शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

हराम और हलाल इस्लाम का कमाल !

सभी लोग अच्छी तरहसे जानते हैं कि भारत के मुसलमान हमेशा "वन्देमातरम " का विरोध करते हैं . और कहते हैं कि ऐसा बोलना हराम है .यानि पाप है .इस्लाम में जायज -नाजायज ,वैध -अवैध अर्थात हलाल और हराम की बड़ी विचित्र और तर्कहीन अवधारणा है ,जो कुरान ,हदीसों ,और मुफ्तियों द्वारा समय समय पर दिए फतवों के आधार पर तय की जाती है . जिसे मानना हर मुसलमान के लिए अनिवार्य होता है . वर्ना उसे काफ़िर समझा जाता है .इसलिए मुसलमान हमेशा हर विषय हराम और हलाल के आधार पर ही तय करते हैं , चाहे वह देश के संविधान या कानून के विरुद्ध ही क्यों न हो .वह विना समझे अंधे होकर उसका पालन करते हैं .
इस संक्षिप्त से लेख में कुरान ,हदीसों ,फतवों ,और समाचारों में प्रकाशित खबरों से चुन कर एक दर्जन ऐसे मुद्दे दिए जा रहे हैं , जिनको पढ़ कर प्रबुद्ध पाठक ठीक से समझ जय्र्गे कि इस्लाम के अनुसार हराम क्या है ,और हलाल क्या है .
1 -अल्लाह का नाम लिए बिना जानवर को मारना हराम है .
लेकिन जिहाद के नाम से हजारों इंसानों का क़त्ल करना हलाल है .

2-यहूदियों ,ईसाइयों से दोस्ती करना हराम है .
लेकिन यहूदियों ,ईसाईयों का क़त्ल करना हलाल है .
3-टी वी और सिनेमा देखना हराम है .
लेकिन सार्वजनिक रूप से औरतों को पत्थर मार हत्या करते हुए देखना हलाल है .
4-किसी औरत को बेपर्दा देखना हराम है .
लेकिन किसी गुलाम औरत को बेचते समय नंगा करके देखना हलाल है .
5-शराब का धंदा करना हराम है .
लेकिन औरतों ,बच्चों को गुलाम बना कर बेचने का धंदा हलाल है .
6-संगीत सुनना हराम है .
लेकिन जिहाद के कारण मारे गए निर्दोष लोगों के घर वालों की चीख पुकार सुनना हलाल है .
7-घोड़ों की दौड़ पर दाव लगाना हराम है .
लेकिन काफिरों के घोड़े चुरा कर बेचना हलाल है 
8-औरतों को एक से अधिक पति रखना हराम है .
लेकिन मर्दों लिए एक से अधिक पत्नियाँ रखना हलाल है .
9-चार से अधिक औरतें रखना हराम है .
लेकिन अपने हरम में सैकड़ों रखेंलें रखना हलाल है .
10-किसी मुस्लिम का दिल दुखाना हराम है .
लेकिन किसी गैर मुस्लिम सर कटना हलाल है .
11-औरतों के साथ व्यभिचार करना हराम है .
लेकिन जिहाद में पकड़ी गयी औरतों के साथ सामूहिक बलात्कार करना हलाल है .
12-जब किसी औरत की पत्थर मार कर हत्या की जारही हो ,तो उसे बचाना हराम है .
जब उसी अपराध के लिए औरत को जिन्दा जलाया जा रहा हो ,तमाशा देखना हलाल है .

इन थोड़े से मुद्दों को ध्यान से पढ़ने से उन लोगों की आँखें खुल जाना चाहिए तो इस्लाम को शांति का धर्म समझ बैठे हैं .इसलिए "भंडाफोडू " ब्लॉग पिछले चार सालों से अपने प्रमाण सहित लेखों के माध्यम से देश प्रेमी लोगों को इस्लाम से सचेत करता आया है . ताकि भूले से भी कोई व्यक्ति जकारिया नायक जैसे धूर्त के जाल में नहीं फसे .जिनको भी इस लेख के सम्बन्ध में इस्लामी किताबों के प्रमाण चाहिए वह "भंडाफोडू " के सभी लेख पढ़ने का कष्ट करें .
ऐसे कमाल के तर्कहीन इस्लाम से जितनी दूरी बनाये रखोगे उतने ही निरापद रहोगे !!
(200/70)

सोमवार, 27 जुलाई 2020

मांसाहारी आदमखोर खुदा !!

चूंकि ईसाई और मुसलमान भारतीय धर्म ग्रंथों को मानवनिर्मित और कपोलकल्पित बताते हैं , और अपनी किताबों जैसे तौरेत ,जबूर,इंजील और कुरान को अल्लाह की किताबें और प्रमाणिक बताते हैं ,इसी लिए उन्हीं को सही मानकर चलते हैं .यह सभी मानते हैं कि तौरेत यानी बाइबिल कुरान से काफी पहले की अल्लाह की किताब है . यद्यपि मुसलमान यह भी कहते हैं कि तौरेत में लोगों ने बदलाव कर दिया है .लेकिन अधिकांश बाते बाइबिल और कुरान में एक जैसी मिलती हैं यही नहीं कुछ ऐसी परम्पराएँ और रिवाज है ,जो मुसलमानों ने तौरेत से अपना लिए हैं , जिनको यह सुन्नते इब्राहीम भी कहते हैं , जैसे खतना कराना और कुर्बानी का रिवाज ,यानि अल्लाह के नाम पर जानवरों कि हत्या करना ईसाई और मुसलमान दौनों यह मानते हैं कि अल्लाह के पहला व्यक्ति आदम को बनाया था ,जिसके दो पुत्र काबिल और हाबिल हुए थे .जिनमे से एक की संतान से सारे मनुष्य पैदा हुए है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह ने इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए अपने लडके इस्माइल की क़ुरबानी देने को कहा था .लेकिन इस्माइल की जगह एक मेंढा रख दिया था .और उसी की याद में जानवरों की हत्या की जाती है .मुसलमानों का यह भी दावा है कि , अल्लाह को न मांस चाहिए और न खून चाहिए .इस बात में कितनी सच्चाई है , और हकीकत क्या है ,यह बाइबिल और कुरान के आधार पर दिया जा रहा है , देखिये

1-अल्लाह  को मांस  का चस्का 
बाइबिल के अनुसार आदम का बड़ा बे
टा काबिल खेती करने लगा ,और छोटा बेटा भेड़ बकरियां पालने का काम करने लगा .कुछ समय बाद जब काबिल अपनी उपज से कुछ भेंट खुदा को चढाने के लिए गया तो खुदा ने उसे अस्वीकार कर दिया .लेकिन जब हाबिल ने एक पहिलौठे भेड़ को मारकर उसकी चर्बी खुदा को चढ़ाई ,तो खुदा ने खुश होकर कबूल कर लिया ."
बाइबिल -उत्पत्ति 4 :1 से 6 
इस बात से पता चलता है कि अल्लाह स्वभाव से हिंसक और मांसप्रेमी है उस समय खुदा का घर नहीं था ,इसकिये उसने आसान तरकीब खोज निकाली

2-स्थायी वधस्थान 
कुछ समय के बाद खुदा ने एक जगह स्थायी वधस्थल ( slaughter place ) बनवा दिया जिसे मिज्बह Altars (Hebrew: מזבח‎, mizbe'ah,  कहते हैं ,वहीँ पर खुदा जानवरों की बालियां .स्वीकार करता था .ताकि भटकना नहीं पड़े .खुदा ने कहा ,
"तू मेरे लिए एक मिट्टी की वेदी बनवाना ,और उसी पर अपनी भेड़ -बकरियां और अपने गाय बैलों की होम बलियां चढ़ाना .और मैं वहीँ रह कर तुझे आशीष दूंगा .और अगर तू पत्थर की वेदी बनाये तो तराशे हुए पत्थरों की नहीं बनाना "बाइबिल .व्यवस्था 20 :24 -25 

3-खुदा की मांसाहारी पसंद 
जब एक बार खुदा में मुंह में मांस का स्वाद लग गया तो छोटे बड़े सभी शाकाहारी जानवरों की कुर्बानियां लेने लगा ,और उनकी आयु .रंग और मरने की तरकीबें भी लोगों को बताने लगा ,जो बाइबिल और कुरान में बतायीं हैं
"खुदा ने कहा ,क्या मनुष्य के और क्या पशु के जोभी अपनी माँ की बड़ी संतान हो ,वे सब तू मेरे लिए रख देना " Exodus 13:2 

"खुदा ने कहा कि याजक पाप निवारण के लिए वेदी पर निर्दोष मेंढा लेकर आये "
बाइबिल .लेवी 5 :15 

अल्लाहने मूसा से कहा गाय न बूढ़ी हो और न बछिया .इसके बीच की आयु की हो "
सूरा -बकरा 2 :68 
"तुम ऊंटों को पंक्ति में खड़ा कर देना ,और जो गोश्त के भूखे हों वह धीरज रखें ,जब ऊंट ( रक्तस्राव ) के किसी पहलू पर गिर जाये तो उसको कट कर खुद खा लेना और भूखों को खिला देना "
सूरा -हज्ज 22 :36 
ऊंट के गले में छेद कर देते हैं ,इसे नहर कहते है .कुरान ने विधि बताई है .

4-जानवर कटने के लिए हैं 

अपने लिए मांस पहुंचता रहे इसलिए अल्लाह ने घर बैठे ही इतजाम कर लिया और कहा कि,
"क़ुरबानी के जानवरों की बस यही नियति है की , उनको क़ुरबानी की पुरानी जगह तक पंहुचना है
"सूरा -हज्ज 22 :33 
"हमने प्रत्येक गिरोह के लिए क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है
"सूरा-हज्ज 22 :34 

5-खून का प्यासा अल्लाह 
मुस्लिम विद्वान् खून को हराम बताने के पीछे अनेकों कुतर्क करते हैं ,लेकिन असली कारण तौरेत यानि बाइबिल में मिलता है ,खून खुदा को सबसे अधिक पसंद है .कुरान और बाइबिल के कथन देखिये
"क्योंकि हरेक देहधारी के प्राण उसके खून में रहते हैं ,और इसलिए मैंने लोगों से वेदी पर खून चढाने को कहा है .इसलिए कोई भी व्यक्ति खून नहीं खाए .
 बाईबिल लेवी -17 -11 -13 

"याजक पशु का खून वेदी के पास रखदे " बाइबिल लेवी -4 : 30 
क्योंकि बलि का खून तो खुदा का भोजन है .इसलिए तुम खून नहीं खाना "
बाइबिल लेवी -3 :17
"मूसा से खुदा ने कहा ,की तुम पर मुरदार ,खून ,और सूअर और जिसपर अलह के सिवा किसी का नाम लिया गया हो ,सब हराम"
सूरा -बकरा 2 :173 और सूरा-मायदा 5 :3 

"तुम मांस को प्राणों के साथ यानि खून के साथ नहीं खाना
 बाइबिल उत्पति 9 :4 -5 

6-खुदा मांस खाकर ऊब गया 
जब कई बरसों तक खुदा जानवरों का कच्चा मांस खा कर ,और खून पी चुका तो वह अघा गया ,और उसे इन चीजों से अरुचि होने लगी थी , जो बाइबिल में इन शब्दों में वर्णित है
खुदा ने कहा अब जानवरों की कुर्बानियां मेरे किसी काम की नहीं हैं ,मैं मेढ़ों और  जानवरों  के खून से अघा गया हूँ .अब में बछड़ों भेड़    के बच्चों और बकरों के खून से प्रसन्न नहीं होता "
 बाइबिल .यशायाह 1 :11 -12 
नोट -इन प्रमाणों  से सिद्ध हो जाता है कि खून  अल्लाह की प्रिय  खुराक  है  , और जैसे कोई मांसाहारी जानवर  अपनी खुराक  किसी दूसरे को नहीं खाने  देता  उसी तरह अल्लाह ने  खून को हराम कर  दिया है  , यही कारण है कि यहूदी  और मुस्लिम खून  नहीं   खाते ,इसीलिए  मुसलमान  कुर्बानी  करने के लिए जानवर की  मुख्य  धमनी काट  कर छोड़ देते हैं  , जिस से जानवर  का सारा खून बह जाता  है  जिसे अल्लाह पी जाता  है ,
तब खुदा ने सोचा कि नमक से मांस में स्वाद आयेगा ,तो उसने कहा ,
"खुदा ने कहा ,तू क़ुरबानी की बलियों को नमकीन बनाना ,और बलि को बिना नमक नहीं रहने देना ,इसलिए चढ़ावे में नमक भी रख देना "
बाइबिल लेवी 2 :13 
और जब जानवरों  के नमकीन मांस   खाकर  और उनका  खून पीकर  अल्लाह का दिल भर गया तो वह मनुष्यों की क़ुरबानी मांगने  लगा
7-लड़कों  की कुर्बानी 

जब खुदा को जानवरों कि कुर्बानियों से संतोष नहीं हुआ ,तो वह इसानों के लडके लड़कियों कि क़ुरबानी लेने लगा .इब्राहीम और इसहाक ( इस्माइल ) की कथा तो लोग जानते हैं ,लेकिन खुदा ने लड़की की क़ुरबानी भी ले ली थी .देखिये .
"खुदा ने इब्राहिम से कहा तू मेरे द्वारा बताई गयी जगह मोरिया पर जा ,और अपने प्रिय बेटे इसहाक की मेरे लिए होम बलि चढ़ा दे "Genesis 22:1-18

फिर इब्राहीम ने लडके को माथे के बल लिटा दिया ,तब हमने उसकी जन बचाने के लिए एक विशेष  तरकीब    पेश कर दी "
सूरा -अस साफ्फात 37 :103 से 107
8-लड़कियों  की कुर्बानी 

बाद में खुदा लड़कियों की कुर्बानियां भी लेने लगा ,यानि मनुष्यभक्षी बन गया .जो बाइबिल से सिद्ध होता है .
"यिप्ताह के कोई पुत्र नहीं था,उसने मन्नत मांगी कि यदि वह युद्ध से कुशल आ जायेगा तो अपनी संतान कि क़ुरबानी कर देगा ,एक ही पुत्री मिज्पाह थी थी . उसने पुत्री की कुर्बानी कर दी .

Judges 11:29-40 

विश्व के अनेकों लोग मांसाहार करते हैं ,और उसके पक्ष में तरह तरह के तर्क भी देते हैं .और कुछ ऐसे भी धर्म हैं , जिनमे पशुबलि और नरबलि की कुरीति पाई जाती है.जिसको वह लोग अपने धर्मग्रंथ की किसी कथा से जोड़कर ,रिवाज और आवश्यक धार्मिक कार्य मानते हैं .इस्लाम की ऐसी ही परंपरा क़ुरबानी की है , पैगम्बर इब्राहीम द्वारा अपने पुत्र की क़ुरबानी से सम्बंधित है . ,और इसकी कथा , बाइबिल ,और कुरान में मौजूद है . यद्यपि इब्राहीम द्वारा बाइबिल में इसहाक की क़ुरबानी , और कुरान में इस्माइल की क़ुरबानी बताई गई है .अब सवाल यह उठता है कि एक विवादग्रस्त किंवदंती के आधार हर साल करोड़ों निरीह मूक प्राणियों की क्रूर हत्या को एक धार्मिक कार्य मानना कहाँ तक उचित मानना चाहए .जबकि उसी इब्राहीम के अनुयायी यहूदियों और ईसाईयों ने क़ुरबानी को धार्मिक रूप नहीं दिया है .क्या कारण है कि दयालु , और कृपालु ईश्वर , खुदा ,God या अल्लाह अचानक इतना हिंसक और रक्तपिपासु कैसे बन गया कि वह जानवरों के साथ मनुष्यों की कुर्बानियां भी लेकर खुश होने लगा .
जो खुदा लोगों के सत्कर्मों से नाराज ,और पशुबलि (कुर्बानी ) से प्रसन्न होता है ,वह ईश्वर नहीं हो सकता .इसलिए यदि हम कहें कि अल्लाह रहमान  और रहीम   बल्कि "मानव मांस भक्षी और रक्त पिपासु है  ,तो इसमें अतिश्योक्ति नहीं   होगी " 


(200/25)

रविवार, 26 जुलाई 2020

ह्त्या गुरु :मुहम्मद !!

खुद को अल्लाह का रसूल बताने वाला मुहम्मद दुनिया के लिए एक अभिशाप बन कर आया था .मुहम्मद संसार का सब से बड़ा हिंसक,क्रूर ,हत्यारा ,निर्दयी,अत्याचारी और अय्याश व्यक्ति था .इसके अलावा वह अत्यंत धूर्त और चालाक भी था .वह हेक कुकर्म को धर्म का जामा पहिना कर उसे जायज बना देता था,और अपनी बेतुकी बातों को अल्लाह का आदेश बता देता था .और लालची ,अज्ञानी अरब उसे मान लेते थे.मुहम्मद पूरी दुनिया पर कब्जा करना चाहता था ,और वह चाहता था कि मुसलमानों का हरेक बच्चा हिंसक ,क्रूर ,और निर्दय बन जाए .ताकि वह बड़ा होकर जिहादी बने तो ,उसे निर्दोष लोगों की ह्त्या करने में किसी तरह का संकोच नही हो.
इसके लिए मुहम्मद ने एक चाल चली ,उसने हत्या का एक पाठ्यक्रम ही +बना दिया .सबसे पाहिले छोटे छोटे प्राणियों को शैतान की रचना बता कर उनकी ह्त्या को जायज बना दिया .फिर कुरबानी के बहाने पशुओं की ह्त्या को धार्मिक कार्य बता दिया .और आखिर में गैर मुस्लिमों को काफ़िर बता कर उनकी ह्त्या को जायज बता दिया.मुहम्मद की दुष्टता देखिये -

1 -कुत्तों को मारो ,कुत्ते शैतान की रचना हैं 
"अबू जर ने कहा की रसूल ने कहा कि कुत्ते शैतान ने बनाए हैं ,और काला कुत्ता खुद शैतान है .इस लिए कुत्ते जहाँ मिलें उनको मार डालो "
सहीह मुस्लिम -किताब 4 हदीस 1032 

"मैमूना ने कहा कि ,रसूल ने कहा रात को मुझे जिब्राईइल (एक फ़रिश्ता )मिला और उसने कहा कि तुम जितने भी कुत्ते हैं ,उनको बच्चों से मरवा डालो .जब रसूल सोकर उठे तो उन्होंने सारे कुत्तों को मरवाने का हुक्म दे दिया.बच्चों ने वे कुत्ते भी मार दिए को रखवाली करते थे "
मुस्लिम -किताब 16 हदीस 2840 

"जबीर बिन अब्दुल्ला ने कहा कि एक औरत के पास एक कुत्ता था ,जो बाग़ की रखवाली करता था .रसूल ने उस कुत्ते को मंगवाया ,और मार डाला .रसूल ने लोगों से कहा कि कुत्ते की नस्ल के जितने जानवर हैं जैसे सियार ,लोमड़ी ,भेड़ियाजहां भी मिलें खोज कर मार डालो ."
मुस्लिम -किताब 16 हदीस 2839 २ 

2 -कौवे ,चील ,चुहिया ,शैतान ने बनाये हैं 
"हफ्शा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि यह पांच प्राणी कौवा ,चील ,चुहिया ,बिच्छू ,और कुत्ते शैतान ने बांये हैं .इसलिए उनको मार डालना चाहिए .या बच्चों से मरवा देना चाहिए ."

बुखारी -जिल्द 3 किताब 29 हदीस 52 ,54 और 55 
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 531 और 532 
मुस्लिम -किताब 7 हदीस 331 और 332 
मुस्लिम -किताब 7 हदीस 2724 .2725 ,2727 ,2728 और 2729 
मुवत्ता-जिल्द 20 किताब 26 हदीस 89 और 90 

3 -गिरगिट (Gecko )को मारो 
"अम्र बिन साद ने कहा कि ,रसूल का आदेश था कि इस प्राणी को जहां देखो बच्चों से मरवा दो .और अपने बच्चों से कहो कि वे इसे खोज कर मार डालें "
मुस्लिम -किताब 26 हदीस 5562 5563 .5564 ,5565 और 5566 

4 -सैलामेंदर (Salamandar )को मारो 

"उम्मे शरीफ ने कहा कि ,रसूल को जहाँ भी सेलामेंदर मिल जाता था ,वह उसे तुरंत मार देते थे .या बच्चों से मरवा देते थे."
बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 526 

"आयशा ने कि रसूल खुद सेलामेंदर को मारते थे .और कहते थे कि इसे शैतान ने बनाया है
.बुखारी -जिल्द 3 किताब 29 हदीस 57 

रसूल की गुलाम सबीः अल फकीह इब्ने मुगीरा ने कहा कि मैंने देखा कि आयशा एक ज़िंदा सेलामेंदर को आग में जला रही थी .और कारण पूछने पर बोली कि यह रसूल का हुक्म है .रसूल ने कहा है कि सेलामेंदर को सैतान ने बनाया है .अगर इसे अल्लाह ने बनाया होगा तो यह आग में नहीं जलेगा .जैसे इब्राहीम नहीं जले थे .
सुन्नन इब्न माजा -हदीस 3222 

5 -साँपों को मारो 
"इब्ने उमर ने कहा कि,रसूल ने कहा है कि हरेक सांप को मार डालो ,चाहे उसने जहर नहीं हो ,सांप शैतान ने बनाये हैं "
बुखारी-जिल्द 5 किताब 59 हदीस 352 

6 -पशुओं के साथ कुकर्म कर सकते हो 

"अब्दुला इब्न अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि तुम अपने पालतू जानवरों जैसे बकरी ,भेडऔर गधी के साथ सम्भोग कर सकते हो .अल्लाह ने इसके लिए किसी सजा का कोई प्रावधान नहीं किया है
 .सुन्नन अबू दाऊद-जिल्द 38 हदीस 4450 

7 -इस्लामी खेलों में हिंसा 
मुहम्मद खेलों में भी क्रूरता और हिंसा चाहता था .अरब देशों में जो ऊंटों की दौड़ होती है ,उसमे पांच से आठ साल के बच्चों को जोकी jocky बनादिया जाता है .इसमे हर साल कयी बच्चे मार जाते हैं .जादातर बच्चे गरीब देशों से ख़रीदे जाते हैं .जब छोटे बच्चे डर के मारे चिल्लाते हैं ,तो ऊंट और तेजी से दौड़ते हैं .इस से मुसलमान अरबों को मजा आता है .जो बच्चे मार जाते है उनको वहीँ दफ़न कर देते हैं ..अरब शेख बच्चों का यौन शोषण भी करते हैं इसका पूर्ण विवरण देखें (www .childtrafficking .com )

8 -मुहम्मद की चालाकी 
मुहम्मद एक धूर्त आदमी था ,वह खुद को शरीफ ,दयालु और रहमदिल साबित करने के किये तिकड़म करता था .जब उसे पता चला कि ईसाई इसा मसीह को दयालु ,जगत का उद्धार करने वाला और बचने वाला कहते है .जैसा कि बाइबिल में लिखा है -
"जब ईसा का जन्म हुआ तो ,एक स्वर्गदूत ने कहा ,आज दाऊद के घराने से तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता का जन्म हुआ है ,और यही मसीह है.यानी (Messiah या Savior )है 

बाइबिल .नया नियम -लूका 9 :10 और 11
"यह ईसा जगत में इस लिए आया कि ,आपकी सेवा करे ,और आप पर दया करके ,आपको छुडाये
.नया नियम -मरकुस 10 :45 

इसी कारण हरेक चर्च के ऊपर JHS शब्द लिखा रहता है ,यह लेटीन भाषा के वाक्य का संक्षिप्त रूप है पूरा वाक्य इस प्रकार है -
"Jesus Hominus Salivatur यानि jesus Savior ऑफ़ Humankind " 
मुहम्मद ने इसकी नक़ल करके आपने राक्षसी रूप को छुपाने ,और लोगों को
 धोका देने के लिए कुरआन में यह लिख दिया कि-

"हे मुहम्मद हमने तुम्हें संसार के लिए दयालुता बनाकर भेजा है ,सूरा -अम्बिया 21 :107

"we sent Thee save as mercy for peoples " 

मुहम्मद की इसी तालीम कि बदौलत मुसलमान इतने हिंसक बन रहे है ,क्योंकि वे हत्या की ट्रेनिग छोटे जीवों से सुरू करते है और जब बड़े होते हैं तो बेझिझक इंसानों को क़त्ल कर देते है .हिन्दू तो एक चींटी को भी मारने से झिझक जाता है . 
(87/10)

शनिवार, 25 जुलाई 2020

इन सवालों का जवाब कोई मुस्लिम नहीं दे सकेगा


मुसलमानों को बचपन से  ही यह सिखाया  जाता है कि कुरान अल्लाह द्वारा  नाजिल की गयी किताब है  , और उस पर ईमान लाना फर्ज  और उसमे सवाल करना कुफ्र  है  , इसी लिए मुसलमान  कुरान को समझने की जगह तोते की तरह रटते  रहते हैं  , क्योंकि  खुद कुरान में कुरान के बारे में   यह लिखा  है;
"तुम पर ऐसी किताब उतारी गयी है , जो हरेक बात खोल खोल कर बयान करने  वाली है , और  मुस्लिमों के लिए  मार्ग दर्शन करने वाली  है  "सूरा  -नहल 16 :89 
"हिदायत करने के लिए कुरान पर ईमान  लाना  जरूरी  है  " सूरा - बकरा  2 :4 
"इस किताब के एक हिस्से को मानना  और दूसरे को नहीं  मानना जीवन और आख़िरत को नष्ट करना   है  " सूरा  -बकरा 2:85 
  , लेकिन जैसे  जैसे हम  अरबी व्याकरण  के अनुसार कुरान को  समझते गये वैसे वैसे  कई सवाल  उठने लगे   जिनका सतोषजनक  उत्तर  नहीं मिल  सका  उन में  से  यह    सवाल  यहाँ  दिए  जा  रहे  हैं  इनका  सही  जवाब  कोई मुस्लिम विद्वान  नहीं   दे  सकेगा 

1 - बिस्मिल्लाह  की आयत 
मुसलमान  जब  भी कोई  काम  शुरू  करते  हैं  तो  सबसे  पहले  बिस्मिल्लाह   की  आयत  पढ़ते  हैं  लेकिन अधिकांश मुस्लिम  नहीं   जानते  कि कुरान  की  सबसे  पहली  सूरा   यानि   (Chapter  )  में बिस्मिल्लाह  की  आयत नहीं   थी  , यहाँ  तक  जब कुरान की  लगातार  चार  सूरतें  उतर  गयी  थीं उनमे पहले अल्लाह  का नाम  भी  नहीं  था  , इसका कारण क्या  है  ?
2 -अल्लाहु अकबर 
  वह मुसलमानों   का नारा  है इसे "नाराए  तकबीर  " कहा  जाता  है ,यही नारा  लगा  कर मुसलमानों  ने करोड़ों लोगों  की हत्याएं  कीं कई देश  बर्बाद  किये  यहाँ  तक यही  नारा  लगा  कर मुसलमानों   ने इमाम  हुसैन  को  क़त्ल  किया था , जैसा क़ि एक  शायर  ने लिखा  है ,
"अजीब  हाल हुआ  इस्लाम  की तकदीर  के साथ  - हुसैन  क़त्ल हुए  नाराये तकबीर  के  साथ  "
लेकिन  हम   सभी  मुस्लिम  विद्वानोँ से पूछते  हैं  कि पूरी कुरान में से  एक ऐसी आयत दिखाएँ  ,जिसमे   "अल्लाहु  अकबर " लिखा  हो 

3 -कलमा  कहाँ से  आया 
कलमा एक प्रकार से इस्लाम का मूल मन्त्र  है  ,बच्चा पैदा होते ही उसके कान में कलमा सुना  दिया  जाता  ,  मुस्लिम बनने के लिए कलमा पढ़ना  अनिवार्य   है   , जो  लोग कलमा  नहीं पढ़ते उन्हें  काफिर  माना  जाता  है  ,जब  जब  जहाँ भी  इस्लामी  हुकूमत  होती है मुस्लिम  शासक  गैर मुस्लिमों  को  कलमा पढ़ने  पर मजबूर  करते  थे  , और जो कलमा पढ़ने  से इंकार  करता  था उसे क़त्ल  कर देते  यहाँ तक जब गुरु गोविन्द  सिंह  के छोटे  से बच्चों  ने  कलमा  पढ़ने  से  इंकार  कर  दिया तो उनको  दीवार  में जिन्दा  चनवा  दिया  था  , लेकिन  हम  सभी मुस्लिमों  को चुनौती  देते  हैं  कि पूरी  कुरान   में  बताये   पूरा   कलमा   कहां लिखा  है  ?
4 - खतना  का आदेश 
मुसलमान अपने छोटे छोटे   लड़कों  का  खतना    उसी  समय करा देते हैं जब वह बिलकुल   अबोध  और नादान होते हैं  ,  और  लिंग की खतना  करना  मुस्लिम होने   का  प्रमाणपत्र माना  जाता  है  ,  लेकिन  इसके बारे  में कुरान  में कोई  आदेश  नहीं  है  , और जब कुरान  में खतना  का हुक्म  नहीं  है  तो  मुसलिम  बच्चों  का खतना  क्यों  कराते  हैं   ?
 5 -नमाज  पढ़ने  का  आदेश  
सभी लोग  अच्छी तरह  से  जानते  हैं  कि मुसलमान  जब चाहे  किसी  भी सार्वजनिक  जमीन  , जैसे ,रोड  , पार्क  , रेलवे का प्लेटफार्म  जैसी  जगह  पर जमा   हो  जाते  है  , और उस जगह को अवरुद्ध  करके  एक तरह  की कसरत  करते  हैं  ,  इसका मकसद लोगों को परेशान करना  होता है  ,
लेकिन  धूर्त  मुस्लिम  ऐसी उठक  बैठक  और कमर उठाने  को नमाज  पढ़ना कहते  हैं  ,  लेकिन  इस  व्यायाम  या कसरत  में पढ़ने   जैसी कोई  चीज  नहीं   है  ,  हम  सभी मुस्लिमों   को चुतौती  देते  हैं   कि पूरी कुरान  में से एक  आयत ही  ऐसी दिखा दें जिसमे लिखा  हो  " नमाज़ पढो " या नमाज पढ़ना  फर्ज  है
जो लोग कुरान को  अर्थ  सहित पढ़ते हैं  उन्हें पता होगा कि अल्लाह  ने कुरान में लोगों  के  सामने  चुनौती  दी    है कि इस  जैसी  एक  सूरा  बना  कर  दिखाओ   !   हम  भी  अरबी  में चुनौती देते हैं  कि इन पांच  सवालों   का  जवाब   देकर बताओ  अगर सच्चे  हो 

"لم تجبيبو و لن تجبيبوٰ  "

(440)

रविवार, 12 जुलाई 2020

कुरबानी: बंदगी में दरिंदगी !

सूचना -इस लेख  का उद्देश्य  किसी की  धार्मिक  आस्था और मान्यता   को आहत  करना  नहीं   है बल्कि सप्रमाण    सत्य  को प्रकट  करना  है  ,  अतः निवेदन है  कि प्रबुद्ध  पाठक इस लेख को पूरा ध्यान  से पढ़ें  

जगत में जितने भी जीवधारी हैं ,सबको अपनी जान प्यारी होती है .और सब अपने बच्चों का पालन करते हैं .इसमे किसी को कोई शंका नहीं होना चाहिए .परन्तु अनेकों देश के लोग इन निरीह और मूक प्राणियों को मार कर उनके शरीर के अंगों या मांस को खाते हैं.ऐसे लोग इन प्राणियों को मार कर खाने के पक्ष में कई तर्क और फायदे बताते हैं .सब जानते हैं कि बिना किसी प्राणी को मारे बिना उसका मास खाना असंभव है ,फिर भी ऐसे लोग खुद को "शरीर भक्षी (Carnivorous ) कि जगह (Non vegetarian ) कहकर खुद को सही ठहराते हैं .कुछ लोग शौक के लिए और कुछ देखादेखी भी आमिष भोजन करते हैं .लेकिन इस्लाम ने मांसभक्षण को और जानवरों की क़ुरबानी को एक धार्मिक और अनिवार्य कृत्य बना दिया है . और क़ुरबानी को अल्लाह की इबादत का हिस्सा बताकर सार्वजनिक रूप से मानाने वाला त्यौहार बना दिया है .क़ुरबानी ,क्या है , इसका उद्देश्य क्या है ,और मांसाहार से इन्सान स्वभाव में क्या प्रभाव पड़ता है ,यह इस लेख में कुरान और हदीस के हवालों दिया जा रहा है .साथ में कुछ विडियो लिंक भी दिए हैं .देखिये 

1-कुरबानी का अर्थ और मकसद 
अरबी शब्दकोश के अनुसार "क़ुरबानी- قرباني" शब्द मूल यह तीन अक्षर है 1 .قकाफ 2 .رरे 3 और  ب बे = क र बق ر ب .इसका अर्थ निकट होना है .तात्पर्य ऐसे काम जिस से अल्लाह की समीपता प्राप्त हो . हिंदी में इसका समानार्थी शब्द " उपासना" है .उप = पास ,आस =निकट .लेकिन अरबी में जानवरों को मारने के लिए "उजुहा-الاضحي " शब्द है जिसका अर्थ "slaughter " होता है .इसमे किसी प्रकार की कोई आध्यात्मिकता नजर नहीं दिखती है .बल्कि क्रूरता , हिंसा ,और निर्दयता साफ प्रकट होती है .जानवरों को बेरहमी से कटते और तड़प कर मरते देखकर दिल काँप उठता है और यही अल्लाह चाहता है , कुरान में कहा है ,

"और उनके दिल उस समय काँप उठते हैं , और वह अल्लाह को याद करने लगते हैं " 
सूरा -अल हज्ज 22 :35 

2-क़ुरबानी की विधियाँ 
यद्यपि कुरान में जानवरों की क़ुरबानी करने के बारे में विस्तार से नहीं बताया है और सिर्फ यही लिखा है ,
"प्रत्येक गिरोह के लिए हमने क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है , ताकि वह अपने जानवर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दें " 
सूरा -हज्ज 22 :34 
लेकिन सुन्नी इमाम " मालिक इब्न अबी अमीर अल अस्वही" यानि मालिक बिन अनस مالك بن انس "(711 - 795 ई० ) नेअपनी प्रसिद्ध अल मुवत्ता-The Muwatta: (Arabic: الموطأ‎)  की किताब 23 और 24 में जानवरों और उनके बच्चों की क़ुरबानी के जो तरीके बताएं है . उसे पढ़कर कोई भी अल्लाह को दयालु नहीं मानेगा ,
 3-पशुवध की राक्षसी विधियाँ 
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर 
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3 

ब-पत्थर मार कर 
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4 
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो 
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर 
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "
मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7 

ब -मादा के गर्भ का बच्चा 
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ "
मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9 

स -दूध पीता बच्चा 
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एकही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता  था , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4 

5-क़ुरबानी का आदेश और तरीका 
वैसे तो कुरान में कई जानवरों की क़ुरबानी के बारे में कहा गया है ,लेकिन यहाँ हम कुरान की आयत विडियो लिंक देकर कुछ जानवरों की क़ुरबानी के बारे जानकारी दे रहे हैं .ताकि सही बात पता चल .सके , पढ़िए और देखिये ,
अ -गाय -
"याद करो जब अल्लाह ने कहा की गाय को जिबह करो ,जो न बूढी हो और न बच्ची बीच का आयु की हो "
सूरा -बकरा 2 :67 -68 

http://www.youtube.com/watch?v=Giz6aMHuDhU&feature=related

ब- ऊंट -
"और ऊंट की कुरबानी को हमने अल्लाह की भक्ति की निशानियाँ ठहरा दिया है 
"सूरा अल हज्ज 22 :36

http://www.youtube.com/watch?v=uT9oFsxqTsg&feature=related

स -चौपाये बैल -
"तुम्हारे लिए चौपाये जानवर भी हलाल हैं ,सिवाय उसके जो बताये गए हैं "
सूरा-अल 22 :30 

http://www.youtube.com/watch?v=RMDLNLK83kg&feature=related

6-गैर मुस्लिमों को गोश्त खिलाओ 
"इब्ने उमर और और इब्न मसूद ने कहा की रसूल ने कहा है ,कुरबानी का गोश्त तुम गैर मुस्लिम दोस्त को खिलाओ ,ताकि उसले दिल में इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा हो "

 it is permissible to give some of it to a non-Muslim if he is poor or a relative or a neighbor, or in order to open his heart to Islam.

"فإنه يجوز أن أعطي بعض منه الى غير مسلم إذا كان فقيرا أو أحد الأقارب أو الجيران، أو من أجل فتح صدره للإسلام "

Sahih Al-Jami`, 6118

गैर मुस्लिमों जैसे हिन्दुओं को गोश्त खिलाने का मकसद उनको मुसलमान बनाना है ,क्योंकि यह धर्म परिवर्तन की शुरुआत है .बार बार खाने से व्यक्ति निर्दयी और कट्टर मुसलमान बन जाता है .

7-गोश्तखोरी से आदमखोरी
मांसाहारी व्यक्ति आगे चलकर नरपिशाच कैसे बन जाता है ,इसका सबूत पाकिस्तान की ARY News से पता चलता है ,दिनांक 4 अप्रैल 2011 पुलिस ने पाकिस्तान पंजाब दरया खान इलाके से आरिफ और फरमान नामके ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया ,जो कब्र से लाशें निकाल कर ,तुकडे करके पका कर खाते थे . यह परिवार सहित दस साल से ऐसा कर रहे थे.दो दिन पहले ही नूर हुसैन की 24 की बेटी सायरा परवीन की मौत हो गयी थी ,फरमान ने लाश को निकाल लिया ,जब वह आरिफ के साथ सायरा को कट कर पका रहा था ,तो पकड़ा गया . पुलिस ने देगची में लड़की के पैर बरामद किये . इन पिशाचों ने कबूल किया कि हमने बच्चे और कुत्ते भी खाए हैं .ऐसा करने की प्रेरणा हमें दूसरों से मिली है , जो यही काम कराते हैं .
विडियो लिंक
http://www.youtube.com/watch?v=uoDpLHCr7e0

8-हलाल से हराम तक 
खाने के लिए जितने भी जानवर मारे जाते हैं ,उनका कुछ हिस्सा ही खाया जाता है , बाकी का कई तरह से इस्तेमाल करके लोगों को खिला दिया जाता है ..इसके बारे में पाकिस्तान के DUNYA NEWS की समन खान ने पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाबू साबू नाले के पास बकर मंडी के मजबह (Slaughter House ) का दौरा करके बताया कि वहां ,गधे कुत्ते , चूहे जैसे सभी मरे जानवरों की चर्बी निकाल कर घी बनाया जाता है . यही नहीं होटलों में खाए गए गोश्त की हडियों को गर्म करके उसका भी तेल निकाल कर पीपों में भर कर बेच दिया जाता है ,जिसे जलेबी ,कबाब ,समोसे आदि तलने के लिए प्रयोग किया होता है . खून को सुखा कर मुर्गोयों की खुराक बनती है . फिर इन्हीं मुर्गियों को खा लिया जाता है .आँतों में कीमा भरके बर्गर बना कर खिलाया जाता है .विडियो लिंक
http://www.youtube.com/watch?feature=endscreen&NR=1&v=6YdtLZGsK_E

हमारी सरकार जल्द ही पाकिस्तान के साथ व्यापारिक अनुबंध करने जारही है ,और तेल या घी के नाम पर जानवरों की चर्बी और ऐसी चीजें यहाँ आने वाली हैं .
लोगों को फैसला करना होगा कि उन्हें पूर्णतयः शाकाहारी बनकर ,शातिशाली , बलवान ,निर्भय और जीवों के प्रति दयालु बन कर देश और विश्व कि सेवा करना है ,या धर्म के नाम पर या दुसरे किसी कारणों से प्राणियों को मारकर खाके हिसक क्रूर निर्दयी सर्वभक्षी पिशाच बन कर देश और समाज के लिए संकट पैदा करना है .
माँसाहारी अत्याचारी ,और अमानुषिक हो सकते हैं लेकिन बलवान और सहृदय कभी नहीं  हो सकते .
(200/27)

शनिवार, 11 जुलाई 2020

मुस्लिम देशों में अशांति क्यों है ?

आजकल लगभग सभी मुस्लिम देशों में विभिन्न कारणों से खूनी संघर्ष हो रहे हैं , जिसके फलस्वरूप रोज हजारों लोग मारे जा रहे हैं , फिरभी कुछ मुस्लिम धार्मिक नेता वास्तविकता पर परदा डालने के लिए कभी अमेरिका और कभी दुसरे देशों को इसका जिम्मेदार बताते रहते हैं . यह तो अच्छा है कि इन देशों में हिन्दू नहीं हैं , वर्ना यह मौलवी वहां के उपद्रवों और हत्याओं के लिए आर. एस .एस का नाम लगा देते .चूंकि इन मुस्लिम देशों के उपद्रवग्रस्त और अशांत होने से विश्व के सभी देशों से प्रभाव पड़ रहा है ,जो एक चिंता का विषय है ,कि आखिर क्या वजह है ,जिस के कारण न तो यह देश शांत रहते हैं ,और न ही दूसरों को शांतिपूर्वक रहने देते हैं .क्योंकि यह समस्या मुस्लिम देशों से सम्बंधित है , जहाँ बड़े बड़े उग्रवादी संगठन मौजूद है ,इसलिए कुरान और हदीसों आधार पर अशांति   के असली कारण बताये जा रहे हैं ,जो इस प्रकार हैं ,

1-वहां सभी मुसलमान हैं 
कुरान और हदीसों से साबित होता है कि , अल्लाह जिस बच्चे को भी जन्म देता है , वह धर्म के अनुसार पक्का मुसलमान होता है ,मुसलमानों का स्वभाव कैसा होता है ,सब जानते हैं ., और मुसलमानों के स्वभाव में किसी भी प्रकार का परिवर्तन संभव नहीं है .क्योंकि उनका स्वभाव ही उनका दीन( धर्म ) है .देखिये
"अल्लाह की सृष्टि में कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है ,क्योंकि यही दीन(धर्म ) है .लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते "सूरा -रूम 30 :30 
अबू हुरैरा ने कहा कि इस आयत के बारे में रसूल ने कहा कि ,हरेक बच्चा असली ईमान इस्लाम में जन्म लेता है ,"
"وروى أبو هريرة:
قال رسول الله: "كل مولود يولد مع الايمان الحقيقي للإسلام"

Narrated Abu Huraira:
Allah's Apostle said, "Every child is born with a true faith of Islam

Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 441)
Sahih Al-Bukhari, Volume 2, Book 23, Number 467

2-मुसलमानों  में अल्लाह की आत्मा 
इस्लामी मान्यता के अनुसार अल्लाह ने स्रष्टि का प्रथम व्यक्ति आदम बनाया था . और उसके शरीर बनाने के बाद उसमे अपनी आत्मा फूंक दी थी . इस तरह सभी आदम की संतानें हैं , और सभी में आदम के गुण मौजूद है ,
"हमने इन्सान को नख शिख से बिलकुल ठीक बनाया और ,फिर उसमे अपनी रूह फूंक दी "
सूरा -अस सजदा 32 :9 
"और फिर उसकी आत्मा को जैसा रचाना चाहा वैसा बनाया ,और जब इस काम में सफल हो गया तो ,आत्मा को और नीखर दिया "
सूरा -अश शम्श 91 :1 और 91 :9 

3-अल्लाह ने मनुष्य को कैसा बनाया 
कुरान के अनुसार अल्लाह ने आदम को नापतौल करके खोट रहित बिलकुल सही सही बनाया था ,और उसे अच्छा रूप ,और निष्पाप बनाया था
"हमने मनुष्य को सुन्दरतम रूप से बनाया है ,और उसे अच्छी प्रकृति प्रदान की है 
"सूरा -अत तीन 95 :4 
"उसी ने हरेक चीज को बनाया है ,फिर उसका ठीक से अंदाजा भी ठहराया है "
सूरा -अल फुरकान 25 :2 
उसी ने इन्सान का अच्छा स्वभाव दिया है "सूरा -तागाबुन 64 :3 

4-आदम अल्लाह प्रतिरूप है 
अगर हम इन हदीसों को गौर से पढ़ें तो पता चलता है कि आदम की केवल शक्ल ही नहीं सभी गुण भी अल्लाह के जैसे ही थे .यानि जो आदतें और स्वभाव अल्लाह के हैं ,वही आदम के भी थे , देखिये
"अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है , अल्लाह ने आदम को प्रतिरूप बनाया है "

Narrated Abu Huraira:The Prophet said, "Allah created Adam in HIS IMAGE
"
"وروى أبو هريرة: أن النبي قال: "خلق الله آدم على صورته"

 (Sahih al-Bukhari, Volume 8, Book 74, Number 246,


अबू हुरैरा ने कहा ,कि रसूल ने कहा है ,कि महान अल्लाह ने आदम को अपना प्रतिरूप बनाया है "

Abu Huraira reported Allah's Messenger as saying: Allah, the Exalted and Glorious, created Adam in HIS own image

"عن أبي هريرة رسول الله قوله: الله، عز وجل، ومجيد، وآدم خلق على صورته"

Sahih Muslim, Book 040, Number 6809
"अल्लाह के रसूल ने कहा ,यदि कोई अपने भाई से मारामारी करे ,तो उसके चहरे पर प्रहार करने से बचे , क्योंकि अल्लाह ने आदम को अपनी सूरत जैसा बनाया है "
The Messenger of Allah, may Allah bless him, said:“When any one of you fights with his brother, he should avoid his face for Allah created Adam in his or His own image.”


إِذَا قَاتَلَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ فَلْيَجْتَنِبْ الْوَجْهَ فَإِنَّ اللَّهَ خَلَقَ آدَمَ عَلَى صُورَتِهِ

 Sahih Muslim-BK 20  Hadith 4731

सही मुस्लिम कि इस हदीस व्याख्या करते हुए इब्न अजीबा ने "अल मुबहदिस अल असलिया" में कहा है ,इसका तत्पर अल्लाह जैसी सूरत नहीं ,उसके गुणों के बारे में कहा गया है ,
Ibn `Ajibah writes in the explanation of this hadith [al-Mabahith al-Asliyyah,(المباحث العامة )
line 22: "And the reality of the human has a pattern in the manners"
] hadith 20:4731

5-मनुष्यों को सारे गुण आदम से मिले 
चूँकि अल्लाह ने अपनी आत्मा और अपने सभी गुण जो आदम में प्रविष्ट कर दिए थे , वह पीढी दर पीढ़ी आदम की संतानों में पहुंचते रहे , और मनुष्य उसी के प्रभाव से काम करता रहा .
"लोग बोले यह गुनाह तो हमारे पूर्वज से आया है , हम तो उसके बाद पैदा हुए हैं ,क्या तू इसके लिए हमें विनष्ट कर रहा है "
सूरा -अल आराफ 7 :173 

6--दुर्गुण अल्लाह की देन हैं 
एक साधारण सा व्यक्ति भी समझ सकता है ,कि जिस दुकानदार के पास जो और जैसा माल होगा , वह ग्राहक को वैसा ही माल देगा . अल्लाह के पास आदम को देने के लिए जिस प्रकार के गुण थे उसके कुछ उदहारण दिए जा रहे हैं ,जो कुरान में बताये हैं ,
1 - कृतघ्न और अन्यायी 
"मनुष्य बड़ा ही अन्यायी और कृतघ्न है "सूरा -इब्राहिम 14 :34
"निश्चय ही मनुष्य खुला कृतघ्न है 'सूरा-अज जुखुरुफ़ 43 :15
"नाश हो जाये इस मनुष्य का ,कितना कृतघ्न है "सूरा - अबस 80 :17

2-झगड़ालू 
"मनुष्य प्रतक्ष्य झगडालू और विवाद करने वाला है "सूरा -अन नहल 16 :4 
"परन्तु मनुष्य सबसे बड़ा झगडालू है "सूरा -अल काफ 18 :54 
3-उतावला 
"मनुष्य बड़ा उतावला है ,और बुराई मांगता है "सूरा-बनी इस्राइल 17 :11 
"मनुष्य को उतावला पैदा किया गया है "सूरा -अल अम्बिया 21 :37 
4-पीड़ित 
"निस्संदेह हमने मनुष्य को कष्टों में ग्रस्त बनाया है "सूरा -अल बलद 90 :4 
5-तंग दिल 
"मनुष्य का दिल बड़ा ही तंग बनाया गया है "सूरा - बनी इसराइल 17 :100 
"मनुष्य कंजूसी करता है ,और दूसरों से कंजूसी करवाता है "सूरा -अल हदीद 57 :24 
6-कृतघ्न 
"जब उसे कोई नेमत प्रदान की जाती है ,तो फ़ौरन भूल जाता है "
सूरा अज जुमुर 39 :8 और 39 :49 
7-अत्याचारी 
"निश्चय ही मनुष्य बड़ा ही जालिम और जाहिल है "सूरा -अहजाब 33 :72 
8-चिड़चिड़ा 
"मनुष्य बड़े ही कच्चे दिल का बनाया गया है "सूरा -अल मुआरिज 70 :19 
9-स्वार्थी ,लोभी 
"जब कृपा की जाती है तो ,किनारा कर देता है ,और जब तकलीफ पड़ती है तो दुआ करता है "
 सूरा अस सजदा 41 :51 
"लोभ तो इन्सान के सामने ही रहता है " सूरा अन निसा 4 :128 
7-निष्कर्ष
जिस देश और समाज के लोगों का चारित्रिक रूप से घोर पतन हो गया हो ,जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हों ,वह विश्व के लिए खतरा बने रहेंगे .जब खुद अल्लाह ने ऐसे लोगों में ठूंस ठूंस कर सारे दुर्गुण भर दिए हैं .इसका एक नमूना देखिये ( विडियो )
Mullha-who raped 48 dead bodies in Pakistan Must watch

http://www.youtube.com/watch?v=M4Pg-teqraY

जब अल्लाह ने ऐसे ऐसे लोग बना दिए हैं ,और जिनका स्वभाव बदल नहीं सकता ,तो वह हमेशा अशांति ही फैलाते रहेंगे .इनको शांत करने का वही उपाय है जो अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन पर आजमाया था.
(200/26)

शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

शिवाजी महाराज के राष्ट्रकवि - भूषण


छत्रपति    महाराजा  शिवाजी   की  जितनी    भी प्रसंशा   की  जाये  सूर्य   के आगे  दीपक  जलाने     जैसा   होगा  , हमारी दृष्टि  में  शिवाजी ने  हिन्दू  धर्म  और  हिन्दुओं   की  रक्षा  और  म्लेच्छों   का   नाश  करने   के लिए   अवतार   लिया   था   , क्योंकि   जब 1674   में   शिवाजी  का  राज्याभिषेक  हुआ  था  तो   बनारस  के पंडित  गंगा  भट्ट   ने शिवाजी  वंशावली   उनको  दिखाई   थी  ,  जिसके  अनुसार   उनका  जन्म   सूर्यवंशी  क्षत्रिओं    में   हुआ    , जो  भगवान  राम   का  कुल   है   , 

लेकिन   बड़े  दुर्भाग्य   की  बात  है  कि वर्त्तमान  नयी  पीढ़ी   के  युवा   शिवाजी   के राष्टकवि  "भूषण  कवि" और  कविता  के   बारे में   बहुत  कम जानते  हैं,

1-भूषण   कवि   कौन   थे ?
 आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार भूषण का जन्म संवत 1670 तदनुसार ईस्वी 1613 में हुआ। उनका जन्म स्थान कानपुर जिले में तिकवांपुर नाम का ग्राम बताया जाता है। उनके पिता का नाम रत्नाकर त्रिपाठी था। वे काव्यकुब्ज ब्राह्मण थे .इनके   बड़े   भाई  मतिराम   भी  कवि  थे   , लेकिन   वह  श्रगार  रस  की  कवितायेँ     तत्कालीन   राजाओं   को  सूना  कर     उनसे  इनाम   लिया  करते   थे  ,  भूषण   को  यह   बात पसंद   नहीं  थी   , वह  मानते  थे  "  प्राकृत  जन  कीन्हें  गुणगाना   ,सिर धुनि लागि पड़ा पछताना  " (  तुलसी  दास )      अर्थात किसी भी   निर्गुण  व्यक्ति  की  तारीफ  करने  पर  बाद  में पछताना   पड़ता  है  , चूँकि  उस  समय   दिल्ली  पर  औरंगजेब   का  राज था  , और  कई  कवि  धन  के लालच  में  दिल्ली जाकर  औरंगजेब  की तारीफ   में  कवितायेँ   लिखा  करते  थे  , एक   बार   भूषण   के बड़े   भाई   ने अपने साथ   लिया   और   कहा  की    तुम   बादशाह     को  अपनी  कविता   सुनाओगे  तो  वह    इनाम  देगा  ,
भूषण  ने  औरंगजेब  से  कहा  कि  मेरी  कविता  सुन ने  से  पहले  कुरान  की  कसम  खाओ  की कविता    सुन  कर  मुझे  कुशल  पूर्वक  जाने  दोगे ,
औरंगजेब  मान  गया    , तब  भूषण   ने  कविता  सुनाई 
2-भूषण  की  पहली  कविता 
भूषण   ने  यह  कविता  भरे दरबार   में  औरंगजेब  को  सम्बोधित  कर के  सुनाई  .

"क़िबले   के ठौर   बाप   बादशाह  शाहजहाँ  ताको  कैद  कीनो   नेक  सरम   नहीं  आयी   है ,
दारा  की  आँख  काढ़ी नगर  में  ढिंढोरो  कर ऐसे  कुकर्म   कीने   कौन  सी  कमाई    है  ,
सगे  भाई   शुजा और मुराद बक्स  कतल   कीने मानो  निज कुल  की  नाक सी  कटाई  है  
भूषण  कवि  कहे सुनो  औरंगजेब   इतने  काम  कीने  तब  बादशाही   पायी   है " 

शिवाजी  के दरबार  में भूषण  कवि   ( चित्र )


http://1.bp.blogspot.com/-D7afc_1nHms/UnJWDHPK5bI/AAAAAAAABng/vfV0c-Nh7_E/s1600/e0a4b6e0a4bfe0a4b5e0a4b0e0a4bee0a4af-e0a4b8e0a49ae0a4bfe0a4a8-e0a4a1e0a495e0a4b2e0a587-10.jpg


इतना सुनते ही  औरंगजेब  गुस्से  से  आगबबूला   हो गया  और सैनिकों  को  बोला  इस  बदजुबान को  मुग़ल राज   की  सीमा  से बहार   खदेड़  दो  , उन  दिनों पूरे  देश में शिवजी   की  जय जय कार  हो  रही  थी  , इसलिए   भूषण   शिवजी  के  दर्शन के लिए  पूना  की  तरफ  चल   पड़े 

3-कविता पवित्र हुयी 
कहा जाता  है कि भूषण   को  शिवाजी  रास्ते   में ही  मिल   गए   थे   ,  और   जब  उनको    भूषण   ने   कुछ  कवितायेँ  सुनायी  तो  प्रसन्न  होकर  शिवाजी  ने उनको  दरबार  आने   का   आमंत्रण   दिया   , इस  पर  भूषण    ने   कहा  है  ,

ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी .
राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.
भूषण यों कलि के कविराजन राजन के गुन गाय नसानी.
पुन्य चरित्र सिवा सरजे सर न्हाय पवित्र भई पुनि बानी .

4-औरंगजेब   के  अत्याचार 
भूषण ने औरंगजेब के क्रूरतापूर्ण व्यवहार का उल्लेख करते हुए बताया है कि उस समय हिन्दुओं के देवस्थानों को गिराया जाता था, देवमूर्तियाँ तोड़ दी जाती थीं । हिन्दुओं के पूज्य पुरुषों , महात्माओं को सताया जाता था। इस इस रूप लें कि एक धर्मान्ध-व्यक्ति का आतंक किस हद तक मानवता को भयाक्रांत कर सकता है

देवल गिरावते फिरावते निसान अली
ऐसे समै राव-रानै सबै गए लबकी
गौरा गनपति आप , औरन को देत ताप
अपने मुकाम सब मारि गए दबकी  .

भूपन भनत भाग्यो कासीपति विश्वनाथ , 
और कौन गिनतीमें भूली गति भब की | 
चारों वर्ण धर्म छोडि कलमा निवाज पढ़ी , 
सिवाजी न होतो तो सुनति होत सब की || 1
पीर पयगम्बरा दिगम्बरा दिखाई देत
सिध्द की सिधाई गई, रही बात रब की
काशी हू की कला गई  मथुरा मसीत भई
शिवाजी न होतो तो सुनति होती सबकी  .

5-औरंगजेब असुर था 
कुम्करण असुर अवतारी औरंगजेब,
कशी प्रयाग में दुहाई फेरी रब की।
तोड़ डाले देवी देव शहर मुहल्लों के,
लाखो मुसलमाँ किये माला तोड़ी सब की

ऐसे समय शिवाजी जैसे जननायक की आवश्यकता थी जो इन  अत्याचारों पर अंकुश लगाये, या इस प्रकार कहें कि इस विषम परिस्थिति में जनता की आवाज की प्रतीक बन जाये। शिवाजी की प्रशंसा इसलिए भूषण ने की, क्यों कि वे एक समूची संस्कृति के लोकाचारों, मान्यताओं और परम्परा को विनष्ट करने के गैरलोकतांत्रिक कार्य के विरुध्द खड़े थे। शिवाजी द्वारा व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्थाओं की सुरक्षा और सैनिकों को भावनात्मक व रोजगार परक सहारा इस पूरी प्रक्रिया में भूषण की कविता से प्रकट होता है-

6-शिवाजी  की  महानता 
भूषण कवि   मानते थे  कि  शिवाजी  का  अवतार   म्लेच्छों   का  नाश  करने  के लिए  ही  हुआ  है  , भूषण  कहते हैं , 

इन्द्र जिमि जंभपर , वाडव सुअंभपर | 
रावन सदंभपर , रघुकुल राज है || 1 || 

पौन बरिबाहपर , संभु रतिनाहपर | 
ज्यो सहसबाहपर , राम द्विजराज है || 2 || 

दावा द्रुमदंडपर , चीता मृगझुंडपर | 
भूषण वितुण्डपर , जैसे मृगराज है || 3 || 

तेजतम अंसपर , कन्हजिमि कंसपर | 
तो म्लेंच्छ बंसपर , शेर सिवराज है || 4 || 

Indra Jimi Jambha Par  -(VideoNo .1)

https://www.youtube.com/watch?v=fSKQRNWXrQg

ऐसी  एक  और  ओजस्वी  कविता   देखिये

सक्र जिमि सैल पर अर्क तमफैल पर बिघन की रैल पर लम्बोदर देखिये|
राम दसकंध पर भीम जरासंध पर, "भूषन" ज्यों सिन्धु पर कुम्भज बिसेखिये||
हर ज्यों अनंग पर गरुड़ ज्यों भुजंग पर कौरव के अंग पर पार्थ जो पेखिये|
बाज जो विहंग पर सिंह ज्यों मतंग पर म्लेंच्छ चतुरंग पर सिवराज देखिये||

7 -हिन्दू  धर्म  रक्षक   शिवाजी 
शिवाजी   ने   दुष्टों    का   नाश  करके    हिन्दू  राज्य   की  स्थापना  की  थी   ,  यह   बात  भूषण    ने   इन  शब्दों में   वर्णित    की  है

वेद राखे विदित पुरान परसिध्द राखे

राम नाम राख्यो अति रसना सुघर में

हिन्दुन की चोटी रोटी राखी है सिपाहिन की

कांधे में जनेऊ राखो माला राखी गर में  .
मीड़  राखे   मुग़ल  मरोड़  राखे  बादशाह 

पीस  राखे  वैरी  वरदान  राखो  कर  में 

राजन  की  हद्द राखी  तेग  बल  शिवराज 

देव  राखे देवल स्वधर्म  राखो  घर   में 

8-शिवाजी  की सेना  का  वर्णन 

एक बार  जब  शिवाजी  अपनी  सेना   सजा कर  मुगलों  से  युद्ध  की  तैयारी  कर रहे थे   , भूषण  उस  दृश्य  का  सजीव   वर्णन   किया है  ,

"साजि चतुरंग बीर रंग में तुरंग चढी ।

सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं ।

भूषन भनत नाद बिहद नगारन कें ।

नदी नद मद गैबरन के रलत हैं ।

ऐल फैल खैल भैल खलक में गैल गैल ।

गजन की ठैल पैल सैल उसलत हैं ।

तारा सो तरनि धूरि धारा में लगत जिमि

थारा पर पारा पारावार यों हलत हैं ॥.
( VideoNo 2)

https://www.youtube.com/watch?v=sGf5IBJGgVk


हम   जब  सन  1965  में   नौवीं  कक्षा  में  पढ़ते थे  ,तो  भूषण  की  कवितायेँ  हमारे  पाठ्यक्रम    में  थी   , इंदिरा  के  राज  में   वह  निकाल  दी गयीं .  लेकिन   भूषण  के  कुछ  कवित्त     हमें  याद   थे   जिनका   प्रयोग इस  लेख    में  किया   गया   है  ,     हमें  विश्वास   है  कि भूषण  कवि की  इन  कविताओं   को पढ़  कर  हिन्दुओं   में  शिवाजी  महाराज  के प्रति  आस्था  दृढ  होगी  ,  हिन्दुओं  में   धर्म       की  रक्षा  और   म्लेच्छों  के  विनाश  के लिए  जोश  पैदा  होगा  , अच्छा  तो यह  होगा  की  लोग  इन  कविताओं   को  याद  करके  मित्रों   को  सुनाएँ .

 पाठकों से विनम्र   निवेदन -.इस  लेख  में  दो   विडिओ    दिए  गए   हैं   ,कृपया   उनको   पूरा  अवश्य   देखिये  , तभी  आपको    कविता   का आनंद  आएगा 

  ( 284)     

 

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

अरबोपनिषद

यह एक कटु सत्य  है कि अधिकांश  हिन्दू   अपने प्राचीन  वैदिक धर्म ग्रंथों   के बारे में अनभिज्ञ  हैं  ,पढ़ना तो दूर की बात है ,उनके  नाम भी नहीं  जानते   , इसलिए  चालाक  इस्लाम के  प्रचारक  दावा  करते रहते हैं कि हिन्दू ग्रंथों में मुहम्मद , अल्लाह , मदीना   आदि  का उल्लेख  है , अर्थात इस्लाम वैदक  धर्म  का अद्यतन  ( Updated  )  रूप  है  ,  इसलिए  हिन्दुओं  को चाहिए की वह  इस्लाम  काबुल  कर  लें  ,यह सन 2010 की बात   है एक मुस्लिम  ब्लॉगर ने मुझ से कहा कि आपके  उपनिषद्  में  साफ  रूप में मुहम्मद , रसूल और अल्लाह  का उल्लेख है  , इसलिए  अगर तुम   वैदिक धर्म के सच्चे  मानने वाले  हो तो मुस्लिम बन  जाओ   और  सबूत के उस ब्लॉगर ने "अल्लोपनिषद   "   पेश  कर   दिया  , ( यह उपनिषद्    सत्यार्थ प्रकाश  के  14 वें सम्मुल्लास  में मौजूद   है   ) हमने उस ब्लॉगर  को कहा कि यह  एक फर्जी उपनिषद्  है जो  अकबर  ने बनवाया  था  ,  ,इसमें संस्कृत  और अरबी मिश्रित  भाषा  है   , यानि  नकली  है  , फिर  भी उस ब्लॉगर  ने चुनौती  देकर  कहा  कि अगर  तुम  में हिम्मत  हो  तो  ऐसा   उपनिषद् बना  कर  दिखाओ ,तब मुस्लिम  ब्लॉगरों   को मुंह तोड़  उत्तर  देने के लिया हमने  यह लेख पोस्ट किया  था
वेदों के एक हज़ार से अधिक उपनिषद् बताये जाते हैं .परन्तु उन में से अधिकाँश उपलब्ध नहीं हैं .जब मुस्लिम आक्रान्ताओं ने तक्षशिला और नालंदा के ग्रंथागारों को जला दिया था कई ग्रन्थ जल गए थे.बाद में विद्वानों ने जितना भी याद था उसे लिख लिया था.जो कुछ बच सके थे वह भी पूरी तरह से प्रमाणिक नहीं माने नहीं जा सकते.कई उपनिषदों के केवल एक ही प्रपाठक हैं .आज सिर्फ 13  उपनिषद् ही प्रमाणिक माने जाते हैं .जो संदिग्ध हैं उन में अल्लोपनिशषद और अरबोपनिषद मुख्य हैं .मुसलमान अगर अल्लोपनिषद को प्रमाणिक मान कर उसे वेदों का अंग बता रहे हैं ,तो उन्हें अरबोपनिषद को भी मानना चाहिए .क्योंकि दौनों एक जैसे हैं ,दौनों में अरबी और संस्कृत मिश्रित है .इस से दौनों समकालीन लगते हैं.इसका निर्णय विद्वान ही कर सकते हैं .जो दोनो भाषाएँ जानते हों .हम आपको अरबोपनिषद बता रहे हैं

अथ अरबोपनिषद 

अलल हुब्ल अलल हुब्ल -1

ला इलाह ला इलाह नास्ति अल्ला कदाचन -2 

लमैयता बनी हाशिम बिल मुल्क ,फिमा खबर जाअ व् ला वही नज़ल -3

ईश ग्रन्थ कर्तारौ सर्वे धूर्तौ सुनिश्चिता -तस्मिन् अल्ला अव्वला-4

इन्नाल्लाहा खैरुन माकीरीन-5

एतत सत्य धर्मं प्रकाश्येत -6

जाला सत्य जहकल मिथ्या ,निश्चय मिथ्या कान जहूक -7 

एको ईश वहिदुं नास्ति इलाहा अल्लापि-8 

अल्ला बरीयुं मिन सर्वे मुसलमीन व् रसूलिही -9

तस्मात् ला तज़रुन्ना दीनुकुम स्वधर्मे निधनं श्रेयः -10 

ला फिकर कर्तव्यं ,न कर्तव्यं ज़िक्रे अला -11

ज्ञान विज्ञान संयोगेन सर्व कार्यं फ़तेह भवेत् -12

ला इलाह ला इलाह मुदीरयेत ,हाजल दीनुल कय्यमा -13

सुम्मा एवमस्तु आमीन -14

कृष्ण यजुर्वेद शुबयान कंडिका द्वादश समाप्त 

अर्थ -
हुब्ल की जय हो जय हो -1

कोई इलाह नहीं है और न कोई अल्ला है -2

बनी हाशिम ने लोगों को चकमा दिया न आसमान से किताब आयी और न वही नाजिल हुई ,

कताबें बनाने वाले दोनो धूर्त थे -3

यह बात सिद्ध है -4

अल्लाह इन मेसे सबसे बड़ा धूर्त है -5

इसलिए सत्य का अनुसरण करें -6

सत्य की जीत होतीहै और असत्य भाग जाता है -7

एक ही ईश्वर है ,अल्लाह नहीं -8

अल्लाह मुसमानों से अलग है और सभी नबियों स -9

इसलिए अपना धर्म न छोड़ें -10

न चिंता करें न अल्ला का नाम लें -11

विज्ञान और ज्ञान से सारी समस्याए हल होंगीं -12 

कोई इलाह नहीं है समझ लें ,यही तथ्य है -13 

ऐसा ही हो एवमस्तु -14

उपनिषद्    -समाप्तः(18/06/2010

 प्रस्तुति -आचार्य  मौलवी  बी  एन  शर्मा (भंडाफोडू )
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अरबोपनिषद को फर्जी   कहने वाले मुस्लिम  ब्लॉगर  याद रखें     , या तो  दोनों  उपनिषद्  पूरी तरह से  फर्जी है     या दौनों  प्रामाणिक  है  ,  ऐसा नहीं  हो सकता  है जो तुम्हारे पक्ष  में है वह सही  है ,और जो विरुद्ध  है वह फर्जी  है   ,यह दोगली निति नहीं  चलेगी  ,और  अगर   ऐसी मक्कारी से हिन्दुओं  को गुमराह  करने का प्रयास  करोगे   तो हम  सूरा  फातिहा  जैसी  दूसरी सूरा बना  कर पोस्ट  कर देंगे ,
"जो कांटा  बुवे ताहि बोए तू भाला   ,वह  भी हरदम  यद् करेगा पड़ा  किसी से पाला ""

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रविवार, 5 जुलाई 2020

शिवाजी का पत्र-गद्दार मिर्जा राजा जयसिंह के नाम

भारतीय इतिहास में दो ऐसे पत्र मिलते हैं जिन्हें दो विख्यात महापुरुषों ने दो कुख्यात व्यक्तिओं को लिखे थे .इनमे पहिला पत्र "जफरनामा "कहलाता है .जिसे श्री गुरु गोविन्द सिंह ने औरंगजेब को भाई दया सिंह के हाथों भेजा था .यह दशम ग्रन्थ में शामिल है .इसमे कुल 130 पद हैं .दूसरा पत्र शिवाजी ने आमेर के राजा जयसिंह को भेजा था .जो उसे 3 मार्च 1665 को मिल गया था.इन दोनों पत्रों में यह समानताएं हैं की दोनों फारसी भाषा में शेर के रूप में लिखे गएहैं .दोनों की प्रष्ट भूमि और विषय एक जैसी है .दोनों में देश और धर्म के प्रति अटूट प्रेम प्रकट किया गया है .जफरनामा के बारे में अगली पोस्टों में लिखेंगे .
 शिवाजी का पत्र बरसों तक पटना साहेब के गुरुद्वारे के ग्रंथागार में रखा रहा ..बाद में उसे "बाबू जगन्नाथ रत्नाकर "ने सन 1909 अप्रेल में काशी में

काशी नागरी प्रचारिणी सभा से प्रकाशित किया था.बाद में "अमर स्वामी सरस्वती ने उस पत्र का हिन्दी में पद्य और गद्य ने अनुवाद किया था.फिर सन 1985 में अमरज्योति प्रकाशन गाजियाबाद ने पुनः प्रकाशित किया था 'जिसका फारसी से  हिन्दी  लिप्यांतरण  और  अर्थ    हमने   किया है .

राजा जयसिंह आमेर का राजा था ,वह उसी राजा मानसिंह का नाती था ,जिसने अपनी बहिन अकबर से ब्याही थी .जयसिंह सन 1627 में गद्दी पर बैठा था .और औरंगजेब का मित्र था .औरंगजेब ने उसे 4000 घुड सवारों का सेनापति बना कर "मिर्जा राजा "की पदवी दी थी .औरंगजेब पूरे भारत में इस्लामी राज्य फैलाना चाहता था.लेकिन शिवाजी के कारण वह सफल नही हो रहा था .औरंगजेब चालाक और मक्कार था .उसने पाहिले तो शिवाजी से से मित्रता करनी चाही .और दोस्ती के बदले शिवाजी से 23 किले मांगे .लेकिन शिवाजी उसका प्रस्ताव ठुकराते हुए 1664 में सूरत पर हमला कर दिया .और मुगलों की वह सारी संपत्ति लूट ली जो उनहोंने हिन्दुओं से लूटी थी

फिर औरंगजेब ने अपने मामा शाईश्ता खान को चालीस हजार की फ़ौज लेकर शिवाजी पर हमला करावा दिया .और शिवाजी ने पूना के लाल महल में उसकी उंगलियाँ काट दीं.और वह भाग गया

फिर औरंगजेब ने जयसिंह को कहा की वह शिवाजी को परास्त कर दे .जयसिंह खुद को राम का वंशज मानता था .उसने युद्ध में जीत हासिल करने के लिए एक सहस्त्र चंडी यग्य भी कराया .शिवाजी को इसकी खबर मिल गयी थी जब उन्हें पता चला की औरंगजेब हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़ाना चाहता है .जिस से दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे .तब शिवाजी ने जयसिंह को समझाने के लिए जो पत्र भेजा था ,उसके कुछ अंश हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे है -

1 -जिगरबंद फर्जानाये रामचंद -ज़ि तो गर्दने राजापूतां बुलंद .

हे रामचंद्र के वंशज ,तुमसे तो क्षत्रिओं की इज्जत उंची हो रही है .

2 -शुनीदम कि बर कस्दे मन आमदी -ब फ़तहे दयारे दकन आमदी .

सूना है तुम दखन कि तरफ हमले के लिए आ रहे हो 

3 -न दानी मगर कि ईं सियाही शवद-कज ईं मुल्को दीं रा तबाही शवद ..

तुम क्या यह नही जानते कि इस से देश और धर्म बर्बाद हो जाएगा.

4 -बगर चारा साजम ब तेगोतबर -दो जानिब रसद हिंदुआं रा जरर.

अगर मैं अपनी तलवार का प्रयोग करूंगा तो दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे 

5 -बि बायद कि बर दुश्मने दीं ज़नी-बुनी बेख इस्लाम रा बर कुनी .

उचित तो यह होता कि आप धर्म दे दुश्मन इस्लाम की जड़ उखाड़ देते 

6 -बिदानी कि बर हिन्दुआने दीगर -न यामद चि अज दस्त आं कीनावर .

आपको पता नहीं कि इस कपटी ने हिन्दुओं  पर क्या क्या अत्याचार किये है 

7 -ज़ि पासे वफ़ा गर बिदानी सखुन -चि कर्दी ब शाहे जहां याद कुन 

इस आदमी की वफादारी से क्या फ़ायदा .तुम्हें पता नही कि इसने बाप शाहजहाँ के साथ क्या किया ?

8 -मिरा ज़हद बायद फरावां नमूद -पये हिन्दियो हिंद दीने हिनूद 

हमें मिल कर हिंद देश हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के लिए लड़ाना चाहिए 

9 -ब शमशीरो तदबीर आबे दहम -ब तुर्की बतुर्की जवाबे दहम .

हमें अपनी तलवार और तदबीर से दुश्मन को जैसे को तैसा जवाब देना चाहिए 

10 -तराज़ेम राहे सुए काम ख्वेश -फरोज़ेम दर दोजहाँ नाम ख्वेश 

अगर आप मेरी सलाह मानेंगे  तो आपका लोक परलोक नाम होगा .

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इस पत्र से आप खुद अंदाजा कर सकते है .शिवाजी का देश और धर्म के साथ हिन्दुओ के प्रति कितना लगाव था .हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हम उनके अनुयायी है .हमें उनके जीवन से सीखना चाहिए .तभी हम सच्चे देशभक्त बन सकते हैं


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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

मुहम्मद के ससुर -सहाबियों का आदर्श दुश्चरित्र और महान कुकर्म

इस्लाम अल्लाह का पसंदीदा और सर्वश्रेष्ठ धर्म है.इसलिए अल्लाह ने इस्लाम के शुरुआती दौर में ही इस्लाम में आसानी कर दी थी .इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ती अपने सारे जीवन में एक बार भी ,चलते फिरते मुहम्मद को देख लेता था तो वह "सहाबा"यानी मुहम्मद का companion बन जाता था.और जो किसी सहाबा को देख लेता था वह "ताबीइन"बन जाता था .इसी तरह जो व्यक्ति ताबीइन को देख लेता था वह ताबये ताबीइन बन कर महान और इज्जतदार बन जाता था .धीमे धीमे ऐसे लोगों की काफी बड़ी संख्या हो गयी थी .पाहिले यह लोग मुहम्मद की पत्नी आयेशा से मिलकर मुहम्मद के बारे में जानकारियाँ जमा करते थे ,जैसे मुहम्मद ने क्या कहा ,वह क्या खाते या क्या पहिनते हैं ,आदि चूंकि मुहम्मद के ससुर अबूबकर और उमर मुहम्मद के घर के पास रहते थे ,वे पाहिले सहाबी बन गए .इन सहबियों ने मुहम्मद के बारे में में या जो भी कथन था वह लोगों तक पहुंचा दिया .इन लोगों को 'रावी "या narraator भी कहा गया है .सारी हदीसें इन लोगों के द्वारा ही कही गयी हैं .

बाद में यही लोग जिहाद के नामपर जगह जगह से माल लूटने लगे .और लूट का पांचवां हिस्सा आयेशा के घर भेजने लगे .जब यह फ़ौज बढ़ गयी तो अबूबकर ने एक चाल चली .उसने अपनी बेटी मुहम्मद की औरत को "उम्मुल मोमिनीन "यानी मुसलमानों की अम्मा का खिताब देकर सारे लोगों का नेता बना दिया .सब आयेशा की बात मानने लगे.चारों तरफ से लूट का माल आने से अबूबकर धनवान हो गया .इसी तरह उमर भी पैसे वाला बन गया .इन लोगों को सत्ता का खून लग चुका था .और उनके दिलों में बादशाह या खलीफा बनाने का लालच पैदा हो गया .

मुहम्मद को यह पता था ,लेकिन वह अपने दामाद अली को खलीफा बनाना चाहता था.मुहम्मद कयी बार लोगोंके सामने अपनी यह इच्छा प्रकट की ही .क्योंके अली एक नेक दिल इंसान थे वह भारत को शान्ति प्रिय देश मानते थे."मुहम्मद ने कहा की "अना मदीनतुल इल्म व् अलीयुन बाबुहा "मैं ज्ञान का नगर हूँ और अली उसके द्वार हैं .

जब अबूबकर और उमर को इसकी भनक पड़ी तो उन्हों ने अपनी बेटीओं आयेशा और हफ्शा के द्वारा मुहम्मद को जहर दिलवा दिया .मुहम्मद बीमार पड़ गया .जब उसे लगा की उसका अंतिम समय आने वाला है ,तो उसने अबुबकर से कहा कि जल्दी से मेरे पास कागज़ कलम लाओ .ताकि मैं अपनी वसीयत लिख दूँ जिससे बाद में कोई विवाद न हो .

देखिये -कन्जुल उम्माल -जिल्द 1 पेज 283 हदीस 939 .और ,
बुखारी -जिल्द 7 पेज 22 और ,
मुस्लिम जिल्द 2 पेज 14 

लेकिन अबूबकर को डरथा कि कहीं मुहम्मद अली को वारिस न बनादें .उसने मुहम्मद से कहा कि या रसूल अगर आप अपनी वसीयत लिखाकर सब को बता देंगे तो आपकी यह पोल खुल जायेगी कि आप अनपढ़ हैं और कुरआन अल्लाह की किताब है .जब लोगों को पता चलेगा कि आप लिख पढ़ सकते हैं यहूदी ईसाई कहेंगे कि कुरआन मुहम्मद ने रची है .यह सुनकर मुहम्मद डर गया .और वसीयत लिखने से रुक गया .

आखिर 63 साल की आयु में दिनाक 8 जून सन 632 को मुहम्मद दुनिया से बिना वसीयत लिखे ही कूच कर गए .

आयेशा और अबूबकर से साथ उमर भी अली से नफ़रत करते थे .इनके साथ कुरैश के कई लोग भी थे .आयेशा को अली से खतरा था .उस समय अली बसरा में थे आयेशा ने अली की ह्त्या करवाने के लिए एक भारी फ़ौज जमा कि .और अली पर हमला कर दिया आयेशा खुद अल अक्सर नाम के ऊंट पर सवार होकर लोगों को अली की ह्त्या के लिए उकसा रही थी यह युद्ध सन 656 में बसरा में हुआ था .इस युद्ध को इतिहास में "जंगे जमल"यानी ऊंटों का युद्ध कहा गया है .इसमे अली के 1070 लोग मारे गए ,लेकिन वह जीत गए 

जब अली जीतकर मदीने आये तो अबूबकर और उमर ने फिर चाली .जैसी मुसलमानों की आदत होती है .इन लोगों में अली से समझौता कर लिया .और पाहिले सहाबियों को रिश्वत देकर पटा लिया .फिर कहा कि जिसके पक्ष में सबसे जादा सहाबी होंगे वे संख्या के अनुसार खलीफा बनेंगे .अली के पक्ष में सिर्फ तीन लोग आये ,
1 मिकदाद बिन अस्वाद 
2 अबू जरार गफारी और
3सलमान फारसी 

इसा तरह मक्कारी से इस्लाम की हुकूमत हो गयी .जिसे खिलाफत कहते हैं .अली का क्रम चौथा कर दिया गया .खलीफों के नाम यह हैं -

1 -अबूबकर सन 632 में बना 634 में बीमार हो कर मर गया

2 -उमर बिन खत्ताब 634 से 644 में मर गया

3 -उस्मान बिन अफ्फान 644 से 656 इसकी ह्त्या की गयी

4 -अली बिन अबूतालिब 656 से 661 इनकी भी ह्त्या की गयी थी

इसके बाद मुआविया बिन अबू सुफ़यान और फी यजीद बिन मुआविया खलीफा बने .अली को छोड़ सभी खलीफाओं ने जो जो कुकर्म किये उस से इंसानियत काँप उठी थी .आज भी इनकी औलादें और अनुयायी अरब पर राज कर रहे है ,जिन्हें वहाबी या अहले हदीस कहा जाता है .

   इमाम जाफर सादिक जो सन 703 में पैदा हुए उन्होंने अपनी किताब "हयातुल कुलूब "और "हक्कुल ईमान "में इन खलीफों के बारे में जो लिखा है वह दिया जा रहा है .याद रहे इमाम जाफर मुहम्मद के वंशज है ,जो झूठ नहीं बोल सकते .

1 -आयेशा और हफ्शा ने मुहम्मद को जहर दिया था ,जिससे कुछ दिनों बाद वह मर गए. हक्कुल य -पेज 870 

2 -इमाम जैनुल अबिदीन ने कहा कि अबूबकर और उस्मान काफिर हैं .
हक्कुल य पेज 522 

3 -जो अबूबकर और उमर को मुसलमान मानते हैं उनपर अल्लाह और रसूल की लानत है 
हक्कुल य पेज 680 

4 -इमाम जाफर रोज अपनी फर्ज नमाजों के बाद इन लोगों पर नयमित लानत भेजते थे .अबूबकर,उस्मान ,उमर .,मुआविया ,आयेशा ,हफ्शा और मुआविया की बहिन उम्मुल हकीम
 पेज -342 

5 -इमाम जाफर ने कहा कि सीरिया के लोग रोमनों सेजादा नीच हैं और मक्के वाले उन से अधिक ,लेकिन मदीने के लोग सबसे सत्तर गुना बदकार हैं .

हयातुल कुलूब जिल्द 2 पेज 410 


6 -हजार जफ़र ने कहा कि अरब की उम्मत वेश्याओं की तरह है ,जो सूअर की तरह बच्चे पैदा कर रही है अरब की उम्मत वेश्याओं की संतान है 

.हयातुल कुलूब -पेज 337 

8 -जब खालिद बिन वलीद ने मालिक इब्ने नावरिया के कबीले के सरदार को क़त्ल किया तो उसी समय सबके साने उसकी औरत से बलात्कार किया.और सरदार के सर को तंदूर में पका कर अपनी शादी का वलीमा किया था.
हयातुल कुलूब -पेज 100

9 -जब मुहम्मद की औरतें खेत में शौच के लिए जाती थीं ,तो उमर उनसे गंदे इशारे करता था .
हया -पेज 430 

10 -शराब हराम होने के बाद भी उमर जम कर शराब पीताऔर इसी से उसकी मौत हुई थी -
हया-पेज 430 

11 -उमर अपनी औरतों के साथ पीछे से सम्भोग करता था .anal sex ".हया-पेज 432 

12 -उस्मान ने अपनी पत्नी को जब वह बीमार थी ,अत्याधिक सम्भोग करके मार डाला था .जब उसकी पत्नी उम्मे कुलसुम मर गयी तो उसकी लाश से भी सम्भोग किया था .

हयातुल कुलूब जिल्द 2 पेज 432 

13 -सारे अहले सुन्नत बिदती और बिलाशक काफिर है 
.ह यकीन पेज 384 

ऐसे और केई उदाहरण है .लेकिन कुछ लोग इस्लाम की यह खूबियाँ जान कर मुसलमान बन रहे है ,खिलाड़ी ,कबाड़ी ,साहित्यकार और सहत्याकार सभी ऊंट की तरह मक्के की तरफ दौड़ रहे .शायद उन्हें पता है घुसना आसान है पर निकलना असंभव है

मुस्लिम ब्लोगर अक्सर घुमाफिरा कर सेक्स पर आ जाते है .इसलिए उनके लिए इसी विषय पर जल्द ही लिखा जाएगा ..प्रतीक्षा करें

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बुधवार, 1 जुलाई 2020

भंडाफोड़ू :विरोधियों की पराजय

 अभी  तक  अपने पढ़ा की मुस्लिम महिला ब्लॉगरों  को मैदान में उतरने पर भी  यह मेरा कुछ  नहीं बिगड़ पाए उलटे हमारे पाठकों  और  मित्रों की संख्या  दोगुनी  हो गयी  यहाँ तक कई हिन्दू और आर्यसमाज  की साइटों में हमारे  लेख छपाने  लगे तो   विरोधी नयी तरकीब खोजने  लगे   किस्मत से उनको एक अवसर  मिल  गया ,
1-मुस्लिम पत्रकारों  की योजना 
दिनांक 19 जून 2011 को दिल्ली में बढ़ाते हुए यौन अपराधों के विरुद्ध  ( against sexual violence   )  एक स्लट वाक (Slut walk  )  हुआ था  ,इसका अर्थ बेशर्मी  मोर्चा  होता  है , इसका आयोजन "उमंग  सब्बरवाल  के किया  था , इस मोर्चे  की कवरेज के लिए कई पत्रकार  दिल्ली में गए  थे , वहीँ  एक सभा में हमारे  ब्लॉग की  भी चर्चा  हुई   थी  , वहीँ  एक मुस्लिम  पत्रकार  ने  ब्लॉग के बारे में जो  कहा  है  वह  इस  प्रकार  है  ,
 ब्लॉग  एक बहुत ही अच्छी शुरुआत थी और इससे लोगों को फायदा भी हुआ और जो लोग अच्छा लिख कर भी कहीं नहीं प्रकाशित हो पा रहे थे उन्होंने ब्लॉग बना लिया और जो चाहा लिखने लगे। बड़े अफसोस की बात यह है कि कुछ लोगों ने इस सुविधा का दुरुपयोग शुरू कर दिया और ब्लॉग में वह सब चीजें भी लिखनी शुरू कर दी, जो उन्हें नहीं लिखनी चाहिए।  ब्लॉग में गंदी बातें लिखना आम बात है, मगर मेरा हाल ही में एक ऐसे ब्लॉग से वास्ता पड़ा जिसमें केवल इस्लाम और मुसलमानों को गालियां दी गईं हैं। हुआ यूँ की हाल ही में दिल्ली में आयोजित सलट वॉक के बाद मैं ने नवभारत टाइम्स के ब्लॉग सेक्शन में “इतनी बेशर्मी भी ठीक नहीं” शीर्षक से एक लेख लिखा। इस लेख पर कई लोगों ने अपनी राय दी।
एक साहब ने अपनी राय में मुझे तो बुरा भला कहा ही हमारे रसूल (सल्ल) और इस्लाम को भी बुरा भला कहा। जब मैंने बीएन शर्मा नाम के इस व्यक्ति के ब्लॉग (http://bhandafodu.blogspot.
 को देखा तो यह देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई। इस ब्लॉगर का उद्देश्य केवल इस्लाम, मुसलमान और उसके रसूल (सल्ल) को गालियां देना है। इस ब्लॉग में अब तक जो भी पोस्ट डाली गयी है उसमें इस्लाम के खिलाफ ही लिखा गया है। पता नहीं इस ब्लॉगर ने अपना सही नाम लिखा है कि नहीं मगर ब्लॉग पर जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक़ इस ब्लॉगर का नाम बीएन शर्मा है और उसने अपने परिचय में लिखा है कि उसे अरबी और फ़ारसी समेत भारत की सभी भाषाएं आती है। एक मुसलमान के लिए इस्लाम और उसके रसूल के बारे में कुछ भी गलत विचार करना पाप है, इसलिए इस ब्लॉग में लिखी गई पूरी बातें यहाँ नहीं लिख सकता और मुझसे इतना कुछ लिखते हुये भी गुनाह का डर भी लग रहा है, लेकिन चूंकि पाठकों को ऐसे लोगों के बारे में बताना ज़रूरी है इसलिए मैं यहाँ इस ब्लॉग के कुछ पोस्ट का केवल शीर्षक लिख रहा हूँ, जिस से  इस बात बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि लेख के अंदर कितनी बेहूदा बातें लिखी गई होंगी। ब्लॉग के कुछ पोस्ट की हेडिंग निम्नलिखित है:
* इस्लाम के दुश्चरित्र
* आयशा मुहम्मद को झूठा मानती थी
* सहबियों की नजर मुहम्मद की पत्नी पर
* पत्नी से गुदामैथुन (Sodomy) हलाल है
* वेश्यावृति हलाल है
* माँ के साथ सम्भोग जायज है
* आयशा सहबियों को सेक्स सिखाती थी
* आयशा सेक्स गुरु थी
* आपको मालूम है कि जन्नत की हकीकत क्या है?
* इस्लाम और कुरआन : शराब का गुणगान
* कुरआन में दोगलापन : और अंतर्विरोध
* क्या अल्लाह भी मुहम्मद की तरह अनपढ़ है?
यहाँ तो सिर्फ कुछ पोस्ट की हेडिंग दी गयी है। इस ब्लॉग में सिर्फ और सिर्फ इस्लाम को ग़लत ढंग से पेश किया गया है। हद तो यह है की ब्लॉग के शुरू में ही दुनिया को धोखा देने के लिए यह भी लिख दिया गया है कि इस्लाम सम्बंधित सभी लेख कुरआन और हदीसों पर आधारित हैं। भारत में हर किसी को अपने धर्म के प्रचार प्रसार कि अनुमति है, मगर किसी के धर्म को गाली देने की अनुमति नहीं है। अब देखना यह है बीएन शर्मा नाम के इस ब्लॉगर के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने वाले संगठन और उनके कर्ता-धर्ता इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और इस पर उनकी प्रतिक्रिया किया होती है।
लेखक ए एन शिबली हिन्‍दुस्‍तान एक्‍सप्रेस के ब्‍यूरो चीफ हैं.
यह पढ़ने के बाद पहले   तो  इन  जिहादी पत्रकारों  ने मुझे कानूनी  कार्यवाही में फ़साने  का प्रयास किया ,लेकिन जब  मेरे किसी भी लेख में कोई  आपत्ति जनक बात नहीं  मिली  तो  एक  मुस्लिम  नेता " जैनुल अबिदीन  " ने ब्लॉगर यानि गूगल से मेरा ब्लॉग  रुकवा  दिया  ,यह 03 नवम्बर  2011 की  बात  है ,
2-ब्लॉग  बंद होने पर लोगों  के विचार 

हमने अपने ब्लॉग  के बारे में यह लिख रखा था ,
भंडाफोडू
bhandafodu.blogspot.com
अज्ञान के विरुद्ध एक अभियान है भंडाफोडू (आवश्यक सूचना :इस्लाम सम्बंधित सभी लेख कुरआन और हदीसों पर आधारित हैं .बी.एन शर्मा )
 चूँकि  उस समय ऐसे कई ब्लॉग थे जो नियमित रूप से हमारे  लेख अपने ब्लॉग में भी डालते  रहते   थेजैसे ही ब्लॉग  के बंद होने  की खबर फैली तो   मित्र  परेशान हो  गए   उनके कमेंट  दिए जा रहे  हैं
1.बड़े दुख के साथ कहना पड रहा है की उर्दू और अरबी के विद्वान श्री बी.एन शर्मा का एक सु प्रसिद्ध ब्लॉग जो इस्लाम की पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद लिख कर पाठको के सामने पेश कर रहा था उसे सेकुलर कीड़ो ने बंद करवा दिया है
स ब्लॉग मे इस्लाम के किताबों की हदीसे और तथ्य दिये गए थे
हिन्दी मे लिखने से दर्शको को यह पता चलने लगा था की
इस्लाम आखिर ऐसा क्या सिखाता है की पूरी दुनिया मे यही धर्म खून का प्यासा हो चला है
hindugoonj
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13 टिप्‍पणियां:
2.  Abhishek-3 नवंबर 2011 को 2:34 pm
 मैं कल से ये ब्लॉग ओपन करने की कोसिस कर रहा था किन्तु नहीं हुआ. क्या बी एन शर्मा जी का मेल आईडी किसी के पास है. क्या कोई और जगह है जहा मैं उनके लेख पढ़ सकता हूँ ??
  जवाब दें- सूबेदार3 नवंबर 2011 को 9:49 pm
 3-  गूगल ने अभिब्यक्ति पर रोक लगा कर लोकतंत्र का हनन किया है क्या यह कम अमेरिका या ब्रिटेन में हो सकता है ,हिन्दुओ के खिलाफ जो मुस्लिम ब्लागर कर रहे है गूगल औए सेकुलारिसो को दिखाई नहीं देता हमें लगता है की यह अलोकतांत्रिक कदम है,
 जवाब दें  Bharat Swabhiman Dal  -3 नवंबर 2011 को 11:26 pm
4.  इस्लाम के सच से निर्भयता पूर्वक परिचय कराने वाले ब्लॉग भंडा फोडू को गुगल द्वारा बन्द किया बहुत ही दुखद है । इस्लाम के महान विद्वान श्री बी. एन. शर्मा जी के महत्वपूर्ण शौध लेखों को पुनः खोजकर उनका मानवता के हित में संरक्षण किया जाना आवश्यक है ।
    जवाब दें Bharat Swabhiman Dal3 नवंबर 2011 को 11:27 pm
   hindugoonj4 नवंबर 2011 को 11:27 am
   5-  comment ki liye dhanyabad. aapke vichar se sehmat hu. aap buddhijivi log hai aap hi bataye ki iska alternet kya hai. ye prayas hum sabi lekhako ko darane ka hai. Sh. B.N. Sharma ne sach kehne ki kimat hi nahi chukai balki ye hinduon ki napunsakta ka bhi parinam hai.
    जवाब दें
    Vimlesh Trivedi4 नवंबर 2011 को 11:47 am
     http://hinduswarajyasena.blogspot.com/
    यहाँ उपरोक्त लिंक से बी एन शर्मा जी के लेख पड़े जा सकते है
    जवाब दें
    किलर झपाटा -4 नवंबर 2011 को 4:22 pm
    बहुत बुरा हुआ यह तो।
    जवाब दें
    hindugoonj  -  5 नवंबर 2011 को 12:23 pm
    Vimlesh Trivedi ji aapka bhaut bhaut dhanyabad.
    जवाब दें
   अनाम-6 नवंबर 2011 को 11:29 pm
7-  b.n.sharma ji ko ek naya blog banana chahiye. dopt ko anwar ka blog nahi dikhta,,,,,hindoo to hamesha hi aisa hai..
    जवाब दें
    Unknown-10 नवंबर 2011 को 7:44 am
3- भंडाफोडू   फिर से चालू  हुआ 
हमारे  विरोधियों  का इरादा तो हमें  किसी न किसी तरह क़ानूनी पंजे में फ़साने का था , लेकिन उनको  ऐसा कोई मुदा  नहीं मिला जिस के आधार पर कानूनी  कार्यवाही  की जा सकती  थी   इसलिए इन लोगों  ने गूगल में शिकायत  करके ब्लॉग  रुकवा दिया ,  लेकिन सिर्फ  40 दिन  में ही हमारे  मित्रों  ने फिर से वैसा ब्लॉग बना  दिया  ,  सबसे पहले यह सूचना 14 दिसंबर  2011 को   प्रकाशित हुई ,
" भंडाफोडू वापस आ चूका है !
  ,जब हमारा ब्लॉग रोका गया था तब भी   विश्वास था की विरोधी हमारा कुछ  भी बिगाड़ पाएंगे  क्योंकि  हम    जो भी लिखते वह  पूरी तरह प्रामाणिक  होती  है   , इसी कारन   40 दिन  के अंदर ब्लॉग   फिर चालू  हो  गया  हां खबर हमें मित्रों   से मिली  थी
        http//bhaandafodu.blogspot.com
    जवाब दें
    अनाम-20 दिसंबर 2011 को 2:06 pm
    shrma ji ka naya blog chhalu ho gaya hai gisaka address hai bhaandafodu.blogspot.com
    जवाब दें
    अनाम-14 दिसंबर 2016 को 1:51 pm
     Unknown16 जून 2020 को 7:49 pm
    आप पूरी दुनियां के लिए एक बहुत ही कल्याणकारी कार्य कर रहे हैं, जिसके परिणाम बहुत ही हितकर होंगे। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप को आपके उद्देश्य में पूर्ण सफलता दें।अनुरोध है कि अपने तमाम लेखों को एक पुस्तक का रूप प्रदान करें। जय हिन्द , वन्दे मातरम्।
    जवाब दें
हमारे पाठक और हितैषी  मित्र   हमें कितना  चाहते हैं यह उनके कमेंट से पता चलता  हैं  , हम सभी पुराने और नए   मित्रों   का हृदय  से आभार प्रकट  करते हुए निवेदन करते हैं  कि इस अभियान में हमारा  साथ    दें ,  हमारे  लेखों को सेव  करके रखें और  लोगों के साथ शेयर करें    उल्लेखनीय बात तो यह है की हम 2008 से अपने शोध पूर्ण   प्रमाणिक लेखों  के  माध्यम से एक तरफ जो जिहादी विचारो और उनको योजनाओं  का मुकाबला  कर  रहे थे और हिन्दू युवा लोगों में इसके बारे में रूचि  पैदा  करके सचेत  कर रहे थे , इस कार्य में हमें  ऐसे कई लोगों  से तकनीकी   और आर्थिक मदद भी मिली  . लेकिन  किसी हिन्दू संगठन  या संस्था  ने  न कोई सहायता  की  और  न कोई  आश्वासन  ही  दिया , यह काम  अकेले नहीं  हो  सकता  है   ,अब   इतनी  आयु   होने  पर वैसी   स्फूर्ति  नहीं   रही   यही  अनुरोध  है  कि अमूल्य  जानकारी  को अधिक  से अधिक लोगों   पहुंचाया  करें
 यह भविष्य  में काम आएंगे  जब हम नहीं  रहेंगे 

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