रविवार, 28 जून 2020

मुस्लिम महिला ब्लोगरों से सवाल

अभी तक  आपने पढ़ा    है कि भंडाफोडू   यानी मेरे विरुद्ध  कई मुस्लिम ब्लॉगर एकजुट हो गए थे  , और हमें जूठा  साबित करने के लिए तरह तरह के सवाल किया करते  थे  , लेकिन जब  यह लोग  असफल हो गए तो , इन लोगों ने मुस्लिम महिला ब्लॉगरों  को मैदान में उतार   दिया .हमने अपने ब्लॉग में दिनांक  11 मई  2010 को  एक लेख  पोस्ट किया  था जिसका शीर्षक था "मुहम्मद अपनी औरतों को नहीं मारते  थे  ?
इस बार लेख का जवाब देने  के लिए कई मुस्लिम महिला ब्लॉगर  भगवान कृष्ण  के बारे में अपमान जनक कमेंट करने लगीं  ,  उनमे एक महिला ब्लॉगर  का नाम "  आयशा बतूल " था  . यह नाम  देखते  ही हम समझ गए की यह कमेंट करने वाली मुस्लिम औरत  नहीं कोई  मुस्लिम  मर्द है जिसे इस्लाम का सही  ज्ञान नहीं  है  " क्योंकि  आयशा मुहम्मद  की पत्नी का नाम  है और " बतूल "मुहम्मद  की बेटी  फातिमा  का बचपन  का नाम  है  , इस तरह  से एक  ही स्त्री  पत्नी  और पुत्री  नहीं  हो  सकती  है  ,

कुछ दिनों पाहिले मैंने मुहम्मद की पत्नियों के बारे में लिखा था जिस पर मुस्लिम ब्लोगरों ने तो जवाब दिए थे .परन्तु उन्हों ने मुहम्मद को एक आदर्श और महान पुरुष बताकर उसकी तारीफ़ की थी और
इसके बाद मैं,उन मुस्लिम महिला ब्लॉगर से एक सवाल पूछना चाहता , जो इस्लाम और मुहम्मद की तारीफों में जमीन आसमान एक कर रहीं हैं,यदि उन्हें भी मुहम्मद जैसा पति मिल जाए जिसकी पाहिले से ही एक दर्जन पत्नियां हों,जो उनके ही बिस्तर पर ,उनके ही सामने कई औरतों और दासिओं से सम्भोग करता हो.और जब वह सम्भोग कर रहा हो तो,खुद अल्लाह एक रेफरी की तरह उसे कुरआन की आयातों के जरिये उसे गाईड करते हों.धन्य हैं ऐसे नबी और धन्य उनके मानने वाले.घटिया से घटिया वेश्या भी एक बार में बिस्तर पर एक ही ग्राहक बुलाती है ,और पर्दा डाल देती है .लेकिन मुहम्मद तो नबी है ,अल्लाह ने उनको छूट जो दे रखी है. वे कुछ भी करें. बताइये है किसी मुस्लिम लड़की में इतनी हिम्मत .है तो मेर ब्लॉग में अपनी टिपण्णी जरूर भेजें

यह  जवाब  और चुनौती पढ़  कर मुस्लिम महिला ब्लॉगर   ऐसी गायब हो गयी कि किसी ने मेरे ब्लॉग में कमेंट करने की हिम्मत नहीं  की 

(181/100)06/06/2010


शनिवार, 27 जून 2020

भंडाफोडू ब्लॉगकी सच्चाई का सबूत :जिहादी ब्लॉगरों में हड़कंप


हमारी यही नीति रही  है
,"हम अकेले ही चले थे , जानिबे मंजिल मगर  -
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया "

यह सन 2011 की  बात  है  उस समय  भंडाफोडू ब्लॉग के लेख पढ़ कर इस्लाम समर्थक   ब्लॉगरों  ने  हमारा विरोध  करने के लिए लखनऊ में  एक ग्रुप  बना लिया   था इसमें लगभग   50 ब्लॉगर  शामिल  थे  ,  जो  हम पर आरोप  लगाया करते थे  और प्रश्न किया करते  थे ,इनका उद्देश्य मुझे गलत साबित करके पराजित करना  थे  , जबकि इनके विरुद्ध   हम  अकेले  ही जवाब  दिया करते  थे , इस ग्रुप में अनवर जमाल  नामका  व्यक्ति अक्सर बहस  करता  था   हमारी इस बहस  के बारे  में गुरुवार, 11 नवंबर 2010को" pawan k mishra"(  डा.पवन कुमार मिश्र )नाम  के  बलोगर   ने   मेरे   बारे में  अपने ब्लॉग  (  दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan) में  लिखा  था .


बी. एन. शर्मा और अनवर जमाल की गदहपचीसी

'दंभिन निज मत कल्प करी प्रगट  किये बहु पंथ' 
आज से सैकड़ो साल पहले लिखी इस पंक्ति सार्थकता मुझे तब दिखी जब तथाकथित धर्म मर्मज्ञों के ब्लॉग पर आना हुआ. कहने की जरूरत नहीं है कि ये मर्मज्ञ द्वय कौन है. अभी बूझ नहीं पाए तो बताते चले ये स्वनामधन्य बी. एन शर्मा और अनवर जमाल है. जो दावा करते है कि उनके मतानुसार की गयी व्याख्याए ही संसार के अंतिम सत्य है.और जमाल  का  आरोप  है  ,
बी. एन शर्मा "इस्लामिक धर्मग्रथो के बारे में  लोगो को बताने में लगे है. और उनको मिल रही बेनामी टिप्पड़ियो  को देखा जय तो यह प्रतीत होता है कि इसमें से आधी टिप्पणी तो स्वयं शर्मा की है बाकी उन लोगो की है जो कुकर्म  करने की इच्छा मन में दबाये हुए है  किन्तु माहौल  बन रहा है. शर्मा कि तरफ ,
एक मंच मिलने से ये लोग अपनी भड़ास निकालने में लगे है. तुलसीदास जी का कथन है

जो कह झूठ मसखरी जाना। कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना।।

अनवर जमाल दावा करते है कि वैदिक धर्म का लेटेस्ट वर्जन इस्लाम है. 

 जरा जमाल बाबू की चतुराई देखो सनातन धर्म की थोड़ी सी तारीफ  करके पूरे सनातनियो को हिन्दुओ को परोक्ष रूप से मुसलमान बता रहे है. इन्होने उद्विकास के सिद्धांत का सहारा लिया है क्यों ना ले आखिर डाक्टर साहब का ज्ञान गजनवी और औरंगज़ेबों की परंपरा बढ़ने में सहायक नहीं होगी तो ये अपने आकाओं को क्या मुह दिखायेगे. जमाल ज़रा अपने गिरेबानो में झाँक कर देखो.
मुझे मालूम है नही देखोगे क्योकि ये बात तुम भी अच्छे से जानते हो तुम अपनी किसी भी किताब या मत कि पुनर्व्याख्या नहीं कर सकते यदि हिम्मत है तो किसी एक लाइन का विश्लेषण करो. सनातनी जब विद्वत्ता की पहली सीढ़ी पर चढ़ता है तो उससे भाष्य लिखने को कहा जाता है क्योकि
सनातन धर्म में सभी के मत को सामान महत्व दिया जाता है. जमाल बाबू
तुम्हारी यही जड़ता तुम्हारे पतन का कारण बनेगी.
कोई भी धर्म मनुष्य से ऊपर नहीं है. दुनिया में जो कुछ है वह इसलिए कि मानवमात्र का  अधिकतम कल्याण हो. इन अकल के अन्धो को ये नही दीखता कि जिसे ये सम्पूर्ण कहते है वो मात्र एक इकाई है
और अंत में
अयं निजः परोवेत्ति गणना  लघुचेतसाम
उदारचरितानाम ,वसुधैव कुटुम्बकम 

अर्थात यह मेरा है वह तेरा है  ऐसा सोचने वाले छोटी बुद्धि वाले है. उदार लोगो के लिए समस्त धरती परिवार है .


2-भंडाफोडू  ब्लॉग की सच्चाई  का सबूत 
जो   भी   लेखक  सोशल  मीडिया   ने   किसी   भी  गंभीर  विषय  पर  लेख  पोस्ट   करते    हैं   , वह  भली   भाँती    जानते  है  कि  बिना  पुख्ता  सबूतों    के   कुछ  भी  लिख  देने से  लेखक    को  अपमानित  होना  पड़  सकता   है   ,  फिर  इस्लाम   जैसे संवेदनशील विषय


  पर   लिखना  तलवार  की  धार पर चलने    जैसा  है  , क्योंकि   सब   जानते  हैं  की  लेख   में  ज़रा  सी  गलती  होने  पर  मुसलमान   तुरंत   उग्र   प्रतिक्रिया     करते है   ,  फिर भी  यह  जानते  हुए   भी  मैंने  2009  में  भंडाफोडू      नाम  से  ब्लॉग   बनाया  था  ,इसका  उदेश्य    किसी    की  आस्था   पर  चोट  करना    नहीं   बल्कि   इसलाम  संबधी   वह  बातें  उजागर करना  था  , इस्लामी  किताबों  में  मौजूद  है  ,  लेकिन     चालाक  मुल्ले  मौलवी  या तो  उनको छुपा देते हैं या उनके गलत  अर्थ   निकाल  कर   मुस्लिमों  को  एक  मदारी   की  तरह  नचाते  हैं  , 

और  जैसे  जैसे   भंडाफोडू     ब्लॉग  के  लेखों  की  लोकप्रियता  बढ़ने  लगी   ,  तो  मुस्लिम  ब्लॉगरों  में एक  प्रकार  से हडक़म्प  सा  मच  गया , यह  सन  2010  की   बात     है  ,  उन  दिनों  लखनऊ   में  मुस्लिम  बलोगरों  ने मिल  कर  " Association   "   बना      ली  थी   , जिनमे   कुछ  सेकुलर  भी   शामिल  थे  ,  इस एसोसिएशन    का  अध्यक्ष  '   अनवर  जमाल   "   था   , एसोसिएशन  के   प्रमुख  मुसलिम    ब्लॉगरों   के   नाम  इस  प्रकार  हैं ,

1-DR. ANWER JAMAL

2-सलीम अख्तर सिद्दीकी

,3-Saleem Khan

4-,Dr.Ajmal Khan.

5-अनवारुल हसन [AIR - FM RAINBOW 100.7 Lko]

.6-Ejaz Ul Haq

7-Javed Jaffri

8-EJAZ AHMAD IDREESI,

 9-Dr. Ayaz Ahmad,

10-Tausif Hindustani
-
11-,गुफरान सिद्दीकी
ह   लोग जाकिर नायक के गुर्गे थे ,और जाकिर की संस्था  इनको पैसा देती  थी 


इन  लोगों  ने  मिल  कर  मुझे   परेशान   करने  तरह  तरह  के   हथकंडे   अपना   लिए  थे  , कभी मेरे ब्लॉग  में   बेनामी   बन   कर  हिन्दू    ग्रंथों  में   गलतिया    निकालते  थे   , और उसका  जवाब  देने  को  कहते  थे  , कभी  कम्मेंट  में  अपशब्द   और   गालिया   देते  थे  ,  कुछ  तो  ऐसे  थे जो    ब्लॉग     बंद   नहीं   करने  पर  बुरा    नतीजा  भुगतने   की  धमकी   देते   थे  ,  वह  सोचते  थे  कि  शायद  ऐसा  करने  से  मैं   ब्लॉग  बंद  कर  दूंगा   , या  इस्लाम  के बारे में   लिखना   बंद  कर  दूंगा   ,
 लेकिन   मैं  अकेले  ही  निडरता  से   उनका   सामना   करता  रहा  ,  क्योंकि   मेरे  पाठक मेरा   हौसला  बढ़ाते   रहे  , जब   उन   लोगों  की  योजना  असफल   हो  गयी   तो  उन्होंने  एक  चाल  चली , और  कुछ  मुस्लिम   ब्लॉगरों  को मेरे   ब्लॉग   में   कॉमेंट  करने  ,  मुझ  से  सवाल  करने  और  उन  सवालों   का  जवाब   मांगने  पर  लगा  दिया  ,    यह  सभी      मुस्लिम    महिला  ब्लॉगर   मुस्लिम  ब्लॉगरों  की  पत्नियां   थी  ,,

उस  समय   के  एक ब्लॉगर  ने  इस  घटना   का  इन  शब्दों  में   वर्णन    किया  था

जनाब सनवर कमाल  पानी पी पी के चिल्ला रहे थे कि.... हम नहीं सुधरेगे .... ये गया बमगोला धरम क़ा  अब आग और भभकेगी अरे ये तो बात कम बन रही है ...

 ये गया दूसरा बमगोला औरतोवाला अब महामजा  आया (वैसे ये लेटेस्ट अजमाया तरीका है). खूब चिल्लपों मची.
मुंडे मुंडे मति  भिन्ना यही भिन्न भिन्न पूरे ब्लॉगजगत  में सुनायी दे रही है. एक बात और 2007  में जो गलती हुई थी उसे ये लोग बार बार दुहरा रहे है.
ऐसा लग रहा है कि गंगा क़ा पानी अब कचरे की झील से ज्यादा नहीं है.

 मै तो पहले बी. एन शर्मा से त्रस्त था अब तो लगता है ब्लोगरो में शर्मा जी की आत्मा प्रवेश कर गयी है.

 एक नया मुहावरा देखने को मिला "मै तुझे खुजाऊ तू मुझे खुजा "  अरे भाई  टिप्पणी   देने के माध्यम से यदि ब्लॉग विजिट हो तो उसमे क्या  बुराई है .
कुल मिला कर लब्बो लुआब यह है कि वंचित महसूस करने वाले लोग (असल में इन्हें चाहिए कुछ और तो ब्लॉग को ही माध्यम  बना रहे है) ब्लॉग जगत को गिद्धों की तरह नोच नोच कर खाए जा रहे है.
एक जगह की रोशनी किसी के घर के जलने से नहीं आ रही है. यह तो अमन क़ा पैगाम है.    शर्मा  जी के नाम एक शमशेर  मासूम जी का एक शेर

"मेरी हिम्मत को सराहो मेंरे हमराह बनो
मैंने एक शमा जलाई है अंधड़ो के खिलाफ"

अब किसी को इस बात से रंज होगा कि ये वो लाइन नहीं है ये है. भईया अपने में मस्त रहो ना कोई जरूरी  है कि मेरे लिए वो बात सही हो जो आपके लिए सही हो. व्यर्थ में विलाप किस हेतु?

नोट  -  भंडाफोडू   ब्लॉग  और   मेरे   बारे   में   दिनांक 9   जनवरी    2011 एक  निष्पक्ष  ब्लॉगर   ने अपने  ब्लॉग   में  यह   लिखा   था ,
 इस  घटना   का  उल्लेख  करके  मेरा उद्देश्य   आत्म  प्रशंसा  नहीं  ,   बल्कि   पाठकों  को    यह  बताना   है   की   यदि  प्रबुद्ध    पाठक   मेरा उत्साह   वर्धन  नहीं  करते  तो   मैं  अकेला   ही   इतने  विरोधियों     का  मुंह  बंद   नहीं   कर  सकता  ,  मेरा  प्रयास  सफल   हुआ    , इसका  ज्वलंत  प्रमाण  यह  है   की  उस  समय  मुस्लिम  ब्लॉगों   की  संख्या     47  थी , जो  दो  साल  में ही  घट कर 9 रह गयी   है . आप   चाहें   तो सर्च   करके पता   कर  सकते   हैं   .  दूसरा   प्रमाण    यह   है  कि  भंडाफोडू  ब्लॉग  और  इसी   नामके    फेसबुक    के  ग्रुप   में   मिला कर   आज  तक   496  लेख   हो  गए   हैं   ,लेकिन   आज  तक   कोई   भी  किसी   लेख   का  खंडन    नहीं   कर   पाया  . ऐसा नहीं  है कि  मेरे लेख  विरोधी   नहीं   पढ़ते   हों   ,  वह   लेखों  में  दिए  गए    प्रामाणिक     तथ्य  ,   अकाट्य    सबूतों  ,  और  तर्क   पूर्ण  उत्तरों के  कारण  कुछ    नहीं    कर  पाते,
 लेकिन   बड़े  दुःख   के  साथ  कहना  पड़ता  है   कि   मेरे  विरूद्ध  जो  काम  विधर्मी  नहीं  कर  सके   वह   काम    कुछ  अपने   लोग  ही   गुप्त  रूप  से  कर  रहे  हैं  , और  मेरी   बदनामी   फ़ैलाने  में  लगे हुए  हैं  ,  इस  से  मेरा  कुछ   बुरा  हो  या   नहीं   यह  तो  भविष्य   में  पता  चलेगा  ,  परन्तु  यह बात   निश्चित   है  कि हिन्दू  धर्म  के  विरोधी  फिर  से  सक्रीय  हो   जायेंगे  ,   क्योंकि  उनको   बाहर  से   भी आर्थिक     मदद   मिलती   है  .

 इसका निर्णय      सम्माननीय ,  समर्थकों     और   पाठकों  पर  छोड़ते   हैं
अगले भाग की प्रतीक्षा  करिये


 (297)-09/01/2011

शुक्रवार, 26 जून 2020

भंडाफोडू के लेखों से मुसलमानों में खलबली !

(यह लेख   सन  2014 में  तैयार किया गया था  , इसे पढ़ कर  आप  समझ जायेंगे कि इस्लाम जैसे विषय पर लिखने  से कैसी  कैसी  धमकियों    ,प्रलोभन और  गालियों   का सामना करना पड़ा  था  , और हमने सिर्फ  कुरान  की एक आयत  से विरोधियों    का सदा के लिए मुंह कैसे  बंद  कर  दिया   था )

हिंदी ब्लॉग जगत में भंडाफोडू एकमात्र ऐसा ब्लॉग है , जो विद्वेष रहित किसी की भावना को आहत किये बिना इस्लाम सम्बन्धी सत्य और तथ्य को उजागर करता आया है , क्योंकि सब जानते हैं कि मुसलमानों का उद्देश्य पूरी दुनिया पर इस्लामी हुकूमत कायम करना है , और इसके लिएवह कुछ भी कर सकते हैं ,चूँकि भारत एशिया में सबसे बड़ा हिन्दू देश है , इसलिए मुस्लिम देशों के पैसों से भारत में हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने का षडयंत्र चल रहा है , इस्लाम के दुष्प्रचार से हिन्दू युवा पीढ़ी पहले तो इस्लाम के प्रति आकर्षित होती है , फिर या तो सेकुलर बन जाती या फिर मुसलमान बन जाती है . और ऎसे गुमराह युवाओं को विभिन्न अपराधों और आतंकी कामों में लगा दिया जाता है

लेकिन जब भंडाफोडू ब्लॉग अपने तर्कपूर्ण लेखों से मुसलमानों की योजना पर पानी फेरने लगा तो , उनकी नजर में सबसे बड़ा दुश्मन बन गया . सब जानते हैं कि मुस्लिम प्रचारक हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए अक्सर हिन्दू ग्रंथों का ऐसा अर्थ प्रस्तुत देते हैं जिस से सिद्ध हो जाए कि हिन्दू वैदिक ग्रंथों में भी अल्लाह और मुहम्मद का उल्लेख है .

जाकिर नायक ऐसी धूर्तता में पारंगत है , कुछ समय पहले उसने दावा किया था क़ि भविष्य पुराण में मुहम्मद साहब को एक अवतार बताया गया है . स्पष्ट है क़ि ऐसा कहने के पीछे जाकिर की मंशा हिन्दू धर्म और इस्लाम से अनभिज्ञ हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराना ही था , इसलिए जब कुछ पाठकों ने हम से इस विषय पर कोई लेख देने का आग्रह किया तो गुरुवार, 25 सितंबर 2014 को भंडाफोडू ब्लॉग में एक लेख प्रकाशित किया गया , जो फेसबुक में भी दिया गया था . जिसका शीर्षक " महामद ( मुहम्मद ) एक पैशाच धर्म स्थापक ! "था .

यद्यपि उस लेख मे भविष्य पुराण का वही अंश ज्यों का त्यों दिया गया था जिसमे मुहम्मद का उल्लेख था . यहांतक लेख का शीर्षक भी भविष्य पुराण के श्लोकों से लिया गया था .

लेकिन जैसे हमेशा भंडाफोडू के हर लेख पर मुसलमान , गालियों और धमकियों की बरसात कर देते हैं . उक्त लेख पर भी ऐसा ही हुआ। जाकिर नायक के किसी चेले ने उस लेख पर फर्जी नाम से मुझे इस्लाम कबूल करने के लिए जो धमकी दी है , वह पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है चूँकि उस बेनामी ने रोमन अंग्रजी में जो कुछ कॉमेंट दिया है , वह हिंदी में भी दिया जा रहा है .
1- बेनामी का कॉमेंट

SURAJONE12 अक्टूबर 2014 को 8:22 am
YE SAB LIKHNE SE TUNE TAUBA NA KI AUR IMAAN NA LAYA TO INSHA ALLAH
BADTAR SE BADTAR MAUT AAYEGI TERI
TERI LAAS KO GIDHAD KHAYENGE JIS ME SE AISI BADBOO AAEGI KE KOI DUR SE BHI NAHI DEKHEGA.
BEIZZAT HOKAR MAREGA, TADAP TADAP KAR MAREGA,
QAYAMAT KE DIN SAKHT SE SAKHT AZAAB ME MUBTLA HOGA JO HAMENSHA HAMENSHA HOGA, JISSE BACHNA NAMUMKIN HOGA
JIS UNGLIYON SE TUNE LIKHA HAI WO CANCER ME MUBTALA HOGI AUR WO TUJHE BAHOT SAALO TAK BARDAST SE BAHAR DARD DEGI.
TU JAANWARO SE BHI BADTAR DUKH BHARI LAMBI ZINDAGI GUZAREGA.
MAUT MAGEGA LEKIN MAUT NAHI AAYGI... HARAAM KI AULAAD

"ये सब लिखने से तूने तौबा न की और ईमान न लाया तो , इंशा अल्लाह बदतर से बदतर मौत आएगी तेरी लाश को गिद्ध खाएंगे , जिस से ऐसी बदबू आएगी कि कोई दूर से भी नहीं देखेगा . बेइज्जत होकर मरेगा . तड़प तड़प कर मरेगा . क़ियामत के दिन सख्त से सख्त अजाब में मुब्तिला होगा , जो हमेशा हमेशा होगा , जिस से बचना ना मुमकिन होगा , जिन उँगलियों से तूने लिखा है ,वो कैंसर में मुब्तिला होंगी ,और वो तुझ्र बहुत सालों तक बर्दाश्त से बाहर दर्द देंगी , तू जानवरों से भी बदतर दुखभरी लम्बी जिंदगी गुजारेगा ,मौत मांगेगा लेकिन मौत नहीं आएगी .
हराम की औलाद "

2-भंडाफोडू की तरफ से जवाब

जनाब (SURAJONE) यानी बेनामी हजरत की खिदमत में गुजारिश , हुजूर आपने मुझे इस लेख के लिए बददुआ देकर अपनी बेअक़्ली का मुजाहिरा कर दिया है , क्योंकि आपकी इन बद दुआओं से लगता है कि आपने मुझे ही भविष्य पुराण का लेखक मान लिया है . जबकि आपको पता होना चाहिए कि भविष्यपुराण सैकड़ों साल पहले ही बन चूका था , इसलिए आपकी बददुआओं का मेरे ऊपर कोई असर नहीं होगा , काश आपका अल्लाह बिना सोचे समझे दूसरों पर झूठे इल्जाम लगा कर बद दुआ देना सिखाने की बजाये थोड़ी अक्ल भी अता कर देता कर देता .

रही बात ईमान लाने की तो , मैं ईमान कहाँ से लाऊँ , ईमान तो मुस्लिम दहशतगर्दों के कब्जे में कैद है , वह अपनी हरेक ऐसी नाजायज हरकतों को ईमान साबित करने पर आमादा है , जिसका हकीकी इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है . जनाब ईमान लफ्जों से नहीं आमाल से होता है .
आप मुझे जहन्नम के अज़ाब से डराने पहले बताइये कि , क्या अल्लाह और रसूल ऐसे ऐसे नामनिहाद मुस्लिमों को जन्नत भेजेंगे या जहन्नम , जिन्होंने अल्लाह की बनाई इस खूबसूरत दुनिया को बर्बाद करने में कोई कमी नहीं छोड़ी . बताइये जब अल्लाह जमीन पर जगह जगह धमाके और बिछी हुई लाशें देखेगा तो क्या ऐसे मुसलमानों को शाबाशी देगा ?

और आखिरी बात यह है कि आपने बिना सोचे समझे मुझे गाली देकर साबित कर दिया कि आप सच्चे मुसलमान नहीं हो सकते ,क्योंकि आप कुरान की इस आयात के खिलाफ काम कर रहे हो , जिस में अल्लाह के सच्चे बन्दे की खासियत बताई गयी है , और अगर आप कुरआन भूल गए हों तो हम बताये देते हैं , पढ़िए और अपने दोस्तों को पढ़वाइये ,

"وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا "
सूरा अल फुरकान - 25:63

"व् इबादुर्रहमान यमशूना अलल अर्ज हौना ,इजा खातबाहुमुल जाहिलूना कालू सलामा "

अर्थात - और रहमान ( अल्लाह ) के बन्दे तो वही हैं , जो धरती पर नम्रता पूर्वक चलते हैं , जब कोई भी उनसे असभ्यता से सम्बोधित करता है , तो वह उसपर भी सलाम भेजते हैं .

"true servants of the Most Gracious are [only] they who walk gently on earth, and who, whenever the foolish address them, reply with [words of] peace; ( 25:63)

WaAAibadu arrahmani allatheena yamshoona AAala al-ardi hawnan wa-itha khatabahumu aljahiloona qaloo salama

मुझे पता था कि जब भी मैं कभी सत्य को उजागर करूँगा , विरोधी मेरे लेखों खंडन नहीं कर पाने पर ऐसे ही अभद्र अशिष्ट कमेंट दते रहेंगे। मुझे इनका उत्तर देना भी आता है , लेकिन दुःख तो तब होता है कि कुछ हिन्दू भाई भी मेरे इस लेखन कार्य को मेरी आय का साधन मान लेते हैं . ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि जब तक हम विरोधियों की नीति और नियत के बारे में सही जानकारी प्राप्त नहीं कर लेते , केवल हिन्दू धर्म की तारीफ़ करने से हिन्दू धर्म नहीं बच सकेगा . हम अपना काम करते रहेंगे चाहे कोई साथ दे या नहीं।

पाठकों  के आग्रह पर हम  तीन  भागों में भंडाफोडू    ब्लॉग  का  उद्देश्य ,, संघर्ष  ,और   विजय का संक्षिप्त  इतिहास       देंगे    आप इसे अवश्य पढ़िए ऐसी विनती  है


(218)

गुरुवार, 25 जून 2020

अल्लाह के नाम शिकायती ईमेल !

अल्लाह मियाँ अस्सलामु अलैक ,
सबसे पहले तो हम आपसे इस बेअदबी के लिए माफ़ी मंगाते हैं ,कि हमने रिवाज के खिलाफ आपको "अस्सलामु अलैकुमالسلام عليكم " कि जगह "अस्सलामु अलैकالسلام عليك" कहा है .क्योंकि हमें आपके रसूल ने ही कहा था कि अल्लाह एक है .और अगर हम "अलैकुम عليكم" लफ्ज का इस्तेमाल करते तो आप एक कि जगह पूरी टीम माने जाते .आप तो अरबी की व्याकरण जानते ही होंगे .आपको पता ही होगा कि मुहम्मद इकबाल नामके एक आदमी ने भी आपसे इसी तरह शिकवा किया था .और उसी इकबाल ने पाकिस्तान की बुनियाद रखी थी .लेकिन आज मजबूर होकर एक काफ़िर मुल्क में रह रहे हैं .और इकबाल की तरह हम भी आपके दरबार में अपनी शिकायत पेश कर रहे है .और ईमेल कर रहे हैं .आप तो जानते हैं कि इकबाल के ज़माने में कंप्यूटर वगैरह नहीं थे .मुझे पूरा यकीन कि आपकी जन्नत में नेट का कनेक्शन जरुर लग गया होगा .
हमें इसलए फ़िक्र हो रही है कि इन काफिरों ने साइंस में इतनी तरक्की कर ली है कि कहीं यह लोग आपकी जन्नत पर कब्ज़ा न कर लें .वैसे इन काफिरों का यह भी कहना है कि उन्होंने सारे ब्रह्माण्ड में खोज की है लेकिन आपका ,आपके फरिश्तों ,और आपकी जन्नत का कोई साबुत नहीं मिला है .आप जल्दी से किसी फ़रिश्ते को भेजिए ताकि इन काफिरों का मुंह बंद हो जाये .हम आपसे वादा करते हैं कि हम हरेक दस कदम पर मस्जिदें बनवा देगे ,जिस से हमारा मुस्तकबिल महफूज रहे .और इस मुल्क के काफ़िर और मुशरिक हमेशा हमसे डरते रहें ,क्योंकि हम इन्ही मस्जिदों में हथियार छुपाते है .
लेकिन हमारी कुछ समस्याएं है जो हमारी जिंदगी से जुडी हुई है .आप इसे हमारी शिकायत भी समझ सकते है .आपने कुरान में कहा है ,
"सभी मुशरिक नापाक हैं "सूरा -तौबा 9 :28 
इसलिए हम इन मुशरिकों के स्कूलों में न तो अपने बच्चों को पढ़ाते और न उनके यहाँ काम करते हैं .हम अपना निजी धंदा करने पर मजबूर हैं ,जैसे नकली नोट छापना ,स्मगलिंग ,और नशे का व्यापर वगैरह ,हमारे बड़े बच्चे भी इधर उधर लूट ,और गाड़ियों की चोरी करके घर का पेट भर रहे है .इतना होने पर भी हमारा और हमारे दस बच्चों को खाना मुश्किल से मिलता है . आपने अपनी किताब कुरान में लिख दिया है ,
"जिस पर अल्लाह के आलावा किसी और का नाम लिया गया हो वह हराम है "
सूरा -बकरा 2 :173 
इसलिए हम इन काफिरों और मुशरिकों द्वारा बनाई गयी किसी चीज को नहीं खाते है ,कि पता नहीं उस पर किस का नाम लिया हो .हम तो बस सिर्फ हलाल गोश्त ही खाते है .अबतक हमने 7 ऊंट ,32 गाय बैल .244 बकरे और हजारों मुर्गे मुर्गियां हजम कर ली हैं .इस से हमारे पूरे बदन से जानवरों की बदबू निकलती रहती है .और हमें इत्र लगाना पड़ता है .हमारी इन्हीं गन्दी आदतों और अपराधी चरित्र के कारण लोग हमसे नफ़रत करते हैं .
इसके बावजूद हम अपने आसपास के लोगों को गुमराह करने के लिए आपकी कुरान की यह आयत सुना देते हैं . 
"जो इस्लाम के अलावा कोई दूसरा धर्म पसंद करेगा ,तो उसे कबूल नहीं किया जायेगा ,और ऐसा व्यक्ति आखिरत में घाटा उठाने वाला होगा "
सूरा -आले इमरान 3 :85 
कभी हमारी यह चाल सफल हो जाती है ,और कुछ अकल के अंधे इस आयत की बात को सच समझ बैठते हैं ,और हमारे जाल में फंस जाते हैं .फिर हम ऐसे लोगों को जिहाद के काम में लगा देते है अपना धर्म छोड़कर मुसलमान बनाने वाले लोग हमारे किये काफी उपयोगी होते हैं ,क्योंकि जब भी हम ऐसे लोगों से कहीं विस्फोट करवाते हैं ,तो यही लोग फंस जाते हैं .और हम साफ़ बच जाते है .
अल्लाह आप तो जानते हैं कि इन काफिरों के पास धन कि कोई कमी नहीं है ,और हमारे मुल्क में इन्ही काफिरों की सरकार है .जो हमारे वोटों की खातिर कुछ भी कर सकती है .लेकिन बिना दवाब के यह काफ़िर सरकार आसानी से कुछ नहीं देती .इसलिए हम कुरान की इस आयत का पालन करते हैं ,
"और कुछ ऐसे भी लोग हैं ,जिनके पास धन दौलत का ढेर है ,और अगर  तुम उनसे  मांग   करोगे तो वह दे देंगे ,लेकिन जब तक तुम उनके सरों पर सवार नहीं हो जाओ "
सूरा -आले इमरान 3 :75 
अल्लाह हम आपके इसी हुक्म का पालन करते हुए इस काफी सरकार से रोज कोई न कोई मांग करते रहते हैं .और सरकार को कंगाल करने में लगे रहते हैं .आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि सेकुलर नामके कुछ मुशरिक हमारा पूरा समर्थन करते हैं ,और हमारी हरेक नाजायज मांग को भी जायज साबित कर देते है ,यही नहीं जब भी हम कोई भी अपराध या बम विस्फोट कर देते हैं यह सेकुलर लोग दूसरे लोगों पर आरोप लगा देते है ,
हम तो इस मुल्क से सभी गैर मुस्लिमों का सफाया करना चाहते है .चाहे इसके लिए कितने भी गैर मुस्लिमों की क़ुरबानी क्यों न देना पड़े .हम इस्लाम के लिए कुछ भी कर सकते है ,अगर मौका मिलेगा तो इन सेकुलर लोगों को भी ठिकाने लगा देंगे ,यह कौन से हमारे वफादार हैं .यह भी सिर्फ सत्ता के लालची हैं .लेकिन आपने एक आयत ऐसी भेज दी है जो हमें समाझ में नहीं आ रही है ,कि हम क्या करें ,आपने कुरान में यह क्यों लिख दिया ,
"कोई जीव बिना अल्लाह की मर्जी के ईमान नहीं ला सकता ,और अल्लाह ही है जो लोगों पर कुफ्र और शिर्क की गन्दगी डाल देता है "
सूरा -यूनुस 10 :100 
इस आयत ने हमारे इरादों पर रोक लगा दी है .अब लोग आपकी कुरान पर भी शक करने लगे हैं .कुछ लोग तो यह भी कहते है कि,
"हम तब तक कभी ईमान नहीं लायेंगे ,जब तक कि वैसी ही किताब हमें नहीं दी जाये ,जैसी अल्लाह ने दूसरों के रसूलों को दी थी "
सूरा -अल अनआम 6 :125 
अल्लाह ,अपने तो किताबों प्रेस ही बंद कर दिया ,और न ही आपका कोई फ़रिश्ता ही नजर में आया ,हम लोगों को कैसे समझाएं . और अगर हम लोगों के सवालों का सही जवाब देते हैं तो हमें आपके इस्लाम की पोल खुलने का डर लगता है .
आजकल साइंस का जमाना है ,बच्चा बच्चा होशियार हो गया है जब कोई तर्कपूर्ण सवाल करता है ,तो हमारी हालत ऐसी हो जाती है ,
"तुम ऐसी बातें न पूछो जो यदि खोल दी जाएँ तो खुद तुम्हे ही बुरा लगेगा .इसलिए तुम्हें सावधान रहना होगा "
सूरा -मायदा 5 :101 
इसीलिए जब भी कोई हम से इस्लाम के बारे में कोई सवाल करता है ,तो हम निरुतर हो जाते हैं ,और दूसरे मजहब की बुराइयाँ निकालने लगते है ,फिर जब इस से भी काम नहीं चलता तो हम गालियों पर उतर जाते है .क्योंकि हम अच्छी तरह से जानते हैं की अगर हम लोगों के सवालों का सही जवाब दे देंगे तो उसका उल्टा ही नतीजा होगा .आप चाहें तो अपने रसूल से पूछ कीजिये ,उन्हीं ने कहा है ,
"तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए ,तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए "
सूरा -मायदा 5 :102 
इसीलिए हम इस्लाम के बारे में किसी प्रकार के सवाल जवाब से बचते हैं .इस से वक्त की बर्बादी है .वैसे भी हम अपनी कमजोर अकल पर जोर नहीं डालना चाहते .वाद विवाद और शाश्त्रार्थ तो यह काफ़िर हिन्दू किया करते हैं ,हमें तो अपने रसूल की यही नीति पसंद है ,जो कुरान में है ,
"और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये ,तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना ,और इस तरह उनको कुचल देना "
सूरा -मुहम्मद 47 :4 
अल्लाह मियां हम आपको भरोसा दिलाते है ,और कसम खाते हैं कि इस दुनिया को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ,आपको फरिश्तों ने खबर भेज दी होगी कि .पूरा अरब बर्बाद होने जा रहा है .मुसलमान आपस में ही लड़ रहे हैं .मुझे डर है कि यह झगडा आपकी जानत तक न पहुँच जाये .क्योंकि मुसलमान जहाँ भी हों लड़ाई जरुर करते हैं आपनी हूरों को छुपा दीजिये ,गदाफी आने वाला है और उसे जन्नत में महिला बोडी गार्ड की जरुरत पड़ेगी .
लिखना तो बहुत कुछ है लेकिन यहाँ समय की कीमत होती है ,
हमारा मेल मिलते ही जवाब जरुर भेजिए ताकि हम जिहाद की नयी जोजनाएं बना सकें .
आपके खिदमतगार .

फ़सादुद्दीन  अहमद  खुराफाती ,अब्दुल माकिर   बाबरी ,जलील तारीकी

(87/83)-02/10/2011

बुधवार, 24 जून 2020

इस्लाम का शान्तिसंदेश ?

( इन  दिनों  मदारी बाबू   नामका एक   क्षद्म  जिहादी   राम कथा के बहाने लोगों को पहले तो इकठ्ठा कर लेता है  ,फिर कथा की जगह  इस्लाम  का प्रचार  करने   लगता  है  . इस धूर्त ने यह भी कहा  की वैदिक  सनातन  धर्म ग्रंथों में ऐसा संशोधन  कर  देना चाहिए जो इस्लामी  तालीम के अनुकूल  हो   , इसलिए  हम यह  अपना  6 /10 /2011 का पुराना  लेख  फिर  से पोस्ट  कर रहे  हैं  ताकि लोग  इस्लाम  की  असलियत  जान  जाएँ ,)

अक्सर मुसलमान यह दावा करते रहते हैं कि इस्लाम का उदेश्य विश्व में शांति फैलाना है .क्योंकि अरबी भाषा में इस्लाम का अर्थ शांन्ति ही है .मुसलमान यह भी दावा करते हैं कि उनका अल्लाह बड़ा दयालु और मेहरबान है ,और उसने कुरान में शांति के उपदेश दिए है .
मुसलमानों के ऐसी ही लुभावनी और झूठी बारों में आकर इस्लाम को जाने बिना ही सीधे साधे लोग इसे सच समझ लेते हैं .क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि जो इस्लाम के बारे में मुसलमान कहते हैं सब उनकी कपट नीति है .जिसका उद्देश्य अपने दुष्ट ,क्रूर ,आतंकी ,और अमानवीय कुकर्मों पर परदा डालना है.
इसके लिए मुसलमान अक्सर यह चालाकी करते हैं कि ,जब भी उनकी किताबों में कोई बुराई बताई जाती है ,तो वह उसे छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने अपनाते हैं ,जैसे यह हदीस गलत है ,इसका अनुवाद सही नहीं है ,या हम इसे नहीं मानते .ऐसा ही 7 अक्टूबर 2011 को 11 .47 पर 'शफीक " नामके व्यक्ति ने अपनी टिपण्णी इस प्रकार से कहा था "आप कुरान से हवाले दीजिये ,हदीसें तो बाद में बनी थी ,और विश्वास के योग्य नहीं है " शफीक की ऐसी दलील को तर्कशाश्त्र में "लंगड़ी दलील ( Lame Excuse ) कहा जाता ,इस से शफीक और मुसलमान इस्लाम के आतंकी रूप को नहीं छुपा सकते . विश्व का कोई भी समुदाय युद्ध नहीं चाहता .अगर किसी कारण से युद्ध भी होजाता है ,तो शांति बनाने का प्रयास करता है . और यही कमाना करता है कि भविष्य फिर कोई युद्ध नहीं हो .लेकिन मुसलमानों का अल्लाह अपनी किताब कुरान में मुसलमानों को सदा लड़ते रहने की शिक्षा देता है .और उस शिक्षा पर अमल करके मुसलमान सदैव निष्कारण लड़ते रहते हैं ,और निर्दोष लोगों की हत्या को अपना धार्मिक फर्ज मानते है .अज जितने भी आतंकवादी हमले हो रहे हैं ,वह अल्लाह के उस आदेश के कारण है ,जो उसने कुरान में दिए हैं .
चलो हम कुरान के हवाले से ही इस्लाम को बेनकाब करते है ,इसके थोड़े नमूने देखिये -
1 -लोगों को लड़ाई के लिए उभारो 
"हे रसूल तुम इमान वालों को हमेशा लड़ाई के लिए उकसाते रहो "सूरा -अल अनफ़ाल 8 :65
2-आसपास में अशांति फैलाओ 
"हे ईमान वालो तुम अपने आसपास के गैर मुस्लिमों से युद्ध करते रहो "सूरा तौबा 9 :123 
3-बिना कारण लड़ते रहो 
"तुम पर हमेशा युद्ध करते रहना फर्ज है ,चाहे ऐसा करना तुम्हें अप्रिय क्यों न लगे "
 सूरा -बकरा 2 :216 
4-अल्लाह से बड़ा मुसलमान का डर 
"लोगों के सीनों में अल्लाह से बढ़कर तुम्हारा भय होना चाहिए ,क्यों कि लोग इसके बिना नहीं मानेगे "
सूरा -अल हश्र 59 :13 
5-लोगों के घर उजाड़ दो 
"अल्लाह ने उन लोगों के दिलों में इतनी दहशत बार दी कि वह डर के मारे खुद मुसलमानों के हाथों अपने घर उजड़वाने लगे ,ताकि बाकी लोग उनसे शिक्षा ग्रहण कर सकें "सूरा -अल हश्र 59 :2 
6-लड़ाई इमान की निशानी है 
"जो भी लोग ईमान लाते हैं ,वह हमेशा अल्लाह की राह में लड़ते रहते हैं " सूरा -निसा 4 :76 
7-जबरदस्ती अपनी शर्त मनवाओ 
"जो लोग तुमसे संधि नहीं करना चाहें ,तो उनको जहाँ पाओ ,पकड़ो और उनका वध कर दो .यह ऐसे लोग हैं ,जिन पर तुम्हें पूरा अधिकार दिया गया है " 
सूरा -निसा 4 :91 
8-अल्लाह डराता रहे तुम मारते रहो 
"मैं काफिरों के दिलों में भय पैदा करता हूँ ,और तुम उनकी गर्दनों पर वार करते रहना ,और उनकी हड्डियों के हरेक जोड़ पर चोट करते रहना "
सूरा -अल अनफ़ाल 8 :12 
9-फिरौती लेकर भी अहसान जताओ
"जब भी तुम्हारी गैर मुस्लिमों से मुठभेड़ हो जाये तो पहले उनकी गर्दने काट देना ,यदि नहीं कर सको तो उनको बंधनों में कैद कर लेना .फिर उन से फिरौती लेकर कहना कि देखो यह तो तुम्हारे ऊपर हमारा बड़ा अहसान है " सूरा -मुहम्मद 47 :4 
10-लड़ना भी एक व्यापार है 
"जो लोग इस सांसारिक जीवन के बदले में आखिरत का सौदा करना चाहते हैं ,तो उन्हें चाहिए कि वह हमेशा अल्लाह के नाम पर युद्ध करते रहें .चाहे वह युद्ध में मारे जाएँ ,या जीत जाएँ ,उन्हें बड़ा प्रतिदान मिलेगा ."
सूरा-निसा 4 :74 
यह तो थोड़े से नमूने हैं ,इन से लोगों को पता चल जायेगा कि मुसलमान आतंकवाद क्यों फैलाते रहते हैं ,और बिना कारण निर्दोष लोगों की हत्याएं क्यों करते रहते है .कुरान में ऐसी ही आयतों की भरमार है .प्रसिद्ध समाजशाश्त्री और मानव अधिकार की कार्यकर्ता "एम्बर पवालिक Amber Pawlik " ने कुरान की सभी आयतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया है ,जिसका निष्कर्ष दिया जा रहा है -
11-कुरान की आयतों का विश्लेषण 
1 .काफिरों के विरुद्ध - 52 .9 %
2 - अल्लाह के बारे में -17 .61 %
3 .ईमान के बारे में -14 .7 %
4 .आखिरत के बारे में -11 .8 
5 .छोटे अपराधों के बारे में -3 .4 % 
6.औरतों के अधिकार -3 .0 %
जैसे लोग जब चावल पकाते हैं ,तो बर्तन से कुछ चावल निकाल कर समझ लेते हैं कि वह पक गए हैं कि नहीं .इसी तरह कुरान की इन कुछ आयातों को पढ़कर लोग कुरान के बारे में सब समझ जायेंगे .इस से बड़ा और क्या झूठ हो सकता है कि मुसलमान ऐसे जालिम अल्लाह को रहमान और रहीम कहते हैं .जो लोगों को हत्याएं करने को उकसाता हो .
इन मुसलमानों का कुतर्क देखिये जो बड़ी बेशर्मी से कहते हैं ,कि जब वह किसी जानवर को हलाल करते हैं ,तो जानवर को कोई दर्द या तकलीफ नहीं होती है .
12-हलाल में जानवर को तकलीफ नहीं होती 
सब जानते हैं कि मुसलमान ईद के समय लाखों मूक जानवरों को बेरहमी से अल्लाह के नाम पर काट देते हैं .और जानवर के गले की मुख्य धमनी थोड़ी काट कर छोड़ देते हैं ,ताकि खून बहने से जानवर तड़प तड़प कर मर जाये .इस क्रूर विधि को हलाल करना कहा जाता है .मुहम्मद ने यह विधि मुसलमानों को हिंसक ,और निर्दय बनाने के लिए बनायीं थी .
फिर भी जकारिया नायक इस विडियो में यह दावा कर रहा है कि हलाल करते समय जानवर को तकलीफ नहीं बल्कि मजा आता है .मेरा तो बस इतना ही कहना है ,कि इस बात की जाँच करने के किये जकारिया नायक या किसी मुल्ले को हलाल किया जाना चाहिए .विडियो देखिये -

c Way of Slaightering Animals, is it Really Brutal

http://www.youtube.com/watch?v=YuoaqAq_EV0

सब जानते है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण देने की कोई जरुरत नहीं है .अगर अपराधों का सर्वे किया जाये तो मुसलमानों में सिर्फ दो प्रतिशत शरीफ होंगे .वह भी कानून के भय से शरीफ बन गए होंगे .एक न एक दिन सारी दुनिया को यह सत्य स्वीकार करना होगा .चूँकि भारत इस्लामी आतंक से सबसे अधिक पीड़ित है उसमे भी जानबूझकर हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है .इसलिए हमें निस्संकोच कहा चाहिए ,
"इस्लाम शांति का नहीं आतंक का धर्म है !
नोट -हमारा  सभी पाठकों  से निवेदन है कि जहाँ  भी मदारी बाबू    या इस जैसे  जिहादी  मानसिकता वाले  लोगों   की   कथा  हो इस लेख  के  प्रिंट  करा  कर लोगों  में वितरित   करा  दिया करें , हमारा दवा  है कि दुनिया का कोई भी मुस्लिम विद्वान् इस लेख में कोई गलती नहीं निकाल सकेगा  , क्योंकि  यह कुरान  पर आधारित  है  
(87/80)

मंगलवार, 23 जून 2020

इस्लामी जिहाद के दो नए रूप !

जो लोग अज्ञानवश   इस्लाम  को  भी   धर्म  समझ   लेते  हैं  ,और  खुद को सबसे बड़ा सेकुलर    साबित  करने के लिए इस्लाम  और हिन्दू धर्म  की  समानता  की  वकालत   करते रहते हैं   ,उन्हें  पता  होना  चाहिए कि  इस्लाम  में  जिहाद के  नाम  पर ऐसे   कुकर्म   भी   जायज हैं   , जिन्हें  करने पर  शैतान   भी  मना   कर  देगा  ,जिस समय   भंडाफोडू   ब्लॉग  में  लव्  जिहाद   के  बारे में  लेख प्रकाशित   हुआ था  , तो  उसकी  टिप्पणी  पर   हमारे एक  जागरूक  पाठक "smmalusare     "  ने  दिनांक    8  फरवरी  2010  को इस्लाम   के  जिहाद  का  ऐसा  घिनावना   और  निंदनीय  रूप  प्रस्तुत  करते हुए  जो  जानकारी  दी  थी   ,  वह  उन्हीं  शब्दों   में  ज्यों  की  त्यों   दी   जा रही  है  , ताकि  लोगों  के दिमाग से इस्लाम   का रोग निकल जाये  , ध्यान  से पढ़िए  ,

इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद ( अथवा लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद , (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा).

इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेन प्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे शादी कर लेता है. शादी के बाद बच्चे पैदा करके उसे सेक्स स्लेव्ह बनाकर अपने दोस्तो, रिश्तेदारों को नज़राने के रुप में पेश करता है. हिंदू लडकी झाँसे में आ भी जाए, किंतु अगर उसके पालक अगर समय रहते जागरुक हुए तो लिंग जिहादी को पुलिस के फटके पड़ने की संभावना तो शत प्रतिशत. उपर से कानूनी सजा मिलना अलग और 5-6 साल जेल की चक्की पिसना नसीब में.

लेकिन सबसे खतरनाक है गुदाजिहाद. जी हाँ. यह इसलिए बहुत खतरनाक है की, गुदा जिहादी जबतक आपके करीब ना आए और स्वयं को बम से ना उडा़ दे, आप समझ ही नही सकेंगे की वह एक गुदा जिहादी था (अगर आप की मौत ना हुई हो और बच गए या धमाके में अपाहिज हुए, तो.) होता क्या है कि, मुस्लिम कट्टरवादी किसी गरीब मुस्लिम परिवार के 12-15 साल के बच्चे को बहला फुसलाकर, उसका दिमाग ब्रेनवाश करके तथा उसके माँ-बाप को खासी रकम देकर अपने साथ कर लेते हैं. बाद में उसके दिमाग में दीने इस्लाम और जिहाद की बातें इतनी ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं कि, वह पुर्णरुपेण (सर से पाँव तक) जिहादी बन जाता है. और ऐसा बने भी क्यों ना? क्योंकि कुरान में तन, मन और धन से जिहाद करना जो सिखाया है, जी हाँ जिहाद अपने तन (शरीर), मन (दिमाग) तथा धन (पैसे) से करो. अब 12-15 साल के लड़के के पास ना तो मन (दिमाग) होता है और ना ही धन (पैसा). तो उसके पास जिहाद के लिए बचा क्या? केवल अपना तन (शरीर). और कुरान में यह भी लिखा है की अपने अंगप्रत्यंग (शरीर के सारे भागों से) जिहाद करना फर्ज है. तो इस जिहादी बच्चे के पास बचा क्या? सिर्फ गुदा. और शातीर कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं. पहले उस बच्चे से गुदामैथुन करके अपनी हवस को शांत करते है और साथ ही तबतक उसकी गुदामैथुन करते है जबतक की उसकी गुदा इतनी चौड़ी ना हो जाए कि उसमें आर.डी.एक्स. तथा डिटोनेटर घुस जाएँ. एक बार गुदा के अंदर आर.डी.एक्स., डिटोनेटर वैगराह विस्फोटक सामाग्री फिट कर दी जाये, बाद में उसे रिमोट कंट्रोल से जोडकर उसका रिसिव्हर गुदा जिहादीके पिठ पर बाँध देते हैं. (पिठ पर बाँधने से गुदा जिहादी उसे छु नहीं सकता. और ऐसा इसलिए करते हैं की शायद आगे जाकर गुदा जिहादी बगावत करें तो भी उसके हाथ पिठ में बँधे रिसिवर तक नां पहुँचे और कट्टरपंथियों का उसे विस्फोट करने का अंजाम पूरा हो जाए) आगे गुदा जिहादी किसी भी भिड़भाडवाली जगह पर पहुँच गया तो उसे कट्टरपंथी अपने रिमोट कंट्रोल से उडा देते हैं.
इसलिए प्रिय भारतीय नागरिकों, अपने आप को सँभालो. मुसलमानों की बस्तियाँ अपने पास ना बनने दें. मुस्लिम युवकों से सदैव सावधान (दोस्ती बनाने का केवल बहाना करें, ना की सचमुचके दोस्त बन जाएँ). अपने नजदिक किसी 12-15 साल के मुसलमान बच्चे को ना आने दें. (हो सकता है वह शायद गुदाजिहादी हो. क्या भरोसा?) अपनें बच्चों को मुसलमान बच्चों के साथ मेलमिलाप नां करने दें और उन्हें हमेशा दूर रखें. सदैव हिंदू सभ्यता का सम्मान, आदर करें. हिंदूराष्ट्र का अभिमान रखें.फिर भी मुसलमान  कहते हैं  कि  जिहाद   का   मतलब जुल्म  का  विरोध   करना  है , लानत  है  ऐसे जिहाद  पर और थू है ऐसे इस्लामी विचार  पर 
जय हिंदूराष्ट्र 

Is Sodomy The New Jihadi Training Method?

https://www.youtube.com/watch?v=jaheeT4rTR4

(206)-03/09/2014

रविवार, 21 जून 2020

रसूल की अंतिम चिंता और अंतिम इच्छा !!

यह  एक  अटल सत्य   है  कि सबको  एक  न एक  दिन  मरना  होगा  , चाहे  कोई  कितना  बड़ा  महापुरुष  , अवतार  , या  नबी   क्यों   न हो   , लेकिन  अक्सर  देखा गया है  कि  जब बड़े से बड़े   अपराधी   ,और   नास्तिक  के   मौत   का  समय   आने  लगता  है  तो  वह ईश्वर   को याद   करने  लगता  है   , और उसके   मन  से  शत्रुओं  के प्रति  नफ़रत   समाप्त   हो  जाती   है   , अपने अंतिम  दिनों  लोग अपने  आश्रितों    की  चिंता  करने   लगते  हैं  , लेकिन अल्लाह के  प्रिय और  अंतिम रसूल की  बात सबसे  निराली  थी   , लगभग  13 -14  दिनों   की घातक  बीमारी  के  कारण सोमवार केदिन इस्लामी  महीने  सफर   29  तारीख   हिजरी  सन 11 को  उनका  देहांत   हो  गया  था  , इन  हदीसों  में   उनकी   मौत  से  एक सप्ताह  से  पहले  की बातें  दी  गयी  हैं ,  , ऐसी   गंभीर  बीमारी  की  हालत   में   उन्होंने    न  तो अल्लाह  को याद  किया और  न  अपने अनुयाइयों  के बारे में  चिंता  प्रकट  की थी  , बल्कि उनको सबसे  चिंता     यही  थी  कि  कल रात  को अपनी  किस  पत्नी के  साथ  सोयेंगे  ,

1-मरते समय  रसूल  की चिंता 

"आयशा   ने कहा  की  जानलेवा   बिमारी  की  हालत  में रसूल  अपनी पत्नियों  से  पूछते  थे  कि मैं  कल   कहाँ ठहरूँगा ?और मैं   कल कहाँ   रहूँगा ? इस पर   रसूल    ने आयशा   की  तरफ  देखा , आयशा  ने कहा  उस  दिन   निय्यमानुसार  मेरी   बारी  थी  , इस पर  पत्नियां   बोलीं आप  जिसके  साथ  चाहें  रह  सकते  हैं  , तब  रसूल   मेरे  ही  घर  में  ठहर  गए  , और   वहीँ   मर  गए  , अल्लाह ने  उनको  ऐसी   हालत में  उठा लिया जब  उनका  चेहरा  मेरे  स्तनों  के बीच   था  ,और उनके   मुंह  से  निकली  लार  मेरी  लार  से   मिल  रही  थी  " 

، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَسْأَلُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ ‏ "‏ أَيْنَ أَنَا غَدًا أَيْنَ أَنَا غَدًا ‏"‏‏.‏ يُرِيدُ يَوْمَ عَائِشَةَ، فَأَذِنَ لَهُ أَزْوَاجُهُ يَكُونُ حَيْثُ شَاءَ، فَكَانَ فِي بَيْتِ عَائِشَةَ حَتَّى مَاتَ عِنْدَهَا‏.‏ قَالَتْ عَائِشَةُ فَمَاتَ فِي الْيَوْمِ الَّذِي كَانَ يَدُورُ عَلَىَّ فِيهِ فِي بَيْتِي، فَقَبَضَهُ اللَّهُ، وَإِنَّ رَأْسَهُ لَبَيْنَ نَحْرِي وَسَحْرِي، وَخَالَطَ رِيقُهُ رِيقِي‏.‏  "


"Narrated `Aisha:
that during his fatal ailment, Allah's Messenger (ﷺ), used to ask his wives, "Where shall I stay tomorrow? Where shall I stay tomorrow?" He was looking forward to Aisha's turn. So all his wives allowed him to stay where he wished, and he stayed at `Aisha's house till he died there. `Aisha added: He died on the day of my usual turn at my house. Allah took him unto Him while his head was between my chest and my neck and his saliva was mixed with my saliva."


Bukhari-Vol. 7, Book 62, Hadith 144

रसूल को  ऐसी चिंता  इसलिए  हो  रहीथी  , क्योंकि  उनकी  11 पत्निया  और  कई  रखेंलें  थी  , जिनके साथ सहवास  की बारी  तय  करने के लिये  उन्होंने अनोखी तरकीब  निकाल  ली थी  ,

2-लाटरी से सहवास की बारी 

आयशा ने कहा  कि रसूल  लाटरी (  أَقْرَعَ )   निकाल  कर  औरतों  की  बारी  तय  करते  थे  ,और  जिस  पत्नी  के  नाम   लाटरी  निकलती थी  वह रसूल के साथ  सोती  थी  , एक  बार  सौदा  का नाम  निकला  लेकिन  उसने रसूल  को खुश  करने के  लिए  अपनी   बारी  ( Turn  )    आयशा  को दे दी "

Narrated Aisha: Allah's Apostle used to draw lots among his wives and would take with him the one on whom the lot fell. He also used to fix for everyone of his wives a day and a night, but Sauda bint Zam'a gave her day and night to 'Aisha, the wife of the Prophet intending thereby to please Allah's Apostle.


Bukhari- Volume 3, Book 48, Number 853:

रसूल की  पत्नियों में कुछ विधवा  ,अधेड़  ,कुरूप  ,  मोटी  और  थुलथिली  देह  वालीं  भी  थी  , जो उनकी अदम्य  वासना पूर्ति  के लिए उपयोगी नहीं  थीं  ,इसलिये   वह  बड़ी  चालाकी  से बूढ़ी पत्नियों    की  बारी  जवान पत्नी  को  दिलवा  देते  थे ,

3-मोटी पत्नी  को सहवास से छूट 

आयशा ने  कहा  कि सौदा   मोटी  और  सुस्त  औरत  थी  , इसलिये  रसूल  उसे  सहवास   से   जल्दी  जाने  की  अनुमति  दे  दिया  करते  थे।


Narrated 'Aisha :Sauda asked the permission of the Prophet to leave earlier at the night of Jam', and she was a fat and very slow woman. The Prophet gave her permission.


 Bukhari-Volume 2, Book 26, Number 740:




मरते समय  रसूल  के दिल में यहूदियों  ,ईसाइयों  (गैर मुस्लिम )  के  प्रति   नफ़रत  और   बढ़  गयी  थी  , और जब उनको होश  आता  था वह यहूदिययों और  ईसाइयों  पर   लानतों   की  बरसात  कर  देते  थे  , 

4-यहूदियों और  ईसाइयों  पर लानत 

आयशा  ने  कहा कि ऎसी  जानलेवा  बीमारी   में  भी  रसूल  कहते  रहे  की " यहूदीयों  और ईसाइयों  पर  अल्लाह   की  लानत  हो "

Narrated `Aisha:Allah's Messenger  in his fatal illness said, "Allah cursed the Jews and the Christians, 


"، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي مَرَضِهِ الَّذِي لَمْ يَقُمْ مِنْهُ ‏ "‏ لَعَنَ اللَّهُ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى،  "
 

Bukhari-Vol. 2, Book 23, Hadith 472

रसूल ने  मरते  समय   भी विश्व के कल्याण और आपसी भाईचारे  की  कामना  नहीं    की थी  , उलटे उनकी अंतिम इच्छा  थी  कि जहाँ  भी  इस्लामी राज्य  हो  वहां विधर्मियों सफाया  हो  जाये 


 5-विधर्मियों  को अरब से  निकालो 

"बीमारी   के तनाव के  बावजूद रसूल ने दर्द  से  कराहते  हुए कहा  " सारे अरब से  यहूदियों   , ईसाइयों  और   मुश्रिकों  को  निकाल दो "


 in  spite of the strain of disease and suffering from pain,Prophet said "Jews, Christians and polytheists should be expelled out of Arabia.


"على الرغم من سلالة من المرض والمعاناة من الألم، وقال النبي "يجب طرد اليهود والنصارى والمشركين من الجزيرة العربية.  "

मिश्कतुल  मसाबिह,(مشكاة المصابيح)   -1/102]

इसलिए  जो   लोग   भारत  - पाक  चर्चा  और  मित्रता   की वकालात  कर रही  हैं  , उन्हें  समझना  होगा  कि जिनके रसूल  के विचार अन्य  धर्म  के लोगों  के  प्रति  ऐसे  विचार  हों उनके  अनुययियों  से  चर्चा  और मित्रता  की अपेक्षा  रखना  मूर्खता   नहीं  तो और  क्या   है ?
रसूल की तरह पाकिस्तान  की यही इच्छा  है कि  कश्मीर  से सभी हिन्दू  निकल   जाएँ

 क्या  सांप  अपना  जहर छोड़ सकता  है  ?

(280 )- (22/08/2015 ) 

शनिवार, 20 जून 2020

मुहम्मदी अल्लाह के एकत्व और निराकारता भंड़ाफोड़ !

अल्लाह  एक  नहीं अनेक  हैं  !
आप सभी ने देखा होगा कि जब भी मुसलमानों  से  भारत माता की जय  कहने या वन्दे मातरम  बोलने को कहा जाता है  तो वह साफ़ मना कर देते हैं  ,  यही नहीं  अगर उनको किसी हिन्दू आयोजन  में बुलाया जाता है तो भी  वह नहीं  जाते  ,  और न किसी हिन्दू महापुरुष का सम्मान करते  है , मुस्लिम  हमेशा यही उत्तर  देते हों  कि हम  अल्लाह  के सिवा न तो किसी को प्रणाम  करते है  और न अल्लाह के सिवा किसी  के आगे झुकते  हैं  ,  मुसलमानों  के इस अड़ियल  और अहहिष्णु  विचार को 'तौहीद -  " कहा  जाता  है  ,इसे हिंदी  में एकेश्वरवाद (Monotheism )  कहा जाता  है , मुस्लिम इस विचार को इस तरह निरूपित करते हैं  ,कि जैसे एकेश्वरवाद  की  खोज इस्लाम   की खोज  है  , जबकि इस्लाम से हजारों  साल पहले  ही वेद  में एक ईश्वर   की बात कह दी थी  ,
एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति "यह देख कर अधिकांश नादान हिन्दू यह समझ लेते हैं  कि  वेदों  की तरह इस्लाम भी एकेश्वरवाद  का हिमायती  है   ,पहले हमें  यह जानना जरूरी है  कि वैदिक  धर्म कर्म  के सिद्धांत पर आधारित  है  ,यानी व्यक्ति जैसे कर्म करेगा वैसा ही फल पायेगा ,  इस से कोई अंतर नहीं  होता कि कोई एक ईश्वर को माने या  दो को (जैसे पारसी  ) या ईश्वर को बिलकुल नहीं माने जैसे बौद्ध और जैन  ,  या वैज्ञानिक जो नेचर को मानते है  ,  लेकिन लोग नहीं जानते कि जब मुस्लमान  एक ही अल्लाह की इबादत करने पर जोर देते हैं  तो उसके पीछे बड़ा भरी  षडयंत्र   है ,वास्तव में मुहम्मद के समय में कई लोग ऐसे थे जो  अल्लाह बने हुए थे , लेकिन मुसलमानों  ने इस बात को छुपा रखा  था  , और  कहते रहे कि हमारा निराकार  है. लेकिन कुरान में  खुद अल्लाह ने स्वीकार किया है कि वह एक सत्ता नहीं एक समूह है ,

 यह आयत देखिये ,


"وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا  "48:21
(व उखरा लम  तकदिरू अलैहा )

" हमारे अलावा और भी हैं जिन पर तुम कुदरत नहीं पा सके " सूरा -अल फतह 48 :21 

"and there  are others you had not  power over them "

( 2nd person masculine plural imperfect verb, jussive mood )

भावार्थ -यह है कि अल्लाह कहता है कि मेरे अतिरिक्त ऐसे और भी हैं  , जिन पर तुम्हारा बस नहीं नहीं सका ,अर्थात- मुहमद के समय मुसलमानों के अल्लाह जैसे और भी अल्लाह  मौजूद  थे , और यह बात भी तय है कि वह अल्लाह निराकार नहीं  साकार ही रहे होंगे   , पूरी दुनिया अच्छी तरह से जान चुकी है कि लड़ना झगड़ना मुसलमानों का स्वभाव  है  , और कुदरती बात है कि जब अनेकों अल्लाह  होंगे तो उनमे झगड़ा होना स्वाभाविक   है  ,  और जब हरेक अल्लाह खुद को असली और दूसरे को नकली बताने लगा तो  , मुहम्मद ने असली यानी  अपने अल्लाह की निशानी लोगों  के सामने पेश  कर दी 

1--अल्लाह की पहिचान जाँघों से 
अल्लाह की सही पहिचान इबादत से नहीं बल्कि उसकी जांघों से होती है , इसलिए मुल्लों , और सभी मुसलमानों को चाहिए कि पहले अल्लाह के नीचे के कपडे निकल कर जांघें देख लें . फिर उसे सिजदा करें , यही रसूल ने कहा है , देख लो .

"सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने बताया ,कि अल्लाह कई प्रकार के हैं और कब कोई कहेगा कि मैं ही तुम्हारा अल्लाह हूँ , तो तुम कहोगे तू मेरा अल्लाह नहीं हो सकता और तुम उस से बात नहीं करोगे .तब लोगों ने पूछा कि हम उसे कैसे पहिचानें ,रसूल ने बताया जाँघों से .और जब अल्लाह नेअपनी जांघ उघाड़ कर दिखाई तो लोग पहिचान गए और सिजदे में गिर गए ."


Sahih Al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 532s


" فَيَأْتِيهِمُ الْجَبَّارُ‏.‏ فَيَقُولُ أَنَا رَبُّكُمْ‏.‏ فَيَقُولُونَ أَنْتَ رَبُّنَا‏.‏ فَلاَ يُكَلِّمُهُ إِلاَّ الأَنْبِيَاءُ فَيَقُولُ هَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُ آيَةٌ تَعْرِفُونَهُ فَيَقُولُونَ السَّاقُ‏.‏ فَيَكْشِفُ عَنْ سَاقِهِ فَيَسْجُدُ لَهُ كُلُّ مُؤْمِنٍ، وَيَبْقَى مَنْ كَانَ يَسْجُدُ لِلَّهِ  "


Narrated Abu Sa’id Al-Khudri:
Then the Almighty will come to them in a shape other than the one which they saw the first time, and He will say, ‘I am your Lord,’ and they will say, ‘You are not our Lord.’ And none will speak: to Him then but the Prophets, and then it will be said to them, ‘Do you know any sign by which you can recognize Him?’ They will say. ‘The Shin,’ and so Allah will then uncover His Shin whereupon every believer will prostrate before Him

Sahih Al-Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 532s

Reference : Sahih al-Bukhari 7439
In-book reference : Book 97, Hadith 65
USC-MSA web (English) reference : Vol. 9, Book 93, Hadith 532

पाठक खुद ही समझ लें कि अल्लाह ने अपनी जांघें उघाड़ कर लोगों को  ऐसी कौन  से चीज दिखाई  होगी जिसे  देख कर लोग फ़ौरन जान गए कि यही   हमारा  असली अल्लाह  है  ,  और तुरंत उसको सिजदा कर दिया 

विमम्र  निवेदन  - पाठकों  से अनुरोध  है कि इस लेख को सेव कर लें और सबको भेज दें  क्योंकि मुस्लिम कहेंगे की यह हदीस गलत  है  , इसलिए हमने हिंदी अंगरेजी और अरबी भी दे दी  है  , लोगों  को पता नहीं होगा की मुस्लिम  मुल्ले  हदीसों की दो तरह से नम्बरिंग करते  है   ,  पहला अरबी सिस्टम दूसरा अंगरेजी सिस्टम   इसलिए हमने दोनो  नंबर  दे दिए ,ताकि कोई शंका  न  रहे 

देखा गया है की जब  भी मुल्लों  से अल्लाह के होने का साबुत माँगा जाता है तो वह कुरान पेश कर देते हैं  कि कुरान अल्लाह की वाणी  है इन  प्रमाणों  से सिद्ध हो जाता है कि अल्लाह अनेकों रहे होंगे  , जैसे  शिया अली को ही अल्लाह  मानते हैं  क्योंकि उनके अनुसार कुरान अली की रचना   है  ,  और अगर हम कुरान को अल्लाह के होने का सबूत मान लें तो कुरान में शैतान की आयतें  भी हैं  जहाँ तक अल्लाह के साकार होने की बात है तो हम बता चुके है ,की अल्लाह काना है ,उसके दौनों  हाथ दाहिने कंधे में लगे हैं  ,  अल्लाह मोटा और भारी  है , उस समय उसकी आयु 60  साल के लगभग  रही होगी  ,   

यह बात अगले लेख में विस्तार  से दी  जाएगी  (सन्दर्भ लेख (200 /50 )



(396)-B.N.Sharma



सोमवार, 15 जून 2020

अल्लाह के हाथों और लुंगी का रहस्य !

अल्लाह महान  है , सर्वशक्तिमान  है  , अजन्मा  है  , सर्वज्ञ  है, और  निराकार  अर्थात अशरीरी  है  ,लगभग  यही   और ऎसी  ही  बातें  कुरान और हदीसों के माध्यम  से मुसलमानों  के  दिमागों   इस  तरह  से भर  दी  जाती  हैं  , कि  वह  अलाह के बारे में  सवाल  करने को   भी  कुफ्र  मान  लेते  है ,  लेकिन  चालाक मुल्ले   लोगों  को  अल्लाह   के     ख़ुफ़िया रहस्य सिर्फ अपने  लोगों ही  बताते   हैं  , क्योंकि  उनको  भय   लगा  रहता है  कि अगर  सामान्य मुसलमान इन  बातों  को जान  लेगा  तो इस्लाम यानि मुल्लाशाही   ज्यादा समय   नहीं   रहेंगे ,
इस्लाम  के प्रचारक  अल्लाह के बारे कुछ  भी  कहें  ,लेकिन  इन  हदीसों  से  सिद्ध  होता है कि  मुसलमानों  का  अल्लाह  अशरीरी नहीं  बल्कि एक अरब व्यक्ति रहा होगा  ,जो अरबों  की तरह  चोगा  पहिनता  था , और कमर के नीचे  लम्बी  लुंगी  या  तहमद  बांधता था , यही  नहीं अल्लाह शरीर भी  असामान्य   था ,क्योंकि उसके दौनों  हाथ दायें  कंधे से लगे  थे ,अर्थात उसका बायां  कन्धा ठूँठा था .

1-अल्लाह  का  बड़ा चोगा और लम्बी लुंगी 

इस बात को साबित  करने के लिए तीन  हदीसें  दी   जा रही  हैं  , अरबी के साथ हिंदी और अंगरेजी अनुवाद  भी है ,

पहली हदीस -"अबू हुरैरा  की रिवायत है  ,कि रसूल  ने  बताया  है कि अल्लाह ने कहा  कि  मुझे अपने  भव्य चोगे  और लुंगी पर गर्व  है , और          जो भी उनके बारे पार टिप्पणी  करेगा  उसे  मैं  जहनम  में  झोंक  दूँगा "
       
"Narrated AbuHurayrah:
The Prophet , said: Allah Most High says: my Pride is my cloak and  my majesty is my lower garment, and I shall throw him who view with me regarding one of them into Hell.

"‏ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا قَذَفْتُهُ فِي النَّارِ ‏"‏.‏"

सुन्नन अबी दौउद -किताब 33 हदीस 4079 

दूसरी  हदीस -"इब्ने अब्बास ने कहा  कि रसूल  ने कहा  , अल्लाह  कहता  है कि मेरे चोगे  और  लुंगी सम्मान  योग्य हैं  ,और  जोभी  उनके साथ  स्पर्धा करेगा  मैं उसे  जहन्नम भेज  दूंगा  "

 Ibn ‘Abbas that the Messenger of Allah   said:
“Allah the Glorified, says:  my ‘Pride is My cloak and great My robe, and whoever competes with Me with regard to either of them, I shall throw him into Hell.

""‏ يَقُولُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا أَلْقَيْتُهُ فِي النَّارِ"

इब्ने माजह - किताब 37 हदीस  4315 

तीसरी हदीस -"रसूल ने कहा कि अल्लाह कहता है   ,मेरी  लुंगी  का  सम्मान  करो  ,मुझे  अपने चोगे पर गर्व  है  , और जो उन  पर नजर डालेगा  वह संतप्त  होगा  "

"Messenger of Allah . said, "Allah, the Exalted, says: 'Honour  My Izar and Pride is My Cloak. Whoever vies with Me regarding one of them, shall be tormented."

"“قال الله عز وجل‏:‏ العز إزاري والكبرياء ردائي، فمن ينازعني في  "

 Riyad as-Salihin -Book 1, Hadith 618


नोट - इन तीनों  हदीसों   में अरबी  के  चार  ऐसे  शब्द   हैं  ,मुल्ले  जिनका  गलत  अर्थ  बता कर अरबी  से  अनभिज्ञ  मुसलमानों को गुमराह  कर देते हैं   , यहाँ   इन  के सही अर्थ  दिए जा  रहे  हैं  ,
1 - अल इजार -   " Izaar-إِزَارِي  "An izaar is a lower garment -तहबंद -'लुंगी ..इजारी  का अर्थ  है  मेरी  लुंगी

2-रिदाई "Ridaayi-"رِدَائِي -जामा- चोगा -लबादा -gown- cloak ,कुर्ते की तरह लम्बा  परिधान

3-अल  किब्रिया "الْكِبْرِيَاءُ "पहली हदीस  में अल्लाह  ने अपनी  लुंगी  और चोगे  को ' किब्रिया " बताया है  , मुल्ले इसका अर्थ महान (greate  ) बता देते हैं , जबकि  इसका अरबी में असली  अर्थ " तवील -طويل "   है  , जिसका  मतलब  Long-लंबा.है  ,इन बातों  से सिद्ध  होता है  की  मुसलामानों   का अल्लाह  लम्बा  चोगा  और  लम्बी  लुंगी  पहिनता  होगा 


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2-अल्लाह के दौनों  हाथ  दायीं तरफ हैं 

 इस गम्भीर विषय  को समझने  के  लिये  पहले  हमें अरबी व्याकरण  की  बुनियादी  जानकारी होना  जरूरी  है , संस्कृत  ,हिब्रू ऑर लैटिन  भाषा  की तरह अरबी में भी संज्ञा (Noun )  सर्वनाम (Pronoun)  और  क्रिया (Verb )   के एकवचन (Singular  ) द्विवचन (Dual )   और  वहुवचन (Plurel)  होते हैं , जिन्हें अरबी  में  वाहिद , तस्निया और   जमा   कहते  हैं  , अरबी में  दो चीजों  केलिए  द्विवचन  का प्रयोग  किया  जाता  है ,जो शब्द  द्विवचन  मे होता है  उसके आगे " ऐन -  ين   " प्रत्यय  " लगा  दिया जाता   है  , यही प्रत्यय किसी शब्द के  द्विवचन  होने की  निशानी  है .उदाहरण के लिए " मुअल्लिम - مُعَلِّم " एक शिक्षक ," मुअल्लिमैन -  مُعَلِّمَيْنِ   " दो  शिक्षक और " मुअल्लिमून - معلمون  " कई शिक्षक .इसी  तरह  अरबी  में   हाथ  को "यद - اليد "और  दायें ( Right ) को "अल यमनी -  اليمنى " कहा  जाता  है , जिसका द्विवचन " यमैन -  يَمِينٌ    "  होता  है , जिसका  अर्थ  है दौनों दायें (Both right ) .इतना   जानने  के बाद आपको  यहाँ  दी  जाने  वाली  हदीसों को समझने   में  परेशानी   नहीं   होगी .

पहली  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन  उमर  ने कहा  कि  रसूल ने कहा  कि  रहमान (अल्लाह ) के  दो  दायें  हाथ  हैं "

Abdullah b. 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said,Either side of the Being is the right handsof rahman

"عَنْ يَمِينِ الرَّحْمَنِ عَزَّ وَجَلَّ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ  "

"अन यमीनुर्रहमान   इज्जो जल  कुन्ना  यदहू यमैन "(यहाँ पर  दायें  का  द्विवचन   है )

Sahi Muslim-Book 20, Hadith 4493

दूसरी  हदीस -"अब्दुल्लाह  बिन अम्र  बिन अल आस   की  रिवायत  है  कि रसूल  ने कहा  ,जो  लोग सही होंगे वह परिवार  सहित जन्नत में  रहेंगे ,और इस हदीस  को कहने वाले मुहम्मद  ने  कहा  ,की  अल्लाह  के  दौनों     हाथ  दाहिने   हैं "

" narrated from 'Abdullah bin 'Amr bin Al-'As that:
The Prophet [SAW] said: "Those who are just and fair will be with Allah,with their families .Muhammad (one of the narrators) said in his Hadith: "And both of His hands are right hands."


‏‏.‏ قَالَ مُحَمَّدٌ فِي حَدِيثِهِ ‏"‏ وَكِلْتَا يَدَيْهِ يَمِينٌ

  " काल  मुहम्मद  फी हदिसीही व्  कुन्ना यदहु यमैन  "(यहां  भी  दायें  के  लिए द्विबचन  है  , अर्थात  दो  दायें  हाथ )

 Sunan an-Nasa'i -Vol. 6, Book 49, Hadith 5381


तीसरी  हदीस  -इस  हदीस  की  किताब  के  बारे में अधिकांश  मुस्लिम   नहीं  जानते  ,लेकिन  यह भी  प्रामाणिक  है  ,इस हदीस  के  संकलन  करने वाले का नाम "अबू बकर मुहम्मद  बिन इसहाक बिन  खुज़ैमा  -  أبو بكر محمد بن إسحاق بن خزيمة‎  " है। इसका  समय ( 837 CE/223 AH[1] – 923 CE/311 AH).है , इसकी हदीस  की किताब  का  नाम "सहीह इब्ने खुज़ैमा - صحيح ابن خزيمة   "  है '   खुज़ैमा  ने अल्लाह के  हाथों  के बारे में स्पष्टीकरण  दते हुए  कहा  है  ,

"कि हमारे  रब के  दोनो  हाथ दाहिनी  ओऱ  हैं  , उनके  बायीं  तरफ  कुछ  नहीं हैं "

"شمال وكلتا يدي ربنا يمين لا " 

(Both Hands of our Master are Right and there is no 'Left-ness' ")


सही खुज़ैमा - बाब 1 तौहीद हदीस 47 

और जानकारी  के लिए  देखिये .Video

Both Allah's hands are right?

https://www.youtube.com/watch?v=sK_DbumSPX0
,

इस्लाम के प्रचारक  अपने  अल्लाह को ईश्वर  साबित  करने के लिए जो भी कुतर्क  करें  ,लेकिन   खुद इस्लामी  किताबों  से यही सिद्ध  होता है कि अल्लाह एक   असामान्य  शरीर  वाला अरब  का व्यक्ति  होगा  , जिसके  विद्रूप हाथों  को देख  कर लोगों  ने उसे  अपना  उपास्य ( माबूद )   मान लिया होगा , और ऐसे अल्लाह  के नाम पर  जिहाद करके आतंक फैलाना मूर्खता   नहीं  तो और  क्या  है ?

और  जो लोग  अल्लाह पर ईमान  लाने  वकालत  करते हैं  ,वह इन सबूतों  को गलत साबित  करके दिखाएँ !

(276)-(11/08/2015) 

रविवार, 14 जून 2020

काबा का अपमान करने वाला रसूल कैसे ?

इस लेख का उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं  ,बल्कि पाठकों के सामने प्रश्न रखना है  कि वह पूरा लेख पढ़कर मुहम्मद को अल्लाह का रसूल मानेंगे ?

अरब देश के मक्का शहर में स्थित एक आयताकार कमरे को "काबा "कहा जाता है.काबा इस्लामी संस्कृति और मुसलमानों की धार्मिक ,राजनीतिक ,परम्पराओं का केंद्र माना जाता है.इसीलिए विश्व के सभी इस्लामी धर्म स्थानों में काबा को सबसे पवित्र और महत्त्वपूर्ण माना जाता है.पाकिस्तान शब्द के जन्मदाता मुहम्मद इकबाल ने अपनी कुल्लियात में काबा के बारे में यह लिखा है

"दुनिया के बुतकदों में ,ये पहला घर खुदा का -हम पासबां हैं इसके वो पासबां हमारा "
"
यानी देवस्थानों में काबा खुदा का पहला घर है .यही कारन है कि मुसलमान काबा को "बैतुल्लाह "और "खानाए खुदा "भी कहते है .कुरान में इसे "मस्जिदुल हराम "(निषिद्ध मस्जिद )भी कहा गया है .चूंकि काबे की तरफ ही मुंह करके मुसलमान नमाज पढ़ते है इसलिए काबा को "किबला "भी कहा जाता है और काबा की "तवाफ "परिक्रमा भी करते हैं .और काबा के आसपास की जगह को परम पवित्र मानते है.

1 -काबा का इतिहास और किंवदंतियाँ 
इस्लामी मान्यता के अनुसार काबा का निर्माण आदम ने किया था .फिर बाद में यहूदियों औ रमुसलमानों के मूल पुरुष "इब्राहिम "ने इसे अपने हाथों से दोबारा बनाया था .जैसा कि कुरआन में लिखा है -

"हमने काबा को शांति का स्थल बनाया ,और हुक्म दिया कि इब्राहिम के वास स्थान को नमाज की जगह बनाओ ,और इसके लिए हमने इब्राहीम और इस्माइल को जिम्मेदार बनाया .सूरा -बकरा .2 :125 

लेकिन यहूदी ग्रंथों के अनुसार इब्राहीम कभी मक्का ( पुराना नाम बक्का )कभी नहीं गया था .लेकिन इस बात के सबूत है कि इस्लाम से पहले अरब के लोग मूर्ति पूजक थे .लेकिन अपने अनेकों देवी देवताओं के साथ यरूशलेम स्थित यहूदियों के मंदिर का भी सम्मान करते थे .उस समय उसी को खुदा का घर माना जाता था और उसी की तरफ मुंह करके प्रार्थना की जाती थी .और उसी को चढ़ावे का दान दिया जाता था .सन 66 तक यही परंपरा चलती रही .उस समय यरूशलेम पर रोमन सम्राट तीतुस ( Titus ) की हुकूमत थी .यहूदी उसका विरोध करते थे .जब विद्रोह बढ़ गया तो तीतुस ने 10 अगस्त सन 70 को यरूशलेम के मंदिर को ध्वस्त करावा दिया .लेकिन लोग मंदिर की एक दीवार को ही किबला मानकार इबादत करते रहे .मंदिर नष्ट हो जाने से अरब में मक्का के काबा का महत्त्व बढ़ गया .काबे में उस समय 360 देवी देवताओं की मूर्तियाँ थी इसके बारे में एक अरबी इतिहासकार "अल कलबी "ने अपनी किताब "किताबुल असनाम "में विस्तार से लिखा है .काबे में जितना भी दान या चढ़ावा आता था वह पुजारियों में बट जाता था .लेकिन जो काफिले यरूशलेम की तरफ जाते थे ,वह यरूशलेम के मंदिर के पुजारियों को दान देते रहे .इस्लाम आने के बाद भी कई सालों तक मुसलमान यरूशलेम के मंदिर की तरफ मुंह करके नमाज पढ़ते रहे.
2 -किबला क्यों बदला गया 
 नमाज पढ़ने का आदेश दे दिया .इससे जो धन यरूशलेम के मंदिर को मिलता था वह काबे के पुजारियों को मिलने लगा यही नहीं मुहम्मद ने काबे का हज्ज करने का आदेश भी कुरान में लिख दिया इसके बाद मुहम्मद ने 11 जनवरी 630 में मक्का पर हमला करके काबा की सभी मूर्तियों को तुड़वा दिया ,और पुजारियों को या तो क़त्ल करा दिया या भगा दिया .बो बच गए वह डर मुसलमान बन गए .इसके बाद मुहम्मद काबे की चाभी कुरैश को देदी .इसी घटना से सम्बंधित अगली घटना है जो इस लेख का आधार है पहले काबा के आदर और सम्मान के बारे कुरान में क्या लिखा है वह दिया जा रहा है .
3 -काबा का आदर और सम्मान 

वैसे तो इस्लाम के पूर्व भी अरब के लोग काबा का आदर करते थे .और उसे परम पवित्र जगह मानते थे और काबा के क्षेत्र के आसपास की जगह में भी न तो लड़ाई करते थे न क़त्ल करते थे काबा की जगह खून बहाना महापाप समझते थे .अरबों की इसी परंपरा को कुरान में भी लिया गया है जैसे -
"तुम मस्जिदे हराम (काबा )के पास न लड़ो ,जबतक कोई तुमसे लड़ने को न आये "
सूरा .बकरा 2 :191 

"हमने काबा को शांति का स्थान बनाया है "सूरा .अल कसस 28 :57 

"हे ईमान वालो तुम इहराम की हालत में ( काबा के हज्ज के कपडे पहने ) हो तो शिकार न मारो"
सूरा -मायदा 5 :95

यही कारण था कि काबा के आसपास किसी का शिकार नहीं करते थे और न किसी को शिकार का पता देते थे .अगर कोई काबा की शरण में आजाता था तो उसे क़त्ल नहीं करते थे .चाहे वह परम शत्रु ही क्यों न हो .अल्लाह की पनाह लेने वाले को छोड़ दिया जाता था .यही परंपरा थी .लोगों को यही विश्वास था कि अल्लाह का रसूल होने से मुहम्मद भी इन्हीं नियमों का पालन करेगा और काबा का सम्मान करेगा 

4 -मुहम्मद की कपट नीति 
मुहम्मद का मुख्य उद्देश्य लोगों से जिहाद करावा कर दुनिया पर राज करने का था ,वह लोगों को बहकाने के लिए खुद को एक शांतिप्रिय और क्षमाशील व्यक्ति होने का ढोंग करता था .उसने कुरान में लिखवा दिया कि ,

"यदि कोई मुझे क़त्ल करने लिए अपना हाथ आगे बढ़ाएगा मैं उसको क़त्ल करने के लिए अपना हाथ आगे नहीं बढ़ाऊंगा .मैं तो अल्लाह से डरने वाला हूँ .जो सबकी जिंदगियों का पालनकर्ता ( रब )है."सूरा -मायदा 5 :28

मुहम्मद की इन्ही बातों में फस कर कई लोग मुसलमान बन गए .जिनको मुहम्मद यातो जिहाद पर भेज देता था या फिर जकात ,या जजिया वसूल करने के काम पर लगा देता था .ऐसा ही एक व्यक्ति "इब्ने खत्तल" जिसे खुद मुहमद ने मुसलमान बनाया था ,और दुसरे लोगों के साथ जकात वसूलने के लिए भेजा था .फिर नाराज होकर काबा में ही हत्या करावा दी थी .यह वही घटना है ,जो इस्लाम की प्रमाणिक इतिहास की किताबों और हदीसों में मौजूद है .

5 -इब्ने खतल का काबा में क़त्ल 
इसका पूरा नाम हलाल बिन खतलهلال بن خطل था मुहम्मद ने खतल को लोगों से जकात वसूल करने के लिए भेजा था इसके दल में कुल दस लोग थे .जिनमे 6 पुरुष और 4 औरतें थीं जिसमे एक लड़की फरताना और उसकी साथी गाना गाकर लोगों से जकात मंगाते थे .यह सभी लोग मुहमद के हाथों नए नए मुस्लमान बने थे .जब एक गाँव में यह लोग रुके ,खतल केसथियों ने एक बकरी काट कर खाना पकाया .और खाने बाद सब सो गए .और उस दिन कोई वसूली नहीं हो सकी 
(सीरते रसूलल्लाह पेज .550 ) 

इस दल के दस लोगों के नाम इस प्रकार है .1 .इकरिमा इब्ने अल अस्वद 2 .हब्बार इब्ने अल अस्वद 3 .अब्दुल्लाह इब्ने साद इब्ने सरह 4 .मिकयास इब्ने सबह अल लैसी 5 .अल हुबैरा इब्ने नुकैया 6 .अब्दे अब्बाद इब्ने हिलाल इब्ने खतल अल अदरामी 7 .हिन्दा बिन्त उतबा 8 .सारह मलवत (अम्र बिन हाशीम की साजिंदा ) 9 .फरतना 10 .करीबा .
( किताब अल तबकात अल कबीर लेखक इब्ने साद जिल्द 2 पेज 168 ) 
इसी
किताब के पेज 172 और 173 में यह भी  है कि जब रसूल को पता चला कि यह लोग उस दिन खाली हाथ ही वापस आ गए तो वह बहुत नाराज हुए .और इब्ने खतल कोमौत की सजादेना चाहते थे खतल जान बचने के लिए साथियों के साथ काबा पास छुप गया .लेकिन मुहमद ने उसको कैसे क़त्ल कराया यह सभी हदीसों में लिखा है .इसके कुछ प्रमाण दिए जा रहे हैं -

"अनस बिन मलिक ने कहा कि जब रसूल काबा में दाखिल हो रहे थे तो वह अपने सर पर लोहे का टोप (Helmet )और जूतियाँ पहने हुए थे .लेकिन काबा के परिसर में घुसते ही अपना टोप उतर दिया .उसी समय मूसा बिन दाउद ने रसूल से कहा कि इब्ने खतल काबा का परदा पकड़ कर उसकी आड़ में छुपा है .रसूल ने उसे पकड़ा और कहा इसे यहीं क़त्ल कर दो " .बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 582 

"अनस बिन मलिक ने कहा कि जब जान बचने के लिए इब्ने खतल काबा के परदे के पीछे छुप गया ,और रसूल ने उसका क़त्ल करने का हुक्म दिया था ,तो इब्ने खतल इहराम के कपडे पहने हुआ था .मैंने यह बात रसूल के ध्यान में लायी .लेकिन रसूल ने उसके क़त्ल का हुक्म दे दिया " 
सही मुस्लिम -किताब 7 हदीस 3145 

यही बात मलिक मुवत्ता ने भी लिखी है
"जब इब्ने खतल काबा का पर्दा कस कर पकड़ कर खड़ा हुआ था ,और रसूल से खुदा के घर का वास्ता देकर अपनी जान की भीख मांग रहा था और कह रहा था कि मैं अल्लाह के घर की पनाह में हूँ .फिर भी रसूल ने उसके क़त्ल का हुक्म दे दिया "
मुवत्ता-जिल्द 20 किताब 76 हदीस 256 

इब्ने साद ने अपने इतिहास में यही बात विस्तार से लिखी है "जब इब्ने खतल ,अबी सरह ,फरताना,इब्ने जबरा काबा की शरण में थे तो रसूल ने एक आदमी "अबू बरजख "को उनका क़त्ल करने का हुक दिया .बरजख ने वहीँ पर अपने खंजर से सबके पेट फाड़ दिए .और वह खून निककने से वहीँ पर मर गए ."तबकाते साद -पेज 174

इसी पुस्तक में यह भी लिखा है "एक लड़की जो गीत गा रही थी वह किसी की नजर बचा कर भाग गयी थी और बच गयी थी .लेकिन रसूल ने उसे पकड़वा करवहीँ  अपनी  रखैल बना लिया ( यानि बलात्कार किया) "

सीरते रसूलल्लाह .पेज 551 

 6 -ताजा प्रत्यक्ष प्रमाण 
इस समय रमजान का महीना चल रहा है .और मुसलमान इस महीने को पवित्र मानकर बुरी बातों से दूर रहते है .लेकिन मुझे अपनी बात को साबित करने के लिए यह लेख 45 मिनट में लिखना पड़ा .आप सब जानते हैं कि जब मुस्लिम ब्लॉगर निरुत्तर हो जाते हैं तो ,अभद्र कमेन्ट कैअने लगते हैं.लेकिन कल आसिफ नामके एक मुस्लिम ब्लॉगर ने मुझे मेल से गलियां देना शुरू कर दीं.साथ ही मुझसे दोस्ती और इस्लाम कबूल करने की दावत भी देदी .आसिफ ने रमजान की पवित्रता का उसी तरह अपमान किया जैसे से मुहम्मद ने काबा का किया था .मैंने यह लेख उसी ब्लॉगर को लक्ष्य करके जल्दी में लिखा है .मैंने आसिफ के सभी मेल अपने मित्रों को फॉरवार्ड कर दिए है .मेरे लेखों कि सच्चाई का यही प्रमाण है.
इन सभी विवरणों से यह बातें साफ़ सिद्ध होजाती हैं कि मुहम्मद कि कथनी और करनी में जमीन असमान का अंतर था .जब खुद मुहम्मद ही काबा की पवित्रता और मर्यादा को नापाक करता था ,तो उसे अल्लाह का रसूल कैसे माना जा सकता है .अगर वह रसूल होतातो अल्लाह के घर में ही खून खराबा नहीं कराता .और अगर अल्लाह की पनाह लेकर भी किसी की जान नहीं बच सकती ,तो साबित होता है कि काबा अल्लाह का घर नहीं है .और अगर काबा अल्लाह का घर नहीं है तो फिर वहां के हज्ज के नाम पर मुसलमानों को किराये में करोड़ों की छुट क्यों दी जाती है . इन रुपयों से देश के कई काम हो सकते है .अगर अल्लाह सर्व व्यापी है तो उसे एक कमरे कैद करना कहाँ तक उचित है
मिर्जा ग़ालिब ने कहा है "खुदा के वास्ते परदा न काबे का उठा जालिम ,कहीं ऐसा न हो वहां भी यही काफ़िर सनम निकले."

(87/59) (06/08/211) .B.N.Sharma

शनिवार, 13 जून 2020

मुसलमानों का अल्लाह काना है !!

इतिहास में कई ऐसे धर्मात्मा राजाओं का उल्लेख मिलता जो अपने निष्पक्ष न्याय के लिए प्रसिद्ध है .और प्रजा में छोटे बड़े , गरीब अमीर का भेदभाव किये बिना सदा ही उचित निर्णय किया करते थे .इसीलिए लोग कहा करते थे कि हमारे राजा तो सबको एक ही नजर से देखते हैं .वास्तव में लोग उस राजा की प्रशंसा करने के लिए ऐसा कहते थे .और इसे राजा का सद्गुण और महानता बताते थे .
लेकिन यदि किसी व्यक्ति की एक आँख किसी कारण से फूट जाये , या जन्म से ही एक आंख हो , लोग उसे शारीरिक दोष या अपशकुन मानते हैं .लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे कि अल्लाह की सिर्फ एक ही आँख है . (Allah has one eye ) यानि अल्लाह काना है .चालाक मुल्ले इस बात को अच्छी तरह से जानते कि उनका अल्लाह काना है , यानि वह काना है .लेकिन यह मुल्ले इस बात को साधारण मुसलमानों को नहीं बताते हैं .इसीलिए मुल्ले मुस्लिम बच्चों को सिर्फ कुरान याद या रटने पर जोर देते रहते . और कुरान को व्याकरण सहित अर्थ नहीं समझाते है . क्योंकि उनको डर लगा रहता है ,कि अगर मुस्लिम बच्चे कुरान का सही अर्थ जान लेंगे , तो  पढ़ते पढ़ते उनको उस आयात का अर्थ भी पता चल जायेगा .जिस बताया गया है कि अलह की सिर्फ एक ही आंख है .
1-अरबी व्याकरण का नियम 
अरबी भाषा व्याकरण की दृष्टि से काफी परिष्कृत और उन्नत है ,उसमे संस्कृत की तरह हरेक संज्ञा और सर्वनाम के तीन तीन वचन होते हैं ,जिसे अंगरेजी में (Numbers ) कहते हैं .अरबी में संज्ञा तीन वचनNumbers (أرقام)  होते हैं .जिन्हें वाहिद , तस्निया ,और जमा कहा जाता है .और एक चीज के लिए वाहिद , दो चीजों के लिए तस्निया , और अधिक चीजों के लिए जमा का प्रयोग किया जाता है .और अक्सर जो चीजें जोड़ी में (Pairs ) में होती हैं , उनके लिए तस्निया यानि द्विवचन (Dual Number ) का प्रयोग किया जाता है .जैसे हाथ , पैर , आँखें , कान आदि .हमेशा जोड़ी में होते हैं .इनके लिए द्विवचन का प्रयोग किया जाता है .लेकिन यदि किसी कारण से किसी का एक हाथ , पैर , कान या आंख नष्ट हो जाएँ तो ऐसी दशा में एक वचन का प्रयोग किया जाता है .यह अरबी व्याकरण का नियम है .
2-कुरान और अल्लाह की एक आंख 
पूरी कुरान में सिर्फ 9 बार अल्लाह को " अल बसीर- الْبَصِيرُ " यानि सब देखने वाला कहा all seeer    गया है लेकिन एक भी जगह अल्लाह की आँखों के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया है .औरकिसी मुल्ले ने बताया की अल्लाह सब कुछ कैसे देखता ,और उसका नाम "अल बसीर " क्यों रखा गया है .और जैसे कोई कितना पाखंड करे , और सच पर पर्दा डालने की कोशिश करे एक दिन उसका भंडा फूट जाता है . उसी तरह मुहम्मद साहब ने अनजाने में अल्लाह के नाम से एक ऐसी आयत कह डाली जिस से पता चल गया कि उन के अल्लाह कि सिर्फ एक ही आंख है , यानि वह काना है .वह आयत इस प्रकार है ,


"وَعَدُوٌّ لَّهُ ۚ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِّنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَىٰ عَيْنِي  "सूरा - ता हा 20 :39

अरबी -व अद्दू लहु व लैयकतु अलैक मुहब्बतन मिन्नी व लैतसनअ अला ऐनी "

Eng -Transliteration  ."waAAaduwwun lahu waalqaytu AAalayka mahabbatan minnee walitusnaAAa AAala AAaynee "

(यह कुरान की सूरा क्रमांक 20 सूरा ता हा की आयत क्रमांक 39 का 22 वां शब्द है .)
इसका अर्थ है- "मैने तेरे ऊपर अपना प्रेम उंडेल दिया ताकि तू मेरी आँख के सामने पाला जाये "
3-व्याकरण से सबूत
इस आयत के अंतिम शब्द में अल्लाह ने अरबी में " ऐनी -عَيْنِي" अर्थात मेरी आँख  aynī-My eye" शब्द का प्रयोग किया है .जो व्याकरण के अनुसार सर्वनाम , स्त्रीलिंग , अधिकरण कारक और एक वचन शब्द है.

 ( genitive feminine noun- 1st person singular possessive pronoun)

और अरबी की व्याकरण से ही यही साबित होता है ,
"
اسم مجرور والياء ضمير متصل في محل جر بالاضافة  "

3-अल्लाह काना कैसे हुआ 
अल्लाह सदा से काना नहीं रहा होगा क्योंकि यहूदियों की किताब तौरेत , और ईसाईयों की बाइबिल ज़माने तक अल्लाह की दौनों ऑंखें रही होंगी . क्योंकि उनकी किताबों में कहीं नहीं लिखा की अल्लाह काना है .लगता है मुसलमानों का अल्लाह कोई मनुष्य होगा जिसके नाम से मुहम्मद साहब आयतें सुनाते रहते थे . और किसी जिहाद में उसकी एक आँख फूट गयी होगी .और वह काना हो गया होगा .

यह कोई कपोल कल्पित बात नहीं है , कुरान की आयत और अरबी व्याकरण से जाँच करने के बाद ही यह लेख प्रकाशित किया गया है .जिसको जाँच करना हो जाँच कर ले . और साबित करे कि अल्लाह की दो ऑंखें हैं .और अगर अल्लाह निराकार है तो कुरान में अल्लाह की सिर्फ एक ही आंख क्यों बताई गयी है ,सभी मुस्लिम विद्वानों को चुनौती  है ,कि इन सबूतों को गलत साबित कर के दिखाएँ ,.वर्ना हम यही कहेंगे
"मुसलमानों का अल्लाह काना है "

 (200/42)-(13/05/2012  )  B. N. Sharma

शुक्रवार, 12 जून 2020

हज में ऊंटनी प्रेम प्रथा ?


कुछ  लोग  समझते हैं  कि हज   एक  तरह  की तीर्थयात्रा    है  , लेकिन वहां  क्या  होता हैं  उसके बारे में  सिर्फ  उतना ही  जानते हैं   ,जितना  टी  वी  में दिखाया  जता  है  , इस  लेख  में सही   जानकारी   दी   जा  रही  है ,

हज  इस्लाम  के पञ्च स्तंभों   में  एक  है   , इस्लाम  में  हर  मुस्लिम  के  लिए   हज  करना अनिवार्य  माना गया    है  ,वास्तव में अरब लोगों  में  हज की परंपरा   इस्लाम  से काफी  पहले  ही  प्रचलित   थी  , उनके  कुछ  रिवाज    इस्लाम  ने  भी  अपना लिए    है  , जिनमे  मुख्य     यह    हैं ,

1-इहराम (إحرام   )-बिना सिले  सफ़ेद   वस्त्र  धारण करना

2-तवाफ़ (طواف‎‎ )-काबा  की  परिक्रमा  करना

3-सई (سعى‎‎ )-सफा  और मरवा  नामक  पहाड़ियों  के बीच  दौड़ना

4-रमी  अल  जमरात (رمي الجمرات‎‎ )-शैतान  के स्तम्भ पर  कंकड़  मारना 

हज  संबंधी  यह रिवाज  इस्लाम से पूर्व और महम्मद साहब के समय भी  प्रचलित  थे  .

इसके अलावा  एक  ऐसा   विचित्र  रिवाज  था जिसके  बारे में मुस्लिम  खुल  कर  नहीं   बताते   , 
सब   जानते हैं  कि  अरब के लोग  अय्याश  और  कुकर्मी   होते  हैं   , वह  अपने पालतू  पशुओं   के  साथ   भी मैथुन   करते   थे  ,  खास  कर  वह लोग  ऊंटनियों के  साथ  सहवास    किया  करते   थे  , मुहम्मद   साहब   यह  बात  जानते  थे  , और उन्होंने   अपने लोगों  को  खुश करने के लिए  इस कुकर्म  को इसलिए जायज  ठहरा   दिया  , ताकि अरब इस्लाम   न   छोड़  दें 

1-पशुमैथुन गुनाह   नहीं   है 


"इब्ने  अब्बास  ने  कहा   कि  रसूल   ने कहा है  उस व्यक्ति के किसी  प्रकार  की  सजा  नहीं  होगी  जिसने   जानवर  के  साथ   मैथुन   किया  हो "


، عَنْ أَبِي رَزِينٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لَيْسَ عَلَى الَّذِي يَأْتِي الْبَهِيمَةَ حَدٌّ ‏.

Narrated Abdullah ibn Abbas: There is no prescribed punishment for one who has sexual intercourse with an animal.


Abu DawudReference : Sunan Abi Dawud 4465

In-book reference : Book 40, Hadith 115

English translation : Book 39, Hadith 4450


मुहम्मद  साहब  को डर  था  कि  अगर  वह  इस कुकर्म  को  हराम    कर  देंगे तो   नाराज होकर अरब के लोग फिर  से पुराने धर्म  में  लौट   जायेंगे  , इसलिए उन्होंने  सिर्फ  हज  के  समय ऊंटनी  से सम्भोग  करने  की  अनुमति   दे दी   ,  और इस कुकर्म को अनिवार्य  कर  दिया ,

2- -हज्ज में ऊंटनी के साथ मैथुन जरूरी 

الحج إلى مكة المكرمة ليست كاملة دون كلبين مع الجمل ' '
जब तक ऊंटनी के साथ सम्भोग नहीं किया जाता ,हज्ज पूरा नहीं होता .अब्दुल्ला इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल ने कहा यह अरब कि यह अरबों की रवायत है .इसमे कोई गुनाह नहीं है 

.सुन्नन अबू दाऊद-किताब 38 हदीस 4449 

3-ऊंटनी  सम्भोग बिना  हज अधूरा  है 

हिजरी  सन  587  में  पैदा हुए   सुन्नी  हनफ़ी  फिरके के इमाम  "अबू  बकर बिन मसऊद अल  कसानी  - ابو بكر بن مسعود الكاساني "  ने  अपनी  किताब  " बिदाय  अल सनाआ  फी  तरतीब  अल शराय -    بـدائـع الـصـنـائـع فـي تـرتـيـب الـشـرائـع  "  में   लिखा   है


  "الحج كاملة دون الجمل الجنس"

"अल हज कामिलेतुन  दूंनिल  जमल अल जिन्स "

"ऊंटनी  से सम्भोग  किये  बिना   हज  अधूरा    है .
( Haj Pilgrimage incomplete without  Camel sex)


Kitāb Badā’i‘ al-s anā’i‘ fī tartīb al-sharā’i‘ بدائع الصنائع في ترتيب الشرائع -

Volume 2 page 216:

चित्र  देखिये- 

http://4.bp.blogspot.com/-wbEQYcZ7vZQ/VUPb-hgzNAI/AAAAAAABaOw/7TH470YAyrQ/s1600/11cam.jpg


इसी  किताब की  इसी पेज  पर   यह भी लिखा  है  ,

"ولو وطئ بهيمة لا يفسد حجه "

"लौ   वतीअ बहीमह ला  यूफसिदुल हज "

अर्थात -अगर वह व्यक्ति (ऊंटनी  न  मिलने पर  )  किसी जानवर  से सम्भोग  कर  ले   तब भी  हज व्यर्थ  नहीं  होगा "

"If he had sexual intercourse with an animal, that will not make his hajj void" 


नोट - इस  लेख  का उद्देश्य किसी  की आस्था पर  चोट  करना   नहीं  ,बल्कि लोगों  को सही  जानकारी देना  है  ,  इस  लेख  में  दिए  गए  तथ्य  उतने ही    सत्य  हैं   ,जीतनी  यह  हदीसें  और हनफ़ी इमाम  काशानी  की  किताब   है  ,  हमें  यह  बात इस लिए  सच  लगती  है कि हो  सकता है शायद  इसी  करण  से मक्का  शहर  में   गैर  मुस्लिमों प्रवेश      करना    मना   है    ,

      चूँकि पशुओं   के साथ  कुकर्म  करने  की अरबों की   पुराना   शौक   है  ,  जिसे धार्मिक रूप  दे  दिया   गया  है  .
पशुमैथुन   के बारे  में विस्तार   से  हमने  फेस बुक  में 14  सितंबर 2014 को  एक  लेख  पोस्ट  किया  था  ,

 जिसका  शीर्षक "पशुप्रेमी मुसलमान ?  था। (87/20)
         
(345)-(09/09/2016) B.N. Sharma 

गुरुवार, 11 जून 2020

पशुप्रेमी मुसलमान ?

इस शीर्षक को पढ़कर लोग जरुर चौंक जायेंगे ,क्योंकि सब जानते हैं कि जब मुसलमान इंसानों और इंसानियत के परम शत्रु हैं ,तो वे पशुओं से प्रेम कैसे कर सकते हैं ?लेकिन मुसलमानों के पशुप्रेम का तात्पर्य उनका पशुओं के लिए दया और करुणा का भाव कदापि नहीं है .यह तो और ही प्रकार का प्रेम है ,जो मुस्लिम देशों में काफी समय से प्रचलित है .यद्यपि मुसलमान इस बात को छुपाते हैं

इस इस्लामी कुकर्म को "पशु मैथुन "Bestiality "कहा जाता है .कामातुर होकर मुसलमान अपने पालतू जानवरों ,जैसे बकरी ,भेड़,गधी,और ऊंटनी के साथ कुकर्म करते हैं .अरब में तो यह परम्परा के रूप में इस्लाम के पूर्व से आजतक प्रचलित है . 

1 -पशु मैथुन हज का प्रमुख अंग था 

الحج إلى مكة المكرمة ليست كاملة دون كلبين مع الجمل 

जब तक ऊंटनी के साथ सम्भोग नहीं किया जाता ,हज्ज पूरा नहीं होता .अब्दुल्ला इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल ने कहा यह अरब कि यह अरबों की रवायत है .इसमे कोई गुनाह नहीं है .

सुन्नन अबू दाऊद-किताब 38 हदीस 4449 

2 -अरब देशों से प्राप्त पशु मैथुन के आंकड़े -

Here are the Muslim countries and how they placed in the top five world ranking of various bestiality-related internet search terms:

1.Donkey Sex: Pakistan (No. 1) Iran (No. 3) Saudi Arabia (No. 4)


2-Dog Sex: Pakistan (No. 1) Saudi Arabia (No. 3)

3-Horse Sex: Pakistan (No. 1) Turkey (No. 3)

4-Cow Sex: Pakistan (No. 1) Iran (No. 2) Saudi Arabia (No. 4)

5-Goat Sex: Pakistan (No. 1)

6-Animal Sex: Pakistan (No. 1) Morocco (No. 2) Iran (No. 4) Egypt (No. 5)


3-प्रमाणिक हदीस सही मुस्लिम से सबूत 


و حدثني زهير بن حرب وأبو غسان المسمعي ح و حدثناه محمد بن المثنى وابن بشار قالوا حدثنا معاذ بن هشام قال حدثني أبي عن قتادة ومطر عن الحسن عن أبي رافع عن أبي هريرة أن نبي الله صلى الله عليه وسلم قال إذا جلس بين شعبها الأربع ثم جهدها فقد وجب عليه الغسل


وفي حديث مطر وإن لم ينزل قال زهير من بينهم بين أشعبها الأربع حدثنا محمد بن عمرو بن عباد بن جبلة حدثنا محمد بن أبي عدي ح و حدثنا محمد بن المثنى حدثني وهب بن جرير كلاهما عن شعبة عن قتادة بهذا الإسناد مثله غير أن في حديث شعبة ثم اجتهد ولم يقل وإن لم ينزل

Narrated by Zuhair Ibn Harb, narrated by Ghasan Al-Masma’i, narrated by Muhammad Ibn Al-Mathny, narrated by Ibn Bashar, who said that it was narrated by Muath Ibn Hisham, narrated by Abu Qatada, narrated by Mattar, narrated by Al-Hassan, narrated by Abu Rab’i, narrated by Abu Huraira who said:


"The prophet – peace be upon him – said, ‘If one sits between a woman’s four parts (shu’biha Al-arba’) and then fatigues her, then it necessitates that he wash.’


In the hadith of Mattar it is added ‘even if he does not ejaculate (yunzil).’ Zuhair narrated among them using the phrase ‘Ashba’iha Al-arba’. It was also narrated by Muhammad Ibn Umar Ibn Ibad Ibn Jablah, narrated Muhammad Ibn Abi Uday, narrated by Muhammad Ibn Al-Mathny, narrated by Wahb Ibn Jarir who both related from Shu’bah who narrated from Qatada who gave this same chain of transmission, except that in the hadith of Shu’bah it has the phrase ‘then he labored’ but did not have the phrase ‘even if he does not ejaculate.’

 Sahih Muslim -The Book of Menstruation


Reference : Sahih Muslim 348 a
In-book reference : Book 3, Hadith 105
USC-MSA web (English) reference : Book 3, Hadith 682



4 -मुस्लिम औरतें पशु मैथुन कर सकती हैं 

"अगर कोई औरत अपनी योनी में जानवर का लिंग घुसवाती है ,तो उसे अपनी योनी को धो लेना चाहिए .और उस लिंग को भी बाहर निकालने के बाद धो लेना चाहिए .इसमे कोई दो मत नहीं है .

If a woman inserts (in her vagina) an animal's penis she must wash, and if she inserts a detached penis (thakaran maktu-an, lit. "a severed male member") there are two opinions; the most correct is that she must wash.

إذا أدخلت المرأة (في فرجها) القضيب حيوان أنها يجب أن يغسل، وإذا كانت إدراج فصل القضيب

सही मुस्लिम -किताब हैज़ -हदीस 525

5 -हज्ज में ऊंटनी के साथ मैथुन जरूरी 

الحج إلى مكة المكرمة ليست كاملة دون كلبين مع الجمل

जब तक ऊंटनी के साथ सम्भोग नहीं किया जाता ,हज्ज पूरा नहीं होता .अब्दुल्ला इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल ने कहा यह अरब कि यह अरबों की रवायत है .इसमे कोई गुनाह नहीं है
.सुन्नन अबू दाऊद-किताब 38 हदीस 4449 

6-पशु मैथुन से हज्ज खराब नहीं होता . 

सुन्नी इमाम अबूबकर अल काशनी ने अपनी कताब में लिखा है कि "अगर कोई जानवर के साथ मैथुन करता है तो ,उसका हज्ज बर्बाद नहीं होता .

"Sunni Imam Abu Bakar al-Kashani (d. 587 H) records in his authority work

 'Badaye al-Sanae' Volume 2 page 216: 

ولو وطئ بهيمة لا يفسد حجه 

"If he had sexual intercourse with an animal, that will not make his hajj void


वादये अल शानैं-जिल्द 2 पेज 216 

7 -पशु मैथुन हलाल है 

इस्लाम के हनफी विद्वान् "अल्लामा हसन बिन मंसूर गाजी खान ने पशु मैथुन के बारे में अपने फतवे में कहा है कि अधिकाँश विद्वान् पशु मैथुन को हलाल मानते है मानते है .लेकिन मकरूह (नापसंद )कहते हैं " .लेकिन मकरूह (नापसंद )कहते हैं "


لقد كانت نكاح الحيوانات قبل البعثه منتشره وتروى كثير من الروايات انها حلال لكنها مكروه والاحوط وجوبا ترك هذه العاده التي تسبب الأذى النفسي ويجب عليك الاعتراف لصاحب الاغنام ودفع قيمتها لمالكها


sex with animals before the mission (Islam) was wide spread and many narrations are narrated that it is halal but makrooh (disliked). And on the compulsory precaution one should abandon this practice that may cause self harm. And you must admit this to the owner of the sheep and pay the owner.

फतवा -गाजी खान -पेज 820 .अल उज़्मा सय्यद अली सीस्तानी 

इन सारे प्रमाणों से साबित होता है कि इस्लाम के कितने उच्च विचार है ,जब मुसलमान पशुओं को भी अपनी हवस का निशाना बना सकते हैं ,तो उन से इंसानियत की आशा रखना मूर्खता होगी .और विचार करिए कि जब मुसलमान ऐसे कुकर्मी हैं ,तो मुहम्मद चरित्रवान की हो सकता था .वह भी अरबी संस्कृति में पला हुआ था .


अभी तो यह थोड़े से नमूने दिए है ,आगे और भी जानकारियाँ देते रहेंगे .आप पढ़ते रहिये 

(181/164)-(19/01/2011)  B.N.Sharma
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