गुरुवार, 30 जनवरी 2020

मुहम्मद डरपोक भगोड़े और कृतघ्न हैं !

 इस बात  से  कोई इंकार नहीं  कर सकेगा कि मुसलमान  अपनी संतानों  को बचपन  से इस्लाम  के बारे  में ऐसी ऐसी बातें  सुनते और सिखाते है  जिस से उनके बच्चे  इस्लाम  को  सबसे  उत्तम  और अन्य धर्मों को झूठा और पाखण्ड   मानने  लगते  हैं  , और जब यही  बच्चे  युवा हो  जाते  हैं  तो खुद  को इस्लाम  का   सबसे  हितैषी     और  अन्य  धर्म  के लोगों  को इस्लाम  का दुश्मन    समझने  लगते  , फिर  चाहे कितने  भी शिक्षित  हो   जाएँ  ,उनकी भाषा  हमेशा   उग्र  ही  रहती  है  और विचार जिहादी  ही बने  रहते  हैं  .
कुछ  ही दिन  पहले   एक  घटिया से एक्टर ऐयाज  खान  ने अपना नाम  कमाने   के लिए  मुसलमानों  को भड़काने  के उद्देश्य  से डींग मारी ,
" मोदी  सुन  लो  मुसलमान  कोई  रोहंगिया  नहीं  ,जो जान  के डर से भाग  जाए , जान बचने के लिये  डर कर  कहीं   और  भाग  जाना  यह हमारी  फितरत  में  नहीं , हम  तुम्हारे  हलक  में अटक  जायेंगे  "
इसी  तरह  एक  और मुल्ले  ने  कहा  कि "मुसलमान  कोई  कीड़े मकोड़े   नहीं   है   ,  जिनको  तुम   स्प्रे   कर के  भगा  दोगे ? "वास्तव  में ऐसे  डींगबाज मुस्लिम      न  तो  मुहम्मद  का  इतिहास  जानते  हैं  , और  न  अल्लाह  की शक्तिहीनता  के बारे  में  जानते  हैं   ,
इसलिए  सभी मुसलमानों  को पता होना  चाहिए की   अपनी  और  अपने  परिवार और  साथियों  के  मारे जाने  के डर से  मुहम्मद   तीन  बार  भागे थे ,
1-पहली बार डर कर भागा 
इब्ने इशक  द्वारा लिखी  गयी मुहम्मद की  जीवनी  "  सीरः " के  अनुसारजब  मक्का  में लोग  मुहमद  मुहम्मद  के विरुद्ध  हो गए तो मुहम्मद  मुहामद  अपनी  जान बचने के लिए  अपने परिवार  और साथियों  के साथ मक्का से भाग  कर इथोपिया के ईसाई राजा नजाशी की शरण  में गया , यह सलाह मुहम्मद  के साथी  ने  दी थी  ,मुहम्मद  के  साथ केवल    11 पुरुष  और   4 औरतें  थे  ,यह  घटना हिजरी सन से  7 पहले यानि   ईसवी 613 की  है   , अरबी में इसे "अल हिजरत इला हबशह - الهجرة إلى الحبشة‎  "कहा  जाता  है  .

2-दूसरी बार   भागा 
मुहम्मद  दो साल  इथोपिया  में रहा   और लोगों  से मक्का के  हालचाल  पता करता  रहा   ,लोगों से सोचा कि मुहम्मद सुधर गया  होगा   , और जब मुहम्मद को लगा कि मक्का  के कुरैश उसे भूल गए होंगे  तो मुहम्मद  मक्का  वापस  आगया  , लेकिन आते ही मुहमद फिर वही  जिहाद और कुरान की बातें शरू   कर   दीं ,यह  देख  कर  मक्का के लोग मुहम्मद की जान  के दुश्मन  हो गए  , मुहम्मद  समझ  गए कि अब  जान  बचा कर भागने  में ही भलाई   है  , तो मुहम्मद   फिर से मक्का छोड़ कर  इथोपिया भाग   गया  , यह घटना  सन615 ईस्वी  की  है  , इस  बार मुहम्मद  साथ  83   पुरुष  और 19 स्त्रियां  थे। 

3-तीसरी बार  फिर भागा 
फारसी में एक  कविता  है  ,
"गुर्ग जादः हमेशा  गुर्ग शवद -गर्चे बा आदमी बुजुर्ग शवद"
अर्थात  -भेड़िए का बच्चा   हमेशा भेड़िया ही  रहेगा   ,चाहे वह मनुष्यों के बिच रह कर बूढ़ा  ही क्यों  न  हो जाये 
मुहम्मद  को तो पूरी दुनिया  पर  अपनी हुकूमत करने  की सनक सवार  थी   ,इसलिए  करीब  सात साल इथोपिया  रहने बाद  मुहम्मद फिर मक्का आगये  और  इस्लाम  का प्रचार  के साथ  कुरैश  के देवताओं  की निंदा करने लगे ,  इसबार  कुरैश  के लोगों  ने तय  किया  कि यह व्यक्ति  तो  अपनी  आदत  नहीं  छोड़  सकता  इस लिए इसे क़त्ल  करना ही मुनासिब  होगा  ,  और जैसे ही मुहम्मद को खबर मिली  तो डर के मारे जान  बचने   के लिए मक्का  से मदीना  की तरफ भाग  गया  , तब मदीना का नाम  "यसरिब " था  और उसी दिन से" हिजरी -   هِجْرَة‎  "सन शुरू   हुआ .जॉर्जियन कलेण्डर के अनुसार   यह तारीख 22 अप्रेल  सन 622 ईसवी  है . यसरिब मक्का से करीब  320 किलोमीटर  दूर   है  ,उस समय वहां  मूर्तिपूजक अरब लोगों  के साथ  ईसाई और कुछ यहूदी भी  रहते  मुहम्मद के साथियों ने यसरिब के लोगों  से कहा कि मुहम्मद  एक नबी  (Fortune Teller )   हैं  ,चूँकि नबी का अर्थ   हिब्रू और अरबी में भविष्यवक्ता  होता  है , और लोग नबियों का आदर  करते  थे ,इसलिए उन्होंने मुहमद  का स्वागत  किया , उस समय मुहम्मद  ने खुद को रसूल घोषित  नहीं  किया  ," रसूल "शब्द इथोपियन  भाष  का  है ,इसका मतलब  "प्रवक्ता " है , तात्पर्य  अल्लाह की तरफ  से बोलने  बाला .जब मुहमद  यसरिब   आया  तो उसका ससुर अबूबकर मक्का से सैकड़ों लोग     लाया  था , और जब यसरिब  में मुस्लिमों की  आबादी अधिक हुई तो  अबूबकर  ने यसरिब  का नाम "मदीनतुन नबी  -  مَدينة النّبي‎  "  यानी नबी का नगर रख  दिया  , जिसे  आज सिर्फ मदीना  कहा  जाता  है ..
इस प्रकार से मुहम्मद इतिहास  के सबसे कुख्यात भगोड़े   हैं , जो अपनी जान बचाने के लिए तीन तीन  बार भागे ,और जिन ईसाइयों  ने उनको शरण  दी   थी  बाद  में उनको काफिर और मुशरिक  घोषित  कर  दिया .

सोचिये  जब मुहम्मद  इतने  डरपोक  और अहसान फरामोश  थे तो उनके नाम का नारा लगाने वाले  कैसे होंगे ? ऐजाज खान  और शरजील इमाम जैसे  मुस्लिमों  के सामने खुद को हीरो साबित करने के लिए सरकार को सिर्फ बन्दर घुड़की   दे सकते है  , और जब पुलिस का डंडा  सामने दिखा तो शरजील इमाम अपने लम्बे बाल कटवा  कर मस्जिद  में छुप  गया  ,  ऐसे ही ज्यादातर मुस्लिम नेता औरतों  को आगे  कर के इधर उधर बिल में घुस गए ,लेकिन किसी मुल्ले मौलवी ने अपनी पत्नी और बेटियों  को आगे नहीं  किया , फिर भी जिस देश  का अन्न  खाते हैं ,उसी   को बर्बाद  करने  की तरकीबें  करते रहते हैं  , क्योंकि ,
लोगों को  धमकाना   ,डर कर  भाग  जाना और एहसान  भूल  जाना  रसूल  की सुन्नत  है 

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रविवार, 26 जनवरी 2020

फ़सादुद्दीन ख़बीसी का आका इमरान के नाम खत

नोट -इस खत में दिए सभी किरदार मस्नूई  है  , किसी हकीकी  शख्स  से नाम मिलना महज इत्तिफाक  है  ,यह एक मजाहिया  है )
"बिस्मिल्लाह  काज़िबानुल जालिमीन "
अस्सलामुल  अलैकुम ,
हमें  यकींन   है कि आप  अल्लाह के फजल  से बखैरियत  होंगे   ,और किसी न किसी साजिश  में मशगूल  होंगे  , फिर भी हमने यह  खत भेजने  की जुर्रत  की  है  , क्योंकि  पूरा  मामला  जान कर  आप ख़ुशी  के मारे अपने  सभी मसले  भूल  जायगे  , अभी ज्यादा  दिन  नहीं  हुए  राउल  खान  की अम्मी सोनिया  बेगम ने अय्यर  नामके  एक शख्स  को आपके पास भेजा  था  ,ताकि  आप उसे  भारत  में इस्लामी हुकूमत  कायम  करने की आसान  तरकीब  समझा  दें , दर हकीकत  में यह  अय्यर  नहीं  " अय्यार " है ,यह  कम्बख्त   अकेले ही पूरे हिंदुस्तान  को बर्बाद  कर  सकता  है  , हिन्दू  ऐसे आदमी  को विभीषण मानते  हैं ,लेकिन  इस मरदूद  की तरकीब  पर  अमल  करने  से  मोदी  और  शाह  पर कोई खास  असर  नहीं  हुआ ,लेकिन  मुसलमानों  को  एक  की जगह   तीन  फायदे मिल  रहे  हैं  ,जिनकी  तफसील  हस्बे जेल  मुलाहिजा  करिये ,
1-पहला फायदा  तो यह हुआ कि मुस्लिम  मर्दों  की जिस्मानी और माली  जरूरतों  का आसान  हल निकल गया , आप जानते हैं कि अकसर बेरोजगार  रहना  चाहते  हैं ,क्यों वह कोई गैर शरई  काम करना पसंद नहीं  करते  , वे सिर्फ  चोरी  , लूट  , जेब कटना और नकली नॉट छपने और असलाह बनाने को तरजीह  देते ,हैं , और जब घर की ख्वातीन  एहतजाजी  मुजहरों  के लिए शाहीन  बाग़  चली जाती  हैं  ,तो हम बेफिक्र  होकर यही काम करते  है  , क्योंकि  औरतों  के पेट  में ख़ुफ़िया  राज  हजम  नहीं  होते , हम चुपचाप  यही काम  करके खूब  कमा रहे है , पुलिस बेपरवाह हो  गयी है ,
और  जिस्मानी  जरुरत पूरी करने के लिए    लगातार बलात्कार   कर  रहे  हैं लोगों  ध्यान  सिर्फ  धरना प्रदर्शन  की खबरों  पर  है
2-दूसरा  फायदा  यह हुआ कि हमें  अपनी  चारोँ और   ग्यारह बच्चों  को  खिलाने  और पालने की झंझट  से निजात मिल  गई  , क्योंकि  औरतें  अपना बच्चों  का पेट  भर के ऊपर से घर में रूपया लती  है  जिस से हम चरस  और स्मैक खरीद  लेते  हैं  काश  अल्लाह कुरान शरीफ में मुसलमानों  के लिए  चार  की जगह चालीस  औरतें  रखने की इजाजत  दे देता  तो हर मुस्लिम बिन मेहनत  के इतना कमा   लेता की करोड़पति  बन  जाता
3-तीसरे  फायदे की बात  एक राज  है  ,इसलिए हम  सिर्फ  आपको बता  रहे  हैं   ,इतना तो  आपको पता  चल ही गया होगा कि कांग्रसी  और केजरिया  लोग  रोज हर ख्वातीन  को  सात सौ रुपया और बच्चों को पांच सौ रूपये   दे रहें  है  ,लेकिन इस से  ख्वातीन  का सिर्फ पेट  भर जाता है , लेकिन  उनके जिस्म की गर्मी  नहीं बुझती  , वह  भी  एक तरह  का  "जिहादुल जिंस (  sexJihad  )   करके  यहीं  पर जन्नत  के मजे   ले रहीं  है  , सोचिये जब जिहादियों  को जन्नत  में मजे  करने के लिए  हूरें  मिलेंगीं  ,तो औरतें  अपने लिए " हूरा " से मजे  क्यों  न   लें  ,  इसके कांग्रेस  से बढ़िया इंतजाम  कर  दिया है ,कांगेस  ने इसके  फेसबुक  में   ऐसे हजारों पोस्ट  डाले है  जिनमे   लड़कियां  कहती  है , " दोस्ती  करोगे , आज  मैं  अकेली  हूँ  "बेवकूफ  हिन्दू लडके  इन  फर्जी लड़कियों  के जाल में फस उनको अपना नंबर  दे देते  हैं   ,और जब उनके  पास जाते है   तो पता चलता है कि यह मुस्लिम  है , ऐसे  ही  जब एक हिन्दू  लड़का उस  लड़की के बताये शाहीन बाग़  के पास एक ढाबे  पर  तो   दंग रह   गया क्योंकि वह लडकी मुस्लिम निकली ,लड़की का बाप एक  टीचर   है जिसे  वह लड़का  जानता था ,ऐसे एक दो  वाकयात को छोड़ दे ,तो हमारी ख्वातीन  उस  से चार गुना  ज्यादा  कमा रही  है  ,जितना कांग्रेस  और  केजरी   दे  रहें  है  , लोगों  को इसका  पता  तब चला  जब   शाहीन बाग़  से अतराफ़  झाड़ियों  , और  ढाबों   के कचरे के डब्बों  से एक  टी वी वाले ने इस्तेमाल  शुदा   सैंदड़ों  कंडोम बरामद  किये ,हमारा  तो पूरा  यकीन है कि हमारी  ख्वातीन कि यह मेहनत जरूर  रंग  लाएगी  .  आप देखना इंशाअल्लाह इनमे से  ज्यादातर  हामिला हो  जाएँगी ,फिर  आपको  जिहादियों  की कोई कमी  नहीं  होगी  ,आप उनको दूसरे मुल्कों में भेज कर  अपनी गुरबत    दूर  कर   सकते  हैं 
आपका  जिहादी भाई  -फ़सादुद्दीन ख़बीसी 
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मंगलवार, 21 जनवरी 2020

राहुल के गोत्र का रहस्य बेनकाब !

अगर  हम कहें कि राहुल के गोत्र का पता  सोनिया के गर्भाशय की जाँच  करते हुए सितम्बर   2013  में पता  चल  गया  था  , जिसे राहुल  ने 27 नवम्बर  2018 में प्रकट  कर  दिया  था  जब  वह पुष्कर में ब्रह्मा  जी के मंदिर में पूजा  का पाखंड करके  खुद को हिन्दू ब्राह्मण   साबित  करने  गया  था , इसलिए  सभी पाठकों  से अनुरोध  है कि इस  लेख को पूरा  ध्यान  से पढ़ें
,आप सभी भांति जानते हैं  कि राहुल गंदी जितना भौंदू  है   , सोनिया उस से कई गुना चालाक  ,और धूर्त  है  , यह एक ऐसी महिला है  जिसकी असलियत बहुत कम  लोग जानते  है , नेहरू खानदान   की बहु होने  से  सोनिया भी सत्ता के लिए  धर्म  का सहारा लेने  में माहिर  है ,सोनिया  अपने   नालायक राहुल  को देश  का प्रधान मंत्री बनाना  चाहती  है  लेकिन  वर्ण संकर  और दोगला होने से  सोनिया को  डर था  की  राहुल को हिन्दू  वोट नहीं मिलेंगे  ,  इसके सोनिया  ने अपने  खास  सलाहकार अहमद पटेल  से कोई  तरकीब निकलने को  कहा  , उसने कहा  अगर  आप  राहुल को  ब्राह्मण  साबित  कर  दो  ,तो सभी  सवर्ण  हिन्दुओं  के वोट   कांग्रेस  को मिल   सकते  है  , तब  सोनिया  ने  राहुल  से कहा कि जब  भी तुम  किसी मंदिर  में जाओ  तो खुद  को कश्मीरी  पंडित  और  अपना  गोत्र  " दतात्रेय "  बता  दिया  करो  ,
1-गोत्र  क्या होता  है  ?
सामान्यतः  किसी  ऋषि  के वंश  में  या उनकी शिष्य  परंपरा  में उत्पन्न  लोग  लोग उसी  ऋषि  के गोत्र में  माने जाते  हैं
गोत्र मोटे तौर पर उन लोगों के समूह को कहते हैं जिनका वंश एक मूल पुरुष पूर्वज से अटूट क्रम में जुड़ा है पाणिनि में गोत्र की परिभाषा है 'अपात्यम पौत्रप्रभ्रति गोत्रम्' (४.१.१६२)
2-मुसलमानों  में भी गोत्र हैं  
हिन्दुओं   की नक़ल करके मुसलमानों  ने भी गोत्र जैसी व्यवस्था  बना  ली  , जैसे  ख्वाजा चिश्ती  के  अनुयायी  "चिश्तिया  " सुहरावर्दी  के चेले  "सुहरावर्दी ",इमाम जाफर  के  अनुयायी  "जाफरी  " इस्माइल  के    "इस्माईली  " इमाम हम्बल के  "हम्बली  "   इमाम  अली के "अलवी ", इत्यादि 

3-दत्तात्रेय  गोत्र कैसे बनाया  गया  ?
यदि  आप   गूगल में सर्च करेंगे  तो  आपको कश्मीरी पंडितों में  दत्तात्रेय  नामक को  गोत्र  नहीं  मिलेगा  ,  यह गोत्र  सोनिया ने  उस  डाक्टर के  नाम   से गढ़ा है  , जिसने  सोनिया  के बच्चेदानी  का इलाज  किया  था  ,डाक्टर  का पूरा नाम  "दत्तात्रेय नोरी " है इसका  जन्म  आंध्र  के कृष्णा  जिले  में हुआ  था  , बाद  में  वह  अमेरिका के  "York Pesbyteian Hospital  "मुख्य   चिकित्सक   के रूप में नियुक्त हो गया  नोरी की डिग्री  है ,MD  FACR FACRO 

4-सोनिया   अमेरिका  किसका इलाज करने गयी  
यह 2 सितम्बर  2013 की बात  है सोनिया "खाद्य सुरक्षा अधिनियम  " पर बहस करने के लिए संसद  जा  रही  थी  , तभी  उसके उसके गर्भाशय  में इतने  जोर  का  दर्द  हुआ  की लोग तुरंत सोनिया को अमेरिका  इलाज के लिए ले गए ,  यह बात राहुल और प्रियंका को भी नहीं  पता    थी ,  अगर  भारत में इलाज  कराते तो सोनिया  के चरित्र  का भंडा फूट  जाता ,  सोनिया  के  साथ  केवल  एक व्यक्ति  " पुलोक  चटर्जी  " गया  था  जो "Officer on special  duty  to Sonia Gandhi  "था  , और जब  अमेरिका में सोनिया की जाँच की गयी तो उसे   "सर्विकल  कैंसर  - servical cancer  " पाया गया  , सोनिया  के इलाज में  कुल  एक हजार  आठ  सौ  करोड़  रपये ( 1800cr    )   खर्च  हुए  थे  , यह खबर  "One India News "में मंगलवार    1 अक्टूबर  2013 में  छपी  थी  ,  और  इलाज के  बाद ठीक  होने  पर सोनिया  ने  डाक्टर  दत्तात्रेय  का  आभार प्रकट करने के लिए सोनिया  ने  राहुल से  कहा की  वह  अपना गोत्र  दत्तात्रेय    बताया  करे  , 
 आप  यह  भी  कह  सकते हैं  कि राहुल  का गोत्र   सोनिया  की बच्चेदानी (servic  ) से निकला  है ,अधिक  जानकारी के लिए हमारा  लेख
 " सोनिया का गुप्त  रोग और मुक्त भोग  " (200 /147 ) जरूर पढ़िए
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रविवार, 19 जनवरी 2020

अरब के लोग कुरान को गटर में फेकने योग्य मानते हैं !

इस लेख का उद्देश्य  किसी  धर्मग्रन्थ   कीनिंदा करना या किसी की आस्था पर चोट करना बिलकुल नहीं   है  ,  लेकिन  यहाँ  के   उन  सभी   ओवैसी  जैसे मुल्लों को  जवाब देना है  ,को कुरान को आसमानी  और अल्लाह  की किताब बता कर उसे  संविधान   और कानून   से    ऊपर बता  कर यहाँ के  मुस्लिमों   को  इस्लाम  के नाम  से  दंगों  के लिए उकसाते  रहते  है  ,  क्योंकि यहाँ  के मुस्लिम  न तो ठीक  से अरबी  जानते  है और न कुरान  का  सही अर्थ  जानते  है  , इसलिए यह जाकिर नायक और ओवैसी जैसे धूर्त  कुरान का  उल्टा सुलटा  अर्थ      सुना कर मुस्लिमों को जिहाद   और  आतकंकवाद  के लिए  भड़कते  रहते  है ,  और अगर कोई विरोध  भी करता है  तो   यह मुल्ले कह देते हैं  यह  अल्लाह का हुक्म  है जो कुरान में  लिखा  है  , आप  सभी   जानते  हैं कि इस्लाम  के स्थापक  मुहमद  साहब का जन्म  मक्का में हुआ   था  और मदीना  उनकी  कर्म भूमि    थी     अरब उनका   देश   था  आज   जिसे सऊदी  अरब  कहा  जाता है  , यहाँ के लोगों  की मातृभाषा   अरबी होने  से यह लोग   कुरान  को अच्छी  तरह  से समझ  सकते   है  ,   और जैसे जैसे इन  लोगों  ने कुरान  का गहराई  से अध्यन  किया तो   इस निष्कर्ष   पर पहुंचे  कि कुरान  न  तो अल्लाह  की किताब  हो सकती  है  और न यह कोई  धार्मिक  किताब  है  ,और अगर  अरब के लोग इस  बेकार किताब को रद्दी  के रूप में किसी कबाड़ी को बेचते  तो सरकार उन पर  केस कर  देती  , इसलिए  इन बुद्धिमान  लोगों   ने  चुपचाप      जीतनी  कुरान  की प्रतियां     गंदे गटर  में बहा  डालीं  ,  क्याकि कुरान  गटर  में ही बहाने के  लायक  हैं  ,चूँकि   मक्का  और आसपास के शहरों के मूसलमान कुरान  का विरोध  प्रकट करने को  सार्वजनिक  रूप से कुरान की  प्रतियां  इसलिए नहीं  जलाते  कि उनको इसके लिए कड़ी सजा  दी  जाएगी  ,इसलिए वह चुपचाप से कुरान  की प्रतियां  गटर  में बहा देते है ,  यह कोई नयी  बात  नहीं   है , पिछले कई  सालोँ से  ऐसा  हो  रहा  है  ,उदहारण  के लिए
1-सन  2013 में अरब के प्रसिद्द  शहर  के सीवेज  यानी गटर में  सैकड़ों कुरान पायी गयीं  थी , (Quran copies were found in the sewage system in Taif.)
इस घटना के कुछ समय बाद ही  अरब के प्रांत  अल हयेर (Al-Haer ) के कई शहरों में गटर में कुरान पायी  गयीं  थीं 
2-सन 2014,में  भी अरब के मुसलमानों  ने कुरान की सैकड़ों प्रतियां कचरे के डिब्बों में और  गटर की नालियों  में फेक दी  थीं,यहां   तक कि एक   अरबी मुस्लिम ने कुरान को फाड् कर  कचरे के डिब्बे में फेक  दिया  था
3-सन  2017में फिर तायफ़  शहर  के रास्तों  में और गटर में बड़ी संख्या में कुरान की प्रतियां  पायी गयीं  लेकिन
4-ताज़ी खबर  17 जून  2020 की  है अरबी चैनल  "Akhbaar24 "के अनुसार  सऊदी सरकार  ने पुलिस के सहयोग  से  तायफ़  शहर  और अन्य जगह के गटरों की  जांच करवाई  तो  तो गटर  के अंदर  गन्दगी में  पड़ी हुई हजारों कुरान  की प्रतियां   मिलीं  जो  सड़ चुकी  थीं  ,ध्यान करने  की बात यह  है कि जिन  शहरों  के गटर  में कुरान  पायी गयी हैं वह मक्का  से अधिक दूर  नहीं  है  ,  इस घटना  से यही सिद्ध होता  है  कि मुहम्मद   के  देशवासी   जो सहबियों के वंशज है  उनका कुरान पर और इस्लाम पर से ईमान उठ  गया  है , यही कारण है कि अरब की इस्लामी  सर्कार  ने  आज   तक इस अपराध  के किसी को कोई सजा  नहीं   दी  है  , 
शायद  अरब  सर्कार  को  डर होगा  की  अगर वह  इस शरीयत के अनुसार इस अपराध  के लिए किसी को सार्वजनिक  रूप  से सजा  देगी तो यह बात पूरी  दुनियां   में  फ़ैल  जाएगी  ,  और कुरान  की पोल खुल  जाएगी  , 
लोग  कहेंगे  क़ि जब   अरब  के लोग  ही कुरान  को गटर  में फेकने के लायक  मानते  हैं  तो इस्लाम  के  दलालों  को दूसरों  को मुसलमान बनाने का अधिकार कैसे हो सकता  है  ?

कृपया विडिओ  देखिये
Desecration of Quran in Taif, Saudi Arabia-•Oct 22, 2017

https://www.youtube.com/watch?reload=9&v=WmELE1BWSzM

यहाँ के कट्टर  इस्लामी  जिहादी मानसिक वाले मौलवी  विचार करें  जो कुरान  आधारित  तर्कहीन शरीयत  को  संविधान और कानून से बड़ा  मानते   है   और  हर  कानून का विरोध  करते  है  ,  वह  सोचें  जब  अरब के लोगों  ने कुरान को  कचरा  मान लिया है वह  दिन  दूर नहीं  जब सारी दुनिया कुरान के साथ वैसा हाल  करेगी  , जो  रसूल के असली देश  वालों  ने किया  है
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शनिवार, 11 जनवरी 2020

जैसी माँ वैसी बेटी !

भारतीय परम्परा में महिलाओं को पूज्यनीय मानकर आदर और सम्मान दिया जता है।लेकिन इतिहास साक्षी है की जब भी किसी विदेशी वर्णसंकर महिला के हाथों में असीमित अधिकार आजाते हैं तो वह सत्ता के मद में अंधी हो जाती है।और देश,समाज,व् अपने परिवार के लिए घातक बन जाती है। ऎसी महिला अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए अपने सहयोगिओं ,मित्रों और निकट सम्बंधिओं की बली लेने से भी नहीं चूकती है। पिछले तीस सालों के इतिहास का अवलोकन करने पर हमें पता चलता है की इस दौरान कुछ ऐसे बहुचार्तित ,प्रसिद्ध व्यक्तिओं की विभिन्न कारणों से अप्रत्याशित रूप से मौतें हुई हैं जिनका सम्बन्ध सोनिया गांधी और उसके परिवार से था। पहली नज़र ने यह सभी मामले आकस्मिक दुर्घटना या आत्महत्या के लगते हैं ,लेकिन गहराई से खोज करने पर कुछ और ही सच्चाई सामने आती है.क्योंकि इन सभी मामलों की न तो ठीक से कोई जांच ही करायी गयी और न ही उन आधी अधूरी जांचों की रिपोर्ट ही सार्वजनिक की गयी। केवल खानापूर्ति करके सभी मामले ठंडे बस्ते डाल दिया गया।सभी जानते हैं की सोनिया एक कुटिल और चालाक महिला है। उसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हथियाना और अपने कपूत राहुल को प्रधान मंत्री बनाना है ।इस योजना को सफल बनाने के लिए सोनिया ने 1980  के पाहिले से ही शतरंज की बाजी बिछा रखी थी। और जो मोहरा उसके सामने आता गया वह बड़ी चालाकी से उसे हटाती गयी। और अपने बेटे के लिए रास्ता साफ़ करती गयी।सोनिया की लड़की प्रियंका भी अपनी माँ की तरह धूर्त और शातिर है ।इसने अपने रूप जाल में अपनी मक्कारी और कुटिलता को छुपा रखा है। इसलिए आज यह बेहद जरूरी है की दिए जारहे इन सभी मामलों की सच्चाई ,लोगों के सामने प्रस्तुत की जाए। ताकि लोगों के सामने सोनिया और प्रियंका का असली घिनावना चेहरा जनता के सामने आ जाए ,जिसे यह दोनों अपनी भोलीभाली सूरत में छुपा कर देश के लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। कुछ प्रसिध्ध घटनाएं इस प्रकार हैं -
1-संजय गांधी -(मृत्यु दिनांक 23 अक्टूबर 1980 )
संजय गांधी होनहार नेता के सभी गुण मौजूद थे। इसीलिए इंदिरा गांधी उसे ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी। संजय का हिंदुत्व के प्रति कुछ अधिक ही झुकाव था जो कुछ कान्ग्रेसिओं,और खासकर सोनिया को बिल्कुल ही पसंद नहीं था। सोनिया का संजय से नफ़रत करने का एक और भी कारण था। जिस समय इंदिरा ने राजीव को पढने के लिए लन्दन भेजा था तो उसी समय कैम्ब्रिज में राजीव की सोनिया से मुलाक़ात हुई थी। इंदिरा राजीव को उसके निजी खर्चे के लिए प्रति माह एक निर्धारित राशि भेजती थी जो वह सोनिया पर खर्च कर देता था ।और वह अक्सरगुप्त रूप से संजय से पैसे मँगवाया करता था ।लेकिन जब संजय को यह पता चला की उसका बड़ा भाई पढाई छोड़ कर सारे पैसे सोनिया पर खर्च कर के अयाशी कर रहा है ,तो उसने पैसे देना बंद कर दिए।उधर पढाई में ठीक से ध्यान न देने के कारण परीक्षा में राजीव के बहुत कम नंबर आए,और उसे कैम्ब्रिज से निकाल दिया गया। कुछ समय तक वह ब्रिटेन में भारतीय राजदूत के घर में रहा ,फ़िर अधूरी पढाई छोड़ कर वापिस घर आगया। सोनिया मन ही मन में इसके लिए संजय को जिम्मेदार मानती थी। और बदला लेने के लिए मौके की तलाश में थी ।सोनिया के के जी बी से गुप्त सम्बन्ध थे। उन दिनों संजय को प्लेन उडाने का नया नया शौक लगा था। जब एक दिन संजय ने जैसे ही अपना प्लेन उडाया तो वह कुछ ही मिनटों में ज़मीन पर गिर कर बिखर गया। ध्यान करने की बात यह थी की उस प्लेन में न तो आग लगी और न ही कोई विस्फोट ही हुआ। प्लेन उडाने से पाहिले उसकी टंकी में पूरा ईंधन भरा गया था। लेकिन तात्कालिक जांच में दुर्घटना का कारण "प्लेन की टंकी में ईंधन न होना "बताया गया था। आज भी दुर्घटना का असली कारण रहस्य के परदे में ही है।
 2- इंदिरा गांधी-(म्रत्यु दिनांक -31  अक्टूबर 1984  )
जब इंदिरा गांधी के सुरक्षा गार्डों ने उन्हें गोली मारी थी तो उस समय वह घायल अवस्था में बेहोश पडी थीं और जीवित थीं।उनका खून लगातार बह रहा था ।उन्हें फ़ौरन मेडिकल सहायता की जरूरत थी। सोन्या उनके बिल्कुल नजदीक थी।लोग इंदिरा को एम्स अस्पताल ले जाना चाहते थे,जो इंदिरा के निकास के पास ही था। लेकिन सोनिया ने किसी की बात नहीं सुनी और इंदिरा को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाने की जिद की।जो की वहां से काफी दूर था। जब लोग घायल इन्दिरा को लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पास पहुंचे तो अचानक सोनिया ने अपना इरादा बदल दिया ।और गाडी को वापिस एम्स की तरफ़ मोड़ने को कहा ।इस बेकार आने जाने में लगभग डेढ़ घंटा बरबाद हो गया। और अत्याधिक खून बह जाने के कारण इन्दिरा की मौत हो गयी। अगर इन्दिरा गांधी को समय पर मेडिकल सहायता मिल जाती तो उन की जान बच सकती थी। लोग ख़ुद समझ सकते हैं की सोनिया ने जानबूझ कर क्यों समय बरबाद किया और इन्दिरा की मौत से सोनिया क्या लाभ होने वाला था।
 3-जीतेन्द्र प्रसाद-( मृत्यु दिनांक -16  जनवरी 2001 )
यह कोंग्रेस के एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता थे। इन्होंने शाहजहान पुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। उस समय वह कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। सीताराम केसरी की मौत के बाद वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के प्रत्याशी थे। राजेश पायलट भी इनके समर्थक थे। जीतेन्द्र प्रसाद सोनिया के प्रमुख आलोचक थे। सोनिया यह पड़ ख़ुद हथियाना थी। लेकिन वरिष्ठ होने के कारण अध्यक्ष पद के लिए पहिला नाम जितेन्द्र प्रसाद का था ।कांग्रेस वर्किंग कमेटी में इस विषय पर कई बार गर्मागर्म चर्चा होने के बाद ,मेम्बरों में जितेन्द्र प्रसाद का पल्ला भारी पड़ने लगा था। और मजबूरन सोनिया को पीछे हटना पडा ।लेकिन उसके मन में कुछ और ही योजना थी।एक दिन सोनिया के द्वारा आयोजित एक भोजन समारोह में जितेन्द्र प्रसाद को बुलाया गया। जिसमे लगभग सभी प्रमुख नेता शामिल थे। भोजन के बाद जब जितेन्द्र प्रसाद अपने निवास पर पहुंचे तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गयी।और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गयी। डाक्टरों ने पहले तो मौत का कारण फ़ूड पोइजिनिंग बताया,लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट फेल बताया। साफ़ है की की किसी के दवाब में रिपोर्ट बदल दी गयी थी।
 4-राजेश पायलट - (मृत्यु -11 जून 2000 )
यह भी सोनिया के प्रमुख प्रतिद्वंदी थे और अक्सर सार्वजनिक रूप से सोनिया की आलोचना किया करते थे। राजेश एक स्पष्टवक्ता और उभरते युवा नेता थे। राजेश का चुनाव क्षेत्र दौसा था जो जयपुर के पास है। मृत्यु के दिन अर्जुन सिंह ने राजेश को फोन करके दिल्ली बुलाया ।और कहा की एक बेहद जरूरी मीटिंग है ।जब राजेश अपनी कार से दौसा से जयपुर एयर पोर्ट की तरफ़ जा रहे थे तो भण्डाना गांव के पास उनकी कार को राजस्थान ट्रांसपोर्ट की बस ने टक्कर मार दी ।इस टक्कर से उनकी वहीं मौत हो गयी। आज तक उस बस का ड्राईवर नहीं पकडा गया। और न किसी के ख़िलाफ़ कोई केस चलाया गया। राजेश के लड़के का मुंह बंद करने के लिए उसे कोई पद दे दिया गया। और मामला बंद कर दिया गया।
 5-माधवराव सिंधिया -(मृत्यु 30  सितम्बर 2001 )
इनके समर्थक इन्हें भावी प्रधान मंत्री के रूप में देखते थे ।इनकी निष्पक्षता के कारण विरोधी दल के लोग भी इनका सम्मान करते थे। इन से सोनिया मन ही मन में जलती थी ।पहले दोनों में बहुत घनिष्ठता थी ।माधव राव ने ही सोनिया का राजीव से परिचय कराया था जब वह भी राजीव के साथ कैम्ब्रिज में पढ़ते थे। जब सोनिया ने राजीव से शादी कर ली तब भी सोनिया और माधवराव की दोस्ती चलती रही। एकबार 1982  में जब सोनिया और माधवराव रात को दो बजे एक पार्टी से लौट रहे थे तो, दिल्ली की आई आई टी के गेट के पास एक्सीडेंट हो गया। जिसमे माधवराव की टांग टूट गयी थी और सोनिया को मामूली चोट लगी थी। सोनिया माधवराव को घायल छोड़ कर एक ओटो से घर भाग गयी। बाद में पुलिस ने माधवराव को अस्पताल पहुंचाया था।सोनिया के इस व्यवहार से माधवराव नाराज़ थे। और अक्सर अपने मित्रों से इस घटना की चर्चा करते रहते थे। जिस से सोनिया चिढ़ती थी। इसके अलावा माधवराव सोनिया के कई गुप्त राज़ भी जानते थे। इसलिए सोनिया माधवराव को अपने लिए एक खतरा मानती थी। एक बार माधवराव को जरूरी काम के लिए दिल्ली से मैनपुरी जाना था। इसके लिए उन्हें जिंदल ग्रुप का प्लेन दिया गया था ।उड़ान से पूर्व प्लेन की जांच गयी थी और बताया गया था की प्लेन में पूरा ईंधन भरा गया था। प्लेन 12।49 पर इन्दिरा गांधी एयर पोर्ट से उड़ा और आगरा से 85  की मी दूर भोगाव में गिर कर टूट गया। इस प्लेन में भी न आग लगी न विस्फोट हुआ। इस दुर्घटना में माधवराव की वहीं तत्काल मौत हो गयी।जांच में पता चला था की प्लेन की टंकी में पूरा ईंधन नहीं भरा गया था।
 6 -बाल योगी-(म्रत्यु-13  मार्च 2002 )
यह लोकसभा के स्पीकर थे। इनके कार्यकाल में सोनिया की राष्ट्रीयता के बारे में सवाल उठ रहे थे.सोन्या ने संसद में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में जो हलफनामा दिया था उस पर लोगों को शंका थी। दिनांक 5  फरवरी 2002 को सुब्रमण्यम स्वामी ने बाल योगी को एक पत्र लिखा जिसमे उनसे सोनिया की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जांच कराने का अनुरोध किया गया था। और इस पत्र में कहा गया था की ऐसा करना उनका नैतिक दायित्व है। इस पर बाल योगी ने सोनिया से 15 दिनों के अन्दर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस दिया ।कुछ दिनों के बाद बाल योगी हैदराबाद चले गए .13/3/2002 को उनको दिल्ली बुलाया गया। और उनके लिए ओ एन जी सी के हेलिकोप्टर का इन्तिजाम किया गया .जब उनका हेलिकोप्टर 7.30 बजे भीमावरम एयर पोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ा तो थोड़ी ही देर में 7.42 पर ज़मीन पर गिर गया और टूट कर बिखर गया। इसमे बाल योगी की तत्काल मौत हो गयी। आश्चर्य की बात याह है की इस दुर्घटना में भी हेलिकोप्टर में न तो आग लगी न कोई विस्फोट हुआ .इस बार भी वही कारण बताया गया की टंकी में ईंधन नहीं था। इन सभी घटनाओं को मात्र संयोग कैसे माना जा सकता है? 

एक तरफ़ जहाँ सोनिया अपने प्रतिद्वंदिओं को बड़ी सफाई से अपने रास्ते से हटा रही है तो दूसरी तरफ़ उसकी बेटी प्रियंका भी उसके पदचिन्हों पर चलकर अपने ही ससुराल पक्ष के निकट सम्बंधिओं का सफाया कर रही है। जिस दिन 16/2/1998 को राजेन्द्र वडेरा ने अपने छोटे बेटे रॉबर्ट की शादी प्रियंका से की थी ,उसी दिन से उसके सारे परिवार पर मौत का साया मंडरा रहा था। देश विभाजन के बाद राजेन्द्र के पिता एच आर वडेरा सियालकोट से मुरादाबाद आकर बस गए थे। वह पंजाबी हिन्दू थे। उनके दो लड़के थे ,ओमप्रकाश और राजेन्द्र। इनका परिवार पीतल के हस्तशिल्प का व्यवसाय करता था। राजेन्द्र ने मौरीन मेक डोनाड नामकी एक एंग्लो इंडियन महिला से प्रेम विवाह किया था। मौरीन का बाप अँगरेज़ और माँ भारतीय थे। मौरीन हमेशा राजेन्द्र पर ईसाई बनने का दवाब डालती थी ,जिसे वह मना कर देते थे। लेकिन फ़िर भी मौरीन ने अपनी मर्जी से राजेन्द्र का नाम एरिक और अपने ससुर का नाम हैरी रख दिया। इसके लिए मौरीन ने यह तर्क दिया की ऐसा करने से विदेशी ग्राहक आकर्षित होंगे। क्योंकि विदेशी भारतीय वस्तुएं पसंद करते हैं।राजेन्द्र की तीन संतानें हुयीं ,रिचार्ड,मिशेल और रॉबर्ट। धीमे धीमे राजेन्द्र और मौरीन के बीच में इतना मनमुटाव बढ़ गया की मुरीं दिल्ली चली गयी। और वहाँ उसने दक्षिण दिल्ली की अमर कालोनी में अपना एक शोरूम खोल लिया ,जो आज भी चल रहा है। राजेन्द्र ने अपने बड़े लड़के रिचार्ड और लड़की मिशेल की पाहिले ही शादी कर दी थी। जो अपना अपना व्यवसाय कर रहे थे। रॉबर्ट मुरादाबाद की एक गेरेज में मेकेनिक था। दिल्ली में आकर मौरीन की दोस्ती सोनिया से हो गयी ।बाद में यह दोस्ती इतनी बढ़ गयी की सोनिया ने प्रियंका की शादी रॉबर्ट से करदी। और आख़िर प्रियंका राजेन्द्र वडेरा के परिवार के लिए एक यमदूती साबित हुयी। 
7-मिशेल वडेरा (-मृत्य 16  अप्रैल 2001 )
यह राजेन्द्र वडेरा की दूसरी संतान थी .अपने पिता की तरह मिशेल भी रॉबर्ट और प्रियंका की शादी के ख़िलाफ़ थी। क्योंकि शादी के बाद प्रियंका कभी ससुराल नहीं गयी। बल्कि रॉबर्ट को ही अपने साथ ले गयी। और वडेरा परिवार के किसी भी व्यक्ति को रॉबर्ट से नहीं मिलने देती थी। रॉबर्ट भी सोनिया और प्रियंका के इशारों पर नाचता था। प्रियंका ने रॉबर्ट को अपना रखैला बना रखा था। मिशेल दिल्ली में ज्वैलरी डिजायनिंग का कम करती थी। वह लोगों को प्रियंका के इस व्यवहार के बारे में बताती थी। और कहती थी की सोनिया और प्रियंका ने मेरे परिवार में फूट दाल दी है। प्रियंका वडेरा परिवार में नफरत के बीज बो रही है.मिशेल प्रियंका के चरित्र पर भी उंगली उठाती थी। फैलते फैलते यह बात सोनिया के कानों तक पहुँच गयी। और जब एक दिन मिशेल जरूरी काम के लिए अपनी कार से जयपुर जा रही थी तो अलवर के पास बेहरोर नाम की जगह पर अचानक उसकी कार पलट गयी। कार में 2  बच्चों को मिला कर 6  लोग थे। स्थानीय लोगों ने काफी मदद की लेकिन मेडिकल सहायता आने से पूर्व ही मिशेल की मौत हो चुकी थी।पुलिस का कहना था की कार के एक तरफ के दोनों टायर फट गए थे .जिस से दुर्घटना हुयी थी। लेकिन गांव वालों का कहना था की उन्होंने गोलियों की आवाज़ सुनी और देखा की एक दूसरी गाडी ने बगल से टक्कर मारी थी। बाद ने मिशेल की लाश को दिल्ली लाया गया जहाँ उसका अन्तिम संस्कार किया गया था। सिर्फ़ उसी दिन राजेन्द्र अपने बेटे से दूसरी बार मिले थे। पहिली बार वह सोनिया द्वारा आयोजित एक समारोह में अपने बेटे से मिले थे। क्योंकि सोनिया ने रॉबर्ट को अपने पिता से मिलने पर रोक लगा थी। जिस से राजेन्द्र ख़ुद को काफी अपमानित महसूस करते थे.
8-रिचार्ड वडेरा-(मृत्यु 20  सितम्बर 2003 )
यह राजेन्द्र वडेरा के बड़े पुत्र थे,और अपनी पत्नी सिमरन के साथ मुरादाबाद में वसंत विहार कालोनी में रहते थे।मौरीन ने सिमरन का ईसाई नाम सायरा कर दिया था। उसकी एक बच्ची भी है। रिचार्ड आर्टेक्स एक्सपोर्ट के नाम से हैंडीक्राफ्ट का व्यवसाय चलाते थे। अपने पिता की तरह रिचार्ड को भी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी .लेकिन जब उसके छोटे भी रॉबर्ट की प्रियंका से शादी हो गयी तो उसके पास कई कांग्रेसी नेता तरह तरह की सिफारासें लेकर आने लगे। और उसे अपने यहाँ भी बुलाने लगे। इसी तरह महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर ने रिचार्ड को दो बार मुम्बई बुलाया था.और उस से अपने ख़ास लोगों को टिकिट दिलवाने के लिए सोनिया से सिफारिश करने को कहा था। कृपा शंकर ने रिचार्ड को पहली बार मुम्बई के सन एंड सैंड होटल में ठहराया था। जिसका 50,000/- का बिल कृपा शंकर ने चुकाया था। दूसरी बार रिचार्ड को सरकारी गेस्ट हाउस "हाई माउन्ट "में ठहराया गया था जिसका इंतजाम विलास राव देशमुख ने किया था। जब यह बात तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह ,और कर्णाटक के मुख्य मंत्री एस एम् कृष्णा को पता चली तो उन्होंने इसकी शिकायत सोनिया को कर दी। इस पर सोनिया ने रॉबर्ट पर दवाब डाला की वह सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे की उसका अपने पिता और भाई से कोई सम्बन्ध नहीं है। सोनिया के कहने पर रॉबर्ट ने 16 जनवरी 2002 को अपने वकील अरुण भारद्वाज के माध्यम से अपने पिता और भाई को नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में रॉबर्ट ने अपने पिता को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया था। उसने पिता के स्थान पर "एक व्यक्ति"शब्द लिखा था.नोटिस में कहा गया था की "एक राजेन्द्र वडेरा नाम का आदमी मेरी पत्नी ओर उसके साथ रिचार्ड नामका व्यक्ति मेरी पत्नी प्रियंका के नाम से लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने धोखा दे रहे हैं । मेरा इन लोगों से किसी भी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं है "यह सूचना सभी अखबारों में छपी थी। जब राजेन्द्र को इस नोटिस के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने वकील छेदीलाल मौर्य के माध्यम से रॉबर्ट ,सोनिया, ओर प्रियंका पर मानहानि का दावा करने की धमकी देते हुए जवाब देने को कहा था। उन्होंने अपने नोटिस में रॉबर्ट पर आरोप लगाया था की वह सोनिया ओर प्रियंका के इशारों पर नाच रहा है ओर एक औरत के चक्कर में अपने बाप तक को भूल गया है। राजेन्द्र ने यह भी कहा था की वह रोवेर्ट को अपनी संपत्ति से बेदखल कर देंगे। यह सारी बातें 21 जनवरी 2002 के इंडिया टू डे में विस्तार से छपी थीं। इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद रिचार्ड अचानक गायब हो गया था। उसकी पत्नी सिमरन ने काफी खोज की थी। लेकिन वहाँ की पुलिस ने उसकी कोई मदद नहीं की। ओर एक दिन 20/9/2003को रिचार्ड मुरादाबाद के सिविल लाइन की वसंत विहार कालोनी में रहस्यमय रूप से मरा हुआ पाया गया था। राजेन्द्र ने मौत की जांच काने की मांग की थी लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी । ओर मौत को आत्महत्या का मामला बताकर केस बंद कर दिया.
9-राजेन्द्र वडेरा -(म्रत्यु 3 अप्रैल 2003)
यह प्रियंका के ससुर थे। यह दक्षिण दिल्ली के हौज ख़ास इलाके के सिटी इन नामके एक गेस्ट हाउस में रहस्य पूर्ण रूप से मरे पाये गए। इसकी कोई ऍफ़ आई आर दर्ज नहीं की गयी। उनकी आयु 60  वर्ष थी। पुलिस की औपचारिक खानापूर्ति के बाद उनके शव का लोधी रोड के श्मशान में संस्कार कर दिया गया। पाहिले मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। लेकिन बाद में पुलिस अपने बयान से मुकर गयी। प्रतक्ष्य दर्शिओं के अनुसार राजेन्द्र के गले और शरीर पर चोट के निशान पाते गए थे।इसलिए प्रियंका और सोनिया ने इसे आत्मह्त्या बताने की कोशिश की थी। लेकिन आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से मना कर दिया। पुलिस ने भी अपना मुंह बंद कर लिया। जब पुलिस अपनी कार्यवाही कर रही थी तो मीडिया वालों को काफी दूर हटा दिया था। मौत की खबर मिलने पर राहुल पटना से दिल्ली आया और केवल 12  मिनट वहां रुका। और बाद में मृतक को श्रृद्धांजली देकर सोनिया और प्रियंका को साथ लेकर अमेठी के लिए रवाना हो गया। जहाँ उसे अपने चुनाव का पर्चा दाखिल करना था। जब अमेठी में राहुल का और रायबरेली में सोनिया का जुलूस निकल रहा था तो प्रियंका उसके साथ साथ चल रही थी ,और खुशी से फूली नहीं समा रही थी। उसके चेहरे पर दुःख का कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहा था। अपने पुत्र और पुत्री की मौत के बाद राजेन्द्र अकेले हो गए थे। उनकी पत्नी मौरीन तो पाहिले ही उनसे अलग रह रही थी। इस लिए काफी सालों से राजेन्द्र सिटी इन नामके एक गेस्ट हाउस में रह रहे थे। उनका लड़का पूरी तरह से सोनिया और प्रियंका के चंगुल में था और अपने बाप से कोई मतलब नहीं रखता था। लगभग एक साल से राजेन्द्र लीवर की बीमारी से पीडित थे ।और मेक्स हॉस्पिटल में अपना इलाज करा थे ।इस दौरान रॉबर्ट ,सोनिया या प्रियंका कोई भी उनका हाल पूछने अस्पताल नहीं आया। अपने लड़के के इस व्यवहार से राजेन्द्र बहुत नाराज़ और दुखी थे। लगभग दो हफ्ता पहले उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गयी थी। अस्पताल से निकलने के बाद उन्होंने पहिला काम यह किया की ,अपने बड़े भाई ओमप्रकाश की तरह अपनी ज़मीन एक ऐसे ट्रस्ट को दे दी जिसका सम्बन्ध आर एस एस था। आजकल वहाँ सरस्वती मन्दिर स्कूल चल रहा ।जब यह बात सोनिया को पता चली तो हड़कंप मच गया। पहले सोनिया ने कुछ प्रभावशाली कांग्रेसी नेताओं के माध्यम से राजेन्द्र पर दवाब डलवाया की की वह दान में दी गयी ज़मीन वापिस ले ले । लेकिन राजेन्द्र ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तबसे राजेन्द्र को बार बार धमकियां दी जा रही थीं। और आख़िर उसे अपनी जान से हाथ धोना पडा। उक्त सभी घटनाओं को मात्र संयोग या दुर्घता मानना ठीक नहीं होगा। सभी घटनाओं का गहराई से विश्लेषण करने पर जो तथ्य निकल कर आते हैं वह इस प्रकार हैं -सभी मरने वाले सोनिया के आलोचक,और प्रतिस्पर्धी थे। और सोनिया उनको अपने रास्ते का काँटा मानती थी। यह सभी सोनिया के राजनीतिक प्रतिद्वंदी थे। इन लोगों ने सोनिया के कुछ ऐसे गुप्त रहस्य मालूम कर लिए थे ,जिनके प्रकट हो जाने से सोनिया को जेल हो सकती थी। इन लोगों की मौत से सोनिया को निष्कंटक, असीमित ,और एकछत्र सत्ता हासिल हो गयी। और भविष्य में राहुल को प्रधान मंत्री बनाने के लिए रास्ता साफ़ हो गया। सोनिया ने अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक एक करके इन सब का सफाया करा दिया। प्रियंका भी कुछ कम नहीं है। यदि प्रियंका नेहरू गांधी परिवार की इसी परम्परा को निबाहते हुए ,भविष्य में रॉबर्ट को भी इसी तरह से रास्ते से हटा दे ,तो हमें कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए। ऎसी महिलाओं को ही डायन कहा जाता है ।'लोग ठीक ही कहते हैं 

"माँ हत्यारिनी तो बेटी कुलघातिनी। !
 जय भारत
बी एन शर्मा भोपाल 10  अप्रैल 2009  

(181/20)

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

इस्लाम की खातिर गुदामैथुन !

लेख प्रारंभ करने से पूर्व पाठकों से क्षमा चाहते हैं ,क्योंकि उनको लेख का शीर्षक अश्लील लगेगा . परन्तु लेख में इस्लाम के बारे में जो जानकारियाँ दी जा रही हैं ,उन्हें पढ़कर अश्लीलता भी शर्म के मारे डूब कर मर जाएगी .
अभी तक लोग इस्लाम के बारे में इतना तो अच्छी तरह से जान चुके हैं , कि जिहाद इस्लाम का अनिवार्य और धार्मिक कार्य माना जाता है . और लोग यह भी समझ चुके हैं कि दुनिया का शायद ही कोई ऐसा अपराध होगा जो मुसलमान जिहाद के नाम से नहीं करते हों .निर्दोषों की हत्या , बलात्कार ,आतंकवाद और जो ऐसे ही दूसरे अपराध इस्लाम की खातिर किये जाते हैं , सभी जिहाद की परिभाषा में आते हैं . लेकिन इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह एक जगह तो इन अपराधों को गुनाह बताता है . तो जिहाद में इन से भी घृणित कामों को जायज ठहरा देता है .
ऐसा ही अत्यंत निंदनीय और घृणित काम पुरुषो द्वारा पुरुषों के साथ " गुदामैथुन " करना है .जिसे इस्लाम की खातिर जिहाद के लिए जायज बना दिया गया है .इस कुकर्म को अरबी में " लवात " कहा जाता है .लेख में इसी विषय पर जानकारी दी जा रही है .
1-लवात क्या है 
अंगरेजी में इस कुकर्म को "Sodomy " कहा जाता है . क्योकि इस्लाम से पहले सोडोम नामके शहर के यह कुकर्म काफी प्रचलित था . जिसे अरबी में मुसलमानों के एक नबी " लूत  لواط " के नाम से "लवात اللواط" नाम दे दिया गया है . मुसलमानों के नबी लूत के शहर के सभी लोग यह कुकर्म करते थे , जिसका उल्लेख कुरान में इस प्रकार दिया है ,
"क्या तुम पुरुषों के पास ( आप्राकृतिक ) काम के लिए जाते हो . और जिस काम के लिए अल्लाह ने औरतों को पैदा किया है , उनको छोड़ देते हो 
" सूरा -अश शुअरा 26:165-166
2-मुहम्मद को लवात का अंदेशा 
यद्यपि मुहम्मद को पता था कि उसके अधिकांश साथी यही कुकर्म करते थे , लेकिन उनको डर लगा रहता था कि कहीं अरब के सभी लोग लूत के शहर वालों जैसे नहीं बन जाएँ , जो इस हदीस में बताया है ,
"जबीर ने कहा कि रसूल ने कहा ,निश्चय ही मुझे इस बात का बड़ा डर है कि मेरा देश लूत वालों जैसा न बन जाये "
Jabir reported: The Messenger of Allah, peace and blessings be upon him, said, “Verily, what I fear most for my nation is the deed of the people of Lot.”

جَابِرًا يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَخَافُ عَلَى أُمَّتِي عَمَلُ قَوْمِ لُوطٍ
1374 جامع الترمذي كتاب الجمعة أبواب السفر
قَالَ أَبُو عِيسَى  هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ
Sunan At-Tirmidhi, Book of Legal Punishments, Number 1374, Hasan
3-औरतों से गुदामैथुन 

मुहम्मद से समय और उसके बाद से अब तक इस्लाम में औरतों के साथ यह कुकर्म करना सामान्य बात मानी जाती है . जिसके विस्तार में न जाते हुए इस्लाम की उन किताबों के हवाले दिए जा रहे हैं , जिन में इस कुकर्म को जायज बताया गया है , यहाँ कि मुहम्मद के साथी भी यही करते थे ,किन किन लोगों ने इस कुकर्म को जायज माना
A-मदीना के उलेमा 
मुहम्मद के समकालीन सुन्नी उलेमा अपनी जिन किताबों में इस कुकर्म को सही बताया उनके हवाले इस प्रकार हैं ,
Fayl al Lawathar Volume 6 page 154 Kitab Nikah, Bab Mut'ah

Tafseer Qasmi Volume 2 page 223 Ayat Hars

Tafseer Ibn Katheer Volume 1 page 262 Ayat Hars

Fathul Bari Volume 8 page 191 Ayat Hars

Tafseer Mazhari, Volume 3, Page 19(Tafsir al-Mazhari (Arabic: تفسير المظهري‎) is a 13th century AH tafsir of the Qur'an, written by Qadi Thanaullah Panipati.)

B-मुहम्मद के साथी 
मुहम्मद के जो सहाबी यानि साथी औरतों और पुरुषों के इस कुकर्म को करते थे और जायज मानते थे ,उनका हवाला इस प्रकार है ,
Tafseer Qurtubi Volume 3 page 93 Ayat Hars:

"Fatwas on the permissibility of sodomy with men Saeed bin Maseeb Nafi, ibn Umar, Muhammad bin Kab, Abdul Malik, Imam Malik, a large group amongst the Sahaba and Tabaeen deemed sodomy to be permissible".


लेकिन हमें इन बातों की गहराई में जाने की जरूरत नहीं है ,क्योंकि गन्दगी को जितने अन्दर खोदेंगे उतनी दुर्गध निकलेगी .हमारा मुख्य विषय इस्लाम की खातिर गुदामैथुन कराना है .जिसके बारे में मुस्लमान भी बहुत कम जानते होंगे .
4-जिहादी गुदामैथुन करवाएं 
अमेरिका की राष्ट्रीय स्तर की समलैंगिकों "national gay and lesbian news magazine" पत्रिका ' Advocate.com ' में दिनांक  12 July 2012 को   एक समाचार प्रकाशित हुआ था ,जिसके संपादक  Lucas Grindley हैं .जिसके मुख्य अंश हिंदी में दिए जा रहे हैं , इन से जिहाद और इस्लाम का घिनावना रूप बेनकाब हो जायेगा .एडवोकेट पत्रिका में लिखा है कि
" अल कायदा से जुड़े अरब के एक मुफ़्ती ने "आत्मघाती बम  Suicide Bombers" बनने वाले नए जिहादी लड़कों को बताया कि यदि तुम इस्लाम के लिए शहीद हो जाओगे तो , मरने के बाद तुम्हें जन्नत में कुंवारी लड़कियां मिलेंगी और तुम पर अल्लाह की रहमत होगी . लेकिन इस से पहले तुम्हें तब तक " गुदामैथुन करवाना " होगा .जब तक तुम्हारी गुदा इतनी चौड़ी नहीं हो जाये कि गुदामार्ग में बम आसानी से घुस सके .
(for this method of jihad you must agree to be sodomized for a period in order that your anus will be widened such that your rectum can take the explosives.)मेरी दुआ है कि अल्लाह तुम्हारे ऊपर रहम करे क्योंकि तुमने अपनी गुदा (Anus ) अल्लाह को समर्पित करदी है , इस तरह तुम और तुम्हारे साथी मुजाहिदों में शामिल हो गए .तुम सभी का यही उदेश्य होना चाहिए कि जिहाद के लिए मेरी गुदा चौड़ी हो जाये .
"God have mercy on you: Is it permitted to offer my anus to one of the mujahidin brothers if the intention is pure and the goal is to train for jihad, and to widen my rectum"


5-फतवा देने वाले मुफ़्ती 
इस्लाम से सम्बंधित किसी आदेश को 'फतवा " और ऐसा आदेश देने वाले को " मुफ़्ती " कहा जाता है , जिन दो मुफ्तियों ने जिहादियों को इस्लाम की खातिर गुदामैथुन करवाने का फतवा जारी किया है , वह इस्लामी आतंकवादी संगठन " अल कायदा "के मुफ़्ती हैं , इनके बारे में अधिक जानकारी नहीं है , परन्तु इनके नाम इस प्रकार हैं
1.अब्दुल्लाह हसन अल असीरी- (Abdullah Hassan al-Asiri (Arabic: عبد الله حسن عسيري‎) इसका जन्म सन 1986 में सऊदी अरब के असीर कसबे में हुआ था ,यह सऊदी अरब के राजकुमार का दोस्त भी था.और उसका धार्मिक सलाहकार मुफ़्ती भी था फिर सन 27 अगस्त 2009 को अल कायदा का सरगना बन गया .
2.शेख अबुल मदाअ अल कसाब (Sheikh Bloody Butcher” (الشيخ أبو الدماء القصاب) अरबी में इसके नाम का अर्थ "शेख खूनी कसाई "होता है .और जैसा इसका नाम है , यह वैसा ही क्रूर है .इन दौनों की इच्छा जिहाद से दुनिया में इस्लामी राज्य स्थापना करने की है .और अपने इसी मकसद को जल्द पूरा करने के लिए इन्होने ऐसा अश्लील फतवा जारी किया है .जो अरबी में है
6-गुदामैथुन का फतवा 
"
فتوى في جواز توسيع الدبر باللواط إذا كان الغرض منه الجهاد

قال أن الإرهابي الذي فجر نفسه في محاولة اغتيال الأامير محمد بن نايف أدخل كبسولات التفجير على دفعات إلى مؤخرته، على شكل تحميله .
ويقال – والله أعلم - أن الإرهابي قبل أن يفعل سأل شيخاً صحوياً عن أنه ينوي أن تلاك في دبره كبسولات التفجير، طلباً للجهاد، لتنفيذ عمليات جهادية رغبة في الحور العين .
طرح الإرهابي على الشيخ السؤال بهذه الصيغة : شيخنا رزقكم الله الشهادة والحور العين في الجنة . أردت رضي الله عنكم أن أقوم بعملية استشهادية، وتقدمت إلى "الشيخ أبو الدماء القصاب" . فقال لي إننا ابتكرنا طريقة جديدة وغير مسبوقة في العمليات الاستشهادية، وهو أن يُـلاك في دبرك كبسولات التفجير ، ولكي تتدرب على هذه الطريقة الجهادية لا بد أن ترضى بأن يُلاط بك فترة كي يتسع دبرك، وتكون مؤخرتك قادرة على أن تتحمل عبوة التفجير , وسؤالي رحمك الله : هل يجوز أن أبيح دبري لأحد الإخوة المجاهدين إذا كانت النية صالحة، والهدف الدربة على الجهاد، ليقوم بتوسيع دبري؟ .. فحمد الله الشيخ وأثنى عليه، وقال : الأصل أن اللواط محرم ولا يجوز . غير أن الجهاد أولى، فهو سنام الإسلام. وإذا كان سنام الإسلام لا يتحقق إلا باللواط، فلا بأس فيه، فالقاعدة الفقهية تقول : الضرورات تبيح المحظورات. وما لا يتحقق الواجب إلا به فهو واجب، وليس هناك أوجب من الجهاد. وعليك بعد أن يلاط بك أن تستغفر الله، وتكثر من الثناء عليه، وتأكد يا بني أن الله يبعث المجاهدين يوم القيامة حسب نياتهم، ونيتك إن شاء الله نصرة الإسلام. نسأل الله أن يجعلك ممن يستمعون القول ويتبعون أحسنه . وصلى الله على محمد.
6-A-Google Translation

"Fatwa in expanding anal, sodomy if its purpose Jihad"
,
He said that the terrorist who blew himself up in an attempt assassination Aloamir Mohammed bin Nayef Enter blasting caps on payments to the buttocks, in the form of downloading.
It is said - and God knows best - that the terrorist before he asked an old man does Sahoya that he intends to Tlak orchestrated blasting caps, a request for Jihad, to carry out jihad desire for virgins.
Ask a terrorist Sheikh question this formula: Sheikh Allah hath provided for martyrdom and virgins in paradise. I wanted God bless you, to do a martyrdom operation, and advanced to the "Sheikh Abu blood butcher." He told me we devised a new way and is unprecedented in the martyrdom operations, which is that Lilac in Dberk blasting caps, and to practice these new way jihad must be satisfied that the Alat your period to accommodate Dberk, and be your ass able to bear the bomb blast, and my question God bless : Is it permissible to permissible Woodbury for one of the mujahideen brothers valid if the intention not goal of Jihad, but is expanding the anus  ? .. Ahamd Sheikh and praised him, and said: The basic principle is that sodomy  and may not be. Hever, the first Jihad, is hump Islam. If the hump of Islam can only be achieved sodomy, there is nothing wrong in it, jurisprudential rule says: a virtue of necessity. What can be achieved only by it is the duty, and there is no obligatory jihad. And you after your death  to ask God for forgiveness, and do a lot of praise, and make sure my son that God sends Mujahideen on the Day of Resurrection by their intentions, and intention, God willing, the victory of Islam. We ask God to make you listen to those who say and follow it properly. God bless Mohammed."

7-मुल्लों की बेशर्मी 
अभी तक लोग यही समझ रहे होंगे कि मुल्ले मौलवी लोगों को सदाचार की तालीम देते होंगे , लेकिन इस विडियो को देख कर लोगों आखें खुल जाएँगी , क्योंकि मुफ़्ती इस्लाम की खातिर इतनी नीचता पर उतर जाते हैं कि खुले आम "लौंडेबाजी " करवाने का फतवा दे रहे हैं जो इस विडियो में देखा जा सकता है ,
देखिये विडिओ "Sodomy 'For the sake of Islam(Video)

http://www.youtube.com/watch?v=uI9C2CCT-QM


فتوى وهابية : يجوز توسيع الدبر من اجل الجهااد

8-पाठकों से अनुरोध 
हमारा अपने सभी पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें और निष्पक्ष होकर फैसला करें कि क्या अब भी कोई इस्लाम को धर्म समझेगा ? क्या इस्लाम का विस्तार इन्हीं कुकर्मों से किया जाता है .? यदि इस्लाम सच्चा है तो ऐसे नीच कामों के करने की क्या जरुरत है ?हम मानते हैं कि हिन्दू धर्म में भी कमियां हो सकती हैं , जिनको सुधारा जा सकता है .लेकिन यदि इस्लाम ऐसे हरेक कुकर्म को जायज बताता है तो इसमे हमारा क्या दोष है . हम गाली तो नहीं दे सकते परन्तु यही कह सकते हैं , जो फतवे में कहा है ,
"اتسعت شرجه الإسلام     "

"इस्लाम की खातिर अपनी गुदा चौड़ी करो "

(200/94)   06/03/2013

शनिवार, 4 जनवरी 2020

मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या भारत को निगल जायेगी!

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मुसलमान जिस देश में भी रहते हैं,कभी उस देश के वफादार नहीं रहते.वहां हमेशा कोई न कोई समस्या पैदा करते रहते हैं.उनकी हमेशा उस देश पर कब्जा करने इच्छा होती है. मुसलमान एक ऎसी विषैली अमरबेल की तरह हैं कि अगर उस देश रूपी वृक्ष पर चढ़ जाएँ ,तो उसी का रस पीकर उसी वृक्ष को सुखा देते हैं.फिर भी हम इन साँपों को पाल रहे हैं.हम देश के लोगों को उन देशों के बारे में बताना चाहते हैं ,जहां मुसलमानों की संख्या बढ़ जाने से क्या क्या समस्याएं पैदा हो रही हैं.और बाद में उन देशों का क्या हाल हो गया.हम चाहते हैं कि लोग इन आंकड़ों पर गौर करें ,और सचेत हों.
यह आंकड़े सी आई ऐ ने जमा किये हैं ,और वर्ल्ड फेक्ट बुक 2007 में प्रकाशित किये हैं इसके अनुसार -

1-1 से 2 %मुसलमान होने पर
मुसलमान शांत रहते हैं,देश का कानून मानते हैं,खुद को उस देश का भक्त मानते हैं.

उदाहरण -अमेरिका1%,कनाडा 1.5%,नार्वे 1.8%,आस्ट्रेलिया 1.5%

2--2 से 5 प्रतिशत मुसलमान हो जानेपर
मुसलमान अपने अल्पसंख्यक होने नाम पर विशेष अधिकार माँगने लगते हैं,धरना प्रदर्शन करते हैं,अपना अलग ग्रुप बनाकर उत्पात करते हैं शहर में गुंडा गीरी करते हैं.

उदाहरण-डेनमार्क 2%,जर्मनी3.7%,इन्गलेंड2.7%,स्पेन 4.7%,थाईलेंड 4.6%

3--5 से 10 प्रतिशत हो जाने पर
मुसलमान वहां की सरकारों पर अपन अलग कानून बनाने पर दवाब डालते हैं,अपनी रीति रिवाजों,भाषा को मान्यता दिलाने की मांग करते है .मस्जिदों के लिए जगह मागते हैं.

4-10से 20प्रतिशत हो जाने पर
अपने अलग राजनीतिक दल बना लेते हैं,अपने अलग स्कूल कालेज खोल लेते हैं.देश में फसाद करते हैं,धर्मपरिवर्तन कराते हैं.देश के कानून की अवहेलना करते हैं अलगाव की नीति अपनाते हैं
उदाहरण-गुयेना10%,भारत 13%,इस्राइल 16%.केन्या 11%,रूस 10.5%

5-- 20से 40प्रतिशत हो जाने पर
मुसलमान आक्रामक हो जाती हैं,हथियार उठालेते हैं बड़े पैमाने पर जिहादी बनाते हैं,,देश में दंगे करवाते हैं,,खूनखराबा करते हैं ,अपने लिए अलग जगह की मांग करते हैं.

6--40 से 60 प्रतिशत हो जाने पर
मुसलमान वहां के लोगों को भागने पर मजबूर कर देते हैं,उनकी औरतों को बल पूर्वक उठा लेते हैं और मुसलमान बना लेते हैं.पूरे देश में अराजकता का माहौल बना देते है,
उदाहरण-बोस्निया 40%,चाड 553%,लेबनान 59.7%

7--60 से 80 प्रतिशत हो जाने पर
अपने क्षेत्र में जजिया लगा देते हैं ,दुसरे धर्म को मिटाने की कोशिश करते हैं,दुसरे धर्म के लोगों को प्रताड़ित करके हैं ,उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लेते हैं.
उदाहरण-अल्बानिया78%,मलेशिया 60.4%,सूडान 70%,क़तर 77%

8--81 से 99 प्रतिशत हो जाने पर
वह देश इस्लामी देश घोषित कर दिया जाता है ,वहां किसी गैर मुस्लिम को कोई अधिकार नहीं रह जाता है .सभी गैर मुस्लिमों की औरतों पर बलात्कार किया जाता है.देश में मुल्लेमौलवी राज करते हैं.,मानव अधिकारों का हनन किया जाता है.
उदहारण -मिस्र 89-%,इंडोनेसिया 86%,बंगलादेश 83%,ईरान98%,जोर्डन 92%,मोरक्को 98,7%पाकिस्तान 97%,सीरिया96%.तुर्की96.8%फिलिस्तीन 97%,अरब इमारत 96%

9-100 प्रतिशत हो जाने पर

वह देश दारुल इस्लाम बन जाता है और आस पास दे देशों की नींद हराम कर देता है .जगह जगह आतंकवादी भेजता है, वहां की व्यवस्था चौपट कर देता है .
उदाहरण-अफगानिस्तान 100%,यमन 100%सौउदी अरब 100%,ईराक 100%
10--इसके बाद भी मुसलमानों की खून की प्यास नहीं बढ़ती रहेगी वह आपस ने ही लड़ते रहेंगे। जैसा कि उन्हें कुरआन ने सिखाया ,और उनकी आदत है.
नॉट - इस लेख का अगला भाग  दो  दिन  बाद  प्रकाशित  होगा

(181/70)-04/01/2020