  साथ  स्वर्ग  की  देवी अश्तरोथ ( Ashteroth  )  देवी  की  पूजा  करते  थे  , यह भी कहा जाता है कि  मदयं के जंगल में ही  मूसा   को एक  जलती  हुई  झड़ी  के पीछे  यहोवा  ने  दर्शन   दिए  थे  , इस के बाद  मदयन  के  लोग  भी  यहोवा  की  पूजा  करने  लगे  , और  यहोवा यहूदियों  के ईश्वर की तरह  यरूशलेम  में   पूजने  लगा  , 
 
3-अल्लाह को  कैसे  बनाया  गया  ?
जिस अल्लाह के  नाम पर  मुसलमान  सारी  दुनिया में    जिहादी  आतंक  फैला कर  रोज  हजारों  निर्दोष  लोगों  की हत्या  करते  रहते हैं  , उसी  अल्लाह के बारे में  एक   उर्दू  के  शायर में   यह  लिखा   है  ,

"शुक्र  कर खुदाया  , मैंने  तुझे  बनाया  , तुझे  कौन  पूछता  था  मेरी  बंदगी  से  पहले "

शायर की  यह   बात शतप्रतिशत  सत्य  है  क़्योकि इस्लाम  से पहले  अरब  में  कोई अल्लाह  का नाम  भी नहीं   जनता था    . यहांतक जिन  तौरेत  ,जबूर  और इंजील   को मुसलमान  अल्लाह  की   कुरान से पहले  की किताबें  कहते हैं  , उन में भी  अल्लाह  शब्द    नहीं   मिलता   है  ,
तौरेत  यानि   बाइबिल   के  पुराने  नियम   में ईश्वर  (God ) के  लिए हिब्रू  में " य  ह वे ह -  Hebrew: יהוה‎ "शब्द  आया   है    ,जो  एक उपाधि ( epithet  )  है  . तौरेत में  इस  शब्द का  प्रयोग तब से होने लगा जब  यहूदियों   ने  यहोवा  को इस्राएल और  जूडिया    का राष्ट्रीय  ईश्वर बना  दिया  था  , इस से पहले  इस भूभाग में फोनेशियन  और कनानी संस्कृति  थी   ,जिनके  सबसे बड़े  देवता का   नाम  हिब्रू में  "एल -  אל‎ " था  . जिसे  अरबी   में "इल -إل‎  "या  इलाह  إله-"  भी   कहा जाता था   , और अक्कादियन लोग  उसे "इलु - Ilu   "कहते थे . इन सभी  शब्दों   का  अर्थ  "देवता  -god "   होता   है  . इस  "एल " देवता को मानव  जाति  ,और सृष्टि  को पैदा  करने वाला   और "अशेरा -" देवी का पति माना जाता था
.
 (El or Il was a god also known as the Father of humanity and all creatures, and the husband of the goddess Asherah (בעלה של אלת האשרה) .सीरिया   के  वर्त्तमान" रास अस शमरा -رأس شمرا‎,  "  नामकी   जगह   करीब 2200  साल  ईसा पूर्व  एक मिटटी  की तख्ती  मिली  थी , जिसने  इलाह  देवता और उसकी पत्नी  अशेरा    के बारे में  लिखा     था  , 

पूरी  कुरान   में  269  बार  इलाह -  إله-"    " शब्द   का  प्रयोग   किया  गया   है   ,  और  इस्लाम  के बाद  उसी  इलाह  शब्द  के  पहले अरबी  का डेफ़िनिट आर्टिकल "अल -  ال"  लगा  कर अल्लाह ( ال+اله  ) शब्द  गढ़  लिया  गया   है  , जो आज मुसलमानों  का अल्लाह   बना हुआ है .  इसी  इलाह   यानी  अल्लाह की  पत्नी  का नाम  अशेरा  है   .

4-अशेरा   का  परिचय 

  अक्कादिअन   लेखों  में  अशेरा    को अशेरथ  (Athirath )  भी   कहा   गया  है   ,  इसे मातृृत्व और  उत्पादक    की  देवी   भी  माना जाता  था   , यह सबसे बड़े देवता "एल "  की  पत्नी  थी   .  इब्राहिम   से  पहले  यह  देवी मदयन  से  इजराइल  में   आगयी  थी।  इस्राइली इसे    भूमि केदेवी   भी   मानते थे।  इजराइल  के लोगों  ने  इसका  हिब्रू  नाम "अशेरह - אֲשֵׁרָה‎),  " कर  दिया  . और यरूशलेम  स्थित  यहोवा  के मंदिर में इसकी  मूर्ति  भी  स्थापित कर  दी  गयी थी  .अरब  के  लोग  इसे " अशरह -عشيره   "  कहते   थे  , और हजारों  साल  तक यहोवा   के  साथ   इसकी  पूजा  होती    रही   थी   .

5-अशेरा अल्लाह  की  पत्नी 

अशेरा   यहोवा  उर्फ़   इलाह  यानी  अल्लाह   की  पत्नी   है  यह बात  तौरेत  की  इन  आयतों  से साबित होती   है   ,  जो इस प्रकार है 
   

"HWH came from sinai ,and shone forth from his own seir ,He showed himself from mount Paran ,yes he came among the  myriads of Qudhsu  at his right  hand , his own  Ashera indeed , he who loves clan and all his  holy ones  on his left "

"यहोवा  सिनाई  से  आया  , और सेईर से  पारान  पर्वत  से  हजारों  के बीच में खुद  को  प्रकाशित किया  , दायीं  तरफ कुदशु (Qudshu:( Naked Goddess of Heaven and Earth') और उसकी  "अशेरा ", और  जिनको वह  प्रेम  करता  है  वह   लोग   बायीं  तरफ   थे "

 
तौरेत  - व्यवस्था   विवरण 33 :2 -3 (Deuteronomy 33.2-3,)

नोट - ध्यान  करने  योग्य  की   बात है कि  तौरेत  में  हिब्रू (Hebrew )  भाषा  में  साफ़ लिखा  है  "यहोवा  व् अशेरती -  יהוה ואשרתו " यानी  यहोवा  और उसकी  " अशेरा " अंगरेजी में  "  Yahweh and his Asherah "यहाँ  पर    मुहावरे की  भाषा  का  प्रयोग  किया  गया  है  , यहोवा  और  उसकी  अशेरा का   तात्पर्य  यहोवा  और उसकी पत्नी  अशेरा   है    , जैसे  राम  और उसकी  सीता  का  तात्पर्य  राम और उसकी  पत्नी  सीता  होता   है . 
6-तौरेत में अशेरा   का उल्लेख 

अशेरा का  उल्लेख  तौरेत  (Bible)की  इन  आयतों   में  मिलता   है
"उसने बाल  देवता  की  वेदी  के साथ  अशेरा  को भी  तोड़  दिया  " Judges 6:25).

" और  उसने अशेरा  की  जो  मूर्ति  खुदवाई उसे यहोवा के भवन में  स्थापित किया "(2 Kings 21:7

" और  जितने  पात्र अशेरा  के लिए बने हैं  उन्हें यहोवा के मंदिर से निकालकर लाओ "2 Kings 23:4)


"स्त्रियां  अशेरा  के लिए  परदे बना करती  थीं  "2 Kings 23:7).

"सामरिया  में  आहब ने अशेरा  की  मूर्ति   लगायी  "1 Kings 16:33).


Ashera  Photo (imp)

https://i.pinimg.com/originals/89/a8/6c/89a86c105c58f69d1b2e7478930b5f0c.jpg



(240)Dt-27/11/2019


मंगलवार, 26 नवंबर 2019

कुरान में शैतान की आयतें !

अक्सर  आपने जाकिर नायक जैसे अन्य मुस्लिम विद्वानों   के मुंह से सुना होगा कि यह अपने भाषणों में दावा करते रहते हैं कि कुरान  अल्लाह की आसमानी किताब है  ,और इसमें कोई  हेराफेरी   नहीं हुई और न हो सकती है जबकि  अन्य धर्म के ग्रथों में काफी  परिवर्तन हुआ है , लेकिन  यह मुस्लिम विद्वान्  मुस्लिमों    से यह  बात छुपा  देते  हैं  कि अल्लाह  के शत्रु  शैतान  ने कुरान  में अपनी  एक  आयत   जोड़  दी  थी  , और मुहम्मद  ने उसे  सबके सामने   बोल  दिया  था , शैतान  की  यह  आयत  बरसों   तक  कुरान  में   थी  ,
इस्लामी  मान्यता है कि  मनुष्यों के  मार्गदर्शन  के लिए  अल्लाह ने  मुख्य चार किताबें अपने रसूलों  पर नाजिल की थीं , जिनके नाम  तौरैत ,जबूर ,इंजील और कुरान  है .मुसलमान यह भी मानते  हैं ,कि जैसे मुहम्मद साहब अंतिम  रसूल हैं ,वैसे ही कुरान  अल्लाह की अंतिम  किताब  है .  और प्रमाणिक  है ,क्यों अन्य  तीनों  किताबों में लोगों ने शैतान  के प्रभाव में  आकर  घट -बढ़  क्र दी थी  . परन्तु कुरान  का  एक एक शब्द  अल्लाह ने  जैसा  नाजिल  किया है ,ज्यों  का त्यों  वर्त्तमान  कुरान में  मौजूद  है .
  यह तो मुसलमानों  की मान्यता  या ईमान  है .परन्तु  मुसलमानों की इस मान्यता को गलत साबित करने के लिए ,खुद  इस्लामी इतिहास  की किताबों , कुरान  की तफ़सीरों और  हदीसों  में  कई  पुख्ता सबूत  उपलब्ध    है . जैसे  यदि कोई कहे कि   कुरान  में  कुछ ऐसी आयतें  भी  ,जो शैतान  ने  मुहम्मद  साहब  के मुंह  से  कहलवायीं  थी . और  कुरान  में  मौजूद  हैं . केवल एक आयत  ऐसी  थी जो मुहम्मद की मौत के कुछ  समय  बाद  निकाल  दी गयी  थी .तब तक मुस्लिम  कुरानमें शैतान  की यह आयात  नमाज में पढ़ते  थे
इस  बात  को और स्पष्ट  करने के लिए हमें मक्का के उस घटनाक्रम  को देखना  होगा जब  मुहम्मद साहब ने मक्का में इस्लाम  का प्रचार  प्रारम्भ  कर दिया था . और खुद उनके कबीले  कुरैश  के लोग  उनका घोर  विरोध  कर रहे थे .और  विरोध  को शांत  करने के लिए   मुहम्मद  ने जो तरकीब  निकाली  थी , यही  लेख  का मुख्य विषय  है , जिसे  बिन्दुबार  स्पष्ट  किया  जा रहा है .
1-कुरैश का आरोप 
कुरैश  के लोग मुहम्मद साहब का विरोध इसलिए करते थे की वह कुरैश  के देवताओं  की निंदा   करते थे ,और पूर्वजों के धर्म की जगह    एक नया धर्म चलाना  चाहते ,और कुरान को अल्लाह की किताब  बताते थे.
यह  लोग कहते हैं कि इसने ( मुहम्मद ) ने कुरआन को खुद  गढ़  लिया  है "
सूरा -हूद 11 :13 
2-रसूल  का दावा 
जब भी लोग आरोप  लगते थे कि मुहम्मद ही  कुरान बनाते थे ,या किसी और से बनवाते थे ,तो मुहम्मद साहब यह दावा करते थे
"यदि जिन्न और  इन्सान इकट्ठे  होजाएं ,और चाहें  कि  कुरान  जैसी  किताब  बना लें ,तो वह कुरान  जैसी एक आयत  भी नहीं  बना  सकेंगे "
सूरा -बनी इस्रायेल 17 :88 
3-शैतान का भय दिखाना 
मुहम्मद साहब  हमेशा लोगों  को शैतान  का डर  दिखाते रहते थे . और आज भी मुसलमान   कुरान पढ़ते समय  अल्लाह के नाम से पहले शैतान   का  नाम  लेते हैं .भले  उस पर धिक्कार करते हों .कुरान में कहा  है ,
"और तुम  जब  भी कुरान  पढ़ने  लगो तो धिक्कारे  हुए शैतान  से बचने के लिए अल्लाह की पनाह  मांग  लिया  करो "
فَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ فَاسْتَعِذْ بِاللّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
सूरा -अन नहल 16 :98 
4-कुरैश   को  कैसे मनाया 
मुहम्मद साहब के कबीले  का  नाम  कुरैश  था . यह  लोग ही मक्का  स्थित काबा  के पुजारी  होते थे . जब  मुहम्मद साहब  खुले  आम    कुरैश  के देवी देवताओं  की  निंदा  करने लगे और इस्लाम  का प्रचार  करने  लगे ,तो कुरश केलोग उनके घोर  विरोधी   हो गए .और इस्लाम समर्थक  सभी  लोगों   का वहिष्कार   कर दिया .और जब कुरैश  ने अत्याचार की हद  कर दी , मुहमद साहब के साथी   जान बचने के लिए  परिवार सहित " इथोपिया - الحبشة -Abyssinia- " भाग  गए .  यह घटना हिजरी सन  से पूर्व  इस्लाम के सातवें  महिने  रजब सन  
614 -615 ईस्वी  की है .और  जब  मुहम्मद  साहब के  83  खास  लोग   भाग गए तो . मुहम्मद  साहब ने कुरैश  को मनाने के लिए  तरकीब  निकाली .और  जब वह काबा   में गये  ,तो मौजूद कुरैश के लोगों  के सामने  जोर से  सूरा  " नज्म  "  सुनाई .और जब उन्होंने  सूरा  नज्म-53   की   आयत  19  से 21  सुनाई  तो  कुरश के लोग खुश  हो गए . और बोले आखिर  मुहम्मद को  हमारे  देवताओं  की  महानता  का  बोध  हो गया . तब  मुहम्मद  साहब के साथ  उपस्थित सभी  लोगों ने मिलकर  काबा में  नमाज पढ़ी .इस घटना  का उल्लेख हदीसों और  तफ़सीरों  की  किताबों  में  है .इसी तरह  इस्लाम  के इतिहास की किताबों  में लिखा  है ,जब  मुहम्मद साहब ने  कुरैश  की देवियाँ   लात ,उज्जा ,और मनात  का उल्लेख  कुरान  में  किया तो वह संतुष्ट हो गए , और उन्होंने मुसलमानों पर जो  पाबंदी  लगा रखी थी ,उसे हटा  लिए . जैसे ही   खबर इथोपिया तक पहुंची  , जो मुहम्मद साहब के  जितने साथी भाग  गए थे सब  मक्का  वापिस  आगये .  इस तरह  मुहम्मद साहब की योजना  सफल  हो गयी .इस तरह  शैतान से प्रेरित  आयतें  कुरान  की सूरा नज्म  में  शामिल कर  ली गयी ,ताकि कुरैश  के लोग  कुरान और इस्लाम का विरोध  बंद  करदें  . लेकिन " गरानीक  "  वाली आयत  बाद में हटा दी  गयी , क्योंकि  उसका कुरैश  के देवताओं  से  कोई सम्बन्ध नहीं था .
,यह बात  इन किताबों  में मौजूद  है ..
 (Ibn Ishaq, p. 166)और (Ibn Sa'd, vol. 1, p. 237) 

5-सूरा  नज्म  में क्या है ,
मुहम्मद साहब एक चतुर चालाक व्यक्ति थे , इसलिए कुरैश  के लोगों   को खुश  करने के लि जब कुरान  की सूर नज्म की यह  आयतें सुनाने लगे तो तो बीच में शैतान  ने उनके मुंह  से  यह आयतें बुलवा दीं .सूर नज्म की यह आयतें  यह हैं , 
"
أَفَرَأَيْتُمُ اللَّاتَ وَالْعُزَّى
وَمَنَاةَ الثَّالِثَةَ الْأُخْرَى
أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَى
"क्या तुमने  देखा ,लात और  उज्जा और तीसरी एक और है मनात  ,तुम्हारे लिए  बेटे और उसके लिए बेटियाँ
"सूरा -नज्म 53 -:19-21
تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَى. سورة النجم - سورة ‏٥٣: ١٩-٢٢‏
  इन  आयातों  के आतिरिक्त  शैतान  ने मुहम्मद  साहब  के मुंह  से  एक और आयत बुलवाई  थी , जिसका उल्लेख जिन   इस्लामी विद्वानों ने  सूरा  नज्म की तफ़सीर में किया  है ,उनके नाम  इस प्रकार हैं ,
6-फतह अल बारी 
इब्ने हाजर  ने  सूरा  नज्म  की तफ़सीर  में  अपनी किताब फतह अल बारी में  कहा है कि  जब रसूल कुरैश  लोगों की सभा में  गए  तो जब  वह  सूरा  नज्म  पढ़ी  और जब  इस आयत पर पर पंहुचे  "क्या तुमने लात ,उज्जा  और मनात  पर  गौर किया "."तभी सैतान ने रसूल  की जीभ  को मोड़ दिया (प्रभावित ) कर दिया .जिसके कारण रसूल ने बिना जाने  यह आयत भी जोड़ दी "और ऊंचे आकाश में उड़ने वाले गरानीक ( सारस )को "वल गरानीक  अल ऊला   -و الغرانيق الاولي "रसूल  ने यह  आयत  इसलिए जोड़ दी थी .क्योंकि शैतान  ने उनकी  जीभ से यह शब्द बुलवाये   थे .

 The Prophet (s) had, during an assembly of the [men of] Quraysh, after reciting the [following verses from] sūrat al-Najm, Have you considered Lāt and ‘Uzzā? And Manāt, the third one? [53:19-20] added, as a result of Satan casting them onto his tongue without his [the Prophet’s] being aware of it, [the following words]:(
 ‘those are the high-flying crane (al-gharānīq al-‘ulā)

 that Satan had cast onto his tongue 


{ وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ وَلاَ نَبِيٍّ إِلاَّ إِذَا تَمَنَّىٰ أَلْقَى ٱلشَّيْطَانُ فِيۤ أُمْنِيَّتِهِ فَيَنسَخُ ٱللَّهُ مَا يُلْقِي ٱلشَّيْطَانُ ثُمَّ يُحْكِمُ ٱللَّهُ آيَاتِهِ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ }

Ibn Hajar in Fath al-Bari, 1959 ed. vol. 8:[p. 439]

7-तफ़सीर जालैन 
इमाम जलालुद्दीन  महल्ली  ( हि 864 . ई ० 1459 ) ने  कुरान  की तफ़सीर  लिखी है ,जिसका नाम " तफ़सीर जालैन -  تفسير الجلالين       " है .इस तफ़सीर  में कुरान  की सूरा नज्म 53 की आयत  19 से 21  तक की व्याख्या में  लिखा है ,शैतान  ने  रसूल  की जीभ पर असर कर  दिया था ,और जिसके कारण रसूल कुरैश  के देवताओं  का बखान  करने लगे थे . और यह आयत अपने मुंह से कही थी .
That He may make what Satan has casted for his tongue uttered mention of their gods 
.
{ لِّيَجْعَلَ مَا يُلْقِي ٱلشَّيْطَانُ فِتْنَةً لِّلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ وَإِنَّ ٱلظَّالِمِينَ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ }
That He may make what Satan has cast a trial, a test, for those in whose hearts is a sickness, dissension and hypocrisy, and those whose hearts are hardened, namely, the idolaters, [hardened] against acceptance of the truth. For truly the evildoers, the disbelievers, are [steeped] in extreme defiance, [in] a protracted feud with the Prophet (s) and the believers, for his tongue uttered mention of their gods in a way that pleased them, and yet this was later nullified.
* تفسير Tafsir al-Jalalayn مصنف و لم يتم تدقيقه بعد

इस घटना  का प्रमाण सही बुखारी की  इन हदीसों में मिलता है ,
8-पहली हदीस 
"अब्दुल्लाह  बिन मसूद  ने कहा कि जब रसूल  ने मक्का  में  सूरा  नज्म  की यह आयतें  पढ़ी ,तो वहां मौजूद   कुरैश के  सभी   लोगों ने रसूल के साथ  नमाज पढ़ी ,तब रसूल  ने कहा अब मुझे संतोष  हुआ है "
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ الأَسْوَدَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَرَأَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم النَّجْمَ بِمَكَّةَ فَسَجَدَ فِيهَا، وَسَجَدَ مَنْ مَعَهُ، غَيْرَ شَيْخٍ أَخَذَ كَفًّا مِنْ حَصًى أَوْ تُرَابٍ فَرَفَعَهُ إِلَى جَبْهَتِهِ وَقَالَ يَكْفِينِي هَذَا‏.‏ فَرَأَيْتُهُ بَعْدَ ذَلِكَ قُتِلَ كَافِرًا‏.‏
बुखारी -जिल्द 2  किताब 19 हदीस 173
9-दूसरी  हदीस 
"इब्ने अब्बास  ने कहा कि जा रसूल  ने सूर नज्म  की यह  आयतें  पढ़ी ,तो कुरैश  के लोग खुश हो गए .फिर इसके बाद  रसूल के साथ   मुशरिकों , जिन्नों  और  इंसानों  ने नमाज पढ़ी .
 حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم سَجَدَ بِالنَّجْمِ وَسَجَدَ مَعَهُ الْمُسْلِمُونَ وَالْمُشْرِكُونَ وَالْجِنُّ وَالإِنْسُ‏.‏ وَرَوَاهُ ابْنُ طَهْمَانَ عَنْ أَيُّوبَ‏.‏
बुखारी - जिल्द 2 किताब 19 हदीस 177
10-गरानिक  क्या है 
कुरान  की सभी तफसीरों  में  यह शब्द केवल एक बार ही  मिलता . जिसे इब्ने इशाक  ने दिया है " गरानिक-غرنيق " एक  पक्षी   बताया   गया है आकाश में  काफी ऊंचाई पर  उडता  है .इसका समानार्थी शब्द अंगरेजी में  नहीं  मिलता . लोग  इस पक्षी के लिए  "crane" , "eagle"प्रयोग  करते  हैं .यह  बाज "   "की तरह एक पक्षी  है . अरबी में इसका एकवचन " गिरनिक - غرنيق" और बहु बचन "गिरानीक  - غرانيق "  होता  है .और मुहम्मद  साहब ने शैतान   द्वारा प्रेरित आयात में  इसी  का  उल्लेख  किया  है . (Ibn Ishaq, pp. 165-166)
11-मुहम्मद पर शैतान का प्रभाव 
खुद कुरान  इस बात को मानती  है  कि अल्लाह के रसूलों को शैतान प्रभावित  करता है , और उन से  कुछ  भी करा  सकता  है ,कुरान की इस आयत से यह सिद्ध  होता है ,
" हे मुहम्मद तुम से पहले  जितने रसूल और नबी हमने भेजे थे  . शैतान ने उनकी बातों में सत्य के साथ असत्य  मिला  दिया  था .और शैतान   यही करता  है "
सूरा -अल हज्ज 22 :52 
12-आयत  क्यों हटाई 
जब  लोग मुहम्मद  साहब की  "गरानीक " वाली बेतुकी ,निरर्थक और असम्बद्ध  आयात का  मजाक उड़ाने लगे  तो   मुहम्मद  साहब ने   कुरान इस आयत  को हटा  दिया , और   कारण  पूछने पर  यह आयत  सुना  दी ,
"हम  जब  कोई आयत निरस्त  करते  हैं  ,या  भुलवा  देते हैं  ,तो दूसरी आयत  ले आते हैं " सूरा -बकरा 2 :106 
13-हटाई  गयी आयत 
दिए गए प्रमाणों के अनुसार शैतान  ने मुहम्मद साहब  के मुंह से  चार आयतें  बुलवाई  थी ,जिन में से तीन  कुरान की सूरा   नज्म सूरा संख्या 53 की आयत संख्या  19  से  21  हैं .और जो इनके बाद  की आयत थी वह इस प्रकार है ,
"वल गरानीक  अल ऊला   -و الغرانيق الاولي "अर्थात " और वह आकाश की ऊंचाई पर गरनीक -  ‘those are the high-flying gharniq "

इन सभी सबूतों से यही निष्कर्ष निकलता है ,कि जिस कुरान  में शैतान  की आयतें  मौजूद  हों ,उस पर विश्वास  करना   बेकार है . जैसे सौ  किलो दूध में  अगर एक ग्राम  जहर भी  मिलादिया जाये तो लोग उस दूध  को नहीं  पियेंगे . हमें अधिक कहने  की जरुरत नहीं , समझदार लोग  इतने  से ही समझ  लेंगे .

(200/121)Dt-26/11/2019 (01/09/2013

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

सुप्रीम कोर्ट के न्याय से ओवैसियों में हाय हाय ! !

हम  सभी राम भक्त   माननीय  ऊच्चतम   न्यायालय का  हृदय से आभार मानते  हैं कि उसने निर्धारित समय सीमा  में   491 साल पुराने राम मंदिर प्रकरण  का सदा  के लिए निपटारा कर  दिया  , इतिहास  में पहली  बार  अदालत  ने  किसी मामले का फैसला  नहीं बल्कि न्याय  किया  है  ,इस न्याय  में कुछ   ऐसी महत्वपूर्ण हुई  हैं   ,जो पहले  किसी  अदालत  या  मामले  में नहीं   हुई  भविष्य में  नजीर  मानी  जाएँगी  , जैसे  ,
1-अदालत  ने भगवान  राम   को कल्पित  चरित्र  नही  बल्कि राम  के बाल  रूप  राम लला  के नाम  से एक पक्षकार  यानी  जीवित व्यक्ति   मना   है  ,और उनको अबतक विवाद  ग्रस्त  रही भूमि  का  असली स्वामी  मानकर भूमि  का अधिपत्य  उनको  सौंप  दिया 
2-अदालत  ने हिन्दू  और मुस्लिम  दौनों  पक्षकारो  की  आस्थाओं   को  अमान्य   कर   दिया  ,हिन्दुओं   की  दलील  थी कि हमारी आस्था   है कि भगवान  राम   का  जन्म उसी जगह हुआ  था   आज  जहाँ  बाबरी  ढांचा  है  ,  और मुस्लिमों  की  दलील थी  कि हमारी शरीयत पर  आस्था  है  ,  और मस्जिद अल्लाह  का घर  होती  है  ,  जिसे हटाया   नहीं  जा  सकता  ,  अदालत  ने दोनो  की  बात  नहीं  मानी     
2-अदालत  ने  आस्था  को दरकिनार  करते हुए  पुरातत्व  विभाग  द्वारा  अयोध्या  की खुदाई  को रिपोर्ट  को  प्रमाण  माना  , और कहा   की  विज्ञानं  की   अन्य  शाखाओं  की  तरह  "आर्कियोलॉजी  (Archeology   ) भी  एक विज्ञानं  है  ,और इसकी रिपोर्ट   बताती है की बाबर   से भी काफी पहले इस जगह  हिन्दू मंदिर  था  जिसे तोड़ कर  मस्जिद  बनायीं   गयी  थी  ,  इसलिए  जिस जगह  का   असली स्वामी   राम लला   है  , 
 और  मुस्लिमों  से कहा मस्जिद अल्लाह  घर  नहीं  है उसे दूसरी  जगह  हटाया  जा  सकता   है . लेकिन   ओवैसी और उसके   चमचों को  अदालत यह न्याय पसंद  नहीं  आया   , और जब  अदालत ने मुसलमानों  को   पांच  एकड़  देकर दूसरी जगह  मस्जिद  बनाने  का  निर्णय  दिया तो ओवैसी  और बौखला गया  , और बोला हमें     खैरात में  जमीन   नहीं  चाहिए  ,  हम  खुद्दार  लोग  हैं   , अपने पैसों   से जमीन  खरीद  कर  मस्जिद  बना  सकते  है  , 
हम  ओवैसी  से पूछना  चाहते  है  की  अगर उसमे सचमुच  खुद्दारी  है  ,तो वह एक भी ऐसी मस्जिद बताये  जो उसके लुटेरे पुरखों  ने जमीन  खरीद  कर बनवायी   हो  , सिर्फ  भारत नहीं  पूरी  दुनियां  में मुसलमानों  ने जीतनी  भी  मस्जिदें  बनवायी  है  ,सभी  दूसरे  धर्म   के लोगों  उपासना स्थल  तोड़  कर बनायीं है  ,  या  दूसरों  के  धर्म  स्थानों  पर  कब्ज़ा  कर  के बनायीं  हैं   ,यहां  तक मुहमद  काबा  की मूर्तियों  तोड़  कर वहां  अपना  अल्लाह  घुसा    दिया  , और  उसी  के पास  शैतान     को  बसा  दिया  ,यानि अल्लाह को  शैतान का पड़ौसी  बना   दिया   
3-राममंदिर  न्यास का गठन 
हमें इस कटु सत्य को स्वीकार करना  होगा  की सभी मंदिरों  के पुजारी  ,महंत  ,पण्डे   किसी  दरगाह के खादिमों की तरह  स्वार्थी  और लालची  होते  हैं  ,  इन  पाखंडियों   ने पैसों  के लालच  में राहुल गाँधी  जैसे हिन्दू द्रोही  को मंदिर में प्रवेश     करा दिया  ,लेकिन यदि कोई   निम्न जाती का  व्यक्ति किसी मंदिर के गर्भ गृह   तक  जाने  की  इच्छा  करे  तो यही महंत  उसे बहार  से  ही भगा   देते  ,  इसी लिए जैसे ही राम मदिर  के निर्माण  का रास्ता  साफ  हो गया यह  ढोंगी  संत  ,महंत मेकअप  करके   राम  मदिर  न्यास  ( Trust  )   में घुसने  की तरकीबें  निकालने  लगे  ताकि  अपना मोटा  पेट  भरते  रहें  , इसी लालच  के  लिए यह  हिन्दू दल    आपस में ही लड़ने  लगे    कमलेश  तिवारी  की हत्या  का  यही आपसी झगड़ा  है  ,यह तुलसीदास  के चेले    अभी  से ईंटों  के नाम  से लोगों   से धन  जुटाने के  लग  गए   जबकि तिरुपत   बालाजी ट्रस्ट में राम मंदिर निर्माण के लिए  1 अरब 
 यानि  सौ  करोड़  रूपया    दे दिया  है  , इसलिए  हमारा सुझाव है कि  इन कीर्तन कारी  गवैये  लोगों को न्यास में  नहीं  रखा जाये   नहीं तो यह लोग को  कथा कीर्तन   सुना  सुना कर हिन्दू   पुरषों   को भांड  और स्त्रियों  को नर्तकी  बना  कर रख  देंगे     इसके  अतिरिक्त  कुछ सुझाव  इस प्रकार  हैं
1- , एक व्यक्ति वाल्मीकि    समाज  से हो  क्योंक  अगर वाल्मीकि नहीं होते तो राम  के बारे में  किसी को कूछ पता  नहीं  होता ,  तुलसी दस   ने तो  राम को कल्पित   साबित  करने में कोई कसर नहीं  छोड़ी   ,  क्योंकि  जब काशी के लोगों  ने तुलसी दास को  रहने के  लिए जगह नहीं  दी  थी  , तो तुलसी दास के घनिष्ट मित्र    अब्दुल  रहीम  खान  खाना   ने  तुलसी  दास  को  एक मस्जिद  में रहने   की जगह  दी  थी  , उसी मस्जिद  में बैठ  कर तुलसी  दास  ने  राम  चरित  मानस  नाम  की किताब  रची  ,  जिसके कारन   हिन्दू अपने सभी ग्रन्थ   भूल  गए  ,  यह मुसलमानों  की सांगत  का  असर  है ,
कुछ   सेकुलर  यह भी  मांग करने लगे कि परातत्ववेत्ता  के के  मुहम्मद  को न्यास का   सदस्य बनाया जाये क्योंकि उन्ही के  प्रयासों से  सुप्रीम कोर्ट ने माना  की राम  का जन्म उसी जगह हुआ  जहा पहले  बाबरी ढाँचा  था  , हमारा  सुझाव है कि इनको ट्रस्टी न  बना कर  सम्मानित  कर  दिया  जाये 
इसके  अतिरिक्त   ,   न्यास  में  ऐक केवट  ,  ऐक भील   , और  एक  वनवासी  को  जरूर  रखा  जाये  , क्योंकि इनका उल्लेख    राम  के इतिहास में  है  ,  साथ  में  एक  जैन   को भी रखा  जाये  क्योंकि   भगवान महावीर  भी  इक्ष्वाकु  वंश  में हुए  थे जो  राम  के पूर्वज  थे  ,  और एक सिख  को भी  लिया  जाए क्योंकि   गुरुगोविंद  सिंह  भी   राम  के वंशज   है  और निहंग   सिक्खों  ने राम  मंदिर  के लिए  युद्ध   किया  था ,
अगर ऐसा किया गया तो उन   आंबेडकरवादियों   का मुंह बंद हो जायेगा जो कहते हैं कि हिंदू  धर्म  सिर्फ   सवर्ण लोगों  के  लिए है ,  इसमें  दलित  और पिछड़े लोगों   के लिए कोई  स्थान   नहीं   है  , इस  से कान्ग्रेसिओं     का मुंह  भी काला हो  जायेगा हो  हमें    सम्प्रदायवादी     कहते  हैं  ,
लेकिन भूल  करके भी  किसी सेकुलर  या  कांग्रेसी को     ट्रस्टी  नहीं  बनाया  जाये  चाहे वह सुप्रीम कोर्ट का रिटायर्ड  जज ही क्यों न   हो 
  
  ऐसा  करने  से पूरे  हिन्दुओं  को ऐसा  लगेगा  जैसे  सचमुच    रामराज्य   आगया   है ,
(422 )

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

मुसलमानों के अधिकार का औचित्य !

विश्व के हरेक व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार मिलना चाहिए . सभी इस बात पर सहमत होंगे . परन्तु इस बात से भी सभी लोग सहमत होंगे अधिकारों का जन्म कर्तव्य से होता है . सिर्फ जनसख्या कम होने के आधार पर ही अधिकारों की मांग करना तर्कसंगत नहीं है . सब जानते कि मुसलमानों ने सैकड़ों साल तक इस देश को लूट लूट कर कंगाल कर दिया . लोगों की भलाई की जगह मकबरे , कबरिस्तान , मजार और मस्जिदें ही बनायी है . और जब हिदू देश की आजादी के लिए शहीद हो रहे थे ,तो इन्हीं मुसलमानों ने देश के टुकडे करवा दिए . फिर भी अल्पसंख्यक होने का बहाना लेकर अधिकारों की मांग कर रहे हैं . आप एक भी ऐसा मुस्लिम देश बता दीजिये जहाँ अल्पसंख्यक होने के आधार पर गैर मुस्लिमों को वह अधिकार मिलते हों ,जो मुसलमान यहाँ मांग रहे हैं . मुसलमान हमेशा दूसरों के अधिकार छीनते आये हैं और आपसी मित्रता ,सद्भाव , भाईचारे की आड़ में पीठ में छुरा भोंकते आये हैं यह इस्लाम के इतिहास से प्रमाणित होता है , मुसलमान अपनी कपट नीति नहीं छोड़ सकते , कैसे कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो सकती ,
1-मुसलमानों की कपट नीति 
अरब के लोग पैदायशी लुटेरे , और सतालोभी होते हैं .मुहम्मद की मौत के बाद ही उसके रिश्तेदार खलीफा बन कर तलवार के जोर पर इस्लाम फैलाने लगे . और जिहाद के बहाने लूटमार करने लगे , यह सातवीं शताब्दी की बात है , उस समय मुसलमानों का दूसरा खलीफा "उमर इब्ने खत्ताब " दमिश्क पर हमला करके उस पर कब्ज़ा कर चुका था . उम्र का जन्म सन 586और 590 ईस्वी के बीच हुआ था और मौत 7नवम्बर 644 ईस्वी में हुई थी . चूंकि यरूशलेम दमिश्क के पास था ,और वहां बहुसंख्यक ईसाई थे . यरूशलेम स्थानीय शासन "पेट्रीआर्क सोफ़्रोनिअसSophronius  " (Σωφρόνιος ) के हाथों में था . ईसाई उसे संत (Saint ) भी मानते थे .यरूशलेम यहूदियों ,ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र शहर था . और उमर बिना खूनखराबा के यरूशलेम को हथियाना चाहता था . इसलिए उसने एक चाल चली . और यरूशलेम के पेट्रआर्क सन्देश भेजा कि इस्लाम तो शांति का धर्म है . यदि आप के लोग समर्पण कर देगे तो हम भरोसा देते है कि आपकी और आपके लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे .और इसके साथ ही उमर एक संधिपरत्र का मसौदा ( Draft ) यरूशलेम भिजवा दिया . जिस पर यरूशलेम के पेर्ट्रीआर्क ने सही कर दिए . और उमर पर भरोसा करके यरूशलेम उमर के हवाले कर दिया .
2-उमर का सन्धिपत्र 
इस्लामी इतिहास में इस संधिपत्र को " उमर का संधिपत्र ( Pact of Umar ) या " अहद अल उमरिया  العهدة العمرية‎ " कहा जाता है .इसका काल लगभग सन 637 बताया जाता है . उमर ने यह संधिपत्र "अबूबक्र मुहम्मद इब्न अल वलीद तरतूशأبو بكر محمد بن الوليد الطرطوش  " से बनवाया था .जिसने इस संधिपत्र का उल्लेख अपनी प्रसिद्ध किताब " सिराज अल मुल्क  سراج الملوك" केपेज संख्या 229 और 230 पर दिया है .इस संधिपत्र का पूरा प्रारूप " एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी University of Edinburgh  " ने सन 1979 में पकाशित किया है .इस संधिपत्र की शर्तों को पढ़ने के बाद पता चलेगा कि मित्रता के बहाने मुसलमान कैसा धोखा देते हैं . और अल्पसंख्यकों को अधिकार देने के बहाने उनके अधिकार छीन लेते है . यद्यपि उमर ने इस्लाम को शांति का धर्म बता कर लोगों गुमराह करने के लिए इस संधिपत्र बड़ा ही लुभावना शीर्षक दिया था 
3-इस्लामी शासन में गैर मुस्लिमों का अधिकार !
यद्यपि उमर का संधिपत्र सातवीं सदी में लिखा गया था लेकिन सभी मुस्लिम देश इसे अपना आदर्श मानते है . और हरेक मुस्लिम देश के कानून में उमर के संधिपत्र की कुछ न कुछ धाराएँ जरुर मौजूद है ,उमर के संधिपत्र का हिंदी अनुवाद यहाँ दिया जा रहा है ,
1-हम अपने शहर में और उसके आसपास कोई नया चर्च ,मठ , उपासना स्थल , या सन्यासियों के रहने के लिए कमरे नहीं बनवायेंगे . और उनकी मरम्मत भी नहीं करवाएंगे . चाहे दिन हो या रात
2-हम अपने घर मुस्लिम यात्रियों के लिए हमेशा खुले रखेंगे , और उनके लिए खाने पीने का इंतजाम करेंगे
3-यदि कोई हमारा व्यक्ति मुसलमानों से बचने के लिए चर्च में शरण मांगेगा ,तो हम उसे शरण नहीं देंगे
4-हम अपने बच्चों को बाईबिल नहीं पढ़ाएंगे
5-हम सार्वजनिक रूप से अपने धर्म का प्रचार नहीं करेंगे , और न किसी का धर्म परिवर्तन करेंगे .
6-हम हरेक मुसलमान के प्रति आदर प्रकट करेंगे , और उसे देखते ही आसन से उठ कर खड़े हो जायेंगे . और जब तक वह अनुमति नहीं देता आसन पर नहीं बैठेंगे .
7-हम मुसलमानों से मिलते जुलते कपडे ,पगड़ी और जूते नहीं पहिनेंगे
8-हम किसी मुसलमान के बोलने ,और लहजे की नक़ल नहीं करेंगे और न मुसलमानों जैसे उपनाम (Surname ) रखेंगे
9-हम घोड़ों पर जीन लगाकर नहीं बैठेंगे , किसी प्रकार का हथियार नहीं रखेंगे , और न तलवार पर धार लगायेंगे
10-हम अपनी मुहरों और सीलों ( Stamp ) पर अरबी के आलावा की भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे
11-हम अपने घरों में सिरका (vinegar ) नहीं बनायेंगे
12-हम अपने सिरों के आगे के बाल कटवाते रहेंगे
13-हम अपने रिवाज के मुताबिक कपडे पहिनेंगे ,लेकिन कमर पर "जुन्नार" ( एक प्रकार का मोटा धागा ) नहीं बांधेंगे
14-हम मुस्लिम मुहल्लों से होकर अपने जुलूस नहीं निकालेंगे , और न अपनी किताबें , और क्रूस प्रदर्शित करेंगे , और अपनी प्रार्थनाएं भी धीमी आवाज में पढेंगे
15-यदि कोई हमारा सम्बन्धी मर जाये तो हम जोर जोर से नहीं रोयेंगे , और उसके जनाजे को ऐसी गलियों से नहीं निकालेंगे जहाँ मुसलमान रहते हों . और न मुस्लिम मुहल्लों के पास अपने मुर्दे दफनायेंगे
16 -यदि कोई मुसलमान हमारे किसी पुरुष या स्त्री को गुलाम बनाना चाहे ,तो हम उसका विरोध नहीं करेंगे 
17-हम अपने घर मुसलमानों से बड़े और ऊँचे नहीं बनायेंगे
" जुबैरिया बिन कदमा अत तमीमी ने कहा जब यह मसौदा तैयार हो गया तो उमर से पूछा गया , हे ईमान वालों के सरदार , क्या इस मसौदे से आप को संतोष हुआ , तो उमर बोले इसमें यह बातें भी जोड़ दो ,हम मुसलमानों द्वारा पकडे गए कैदियों की बनायीं गयी चीजें नहीं बेचेंगे . और हमारे ऊपर रसूल के द्वारा बनाया गया जजिया का नियम लागू होगा " 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 388

4-पाकिस्तान में हिन्दुओं के अधिकार 
पाकिस्तान की मांग उन्हीं मुसलमानों ने की थी जो अविभाजित भारत के उसी भाग में रहते थे जो अज का वर्त्तमान भारत है .पाकिस्तान बनाते ही जिन्ना ने कहा था आज से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों द्वार सील हो गया है "the fate of minorities in this country was sealed forever "
पाकिस्तान में इसी लिए अकसर आये दिन हिन्दू लड़कियों पर बलात्कार होता है , मंदिर तोड़े जाते हैं , बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कराया जाता है .और हमारी हिजड़ा सेकुलर सरकार हिना रब्बानी के साथ मुहब्बत के तराने गाती रहती है . दिखने के लिए पाकिस्तान के संविधान की धारा 20 में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दावा किया गया है . लेकिन मुसलमान संविधान की जगह उमर की संधि पर अमल करते हैं .
हम लोगों से पूछते हैं , सरकार मुसलमानों को अधिकार किस खजाने से देगी ? क्या सोनिया इटली से खजाना लाएगी ?सीधी सी बात है कि मुसलमानों को अधिकार हिन्दुओं से छीन कर दिया जायेगा .
और अब समय आ गया है कि हिन्दू अपना अधिकार इन लुटेरों को देने की बजाये इन छीन लें . तभी देश की गरीबी दूर हो जाएगी औए आतंकवाद भी समाप्त हो जायेगा . क्योंकि हमारे ही पैसों से हमारा ही नाश हो रहा है .
हिन्दुओ अपनी अस्मिता बचाओ , अपने अधिकार छीन लो , अभी उठो !

(200/80)

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

मुसलमानों से दस सवाल ?

यह   एक  कटु  सत्य   है  कि   आज    भारतीय   महाद्वीप   में    जितने भी   मुसलमान   हैं   , उनके पूर्वज    कभी   हिन्दू    थे   ,  जिनको    मुस्लिम    बादशाहों   ने   जबरन   मुसलमान    बना   दिया   था  .  लेकिन   दुर्भाग्य   की   बात है  कि   विदेशी   पैसों   के बल पर  इस्लाम   के  एजेंट  ऐसे  हिन्दुओं     का  धर्म  परिवर्तन कराने में  लगे  रहते हैं  ,  जो इस्लाम  की असलियत  से  अनभिज्ञ   हैं  , या जिनको    हिन्दू  धर्म  का आधा अधूरा   ज्ञान   होता   है  , और दुर्भाग्य से  ऐसे  हिन्दू  युवक  , युवतियां    सेकुलर  विचार वाले होते हैं  , तो  इस्लाम   के प्रचारक  आसानी से उनको  इस्लाम  जाल में  फसा  लेते हैं   , इसलिए  इस्लाम    के  चक्कर   में  फसने  से बचने का  एक  ही  उपाय  है  ,कि  इस्लाम   के  एजेंटों  से  तर्कपूर्ण     सवाल  किये   जाएँ   . क्योंकि  इस्लाम सिर्फ ईमान  लाने  पर  ही  जोर  देता  है  , और  अगर कोई  इस्लाम   के  दलालों   से   सवाल   करता   है  , तो यातो   वह  भड़क   जाते हैं  , या  लड़ने  पर  उतारू   हो  जाते  हैं  .
अक्सर  देखा  गया  है  कि  कुछ  उत्साही   हिन्दू   इस्लाम   के  समर्थकों    के साथ शाश्त्रार्थ     किया  करते  हैं   , इसलिए   उनकी  सहायता के लिए दस  ऐसे  सवाल   दिए  जा   रहे  हैं  , जिनका  सटीक  ,  प्रमाण  सहित  और   तर्कपूर्ण    जवाब   कोई  मुल्ला मौलवी    नहीं  दे  सकता  .

1-.मुसलमानों   का दावा  है  कि  कुरान  अल्लाह की  किताब  है   , और  कुरान   में  बच्चों  की  खतना   करने का   हुक्म  नहीं   है  ,  फिर भी  मुसलमान   खतना क्यों    कराते   है  ?  क्या   अल्लाह में  इतनी  भी    शक्ति  नहीं   है कि मुसलमानों     के  खतना  वाले   बच्चे   ही  पैदा    कर सके ?और  कुरान  के विरद्ध   काम  करने   से  मुसलमानों   को  काफ़िर   क्यों   नहीं   माना जाए  ?

2-मुसलमान   मानते हैं   कि  अल्लाह  ने फ़रिश्ते  के  हाथो   कुरआन   की  पहली  सूरा   लिखित रूप   में  मुहम्मद  को  दी थी  , लेकिन  अनपढ़ होने से वह  उसे    नहीं   पढ़   सके  , इसके  अलावा   मुसलमान   यह   भी  दावा करते हैं   कि  विश्व  में कुरान   एकमात्र ऐसी  किताब  है जो   पूर्णतयः  सुरक्षित   है   , तो  मुसलमान     कुरान    की   वह    सूरा  पेश   क्यों   नहीं   कर देते    जो  अल्लाह  ने लिख कर भेजी  थी    , इस से  तुरंत  पता हो जायेगा कि वह  कागज   कहाँ   बना था   ? और  अल्लाह   की  राईटिंग   कैसी    थी  ?वर्ना  हम  क्यों   नहीं   माने कि  जैसे  अल्लाह फर्जी   है   वैसे ही  कुरान   भी  फर्जी   है

3. इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.-जन्नत या जहन्नुम ? और  किस आधार   पर   ??

4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी...तो स्त्री को क्या मिलेगा...... 72 हूरा (पुरुष वेश्या) .??और  अगर  कोई  बच्चा  पैदा  होते ही  मर   जाये    तो   क्या  उसे भी  हूरें  मिलेंगी   ?  और वह  हूरों   का क्या  करेगा  ?

5.- यदि   मुसलमानों की  तरह  ईसाई   , यहूदी  और  हिन्दू   मिलकर     मुसलमानों  के विरुद्ध  जिहाद  करें    ,  तो  क्या मुसलमान  इसे   धार्मिक   कार्य   मानेंगे   या  अपराध    ?  और  क्यों ? 

6-.यदि कोई  गैर  मुस्लिम  (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा....? और क्यों ?और, अगर ऐसा करेगा तो.... क्या ये अन्याय नहीं हुआ ??

7.कुरान   के  अनुसार  मुहम्मद  सशरीर  जन्नत   गए  थे  , और  वहां  अल्लाह  से बात भी  की थी   ,  लेकिन  जब अल्लाह  निराकार है  , और उसकी कोई   इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ??और   कैसे  पहिचाना  कि यह  अल्लाह   है   , या  शैतान    है  ?
8-  मुसलमानों   का  दावा   है कि      जन्नत  जाते  समय   मुहम्मद   ने  येरूसलम     की   बैतूल  मुक़द्दस   नामकी मस्जिद   में  नमाज  पढ़ी  थी ,लेकिन  वह   मुहम्मद के  जन्म  से पहले ही  रोमन    लोगों  ने  नष्ट  कर दी थी  .  मुहम्मद के  समय उसका  नामो  निशान   नहीं  था  , तो  मुहम्मद  ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी  ? हम   मुहम्मद को  झूठा   क्यों   नहीं  कहें   ?

9-.अल्लाह ने  अनपढ़  मुहम्मद में  ऐसी   कौनसी   विशेषता   देखी  .  जो  उनको   अपना  रसूल  नियुक्त   कर दिया   ,क्या   उस  समय  पूरे अरब  में एकभी  ऐसा पढ़ालिखा    व्यक्ति   नहीं    था   , जिसे  अल्लाह   रसूल  बना   देता   , और  जब  अल्लाह  सचमुच  सर्वशक्तिमान   है  , तो   अल्लाह  मुहम्मद  को  63  साल   में भी    अरबी  लिखने    या  पढने की    बुद्धि   क्यों नहीं   दे पाया 

10.जो  व्यक्ति  अपने  जिहादियों   की  गैंग   बना कर   जगह जगह लूट   करवाता   हो   ,  और लूट के  माल से बाकायदा      अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा  (20 %० )  रख   लेता  हो  ,  उसे   उसे  अल्लाह   का रसूल   कहने की  जगह  लुटरों    का  सरदार  क्यों  न   कहें  ?

नोट-  यह  प्रश्नावली    भंडाफोडू    ब्लॉग    के लेखों  से   चुन   कर  बनायी   गयी   है  , जो पिछले   7  सालों   से इस्लाम   के नाम पर   होने वाले  आतंक  और  हिन्दू  विरोधी    जिहाद  का  भंडा   फोड़   करता   आया   है  . इन लेखों   का उद्देश्य  इस्लाम  की  असलियत  लोगों   को बताना है   ,  क्योंकि  इस्लाम   धर्म  नहीं  एक   उन्माद   है   ,  जो  विश्व   के  लिए  विशेष  कर  भारत के लिए  खतरा   है   . पाठकों   से निवेदन   है  कि  वह  भंडाफोडू  ब्लॉग  और  फेसबुक     में  इसी   नाम  के  ग्रुप   के लेखों   को  ध्यान   से पढ़ें   ,  और   उनका  प्रचार  प्रसार करें ,  . इनकी लिंक   दी   जा रही   है 
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(221)No .221Date .04/11/2014

FB.Date.06/11/2014