मंगलवार, 24 मार्च 2020

कुरान से प्रेरित इगलामी शायरी !

कोई भी समझदार  व्यक्ति  इस्लाम  को धर्म और कुरान को ईश्वरीय  किताब नहीं  मानेगा   ,क्योंकि  कुरआन  को ध्यान से पढ़ने  से पता चलेगा कि एक तरफ से तो कुरान में व्यभिचार , शराब पीना  और लड़कों के साथ कुकर्म  करने को गुनाह और अपराध बताया गया है , तो जन्नत में हूरों के साथ व्यभिचार , जन्नत में शराब पीने और जन्नत के लड़कों (गिलमा ) के साथ कुकर्म  को जायज  बताया  गया  है ,इसका  असली कारन  यह  है कि अरब  के लोग अय्याश  , शराबी और गिलमबाजी  के शौक़ीन  थे  , और मुहम्मद को डर था  कि  अगर इन बातों को हमेशा के लिए हराम  कर दिया गया तो  लोग इस्लाम छोड़  देंगे  , और लोगों को खुश  करने के लिए  यह बातें कुरान में शामिल कर  दी गयीं .
कुरआन में ऐसे कई संकेतहैं कि स्वर्ग में खूबसूरत कमसिन लड़के मदिरा के प्याले प्रस्तुत करेंगे , और मर्दों को मरणोपरांत बतौर ईनाम मिलेंगेअरब समाज में ये दोनों प्रवृत्तियाँ (मद्यपानअल्पवयस्क पुरुष के साथ प्रेम) प्रचलित  थीं  मुहम्मद के समय तक यह बातें सिर्फ कुरान और हदीसों में थीं लेकिन मुहम्मद की मौत के बाद ही  इन कुकर्मों की तर्रीफ़ में  लिखने वाले  शायरों  की संख्या बढ़  गयी  , अरबी से फारसी  और फिर उर्दू  के ऐसी शायरी  की भरमार  है ,

1-खमरियात (الخمريات )
यह  अरबी भाषा  की एक ऐसी शायरी  है ,जिसमे शराब  और  समलैंगी  संबधों  का वर्णन  किया जाता है  , और इन कामों की तारीफ  की  जाती  है  , इस शायरी का जन्म  देने वाला  अरबी  शायर   " अबू नुवास  -(أبو نواس  " है ,इसका पूरा नाम "अबू नुवास अल हसन बिन हांनी बिन अब्दुल अव्वल बिन सालिह अबू अली -   الحسن بن هانئ بن عبد الأول بن الصباح ،ِابو علي)  " है  ,इसका काल 756 ई से  814 ई तक है  , और इसकी किताब का नाम  "दीवाने  अबू नुवास -ديوان ابي نواس
  "  है  , इस दिवान का कई भाषाओँ में अनुवाद  हो चूका  है  ,  फारसी शायर  उम्र ख्याम  ने इस से प्रभावित होकर  शराब  की तारीफ में   काफी लिखा  है ,  नुवास की शायरी  का नमूना   देखिये  ,

لا تَبْكِ ليلى ، ولا تطْرَبْ إلى هندِ،                  واشْرَبْ على الوَرْدِ من حمراء كالوَرْدِ-  1
न  तो  लैला के लिए   रोते रहो और न "हिन्द " (हिन्दू लड़की "  की कामना करो  , बल्कि  गुलाब से बनी गुलाबी शराब   पिया   करो

Do not weep for Layla, and do not exult over Hind /, but instead drink to the rose of the rosy wine!

كأساً إذا انحدَرَتْ في حلْقِ شاربها،                           أترك حُمْرَتَها في العينِ والخدّ  -2
जब गिलास  से शराब पीने वाले के गले से नीचे  उतरता  है तो शराब की लाली  आँखों और गालों पर फ़ैल जाती  है

When the glass has flown down the throat of its drinker / leaving its redness on the eye and on the cheek

لي نشوتان، وللنَّدْمانِ واحدة ٌ،                 شيءٌ خُصِصْتُ به من بينِهِمْ وحدي- 3
इस से मेरा मजा दोगुना हो जाता है  , और मुझे वह  सुख मिलता है जिसके लिए मुझे बनाया गया  है 

For me pleasure is double, and remorse is one. / I was allotted this, from others things, alone.

अबू नुवास अकेला नहीं रहा, उसके देखा देखी बहुत शायर आये और उसके समय से लड़कों को ले कर अरबी या फ़ारसी में शेर, ग़ज़ल कहने की परिपाटी चल पड़ी. उसके बस सौ वर्षों के अंदर अरब में समलिंगी कामुकता को घोषित करती शायरी उतनी ही लोकप्रिय हो गयी
नोट -इस्लाम के पहले अरब और भारत के बीच  व्यापर  होता था  , और अरब में भारतीय हिन्दू स्त्रियों  की  सुंदरता के बारे में लोग  जानते  थे , और लोग कहते  थे कि हिन्दू लड़कियां  बड़ी मोहक होती  है  ,जो लोगों के दिल चुरा लेती   है  , इसीलिए अक्सर अरब के लोग अपनी लड़कियों के नाम  हिन्दा या हिन्द रख  देते  थे , जैसे  अबूसुफ़यान  की पत्नी  और खदीजा के पहले पति से जन्मी पुत्री  का नाम  हिन्दा था ,
और जब इस्लाम  आया तो मक्कार मुल्लों  ने  हिन्दू  का अर्थ  "चोर " कर  दिया
2-फारसी शायरी  में शराब और गिलमाबाजी 
ख्वाजा  शमशुद्दीन मुहम्मद  हाफिज -  : خواجه شمس‌‌الدین محمد حافظ     " की शायरी  में मिलती  है   ,इनका काल 1315 ई से 1390 ई है  , इनकी किताब दीवाने  हाफिज है ',कुछ उदहारण   देखिये (,चूँकि  लोग फारसी नहीं  जानते  इसलिए  देवनागरी  में   दिया जा रहा  है )

'मन तर्क इश्कबाजी  व्  सागर नमी कुनम  -
 सद बार तौबा  करदम व्   दीगर नमी कुनम -1
जाहिद बा ताना गुफ्त बिरौ इश्क  तर्क  कुन -
 गुफ़तम कि मन बिगोश हरेक खर नमीकुनम -2
बागे बहिश्त व्  सायाए तैबा व कसरो हूर  - 
बा खाके  कूए  यार बराबर नमी कुनम -3

 अर्थ - मैं इश्कबाजी  और शराब पीना नहीं छोडूंगा , मैंने सौ बार तौबा किया है ,लेकिन अब तौबा नहीं करूँगा  , जब मौलवी ने ताना मार  कर मुझ से कहा कि इश्कबाजी  छोड़ दो , तो मैंने  कहा कि मैं तेरे जैसे गधों की बातों पर कान नहीं करता ,  मेरे लिए जन्नत के बगीचे  , ठंडी छाया  और हूरें मेरे यार के पैरों की धूल के बराबर  है  ,एक और नमूना  देखिये 
"बा  यार  जीरक व्  बादा ए कुहन दो मने -
 फ़राग़ते व्  किताब ए व्  गोशए चमने ,-1
 मन  ईन  मुकाम बा  दुनिया    व् आख़िरत न  दहम  -
अगरचे  दर पयम उफ्तन्द ख़लक अंजुमने -2

अर्थ -मेरे  साथ  छोटा  यार  हो , दो मटके पुरानी शराब  हो  , फुर्सत का समय  ,शायरी की  किताब बगीचे का कोना  हो तो मैं इसके लिए  दौनों लोक   छोड़  दूंगा  , चाहे सारी दुनिया मिल कर मुझे समझने को  आ  जाये ,

कई बार  हाफिज  ने  अरबी और फारसी  का एक साथ प्रयोग किया है  , उदाहण के लिए  इस कविता में पहली लाइन अरबी   है 
अला या  अय्यु हस्साकी अरिद कासाऊं व्  नाविलहा-
 कि इश्क आसां बुवद अव्वल बले उफ्ताद मुश्किलहा -1
बिदह साकी मये बाकी  कि दर जन्नत न  ख़्वाही  याब  -
किनारे  आब रुकनाबाद  गुलगश्तो मुसल्ला  रा -2

अर्थ  - हे साकी  जल्दी  से सुराही और प्याला   लेकर आ  ,  इश्क करना पहले तो आसान लगता  है लेकिन बाद में मुश्किल में डाल देता  है  ,इसलिए जीतनी  शराब   है  सब  दे  दो बाकी नहीं  रखने  देना क्योंकि जन्नत में नहीं मिलेगी  ,  इसलिए नमाज का बिछवना  उठा  दो  ,( नमाज  पढ़ना  बेकार  है )

हाफिज के दीवान में   हिन्दू स्त्री  का उल्लेख है  ,सबूत के लिए  यह  शेर  दिए जा रहे  हैं ,
"अगर  आँ तुर्को शीराजी  बदस्त आरद दिले मारा  - 
बि खाले हिन्दु अ श बख़्शम समरक़ंदो बुखारा  रा  

अर्थ  -अगर मुझे तुर्किस्तान  और ईरान   का राज मिल जाये  तो  मैं  हिन्दू लड़की के गालों  के तिल की सुंदरता पर समरकंद  और बुखारा  शहर  भेंट  कर  दूंगा  .

3-समलैंगी  खलीफा 
इस्लामी अब्बासी हुकूमत   का छटवां खलीफा  " अल अमीन - : الأمين‎  " लौण्डेबाज   था ,  इसकी मौत  सन 813 ईस्वी में हुई  थी ,इसके पिता का नाम  " अबू मूसा मुहम्मद बिन हारून अल रशीद  -"  أبو موسى محمد بن هارون الرشيد‎ है  , अमीन के बारे में इतिहास की किताबों में लिखा है कि ,
"उसे लड़कों के प्रति इतना जबरदस्त झुकाव था कि वह औरतों के पीछे जाता ही नहीं था. उसकी हालत देख ज़ुबेदा, उसकी माँ, ग़ुलाम औरतों को मर्दों के कपडे पहना कर उसके पास भेजती थी जिस से खलीफा अल अमीन में पारम्परिक रुचियाँ जगें और अब्बासी खिलाफत को उत्तराधिकारी मिल सकें .
4-लौण्डेबाज महमूद गजनवी 
सभी जानते हैं की" महमूद गजनवी - محمود غزنوی‎  "  एक लुटेरा  और  आक्रांता था जिसने तीन बार सोमनाथ पर हमला करके मंदिर को ध्वस्त  कर दिया था ,इसका काल सन 971 ई से  सन 1030 ई तक   है , मुस्लिम इतिहासकार इसको एक विजेता  और  जिहादी बताते हैं  , लेकिन लोग यह नहीं  जानते कि महमूद एक  लौण्डेबाज  था , और उसने  अपनी वासना पूर्ति के लिए एक जॉर्जियन   गुलाम  रखा  हुआ था जिसका नाम "मलिक अयाज -ملک ایاز  " था , और  महमूद इसी गुलाम लडके  के  साथ   समलैंगी  कुकर्म  करता  रहता  था  , फिर भी  फारसी और उर्दू   शायरी  में इस कुकर्म  को  महिमा मंडित  किया  गया  है  , उदहारण  के लिए इकबाल  की एक  शायरी  देखिये  ,
सुविख्यात प्रसंग इकबाल की ग़ज़ल ‘कभी ऐ हकीकत-ए–मुन्तज़र...‘में आया है:
न वो इश्क में रहीं गर्मियां, न वो हुस्न में रहीं शोखियाँ
न वो ग़ज़नवी में तड़प रही, न वो ख़म है ज़ुल्फ़-ए अयाज़ में

5--मीर  की शायरी  में लौंडेबाजी 
मीर मुहमद  मीर  - 1723 -1810), प्रसिद्द उर्दू  शायर  है  यह अवध  के नवाब  आसिफुद्दौला  के दरबारी कवी   थे इनकी  शायरी में खुल्लम खुल्ला  लौंडेबाजी को अच्छा  माना गया है  यहां  तक इसे इज्जत की बात समझा  जाता  है   जैसे ,
किया उस आतिशबाज़ के लौंडे का इतना शौक़ ‘मीर’
बह चली है देख कर उसको तुम्हारी राल कुछ.
यानी उस लौंडे को देखते ही तुम्हारी राल बहने लगी यानी जब उस लौंडे ने अपने  गालों से बाल साफ़ किये तो जैसे कुरान  के अक्षर ही साफ  हो गए 
दूर कर ख़त को किया चेहरा किताबी उस ने साफ़
अब क़यामत है कि सारे हर्फ़ कुरआन से गए,
यानी जब उस लौंडे ने अपने  गालों से बाल साफ़ किये तो जैसे कुरान  के अक्षर ही साफ  हो गए   इन दोनों शे’रों में माशूक के पुरुष होने का भान लड़का, लौंडा शब्दों से होता है.
फारसी  और उर्दू शायरी की किताबों से ऐसे हजारों उदाहरण  मिल जायेंगे जिनमे शराबखोरी  और इगलाम की तारीफ़ की  गयी है  , शायद  यही  कारण  है  की मुहम्मद  को "हबीबुल्लाह -  " और निजामुद्दीन  औलिया को  "महबूब  इलाही   -   " (beloved of Allah )कहा जाता  है

अगले लेख में बाबर और  उसके प्रिय  लौंडे बाबरी  के बारे  में बताएँगे 


https://www.pgurus.com/wp-content/uploads/2017/07/babur1.jpg


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रविवार, 8 मार्च 2020

हमारे लेख की सच्चाई का सबूत

 नागरिकता  संशोधन  अधिनियम   के बहाने मुसलमानों  ने पूरे  भारत  के साथ दिल्ली  में जैसी तड़फोड़  , हिंसा , हत्या और बलात्कार जैसे जो जघन्य  अपराध किये  हैं  ,उसकी मिसाल कहीं  नहीं  मिलती  , इसी लिए  एक बार प्रधान  मंत्री  जी ने कहा था कि यह घटनाये  संयोग नहीं  बल्कि  एक प्रयोग  है , 
वास्तव  में  मुसलमान  मोदी  का  शक्ति  परिक्षण  करने  का प्रयोग  कर  रहे  हैं    यह बात  हमारे  13 जून  2019 को पोस्ट किये  गए लेख  को  सच  साबित  करने वाली  है ,क्योंकि  हमने इस लेख में  स्पष्ट   लिख दिया था कि मुसलमान मोदी सर्कार की  ताकत का इम्तिहान लेने को  जल्द ही किसी बहाने  भारी दंगाफसाद करेंगे   , और मोदी  उसी तरह झुकने को मजबूर  देंगे  जैसे पिछली  सरकारों को अपनी मांगें पूरी करने के लिए  करते आये  है  ,
अक्सर  हमारे  पाठक  हमारी बातों  पर ध्यान  नहीं रखते  और भूल  जाते  हैं  इसलिए हम  वह लेख फिर  से पोस्ट कर  रहे  हैं

बच्चिओं  से बलात्कार    का  रहस्य  ?
पिछले  72 घंटों  में  छोटी  छोटी अबोध   बच्चिओं  के  साथ  9  घटनाएं   हुई  हैं  , और  यह  सभी बच्चियां  हिन्दू    ही  है  , जबकि बलात्कारी  सभी मुस्लिम  पाए   गए   हैं ,घटनाएं  इस प्रकार  हैं , और  बच्चिओं  की  आयु   इस प्रकार  है
1 -अलीगढ़  -2.5-साल ,2 -बाराबंकी -8-साल ,3 -बरेली-7साल , 4 -हमीर पुर -10साल ,5 -अमरोहा -5-साल ,6 -वाराणसी -9-साल ,7 -मेरठ -11-साल ,8 -गया -14-साल ,9 -भोपाल-8-साल
 लोग  इन बात को भले संयोग  मान  सकते  हैं  ,लेकिन  इन  सभी घटनाओं   को गंभीरता  से देखने  से  हमें पहले  तो  इन  अपराधों  के पीछे  एक  सुनियोजित   षडयंत्र   प्रतीत  होता था  , लेकिन जब   हमारे ही शहर में ही ऐसी जघन्य   वारदात हो गयी  तो  हमें  इन  बलात्कारों  का असली कारण मिल  गया  , चूँकि सभी अपराधी मुस्लिम   हैं  , तो हमने सोचा  की कोई मुस्लिम  ही इसका रहस्य  बता सकता  ,  हमारे पड़ौस में एक मुस्लिम  ठेकेदार   रहते  हैं   ईद के उपलक्ष  में उन्होंने एक दावत  राखी  थी , जिसमे उनके बहुत  से मित्र  आये  थे  ,  उनमे  एक मस्जिद  के इमाम  भी  थे  , ठेकेदार  खान  साहब  ने  इमाम  साहब  को मेरा परिचय   देकर कहा  यह  जनाब  अरबी ,उर्दू  और  फारसी  भी जानते  हैं  यही नहीं  देवबंद  से कुरान  शरीफ  का कोर्स भी किया  है , यह  जानते  ही इमाम   साहब  मुझ  से दोस्त  की  तरह  बातें  करने  लगे .जब बातों  के दौरान  भोपाल  में हुए बलात्कार  की  बात   चली   , तो मैंने इमाम साहब से पूछ   लिया की  आप लोग तो मुसलमानों  के नेक चलनी  की तालीम  देते  रहते हो फिर  हर  जगह मुसलमान  बच्चिओं  से बलात्कार क्यों  करते  रहते हैं   ? इस पर  इमाम  साहब ने जो खुलासा किया  , उसे जानकर आप सन्न  रह  जायेंगे ,
इमाम  बोले  देखिये हमारे लोग  पूरी   U.P  , M.P.  ,  बिहार  और   छत्तीस गढ़ में  फैले हुए हैं  , और मोबाईल से जुड़े रहते  हैं   ,अगर कहीं   एक परिंदा  भी पर मारता है  , तो हम लोगों  को खबर मिल  जाती  है  ,
हमने पूछा की क्या  आपके लोग  अपराध भी करते  हैं  ?
  इमाम बोले तुम जिसे अपराध मानते हो   हम उसे  टेस्ट  कहते  हैं  
, देखिये  जब  भी किसी जगह किसी नए थानेदार  की पोस्टिंग  की जाती  हैं  ,तो हमारे  लोग  उस एरिया  में कोई  न  कोई वारदात  जरूर  कर   देते हैं  , और फिर देखते  हैं   की वह  अफसर क्या  कार्यवाही   करता  है  , केस  दर्ज  करने में सुस्ती  करता  है  , या रिश्वत लेकर  मुजरिमों को  छोड़  देता  है  ,
मतलब  हमारे  काम   का आदमी  है हमारे  काम  के ऐसे लोग
 तक़रीबन सभी पार्टियों  ,  पुलिस में    यहाँ  तक अदलिया  (Judiciary    )में भी  भरे हुए  हैं  ,  इनकी जिहानत तवायफों  की तरह  है  , जो चंद रुपयों  की खातिर जिस्म बेच  देती  है , हमने कहा की इस्ला मतलब की  तुम   लोग अपराध करके  सरकारों  की  ताकत का   टेस्ट करते  रहते हो  ,  इमाम ने कहा हाँ , आप सही फार्मा  रहे  हैं  ,  फिर हमने पूछा की इन  सरकारों  के बारे  में आप   की क्या राय  है  ,इमाम  बोले सभी  साली इक्तिदार ( Power) की भूखी  हैं  ,  और इसके लिए उनको हमारे वोटों   की जरुरत होती  है  ,
 यह पार्टियां वोटों   की मुहताज  है , सभी नामर्द  और लालची  हैं  ,  इसलिए अगर हम कितना  भी संगीन  जुर्म  करें  ,  हमारा  कुछ  नहीं   होगा , चाहे हम  संसद  के सामने भी बलात्कार   क्यों   करें  , हमें  फ़िक्र नहीं  '
इसके बाद हमने इमाम   से पूछा कि अब  तो भोपाल  में भी एक बलात्कार का केस हो गया ,हबीब गंज  में एक 9 साल की बच्ची को बलात्कार  करके मार दिया गया  ,आखिर यह सिलसिला  कब  बंद होगा  ?
यह महज इत्तिफाक की बात नहीं , इन घटनाओं के पीछे कोई साजिश  लगती   है  ,
इसके पीछे  क्या कारन  होगा  , इमाम  बोले इसके जिम्मेदार  तुम  हिन्दू  लोग  ही  हो  , क्योंकि तुम्ही लोगों  ने मुसलमानों   में  मोदी  का ऐसा खौफ पैदा  कर  दिया जैसे मोदी प्रदान  मंत्री  की कुर्सी  पर बैठते  ही सभी  जिहादियों  का सफाया  कर   देगा , यही यही नहीं  हरेक  अपराधी  को सख्त  से सख्त   सजाएं  दिलवाएगा   , और
 चूँकि 99 % हमारे   लोग  अपराधी हैं  ,
 और  की यह बात एक तरह  से धमकी    है , 
इसलिए हम लोगों   ने फैसला  कर लिया कि हम मोदी को उसकी औकात  दिखा  देंगे  ,  हम मुल्क  में ऐसे हालात  पैदा कर  देंगे जिस से मोदी को हमारे  आगे घुटने टेकना पड़ेंगे , आप थोड़ा  सा सब्र रखिये  , इंशा अल्लाह  हम  कामयाब  होंगे !
(नोट -लेख का इतना हिस्सा  हमने  9 जून  को तैयार कर  लिया  था  , और इससे आगे हमने  आज  13तारीख  को पूरा  किया )
 हमें  इमाम  की बातों  में सच्चाई   मालूम   होने  लगी  है   ,जब  मोदी  ने मदरसों  के लिए खजाने  खोल  दिए  ,  फिर गाय  की  चर्बी  का निर्यात  करने  की  अनुमति  देदी  ,और जब  मोदी  ने  सार्वजनिक रूप  से कहा कि "अगर  कोई हिन्दू किसी मुस्लिम   पर  हाथ  डालने  का प्रयास  करेगा  तो उसे मेरी  लाश  पर गुजरना पडेगा .
हमें  तो ऐसा  लगता  है कि मोदी  के  शरीर में बुड्ढे  गाँधी   की दुष्ट  आत्मा घुस चुकी  है  , 
समझदारों  के लिए इशारा  ही काफी  होता  है  , आप लोगों    का क्या विचार  है  ?

कृपया कमेंट  जरूर  करें

(430 )   08/03/2020  (13/06/2019)

शनिवार, 7 मार्च 2020

इस्लाम की सौगात-इगलाम !


इस्लाम   की सौगात सिर्फ आतंक  , व्यभिचार  और अय्याशी  ही नहीं  बल्कि एक  और कुकर्म   भी   है  जिसे "इगलाम - اغلام  "कहा  जाता  है  ,कुरान  के अनुसार  जन्नत में मुसलमानों  की वासना पूर्ति  के  लिए हूरों के आलावा  लडके भी  दिए  जायेंगे इन्हें " गिलमान - غِلْمانٌ"कहा गया  है   देखिये ,

وَ يَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمانٌ لَهُمْ کَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَکنُونٌ "
नके पास ऐसे सुन्दर लडके लाये जायेंगे  जो मोती की तरह होंगे  "
सूरा   -तूर 52:24 

और उन  लड़कों के साथ मुसलमान  जो कुकर्म   करेंगे  उसे अरबी में "इगलाम - اغلام" कहते  हैं  , इसे फारसी में बच्चाबाजी ,  बटमारी भी कहते  हैं  , इस्लाम की यह  सौगात आज   विश्व  भर में  फ़ैल  गयी  है


आजकल बेशर्मी ,नंगापन ,होमोसेक्सुअलिटी ,और व्यभिचार समाज के अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं .लोग इसे फैशन ,या नई संस्कृति मानकर स्वीकार करने लगे है. हिन्दुस्तान टाइम्स 18 जुलाई 2011 और 22 जुलाई 2011 दिल्ली और भोपाल में "बेशर्मी मोर्चा Slut Walk "निकला गया .जिसमे लडके लड़कियाँ अधनंगे होकर जुलुस निकाल रहे थे .और बेशर्मी का प्रदर्शन कर रहे थे .इसी तरह कुछ दिन पूर्व दैनिक जागरण ने लोगों से "Homosexuality "के बारे में राय मांगी है ,कि क्या यह कोई मानसिक रोग है ,या सामान्य बात है .
कुछ लोग इसको पश्चिम ,या अमेरिका की देन कहते हैं .लेकिन यदि हम इस्लाम की परंपरा और इतिहास को देखें तो पता चलता है ,यह सब कुकर्म इस्लाम की देन हैं .यही साबित करने के लिए जल्दी में यह लेख लिखा है .ताकि लोग इसे पढ़कर जागरण के ब्लॉग में जवाब दे सकें .
बेशर्मी ,Homosexuality ,और व्यभिचार इस्लाम की सुन्नत है .आप सबूत देखिये -


1-आयशा की बेशर्मी 
सलमा बिन अब्दुर रहमान ने कहा मैं अपने दूधभाई के साथ घर में था ,तभी आयशा आयशा आई और बोली ,मुझे बर्तन देदो ,रसूल के साथ सम्भोग करने के बाद मुझे नहाना है .बाद में आयशा एक परदे की आड में हमारे सामने नंगी नहाने लगी .उसने तीन बार पानी डाला .और बालों को झटकाया .उसके बाल कानों तक थे .उस से नीचे नहीं थे .
With this in mind we invite you to ponder over this hadith:


Abu Salama b. 'Abd al-Rahman reported: I along with the foster brother of 'A'isha went to her and he asked about the bath of the Apostle (may peace be upon him) because of sexual intercourse. She called for a vessel equal to a Sa' and she took a bath, and there was a curtain between us and her. She poured water on her head thrice and he (Abu Salama) said: The wives of the Apostle (may peace be upon him) collected hair on their heads and these lopped up to ears (and did not go beyond that).


" سلامة (ب) "وذكرت عبد الرحمن : أنا مع الأخ تشجيع من عائشة ذهبت إليها وسأل عن حمام من الرسول (صلي الله عليه وسلم) لأن الجماع الجنسي. دعت لسفينة يساوي 'سا وأخذت حماما، وكان هناك ستارة بيننا وبين لها. سكب الماء على أنها رأسها ثلاث مرات وكان (أبو سلامة) قال : زوجات الرسول (صلي الله عليه وسلم) جمع الشعر على رؤوسهم، وهذه تصل إلى آذان  (ولم يذهب أبعد من ذلك)."


Sahih Muslim, Book 003, Number 0626


2-आयशा व्यभिचार में पकड़ी गयी 
(Ayesha was accused of adultery )

कसीर के अनुसार जब मुहम्मद की पत्नी एक व्यक्ति के साथ रंगरेलियां मनाते हुए पकड़ी गयी ,तो मुहमद ने उसे सजा देने की जगह लोगों को जमा किया ,और कुरान की आयतें बना कर आयशा को निर्दोष बता दिया और ,गवाह मतशः बिन उतबा,हसन बिन साबित और हमना बिन्त जहश को दोषी करार करते हुए सजा सुना दी .( यह लेख दिया जा चका है )
Ibn Kathir records in Al-Bidaya wa al-Nihaya, Volume 4 page 186: 


ثم خرج إلى الناس فخطبهم وتلا عليهم ما أنزل الله عزوجل من القرآن في ذلك ثم أمر بمسطح بن أثاثة وحسان بن ثابت وحمنة بنت جحش وكانوا ممن أفصح بالفاحشة فضربوا حدهم.


"Then he (prophet) went to the people and addressed and then recited what Allah revealed in Quran, then he ordered that Mastah bin Uthatha, Hasaan bin Thabit, Hamna bint Jahsh be punished because they were among those who had spread the allegation of adultery".

Al-Bidaya wa al-Nihaya, Volume 4 page 186: 

3-मुहम्मद की बेशर्मी 
तबकाते इब्ने साद में अबू मशेर ने कहा है ,जब रसूल मलइका बिन्त नामकी सुन्दर लड़की से शादी के बाद अपने घर लाये .और सुहागरात कि तय्यारी में थे ,तो आयशा ने धिक्कारते हुए कहा .तुम्हें ऐसी लड़की से शादी करते हुए शर्म नहीं आती ?जिसने तुम्हारे बाप को क़त्ल किया था .


We read in Tabaqat Ibn Saad:

"تزوج النبي (ص) ​​لمليكة بنت كعب، وقالت انها كانت جميلة جدا ، وبالتالي ذهبت عائشة وقال لها : "هل أنت لا تخجل من الزواج من قاتل والدك"


Abu Masher said: 'The prophet (pbuh) got married to Malika bint Kaab, she was very beautiful, thus Ayesha went to her and said: 'Are you not ashamed of getting married to the killer of your father?'

Tabaqat Ibn Saad, Volume 8 page 148


4-मुहम्मद अपनी बहू के साथ नशा करता था 


"، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَشْرَبُ عَسَلاً عِنْدَ زَيْنَبَ ابْنَةِ جَحْشٍ وَيَمْكُثُ عِنْدَهَا فَوَاطَيْتُ أَنَا وَحَفْصَةُ عَنْ أَيَّتُنَا دَخَلَ عَلَيْهَا فَلْتَقُلْ لَهُ أَكَلْتَ مَغَافِيرَ إِنِّي أَجِدُ مِنْكَ رِيحَ مَغَافِيرَ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ لاَ وَلَكِنِّي كُنْتُ أَشْرَبُ عَسَلاً عِنْدَ زَيْنَبَ ابْنَةِ جَحْشٍ فَلَنْ أَعُودَ لَهُ وَقَدْ حَلَفْتُ لاَ تُخْبِرِي بِذَلِكِ أَحَدًا ‏"‏‏.‏

आयशा ने कहा कि रसूल जहश की बेटी जैनब ( मुहामद के मुंहबोले बेटे जैद की पत्नी )के घर छुपकर शहद पीने के बहाने "मगफिर "नामकी एक बदबूदार शराब पीते थे .मैंने और हफ्शा ने मिलकर इसकी जाँच करने की योजना बनाई .अगर वह शराब पियेंगे तो उसकी गंध सूंघने से पता चल जाएगी .बाद में यही बात सही निकली .पकडे जाने पर रसूल बोले मैं कसम खाता हूँ कि अब ऐसा नहीं करूंगा .और तुम भी वादा करो कि यह बात किसी को नहीं कहोगी .
"Narrated 'Aisha: Allah's Apostle used to drink honey in the house of Zainab, the daughter of Jahsh, and would stay there with her. So Hafsa and I agreed secretly that, if he come to either of us, she would say to him. "It seems you have eaten Maghafir (a kind of bad-smelling resin), for I smell in you the smell of Maghafir," (We did so) and he replied. "No, but I was drinking honey in the house of Zainab, the daughter of Jahsh, and I shall never take it again. I have taken an oath as to that, and you should not tell anybody about it".

Sahih Bukhari Volume 6, Book 60, Number 434:

USC-MSA web (English) reference : Vol. 6, Book 60, Hadith 434
Arabic reference : Book 65, Hadith 4912

5--समलैंगी काजी बन जाते थे 

लड़कों के साथ कुकर्म करना   इलगाम यानी लौंडेबाजी  अरबों  का शौक  था , और जैसे जैसे इस्लाम फैलता गया उनका यह शौक  और बढ़ गया  यहाँ तक कि लौण्डेबाज  भी मुख्य काजी  बन गए थे .ईरानी मुस्लिम इतिहासकर "अल्लामा अबुल कासिम हसन बिन मुहम्मद रागिब अल इस्फ़हानी - ابوالقاسم حسین ابن محمّد الراغب  " ने  अपनी किताब  "    मुहाजरात  अल उदबा  - محاضرات الادباء ومحاورات الشعر اء والبلغاء    "   में लिखा  है ,

"काजी याह्या बिन अख्तम लौण्डेबाज  था ,जो मुख्य   न्यायाधीश  और मजाहिदों  का इमाम  भी  था .इस काजी का पूरा नाम "अबू मुहम्मद याह्या बिन अक़्सम - : أبو محمد يحيى بن أكثم‎  " है  , इसका काल died 857


Qadhi Yahya bin Aktham (d. 242 H) was a homosexual , and also stated: ‘He was the supreme judge, the jurist, the scholar’among the mujtahid Imams’


 (Siar alam alnubala (سير أعلام النبلاء) , v12 p5)


 (Siar alam alnubala,  (سير أعلام النبلاء)  v12, p6).


 Al-Muhadarat al-Udaba,   - Volume 3 page 351:


एकबार काजी याहया बिन अख्ताम खलीफा मामून के पास गए ,वहां एक सुन्दर लड़का बैठा था ,मामू ने कहा इस लडके से बात करो ,इसकी परीक्षा लो ,काजी ने पूछा ,आजकल क्या खबर चल रही है .लड़का बोला जमीन पर तो यह खबर है कि ,आप एक समलैंगी हो ,और असमान पर यह खबर है कि आप Anus के शौक़ीन हो (लौंडेबाज ).काजी के पूछा इनमे कौन सी बात सही है .लड़का बोला आसमान की बात कभी गलत नहीं हो सकती .यह उनकर काजी याह्या शर्मा कर चुप हो गया
.
دخل يحيى بن أكثم على المأمون فرأى عنده غلاماً صبيح الوجه فقال له المأمون: استنطقه وامتحنه فقال له القاضي: ما الخبر؟فقال له: الخبر خبران خبر في الأرض أنك لوطي، وخبر في السماء أنك مأبون، فقال له المأمون: وأيهما أصح؟فقال: خبر السماء فخجل يحيى وانقطع.


"Once Yahya bin Aktham went to Mamun and saw a cute boy sitting next to him, Mamun asked: ‘Talk to him and examine him.’ Then the Qadhi asked: ‘

What's the news?’ The boy replied: ‘On earth it is known that you are a homosexual whereas in the skies it is known that you have an addiction to the anus’. 

The Qadhi asked: ‘Which news is correct?’ The boy replied: ‘The news in the skies can never be wrong’
 Yahya then felt shy and remained silent.

In Siar alam alnubala, سير أعلام النبلاء) Volume 12 page 10, 

काजी सुन्दर किशोरों को दावत पर बुलाता था .

(He used to mess with cute boys when he was young” )

इस काजी के बारे में ईरानी  मुस्लिम विद्वान् "अबू नईम  इस्फ़हानी  -  (أبـو نـعـيـم الأصـفـهـانـي  " (   1038 / AH 430   )  ने  अरबी में यह कविता लिखी  थी 


حاكمنا يرتشى وقاضينا يلوط والراس شر ما راس لا احسب الجور ينقضى وعلى الأمة وال من ال عباس.

"हमारे राज्यपाल रिश्वत लेते हैं,
हमारा जज समलैंगिक है
और जब तक अब्बासिद शासन करते हैं
मुझे कोई भरोसा नहीं है कि अत्याचार कम हो जाएगा ”

"Our Governor takes bribe,
Our Judge is homosexual
And as long as the Abbasides rule
I have no confidence that tyranny will subside"


 "আমাদের সুবেহ্‌দার ঘুষখোর, আমাদের কাজী সমকামী, যতদিন আব্বাসীরা শাসন ...



Yahyah bin Aktham in Tarikh Baghdad, Volume 14 page 196:



6-समलैंगी और काफिर भी खलीफा होते थे

इस्लामी इतिहास  की किताब  तारीख़ुल  इस्लाम में लिखा है  "यह बात सत्य है कि खलीफा वलीद काफिर या जिन्दीक था ,वह एक कुख्यात शराबी और समलैंगी भी था

ولم يصح عن الوليد كفر ولا زندقة نعم اشتهر بالخمر والتلوط

‘It is  true that al-Waleed was Kafir or Zindeeq, yes he was known as drunkard and homosexual’

Tarikh al-Islam, Volume 8 page 294:


7-इमाम हसन औरतों का शौकीन था 
इमाम हसन को बार बार शादी करने और तलाक देने का शौक था ,उसने औरतों के मामले में हद कर दी थी .उसने  सत्तर (70 ) औरतों  से शादियां की थीं

وكان منكحا، مطلاقا، تزوج نحوا من سبعين امرأة

Imam Hassan (as) loved to do marriages and give divorces,"He (Hassan) was exaggerator in marriage and divorce, he got married to seventy women."

Syar alam al-Nubala by Dahabi, Volume 3 page 253:

मुझे पूरा विश्वास है कि जानकर लोग इस थोड़े से प्रमाणों से अच्छी तरह से समझ गए होंगे कि हरेक बुराई की जड़ सिर्फ इस्लाम ही है ,जो धीमे धीमे सारे विश्व को बर्बाद कर रही है .अधिकांश नवाब ,शायर मौलवी homosexual थे .इसके लिए उर्दू में अलग तरह की शायरी होती है ,जिसे "रेख्ता "कहा जाता है .अभी तक लोग कुरान से इस्लाम की जानकारी लेकर गुमराह हो रहे है ,इस्लाम का असली रूप तो उन किताबों में है जो मुसलमान छुपा लेते है .
अगले लेखों में आपको इसी विषय में दो और लेख  दिए जायेंगे जरुर पढ़िए !



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बुधवार, 4 मार्च 2020

जन्नत का क्षेत्रफल और जनसंख्या !


विश्व   के  सभी  धर्म  आत्मा   को  अमर    मानते   हैं   , और   यह  भी   मानते हैं  कि  जीवन  भर   मनुष्य  जो भी  भले   बुरे  कर्म   करता  है   ,मृत्यु   के बाद  उसकी  आत्मा  को उन  कर्मों   के  फल  भोगना  पड़ते   है   ,  बुरे  लोग  नर्क   जाते हैं  , और  भले  लोग   स्वर्ग  में   जाते  हैं   , हिन्दू  जिसे  स्वर्ग   कहते हैं   उसे  ईसाई  पैरा  डाइस ,  ईरानी फ़िरदौस  और  इसलाम   में   जन्नत   कहा  गया   है  ,
कुरान  और  हदीसों   में मुसलमानों   को  जन्नत  में  मिलने  वाली  अय्याशी पूर्ण  सुविधाओं  का  ऐसा   अतिरंजित  वर्णन    दिया  गया   है   ,जिसके  प्रलोभन  में  आकर   शुभ   कर्म  करने  की  जगह  जिहादी   बन   जाते  हैं   ,  क्योंकि  हदीसों   में  जिहादियों  के  लिए  जन्नत  में  विशेष  और अतिरिक्त  सुविधाओं   का  प्रावधान     है  ,  इसी  जन्नत   के  लालच  में  आज  जिहादी  आतंकवादी   रोज   सैकड़ों   निर्दोष  लोगों  की  हत्याएं  कर  रहे   आत्मघाती  बम  बन  कर  कई  खुद  भी  मर  रहे  हैं  ,
 जन्नत   जैसी   किसी   जगह   के  अस्तित्व   के  बारे में  लोगों  के  वभिन्न    मत   हो  सकते   हैं  , हमें  इस  विवाद  में  नहीं  पड़ना  है  ,  हमें इस   बात  का    पता  करना  था   कि मुस्लमान   जिस  जन्नत   में  जाने   के   लिए  पूरी  दुनिया  को जहन्नम    बनाने  पर  आमादा   हैं  , आखिर   वह  जन्नत  कितनी   बड़ी  है  ?  उसका  आकार  कैसा   है ?  अर्थात   , आयताकार (Rectangle) ,  वर्गाकार(Square)   या  फिर   वृत्ताकार (Circular) .इत्यादि 


1-जन्नत  की जानकारी  कैसे मिली ? 

करीब    दो  सप्ताह  पूर्व  अमेरिका  स्थित     मेरी   पाठिका   बहिन रेणु  शर्मा    ने   फोन   से  बात के  दौरान  जन्नत  के बारे में    प्रश्न   किया   था   , उनको   संतोषजनक   ,    सप्रमाण   और  सटीक  उत्तर  देना   मेरा     दायित्व    था   ,  लेकिन हजाारों  हदीसों  में  ऐसी    हदीस   खोजना  जिसमे  जन्नत  के  आकार  क्षेत्र    का   उल्लेख   हो   ,  घास  के  ढेर  में  सुई  खोजने  जैसा  कठिन   था  ,  दो   सप्ताह   की छानबीन  के   बाद  आखिर      सफलता   मिल  गयी    ,   ईश्वर  के  अनुग्रह  से परिश्रम   सार्थक    हुआ   , 

क्योंकि   मुल्ले  मौलवी  ऐसी बातें   मुसलमानों   को  भी  नहीं  बताते   ,  वह  तो    जन्नत  में  मिलने   वाली   कुंवारी   हूरों    का  लालच    देकर   मुसलिम  युवकों  को  जिहादी   बनाने   में   लगे  रहते  हैं   ,  उन्हें  डर  है   कि सही   बात  खुल  जाने  से   कोई  भी  बुद्धिमान    जिहादी  नहीं   बनेगा !

3- हदीस की प्रमाणिकता 

अधिकांश    मौलवियों   की  आदत   है कि जब    हदीस   में  कोई  ऐसी  बात   निकाली  जाती   है   जिसके  खुल  जाने   इस्लाम   का  भंडा  फूट  जाने का  डर  होता हो  तो   मौलवी   झट  से  कह देते हैं   कि  यह   हदीस   झूठी   है   , लेकिन    हम   जिस  हदीस   का  प्रमाण   दे रहे हैं  , वह  सही  है   , हदीस  की  जिन   किताबों   को प्रमाण   माना   जाता  है  उन्को " अल क़ुतुब अल  सित्ता - الكتب الستة‎  "   कहा  जाता   है  ,  इसका अर्थ  6  प्रामाणिक   किताबें  ( Six Books )   है .इनमे  चौथे  नंबर    की  हदीस  की किताब   का  नाम   "  जामए  तिरमिजी  -  جامع الترمذي  "    है  . इस   किताब में  कुल  3956    हदीसे हैं .इनको  सन 982  इ ०  यानी 279  हिजरी में "अबू  ईसा मुहम्मद  बिन  ईसा अस्सलमी अल  जरीर अल  बूगी  अत्तिरमिजी -أبو عيسى محمد بن عيسى السلمي الضرير البوغي الترمذي‎  " ने  जमा   किया  था 'इसी  किताब  में  एक  हदीस  में  अरबी   में  जन्नत   के  बारे   में  जो भी  बताया  गया  है , उसके  अंगरेजी  में  दो  अर्थ  मिलते   है   ,  जिनमे  कुछ  शब्दों  के  अंतरहै   , लेकिन  दौनों  को  मिलाने से  अर्थ    बिलकुल  स्पष्ट    हो   जाता  है   , यहाँ  अंगरेजी  के  दौनों  अनुवाद    मूल  अरबी  और  हिंदी  अनुवाद   दे रहे  हैं 

4-जन्नत   का   वर्णन 

A-मूल  अरबी 

وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ مِنْ لُؤْلُؤٍ وَزَبَرْجَدٍ وَيَاقُوتٍ كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ ‏"‏ ‏ .‏  "

B-अंगरेजी  अर्थ .1"itshall have a tent of pearl, peridot, and corundum set up for him,(the size of which is) like that which is between Al-Jabiyyah and Sana'a

C-अंगरेजी  अर्थ  2 "which stands a dome decorated with pearls, aquamarine, and ruby, as wide as the distance from  to Al-Jabiyah [a Damascus suburb  to Sana'a [Yemen]"


"सईदुल  खुदरी  ने  कहा  की  रसूल   ने बताया   है  कि जन्नत   के  ऊपर  एक गुम्बद   है  , जो  मोतियों  , अकीक  और  नील मणि से  सुशोभित   है  , और  उसका  विस्तार अल  जाबिया    से सनआ    तक   है " 

Al-Tirmidhi,-Book 38, Hadith 2760


English reference : Vol. 4, Book 12, Hadith 2562

5-हदीस का  विश्लेषण 

   इस  हदीस   में दिए  अरबी  शब्दों  और  वाक्यों   का  अर्थ  निकालने  पर  दो  बातें   पता  चलती   हैं 

1.अरबी   में  कहा   है "तुसैब  लहु  कब्बः -  وَتُنْصَبُ لَهُ قُبَّةٌ  "यानी  उसके  ऊपर  एक  कब्बः  है . कब्बः  अर्थ    गोल  गुम्बद (Dome )   ,  या  गोल  तम्बू (Tent) होता  है   ,  अर्थात  जन्नत  गोलाकार   Circular  है  .  शायद  अल्लाह  चौकोर  काबा में  रह  कर  ऊब   गया  हो   इसलिए  गोलाकार  जन्नत    बनवा   ली  हो .
2.फिर  हदीस   में  अरबी में  आगे   कहा   है  "कमा  बैन अल जाबिया  इला   सनआ - كَمَا بَيْنَ الْجَابِيَةِ إِلَى صَنْعَاءَ "जैसी  अल  जबिया से सनआ  के  बीच दूरी   है .

हदीस में   दिए  पहले  स्थान  नाम " अल  जाबिया - الْجَابِيَةِ " है  ,  जो  सीरिया की   राजधानी  "दमिश्क - دمشق‎ "   का एक उपनगर ( Town )  है .इसी  हदीस    में  दूसरे  स्थान    का  नाम   " सनआ  -  صَنْعَاءَ  "   बताया  गया   है   , यह  यमन   -    "    का  एक   प्रसिद्ध  शहर  है 


6-जन्नत  का  क्षेत्रफल   कैसे  निकाला ?

चूँकि  इस  हदीस  के  अनुसार  जन्नत वृत्ताकार   है  ,   जिसका   फैलाव   अल जांबिया  से  लेकर सनआ  तक  है   , आज  के  हिसाब  से  इन  दौनों  के बीच  की  दूरी  2171 .19 Km   है  . गणित की  भाषा  में   इस  दुरी   को वृत्त का  व्यास (Diameter )   अरबी में " क़तर -   قطر       " कहेंगे .  किसी भी    वृत्ताकार   जगह    का  क्षेत्रफल  निकालने   के  लिए   उसकी  "   त्रिज्या ( Radius )    निकलना पड़ती   है   ,  त्रिज्या  को  अरबी   में "निस्फ़  क़तर -  نصف القطر "   कहते  हैं  यह  व्यास  की  आधी  होती  है . हिसाब  के  अनुसार    जन्नत   की त्रिज्या(Radius-1085.59  Km है   , इन तथ्यों  के  आधार  पर  गणना    करने  पर मुसलमानों   की  जन्नत    का

कुल क्षेत्रफल -Total Area-3700541.82 SQ Km अर्थात सैंतीस लाख  पांच  सौ इकतालीस . दशमलव आठ  दो --वर्ग किलोमीटरहै .


जब   हमने    मित्रों   से   कहा   की  हम   जन्नत   का   आकार  क्षेत्रफल   पता   करने वाले   हैं    तो   कुछ   लोगों   ने कहा कि  जन्नत    की   कुल  जनसंख्या   भी   पता   करके   बताइये   ,  हमें  दो  ऐसी   हदीसें   मिलीं    जिनमे      जन्नत  आबादी   के    बारे   में  बताया   गया   है   ,  यह    भी  प्रामाणिक  हदीसें   है    ,

7-जन्नत   की  जनसंख्या 

1.पहली   हदीस 

"रसूल   ने  कहा है  कि   अल्लाह    ने  मुझ   से  वादा   किया  है  ,  कि मेरी   उम्मत के  सत्तर   हजार  लोग (मुसलमान  )   जन्नत में  जाएंगे  ,  और उन  से (उनके  कर्मों का ) कोई  हिसाब   नहीं  लिया   जाएगा   "


"وَعَدَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ أَنْ يُدْخِلَ الْجَنَّةَ مِنْ أُمَّتِي سَبْعِينَ أَلْفًا بِغَيْرِ حِسَابٍ "

"my Lord has promised me that seventy thousand of my nation will enter Paradise without being brought to account. "


 Sunan Ibn Majah-Book 37, Hadith 4426


इस  हदीस   से  साफ़    पता चलता  है कि  जन्नत   की   क्षमता    केवल  सत्तर  हजार    लोगों  की   है   , अर्थात  जनसंख्या    स्थिर   है  ,  क्योंकि  जन्नत    में  जब  शादी    ही   नहीं  होगी    , तो  बच्चे     कहाँ   से  होंगे   ? और   जब  अल्लाह   ने सत्तर  हजार   की  सीमा   निर्धारित  कर  दी  है , तो  उस से अधिक   किसी  का  जन्नत  जाने   का   सवाल   ही   नहीं  उठता ?
 दूसरी   हदीस 

 इस  हदीस   में  जन्नत  के  सेवकों  और जिहादियों  को  इनाम   के  रूप   में  मिलने  वाली   औरतों    की  संख्या  दी  गयी   है   , हदीस   कहती   है

रसूल    ने बताया  कि  जन्नत   वासियों  को  छोटे  इनाम    में   अस्सी हजार    सेवक   और  हरेक   को   बहत्तर    औरतें   मिलेंगीं


"أصغر مكافأة لأهل الجنة هي دار حيث هناك ثمانون ألف الخدم واثنين وسبعين زوجات"


The Prophet Muhammad saying: “The smallest reward for the people of Paradise is an abode where there are Eighty thousand servants and  seventy two wives "


Al-Tirmidhi, Vol. 4, Ch. 21, No. 2562 

 नोट-   इस  हदीस   में  जिहादियों  को  सौगात   के  रूप   में  मिलने    वाली औरतों   को  पत्नियां   कहा  गया   है   ,  लेकिन  उन्हें  वेश्याएं   कहना  उचित  होगा  , क्योंकि   जिहादी  शादी   किये  बिना  उन   सहवास   करेंगे .                   

8- जनसंख्या का वर्गीकरण  और योग 

इन  दोनो  हदीसों  में  दिए  गए  तथ्यों   के  आधार पर  जन्नत   की वर्गीकृत   जनसंख्या   इस  प्रकार   है   ,

1. जिहादी - ( पुरष )-70000   (सत्तर   हजार )

2.सेवक -  (गिलमा ) -80000   (अस्सी  हजार) 


3.हूरें -  (वेश्याएं)- 70000x  72=   5040000(  पचास  लाख  चालीस  हजार )

4-कुल जनसंख्या -5190000  (इक्यावन लाख नब्बे  हजार )

हमने  तो     मुसलमानों   की   जन्नत    का   क्षेत्रफल   और  जनसंख्या  सबके   सामने   प्रकट   कर  दी   है   ,  और  जो   लोग   इस     बात   को   झूठा    या   गलत    साबित   करने कोशिश    करेंगे    वह  पहले   इन  हदीसों   को  झूठा  साबित   करके  दिखाएँ   ,  जन्नत   नाम की  जैसी   कोई   जगह    है   या नहीं   हम   इस  विवाद   में  नहीं   पड़ते   ,  सभी   तथ्य   हदीसों   से   लिए   गए   हैं  ,
 बाक़ी  हमारे   प्रबुद्ध  पाठक  खुद  समझ   जायेंगे  , ऐसी   जन्नत   मुसलमानों   को   मुबारक   ,  हमारा  देश  जन्नत  से   बेहतर  है 

(298)

मुहम्मद समलैंगी नहीं पीडोफाइल थे !

इस लेख की पृष्ठभूमि   - शायद ही कोई ऐसा हिन्दू होगा जो  श्री कमलेश तिवारी  जी के बारे में नहीं  जनता   हो ,वह एक  कट्टर हिन्दू और भारत माता  के  सपूत   थे  ,अक्सर हमारी उन  से बात होती  रहती  थी  ,यह लेख हमने 27 अगस्त 2016 को तब  तैयार किया था  जब  हमें पता  चला  कि जरा   सी  गलती के कारन  वह  संकट में  पड़ गए  थे , जिस बात  के  कारण वह  फस  गए  थे हम इस लेख में वही बता  रहे हैं ,लेकिन पारिभाषिक  शब्द   अलग  है , इसलिए  आप लोग इस लेख को पूरा ध्यान  से पढ़िए  ऐसा निवेदन  है

कभी  कभी  इस्लाम   के बारे  में सही  जानकारी  नहीं  होने के  बावजूद बिना पुख्ता  सबूतों  के मुहम्मद  के  बारे में टिपण्णी  करना आफत मोल लेना जैसा  हो जाता  है  , यही  कमलेश  तिवारी   के  साथ  हुआ   है ,
  कमलेश तिवारी अखिल  भारत  हिन्दू  महासभा   के कार्यकारी  अध्यक्ष   है  , और ओजस्वी  वक्ता   हैं  , लेकिन  उन्होंने  जोश  में आकर दिनांक 12  दिसंबर 2015 को  मुहम्मद साहब  के बारे  में  एक  बयान  दे डाला  कि "मुसलमानों   के  नबी  मुहम्मद दुनिया   के  पहले समलैंगी थे " (Prophet Muhammad the first homosexual in the world.).कमलेश  जी ने यह   बात  फेसबुक  में भी  डाल  दी   थी  , और  जैसे  ही  यह  बात मुसलमानों  को  पता  चली  तो  वह दंगा  फसाद   करने लगे जैसी कि उनकी  आदत   है  ,उनको  तो  घर  बैठे ही  तोडफ़ोड़  का  मौका मिल   गया  , और  तिवारी  जी  पर   आई पी  सी (IPC )निम्न  धाराओं में केस   दर्ज   हो   गया  ,

1-Section 153-A (promoting enmity between groups on ground of religion and doing acts prejudicial to maintenance of harmony


2-Section295-A (deliberate and malicious acts intended to outrage religious feelings of any class by insulting its religion or religious beliefs


इस  जरा  सी  भूल  के  कारण  तिवारी  जी जेल  की सलाखों  के  अंदर  हो  गए  , वास्तव  में मुहम्मद समलैंगी  नहीं  थे  बल्कि  बाल  यौन  शोषक  थे  जिसे अंग्रेजी   में " A pedophile "   कहा  जाता  है .  वैसे  इन   दौनों   में  कोई  खास  फर्क   नहीं   है  लेकिन तकनीकी  दृष्टि  में   बहुत  अंतर   है  , इसे स्पष्ट  करने के  लिए दौनों  की  व्याख्या  दी   जा  रही   है  ,,


1-समलैंगिकता(Homosexuality ) पुरुषों    का  पुरषों   या   पुरषों   का युवाओं   के प्रति  वासनात्मक  आसक्ति  रखना  और  आपस  में प्रकृति  विरुद्ध  शारीरिक   सम्बन्ध  बनाना   जैसे  गुदा  मैथून (Sodomy)     इसे  अरबी  में  " लवातत -لواطت "  , फारसी   में " बच्चा बाजी- بچّه بازی " और   हिंदी  उर्दू   में  " लौंडे  बाजी  - لونڈےبازی "   कहते  थे  ,  शरीयत   में  इस कुकर्म  के   लिए   मौत   की  सजा   का  विधान   है  , और  ऐसा  कुकर्म  करने  वाले  व्यक्ति  को  समलैंगी    ( Homosexual )  कहा  जाता  है  , इस्लामी  किसी  किताब  में  मुहम्मद  को  समलैंगी   नहीं  बताया  गया

2-  पीडोफिलिया- (Pedophilia)- वयस्क  पुरुषों  का    बारह  तेरह  साल  के   साथ  वासना पूर्ण व्यवहार  करना , जैसे  उनके गुप्त अंगों   पर  हाथ  फिराना   या  सहलाना  और  चूमना     और   ऐसा  करके  उत्तेजित  होकर संतुष्टि   प्राप्त  करना  ,  और  ऐसा निंदनीय   काम   करने  वाले को   अंग्रेजी में " A pedophile   " कहते   हैं   ,  हिंदी में  इसका  कोई पर्यायवाची   नहीं है    लोगों  ने  इसके  लिए  बाल  यौन  शोषक   शब्द   गढ़   लिया  है .   मुहम्मद  एक पीडोफिल  थे ,  इसके  साबुत  में  दो  हदीसें  उपलब्ध   हैं


1-पहली  हदीस - इस  हदीस के संकलनकर्ता  का  नाम  "अबुल  कासिम   सुलैमान इब्न  अहमद इब्न अल तबरानी  - أبو القاسم، سليمان بن أحمد بن أيوب بن مطير اللَّخمي الشامي الطبراني، وسمي الطبراني  "  है   ,  इनका  जन्म 260  हिजरी  और मृत्यु 360  हिजरी   में  हुई   थी  , इनकी  हदीस  की  किताब   का  नाम "अल मुअजम अल  कबीर- المعجم الكبير
 "   है  ,  इस्लामी   जगत  में  इनकी  हदीस की  किताब  बहुत लोकप्रिय   है .यह  हदीस सुन्नी  मुसलमानों के पांचवें   खलीफा "मुआविया  बिन अबू  सुफ़यान -  معاوية بن أبي سفيان‎‎  " (602-680 CE )  ने  बयान  की  है  , जो  मुहम्मद  साहब  के  सहाबी (Companion )  और रिश्तेदार  भी   थे  , उन्होंने  जो  कुछ   देखा  था , वह  इस  हदीस  में दिया  जा  रहा  है   , 


روى أنه صلى الله عليه و سلم قبل زبيبة الحسن أو الحسين

"रूई इन्नहू सल्ललाह  अलैह  व् सल्लम किब्ल  जबीबतु अल  हसन औ  हुसैन "


अर्थ  - मैंने  देखा कि  नबी (pbuh  ) हसन  और  हुसैन   के  होंठ  और  जीभ को  चूस  रहे   हैं .


“I saw the prophet – pbuh – sucking on the tongue or the lips of Al-Hassan and Husein



رأيت النبي صلى الله عليه و سلم فرج ما بين فخذي الحسين و قبل زبيبته


"रायत  अन्नबी  सल्लल्लाह  अलैहि  व्  सल्लम फुर्ज   मा बैन फख्जी  अल हुसैन व्  किब्ल जबीबतहु "


अर्थ  - और  मैंने  देखा कि उन्होने    (रसूल ) ने हसन  की टांगें  फैला  कर उसके  लिंग  को चूमा


He (the prophet) put Husein’s legs apart and kissed his  penis



Hadith Number 16245, Volume Title: “
The Sayings of the Syrians,” Chapter Title: “Hadith of Mu’awiya Ibn Abu Sufyan”:



2-दूसरी  हदीस- इस  हदीस  के संकलनकर्ता  का  नाम " अबुल हसन      नूरुद्दीन अली  इब्न अबी बकर इब्न सुलैमान अबुल  हसन अल हैसमी -بو الحسن نور الدين علي بن أبي بكر بن سليمان الهيثمي "  है .इनका  काल  735AH 1335 – 807AH 1404 है  ,यह सुन्नी शाफ़ाई  मत  के  विद्वान्   थे ,इनकी  किताब  का  नाम "मज्म अल जवायद व्  मिम्ब अल  फ़वायद - مجمع الزوائد ومنبع الفوائد‎‎  " है.
इसके  अध्याय   9  में 299  वीं  हदीस है .

رأيت رسول الله صلى الله عليه و سلم فرج ما بين فخذي الحسين و قبل زبيبته

"रायत रसूलल्लाह  अलैहि  वसल्लम फुर्ज मा  बैन फख्जी अल हुसैन क़िब्ले  जबीतहु "

अर्थ - मैंने  देखा  कि अल्लाह  के रसूल  हसन टांगें  पकड़  कर  उसका  लिंग  चूम  रहे   हैं 


 English: -I saw the Messenger of Allah( pbuh )putting Husein’s legs apart and kissing his  penis.”


Majma al-Zawa’id, Ali ibn Abu Bakr al-Haythami, 299/9 مجمع الزوائد لعلي بن أبى بكر الهيثمي


मुस्लिम  विद्वान्  तबरानी कहते  हैं  की  यह  हदीसें  अच्छी  और  प्रामाणिक  हैं  "रेवात अल तबरानी इस्नादह  व्  हसन -  رواه الطبراني و إسناده حسن "Related by Al-Tabarani and it’s authentication is fully validated

 
3-लोग  मोहम्मद  को  धिक्कारते  थे 

जब    लोगों  को मुहम्मद   की  इस बुरी  आदत   के  बारे  में पता  चला  तो सामान्य  व्यक्ति  भी उनको  धिक्कारने    लगा   यह   बात   इस  हदीस  से सिद्ध  होती    है


، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ جَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ تُقَبِّلُونَ الصِّبْيَانَ فَمَا نُقَبِّلُهُمْ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَوَ أَمْلِكُ لَكَ أَنْ نَزَعَ اللَّهُ مِنْ قَلْبِكَ الرَّحْمَةَ ‏"‏‏.‏


" आयशा  ने  कहा कि  एक  बद्दू  ने   आकर  रसूल   से  कहा  तुम  तो बच्चों को चूमते   हो  .  लेकिन   हम  ऐसा  काम  नहीं  करते  , इस  पर  रसूल  ने कहा कि मैं  तेरे दिल  में दया  नहीं  डाल  सकता ,  इसके बाद अल्लाह  ने  उस  से दया  छीन  ली "

Narrated 'Aisha: A bedouin came to the
Prophet and said, "You (people) kiss the
boys! We don't kiss them." The Prophet said,
"I cannot put mercy in your heart after Allah
has taken it away from it."

Reference : Sahih al-Bukhari 5998
In-book reference : Book 78, Hadith 29
English) reference : Vol. 8, Book 73, Hadith 27


 इन सभी प्रमाणों   से  यही  सिद्ध   होता  है  की मुहम्मद मुसलमानों  के आखिरी  ऐसे  नबी  थे  जो पीडोफ़ाइल  थे  ,


नॉट  -   हमें  यह  लेख  तैयार  करने में  तीन  दिन  लगे  और  कई  किताबों  और  साइटों  से सबूत  जुटाए  हैं   , महत्त्व  पूर्ण   अरबी   वाक्यों  और  शब्दों  को  देवनागिरी  लिपि   में  भी  दे  दिया   है  ताकि किसी  प्रकार  की  शंका के  लिए  स्थान   नहीं   रहे  ,  और  यह  लेख  उन  लोगों  के  लिए मार्गदर्शन  है  ,जो  बिना सोचे  समझे   कुछ  भी   बयान  दे देते  हैं   और  कानून  के पंजे में  फस जाते  हैं  , हिन्दू  महासभा    वाले  ध्यान  रखें !



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